निम्नलिखित में से कौन से सही सुमेलित है ? 

(A) घग्घर का मैदान - गंगानगर तथा हनुमानगढ़ जिले 

(B) शेखावटी प्रदेश - आंतरिक अपवाह क्षेत्र - 

(C) उदयपुर बेसिन - गिरवा 

(D) भोराट का पठार - रघुनाथगढ़ शिखर 

नीचे दिए कूट से उत्तर चुनिए- 

[Head Master 02.09.2018]

  • A, B एवं D सही है 

  • B, C एवं D सही है 

  • A, C एवं D सही है 

  • A, B एवं C सही है 

🔹 व्याख्या:

👉 (A) घग्घर का मैदान – सही है; यह गंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में फैला समतल क्षेत्र है।
👉 (B) शेखावाटी प्रदेश – सही है; यह एक आंतरिक अपवाह क्षेत्र है जहाँ नदियाँ रेत में लुप्त हो जाती हैं।
👉 (C) उदयपुर बेसिन – गिरवा – सही है; गिरवा क्षेत्र उदयपुर के चारों ओर की पहाड़ियों से घिरा हुआ है।
👉 (D) भोराट का पठार – रघुनाथगढ़ शिखर – गलत है; भोराट का पठार मेवाड़ क्षेत्र में है, जबकि रघुनाथगढ़ शिखर सीकर (उत्तर अरावली) में है।

👉 अतः सही युग्म हैं: (A), (B), (C)

निम्न में से राजस्थान में कौन सा क्षेत्र बालुका स्तूप मुक्त है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • ओसियाँ - शेरगढ़ 

  • फलौदी - पोकरण 

  • शेरगढ़ - शिव 

  • बायतू - चोहटन 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के अधिकांश मरुस्थलीय क्षेत्र में विस्तृत बालुका स्तूप पाए जाते हैं, परंतु एक स्थान ऐसा है जहाँ इनका पूर्णतः अभाव है।
👉 यह क्षेत्र जैसलमेर जिले में स्थित है, जहाँ की सतह पूरी तरह से अवसादी शैलों से ढकी हुई है।
👉 यहाँ स्थित आंकल वुड फॉसिल पार्क प्राचीन वनस्पति और जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध है।
👉 फलौदी-पोकरण क्षेत्र में बालुका स्तूप उपस्थित हैं, अतः यह बालुका स्तूप मुक्त नहीं है।

दक्षिण - पूर्वी राजस्थान में स्थित भौगोलिक प्रदेश जाना जाता है 

[स्टेनोग्राफर (RPSC) 2011]

  • बनास बेसिन 

  • हाड़ौती का पठार 

  • बांगड़ प्रदेश 

  • माही बेसिन 

🔹 व्याख्या:

👉 दक्षिण-पूर्वी राजस्थान का प्रमुख भौगोलिक प्रदेश है — हाड़ौती का पठार।
👉 यह क्षेत्र मालवा पठार का विस्तार है और इसमें झालावाड़, कोटा, बारां और बूंदी जिले सम्मिलित हैं।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में अर्द्ध-चन्द्राकार पर्वत, नदी निर्मित मैदान, और घोड़े की नाल जैसी आकृति प्रमुख हैं।
👉 यह प्रदेश विन्ध्य एवं लावा मिश्रित शैलों से निर्मित है।

निम्नलिखित में से कौन सा अपने आंतरिक प्रवाह के लिए जाना जाता है ? 

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 11.11.2021]

  •  हाड़ौती क्षेत्र

  • विन्ध्या क्षेत्र

  • शेखावाटी क्षेत्र 

  • मध्य अरावली का गिरिपाद क्षेत्र 

🔹 व्याख्या:

👉 शेखावाटी क्षेत्र में कोई स्थायी नदी नहीं है, बल्कि यहाँ की छोटी धाराएँ कुछ दूरी तक बहकर रेत में विलीन हो जाती हैं।
👉 इन धाराओं में प्रमुख हैं — मेघा, रूपनगढ़ और कांतली, जो अरावली से निकलकर अंतःप्रवाहित हो जाती हैं।
👉 यह क्षेत्र झुन्झुनूं, सीकर और चूरू जिलों में फैला है और यहाँ मध्यम ऊँचाई के बालुका स्तूप भी पाए जाते हैं।
👉 अतः शेखावाटी क्षेत्र अपने आंतरिक प्रवाह तंत्र के लिए जाना जाता है।

डेगाना, बिलाड़ा, पाली तथा जालौर भाग हैं

[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]

  • लूनी बेसिन के

  • चम्बल बेसिन के

  • साबरमती बेसिन के 

  • माही बेसिन के 

🔹 व्याख्या:

👉 लूनी बेसिन राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी भाग में विस्तृत एक महत्वपूर्ण जलोढ़ मैदान है।
👉 यह बेसिन पाली, जालौर, नागौर, जोधपुर जैसे जिलों में फैला हुआ है।
👉 इसके अंतर्गत डेगाना, बिलाड़ा, पाली, और जालौर जैसे क्षेत्र आते हैं, जहाँ लूनी नदी एवं उसकी सहायक नदियाँ प्रवाहित होती हैं।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में रेतीला मैदान, एकाकी पहाड़ियाँ और लवणीय गर्त शामिल हैं।

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सही उत्तर का चयन नीचे दिए कूट से कीजिए. [*]

          सूची - I             सूची - II 

(A) शुष्क रेतीला मैदान (i) नाली 

(B) लूनी बेसिन          (ii) डेगाना 

(C) शेखावटी प्रदेश     (iii) पचपदरां

(D) घग्गर का मैदान    (iv) बाप 

[सहायक कृषि अधिकारी 28.05.2022]

  • (A) – (iii), (B) – (iv), (C) – (ii), (D) - (i)

  • (A) – (iv), (B) – (iii), (C) – (ii), (D) – (i)

  • (A) – (iii), (B) – (i), (C) – (iv), (D) - (ii) 

  • (A) – (ii), (B) -(i), (C) – (iii), (D) – (iv)

🔹 व्याख्या:

👉 (A) शुष्क रेतीला मैदान – (iv) बाप : यह क्षेत्र बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर आदि जिलों में फैला है, जहाँ बाप जैसे स्थानों पर खारे पानी के गर्त पाए जाते हैं।
👉 (B) लूनी बेसिन – (iii) पचपदरां : लूनी बेसिन में पचपदरां, येसनवरला, कपराना जैसे स्थान लवणीय गर्तों के लिए प्रसिद्ध हैं।
👉 (C) शेखावाटी प्रदेश – (ii) डेगाना : शेखावाटी क्षेत्र में डीडवाना, डेगाना, सुजानगढ़ जैसे लवणीय रन स्थित हैं।
👉 (D) घग्गर का मैदान – (i) नाली : इस मैदान में घग्गर नदी की प्रवाहहीन धारा को स्थानीय भाषा में “नाली” कहा जाता है।

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है। 

"छप्पन का मैदान" निम्नलिखित बेसिनों में से किस में स्थित हैं ?

[सांख्यिकी अधिकारी 25.02.2024]

  • बनास बेसिन 

  • चम्बल बेसिन 

  • माही बेसिन 

  • लूनी बेसिन 

🔹 व्याख्या:

👉 छप्पन का मैदान राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में स्थित एक असमतल क्षेत्र है।
👉 इसका विस्तार उदयपुर के दक्षिण-पूर्व से बाँसवाड़ा, डूंगरपुर और चित्तौड़गढ़ के दक्षिणी भाग तक है।
👉 यह क्षेत्र माही नदी एवं उसकी सहायक नदियों के प्रवाह क्षेत्र में आता है।
👉 अतः यह मैदान माही बेसिन का ही हिस्सा है।

निम्नलिखित में से कौन सा एक अरावली पर्वतश्रेणी के लिए सही नहीं है ? 

[हॉस्पिटल केयर टेकर 10.02.2023]

  • अरावली पर्वतश्रेणी की उत्पत्ति मेसोजोइक कल्प के उत्तरार्ध में हुई हैं । 

  • अरावली पर्वतश्रेणी भारत में महान जल विभाजक का भाग बनाती हैं

  • आज अरावली पर्वतश्रेणी केवल अवशिष्ट पर्वत हैं। 

  • अरावली पर्वतश्रेणी का दक्षिण-पश्चिम भाग उत्तर-पूर्व भाग की तुलना मेंचौड़ा है | 

अरावली पर्वतमाला दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो लगभग 250 से 300 करोड़ साल पुरानी है। यह गुजरात से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा होते हुए दिल्ली तक लगभग 670-750 किमी तक फैली है। यह थार मरुस्थल को आगे बढ़ने से रोकने वाली एक प्राकृतिक दीवार है।भूवैज्ञानिक उत्पत्ति (Geological Origin)आयु: यह हिमालय जैसी युवा पर्वतमालाओं से भी अरबों साल पुरानी है।निर्माण: इसका निर्माण प्री-कैम्ब्रियन युग में टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने (अरावली-दिल्ली ओरोजेनी) से हुआ था।अवशिष्ट पर्वत: करोड़ों वर्षों के प्राकृतिक कटाव और अपक्षय के कारण, अब यह अपने मूल रूप से घिसकर एक 'अवशिष्ट पर्वत' (Residual Mountain) के रूप में शेष रह गई है।सबसे ऊँची चोटी: राजस्थान के माउंट आबू में स्थित गुरु शिखर इसकी सर्वोच्च चोटी है, जिसकी ऊँचाई 1,722 मीटर है।

राजस्थान में मरुस्थलीकरण का कौन सा कारण नहीं है ? 

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • अतिचारण 

  • नहरी सिंचाई 

  • बालू एवं बालूका - स्तूपों का एकत्र होना 

  • भूमि उपयोग परिवर्तन 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मरुस्थलीकरण के प्रमुख कारण हैं — अत्यल्प वर्षा, वायु अपरदन, अनियंत्रित पशुचारण, और वनों की कमी।
👉 वहीं नहरी सिंचाई से कई क्षेत्रों जैसे गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर में मरुस्थलीय परिदृश्य में सकारात्मक परिवर्तन आया है।
👉 इन क्षेत्रों में सिंचाई के विस्तार से उपजाऊ भूमि का विकास हुआ है, जिससे मरुस्थलीकरण में कमी आई है।
👉 अतः नहरी सिंचाई, मरुस्थलीकरण का कारण नहीं है।

राजस्थान में अंतः स्थलीय प्रवाह के मैदान को ______________ के रूप में भी जाना जाता है |

[EO RO (Shift II) 14.05.2023]

  • डेक्कन लावा प्रदेश

  • पूर्वी मैदानी प्रदेश 

  • अरावली प्रदेश

  • शेखावाटी प्रदेश 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में अंतः स्थलीय प्रवाह के मैदान का तात्पर्य उन क्षेत्रों से है जहाँ नदियाँ या धाराएँ कुछ दूरी बहकर रेत में लुप्त हो जाती हैं।
👉 ऐसा क्षेत्र मुख्यतः झुंझुनूं, सीकर और चूरू जिलों में फैला हुआ है।
👉 इस भौगोलिक प्रदेश को शेखावाटी प्रदेश के नाम से जाना जाता है।
👉 यहाँ की नदियाँ जैसे मेघा, रूपनगढ़, कातली अल्पदूरी तक प्रवाहित होती हैं।

महान सीमा भ्रंश राजस्थान के किस जिले से नहीं गुजरता है ? 

[कृषि अधिकारी 29.08.2022]

  • भीलवाड़ा 

  • सवाई माधोपुर 

  • कोटा 

  • चित्तौड़गढ़ 

🔹 व्याख्या:

👉 महान सीमा भ्रंश (The Great Boundary Fault) राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग से होकर गुजरता है।
👉 यह भ्रंश चित्तौड़गढ़ के बेगूँ से शुरू होकर उत्तरी कोटा तक स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है।
👉 इसके पश्चात यह सवाई माधोपुर और धौलपुर जिलों से भी होकर गुजरता है।
👉 यह राजस्थान की भू-संरचना की प्रमुख विशेषता है।

राजस्थान को उसकी भू-आकृति की दृष्टि से की दृष्टि से कितने प्रमुख क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है ? 

[EO RO (Shift II) 14.05.2023]

  • 8

  • 2 

  • 6

  • 4 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान की भू-आकृति को प्राकृतिक विविधताओं के आधार पर चार प्रमुख क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
👉 ये क्षेत्र हैं — पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश, अरावली पर्वतीय प्रदेश, पूर्वी मैदानी प्रदेश, तथा दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश।
👉 प्रत्येक क्षेत्र की अपनी भू-आकृतिक विशेषताएँ, धरातली संरचना और प्राकृतिक स्वरूप है।
👉 इन क्षेत्रों का निर्धारण मुख्यतः अरावली पर्वत श्रेणियों के आधार पर किया गया है।

उत्खात स्थलाकृति विशेषता है -  

[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]

  • चम्बल बेसिन की  

  • शेखावाटी की  

  • घग्गर बेसिन की  

  • नागौरी उच्च भूमि की

🔹 व्याख्या:

👉 उत्खात स्थलाकृति उस भू-आकृति को कहते हैं जो नदी द्वारा मिट्टी के अत्यधिक कटाव से बनती है।
👉 यह विशेषता बीहड़ क्षेत्रों में पाई जाती है, जहाँ असमान कटाव से गहरी और उथली नालियाँ बन जाती हैं।
👉 राजस्थान में यह स्थलाकृति विशेष रूप से चंबल बेसिन के अंतर्गत कोटा, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर में मिलती है।
👉 यह क्षेत्र अत्यधिक विच्छेदित एवं जर्जर भूमि से युक्त होता है।

झालावाड़ से बीकानेर की ओर सीधी रेखा में यात्रा करते हुए आप निम्न में से किस प्रकार के भौतिक स्वरूपों के क्रम का अवलोकन करेंगे ? 

[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]

  • मध्य माही मैदान, बनास बेसिन, बांगड़

  • विन्ध्यन कगार, बनास बेसिन, भोराट पठार

  • भोराट पठार, हाड़ौती पठार, मध्य अरावली

  • हाड़ौती पठार, बनास बेसिन, मध्य अरावली  

🔹 व्याख्या:

👉 झालावाड़ राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग (हाड़ौती) में स्थित है, जहाँ की स्थलाकृति लवाक्षेपित शैलों एवं नदियों द्वारा निर्मित है।
👉 इसके आगे बढ़ने पर बनास बेसिन आता है, जो अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक जैसे मैदानी जिलों में फैला है।
👉 इसके पश्चात आप पहुँचते हैं मध्य अरावली प्रदेश, जो मुख्यतः अजमेर जिले में स्थित है।
👉 अतः यात्रा का क्रम रहेगा — हाड़ौती पठार → बनास बेसिन → मध्य अरावली।

राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थल में सबसे प्रमुख (अधिकांशतः ) बालू के स्तूप हैं 

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 13.11.2021]

  • अनुप्रस्थ में 

  •  बरखान में

  • पेराबॉलिक में

  • पवनानुवर्ती में

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में अनेक प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं।
👉 इन स्तूपों में पेराबोलिक बालुका स्तूप का सबसे अधिक विस्तार है, जिनका निर्माण वनस्पति की उपस्थिति से प्रभावित होता है।
👉 ये स्तूप थार के अधिकांश भागों में फैले हुए हैं और इनका आकार घुमावदार होता है।
👉 इनका निर्माण दीर्घकालीन वायु प्रवाह और मरुस्थलीय वनस्पति के सम्मिलन से होता है।

10 सें.मी. की समवर्षा रेखा राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले से नहीं गुजरती है ?  

[अनुसंधान अधिकारी पुरा. 04.08.2024]

  • जैसलमेर 

  • बीकानेर 

  • गंगानगर

  • हनुमानगढ़ 

 

🔹 व्याख्या:

👉 शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश वह क्षेत्र है जो 25 से.मी. समवर्षा रेखा से पश्चिम में स्थित है।
👉 इसमें मुख्यतः बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर जैसे जिले आते हैं, जहाँ अतिशुष्क दशाएँ पाई जाती हैं।
👉 यह क्षेत्र अत्यंत कम वर्षा वाला है, जहाँ बालुका स्तूपों का विस्तार और वनस्पति विहीनता देखी जाती है।
👉 यहाँ की जलवायु और स्थलाकृति इसे वास्तविक मरुस्थलीय क्षेत्र बनाती है। 

अर्द्ध शुष्क जलवायु वाला जिला है-  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (गणित)

  • झालावाड़ 

  • जयपुर

  • प्रतापगढ़ 

  • जोधपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 जोधपुर जिला पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश का भाग है, जहाँ का अधिकांश भू-भाग बालुका स्तूपों, चट्टानों एवं रेतीले मैदानों से ढका हुआ है।
👉 इस क्षेत्र की जलवायु अत्यधिक शुष्क से लेकर अर्द्ध शुष्क तक पाई जाती है।
👉 यहाँ की मानसूनी हवाएँ, विशेषकर दक्षिण-पश्चिमी, मार्च से सितम्बर तक सक्रिय रहती हैं।
👉 जोधपुर का कुछ भाग लूनी बेसिन में भी आता है, जहाँ अल्प वर्षा एवं उच्च तापमान की स्थिति रहती है।

अरावली श्रेणी का निम्नलिखित में से उच्चतम भाग कहाँ है ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 27.08.2022]

  • हाड़ौती पठार से कोटा तक 

  • नाहरगढ़ से जयगढ़ तक 

  • उदयपुर में कुम्भलगढ़ और गोगुन्डा के बीच

  • उत्तरी राजस्थान 

🔹 व्याख्या:

👉 अरावली पर्वतमाला का उच्चतम भाग दक्षिणी अरावली प्रदेश में स्थित है।
👉 इसमें उदयपुर जिले में स्थित कुम्भलगढ़ और गोगुंडा के बीच का क्षेत्र प्रमुख है।
👉 इस भाग को भोराट का पठार कहा जाता है, जो अरावली की सघन, ऊँची और वनाच्छादित श्रेणियों से घिरा है।
👉 यह प्रदेश प्राकृतिक सौंदर्य और स्थलाकृति की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

राजस्थान में अरावली पर्वत श्रृंखला के विस्तार की क्या दिशा है ? 

[LDC (RPSC) 2011]

  • दक्षिण - पूर्व से उत्तर-पश्चिम दक्षिण-पूर्व 

  • दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व 

  • पश्चिम से पूर्व 

  • उत्तर से दक्षिण 

🔹 व्याख्या:

👉 अरावली पर्वत श्रृंखला राजस्थान की प्रमुख पर्वतीय इकाई है, जिसका विस्तार कर्णवत् दिशा में हुआ है।
👉 इसकी दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर है, जो इसे भारत की अन्य पर्वतमालाओं से अलग बनाती है।
👉 यह श्रृंखला खेतड़ी (उत्तर-पूर्व) से खेड़ ब्रह्मा (दक्षिण-पश्चिम) तक फैली हुई है।
👉 इसकी कुल लम्बाई लगभग 550 किमी है और यह राज्य को दो भौगोलिक भागों में बाँटती है।

निम्नलिखित में से हाड़ौती पठार पर अवस्थित जिला है - 

[कृषि अधिकारी 29.08.2022]

  • कोटा 

  • धौलपुर 

  • सिरोही 

  • टोंक 

🔹 व्याख्या:

👉 हाड़ौती का पठार राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में फैला हुआ एक महत्वपूर्ण भू-आकृतिक क्षेत्र है।
👉 इस पठारी भाग में कोटा, बारां, बूंदी और झालावाड़ जिले सम्मिलित हैं।
👉 कोटा जिले में चंबल नदी और उसकी सहायक नदियाँ उपजाऊ मैदान बनाती हैं।
👉 यह क्षेत्र लावा मिश्रित शैलों और विन्ध्य शैल संरचना से निर्मित है।

'बनास मैदान' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं दिए गए कूटों के आधार पर सही उत्तर का चयन कीजिए ?

(A) यह मैदान कृषि के लिए अनुपयुक्त है |

(B) इसकी औसत समुद्र तल से ऊँचाई 150-300 मीटर |

(C) यहाँ जलोढ़ मृदा का जमाव पाया जाता है |

(D) इसका ढाल पश्चिम की ओर है|  

[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]

  • केवल C  

  • A, B एवं C  

  • B, C एवं D  

  • B एवं C  

🔹 व्याख्या:

👉 (A) गलत — बनास मैदान में जलोढ़ मृदा का जमाव है, जिससे यह क्षेत्र कृषि के लिए उपयुक्त है।
👉 (B) सही — इस मैदान की औसत ऊँचाई 150 से 300 मीटर के बीच है।
👉 (C) सही — यहाँ की भूमि में जलोढ़ मृदा पाई जाती है जो उपजाऊ है।
👉 (D) गलत — बनास मैदान का ढाल पूर्व की ओर है, न कि पश्चिम की ओर।

उत्खात स्थलाकृतियाँ पाई जाती हैं 

[पशु चिकित्सा अधिकारी 02.08.2020]

  • धौलपुर तथा सवाई माधोपुर में 

  • गंगानगर तथा हनुमानगढ़ में 

  • झालावाड़ तथा डूंगरपुर में 

  • घग्घर नदी बेसिन में 

🔹 व्याख्या:

👉 उत्खात स्थलाकृति (Badland Topography) मुख्यतः गहराई तक कटी-फटी भूमि संरचना को दर्शाती है।
👉 ऐसी स्थलाकृति चम्बल बेसिन के अंतर्गत आती है, जिसका विस्तार धौलपुर और सवाई माधोपुर जिलों तक है।
👉 इन क्षेत्रों में घाटियाँ, बीहड़ तथा नवीन कांपीय जमाव भी पाए जाते हैं।
👉 यह भू-आकृति जल द्वारा गहन अपरदन के कारण विकसित हुई है।

निम्नांकित में से किस जिले में अरावली पर्वतमाला का क्षेत्र सबसे कम है ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 28.08.2022]

  • राजसमन्द 

  • डूंगरपुर 

  • अजमेर 

  • बांसवाड़ा 

🔹 व्याख्या:

👉 अरावली पर्वतमाला का विस्तार राजस्थान के उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तक होता है।
👉 इसका प्रमुख विस्तार सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, जयपुर, दौसा और अलवर जिलों में है।
👉 डूंगरपुर जिला अरावली के मुख्य पर्वतीय क्षेत्र से बाहर है, अतः इसमें इसका विस्तार सबसे कम है।
👉 डूंगरपुर अधिकतर छप्पन मैदान और वागड़ क्षेत्र का हिस्सा है।

राजस्थान में मरुस्थलीकरण का सर्वप्रमुख कारण है - 

[Supt. Garden 28.07.2021]

  • वाष्पोत्सर्जन की उच्च दर 

  • बड़े पैमाने पर खनन कार्य 

  • अनियन्त्रित पशुचारण

  • अरावली पर्वतों की उच्च ऊँचाईयाँ 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मरुस्थलीकरण का सर्वप्रमुख कारण है — अनियंत्रित पशुचारण, जिससे वनस्पति आवरण नष्ट हो जाता है।
👉 इससे मिट्टी का अपरदन होता है और भूमि की उपजाऊ क्षमता घटती है।
👉 पशुचारण के अलावा, वर्षा की अल्पता और मानवजनित गतिविधियाँ भी इस प्रक्रिया को तेज करती हैं।
👉 इन कारणों से थार मरुस्थल का विस्तार और पर्यावरणीय असंतुलन उत्पन्न होता है।

तारा बालुका स्तूप निम्न में से मुख्यतः राजस्थान के किस जिले में पाए जाते हैं ?

[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]

  • जयपुर - दोसा

  • चुरू - सीकर

  • जैसलमेर - गंगानगर  

  • जालोर - पाल्ली  

🔹 व्याख्या:

👉 तारा बालुका स्तूप (Star Sand Dunes) थार मरुस्थल की एक विशिष्ट बहु-दिशीय स्तूप संरचना है।
👉 ये स्तूप मुख्यतः जैसलमेर के सोहनगढ़, पोकरण क्षेत्र और गंगानगर के सूरतगढ़ क्षेत्र में पाए जाते हैं।
👉 इनकी ऊँचाई लगभग 10 से 25 मीटर तक होती है और ये श्रृंखलाबद्ध रूप में फैले होते हैं।
👉 ये स्तूप विभिन्न दिशाओं से चलने वाली हवाओं के कारण निर्मित होते हैं।

मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा किस कार्यक्रम की शुरुआत की गई ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

  • प्रोजेक्ट रेन 

  • प्रोजेक्ट ग्रीन 

  • प्रोजेक्ट बोल्ड 

  • प्रोजेक्ट टी 

🔹 व्याख्या:

👉 प्रोजेक्ट बोल्ड (Project BOLD) 'खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग' (KVIC) द्वारा शुरू की गई एक अनूठी वैज्ञानिक पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की बंजर भूमि पर बांस के पौधे लगाकर हरित पट्टी (Green Patch) विकसित करना, मरुस्थलीकरण को रोकना और स्थानीय आदिवासियों के लिए आजीविका के साधन जुटाना है।प्रोजेक्ट से जुड़ी प्रमुख बातें:पूरा नाम: BOLD का अर्थ Bamboo Oasis on Lands in Drought (सूखे की चपेट में आए क्षेत्रों में बांस का नखलिस्तान) है。शुरुआत और स्थान: इसकी शुरुआत 4 जुलाई 2021 को उदयपुर जिले के 'निचला मांडवा' आदिवासी गांव से की गई। बाद में इसका विस्तार जैसलमेर (तनोट माता मंदिर के पास) और अन्य राज्यों में भी किया गया।

हाड़ौती के पठार में राजस्थान का कौन सा क्षेत्र सम्मिलित किया जाता है ?

[LDC (RPSC) 2011]

  • दक्षिणी 

  • दक्षिणी-पश्चिमी 

  • उत्तरी-पूर्वी 

  • दक्षिणी-पूर्वी 

🔹 व्याख्या:

👉 हाड़ौती का पठार राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में स्थित है, जो मालवा के पठार का ही विस्तार है।
👉 इसमें झालावाड़, कोटा, बारां और बूंदी जिले सम्मिलित किए जाते हैं।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः लावा मिश्रित और विन्ध्य शैलों से निर्मित है तथा यहाँ की औसत ऊँचाई 500 मीटर है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में अर्द्ध-चन्द्राकार पर्वत, नदी निर्मित मैदान, तथा घोड़े की नाल जैसी भू-आकृति पाई जाती है।

गोड़वाड़ प्रदेश को यह भी कहा जाता है :

[वरिष्ठ अध्यापक 17.02.2019]

  •  चम्बलबेसिन

  •  घग्घर का मैदान 

  • काली सिंध बेसिन 

  • लूनी - जवाई बेसिन

🔹 व्याख्या:

👉 गोड़वाड़ प्रदेश राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र का एक उप-प्रदेश है।
👉 इसे लूणी-जवाई बेसिन के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह क्षेत्र मुख्यतः लूणी नदी और उसकी सहायक जवाई, बांडी, गुहिया आदि नदियों से सिंचित है।
👉 यह प्रदेश पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर और नागौर के दक्षिणी भागों में फैला है।
👉 इसका भौगोलिक स्वरूप मैदानी होते हुए भी पश्चिमी सीमांत पर बालुका स्तूपों से प्रभावित है।

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये तथा सही उत्तर का चयन नीचे दिये कूट से कीजिये : 

        सूची-I                 सूची-II 

भू-आकृति प्रदेश            दृश्य  

(A) मेवाड़ पर्वतीय  -(i) मुकन्दरा पहाड़ी

(B) हाड़ौती पठार -  (ii) नाली

(C) शेखावाटी प्रदेश-(iii) गिरवा 

(D) घग्घर मैदान    - (iv) अन्तःप्रवाहित 

                                     अपवाह 

सहायक आचार्य [22.09.2021]

कूट:- 

            (A) (B) (C) (D) 

  • (ii)  (i)  (iii)  (iv) 

  • (iv)  (iii)  (ii)  (i)

  • (iii)  (i)  (iv)  (ii) 

  • (iii)  (iv)  (ii)  (i)

🔹 व्याख्या:

👉 (A) मेवाड़ पर्वतीय क्षेत्र से संबंधित दृश्य है – (iii) गिरवा, जो उदयपुर बेसिन के चारों ओर की पहाड़ियों का समूह है।
👉 (B) हाड़ौती पठार में स्थित है – (i) मुकन्दरा पहाड़ी, जो इस क्षेत्र की प्रमुख पर्वतमाला है।
👉 (C) शेखावाटी प्रदेश में होता है – (iv) अन्तःप्रवाहित अपवाह, जहाँ नदियाँ थोड़ी दूर चलकर रेत में विलीन हो जाती हैं।
👉 (D) घग्घर मैदान से संबंधित है – (ii) नाली, जो घग्घर नदी के शुष्क तल को कहा जाता है।

👉 अतः सही संयोजन है:
(A) – (iii), (B) – (i), (C) – (iv), (D) – (ii)

निम्न में से थार मरुस्थल के भाग हैं? 

(A) गोड़वाड़ प्रदेश 

(B) शेखावाटी प्रदेश 

(C) बनास का मैदान 

(D) घग्गर का मैदान 

[RAS Pre. 27.10.2021]

  • (A), (C) एवं (D)

  • (A) एवं (B) 

  • (B) एवं (C)

  • (A), (B) एवं (D) 

🔹 व्याख्या:

👉 थार मरुस्थल को राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश के रूप में जाना जाता है।
👉 इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख उप-प्रदेश हैं —
 ✔ गोड़वाड़ प्रदेश (लूणी बेसिन)
 ✔ शेखावाटी प्रदेश
 ✔ घग्घर का मैदान
👉 जबकि बनास का मैदान पूर्वी मैदान प्रदेश का भाग है, इसलिए वह थार मरुस्थल में शामिल नहीं है।

पचपदरा, सांवरला व कपराना खारे पानी के गर्त निम्नलिखित में से किसमें पाये जाते हैं ?  

[Research Scholar 04.08.2024]

  • शेखावटी बेसिन 

  • लूनी-जवाई बेसिन 

  • घग्घर बेसिन 

  • माही बेसिन 

🔹 व्याख्या:

👉 पचपदरा, सांवरला और कपराना जैसे स्थल खारे पानी के प्रसिद्ध गर्त हैं।
👉 ये स्थल राजस्थान के पाली, जालौर और जोधपुर जिलों में स्थित हैं।
👉 यह संपूर्ण क्षेत्र लूनी-जवाई बेसिन का हिस्सा है, जो मरुस्थलीय सीमांत पर स्थित है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में जलोढ़ मैदान, बालुका स्तूप और लवणीयता युक्त गर्त पाए जाते हैं।

निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए : 

क्षेत्र   स्थानीय नाम 
I. डूंगरपुर, बांसवाड़ा एवं प्रतापगढ़ क्षेत्र  a. भौमट 

II. डूंगरपुर, पूर्वी सिरोही एवं उदयपुर जिलों का अरावली पर्वतीय क्षेत्र  

b. हाड़ौती 
III. आबू पर्वत खण्ड   c. वागड़ 
IV. कोटा, बूंदी एवं बारां क्षेत्र  d. अर्बुद 

[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]

            I     II     III     IV 

  • d     c     b     a 

  • c     a     d     b

  • c     b     a     d 

  • d     a     b     c 

🔹 व्याख्या:

👉 I. डूंगरपुर, बांसवाड़ा एवं प्रतापगढ़ क्षेत्र – (c) वागड़
👉 II. डूंगरपुर, पूर्वी सिरोही एवं उदयपुर जिलों का अरावली पर्वतीय क्षेत्र – (a) भौमट
👉 III. आबू पर्वत खण्ड – (d) अर्बुद
👉 IV. कोटा, बूंदी एवं बारां क्षेत्र – (b) हाड़ौती

👉 अतः सही सुमेलित क्रम है:
I–c, II–a, III–d, IV–b

राजस्थान में स्थित थार मरुस्थल में कौन सा बालुका स्तूप का प्रकार नहीं है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • घोराउड 

  • तारा 

  • बरखान 

  • पैराबोलिक 

🔹 व्याख्या:

👉 थार मरुस्थल में पाए जाने वाले प्रमुख बालुका स्तूपों के प्रकार हैं — रेखीय, बरखान, पेराबोलिक, तारा, अवरोधी और शब्र-काफीज।
👉 इनमें से प्रत्येक प्रकार की ऊँचाई, चौड़ाई और बनावट वायु दिशा व वनस्पति की उपस्थिति पर निर्भर करती है।
👉 "घोराउड" नामक कोई भी बालुका स्तूप का प्रकार यहाँ वर्णित नहीं है, अतः यह इससे असंगत है।
👉 कुछ क्षेत्रों में बालुका स्तूपों के स्थान पर अवसादी शैल और चट्टानी जमाव भी देखे जाते हैं।

मरुस्थलीकरण का मानवजनित कारक नहीं है 

[कृषि अधिकारी 19.01.2021]

  • नगरीकरण 

  • भूमि उपयोग में परिवर्तन 

  • अल्प वर्षा 

  • अतिचारण 

🔹 व्याख्या:

👉 मरुस्थलीकरण के कई कारण होते हैं, जिनमें से कुछ प्राकृतिक और कुछ मानवजनित होते हैं।
👉 अल्प वर्षा एक प्राकृतिक कारण है, जबकि अनियंत्रित पशुचारण, अंधाधुंध सिंचाई और वन कटाई जैसे कारण मानवजनित हैं।
👉 अल्प वर्षा के कारण नमी की कमी, मिट्टी का क्षरण और वनस्पति का अभाव होता है।
👉 अतः अल्प वर्षा को मानवजनित नहीं, बल्कि प्राकृतिक कारक माना जाता है।

वृहत सीमा भ्रंश राजस्थान के किस भाग में स्थित है ? 

[AEN 16 दिसम्बर 2018]

  • दक्षिण-पूर्वी 

  • उत्तर-पूर्वी

  • दक्षिण-पश्चिम 

  • उत्तर-पश्चिम

🔹 व्याख्या:

👉 वृहत सीमा भ्रंश (The Great Boundary Fault) राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है।
👉 यह भ्रंश चित्तौड़गढ़ के बेगूँ से शुरू होकर उत्तरी कोटा, फिर सवाई माधोपुर और धौलपुर जिलों तक फैला है।
👉 यह संरचना राजस्थान की भू-गर्भिक जटिलता का एक प्रमुख उदाहरण है।
👉 यह भ्रंश प्रदेश की भौगोलिक एवं भौमिकी विविधता को प्रभावित करता है।

निम्नलिखित में से राजस्थान के किस प्रदेश में 'उत्खात - भूमि स्थलाकृति पायी जाती हैं ? 

[स. सांख्यिकी अधिकारी 08.07.2022]

  • बांगड़ प्रदेश 

  • चम्बल बेसिन 

  • लूनी बेसिन 

  • शेखावाटी 

🔹 व्याख्या:

👉 उत्खात भूमि स्थलाकृति उस क्षेत्र में बनती है जहाँ नदी द्वारा गहन कटाव होता है।
👉 राजस्थान में यह भू-आकृति मुख्यतः चम्बल बेसिन में पाई जाती है।
👉 यहाँ की भूमि बीहड़, गहरी नालियों, और कटावदार ढालों से युक्त होती है।
👉 यह क्षेत्र कोटा, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर जिलों में फैला है।

लूनी बेसिन किस पारिस्थितिक प्रदेश का भाग है ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 27.08.2022]

  • मरुस्थलीय पारिस्थितिक तंत्र 

  • अरावली पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र 

  • हाड़ौती पठार पारिस्थितिक तंत्र 

  • पूर्वी मैदानी पारिस्थितिक तंत्र 

🔹 व्याख्या:

👉 लूनी बेसिन राजस्थान के पश्चिमी भाग में स्थित एक विस्तृत जलोढ़ मैदान है।
👉 यह बेसिन मुख्यतः पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर और नागौर जिलों में फैला है।
👉 लूनी और उसकी सहायक नदियाँ जैसे जवाई, सूकड़ी, बांडी इस क्षेत्र को सींचती हैं।
👉 यह क्षेत्र मरुस्थलीय पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा है, जहाँ बालुका स्तूप और लवणीय गर्त भी पाए जाते हैं।

सही कथनों का चयन नीचे दिये कूट से कीजिये : [*]

A. 'लसाडिया' पठार जयसमंद झील के पूर्व में स्थित है । 

B. 'नाग पहाड़' मध्य अरावली का सर्वोच्च शिखर है । 

C. 'छप्पन का मैदान' प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के मध्य स्थित है । 

D. शिवपुर घाट एवं बर अरावली के दर्रे हैं । 

सहायक आचार्य [30.05.2019]

कूट :  delete Question

  • B, C और D सही हैं ।

  •  A, B और C सही हैं । 

  •  A और D सही हैं । 

  • B और C सही हैं ।

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीटेड' या अमान्य घोषित किया गया है। 

विधान (A) :अरावली पर्वत विश्व के प्राचीनतम पर्वतों में से हैं 

तर्क (R) : अरावली पर्वत राजस्थान को दो प्राकृतिक भागों में विभाजित करता है 

[कृषि अधिकारी 2011]

  • (A) और (R) दोनों अपने आप में सही है किन्तु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है 

  • (A) सही है किन्तु (R) गलत है 

  • (A) गलत है किन्तु (R) सही है । 

  • (A) और (R) दोनों अपने आप में सही और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है 

🔹 व्याख्या:

👉 विधान (A) सही है क्योंकि अरावली पर्वत विश्व की प्राचीनतम पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है।
👉 तर्क (R) भी सही है क्योंकि यह पर्वत राजस्थान को मरुस्थलीय और गैर मरुस्थलीय दो भागों में बाँटता है।
👉 लेकिन (R), (A) का सीधा कारण नहीं है, क्योंकि पर्वत की प्राचीनता का इससे संबंध नहीं है।

निम्न में से कौनसी राजस्थान के मरुस्थल्र की मुख्य विशेषताएँ है |

(A) अतिशुष्क दशाएं

(B) तापमान का अतिरेक

(C) न्यून औसत वार्षिक वर्षा

(D) कम तथा छितरा हुआ वनस्पति आवरण  

[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]

  • A, B एवंC  

  • A, B एवं D  

  • A, C एवं D  

  • A, B, C एवं D  

🔹 व्याख्या:

👉 (A) सही — थार मरुस्थल क्षेत्र में अतिशुष्क पर्यावरणीय दशाएं पाई जाती हैं।
👉 (B) सही — यहाँ दिन और रात के बीच तापमान का अत्यधिक अंतर देखा जाता है।
👉 (C) सही — इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा बहुत कम (25 सेमी से कम) होती है।
👉 (D) सही — वनस्पति आवरण अत्यंत कम और अनियमित रूप से फैला हुआ होता है।

'छप्पन का मैदान' राजस्थान के निम्नांकित किन जिलों में विस्तृत है ? 

[कनिष्ठ लेखाकार (RPSC) 04.10.2016]

  • जैसलमेर - बाड़मेर 

  • कोटा - बारां 

  • बाँसवाड़ा - डूंगरपुर 

  • जालौर - पाली 

🔹 व्याख्या:

👉 "छप्पन का मैदान" राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में स्थित एक असमतल भू-भाग है।
👉 इसका विस्तार मुख्यतः बाँसवाड़ा, डूंगरपुर और चित्तौड़गढ़ जिले के दक्षिणी भाग में है।
👉 यह क्षेत्र माही नदी एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा सिंचित है और इसमें संकीर्ण घाटियाँ एवं छोटी पहाड़ियाँ पाई जाती हैं।
👉 यह क्षेत्र स्थानीय रूप से वागड़ के नाम से भी जाना जाता है।

राजस्थान में विन्ध्यन कगार किस क्षेत्र में पाये जाते हैं ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

  • अलवर - भरतपुर क्षेत्र 

  • कोटा- झालावाड़ क्षेत्र 

  • धौलपुर- करौली क्षेत्र 

  • अलवर - सवाई माधोपुर क्षेत्र 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में विन्ध्यन कगार मुख्यतः पूर्वी मैदान प्रदेश में पाए जाते हैं।
👉 इस प्रदेश में स्थित करौली और धौलपुर जैसे जिलों में विन्ध्य शैल समूह का स्पष्ट विस्तार है।
👉 इन क्षेत्रों में चम्बल नदी द्वारा निर्मित कटावदार स्थलाकृति और उच्च कगार देखे जाते हैं।
👉 यहाँ की शैल रचना में बलुआ पत्थर और चूना पत्थर प्रमुख हैं, जो विन्ध्य श्रेणी से संबंधित हैं।

निम्न में से कौनसा स्थान दक्षिण राजस्थान में स्थित नहीं है ? 

[कृषि अधिकारी 29.08.2022]

  • कांठल 

  • छप्पन का मैदान 

  • थली 

  • देवलिया 

🔹 व्याख्या:

👉 दक्षिण राजस्थान में स्थित क्षेत्र मुख्यतः वागड़ और माही बेसिन के अंतर्गत आते हैं।
👉 इनमें छप्पन का मैदान एक प्रमुख स्थल है, जो बाँसवाड़ा, डूंगरपुर और चित्तौड़गढ़ के दक्षिणी भाग में विस्तृत है।
👉 यह क्षेत्र माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा सिंचित है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति अत्यधिक असमतल एवं घाटीदार है।

राजस्थान के बांगड़ प्रदेश के जिलों में कौन सा सम्मिलित नहीं है ? 

सहायक आचार्य [30.05.2019]

  • राजसमंद 

  • झुन्झुनु 

  • चुरू 

  • सीकर 

🔹 व्याख्या:

👉 बांगड़ प्रदेश, राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय क्षेत्र का एक उप-भाग है, जिसे शेखावाटी प्रदेश भी कहा जाता है।
👉 इस क्षेत्र में रेतीले मैदान, मध्यम ऊँचाई के बालुका स्तूप, और अंतःप्रवाही धाराएँ पाई जाती हैं।
👉 सीकर, झुंझुनूं और चूरू — ये तीनों जिले बांगड़ (शेखावाटी) प्रदेश के अंतर्गत आते हैं।
👉 यहाँ की नदियाँ थोड़ी दूरी पर जाकर रेत में लुप्त हो जाती हैं।

"विन्ध्यन कगार" निर्मित है - 

[सांख्यिकी अधिकारी 18.12.2021]

  • बलुआ पत्थरों से 

  • संगमरमर से 

  • बेसाल्ट से 

  • ग्रेनाइट से 

🔹 व्याख्या:

👉 विन्ध्यन कगार राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भू-भाग में विस्तृत एक विशिष्ट भू-आकृति है।
👉 इसका निर्माण मुख्यतः विन्ध्य शैल समूह के बलुआ पत्थरों से हुआ है।
👉 यह क्षेत्र झालावाड़, कोटा, बारां और बूंदी जिलों में स्थित है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में चट्टानी कगार, पठारी ढाल और ऊँचाईदार क्षेत्र प्रमुख हैं।

थार मरुस्थल में 'लाठी सीरीज़' के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौनसा सही नहीं है ? 

[Research Scholar 04.08.2024]

  • प्राकृतिक तेल-गैस भण्डार 

  • अवसादी चट्टानों से निर्मित क्षेत्र 

  • भूमिगत जल का अच्छा भण्डार 

  • बालुका स्तूपों की अधिकता 

🔹 व्याख्या:

👉 लाठी श्रृंखला (Lathi Series या लाठी सीरीज) राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण भूगर्भीय और भौगोलिक क्षेत्र है。यह मोहनगढ़ से पोखरण के बीच लगभग 60 से 80 किलोमीटर लंबी एक मीठे पानी की भूगर्भीय जल-पट्टी है。लाठी श्रृंखला की प्रमुख विशेषताएं:मीठे पानी का स्रोत: यह क्षेत्र भूमिगत जल (जलभृत) का एक बहुत बड़ा प्राकृतिक भंडार है। भूगर्भिक दृष्टि से, यह प्राचीन सरस्वती नदी का भूगर्भीय अवशेष माना जाता है。चांदन नलकूप: इस जल पट्टी में स्थित 'चांदन नलकूप' से मीठा पानी निकलता है, जिसे अपने विशाल जल भंडार के कारण "थार का घड़ा" भी कहा जाता है。घास और पारिस्थितिकी: इस मीठे पानी की पट्टी के सहारे 'सेवण घास' (Lasiurus sindicus) उगती है, जो अत्यंत पौष्टिक होती है。गोडावण पक्षी: यह क्षेत्र राजस्थान के राज्य पक्षी 'गोडावण' (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) की प्राकृतिक प्रजनन स्थली और सुरक्षित आश्रय स्थल है。

निम्न में से राजस्थान के किस जिले में "बांका पट्टी" पेटी फैली हुई है?

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • नागौर 

  • सीकर 

  • भीलवाड़ा

  • चुरू 

🔹 व्याख्या:

👉 नागौर जिले का क्षेत्र शेखावाटी प्रदेश तथा लूनी बेसिन की सीमा पर स्थित है।
👉 इस क्षेत्र में रेतीले मैदान, अर्द्धवृत्ताकार बालुका स्तूप तथा लवणीय गर्तों की उपस्थिति देखी जाती है।
👉 शेखावाटी क्षेत्र में कई भागों में देशान्तरीय एवं विच्छिन्न बालुका स्तूपों का फैलाव है।

राजस्थान राज्य में कुल क्षेत्रफल में रेगिस्तानी क्षेत्र का प्रतिशत बताइये ? 

[ACF परीक्षा 2011]

  • 52% 

  • 61% 

  • 40% 

  • 33% 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का थार मरुस्थल भारत का सबसे बड़ा मरुस्थलीय क्षेत्र है, जो राज्य के पश्चिमी भाग में फैला है।
👉 इसका विस्तार लगभग 1,75,000 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 61% भाग घेरता है।
👉 इसमें बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, नागौर, झुन्झुनूं, सीकर जैसे जिले सम्मिलित हैं।
👉 यह क्षेत्र अतिशुष्क जलवायु, बालुका स्तूपों और अल्प वर्षा के लिए जाना जाता है।

राजस्थान के कुल क्षेत्रफल का लगभग कितना भाग थार मरुस्थल के अन्तर्गत आता है ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]

  • 56प्रतिशत 

  • 67प्रतिशत 

  • 61प्रतिशत 

  • 40 प्रतिशत 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का थार मरुस्थल भारत का सबसे बड़ा मरुस्थलीय क्षेत्र है, जो राज्य के पश्चिमी भाग में फैला है।
👉 यह मरुस्थल लगभग 1,75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है।
👉 यह क्षेत्र राजस्थान के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 61% भाग सम्मिलित करता है।
👉 इसमें बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, नागौर, सीकर, झुन्झुनूं आदि जिले आते हैं।

राजस्थान का न्यूनतम वर्षा वाला क्षेत्र है 

[स्कूल व्याख्याता 21.10.2022]

  • दक्षिणी 

  • उत्तरी-पूर्वी 

  • पश्चिमी 

  • दक्षिणी-पूर्वी 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का न्यूनतम वर्षा वाला क्षेत्र है पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश, जिसमें विशेषकर जैसलमेर और बाड़मेर जिले आते हैं।
👉 इस क्षेत्र में वर्षा सामान्यतः 25 सेमी से भी कम होती है, जिससे यह अत्यंत शुष्क बन जाता है।
👉 यहाँ वायु अपरदन, रेतीले टीलों का निर्माण और अल्प जल उपलब्धता की स्थिति पाई जाती है।
👉 यही कारण है कि यह क्षेत्र राज्य का सर्वाधिक शुष्क एवं कम वर्षा वाला भाग है।

निम्नलिखित में से कौनसा सुमेलित नहीं है ? 

[सहायक सांख्यिकी अधि. 25.08.2024]

  • शेखावाटी प्रदेश - जोहड़ 

  • लूनी बेसिन - नेहड़ 

  • घग्घर मैदान - नाली 

  • नागौर उच्च भूमियाँ - डोरा पर्वत 

🔹 व्याख्या:

👉 डोरा पर्वत जालौर जिले में स्थित है。 यह पर्वत अरावली पर्वतमाला की जसवंतपुरा की पहाड़ियों का सर्वोच्च शिखर है。

👉 लूनी बेसिन में पारंपरिक जल संग्रहण संरचना को नेहड़ कहा जाता है, जो वर्षा जल को संचित करने के लिए बनाई जाती है।
👉 शेखावाटी प्रदेश में जोहड़ का प्रयोग जल संचयन के पारंपरिक साधन के रूप में किया जाता है।
👉 घग्घर मैदान में घग्घर नदी की प्रवाहहीन धारा को स्थानीय भाषा में नाली कहा जाता है।
👉 ये सभी पारंपरिक शब्द स्थानीय जल प्रबंधन प्रणाली से जुड़े हैं।

राजस्थान में अरावली का कौन सा भाग सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करता है ? 

[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]

  • मध्य 

  • दक्षिणी 

  • उत्तर-पूर्वी 

  • शेखावाटी पहाड़ियाँ  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में अरावली पर्वत श्रेणी का दक्षिणी भाग सर्वाधिक सघन, उच्च एवं वनाच्छादित है।
👉 इस भाग में स्थित सिरोही, उदयपुर और राजसमंद जिलों में पर्वतों की ऊँचाई अधिक होने के कारण वर्षा की मात्रा भी अधिक होती है।
👉 यहाँ स्थित गुरु शिखर (1722 मीटर), जरगा पर्वत (1431 मीटर) आदि ऊँचे शिखरों के कारण वर्षा संयोग अधिक बनता है।

चम्बल बेसिन का विशिष्ट स्थलाकृतिक स्वरूप है : 

[Asst. Jailor 15.03.2016]

  • उत्खात स्थलाकृति  

  • आन्तरिक अपवाह  

  • अरावल्नी की पर्वतपदीय पहाड़ियाँ  

  • चूनाप्रदेश स्थलाकृति  

🔹 व्याख्या:

👉 चम्बल बेसिन राजस्थान के पूर्वी मैदानी प्रदेश का हिस्सा है, जो कोटा, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर जिलों में फैला है।
👉 इस क्षेत्र की प्रमुख स्थलाकृति है — उत्खात स्थलाकृति, जिसे बीहड़ भी कहा जाता है।
👉 यहाँ गहरी नालियाँ, कटावदार ढाल और टुकड़े-टुकड़े ज़मीन पाई जाती है।
👉 यह स्थलरूप नदी द्वारा निरंतर अपरदन के कारण विकसित हुआ है।

राजस्थान का कौन सा भौतिक विभाग मालवा के पठार का भाग है ? 

[AEN 16 दिसम्बर 2018]

  • चंबल का मैदान 

  • भोराट का पठार 

  • हाड़ौती का पठार 

  • लूनी का मैदान 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का हाड़ौती का पठार राज्य के दक्षिणी-पूर्वी भाग में स्थित है।
👉 यह क्षेत्र वास्तव में मालवा के पठार का ही उत्तर-पश्चिमी विस्तार है।
👉 इसमें झालावाड़, कोटा, बारां और बूंदी जिले सम्मिलित हैं।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में लावा मिश्रित शैल, पर्वत श्रेणियाँ और उपजाऊ मैदान प्रमुख हैं।

निम्नलिखित में से कौन से कारक राजस्थान में मरुस्थलीकरण के लिये उत्तरदायी हैं ? 

A. वनों की कटाई 

B. अति पशुचारण 

C. बूंद-बूंद सिंचाई 

D. मृदा अपरदन 

सहायक आचार्य [30.05.2019]

कूट : 

  • A, C एवं D 

  • A, B एवं D 

  • A एवं B 

  • A, B एवं C

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मरुस्थलीकरण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं —
 ✔ A. वनों की कटाई — जिससे पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ता है।
 ✔ B. अति पशुचारण — जिससे चारागाहों की क्षमता क्षीण होती है।
 ✔ D. मृदा अपरदन — विशेष रूप से वायु द्वारा रेतीले कण उड़कर मृदा को नुकसान पहुँचाते हैं।
👉 जबकि C. बूंद-बूंद सिंचाई एक सकारात्मक उपाय है, यह मरुस्थलीकरण का कारण नहीं है।

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं नीचे दिये कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए: 

A. अनुप्रस्थ बालुका- स्तूप चुरू और झुन्झुनूं जिलों में मिलते हैं। 

B. अवरोधी बालुका स्तूप पुष्कर क्षेत्र में मिलते हैं। 

C. जोधपुर जिला बालुका स्तूप मुक्त जिला है। 

कूट : 

  • A और C 

  • B और C 

  • A, B और C 

  • A और B 

🔹 व्याख्या:

👉 कथन A – सही: अनुप्रस्थ बालुका स्तूप चुरू, झुंझुनूं, बीकानेर, गंगानगर जैसे जिलों में पाए जाते हैं, जहाँ ये वायु की दिशा के समकोण पर बनते हैं।
👉 कथन B – सही: अवरोधी बालुका स्तूप पुष्कर, बिचून, नाग पहाड़ जैसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं, जो किसी अवरोध (झाड़ी, पहाड़ी आदि) के कारण बनते हैं।
👉 कथन C – गलत: जोधपुर जिले में भी बालुका स्तूप पाए जाते हैं, जैसे शब्र-काफीज टीलों का उल्लेख किया गया है।
👉 अतः सही उत्तर होगा — केवल A और B सही हैं।

"छप्पन का मैदान" राजस्थान के किस भाग में स्थित है?  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (SST)

  • उत्तरी भाग में 

  • पूर्वी भाग में 

  • पश्चिमी भाग में

  • दक्षिणी भाग में

🔹 व्याख्या:

👉 "छप्पन का मैदान" राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में स्थित है, जिसका विस्तार बाँसवाड़ा, डूंगरपुर और चित्तौड़गढ़ के दक्षिणी भाग में है।
👉 यह मैदान माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा सिंचित है, जिसमें अनेक संकीर्ण घाटियाँ और असमतल स्थल पाए जाते हैं।
👉 यहाँ की स्थलाकृति गहराई तक विच्छेदित है, जिससे इसे स्थानीय भाषा में वागड़ क्षेत्र भी कहा जाता है।
👉 यह नाम क्षेत्र में स्थित छप्पन ग्राम समूह के आधार पर पड़ा है।

निम्नलिखित में से कौनसा मरुस्थलीकरण का प्रमुख कारण नहीं है ? 

[सांख्यिकी अधिकारी 18.12.2021]

  • अतिचारण 

  • सूखे की पुनरावृत्ति 

  • वायु प्रदूषण 

  • जनसंख्या का दबाव 

🔹 व्याख्या:

👉 मरुस्थलीकरण के प्रमुख कारणों में अल्प वर्षा, अधिक तापमान, वनस्पति विहीनता, अति दोहन, पशुचारण आदि शामिल हैं।
👉 जबकि वायु प्रदूषण का मरुस्थलीकरण से प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता।
👉 अतः वायु प्रदूषण मरुस्थलीकरण का प्रमुख कारण नहीं है।

निम्न में से कौन सी पहाड़ियाँ मध्य अरावली श्रेणी में स्थित हैं ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • गिर्वा पहाड़ियाँ 

  • रोजा भाखर पहाड़ियाँ 

  • मेरवाड़ा पहाड़ियाँ 

  • इसराना भाखर पहाड़ियाँ 

🔹 व्याख्या:

👉 मध्य अरावली श्रेणी का विस्तार मुख्यतः अजमेर जिले और उसके आसपास के क्षेत्र में है।
👉 इस क्षेत्र में कई पर्वत श्रेणियाँ, दर्रे, और घाटियाँ पाई जाती हैं।
👉 यहाँ स्थित मेरवाड़ा पहाड़ियाँ, अजमेर के पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम में फैली हुई हैं, जो मध्य अरावली का भाग हैं।
👉 इस श्रेणी में तारागढ़, नाग पहाड़, और सर्पिलाकार पर्वत भी सम्मिलित हैं।

भानगढ़ व सिरावास श्रेणियाँ स्थित हैं 

[ACF 18.02.2021]

  • मध्य अरावली 

  • पश्चिमी अरावली 

  • दक्षिणी अरावली 

  • उत्तरी अरावली 

🔹 व्याख्या:

👉 भानगढ़ और सिरावास श्रेणियाँ राजस्थान के उत्तरी अरावली प्रदेश में स्थित हैं।
👉 यह क्षेत्र जयपुर, दौसा और अलवर जिलों में फैला है जहाँ अरावली श्रेणियाँ दूर-दूर और विच्छिन्न रूप में मिलती हैं।
👉 यहाँ के अन्य प्रमुख शिखर हैं — अलवर किला, बैराठ, बिलाली आदि।
👉 यह क्षेत्र विविध पर्वतीय संरचनाओं से युक्त है।

निम्नलिखित में से कौन सा पश्चिमी राजस्थान में पाया जाने वाला बालुका स्तूप का प्रकार नहीं है ? 

[कृषि अधिकारी 29.08.2022]

  • पेराबोलिक 

  • बरखान 

  • बजादा 

  • सीफ 

🔹 व्याख्या:

👉 पश्चिमी राजस्थान में स्थित थार मरुस्थल में कई प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं।
👉 इनमें प्रमुख हैं — सीफ (रेखीय/अनुदैर्ध्य), बरखान (अर्धचन्द्राकार) और पेराबोलिक बालुका स्तूप।
👉 इनका निर्माण वायु की दिशा, वनस्पति की उपस्थिति और स्थलाकृति पर निर्भर करता है।
👉 ये स्तूप थार की प्राकृतिक स्थलरूप विविधता का हिस्सा हैं।

सारणी I एवं सारणी II में दिए गए भौतिक विभाग एवं संबंधित जिले का सही मिलान है 

सारणी - I           सारणी-II 

(भौतिक विभाग) (जिला) 

A. भाकर          i. बाँसवाड़ा 

B. गिरवा          ii. नागौर 

C. वागड़          iii. सिरोही 

D. बांगर          iv. उदयपुर 

[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]

कूट : 

            A    B     C    D 

  • iii     iv     ii     i 

  • iii     iv     i     ii 

  • iv     iii     ii     i 

  • i     iii     iv     ii 

🔹 व्याख्या:

👉 A. भाकर – iii. सिरोही : सिरोही जिले में स्थित डोरा पर्वत क्षेत्र के आसपास की पहाड़ियों को भाकर कहा जाता है।
👉 B. गिरवा – iv. उदयपुर : गिरवा, उदयपुर बेसिन को घेरे हुए पहाड़ी स्कन्धों का क्षेत्र है।
👉 C. वागड़ – i. बाँसवाड़ा : बाँसवाड़ा और डूंगरपुर क्षेत्र को स्थानीय रूप में वागड़ कहा जाता है।
👉 D. बांगर – ii. नागौर : नागौर का उत्तरी भाग बांगर प्रदेश (शेखावाटी क्षेत्र) में आता है।

राजस्थान के किन क्षेत्रों में अनुप्रस्थ बालुकास्तूप मिलते हैं ? 

(A) बीकानेर जिले के पुंगल के चारों ओर 

(B) गंगानगर जिले का सूरतगढ़ क्षेत्र 

(C) जैसलमेर जिले का मोहनगढ़ क्षेत्र 

(D) हनुमानगढ़ जिले का नोहर क्षेत्र 

नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए - 

[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]

  • B, C 

  • B, C, D 

  • A, B 

  • A, B, C 

🔹 व्याख्या:

👉 थार मरुस्थल में अनुप्रस्थ बालुका स्तूप वे होते हैं जो हवा की दिशा के विपरीत कोण पर बनते हैं।
👉 बीकानेर, गंगानगर, जैसलमेर, चूरू, सीकर और हनुमानगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में बालुका स्तूपों की उपस्थिति बताई गई है।
👉 विशेष रूप से बीकानेर के पालेरी, गंगानगर के सूरतगढ़, सीकर, करणी माता, बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर के सोहनगढ़, और हनुमानगढ़ के रावतसर में विविध प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं।

"छप्पन मैदान" है ?

[स्कूल व्याख्याता 2011]

  • पश्चिमी राजस्थान 

  • उत्तर पूर्वी राजस्थान 

  • दक्षिणी राजस्थान 

  • पूर्वी राजस्थान 

🔹 व्याख्या:

👉 छप्पन मैदान राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित एक असमतल एवं घाटियों से युक्त क्षेत्र है।
👉 इसका विस्तार उदयपुर के दक्षिण-पूर्व, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, तथा चित्तौड़गढ़ के दक्षिणी क्षेत्रों में है।
👉 यह क्षेत्र मध्य माही बेसिन के अंतर्गत आता है और इसे वागड़ क्षेत्र का भाग भी माना जाता है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति गहराई तक कटी-फटी है, इसलिए यह दक्षिणी राजस्थान का महत्त्वपूर्ण भू-भाग है।

'थार मरुस्थल' के संदर्भ में, 'पराबोलिक' क्या है ? 

[कृषि अधिकारी 30.08.2022] 

  • झील 

  • टांका 

  • बालूका स्तूप 

  • खड़ीन

🔹 व्याख्या:

👉 थार मरुस्थल में पराबोलिक एक प्रकार का बालूका स्तूप है, जो अपनी घुमावदार आकृति के लिए जाना जाता है।
👉 इनका निर्माण वनस्पति की उपस्थिति और हवा की दिशा के अनुसार होता है।
👉 पराबोलिक स्तूपों का विस्तार सम्पूर्ण मरुस्थलीय क्षेत्र में देखा जा सकता है।
👉 ये थार की विविध भू-आकृति का महत्वपूर्ण अंग हैं।

राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग में औसत वार्षिक वर्षा होती हैं : 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

  • 10 सेमी. से 20 सेमी. के मध्य 

  • 70 सेमी. से 80 सेमी. के मध्य

  • 40 सेमी. से 70 सेमी. के मध्य 

  • 80 सेमी. से 120 सेमी. के मध्य 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग, जिसे हाड़ौती का पठार भी कहा जाता है, मालवा पठार का विस्तार है।
👉 इस क्षेत्र में स्थित झालावाड़, कोटा, बारां, बूंदी जिलों में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है।
👉 इस भाग की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 80 सेमी. से 120 सेमी. के मध्य होती है।
👉 यहाँ की नदी प्रणाली, उपजाऊ मैदान और वनस्पति भी वर्षा की इसी मात्रा पर आधारित हैं।

राजस्थान के रेतीले शुष्क मैदान में कौनसा क्षेत्र है जहाँ आधार चट्ठानें सतह पर अनावरित हैं ?

[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]

  • बालुका स्तूप मुक्त प्रदेश  

  • नागौरी भूमियाँ

  • शेखावाटी प्रदेश  

  • बनास बेसिन  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के रेतीले शुष्क मैदान में एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ बालुका स्तूपों का पूर्णतः अभाव है।
👉 यह क्षेत्र जैसलमेर जिले में स्थित है, जिसे बालुका स्तूप मुक्त प्रदेश कहा जाता है।
👉 यहाँ की भूमि अवसादी शैलों से ढकी है और सतह पर आधार चट्टानें स्पष्ट रूप से अनावृत दिखाई देती हैं।
👉 इस क्षेत्र में आंकल वुड फॉसिल पार्क जैसे स्थल भी स्थित हैं।

निम्नलिखित में से कौन सा सुमेलित नहीं हैं? 

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 13.11.2021]

            स्थलाकृति    -    अवस्थिति

  • छप्पन की पहाड़ियाँ - सिवाना 

  • कांठल                   -  चम्बल बेसिन 

  • भाकर                  -  पूर्वी सिरोही 

  • गिरवा                   -  उदयपुर बेसिन 

मुकुन्दरा की पहाड़ियाँ भाग हैं 

[कृषि अधिकारी 19.01.2021]

  • हाड़ौती पठार का 

  • पूर्वी मैदान का 

  • लूनी बेसिन का 

  • मध्य अरावली का 

🔹 व्याख्या:

👉 मुकुन्दरा की पहाड़ियाँ राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में स्थित हैं।
👉 ये पहाड़ियाँ हाड़ौती पठार का भाग हैं और इनकी लम्बाई लगभग 120 किलोमीटर है।
👉 इनकी ऊँचाई 335 से 503 मीटर तक है, तथा चंदवाड़ी क्षेत्र में इनका सर्वोच्च शिखर है।
👉 ये पहाड़ियाँ उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में विस्तृत हैं।

सीकर, झुन्झुनूं एवं नागौर जिले राजस्थान की कौन सी कृषि - जलवायु पेटी के अन्तर्गत आते हैं ? [*] 

[ACF 18.02.2021]

  • शुष्क पश्चिमी मैदानी क्षेत्र 

  • अन्तःस्थलीय अपवाह के अन्तर्वर्ती मैदानी क्षेत्र

  • अर्द्धशुष्क पूर्वी मैदानी क्षेत्र 

  • बाढ़ - संभाव्य पूर्वी मैदानी क्षेत्र 

🔹 व्याख्या:

👉 सीकर, झुन्झुनूं और नागौर जिले राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में स्थित हैं।
👉 यह क्षेत्र अर्द्ध शुष्क जलवायु वाला है जहाँ कम वर्षा, अत्यधिक तापमान और छितरा हुआ वनस्पति आवरण पाया जाता है।
👉 यहाँ की भूमि में मध्यम से निम्न ऊँचाई के बालुका स्तूप भी फैले होते हैं।

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है। 

राजस्थान में अरावली श्रेणी की लगभग लम्बाई है :

[Research Assistant 24.08.2017]

  • 692 किमी.  

  • 728 किमी.  

  • 550 किमी.  

  • 680 किमी.    

🔹 व्याख्या:

👉 अरावली पर्वत श्रेणी की कुल लम्बाई लगभग 692 किमी है, जो दिल्ली से गुजरात के पालनपुर तक फैली हुई है।
👉 राजस्थान में इसका विस्तार उत्तर-पूर्व में खेतड़ी से दक्षिण-पश्चिम में खेड़ ब्रह्मा तक है।
👉 राज्य के भीतर अरावली की लम्बाई लगभग 550 किलोमीटर है।
👉 यह श्रेणी राज्य के सात जिलों से होकर गुजरती है और एक जल विभाजक के रूप में कार्य करती है।

विन्धयन कगार भूमि जिन नदियों के मध्य स्थित है, वह हैं 

[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]

  • बाणगंगा व बनास 

  • बेड़च व बनास 

  • चंबल व बनास 

  • कालीसिंध व चंबल 

🔹 व्याख्या:

👉 विन्ध्यन शैलों का विस्तृत विस्तार पूर्वी राजस्थान में देखा जाता है, जो करौली, धौलपुर, निम्बाहेड़ा जैसे क्षेत्रों में मिलता है।
👉 यह शैल संरचना चंबल और बनास नदी तंत्र के बीच के भू-भाग में विस्तृत है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में कहीं समतल मैदान, तो कहीं बीहड़ व कटी-फटी स्थलरूप पाए जाते हैं।
👉 बनास और चंबल दोनों नदियाँ पूर्वी मैदानी प्रदेश का जल निकासी तंत्र बनाती हैं।

निम्नांकित में से किस जिले में अरावली के साथ-साथ विन्ध्यन क्रम के उच्चावच स्वरूप भी विद्यमान हैं ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 28.08.2022]

  • डूंगरपुर 

  • चित्तौड़गढ़ 

  • उदयपुर 

  • कोटा 

🔹 व्याख्या:

👉 चित्तौड़गढ़ जिला राजस्थान का एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ अरावली शैल संरचना के साथ-साथ विन्ध्यन शैलों का भी विस्तार है।
👉 यहाँ पर अरावली पर्वतीय भाग, उदयपुर बेसिन, और छप्पन मैदान जैसी भौगोलिक विविधताएँ मिलती हैं।
👉 विन्ध्यन शैलों का विस्तार यहाँ के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भाग में देखा जाता है।
👉 यह उच्चावचीय विविधता चित्तौड़गढ़ को भू-आकृतिक दृष्टि से विशिष्ट बनाती है।

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये : 

A. अरावली मरुस्थल के पूर्ववर्ती विस्तार को रोकता है । 

B. राजस्थान की सभी नदियों का उद्गम अरावली से है । 

C. राजस्थान में वर्षा का वितरण प्रारूप अरावली से प्रभावित नहीं होता है । 

D. अरावली प्रदेश धात्विक खनिजों में समृद्ध है । सही उत्तर का चयन नीचे दिये कूट से कीजिये : 

[RAS Pre. 28.08.2016]

कूट : 

  • केवल A और D सही हैं ।

  • केवल C और D सही हैं । 

  • A, B और C सही हैं । 

  • B, C और D सही हैं । 

🔹 व्याख्या:

अरावली का महत्व निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं से स्पष्ट होता है:

1.मरुस्थलीकरण पर रोक (प्राकृतिक दीवार): यह पर्वत श्रृंखला थार के रेगिस्तान को पूर्वी और उत्तरी भारत के उपजाऊ मैदानों में फैलने से रोकने के लिए एक प्राकृतिक अवरोध का काम करती है。2.जलवायु नियंत्रण: यह मानसूनी हवाओं को रोककर उत्तर और मध्य भारत में वर्षा कराने में सहायता करती है。 इसके अलावा, यह गर्म थार की हवाओं को मैदानी इलाकों में आने से रोकती है。3.जल पुनर्भरण और नदियाँ: यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण जल-विभाजक (वाटरशेड) है。 अरावली की घाटियों से बनास, साबरमती, लूणी और साहिबी जैसी नदियाँ निकलती हैं, जो स्थानीय जल आवश्यकताओं को पूरा करती हैं。 यह वर्षा के पानी को जमीन के अंदर (भूजल) पहुँचाने का मुख्य स्रोत है。4.जैव विविधता: यह पर्वत शृंखला समृद्ध वनस्पतियों और जीवों (तेंदुआ, सांभर, रीछ, विभिन्न पक्षी) का प्राकृतिक आवास है。प्रदूषण और धूल अवरोधक: दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में यह दिल्ली के "हरे फेफड़ों" के रूप में कार्य करती है, जो हवा की गुणवत्ता को सुधारती है और हानिकारक धूल के तूफानों को रोकती है。5.खनिज संपदा: अरावली में संगमरमर, तांबा, सीसा, जस्ता, और रॉक फॉस्फेट जैसे कई महत्वपूर्ण खनिजों के विशाल भंडार हैं।ऐतिहासिक और पर्यटन महत्व: अरावली की चोटियों और घाटियों में कई प्राचीन किले (जैसे राजस्थान के विभिन्न किले), मंदिर और ऐतिहासिक स्मारक स्थित हैं, जो इसे पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बनाते है.

👉 कथन A सही है — अरावली पर्वत श्रृंखलाएँ राज्य में मरुस्थल के पूर्ववर्ती विस्तार को रोकती हैं।
👉 कथन B गलत है — राज्य की सभी नदियों का उद्गम अरावली से नहीं होता, कुछ नदियाँ मध्य प्रदेश से भी आती हैं।
👉 कथन C गलत है — वर्षा का वितरण अरावली से प्रभावित होता है, क्योंकि ये पर्वत श्रेणियाँ मानसून के समानांतर फैली हैं।
👉 कथन D सही है — अरावली क्षेत्र धात्विक खनिजों जैसे सीसा, जस्ता, तांबा आदि में समृद्ध है।

राजस्थान के धरातलीय स्वरूपों के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है ? 

[स्कूल व्याख्याता 2013]

  • पश्चिमी बालुका मैदान टैथिस सागर का अवशेष रूप है । 

  • अरावली विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वत श्रेणी है । 

  • दक्षिण - पूर्वी पठार गौंडवाना लैण्ड का विस्तारित भाग है । 

  • उत्तर-पूर्वी मैदान सिन्धु नदी द्वारा निर्मित मैदान का भाग है । 

🔹 व्याख्या:

👉 अरावली पर्वत श्रेणी को विश्व की प्राचीनतम वलित पर्वतमालाओं में गिना जाता है।
👉 पश्चिमी बालुका मैदान में समुद्री तलछटों के प्रमाण मिलते हैं, जिससे यह क्षेत्र प्राचीन समुद्र (जैसे टैथिस) से जुड़ा रहा होगा।

निम्न में से थार मरुस्थल के किस भाग की समुद्र तल से सबसे कम ऊँचाई है ? 

[पशु चिकित्सा अधिकारी 02.08.2020]

  • उत्तरी-पश्चिमी भाग 

  • दक्षिणी भाग 

  • उत्तरी-पूर्वी भाग 

  • उत्तरी भाग 

🔹 व्याख्या:

👉 थार मरुस्थल का सामान्य ढाल पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण की ओर है।
👉 इसके दक्षिणी भाग की औसत ऊँचाई लगभग 150 मीटर है, जो उत्तरी एवं पूर्वी भागों की तुलना में सबसे कम है।
👉 वहीं उत्तरी व पूर्वी भाग की औसत ऊँचाई 300 मीटर तक होती है।
👉 इस प्रकार थार मरुस्थल के दक्षिणी क्षेत्र की ऊँचाई सबसे कम मानी जाती है।

मालपुरा - करौली मैदान भाग है- 

[Head Master 02.09.2018]

  • चम्बल बेसिन का 

  • माही बेसिन का 

  • बाणगंगा बेसिन का 

  • बनास बेसिन का 

🔹 व्याख्या:

👉 मालपुरा और करौली जैसे क्षेत्र पूर्वी राजस्थान में स्थित हैं, जहाँ का धरातल मैदानी स्वरूप लिए हुए है।
👉 यह क्षेत्र चम्बल और बनास नदी बेसिन का भाग है, जो पूर्वी मैदानी प्रदेश में आता है।
👉 यहाँ की जलोढ़ मृदा और समतल भू-आकृति इसे उपजाऊ मैदान बनाती है।
👉 अतः मालपुरा-करौली क्षेत्र को पूर्वी मैदानी प्रदेश का भाग माना जाता है।

"भारत मरुस्थलीकरण और भूमिक्षरण एटलस" के अनुसार, राजस्थान में 2003–05 से 2011–13 के बीच किस प्रकार के मरुस्थलीकरण/भूमिक्षरण में सर्वाधिक नकारात्मक परिवर्तन देखा गया है ?  

[सहायक आचार्य परीक्षा 08.09.2024]

  • वनस्पतिक्षरण के द्वारा मरुस्थलीकरण/भूमिक्षरण 

  • जल अपरदन के द्वारा मरुस्थलीकरण/भूमिक्षरण 

  • अधिवास के द्वारा मरुस्थलीकरण/भूमिक्षरण 

  • वायु अपरदन के द्वारा मरुस्थलीकरण/भूमिक्षरण 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में वायु एक प्रमुख अपरदक शक्ति है, जिसकी गति कभी-कभी 70 किमी/घंटा तक पहुँचती है।
👉 इस क्षेत्र में वायु अपरदन के कारण विविध प्रकार के बालुका स्तूपों का निर्माण होता है, जैसे – बरखान, रेखीय, तारा, पेराबोलिक आदि।
👉 मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया में अनियंत्रित पशुचारण, वनों की कमी और चरागाहों की दुर्बलता भी सहायक हैं।
👉 विशेष रूप से बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर जिलों में वायु द्वारा अपरदन की प्रक्रिया अत्यंत सक्रिय है।

सीफ है एक 

[PTI GRADE -II & III (RPSC) 2013]

  • अनुप्रस्थ बालुका स्तूप

  • स्क्रब कापीस बालुका स्तूप 

  • पैराबोलिक बालुका स्तूप 

  • अनुदैर्ध्य बालुका स्तूप

🔹 व्याख्या:

👉 थार मरुस्थल में पाए जाने वाले रेत के स्तूपों में एक प्रमुख प्रकार होता है — रेखीय अथवा अनुदैर्ध्य बालुका स्तूप।
👉 इनका निर्माण वायु की एक दिशा में दीर्घकालिक प्रवाह से होता है, जिससे ये स्तूप लंबी रेखाओं में विकसित होते हैं।
👉 ये बालुका स्तूप मुख्यतः जैसलमेर के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में पाए जाते हैं।
👉 इन्हें ही स्थानीय रूप से सीफ कहा जाता है, जो रेतीले टीलों की धारा समान आकृति को दर्शाता है।

बरखान पश्चिमी राजस्थान के कौन से क्षेत्रों में पाये जाते हैं ? 

A. ओसियाँ - जोधपुर 

B. भालेरी - चूरू 

C. देशनोक - बीकानेर 

D. दांतारामगढ़ - सीकर 

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

  • A, C एवं D 

  • A, B एवं D 

  • B, C एवं D         

  • A, B एवं C 

🔹 व्याख्या:

👉 बरखान (अर्धचन्द्राकार बालुका स्तूप) पश्चिमी राजस्थान के कई क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
👉 इनमें शामिल हैं —
 ✔ A. ओसियाँ – जोधपुर
 ✔ B. भालेरी – चूरू
 ✔ C. देशनोक – बीकानेर
👉 ये सभी स्थल बरखान बालुका स्तूपों के प्रमुख क्षेत्र हैं, जिनकी ऊँचाई 10 से 20 मीटर तक होती है।

रामगढ़ की गोलाकार पहाड़ी निम्न में से कौन से प्रदेश में अवस्थित है ? 

[स्कूल व्याख्याता 09.01.2020]

  • घग्घर मैदान 

  • शेखावाटी प्रदेश 

  • हाड़ौती का पठार 

  • छप्पन मैदान 

🔹 व्याख्या:

👉 रामगढ़ की गोलाकार पहाड़ी राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी पठारी क्षेत्र में स्थित है, जिसे हाड़ौती का पठार कहा जाता है।
👉 यह भू-आकृति बारां जिले के शाहबाद क्षेत्र में पाई जाती है और इसे घोड़े की नाल के आकार (Horse-Shoe Type) की पर्वतमाला कहा गया है।
👉 इसी क्षेत्र में स्थित रामगढ़ क्रेटर को भारत की पहली जियो हैरिटेज साइट घोषित किया गया है।
👉 इसका निर्माण वैज्ञानिकों के अनुसार उल्कापिंड के गिरने से हुआ था।

निम्न में से कौनसा मरुस्थल ऑस्ट्रेलिया में स्थित नहीं है ? 

[Head Master 11.10.2021]

  • गिब्सन मरुस्थल 

  • मोजावे मरुस्थल 

  • ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल 

  • ग्रेट सैन्डी मरुस्थल 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का थार मरुस्थल एक विशाल रेतीला मैदान है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 1,75,000 वर्ग किमी है।
👉 यह क्षेत्र बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर सहित अनेक जिलों में फैला है।
👉 यहाँ वायु अपरदन, बालुका स्तूपों का निर्माण, और अत्यल्प वर्षा जैसी मरुस्थलीय विशेषताएँ पाई जाती हैं।
👉 यह मरुस्थल भारत का सबसे बड़ा मरुस्थलीय भू-भाग है और इसे भारत का विशाल मरुस्थल भी कहा जाता है।

राजस्थान में मरुस्थलीकरण का कौन सा कारण नहीं है ? 

[लाइब्रेरियन ग्रेड -II [02.08.2020]

  • भूमि उपयोग पैटर्न में परिवर्तन  

  • वर्षा की कम मात्रा विशेषकर पश्चिमी राजस्थान में 

  • बालुका स्तूपों का स्थिरीकरण 

  • अतिचारण

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में वर्षा की अत्यल्प मात्रा, विशेषकर पश्चिमी भागों में, मरुस्थलीकरण का एक प्रमुख कारण है।
👉 इसके अतिरिक्त, अनियंत्रित पशुचारण (अतिचारण) के कारण वनस्पति हटती है जिससे भूमि क्षरण होता है।
👉 इन सभी कारकों ने मिलकर मरुस्थलीय दशाओं के विस्तार में योगदान दिया है।

विंध्यन कगार हिस्सा है 

[कृषि अधिकारी 24.11.2020]

  • बांगड़ का 

  • हाड़ौती का

  • थार का

  • अरावली का

🔹 व्याख्या:

👉 विंध्यन कगार राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में स्थित एक विशिष्ट भू-आकृतिक भाग है।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः विंध्य शैलों से बना हुआ है, जो हाड़ौती पठार का हिस्सा है।
👉 इसमें झालावाड़, कोटा, बारां और बूंदी जिले सम्मिलित हैं।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में अर्ध चन्द्राकार पर्वत श्रेणियाँ और उपजाऊ मैदान पाए जाते हैं।

'डांग' राजथान के किस भौगोलिक प्रदेश का भाग हैं ?  

[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]

  • शेखावाटी प्रदेश  

  • लूणी बेसिन

  • पूर्वी मैदान  

  • अरावली प्रदेश  

🔹 व्याख्या:

👉 डांग शब्द का प्रयोग राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी मैदानी क्षेत्र की घाटियों और कटी-फटी भूमि के लिए किया जाता है।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः चम्बल बेसिन के अंतर्गत आता है, जहाँ बीहड़ और उत्खात स्थलाकृति पाई जाती है।
👉 यह भू-भाग राजस्थान के पूर्वी मैदान का हिस्सा है, जिसमें धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और कोटा शामिल हैं।
👉 यहाँ की प्राकृतिक बनावट कटाव और क्षरण से निर्मित होती है।

'भारत के मरुस्थलीकरण एवं भूअवनयन एटलस (इसरो-2007) के अनुसार राजस्थान में मरुस्थलीकरण से प्रभावित क्षेत्र है 

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • 70%

  • 67%

  • 65%

  • 59%

🔹 व्याख्या:

👉 मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया के कारण राजस्थान का एक बड़ा भाग रेतीली भूमि, अपरदन और वनस्पति विहीनता से प्रभावित है।
👉 प्रदेश के बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर और चूरू जैसे क्षेत्र प्रमुख रूप से इस प्रभाव की परिधि में आते हैं।
👉 यहाँ की भूमि पर रेत के टीलों, चट्टानी सतहों और लवणीय गर्तों का विस्तार है।
👉 इस क्षेत्र में मानवीय गतिविधियाँ और पशुचारण भी मरुस्थलीकरण को बढ़ावा देते हैं।

निम्नलिखित में से कौन सा दक्षिणी अरावली प्रदेश में अवस्थित नहीं है ?

[ATO परीक्षा 27.07.2021] 

  • शाहबाद उच्च भूमियाँ 

  • उड़िया पठार 

  • लसाडिया पठार 

  • भोराट पठार

🔹 व्याख्या:

👉 दक्षिणी अरावली प्रदेश में मुख्यतः सिरोही, उदयपुर और राजसमंद जिले आते हैं, जहाँ ऊँची पर्वत श्रेणियाँ एवं पठारी स्थल हैं।
👉 इस क्षेत्र में गुरु शिखर, आबू पर्वत, जरगा, कुम्भलगढ़ आदि प्रमुख स्थल हैं।
👉 जबकि शाहबाद की उच्च भूमियाँ राजस्थान के बारां जिले में स्थित हैं, जो हाड़ौती पठार का भाग हैं।
👉 अतः यह दक्षिणी अरावली प्रदेश में शामिल नहीं है।

30 सेमी समवर्षा रेखा (औसत वार्षिक वर्षा) निम्नलिखित किन जिलों से गुजरती है ?  

[AEN परीक्षा 30.06.2024]

  • गंगानगर तथा पाली से 

  • बाड़मेर तथा सीकर से 

  • जोधपुर तथा हनुमानगढ़ से 

  • जैसलमेर तथा गंगानगर से 

🔹 व्याख्या:

👉 शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश वह क्षेत्र है जो 25 सेमी समवर्षा रेखा से पश्चिम में स्थित है।
👉 इस क्षेत्र में बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, तथा जोधपुर व चूरू के पश्चिमी भाग आते हैं।
👉 यहाँ स्थायी व अस्थायी बालुका स्तूपों का विस्तार है और यह क्षेत्र वास्तविक मरुस्थल माना जाता है।
👉 यहाँ की जलवायु अत्यधिक शुष्क, वर्षा अत्यंत अल्प एवं वनस्पति आवरण न्यूनतम है।

राजस्थान के पश्चिमी मरू प्रदेश का अंग नहीं है

[Research Assistant 24.08.2017]

  • घग्घर मैदान  

  • गोडवार भूमि    

  • नागौर उच्च भूमि  

  • विन्ध्यन कगारभूमि  

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का पश्चिमी मरू प्रदेश मुख्यतः थार मरुस्थल, लूनी बेसिन, शेखावाटी क्षेत्र और घग्घर का मैदान जैसे भागों में विभाजित है।
👉 इस क्षेत्र में रेतीले मैदान, बालुका स्तूप, तथा चट्टानी भाग प्रमुख रूप से पाए जाते हैं।
👉 वहीं विन्ध्यन कगारभूमि पूर्वी राजस्थान में स्थित एक अलग भौगोलिक क्षेत्र है।
👉 अतः यह पश्चिमी मरू प्रदेश का अंग नहीं माना जाता।

भू-आकृति की दृष्टि से राजस्थान को कितने  उपक्षेत्रों में बाँटा जा सकता है ? [*]

[EO RO (Shift I) 14.05.2023]

  • 11 

  • 13

  • 14 

  • 12

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान को भू-आकृति की दृष्टि से चार मुख्य क्षेत्रों में बाँटने के साथ-साथ उसे कुल 10 उपक्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
👉 इनमें शामिल हैं — शुष्क रेतीला प्रदेश, लूनी-जवाई बेसिन, शेखावाटी प्रदेश, घग्घर का मैदान,
दक्षिणी, मध्य व उत्तरी अरावली, बनास मैदान, मध्य माही बेसिन, तथा हाड़ौती का पठार।
👉 ये सभी उपक्षेत्र धरातली विविधता, जलवायु, तथा नदी तंत्र के आधार पर विभाजित किए गए हैं।
👉 इस वर्गीकरण से प्रदेश की प्राकृतिक संरचना और आर्थिक नियोजन को समझने में सहायता मिलती है।

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है। 

पश्चिमी राजस्थान में कौन से प्रकार के अनुप्रस्थ बालुका स्तूप पायें जाते हैं ? 

[स्कूल व्याख्याता 11.10.2022]

  • बरखान एवं सीफ 

  • परवलयी एवं वनस्पति युक्त रेखीय 

  • बरखान एवं पवन विमुख रेखीय 

  • बरखान एवं परवलयी 

🔹 व्याख्या:

👉 पश्चिमी राजस्थान में विविध प्रकार के बालुका स्तूप (Sand Dunes) पाए जाते हैं।
👉 इनमें प्रमुख अनुप्रस्थ बालुका स्तूप हैं — बरखान (अर्धचन्द्राकार) और परवलयी (पेराबोलिक)।
👉 ये स्तूप वायु की दिशा, वनस्पति की उपस्थिति, और स्थलाकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
👉 बरखान जैसलमेर, सीकर, बाड़मेर आदि में तथा परवलयी स्तूप पूरे मरुस्थलीय क्षेत्र में फैले हैं।

थार मरुस्थल के सन्दर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए 

(A) सम्पूर्ण मरुस्थल रेतीला एवं बालुका स्तूप क्षेत्र है।

(B) यह लगभग 1,75,000 वर्ग कि.मी. क्षेत्र में विस्तृत है। 

(C) यह 25 से.मी. समवर्षा रेखा के पश्चिम में स्थित है। 

(D) भालेरी (चूरू), मेंढा नदी घाटी (सीकर) में बरखान प्रकार के बालुका स्तूप पाये जाते हैं।  

[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]

सही विकल्प का चयन कीजिए -

कूट -

  • A, C और D 

  • B और C 

  • A, B और C 

  • B, C और D 

🔹 व्याख्या:

👉 (A) गलत — थार मरुस्थल का अधिकांश भाग रेतीला है, लेकिन कुछ क्षेत्र चट्टानी और बालुका स्तूप मुक्त भी हैं।
👉 (B) सही — थार मरुस्थल का विस्तार लगभग 1,75,000 वर्ग किलोमीटर है।
👉 (C) सही — यह क्षेत्र 25 से.मी. समवर्षा रेखा के पश्चिम में स्थित है और अत्यधिक शुष्क है।
👉 (D) सही — भालेरी (चूरू) और मेंढा नदी घाटी (सीकर) में बरखान प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं।

विन्ध्यन कगार भूमि प्रमुखतः निर्मित है - 

[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]

  • बेसाल्ट से 

  • संगमरमर एवं ग्रेनाइट से 

  • क्वार्टज़ाइट एवं ग्रेनाइट से 

  • बालुका पत्थर एवं शेल से 

🔹 व्याख्या:

👉 विन्ध्य श्रेणी की संरचना में मुख्यतः बालुका पत्थर, शेल और चूना पत्थर पाए जाते हैं।
👉 इस प्रकार की शैल रचना का विस्तार पूर्वी राजस्थान एवं दक्षिण-पूर्वी मेवाड़ में हुआ है।
👉 करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर, बूँदी आदि क्षेत्रों में यही शैल भू-आकृति बनाते हैं।

मध्य अरावली का निम्नतम उच्चावच क्षेत्र है ?

[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]

  • भोराठ पठार  

  • आबू ब्लाक  

  • मारवाड़ क्षेत्र  

  • सांभर क्षेत्र  

🔹 व्याख्या:

👉 मध्य अरावली प्रदेश मुख्यतः अजमेर जिले में फैला हुआ है, जहाँ पर्वत श्रेणियाँ, घाटियाँ और समतल स्थल मिलते हैं।
👉 इस क्षेत्र का निम्नतम उच्चावच भाग उत्तरी अजमेर में स्थित सांभर क्षेत्र है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति अपेक्षाकृत समतल और नीची है।
👉 इसके विपरीत दक्षिण-पश्चिम अजमेर में तारागढ़ और नाग पहाड़ जैसे ऊँचे शिखर स्थित हैं।

गोदवाड़ प्रदेश राजस्थान के किस बृहत् भू- आकृतिक विभाग का भाग है ? 

[LDC (RPSC) 23.10.2016]

  • घग्घर मैदान 

  • हाड़ौती पठार

  • पूर्वी मैदानी प्रदेश

  • पश्चिमी शुष्क प्रदेश

🔹 व्याख्या:

👉 गोदवाड़ प्रदेश राजस्थान के पश्चिमी शुष्क प्रदेश का भाग है, जिसमें पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर एवं नागौर के दक्षिणी भाग सम्मिलित हैं।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः लूनी और उसकी सहायक नदियों द्वारा सिंचित लूनी-जवाई बेसिन के रूप में जाना जाता है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में मैदानी भाग, बालुका स्तूप और यत्र-तत्र एकाकी पहाड़ियाँ पाई जाती हैं।
👉 यह प्रदेश मरुस्थलीय सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण अर्द्ध शुष्क विशेषताओं से युक्त है।

गर्मियों में माउन्ट आबू का तापमान, राजस्थान के अन्य स्थानों की तुलना में कम रहता है, क्योंकि

[कनिष्ठ लेखाकार (RPSC) 04.10.2016]

  • राजस्थान में माउन्ट आबू की समुद्र तट से दूरी सर्वाधिक है । 

  • माउन्ट आबू पर वायुमण्डलीय दबाव कम है । 

  • माउन्ट आबू उच्चतर ऊंचाई पर स्थित है 

  • माउन्ट आबू में मानसूनी हवाओं का प्रभाव अधिक रहता है । 

🔹 व्याख्या:

👉 माउण्ट आबू राजस्थान का एकमात्र पर्वतीय स्थल है, जिसकी औसत ऊँचाई समुद्र तल से लगभग 1200 मीटर है।
👉 इसकी ऊँचाई, वनावरण और पर्वतीय अवस्थिति के कारण यहाँ की जलवायु अन्य स्थानों की तुलना में शीतल रहती है।
👉 यहाँ स्थित गुरु शिखर (1722 मीटर) प्रदेश का सर्वोच्च शिखर है, जो तापमान में कमी का एक प्रमुख कारण है।
👉 इन सभी भौगोलिक विशेषताओं के कारण गर्मियों में माउण्ट आबू ठंडा रहता है।

निम्नलिखित में से कौन सा 'बागड़' के नाम से भी जाना जाता है ?

[योगा चिकित्सा अधिकारी 10.03.2021]

  • चम्बल बेसिन 

  • मध्य माही का मैदान 

  • बनास का मैदान 

  • हाड़ौती का पठार 

🔹 व्याख्या:

👉 मध्य माही बेसिन, जिसे छप्पन का मैदान भी कहा जाता है, राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में स्थित है।
👉 यह क्षेत्र माही नदी और उसकी सहायक नदियों से सिंचित एक असमतल भू-भाग है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति में छोटी-छोटी पहाड़ियाँ, संकीर्ण घाटियाँ एवं गहरे कटाव पाए जाते हैं। 

राजस्थान में किस भौतिक क्षेत्र में मुकन्दरा की पहाड़ियाँ स्थित हैं ? 

सहायक आचार्य [24.04.2016]

  • शेखावाटी प्रदेश

  • दक्षिणी अरावली

  • माही बेसिन 

  • हाड़ौती पठार 

🔹 व्याख्या:

👉 मुकन्दरा की पहाड़ियाँ राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी पठारी क्षेत्र में स्थित हैं, जिसे हाड़ौती पठार कहा जाता है।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों में फैला हुआ है।
👉 मुकन्दरा की पहाड़ियाँ लगभग 120 किमी लंबी हैं और इनकी ऊँचाई 335 से 503 मीटर तक होती है।
👉 इस क्षेत्र की अन्य विशेषताएँ हैं — नदी निर्मित मैदान, शाहबाद का उच्च क्षेत्र, और रामगढ़ क्रेटर।

अरावली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये व सही उत्तर का चयन नीचे दिए कूट से कीजिए ?

(A) यह एक प्रमुख जल विभाजक है|

(B) राजस्थान की समस्त नदियों का उद्गम यही से है|

(C) राजस्थान में वर्षा का वितरण  इससें प्रभावित नहीं होता हैं|

(D) यह प्रदेश धात्विक खनिजों से समृद्ध है|

[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]

कूट :  

  • केवल C एवं D सही है|  

  • A, B एवं C सही है|

  • केवल A एवं D सही है|

  • B, C एवं D सही है|  

🔹 व्याख्या:

👉 (A) सही — अरावली पर्वत राजस्थान का प्रमुख जल विभाजक है, जो नदियों को पूर्व और पश्चिम में विभाजित करता है।
👉 (B) गलत — राजस्थान की समस्त नदियों का उद्गम अरावली से नहीं होता, केवल कुछ प्रमुख नदियाँ जैसे बनास, लूनी, साबरमती आदि ही निकलती हैं।
👉 (C) गलत — अरावली पर्वत की स्थिति के कारण दक्षिण-पश्चिमी मानसून की वर्षा प्रभावित होती है, इसलिए यह वर्षा वितरण को प्रभावित करता है।
👉 (D) सही — अरावली क्षेत्र धात्विक खनिजों से समृद्ध है, यहाँ ताँबा, जस्ता, सीसा आदि पाए जाते हैं।

निम्नलिखित में से कौनसा राजस्थान में अर्द्धमरुस्थलीय भौतिक प्रदेश का भाग नहीं है ?  

[पुरालेखपाल परीक्षा 03.08.2024]

  • छप्पन का मैदान 

  • शेखावाटी प्रदेश 

  • गोडवार प्रदेश 

  • घग्घर का मैदान 

🔹 व्याख्या:

👉 शेखावाटी प्रदेश में मध्यम ऊँचाई के बालुका स्तूप, लवणीय गर्त एवं आन्तरिक जलप्रवाह की धाराएँ हैं।
👉 घग्घर का मैदान समतल, उपजाऊ एवं सिंचित क्षेत्र है — यह अर्द्धमरुस्थलीय नहीं है।
👉 गोडवार (लूनी-जवाई बेसिन) मरुस्थल से सटा हुआ क्षेत्र है, परन्तु इसका दक्षिणी भाग अधिक उपजाऊ है।