सर्दियों में, भू-मध्य सागर में चक्रवातों के कारण, राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग में वर्षा होती है, जिसे ________________ कहा जाता है ।

[EO RO (Shift I) 14.05.2023]

  • वृष 

  • रब्शा 

  • माघा

  • मावट 

🔹 व्याख्या:

👉 सर्दियों में भूमध्य सागर में बनने वाले चक्रवातों के कारण राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग में वर्षा होती है।
👉 इस प्रकार की शीतकालीन वर्षा को स्थानीय भाषा में "मावट" कहा जाता है।
👉 यह वर्षा मुख्यतः पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से होती है और रबी फसलों के लिए लाभकारी होती है।
👉 यह वर्षा दिसम्बर से फरवरी के मध्य होती है।

पश्चिम की तुलना में पूर्वी राजस्थान में जलवायु चरम सीमाएँ __________ हैं।

[EO RO (Shift I) 14.05.2023]

  • समान 

  • अप्रत्याशित 

  • उच्चतर

  • निम्नतर 

🔹 व्याख्या:

👉 पूर्वी राजस्थान में जलवायु अधिक संतुलित होती है क्योंकि यहाँ वर्षा अधिक और नमी भी अधिक होती है।
👉 इसके विपरीत पश्चिमी राजस्थान में अत्यधिक शुष्कता के कारण तापमान में चरम अंतर होता है।
👉 अतः पश्चिम की तुलना में पूर्वी राजस्थान में जलवायु चरम सीमाएँ निम्नतर होती हैं।
👉 यहाँ दैनिक और वार्षिक तापान्तर भी अपेक्षाकृत कम होता है।

औसत वार्षिक वर्षा के संदर्भ में निम्न में से कौन सा अवरोही क्रम में सुव्यवस्थित है ?

[Protection Officer 28.01.2023]

  • उदयपुर, बीकानेर, पाली, जैसलमेर

  • भरतपुर, जोधपुर, जयपुर, गंगानगर

  • भरतपुर, गंगानगर, जयपुर, जोधपुर

  • उदयपुर, पाली, बीकानेर, जैसलमेर 

 

🔹 व्याख्या:

👉 उदयपुर में वर्षा लगभग 60–80 से.मी.,
👉 पाली में लगभग 40–60 से.मी.,
👉 बीकानेर में लगभग 20–30 से.मी.,
👉 और जैसलमेर में मात्र 10–20 से.मी. वर्षा होती है।
👉 अतः औसत वार्षिक वर्षा के अनुसार अवरोही क्रम होगा — उदयपुर > पाली > बीकानेर > जैसलमेर।

राजस्थान के वन, पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा हाल ही में जारी की गई एक अधिसूचना के अनुसार राज्य में कितने वेट-लैण्ड हैं  -

[RAS Pre. 01.10.2023]

  • 44 

  • 38 

  • 30 

  • 50 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में कुल 44 अधिसूचित वेटलैंड (आर्द्रभूमि) हैं, जो राज्य के 19 जिलों में फैले हुए हैं。इनमें से 5 वेटलैंड्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण रामसर साइट्स (Ramsar Sites) का दर्जा प्राप्त है。राज्य के प्रमुख रामसर स्थलों के नाम इस प्रकार हैं:केवलादेव घाना राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर)सांभर झील (जयपुर/नागौर)मेनार बर्ड विलेज (उदयपुर)खीचन गाँव (फलोदी)सिलीसेढ़ झील (अलवर)इसके अतिरिक्त, झीलों की नगरी उदयपुर को रामसर कन्वेंशन द्वारा वैश्विक वेटलैंड सिटी (Wetland City) की मान्यता भी प्राप्त है

कोपेन के BShw जलवायु प्रदेश राजस्थान के किन क्षेत्रों में पाया जाता है ?  

[Research Scholar 04.08.2024]

  • अरावली के पश्चिम में 

  • दक्षिणी पर्वतीय क्षेत्र में 

  • अरावली के पूर्व में 

  • हाड़ौती पठार में

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के अनुसार BShw जलवायु का तात्पर्य है — उष्ण अर्द्ध-शुष्क (स्टेपी) जलवायु।
👉 यह जलवायु मुख्यतः अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में पाई जाती है।
👉 इस क्षेत्र में 20 से 40 से.मी. वर्षा होती है और तापमान मध्यम से उच्च रहता है।
👉 इसमें पाली, नागौर, सीकर, झुंझुनूं, जोधपुर का पूर्वी भाग जैसे जिले शामिल हैं।

राजस्थान में जनवरी में न्यूनतम तापमान निम्नलिखित में से किस जिले में अंकित किया जाता है ? 

[PTI Grade -II (RPSC) 30.04.2023]

  • पाली जिले में 

  • भीलवाड़ा जिले में 

  • जैसलमेर जिले में

  • गंगानगर जिले में

🔹 व्याख्या:

👉 जनवरी माह में राजस्थान का न्यूनतम तापमान गंगानगर जिले में दर्ज किया जाता है।
👉 इस समय तापमान 6° से. से भी कम हो जाता है और कभी-कभी शून्य से नीचे भी पहुँचता है।
👉 यह स्थिति उत्तर-पश्चिमी भागों जैसे चूरू, हनुमानगढ़, गंगानगर में अधिक देखी जाती है।
👉 यह क्षेत्र शीत लहर और हिमपात से प्रभावित हवाओं के कारण अत्यधिक ठंडा हो जाता है।

हाड़ौती प्रदेश राजस्थान के किस कृषि जलवायु प्रदेश में सम्मलित है ?  

[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]

  • आर्द्र दक्षिणी-पूर्वी प्रदेश 

  • बाढ़ प्रभावित पूर्वी मैदान

  • उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान 

  • आर्द्र दक्षिणी मैदान 

🔹 व्याख्या:

👉 हाड़ौती प्रदेश में मुख्यतः कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ जिले आते हैं।
👉 यह क्षेत्र राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है।
👉 कृषि जलवायु वर्गीकरण के अनुसार यह आर्द्र दक्षिणी-पूर्वी प्रदेश में सम्मिलित होता है।
👉 यहाँ 60 से 100 से.मी. से अधिक वर्षा होती है और मानसून अत्यधिक सक्रिय रहता है।

BWhw से अभिप्राय है -  

[सहायक कृषि अधिकारी 27.08.2022]

  • शुष्क शीतऋतु जलवायु 

  • अति आर्द्र जलवायु 

  • शुष्क उष्ण मरुस्थली जलवायु 

  • आर्द्र जलवायु 

🔹 व्याख्या:

👉 BWhw कोपेन के वर्गीकरण में शुष्क उष्ण मरुस्थली जलवायु को दर्शाता है।
👉 यह जलवायु जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू जैसे जिलों में पाई जाती है।
👉 इस क्षेत्र में अत्यल्प वर्षा, अत्यधिक तापमान और तेज़ हवाएँ चलती हैं।
👉 यह प्रदेश राजस्थान का सबसे अतिशुष्क और तापमान में भिन्नता वाला भाग है। 

राजस्थान के निम्नलिखित में से कौन से जिले 50 सेमी समवर्षा रेखा के पश्चिम में अवस्थित हैं ? नीचे दिये गये कूटों में से सही उत्तर चुनिये: 

 A. दौसा              B. चुरू 

 C. हनुमानगढ़      D. भीलवाड़ा 

सहायक आचार्य [22.09.2021]

  • B एवं D

  •  A, B एवं C

  • A,C एवं D

  •  B एवं C

🔹 व्याख्या:

👉 50 से.मी. समवर्षा रेखा राजस्थान को दो भागों में बाँटती है — इसके पश्चिम में कम वर्षा वाले जिले आते हैं।
👉 चूरू और हनुमानगढ़ जिले इस रेखा के पश्चिम में स्थित हैं, जहाँ औसत वर्षा 40 से.मी. से भी कम होती है।
👉 जबकि दौसा और भीलवाड़ा पूर्वी भाग में आते हैं, जहाँ 60 से 80 से.मी. तक वर्षा होती है।

कोपेन ने राजस्थान की जलवायु को कितने भागों में बाँटा है ?

[स्कूल व्याख्याता (कोच) 11.04.2015]

  • 4 

  • 3 

  • 5

  • 6 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन ने राजस्थान की जलवायु को चार भागों में विभाजित किया है।
👉 ये हैं —
(i) Aw – उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु,
(ii) BShw – अर्द्ध-शुष्क जलवायु,
(iii) BWhw – उष्ण शुष्क मरुस्थलीय जलवायु,
(iv) Cwg – मानसूनी वर्षा युक्त जलवायु।
👉 यह वर्गीकरण जलवायु की भिन्नता और वर्षा वितरण पर आधारित है।

पुरवाई से तात्पर्य है 

[सहायक कृषि अधिकारी 28.05.2022]

  • हवा उत्तर से पूर्व की ओर चल रही है 

  • हवा पश्चिम से पूर्व की ओर चल रही

  • हवा पूर्व से पश्चिम की ओर चल रही है

  • हवा दक्षिण से पूर्व की ओर चल रही है

🔹 व्याख्या:

👉 पुरवाई का तात्पर्य है — पूर्व से पश्चिम की ओर चलने वाली हवा।
👉 यह हवा मानसून काल में पूर्वी दिशा से चलती है और वर्षा लाने में सहायक होती है।
👉 राजस्थान में यह हवा विशेष रूप से दक्षिण-पूर्वी मानसूनी प्रवाह के दौरान सक्रिय रहती है।
👉 यह हवाएँ राज्य के पूर्वी भागों में वर्षा का प्रमुख कारण बनती हैं।

कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, राजस्थान में निम्नलिखित में से कौनसा जलवायु प्रकार नहीं पाया जाता है ? 

[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]

  • BShw 

  • Aw 

  • BWhw 

  • Cs 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के जलवायु वर्गीकरण अनुसार राजस्थान में पाए जाने वाले प्रमुख जलवायु प्रकार हैं —
Aw, BShw, BWhw और Cwg।

👉 Cs जलवायु प्रकार राजस्थान में नहीं पाया जाता क्योंकि यह जलवायु शुष्क और अर्द्ध-शुष्क नहीं होती।

निम्नलिखित में से जिलों का कौन सा समूह राजस्थान में उप-आर्द्र जलवायु का प्रतिनिधित्व करता है ? 

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 13.11.2021]

  • उदयपुर, राजसमन्द प्रतापगढ़ 

  •  धौलपुर, भरतपुर, सवाई माधोपुर 

  • कोटा, बारां, झालावाड़ 

  • जयपुर, अजमेर, अलवर

🔹 व्याख्या:

👉 उप-आर्द्र जलवायु प्रदेश में वर्षा लगभग 40 से 60 से.मी. होती है और तापमान 28° से 36° से. के मध्य रहता है।
👉 जयपुर, अजमेर और अलवर — ये सभी जिले इसी उप-आर्द्र जलवायु क्षेत्र का हिस्सा हैं।
👉 यह क्षेत्र अरावली के पूर्वी भाग में स्थित है और मानसून का प्रभाव मध्यम रूप में देखा जाता है।

कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार, निम्नलिखित में से किस जिले में 'Aw' प्रकार की जलवायु नहीं पायी जाती है ? 

[कृषि अधिकारी 29.08.2022]

  • चित्तौड़गढ़ 

  • झालावाड़ 

  • सिरोही 

  • बांसवाड़ा 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के अनुसार 'Aw' जलवायु का अर्थ है — उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु।
👉 यह जलवायु डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, दक्षिणी चित्तौड़गढ़ और झालावाड़ में पाई जाती है।
👉 सिरोही इस सूची में शामिल नहीं है, अतः यहाँ 'Aw' जलवायु नहीं पाई जाती।
👉 सिरोही जिले में अति-आर्द्र जलवायु पाई जाती है, लेकिन वह Aw वर्ग के अंतर्गत नहीं आता।

"मावट" वर्षा जिनसे होती है, वह है 

[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]

  • उष्णकटिबन्धीय चक्रवात 

  • लौटता मानसून 

  • दक्षिणी-पश्चिमी मानसून 

  • पश्चिमी विक्षोभ 

🔹 व्याख्या:

👉 "मावट" राजस्थान की शीतकालीन वर्षा है, जो दिसम्बर से फरवरी के बीच होती है।
👉 यह वर्षा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण होती है, जो पाकिस्तान की ओर से राज्य में प्रवेश करते हैं।
👉 मावट रबी फसलों विशेषकर गेहूँ के लिए अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।
👉 यह वर्षा राज्य के उत्तर-पश्चिमी भागों में अधिक होती है।

कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार निम्न में से कौन से सही सुमेलित हैं? 

(A) Cwg - भरतपुर 

(B) Bwhw - बाड़मेर 

(C) Bshw - गंगानगर 

(D) Aw - डूंगरपुर

[RAS Pre. 27.10.2021]

  • (A), (C) एवं (D)

  • (A) एवं (D) 

  • (B), (C) एवं (D) 

  • (B) एवं (C) 

🔹 व्याख्या:

👉 Cwg मानसूनी जलवायु है, जो अरावली के पूर्वी भाग में पाई जाती है — भरतपुर इससे संबंधित है।
👉 Bshw अर्द्ध-शुष्क जलवायु है, जो अरावली के पश्चिम में होती है — गंगानगर इससे संबंधित नहीं है।
👉 Aw उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु है — यह डूंगरपुर में पाई जाती है।
👉 अतः सही सुमेलित हैं — (A) एवं (D)।

राजस्थान के जलवायु प्रदेशों को उनसे सम्बन्धित जिलों से सुमेलित कीजिए : 

(जलवायु प्रदेश)         (जिले) 

(i) शुष्क          (a) अलवर 

(ii) अर्द्ध-शुष्क  (b) झालावाड़ 

(iii) उप-आर्द्र   (c) जैसलमेर 

(iv) आर्द्र         (d) चूरू 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

कूट : 

            (i)     (ii)     (iii)     (iv) 

  • (d)     (c)     (b)     (a) 

  • (a)     (b)     (d)     (c)

  • (c)     (d)     (a)     (b) 

  • (b)     (a)     (c)     (d) 

🔹 व्याख्या:

👉 (i) शुष्क जलवायु – जैसलमेर में पाई जाती है, जहाँ वर्षा 20 से.मी. से कम होती है।
👉 (ii) अर्द्ध-शुष्क जलवायु – चूरू जैसे जिलों में होती है, जहाँ 20–40 से.मी. वर्षा होती है।
👉 (iii) उप-आर्द्र जलवायु – अलवर में पाई जाती है, जहाँ 60–80 से.मी. वर्षा होती है।
👉 (iv) आर्द्र जलवायु – झालावाड़ में होती है, जहाँ वर्षा 80 से.मी. से अधिक होती है। 

राजस्थान में धूलभरी आँधियाँ (Dust Storms) चलने के लिए आवश्यक दशा कौन सी है ? 

[स्कूल व्याख्याता 09.01.2020]

  • संवहनीय क्रियाएँ 

  • शीत ऋतु में उच्च वायुदाब 

  • तिब्बत के पठार पर निम्न वायुदाब दशाएँ 

  • उच्च वार्षिक तापान्तर 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में धूलभरी आँधियाँ चलने का मुख्य कारण है — संवहनीय क्रियाएँ।
👉 यह क्रियाएँ तब उत्पन्न होती हैं जब धरातल अत्यधिक गर्म हो जाता है और गर्म हवा ऊपर उठती है।
👉 इससे दबाव का अंतर उत्पन्न होता है और तेज शुष्क हवाएँ धूल लेकर चलती हैं।
👉 यह दशा विशेष रूप से गर्मियों में मरुस्थलीय क्षेत्रों में अधिक पाई जाती है।

कोपेन के राजस्थान के जलवायु प्रदेशों के अनुसार, "Aw" जलवायु पाई जाती है 

[स्कूल व्याख्याता 15.11.2022]

  • नागौर जिले में 

  • भरतपुर जिले में 

  • जयपुर जिले में 

  • डूंगरपुर जिले में 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के वर्गीकरण अनुसार "Aw" जलवायु का अर्थ है — उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु।
👉 यह जलवायु डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, दक्षिणी चित्तौड़गढ़ और झालावाड़ जिलों में पाई जाती है।
👉 इस क्षेत्र में मानसून सक्रिय रहता है और वर्षा 100 से.मी. तक होती है।
👉 ये जिले राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी अति वर्षा युक्त क्षेत्र हैं।

कोपन के वर्गीकरण के अनुसार गंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर में किस प्रकार की जलवायु मिलती है ?

[वरिष्ठ अध्यापक 17.02.2019]

  • Bshw

  • Cwg

  • Aw     

  • Bwhw 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार BWhw जलवायु का अर्थ है — उष्ण शुष्क मरुस्थलीय जलवायु।
👉 यह जलवायु राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भागों में पाई जाती है।
👉 गंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर जैसे जिले इसी जलवायु क्षेत्र में आते हैं।
👉 यहाँ वर्षा अत्यल्प होती है और तापमान में अत्यधिक दैनिक एवं वार्षिक अंतर होता है।

'मावट जिससे होती है, वह है -

[RAS Pre. 31.10.2015]

  • उत्तरी-पूर्वी मानसून 

  • दक्षिणी-पूर्वी मानसून 

  • उत्तरी-पश्चिमी मानसून 

  • पश्चिमी विक्षोभ 

🔹 व्याख्या:

👉 'मावट' एक प्रकार की शीतकालीन वर्षा है, जो दिसम्बर से फरवरी के बीच होती है।
👉 यह वर्षा पश्चिमी दिशा से आने वाले चक्रवातों के कारण होती है, जिन्हें पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं।
👉 मावट की वर्षा विशेष रूप से गेहूँ जैसी शीतकालीन फसलों के लिए लाभकारी होती है।
👉 यह हवाएँ पाकिस्तान की ओर से प्रवेश करती हैं और राजस्थान के उत्तरी-पश्चिमी भागों को प्रभावित करती हैं।

राजस्थान में औसत वर्षा होती है

[सहायक कृषि अधिकारी 2011]

  • 89.5 सेमी. 

  • 45.3 सेमी. 

  • 57.51 सेमी. 

  • 117.6 सेमी. 

🔹 व्याख्या:

👉 भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में 2025 के मानसून सीजन (जून से सितंबर) में औसत वर्षा 715.9 मिमी (लगभग 71.5 सेमी) दर्ज की गई。राज्य की सामान्य औसत वार्षिक वर्षा लगभग 57.5 सेमी है, लेकिन 2025 में हुई भारी बारिश सामान्य से लगभग 64% से 71% अधिक रही。 यह पिछले 125 वर्षों (1901-2025) के इतिहास में दूसरी सबसे अधिक मानसूनी बारिश थी。

राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः 1 जुलाई से पूर्व आ जाता है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

  • बीकानेर 

  • हनुमानगढ़

  • गंगानगर 

  • पाली 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन सामान्यतः जून के अंत या जुलाई के प्रथम सप्ताह में होता है।
👉 मानसून का प्रभाव सबसे पहले दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी जिलों में देखा जाता है।
👉 पाली जिला राज्य के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित है, जहाँ मानसून अन्य क्षेत्रों की तुलना में प्रारंभ में पहुँचता है।
👉 अतः पाली में मानसून सामान्यतः 1 जुलाई से पूर्व आ जाता है।

निम्नलिखित में से कौन सी जलवायु राजस्थान में नहीं पायी जाती है? 

  • Cwg 

  • BSKw 

  • Aw 

  • BWhw 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन, थार्नथ्वेट और ट्रिवार्था वर्गीकरण के अनुसार राजस्थान में Aw, BShw, BWhw, Cwg जैसी जलवायु पाई जाती है।
👉 इनमें BSKw नामक कोई जलवायु प्रदेश राजस्थान में नहीं पायी जाती है।

कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार निम्न में से किस जिले में 'Aw' प्रकार की जलवायु नहीं पायी जाती है ? 

[स्कूल व्याख्याता 06.01.2020]

  • बांसवाड़ा 

  • बूँदी 

  • डूंगरपुर

  • झालावाड 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के अनुसार 'Aw' जलवायु उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु है, जो डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, दक्षिणी चित्तौड़गढ़ और झालावाड़ में पाई जाती है।
👉 जबकि बूँदी जिला इस सूची में शामिल नहीं है, अतः वहाँ 'Aw' प्रकार की जलवायु नहीं पाई जाती।
👉 बूँदी अधिकतर आर्द्र या उप-आर्द्र जलवायु क्षेत्र में आता है, न कि 'Aw' क्षेत्र में।

निम्न में से राजस्थान के किस भाग में सर्वाधिक वर्षा की परिवर्तिता पाई जाती है ?  

[वरिष्ठ अध्यापक (Spl Edu) 07.02.2018]

  • सुदूर पश्चिमी भाग  

  • उत्तरी भाग  

  • दक्षिणी भाग  

  • उत्तर-पूर्वी भाग  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का सुदूर पश्चिमी भाग — जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर — अत्यंत अतिशुष्क क्षेत्र है।
👉 यहाँ वर्षा की मात्रा अत्यल्प (10–30 से.मी.) होती है और वर्ष दर वर्ष भारी भिन्नता देखी जाती है।
👉 इसी कारण यहाँ वर्षा की परिवर्तिता सर्वाधिक पाई जाती है।

राजस्थान की सर्दियों की वर्षा मुख्यतः होती है- [*]

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)

  • उत्तरी-पूर्वी हवाओं से 

  • उत्तरी-पश्चिमी हवाओं से 

  • दक्षिणी-पश्चिमी हवाओं से 

  • संवहनी धाराओं से 

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है। 

कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार निम्नलिखित में से किन जिलों में BShw प्रकार की जलवायु पाई जाती है ? 

[Head Master 02.09.2018]

  • जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर 

  • बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, सीकर 

  • झालावाड़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, बारां 

  • भीलवाड़ा, नागौर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ 

🔹 व्याख्या:

👉 BShw कोपेन के अनुसार अर्द्ध-शुष्क (स्टेपी) जलवायु को दर्शाता है।
👉 यह जलवायु अरावली के पश्चिम में पाई जाती है, जहाँ 20 से 40 से.मी. तक वर्षा होती है।
👉 बाड़मेर, जोधपुर, नागौर और सीकर — ये सभी जिले BShw जलवायु के अंतर्गत आते हैं।

राजस्थान राज्य में न्यूनतम ग्रीष्मकालीन तापमान आलेखित किया जाने वाला भाग है 

[PTI GRADE -II & III (RPSC) 2013]

  • दक्षिण पूर्वी भाग 

  • दक्षिण पश्चिमी भाग 

  • उत्तर पूर्वी भाग 

  • दक्षिणी भाग 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में न्यूनतम ग्रीष्मकालीन तापमान सामान्यतः दक्षिण-पश्चिमी भाग में दर्ज किया जाता है।
👉 यह क्षेत्र सिरोही, आबू पर्वत, डूंगरपुर आदि ऊँचाई वाले भागों को सम्मिलित करता है।
👉 ऊँचाई अधिक होने के कारण यहाँ तापमान अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम होता है।
👉 यही कारण है कि यह क्षेत्र गर्मी में अपेक्षाकृत शीतल रहता है।

कृषि विभाग, राजस्थान सरकार के अनुसार, भीलवाड़ा, राजसमन्द तथा चित्तौड़गढ़ निम्नलिखित में से किस कृषि जलवायु प्रदेश के भाग हैं ?  

[अनुसंधान अधिकारी पुरा. 04.08.2024]

  • सिंचित उत्तर पश्चिमी मैदान 

  • आर्द्र दक्षिणी मैदानी प्रदेश

  • आर्द्र दक्षिण पूर्वी मैदान

  • उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान

🔹 व्याख्या:

👉 भीलवाड़ा, राजसमंद तथा चित्तौड़गढ़ का दक्षिणी भाग राजस्थान के उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान कृषि जलवायु प्रदेश में आता है।
👉 इस क्षेत्र में 60 से 80 से.मी. तक औसत वार्षिक वर्षा होती है।
👉 यहाँ की जलवायु कृषि के लिए सामान्यतः अनुकूल मानी जाती है।
👉 यह प्रदेश आर्द्रता और तापमान के संतुलन के कारण विशिष्ट कृषि क्षेत्र है।

निम्नलिखित में से कौन से कारक राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करते हैं ? 

(A) अक्षांशीय अवस्थिति 

(B) देशान्तरीय अवस्थिति 

(C) अरब सागर से दूरी    

(D) उच्चावच विशेषताएं 

[स्कूल व्याख्याता 11.10.2022]

  • A और D 

  • A, B और C 

  • B, C और D 

  • A, C और D 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान की जलवायु को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं —
👉 (A) अक्षांशीय अवस्थिति — राज्य उष्ण कटिबंध में स्थित है, जिससे तापमान अधिक रहता है।
👉 (C) अरब सागर से दूरी — समुद्र से दूर होने के कारण यहाँ महाद्वीपीय जलवायु पाई जाती है।
👉 (D) उच्चावच विशेषताएँ — अरावली पर्वतमाला एवं अन्य स्थलाकृतियाँ जलवायु को प्रभावित करती हैं।
👉 (B) देशान्तरीय अवस्थिति का कोई प्रभाव नहीं दर्शाया गया है।

तापमान एवं वर्षा के आधार पर राजस्थान को कितने प्रमुख जलवायु प्रदेशों में बाँटा जा सकता है ? 

[EO RO (Shift II) 14.05.2023]

  • दो 

  • चार 

  • पाँच 

  • तीन  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान को तापमान एवं वर्षा के आधार पर पाँच प्रमुख जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया गया है।
👉 ये हैं —
(i) शुष्क प्रदेश (मरुस्थलीय),
(ii) अर्द्ध-शुष्क (स्टेपी),
(iii) उप-आर्द्र,
(iv) आर्द्र,
(v) अति-आर्द्र जलवायु प्रदेश।
👉 यह वर्गीकरण जलवायु विविधता और वर्षा वितरण को दर्शाता है।

राजस्थान में लौटते मानसून की ऋतु है - 

[उपनिरीक्षक (SI) 07.10.2018]

  • जनवरी से फरवरी 

  • मार्च सेजून 

  • अक्टूबर से दिसम्बर 

  • जुलाई से अगस्त

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में लौटते मानसून की ऋतु का समय अक्टूबर से मध्य दिसम्बर तक होता है।
👉 इस दौरान स्थलीय तापमान घटता है और मानसूनी हवाएँ दक्षिण की ओर लौटने लगती हैं।
👉 इस समय कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा भी होती है, जो प्रत्यावर्ती मानसून वर्षा कहलाती है।
👉 इसके पश्चात राज्य में वास्तविक शीत ऋतु आरम्भ होती है।

राजस्थान के कौन से जिले 'आर्द्र दक्षिणी-पूर्वी मैदान' कृषि - जलवायु प्रदेश के अन्तर्गत आते हैं ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]

  • राजसमन्द, भीलवाड़ा तथा चितौड़गढ़ 

  • कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ तथा सवाई माधोपुर 

  • डूंगरपुर तथा बाँसवाड़ा 

  • डूंगरपुर, बाँसवाड़ा तथा प्रतापगढ़ 

🔹 व्याख्या:

👉 'आर्द्र दक्षिणी-पूर्वी मैदान' कृषि–जलवायु प्रदेश में वे जिले आते हैं जहाँ वर्षा 60 से 80 से.मी. या अधिक होती है।
👉 इसमें कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ तथा सवाई माधोपुर जैसे जिले शामिल हैं।
👉 यह क्षेत्र पूर्वी राजस्थान का हिस्सा है, जहाँ मानसून अधिक सक्रिय रहता है।
👉 इस प्रदेश की जलवायु आर्द्र और खेती के अनुकूल मानी जाती है।

निम्नलिखित में से राजस्थान के किस जिले में जून का औसत न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है ? 

[सहायक आचार्य परीक्षा 08.09.2024]

  • गंगानगर 

  • कोटा 

  • झालावाड़ 

  • सिरोही 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में जून माह में सिरोही जिले के आबू पर्वत क्षेत्र में औसत न्यूनतम तापमान दर्ज किया जाता है।
👉 यह क्षेत्र दक्षिणी अरावली में स्थित है और यहाँ की ऊँचाई के कारण तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।
👉 इसी कारण यह स्थान पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित हो गया है।
👉 यह क्षेत्र शेष राज्य की तुलना में ठंडा रहता है, विशेष रूप से गर्मियों में।

राजस्थान सरकार ने जलवायु परिवर्तन नीति की शुरुआत की 

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • 2023 

  • 2021 

  • 2018 

  • 2010

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान सरकार द्वारा 'राजस्थान जलवायु परिवर्तन नीति 2023' लागू की गई है。राज्य के पर्यावरणीय स्थायित्व और जलवायु अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए, इसे राजस्थान आर्थिक समीक्षा में शामिल किया गया था। यह नीति राज्य में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, सतत विकास सुनिश्चित करने और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है。

निम्नलिखित में से किस क्षेत्र की जलवायु बहुत आर्द्र है ?

[EO RO (Shift II) 14.05.2023]

  • बीकानेर

  • जैसलमेर 

  • सिरोही 

  • बाड़मेर 

🔹 व्याख्या:

👉 सिरोही जिला राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी ऊँचाई वाले क्षेत्र में स्थित है।
👉 यह अति-आर्द्र जलवायु प्रदेश में आता है, जहाँ 80 से.मी. से अधिक वर्षा, सामान्यतः 100 से.मी. तक होती है।
👉 यहाँ का क्षेत्र विशेषकर आबू पर्वत के कारण ठंडा और नम रहता है।
👉 अतः सिरोही की जलवायु को बहुत आर्द्र माना जाता है।

तापमान एवं वर्षा के आधार पर राजस्थान को कितनेप्रमुख जलवायु प्रदेशों में बाँटा जा सकता है ? [*]

[Asst. Town Planner 16.06.2023]

  • 4 

  • 3 

  • 2 

  • 1 

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है। 

राजस्थान में मई-जून महीनों में उत्पन्न होने वाली धूलभरी आँधियों के लिए उत्तरदायी है : 

(अ) कुछ स्थानों पर संवहनीय धाराओं की उत्पत्ति 

(ब) अरावली पहाड़ियाँ दक्षिण-पश्चिम हवाओं के समांतर है । 

(स) अति तीव्रगामी पूर्वी हवाओं की उत्पत्ति 

[RAS Pre. 05.08.2018]

  • केवल (अ) 

  • (अ) एवं (स) 

  • (अ), (ब) एवं (स) 

  • (अ) एवं (ब)

🔹 व्याख्या:

👉 मई–जून माह में राजस्थान में चलने वाली धूलभरी आँधियों के लिए मुख्य रूप से कुछ स्थानों पर संवहनीय धाराओं की उत्पत्ति उत्तरदायी होती है।
👉 इस समय धरातल अधिक गर्म होता है, जिससे गर्म हवा ऊपर उठती है और स्थान पर दबाव में अंतर से आँधियाँ चलती हैं।
👉 ये आँधियाँ विशेषकर मरुस्थलीय एवं अर्द्ध शुष्क क्षेत्रों में अधिक प्रभावी होती हैं।

कोपेन के जल्रवायु वर्गीकरण के अनुसार राजस्थान के जिलों के निम्नलिखित समूहों में से 'Aw ' प्रकार की जलवायु पायी  जाती है-

[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]

  • भीलवाडा, टॉक और जयपुर में  

  • सवाई माधोपुर, धोलपुर और झालावाड में  

  • इूंगरपुर, उदयपुर और राजसमन्द में  

  • इूंगरपुर, बांसवाडा और झालावाड में

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के अनुसार 'Aw' जलवायु का तात्पर्य है — उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु।
👉 यह जलवायु राजस्थान के डूंगरपुर, बाँसवाड़ा और झालावाड़ जिलों में पाई जाती है।
👉 इस क्षेत्र में मानसून सक्रिय रहता है और वर्षा की मात्रा 100 से.मी. तक होती है। 

राजस्थान में न्यूनतम ग्रीष्मकालीन तापमान वाला क्षेत्र है - 

[ACF परीक्षा 2011]

  • दक्षिणी-पूर्वी 

  • दक्षिणी-पश्चिमी 

  • उत्तरी-पश्चिमी 

  • उत्तरी-पूर्वी 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में न्यूनतम ग्रीष्मकालीन तापमान वाला क्षेत्र दक्षिणी-पश्चिमी भाग है।
👉 इस क्षेत्र में सिरोही और आबू पर्वत जैसे ऊँचाई वाले क्षेत्र आते हैं, जहाँ तापमान अपेक्षाकृत कम रहता है।
👉 यहाँ की ऊँचाई और हरियाली के कारण गर्मियों में भी शीतल वातावरण बना रहता है। 

राजस्थान के मरुस्थल्र में अति-उच्च दैनिक एवं वार्षिक तापान्तर हेतु उत्तरदायी सर्वप्रमुख कारण निम्नलिखित में से  कौनसा हैं ?  

[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]

  • वर्ष भर उच्च शुष्कता दशाएं  

  • इनमें से कोई नहीं  

  • मानसून ऋतु में उच्च आर्ट्रता  

  • शुष्क ऋतु में अतिन्‍यून आर्द्रता  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के मरुस्थल में अति-उच्च दैनिक एवं वार्षिक तापान्तर का प्रमुख कारण है — वर्ष भर उच्च शुष्कता दशाएँ।
👉 शुष्कता के कारण दिन में धरातल जल्दी गर्म होता है और रात में जल्दी ठंडा हो जाता है।
👉 यहाँ वायुमंडलीय नमी बहुत कम होती है, जिससे तापमान में अंतर अधिक होता है। 

जयपुर, अजमेर, दौसा और टोंक जिले किस कृषि - जलवायु प्रदेश में सम्मिलित हैं ?  

[अन्वेषण उत्खनन अधिकारी 19.06.2024]

  • III B - बाढ़ प्रभावित पूर्वी मैदान 

  • IV B - आर्द्र दक्षिणी मैदान 

  • III A - अर्द्ध - शुष्क पूर्वी मैदान 

  • IV A - उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान 

🔹 व्याख्या:

👉 जयपुर, अजमेर, दौसा और टोंक जिले राजस्थान के पूर्वी-मध्य भाग में स्थित हैं।
👉 ये जिले कृषि जलवायु वर्गीकरण के अनुसार III A – अर्द्ध-शुष्क पूर्वी मैदान प्रदेश में सम्मिलित हैं।
👉 इस क्षेत्र में 40 से 60 से.मी. वर्षा होती है और जलवायु अर्ध-शुष्क किन्तु कृषि के लिए अनुकूल मानी जाती है। 

झालावाड़ और बांसवाड़ा जिले किस जलवायु खण्ड में सम्मिलित हैं ?

[Head Master 11.10.2021] 

  • आर्द्र प्रदेश 

  • उप - आर्द्र प्रदेश 

  • अर्द्ध-शुष्क प्रदेश 

  • अति-आर्द्र प्रदेश 

🔹 व्याख्या:

👉 झालावाड़ और बांसवाड़ा जिले अति-आर्द्र जलवायु प्रदेश में सम्मिलित हैं।
👉 इस क्षेत्र में 80 से.मी. से अधिक, सामान्यतः 100 से.मी. तक वर्षा होती है।
👉 यहाँ मानसून सबसे अधिक सक्रिय रहता है और ग्रीष्म ऋतु में तापमान 40° से. तक पहुँचता है।
👉 यह प्रदेश राजस्थान का वर्षा की दृष्टि से सबसे समृद्ध क्षेत्र है।

राजस्थान में सर्दी की वर्षा कहलाती है 

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • काल बैसाखी 

  • आम्र वर्षा 

  • मावठ 

  • नॉर्वेस्टर 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में सर्दी की वर्षा को स्थानीय भाषा में 'मावठ' कहा जाता है।
👉 यह वर्षा दिसम्बर से फरवरी के बीच पश्चिमी विक्षोभ के कारण होती है।
👉 मावठ विशेष रूप से गेहूँ जैसी रबी फसलों के लिए लाभकारी होती है।
👉 यह वर्षा मुख्यतः उत्तर और पश्चिमी राजस्थान में देखी जाती है।

राजस्थान का कौन सा क्षेत्र अर्द्धशुष्क अथवा स्टेपी जलवायु प्रदेश के अन्तर्गत आता है ?

[उपनिरीक्षक (SI) 13.09.2021]

  • जालौर, पाली, जोधपुर, नागौर, सीकर, झुन्झुनू 

  • प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, कोटा, बूँदी, बारां

  • उदयपुर, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा 

  • गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चुरू 

🔹 व्याख्या:

👉 अर्द्धशुष्क अथवा स्टेपी जलवायु प्रदेश में अरावली के पश्चिम और मरुस्थलीय जलवायु क्षेत्र के मध्य का भाग आता है।
👉 इसमें जालौर, पाली, जोधपुर का पूर्वी भाग, नागौर, सीकर और झुन्झुनूं जैसे जिले शामिल हैं।
👉 इस क्षेत्र में 20 से 40 से.मी. तक वार्षिक वर्षा होती है और तापमान भी मध्यम से उच्च रहता है।
👉 यहाँ की जलवायु में शुष्कता और तापान्तर की विशेषता देखी जाती है।

Cwg राजस्थान के किस जलवायु प्रदेश का प्रतिनिधित्व करता है ?  

[पुरालेखपाल परीक्षा 03.08.2024]

  • उष्णकटिबन्धीय आर्द्र 

  • उपोष्णकटिबन्धीय शुष्क 

  • उप - आर्द्र 

  • उष्णकटिबन्धीय शुष्क 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के वर्गीकरण में Cwg जलवायु का अर्थ है — मानसूनी वर्षा युक्त उप-आर्द्र जलवायु।
👉 यह जलवायु राजस्थान के पूर्वी और मध्य भागों, विशेषकर अरावली के पूर्व में पाई जाती है।
👉 यह क्षेत्र उप-आर्द्र जलवायु प्रदेश का प्रतिनिधित्व करता है।

निम्नलिखित में से राजस्थान का कौन सा जिला अति-आर्द्र जलवायु क्षेत्र में स्थित है ? 

[कृषि अधिकारी 24.11.2020]

  • अजमेर 

  • राजसमंद 

  • बारां 

  • दौसा 

🔹 व्याख्या:

👉 अति-आर्द्र जलवायु क्षेत्र वे जिले होते हैं जहाँ वर्षा 80 से.मी. से अधिक, सामान्यतः 100 से.मी. तक होती है।
👉 बारां जिला इस जलवायु क्षेत्र में शामिल है, जहाँ मानसून अत्यधिक सक्रिय रहता है।
👉 यह क्षेत्र राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है और कृषि के लिए अनुकूल है।
👉 अतः बारां जिला अति-आर्द्र जलवायु क्षेत्र में आता है।

सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए - 

सूची-I (जलवायु प्रदेश)

सूची -II (संकेताक्षर-कोपेन)

(A) उप-आर्द्र

(i) Aw

(B) उष्ण कटिबन्धीय शुष्क

(ii) BShw

(C) स्टेपी

(iii) BWhw

(D) उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र

(iv) Cwg

 [संग्रहाध्यक्ष पुरातत्व विभाग 19.06.2024]

कूट - 

  • A-(iv), B-(ii), C-(iii), D-(i) 

  • A-(i), B-(ii), C- (iii), D-(iv) 

  • A-(i), B-(iii), C-(ii), D-(iv)

  • A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i) 

🔹 व्याख्या:

👉 सूची-I और सूची-II का सही मिलान इस प्रकार है —

(A) उप-आर्द्र ⟶ (iv) Cwg
(B) उष्ण कटिबन्धीय शुष्क ⟶ (iii) BWhw
(C) स्टेपी ⟶ (ii) BShw
(D) उष्ण कटिबन्धीय आर्द्र ⟶ (i) Aw

👉 यह मिलान कोपेन के जलवायु वर्गीकरण पर आधारित है, जो राजस्थान के विभिन्न भागों में लागू होता है।

निम्नलिखित में से किस कारण से राजस्थान के दक्षिणी भाग में ऋतु में 100 सेमी से अधिक वर्षा होती है ? [*]

[EO RO (Shift II) 14.05.2023]

  • अधिक ऊँचाई और सघन वानस्पतिक आवरण  

  • अरावली का विस्तार अरब सागर की मानसून की शाखा के समानान्तर है । 

  • अरावली पर कम ऊँचाई और कम वनस्पति । 

  • बंगाल की खाड़ी की मानसून की शाखा में अधिक नमी होती है । 

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है।  

राजस्थान में मानसून के आगमन की तिथि जिस ओर बढ़ती जाती है, वह है 

[SI (मोटर वाहन) 2013] 

  • उत्तर - पूर्व 

  • उत्तर - पश्चिम  

  • दक्षिण - पूर्व 

  • दक्षिण - पश्चिम 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन पहले दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में होता है।
👉 इसके बाद यह क्रमशः उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ता है।
👉 अर्थात् मानसून के आगमन की तिथि उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ती जाती है।
👉 यह प्रवृत्ति राज्य की भौगोलिक स्थिति और हवाओं की दिशा पर आधारित है।

राजस्थान में प्रदूषण किसके द्वारा नियंत्रित किया जाता है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 2011]

  • नगरनिगम द्वारा 

  • पंचायतों द्वारा 

  • राजस्थान प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड द्वारा 

  • नगरपालिका द्वारा 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्थापना 7 फरवरी 1975 को हुई थी。इसकी स्थापना जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 4 के अंतर्गत की गई थी。 बोर्ड का मुख्य उद्देश्य राज्य में जल और वायु प्रदूषण को रोकना और नियंत्रित करना है

निम्नलिखित में से किन जिलों के समूह को उनकी औसत वार्षिक वर्षा के अनुसार आरोही क्रम में व्यवस्थित किया गया है ? 

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • जोधपुर, उदयपुर, राजसमन्द 

  • जयपुर, चुरू, अजमेर 

  • बाड़मेर, बूँदी, सीकर 

  • जोधपुर, राजसमन्द, उदयपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 जोधपुर में औसत वार्षिक वर्षा 20 से 40 से.मी.,
👉 राजसमंद में 40 से 60 से.मी.,
👉 जबकि उदयपुर में 60 से 80 से.मी. वर्षा होती है।
👉 अतः औसत वार्षिक वर्षा के अनुसार आरोही क्रम होगा — जोधपुर < राजसमन्द < उदयपुर।

1000 मिलिबार की समदाब रेखा जुलाई माह में गुजरती है : 

[वरिष्ठ अध्यापक 21.02.2014]

  • जालोर, पाली, अजमेर एवं करौली से 

  • सिरोही, चितौड़गढ़, कोटा और बाँरा से

  • सिरोही, उदयपुर, प्रतापगढ़ और झालावाड़ से 

  • उदयपुर, चितौड़गढ़, कोटा एवं बाँरा से 

🔹 व्याख्या:

👉 1000 मिलिबार की समदाब रेखा जुलाई माह में राजस्थान के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी जिलों से होकर गुजरती है।
👉 इसमें सिरोही, उदयपुर, प्रतापगढ़ और झालावाड़ जिले सम्मिलित हैं।
👉 यह रेखा मानसून काल में बनती है जब वायुदाब कम हो जाता है और वर्षा अधिक होती है।

कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार निम्न में से कौन से सही सुमेलित हैं?

(A) Aw - झालावाड़ 

(B) Cwg - बांसवाड़ा 

(C) Bshw - अलवर

(D) Bwhw - बीकानेर 

[सहायक कृषि अधिकारी 28.05.2022]

  • (A) एवं (D) 

  • (B) एवं (C) 

  • (A), (C) एवं (D) 

  • (B), (C) एवं (D) 

🔹 व्याख्या:

👉 (A) Aw – झालावाड़ : सही, यह जिला उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु क्षेत्र में आता है।
👉 (B) Cwg – बांसवाड़ा : गलत, बांसवाड़ा Aw जलवायु क्षेत्र में है, न कि Cwg में।
👉 (C) BShw – अलवर : गलत, अलवर उप-आर्द्र या Cwg जलवायु क्षेत्र में है, BShw में नहीं।
👉 (D) BWhw – बीकानेर : सही, बीकानेर में उष्ण शुष्क मरुस्थलीय जलवायु पाई जाती है।

कोपेन के अनुसार राजस्थान में निम्नलिखित में से कौन सा जलवायु प्रकार नहीं पाया जाता है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

  • Aw     

  • BWkw 

  • Cwg     

  • BShw 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के अनुसार राजस्थान में मुख्यतः ये जलवायु प्रकार पाए जाते हैं — Aw, BShw, BWhw, Cwg।
👉 इनमें BWkw नामक कोई जलवायु प्रकार राजस्थान के लिए निर्दिष्ट नहीं है।
👉 आपके दिए गए 10 पृष्ठों में भी BWkw का कोई उल्लेख नहीं है।
👉 अतः BWkw जलवायु प्रकार राजस्थान में नहीं पाया जाता है।

सामान्यतः राजस्थान को कितने जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है?  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (SST)

  • चार

  • पाँच 

  • छ:

  • तीन 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान को सामान्य जलवायु विशेषताओं के आधार पर पाँच जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है।
👉 ये हैं —
(i) शुष्क (मरुस्थलीय),
(ii) अर्द्ध-शुष्क,
(iii) उप-आर्द्र,
(iv) आर्द्र,
(v) अति-आर्द्र जलवायु प्रदेश।
👉 यह वर्गीकरण वर्षा, तापमान और स्थलाकृति के अनुसार किया गया है।

मेवात एवं डाँग क्षेत्र निम्नलिखित में से कोपेन के किस जलवायु प्रदेश में सम्मिलित हैं ? 

  • BShw 

  • Cwg 

  • BWhw 

  • Aw 

🔹 व्याख्या:

👉 मेवात एवं डाँग क्षेत्र राजस्थान के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित हैं।
👉 कोपेन के वर्गीकरण अनुसार, यह क्षेत्र Cwg जलवायु प्रदेश में सम्मिलित है।
👉 Cwg का अर्थ है — मानसूनी वर्षा युक्त जलवायु, जो अरावली के पूर्वी क्षेत्र में पाई जाती है।
👉 यहाँ वर्षा 60 से 80 से.मी. या उससे अधिक होती है। 

निम्नलिखित में से कौन से जिलों का समूह प्राप्त मॉनसूनी वर्षा की मात्रा के अनुसार अवरोही क्रम में सही ढंग से व्यवस्थित है ?

[RAS Pre. 01.10.2023]

  • भीलवाड़ा, बारां, सीकर

  • धौलपुर, राजसमंद, जालौर

  • राजसमंद, जालौर, धौलपुर

  • पाली, जयपुर, भरतपुर

🔹 व्याख्या:

👉 वर्षा की मात्रा के अनुसार — धौलपुर में 60–80 से.मी., राजसमंद में 40–60 से.मी., जबकि जालौर में 20–40 से.मी. वर्षा होती है।
👉 अतः अवरोही क्रम होगा — धौलपुर > राजसमंद > जालौर।
👉 यह क्रम अति आर्द्र, उप-आर्द्र एवं अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों के क्रम से मेल खाता है।
👉 यह वर्गीकरण जिलेवार वर्षा वितरण पर आधारित है।

राजस्थान में वर्षा के लिए निम्नलिखित में से कौन उत्तरदायी नहीं है?  

[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]

  • पश्चिमी विक्षोभ  

  • मानसून की अरब सागर की शाखा  

  • लौटता हुआ मानसून 

  • मानसून की बंगाल की खाड़ी की शाखा

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में वर्षा के लिए प्रमुख कारक हैं — दक्षिण-पश्चिम मानसून (अरब सागर व बंगाल की खाड़ी शाखा) और पश्चिमी विक्षोभ।
👉 लौटता हुआ मानसून (Retreating Monsoon) केवल हल्की एवं सीमित वर्षा करता है।
👉 यह वर्षा मुख्य वर्षा स्रोत नहीं है, बल्कि मानसून के समाप्ति काल की विशेषता है। 

राजस्थान में शीत ऋतु में होने वाली भूमध्यसागरीय चक्रवातीय वर्षा कहलाती है 

[कृषि अधिकारी 24.11.2020]

  • खेजड़ी वर्षा 

  • उत्तर पूर्वी मानसून 

  • मावट 

  • आम्र वर्षा 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में शीत ऋतु में जो वर्षा होती है, वह भूमध्यसागरीय चक्रवातों (पश्चिमी विक्षोभ) के कारण होती है।
👉 इस प्रकार की वर्षा को स्थानीय रूप से 'मावट' कहा जाता है।
👉 यह वर्षा मुख्यतः दिसम्बर से फरवरी के मध्य होती है और रबी फसलों के लिए लाभकारी होती है।
👉 यह विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में देखी जाती है।

राजस्थान में उष्ण मरुस्थली जलवायु के लिए कोपेन ने किस कूट का प्रयोग किया ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]

  • Bshw 

  • Bwhw 

  • Aw 

  • Cwg 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में उष्ण मरुस्थलीय जलवायु के लिए कोपेन ने BWhw कूट का प्रयोग किया है।
👉 यह जलवायु मुख्यतः जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जैसे जिलों में पाई जाती है।
👉 इस क्षेत्र में वर्षा अत्यल्प होती है और तापमान अत्यधिक उच्च रहता है।
👉 यह प्रदेश शुष्कता, गर्म हवाओं और तापान्तर के लिए जाना जाता है।

राजस्थान में वार्षिक वर्षा के बढ़ती मात्रा की प्रवृत्ति जिस ओर है, वह 

[PTI Grade -III (RPSC) 2011]

  • उत्तर - पूर्व से दक्षिण-पश्चिम 

  • दक्षिण से उत्तर 

  • उत्तर-पश्चिम से दक्षिण - पूर्व 

  • उत्तर से दक्षिण 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में वार्षिक वर्षा की मात्रा में वृद्धि की प्रवृत्ति उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर होती है।
👉 उत्तर-पश्चिमी जिलों जैसे जैसलमेर, बाड़मेर में वर्षा 10–30 से.मी. तक होती है।
👉 जबकि दक्षिण-पूर्वी जिलों जैसे झालावाड़, बाँसवाड़ा, सिरोही में वर्षा 100 से.मी. तक होती है।
👉 यह प्रवृत्ति राज्य की भौगोलिक स्थिति और मानसूनी प्रभाव के कारण बनती है।

निम्नलिखित में से कौन सा एक जिला राजस्थान के उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान प्रकार के कृषि जलवायु प्रदेश में सम्मिलित नहीं है ? 

[स्कूल व्याख्याता 14.12.2020]

  • चित्तौड़गढ़ 

  • भीलवाड़ा 

  • राजसमन्द 

  • टोंक 

🔹 व्याख्या:

👉 उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान प्रकार के कृषि जलवायु प्रदेश में वे जिले आते हैं जहाँ वर्षा 60 से 80 से.मी. होती है।
👉 इसमें अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा, धौलपुर, सवाई माधोपुर, बूँदी, राजसमंद और चित्तौड़गढ़ का दक्षिणी भाग शामिल हैं।

👉 टोंक का वर्गीकरण उप-आर्द्र या आर्द्र के अन्य खंडों में आता है।

दक्षिण पश्चिम मानसून निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में पहले आता है ?

[सांख्यिकी अधिकारी 25.02.2024]

  • सवाई माधोपुर तथा करौली में 

  • नागौर तथा जोधपुर में 

  • पाली तथा चुरू में 

  • गंगानगर तथा हनुमानगढ़ में 

🔹 व्याख्या:

👉 दक्षिण-पश्चिम मानसून राजस्थान में सबसे पहले दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भागों में प्रवेश करता है।
👉 सवाई माधोपुर तथा करौली जिले राज्य के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में स्थित हैं।
👉 अतः मानसून इन क्षेत्रों में अन्य भागों की तुलना में पहले पहुँचता है।
👉 यह क्षेत्र अधिक वर्षा और मानसूनी सक्रियता के लिए जाना जाता है।

राजस्थान में न्यूनतम दैनिक तापान्तर कौन से महिनों में पाया जाता है? 

[स्कूल व्याख्याता 03.01.2020]

  • जनवरी एवं फरवरी

  • अक्टूबर एवं नवम्बर 

  • मई एवं जून 

  • जुलाई एवं अगस्त

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में न्यूनतम दैनिक तापान्तर आमतौर पर मानसून काल (जून से सितम्बर) में पाया जाता है।
👉 इस समय बादल आवरण और आर्द्रता अधिक होने से दिन और रात के तापमान में कम अंतर होता है।
👉 इसके विपरीत गर्मियों में रेत जल्दी गर्म और ठंडी होती है, जिससे तापान्तर अधिक होता है।
👉 मानसून के दौरान राज्य का वातावरण संतुलित रहता है।

राजस्थान की औसत वर्षा है 

[स्कूल व्याख्याता 20.10.2022]

  • 30-35 सेमी 

  • 63-67 सेमी 

  • 56-58 सेमी 

  • 48 – 52 सेमी 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 57.51 से.मी. होती है।
👉 यह औसत राज्य के सभी जिलों की वर्षा को सम्मिलित करके निकाला गया है।
👉 अनेक जिले जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर आदि में यह औसत से कम है।
👉 जबकि झालावाड़, सिरोही, डूंगरपुर जैसे जिलों में यह औसत से अधिक होती है।

राजस्थान के रेतीले शुष्क मैदान और अर्द्धशुष्क मैदान.........की समवर्षा रेखा द्वारा पृथक किए गए हैं। 

[सांख्यिकी अधिकारी 18.12.2021]

  • 25 से.मी.     

  • 10 से.मी. 

  • 20 से.मी. 

  • 30 से.मी. 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के रेतीले शुष्क मैदान और अर्द्धशुष्क मैदान को 25 से.मी. की समवर्षा रेखा द्वारा पृथक किया गया है।
👉 यह रेखा अत्यल्प और मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों की भौगोलिक सीमा को दर्शाती है।
👉 इससे पश्चिम में अतिशुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र और पूर्व में स्टेपी जलवायु क्षेत्र स्थित हैं।
👉 यह विभाजन वर्षा की मात्रा और प्रकार के आधार पर किया गया है।

राज्य के किस जिले में वर्षा के वितरण में सर्वाधिक वर्षा - परिसर देखने को मिलता है ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 28.08.2022]

  • कोटा 

  • राजसमन्द 

  • अलवर

  • सिरोही 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में वर्षा के वितरण में सर्वाधिक वर्षा–परिसर (Rainfall Range) कोटा जिले में देखा जाता है।
👉 कोटा अति-आर्द्र जलवायु क्षेत्र में स्थित है, जहाँ 90 से.मी. से अधिक वर्षा होती है।
👉 यह क्षेत्र राजस्थान के उन जिलों में है जहाँ मानसून का प्रभाव सबसे अधिक रहता है।
👉 यहाँ वर्षा की मात्रा में वर्ष दर वर्ष स्पष्ट भिन्नता देखी जाती है।

किस जलवायु प्रदेश में सवाना तुल्य वनस्पति पाई जाती है ? 

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 13.11.2021]

  • BWhw 

  • Cwg 

  • BShw 

  • Aw 

🔹 व्याख्या:

👉 Aw जलवायु प्रदेश में उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु पाई जाती है।
👉 राजस्थान में यह जलवायु डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, झालावाड़ और दक्षिणी चित्तौड़गढ़ में पाई जाती है।
👉 यहाँ वर्षा अधिक होती है, जिससे घास के मैदानों और विरल वृक्षों की उपस्थिति सामान्य है।

पश्चिमी राजस्थान में 'पश्चिमी रेतीला मैदान' की पूर्वी सीमा निम्न में से कौन सी समवर्षा रेखा बनाती है ? [*]

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • 80 सेमी 

  • 15 सेमी 

  • 25 सेमी 

  • 40 सेमी 

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है। 

कथन (S)     : राजस्थान में जनसंख्या का वितरण असमान है 

कारण (R)     : राज्य में जलवायु तथा उच्चावचीय कारकों में विविधता पायी जाती है। 

[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]

  • (S) तथा (R) दोनों सही हैं

  • (S) सही है, परन्तु (R) गलत है । 

  • (S) तथा (R) दोनों सहीं नहीं हैं । 

  • (S) सही नहीं है, परन्तु (R) सही है । 

🔹 व्याख्या:

👉 कथन (S) — "राजस्थान में जनसंख्या का वितरण असमान है" — सही है, क्योंकि राज्य के विभिन्न भागों में जनघनत्व में अत्यधिक अंतर पाया जाता है।
👉 कारण (R) — "राज्य में जलवायु तथा उच्चावचीय कारकों में विविधता पायी जाती है" — यह भी सही है, क्योंकि इन कारकों का प्रभाव आवास, जल स्रोत, कृषि आदि पर पड़ता है।

कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार निम्न में से किस जिले में Cwg प्रकार की जलवायु पायी जाती है ? 

[स्कूल व्याख्याता 04.08.2020]

  • बाँसवाड़ा 

  • सीकर 

  • हनुमानगढ़ 

  • भरतपुर

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के वर्गीकरण में Cwg जलवायु का अर्थ है — मानसूनी वर्षा युक्त जलवायु।
👉 यह जलवायु अरावली के पूर्वी भाग, विशेषकर पूर्वी और मध्य राजस्थान में पाई जाती है।
👉 भरतपुर जिला अरावली के पूर्व में स्थित है और Cwg जलवायु प्रदेश में आता है।
👉 अन्य विकल्प जैसे बाँसवाड़ा, सीकर, हनुमानगढ़ इस वर्ग में नहीं आते।

पश्चिमी विक्षोभ के कारण, राजस्थान में शीतकाल में होने वाली वर्षा कहलाती है-  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (ENG)

  • मावठ

  • रेवठ 

  • कावठ 

  • जीवठ 

🔹 व्याख्या:

👉 पश्चिमी विक्षोभ के कारण राजस्थान में शीतकाल में जो वर्षा होती है, उसे 'मावठ' कहा जाता है।
👉 यह वर्षा दिसम्बर से फरवरी के बीच होती है और गेहूँ जैसी रबी फसलों के लिए लाभदायक मानी जाती है।
👉 यह विशेषकर उत्तर और पश्चिमी राजस्थान में देखी जाती है।

राजस्थान में शीतकालीन वर्षा होती है -  

[Asst. Jailor 15.03.2016]

  • दक्षिणी-पूर्वी मानसून द्वारा  

  • उत्तरी-पूर्वी मानसून द्वारा  

  • पश्चिमी विक्षोभ द्वारा 

  • संवाहनिक वर्षा  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में शीतकालीन वर्षा का प्रमुख कारण पश्चिमी विक्षोभ होते हैं।
👉 ये विक्षोभ दिसम्बर से फरवरी के बीच पाकिस्तान की ओर से राज्य में प्रवेश करते हैं।
👉 इनसे होने वाली वर्षा को स्थानीय भाषा में 'मावट' कहा जाता है।
👉 यह वर्षा विशेषकर रबी की फसलों के लिए लाभकारी होती है।

वायु की गुणवत्ता सूचकांक को बताने वाला मोबाइल एप्लीकेशन है - 

[सहायक कृषि अधिकारी 28.08.2022]

  • मारूति 

  • राजवायु 

  • राजपवन 

  • प्राणवायु 

🔹 व्याख्या:

👉 राजवायु (RajVayu) राजस्थान सरकार द्वारा पर्यावरण से संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए लॉन्च किया गया एक आधिकारिक मोबाइल ऐप है。इस ऐप के माध्यम से आप निम्नलिखित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:वायु गुणवत्ता (Air Quality): जयपुर, जोधपुर और उदयपुर शहरों में हवा की गुणवत्ता और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) की वास्तविक समय (real-time) जानकारी。 2.प्रदूषक स्तर: हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों (जैसे- PM2.5, PM10, कार्बन मोनोऑक्साइड, और ओजोन) का सटीक ब्यौरा

राजस्थान का II-A कृषि जलवायु प्रदेश निम्नलिखित में से किसे दर्शाता है ?  

[Research Scholar 04.08.2024]

  • आर्द्र दक्षिणी मैदान 

  • शुष्क पश्चिमी मैदान 

  • अंतः प्रवाह शुष्क प्रदेश 

  • अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदान 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान को कृषि, मिट्टी की किस्मों, तापमान और वर्षा की भिन्नता के आधार पर 10 प्रमुख कृषि-जलवायु प्रदेशों (Agro-climatic zones) में विभाजित किया गया. II-A =अंतःस्थलीय प्रवाह शुष्क क्षेत्र -- नागौर, सीकर, झुंझुनू, चूरू. -- खरीफ की फसलें और पशुपालन आधारित कृषि।

निम्नलिखित में से राजस्थान का कौनसा जिला सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करता हैं ?  

[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]

  • नागौर 

  • गंगानगर

  • झालावाड  

  • चुरू  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में झालावाड़ जिला सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करता है।
👉 यह जिला अति-आर्द्र जलवायु क्षेत्र में आता है, जहाँ वर्षा सामान्यतः 100 से.मी. तक होती है।
👉 यहाँ मानसून सबसे अधिक सक्रिय रहता है, जिससे वर्षा की मात्रा भी अधिक होती है। 

निम्नलिखित में से कौन सा जिला न्यूनतम औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करता है ?

[Food Safety Officer 27.06.2023]

  • दौसा 

  • नागौर 

  • चित्तौड़गढ़ 

  • उदयपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में न्यूनतम औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करने वाले जिलों में नागौर भी शामिल है।
👉 यह जिला अर्द्ध-शुष्क और शुष्क जलवायु क्षेत्र के बीच स्थित है।
👉 यह क्षेत्र अक्सर अकाल और जल संकट से प्रभावित रहता है।

राजस्थान में सम्भाव्य वाष्पीकरण - वाष्पोत्सर्जन की वार्षिक दर सर्वाधिक किस जिले में है ?

[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]

  • गंगानगर 

  • डूंगरपुर 

  • कोटा 

  • जैसलमेर 

🔹 व्याख्या:

👉 जैसलमेर अतिशुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र है, जहाँ तापमान अधिक और आर्द्रता न्यून होती है।
👉 यह स्थिति उच्च वाष्पीकरण दर के लिए अनुकूल होती है।
👉 इस कारण यहाँ जल की नमी बनाए रखने की क्षमता अत्यंत कम होती है।

कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार, गंगानगर जिले में किस प्रकार की जलवायु पायी जाती है ? 

[कृषि अधिकारी 30.08.2022] 

  • Bwhw 

  • Cwg 

  • Bshw 

  • Aw 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार गंगानगर जिले में BWhw प्रकार की जलवायु पाई जाती है।
👉 इसका अर्थ है — उष्ण शुष्क मरुस्थलीय जलवायु, जो अत्यल्प वर्षा और अत्यधिक तापमान से युक्त होती है।
👉 यह जलवायु मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में देखी जाती है।
👉 इस क्षेत्र में तापान्तर अधिक और वातावरण अत्यधिक शुष्क होता है।

बरखान बालू का स्तूप प्रधानतः राजस्थान के कौनसे क्षेत्रों में पाये जाते हैं ?

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 12.11.2021]

  •  35 से 50 सेमी. समवर्षा रेखा के मध्य क्षेत्रों में

  •  50 सेमी. समवर्षा रेखा के पूर्वी क्षेत्रों में

  •  20 से 35 सेमी. समवर्षा रेखा के मध्य क्षेत्रों में

  • 20 सेमी. समवर्षा रेखा के पश्चिमी क्षेत्रों में

🔹 व्याख्या:

👉 बरखान बालू के स्तूप राजस्थान के उन क्षेत्रों में पाये जाते हैं जहाँ वर्षा 20 से 35 से.मी. के मध्य होती है।
👉 ये क्षेत्र मुख्यतः पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय भाग हैं, जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर आदि।
👉 यहाँ की अतिशुष्क जलवायु और तेज हवाएँ रेत के टीलों का निर्माण करती हैं।
👉 यह भाग 20 से 35 सेमी. समवर्षा रेखा के मध्य आता है।

कोपेन के अनुसार, झालावाड़ जिले में जलवायु प्रकार पाया जाता है -  

[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]

  • Cf 

  • Aw 

  • Cw 

  • Af 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार झालावाड़ जिले में Aw प्रकार की जलवायु पाई जाती है।
👉 Aw जलवायु का अर्थ है — उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु, जिसमें मानसून सक्रिय रहता है।
👉 इस क्षेत्र में वर्षा 100 से.मी. तक होती है और जलवायु अति-आर्द्र मानी जाती है।
👉 झालावाड़ राज्य के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है।

थॉर्नथवेट के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार राजस्थान के निम्नलिखित जिलों के कौनसे समूह में 'CA' w' प्रकार की जलवायु मिलती है ?  

[अन्वेषण उत्खनन अधिकारी 19.06.2024]

  • चित्तौड़गढ़, अजमेर, बूंदी 

  • कोटा, झालावाड़, बारां 

  • बूंदी, भीलवाड़ा, टोंक 

  • सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 थॉर्नथवेट के वर्गीकरण में CA'w जलवायु का अर्थ है — ग्रीष्म में वर्षा तथा शीत में शुष्कता वाली जलवायु।
👉 यह जलवायु राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी जिलों में पाई जाती है।
👉 कोटा, झालावाड़ और बारां जिले इसी CA'w जलवायु प्रकार के अंतर्गत आते हैं।
👉 इस क्षेत्र में मानसून सक्रिय रहता है और रबी मौसम शुष्क होता है।

राजस्थान के कौन से जिलों में अधिकतम वर्षा दिनों की संख्या पायी जाती है ? 

सहायक आचार्य [30.05.2019]

  • टोंक, सवाई माधोपुर एवं करौली 

  • जयपुर, दौसा एवं भरतपुर 

  • सिरोही, उदयपुर एवं राजसमन्द 

  • झालावाड़, कोटा एवं बारां 

🔹 व्याख्या:

👉 झालावाड़, कोटा एवं बारां जिले अति-आर्द्र जलवायु प्रदेश में आते हैं।
👉 यहाँ वार्षिक वर्षा 90 से.मी. से अधिक होती है और मानसून सर्वाधिक सक्रिय रहता है।
👉 इसी कारण इन जिलों में वर्षा वाले दिनों की संख्या अन्य जिलों की तुलना में अधिक होती है।
👉 ये क्षेत्र राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित हैं।

राजस्थान के जिस भाग में कोपन का Aw जलवायु प्रदेश मिलता है, वह है 

[SI (मोटर वाहन) 2013] 

  • उत्तरी 

  • पूर्वी 

  • पश्चिमी 

  • दक्षिणी 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के अनुसार Aw जलवायु का अर्थ है — उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु।
👉 यह जलवायु राजस्थान के दक्षिणी भाग में पाई जाती है।
👉 इसमें डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, झालावाड़ और दक्षिणी चित्तौड़गढ़ जैसे जिले आते हैं।
👉 इस क्षेत्र में वर्षा अधिक होती है और मानसून सर्वाधिक सक्रिय रहता है।

राजस्थान में शीतकालीन वर्षा का कारण है

सहायक आचार्य [24.04.2016]

  • उ.पूर्वी मानसून 

  • स्थानीय हवायें 

  • द.पूर्वी मानसून 

  • पश्चिमी विक्षोभ 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में शीतकालीन वर्षा का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ होते हैं।
👉 ये हवाएँ दिसम्बर से फरवरी के बीच पाकिस्तान की ओर से राज्य में प्रवेश करती हैं।
👉 इससे होने वाली हल्की वर्षा को 'मावट' कहा जाता है, जो गेहूँ जैसी रबी फसलों के लिए लाभकारी होती है।
👉 यह वर्षा विशेषकर उत्तर-पश्चिमी जिलों में अधिक देखी जाती है। 

निम्नलिखित में से किस कृषि - जलवायु प्रदेश में भरतपुर, अलवर, धौलपुर, सवाई माधोपुर तथा करौली आते हैं ?  

[संग्रहाध्यक्ष पुरातत्व विभाग 19.06.2024]

  • IV-A उप-आर्द्र दक्षिणी मैदान 

  • III-A अर्द्ध शुष्क पूर्वी मैदान

  • III-B बाढ़ प्रभावित पूर्वी मैदान 

  • IV-B आर्द्र दक्षिणी मैदान 

🔹 व्याख्या:

👉 भरतपुर, अलवर, धौलपुर, सवाई माधोपुर तथा करौली जिले राजस्थान के पूर्वी भाग में स्थित हैं।
👉 ये जिले III-B – बाढ़ प्रभावित पूर्वी मैदान कृषि–जलवायु प्रदेश में सम्मिलित हैं।
👉 इस क्षेत्र में 60 से 80 से.मी. तक वर्षा होती है और मानसून का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
👉 यहाँ की जलवायु आर्द्र मानी जाती है तथा अचानक अतिवृष्टि और बाढ़ की संभावनाएँ बनी रहती हैं।

राजस्थान में समवर्षा रेखाओं का मान किस दिशा की ओर कम होता जाता है ?

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 11.11.2021]

  • दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर 

  • पूर्व से पश्चिम की ओर

  • दक्षिण से उत्तर की ओर 

  • दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पश्चिम की ओर

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में समवर्षा रेखाओं का मान दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर क्रमशः घटता जाता है।
👉 दक्षिण-पूर्वी जिलों जैसे झालावाड़, बाँसवाड़ा, सिरोही में वर्षा 100 से.मी. तक होती है।
👉 जबकि उत्तर-पश्चिमी जिलों जैसे जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर में यह घटकर 10–30 से.मी. तक रह जाती है।
👉 यह प्रवृत्ति राज्य की भौगोलिक स्थिति और मानसूनी हवाओं की दिशा पर निर्भर करती है।

राजस्थान के उष्ण कटिबंधीय शुष्क जलवायु प्रदेश हेतु कोपेन ने कौनसे जलवायु प्रतीकों का समूह दिया?  

[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]

  • Bwhw  

  • Bshs  

  • Bshw  

  • Bwhs  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के उष्ण कटिबंधीय शुष्क जलवायु प्रदेश के लिए कोपेन ने BWhw प्रतीक का प्रयोग किया है।
👉 इसका तात्पर्य है — उष्ण (Hot), शुष्क (Dry), मरुस्थली (Desert) जलवायु।
👉 यह जलवायु मुख्यतः जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जैसे जिलों में पाई जाती है।
👉 यहाँ वर्षा अत्यल्प होती है और तापमान में अत्यधिक दैनिक व वार्षिक अंतर होता है। 

राजस्थान में किस ऋतु में सर्वाधिक धूल भरी आंधियाँ चलती है?

[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]

  • शीत ऋतु  

  • वर्षा ऋतु  

  • ग्रीष्म ऋतु  

  • बसंत ऋतु  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में धूल भरी आंधियाँ सर्वाधिक ग्रीष्म ऋतु (मार्च से मध्य जून) में चलती हैं।
👉 इस समय धरातल अत्यधिक गर्म होने से संवहनीय क्रियाएँ उत्पन्न होती हैं।
👉 विशेषतः पश्चिमी मरुस्थलीय भागों में इन आंधियों की तीव्रता अधिक होती है।
👉 हवा में नमी की कमी और तेज गति से चलने वाली हवाएँ इन्हें उत्पन्न करती हैं।

निम्नलिखित में से राजस्थान के किन जिलों में उच्च वायु तीव्रता से न्यूनतम नुकसान की सम्भावनाएँ हैं ? 

[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]

  • उदयपुर, राजसमन्द 

  • अजमेर, पाली 

  • भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ 

  • डूंगरपुर, बांसवाड़ा 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिले दक्षिणी आर्द्र और ऊँचाई वाले भागों में स्थित हैं।
👉 यहाँ की स्थलाकृति और वनस्पति के कारण वायु की तीव्रता कम महसूस होती है।
👉 इस क्षेत्र में तेज हवाओं से होने वाला नुकसान न्यूनतम होता है।
👉 यह भाग मानसून में अधिक वर्षा प्राप्त करता है और जलवायु संतुलित रहती है। 

निम्नलिखित में से राजस्थान के जिलों का कौन सा समूह दक्षिण पश्चिम मानसून से औसत वर्षा की मात्रा के अनुसार आरोही क्रम में सही ढंग से व्यवस्थित हैं ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]

  • बाँसवाड़ा, बून्दी, जयपुर, हनुमानगढ़ 

  • बून्दी, हनुमानगढ़, जयपुर, बाँसवाड़ा

  • जयपुर, हनुमानगढ़, बून्दी, बाँसवाड़ा

  • हनुमानगढ़, जयपुर, बून्दी, बाँसवाड़ा 

🔹 व्याख्या:

👉 हनुमानगढ़ में वर्षा लगभग 20–30 से.मी.,
👉 जयपुर में लगभग 60 से.मी.,
👉 बून्दी में लगभग 60–80 से.मी.,
👉 और बाँसवाड़ा में 90 से.मी. से अधिक वर्षा होती है।
👉 अतः औसत वर्षा के अनुसार आरोही क्रम होगा — हनुमानगढ़ < जयपुर < बून्दी < बाँसवाड़ा। 

राजस्थान के अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदान (III-A), कृषि जलवायु प्रदेश के संदर्भ में कौनसा कथन सही नहीं है ? 

[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]

  • यहाँ सिंचित और असिंचित दोनों प्रकार की कृषि की जाती है। 

  • इसका विस्तार जयपुर, अजमेर, दौसा व टोंक जिलों में है। 

  • यहाँ 50 से.मी. से 70 से.मी. औसत वर्षा होती है। 

  • मक्का, मूंगफली तथा ज्वार रबी की प्रमुख फसलें हैं! 

🔹 व्याख्या:

👉 अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदान (III-A) में मुख्य रबी फसलें गेहूँ, जौ, चना आदि हैं।
👉 मक्का, मूंगफली और ज्वार खरीफ की फसलें हैं, रबी की नहीं।
👉 अतः दिया गया कथन सही नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – मक्का, मूंगफली तथा ज्वार रबी की प्रमुख फसलें हैं 

थार्नवेट के अनुसार, DA'w जलवायु प्रदेश के अंतर्गत निम्न में से कौन से जिले आते हैं ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 27.08.2022]

  • जोधपुर, कोटा 

  • सिरोही, पाली, अजमेर 

  • बीकानेर, चूरू

  • गंगानगर, जयपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 थार्नवेट के वर्गीकरण में DA'w जलवायु का अर्थ है — ग्रीष्म में उच्च तापमान एवं कम वर्षा वाला अर्द्ध मरुस्थलीय एवं सीमान्त क्षेत्र।
👉 यह जलवायु राजस्थान के सीमान्त और अर्ध-शुष्क भागों में पाई जाती है।
👉 इस वर्ग में पाली, सिरोही, अजमेर जैसे जिले सम्मिलित हैं।

कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार निम्न में से किन जिलों में 'Aw' प्रकार की जलवायु पायी जाती है ? 

[कृषि अधिकारी 19.01.2021]

  • बाँसवाड़ा एवं झालावाड़ 

  • सीकर एवं नागौर 

  • हनुमानगढ़ एवं बीकानेर 

  • भरतपुर एवं अलवर 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के अनुसार 'Aw' जलवायु का तात्पर्य है — उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु।
👉 राजस्थान में यह जलवायु डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, दक्षिणी चित्तौड़गढ़ तथा झालावाड़ में पाई जाती है।
👉 अतः बाँसवाड़ा एवं झालावाड़ दोनों ही जिले 'Aw' जलवायु प्रकार में सम्मिलित हैं।
👉 इस क्षेत्र में वर्षा अधिक और मानसून सक्रिय रहता है।

राज्य का आर्द्र जिला कहलाता है- 

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (SST)

  • झालावाड़ 

  • बांसवाड़ा 

  • उदयपुर 

  • चितौड़गढ़

🔹 व्याख्या:

👉 झालावाड़ राजस्थान का एक प्रमुख आर्द्र जिला है, जहाँ वर्षा की मात्रा 80 से.मी. से अधिक, सामान्यतः 100 से.मी. तक होती है।
👉 यह जिला अति-आर्द्र जलवायु प्रदेश में आता है, जहाँ मानसून अत्यधिक सक्रिय रहता है।
👉 यहाँ का तापमान गर्मियों में 40° से. तक पहुँचता है और शीत ऋतु सामान्य रहती है।
👉 यह क्षेत्र वर्षा और कृषि की दृष्टि से राज्य में अग्रणी माना जाता है।

राजस्थान के कौन से भाग में स्टेपी जलवायु पायी जाती है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक Spl Edu 03.07.2019]

  • अरावली के पूर्व में

  • हाडौती एवं भोरात पठारों के बीच 

  • अरावली एवं पश्चिमी शुष्क पेटी के बीच 

  • दक्षिणी राजस्थान में 

🔹 व्याख्या:

👉 स्टेपी (अर्द्ध-शुष्क) जलवायु राजस्थान में अरावली पर्वत और पश्चिमी शुष्क मरुस्थलीय पेटी के बीच पाई जाती है।
👉 इस क्षेत्र में वर्षा 20 से 40 से.मी. तक होती है और तापमान भी मध्यम से उच्च रहता है।
👉 इसमें जालौर, पाली, नागौर, सीकर, झुंझुनूं आदि जिले सम्मिलित हैं।
👉 यह प्रदेश BShw जलवायु वर्ग में आता है। 

Bwhw जलवायु प्रदेश में कौनसे जिले आते हैं ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 27.08.2022]

  • जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर 

  • नागौर, पाली, जालौर 

  • कोटा, बूंदी, झालावाड़ 

  • जयपुर, दौसा, अलवर 

🔹 व्याख्या:

👉 थार्नवेट के वर्गीकरण में DA'w जलवायु का अर्थ है — ग्रीष्म में उच्च तापमान एवं कम वर्षा वाला अर्द्ध मरुस्थलीय एवं सीमान्त क्षेत्र।
👉 यह जलवायु राजस्थान के सीमान्त और अर्ध-शुष्क भागों में पाई जाती है।
👉 इस वर्ग में जालौर, पाली, नागौर, जोधपुर, सीकर, झुंझुनूं जैसे जिले सम्मिलित हैं।
👉 यह क्षेत्र स्टेपी प्रकार की जलवायु से प्रभावित है।

कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार बाड़मेर एवं झुंझुनूं जिले किस जलवायु प्रदेश में समाहित हैं ?  

[कृषि अधिकारी 19.01.2021]

  • Bwhw 

  • Cwg

  • Aw 

  • Bshw 

🔹 व्याख्या:

👉 कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार BShw जलवायु का अर्थ है — उष्ण अर्द्ध-शुष्क (स्टेपी) जलवायु।
👉 यह जलवायु अरावली के पश्चिम एवं मरुस्थलीय भागों के बीच पाई जाती है।
👉 बाड़मेर और झुंझुनूं दोनों ही जिले BShw जलवायु प्रदेश में सम्मिलित हैं।
👉 इस क्षेत्र में वर्षा 20 से 40 से.मी. के मध्य होती है और तापमान मध्यम से उच्च रहता है।