राजस्थान में मध्यम काली मिट्टी का विस्तार किस प्रदेश में है?

[Lecturer (Ayurved) 12.01.2026]

  • मरुस्थल

  • हाड़ौती पठार

  • अरावली

  • अर्द्ध मरुस्थल

🔹 व्याख्या

👉 मध्यम काली मिट्टी मुख्यतः हाड़ौती क्षेत्र में पाई जाती है।
👉
यह मिट्टी कपास उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
👉
इसका विस्तार कोटा-बूंदी क्षेत्र में है।
👉
यह क्षेत्र हाड़ौती पठार कहलाता है।

✍️ सही उत्तर है – हाड़ौती पठार

राजस्थान में कछारी मिट्टी कौन से जिलों में पायी जाती है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (SST) 17.02.2019]

  • चुरू, अजमेर, नागौर व सीकर 

  • जोधपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़ व उदयपुर 

  • दौसा, धौलपुर, कोटा व सवाई माधोपुर 

  • सीकर, जालौर, बारां व झुन्झुनूं 

🔹 व्याख्या:

👉 कछारी (जलोढ़) मृदा राजस्थान के पूर्वी भागों में पाई जाती है।
👉 यह विशेषकर भरतपुर, धौलपुर, दौसा, जयपुर, टोंक और सवाई माधोपुर जिलों में विस्तारित है।
👉 इस मृदा में चूना, फास्फोरिक अम्ल और ह्यूमस की कमी होती है।
👉 यह मृदा उत्पादकता की दृष्टि से उत्तम मानी जाती है।

मिश्रित लाल व काली मृदा कौन से जिलों में पायी जाती है ? 

[मूल्यांकन अधिकारी 23.08.2020]

  • डूंगरपुर - बाँसवाड़ा

  • पाली - सिरोही 

  • धौलपुर - करौली 

  • अजमेर - नागौर 

🔹 व्याख्या:

👉 मिश्रित लाल व काली मृदा मुख्यतः डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा भीलवाड़ा, उदयपुर के पूर्वी भाग तथा चित्तौड़गढ़ में भी मिलती है।
👉 इसमें फास्फेट, नाइट्रोजन, कैल्शियम और कार्बनिक पदार्थों की कमी होती है।
👉 इस मृदा में सामान्यतः कपास, मक्का आदि की खेती की जाती है।

लाल व पीली मिट्टी वाला जिला युग्म है 

[स्कूल व्याख्याता (भूगोल) 21.07.2016]

  • श्रीगंगानगर हनुमानगढ़

  • भरतपुर– धौलपुर 

  • झालावाड़ - बारां 

  • सवाई माधोपुर - करौली 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल व पीली मृदा का विस्तार मुख्यतः करौली, सवाई माधोपुर जिले के पश्चिमी भाग में होता है।

👉 इसके अलावा यह मृदा भीलवाड़ा (पश्चिमी भाग), अजमेर और सिरोही जिलों में भी पाई जाती है।
👉 इसमें कार्बोनेट की कमी होती है तथा यह नमी को अधिक समय तक रोक सकती है।

हाड़ौती प्रदेश में प्रधान प्रकार की मृदा है : 

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • अल्फी सॉइल्स 

  • इनसेप्टी सॉइल्स 

  • एण्टी सॉइल्स 

  • वर्टी सॉइल्स 

🔹 व्याख्या:

👉 वर्टी सॉइल्स मुख्य रूप से झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी जिलों में पाई जाती है, जो कि हाड़ौती क्षेत्र में स्थित हैं।
👉 यह मृदा गहरी, काली और उपजाऊ होती है तथा इसे काली मिट्टी के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है।
👉 इसके अतिरिक्त यह सवाई माधोपुर, भरतपुर, गंगापुर सिटी, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा में भी सीमित रूप से मिलती है।

राजस्थान के किस जिले में जिप्सीफेरस मृदा पाई जाती है

[Asst. Prof. (भूगोल) 28.09.2021]

  • बीकानेर  

  • जालौर 

  • चूरू 

  • टोंक 

🔹 व्याख्या:

👉 जिप्सीफेरस मृदा का विस्तार विशेष रूप से बीकानेर जिले में होता है।
👉 यह मृदा कृषि विभागीय वर्गीकरण के अंतर्गत आती है।

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - 

(A) इसमें चिका व दोमट दोनों प्रकार की मृदा मिलती हैं।

(B) इस मृदा में नमी अधिक समय तक धारण  करने की क्षमता होती हैं।

(C) यह मृदा भीलवाड़ा, अजमेर, सिरोही, जिलों में मिलती हैं।

उपरोक्त कथनों के आधार पर राजस्थान की मृदा का प्रकार बताइए - 

[स्कूल व्याख्याता (भूगोल) 24.06.2025]

  • मध्यम काली मृदा

  • लाल-पीली मृदा

  • जलोढ़ मृदा

  • लाल-लोमी मृदा

🔹 व्याख्या:

👉 इसमें चिका व दोमट दोनों प्रकार की मृदा मिलती है।
👉 इसमें नमी को अधिक समय तक धारण करने की क्षमता होती है।
👉 यह मृदा भीलवाड़ा, अजमेर और सिरोही जिलों में पाई जाती है।

✍️ सही उत्तर है – लाल-पीली मृदा

राजस्थान के किस जिले में रेवेरिना प्रकार की मृदा मिलती है ? 

[अन्वेषण उत्खनन अधिकारी 19.06.2024]

  • चूरू 

  • गंगानगर 

  • सवाई माधोपुर 

  • करौली 

🔹 व्याख्या:

👉 रेवेरिना मृदा का विस्तार राजस्थान के गंगानगर जिले में पाया जाता है।
👉 यह मृदा कृषि विभागीय वर्गीकरण के अनुसार सूचीबद्ध की गई है।
👉 गंगानगर जिले में इसके साथ सी-रोजेम्स मृदा भी पाई जाती है। 

राज्य में भूमि अवनयन के अन्तर्गत सर्वाधिक क्षेत्र प्रभावित है 

[सहायक कृषि अधिकारी 28.08.2022]

  • जलमग्नता से 

  • लवणता से 

  • जल अपरदन से 

  • वायु अपरदन से 

🔹 व्याख्या:

👉 वायु अपरदन से 43.37% ,जल अपरदन से 6.21% भूमि प्रभावित है

अधिक अवनालिका अपरदन वाले जिले हैं 

[Head Master 11.10.2021]

  • अलवर, भरतपुर, दौसा और जयपुर 

  • डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ 

  • अजमेर, भीलवाड़ा, टोंक और बूंदी 

  • धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और कोटा 

🔹 व्याख्या:

👉 अवनालिका (गली) अपरदन से सर्वाधिक प्रभावित जिले हैं — धौलपुर और सवाई माधोपुर, जहाँ चम्बल नदी के कारण बीहड़ों का निर्माण अधिक हुआ है।
👉 हाड़ौती का पठार भी जल अपरदन से प्रभावित क्षेत्र है, जिसमें कोटा शामिल है।
👉 अरावली के पूर्वी ढालों पर वर्षा के समय तेज प्रवाह से भी मृदा का क्षरण होता है।
👉 इन क्षेत्रों में जल अपरदन से चार लाख हैक्टेयर भूमि प्रभावित मानी गई है। 

राजस्थान के कौन से क्षेत्र में एन्टीसोल समूह की मृदाएँ/मिट्टियाँ पायी जाती है ? 

[मूल्यांकन अधिकारी 23.08.2020]

  • पूर्वी भाग 

  • दक्षिणी भाग 

  • पश्चिमी भाग 

  • दक्षिणी पूर्वी क्षेत्र 

🔹 व्याख्या:

👉 एन्टी सॉइल्स (Anti Soils) राजस्थान के पश्चिमी भागों में पाई जाती हैं।
👉 इसके उपवर्ग टोरी सामेन्ट्स और डस्ट फ्लूबेन्ट्स का विस्तार भी इन्हीं क्षेत्रों में है।
👉 इस मृदा का रंग सामान्यतः हल्का पीला और भूरा होता है।
👉 यह मृदा समूह शुष्क जलवायु वाले भागों की विशेषता दर्शाता है।

पाली, नागौर तथा अजमेर जिलों में किस प्रकार की मृदा पाई जाती है ?

[स. सांख्यिकी अधिकारी 27.05.2019]

  • धूसर - भूरी (ग्रे - ब्राउन) जलोढ़ 

  • गहरी मध्यम काली 

  • लाल दोमट 

  • पीली-भूरी 

🔹 व्याख्या:

👉 पाली, नागौर तथा अजमेर जिलों में धूसर-भूरी जलोढ़ मृदा (Gray-Brown Alluvial Soils) पाई जाती है।
👉 यह मृदा जालौर, डीडवाना-कुचामन, ब्यावर एवं सिरोही जिलों में भी फैली हुई है।
👉 इसका रंग धूसर से भूरा होता है और यह नदी घाटियों में पाई जाती है।

राजस्थान के किस प्रदेश में वर्टी मृदा मिलती है ?

सहायक आचार्य [30.05.2019]

  • घग्घर का मैदान

  • लूनी बेसिन

  • शेखावाटी 

  • हाड़ौती का पठार

🔹 व्याख्या:

👉 वर्टी मृदा राजस्थान में मुख्यतः झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा हाड़ौती प्रदेश का प्रमुख मृदा प्रकार है और इसे वैज्ञानिक वर्गीकरण में Verti Soils कहा गया है।
👉 इसके अतिरिक्त यह सवाई माधोपुर, भरतपुर, गंगापुर सिटी, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा में भी सीमित रूप में मिलती है।

लवणीय मृदा किस जिला - युग्म में मुख्यतः पाई जाती है ? 

[PTI & Librarian 03.05.2025]

  • दौसा - सवाई माधोपुर 

  • भरतपुर- धौलपुर 

  • जालौर - बाड़मेर 

  • चुरू – झुन्झुनू 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में लवणीय मृदा कुछ जिलों में प्रमुख रूप से मिलती है।
👉 यह मुख्यतः जालौर और बाड़मेर जिलों में पाई जाती है।

✍️ सही उत्तर है – जालौर – बाड़मेर 

तारा बालुका स्तूप जिसके निकट मिलते हैं, वह है [*]

[स्कूल व्याख्याता (भूगोल) 21.07.2016]

  • बाड़मेर 

  • सूरतगढ़ 

  • जोधपुर 

  • जैसलमेर 

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है।  

निम्नलिखित में से किन प्रदेशों में नॉन कैल्सिक भूरी मृदा पाई जाती है ?  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • नागौर, दौसा, टोंक, सवाई माधोपुर

  • गंगानगर, उदयपुर, कोटा, बूंदी

  • भीलवाड़ा, उदयपुर, कोटा, बीकानेर

  • नागौर, सीकर, अलवर, जयपुर

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में नॉन कैल्सिक भूरी मृदा कुछ जिलों में पाई जाती है।
👉 इसके प्रमुख जिले हैं – नागौर, सीकर, अलवर और जयपुर।

✍️ सही उत्तर है – नागौर, सीकर, अलवर, जयपुर

लाल-चिकनी बलुई मिट्टी (लाल - लोमी) राजस्थान के कौन से जिलों में पायी जाती है ? 

[AEN 16 दिसम्बर 2018]

  • अजमेर  - पाली 

  • कोटा  - चित्तौडगढ़ 

  • बारां  - झालावाड़ 

  • उदयपुर  - डूंगरपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल-लोमी मृदा (लाल-चिकनी बलुई मिट्टी) मुख्यतः उदयपुर जिले के मध्य एवं दक्षिणी भाग में पाई जाती है।
👉 इसके साथ यह मृदा डूंगरपुर जिले में भी प्रमुखता से मिलती है।
👉 इसमें चूना, पोटाश, लौह-ऑक्साइड और फास्फोरस की मात्रा कम होती है।
👉 यह मृदा मक्का, चावल, गन्ना आदि फसलों की खेती के लिए सामान्य उपजाऊ मानी जाती है।

काली मिट्टी राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में पायी जाती है ? 

[Asst. Town Planner 16.06.2023]

  • बारां 

  • सिरोही 

  • दौसा 

  • चुरू 

🔹 व्याख्या:

👉 काली मिट्टी राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में पाई जाती है, जिसमें बारां जिला भी शामिल है।
👉 यह मृदा विशेष रूप से कोटा, बूँदी, झालावाड़ और बारां जिलों में विस्तारित है।
👉 इसे मध्यम प्रकार की काली मृदा कहा जाता है जो कपास, मूँगफली, दालों के लिए उपयुक्त है।
👉 इसमें कैल्शियम व पोटाश पर्याप्त होते हैं, जबकि नाइट्रोजन व फास्फेट कम।

राजस्थान में विन्ध्यन कगार जिससे निर्मित है, वह है 

[स्कूल व्याख्याता (भूगोल) 21.07.2016]

  • बालुका पत्थर 

  • क्वार्टज़ाइट 

  • चूना पत्थर 

  • डोलोमाइट 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में जो विन्ध्यन कगार निर्मित हैं, वे मुख्यतः बालुका पत्थर से बने होते हैं।
👉 यह संरचना प्राचीन भूगर्भिक काल की चट्टानों से बनी हुई है।

डी. सी. जोशी के अनुसार राजस्थान में कितने मृदा खण्ड है-  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (संस्कृत)

  • 16

  • 13 

  • 19

  • 10 

🔹 व्याख्या:

👉 डी. सी. जोशी के अनुसार राजस्थान को 13 मृदा खण्डों में विभाजित किया गया है।
👉 यह वर्गीकरण मृदा के प्रकारों, बनावट, संरचना और क्षेत्रीय वितरण के आधार पर किया गया है।
👉 प्रत्येक मृदा खण्ड की अपनी विशिष्ट भौगोलिक एवं कृषियोग्य विशेषताएँ होती हैं।

कोटा, बूंदी तथा झालावाड़ में अधिकांशतः किस प्रकार की मृदा पाई जाती है ?  

[Asst. Testing Officer 08.07.2025]

  • पर्वतीय मृदा 

  • रिवेरिना 

  • पीली भूरी मृदा 

  • गहरी मध्यम काली मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिलों में प्रमुख मृदा प्रकार पाई जाती है।
👉 यहाँ अधिकांशतः गहरी मध्यम काली मृदा मिलती है।

✍️ सही उत्तर है – गहरी मध्यम काली मृदा 

राजस्थान में मरुस्थलीकरण के लिए निम्नलिखित में से कौनसा कारक जिम्मेदार नहीं है ?  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • अतिचारण 

  • बालुका स्तूपों का स्थायीकरण 

  • वनोन्मूलन 

  • जल का अतिदोहन 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मरुस्थलीकरण के लिए प्रमुख कारण हैं – वनोन्मूलन, जल का अतिदोहन और अतिचारण।
👉 लेकिन बालुका स्तूपों का स्थायीकरण मरुस्थलीकरण का कारण नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – बालुका स्तूपों का स्थायीकरण

सिरोही, पाली, भीलवाड़ा तथा उदयपुर जिलों में अधिकांशतः निम्नलिखित में से किस प्रकार की मृदा पाई जाती है ?  

[सहायक आचार्य परीक्षा 08.09.2024]

  • वर्टिसोल्स 

  • एन्टिसोल्स 

  • अल्फिसोल्स 

  • इनसेप्टिसोल्स 

🔹 व्याख्या:

👉 इनसेप्टिसोल्स मृदा मुख्यतः अर्ध-शुष्क से आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में पाई जाती है।
👉 राजस्थान में यह मृदा सिरोही, पाली, राजसमंद, उदयपुर, सलूम्बर, भीलवाड़ा जिलों में प्रमुख रूप से विस्तारित है।
👉 इसके अतिरिक्त जयपुर, सवाई माधोपुर, झालावाड़ में भी कहीं-कहीं यह मृदा मिलती है।

जिप्सीफेरस मृदा के वृहत क्षेत्र मिलते हैं - 

[Research Scholar 04.08.2024]

  • बीकानेर में 

  • भरतपुर में 

  • चूरू में 

  • भीलवाड़ा में 

🔹 व्याख्या:

👉 जिप्सीफेरस मृदा (Gypsiferrous Soils) के वृहत क्षेत्र राजस्थान के बीकानेर जिले में मिलते हैं।
👉 यह मृदा वर्गीकरण कृषि विभाग द्वारा किया गया है।
👉 बीकानेर के अतिरिक्त यह मृदा आसपास के मरुस्थलीय क्षेत्रों में भी देखी जाती है।
👉 यह मृदा शुष्क जलवायु की विशेषता दर्शाती है। 

डूंगरपुर तथा बाँसवाड़ा के अधिकांश भाग में है 

[पशु चिकित्सा अधिकारी 02.08.2020]

  • लाल दोमट (लोम) मृदा 

  • जिप्सीफेरस मृदा 

  • ग्रे ब्राउन जलोढ़ मृदा 

  • रेवरिना मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 डूंगरपुर तथा बाँसवाड़ा जिलों के अधिकांश भागों में लाल-लोमी (लाल दोमट) मृदा पाई जाती है।
👉 यह मृदा सामान्य उपजाऊ होती है और इसमें मक्का, चावल, गन्ना जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
👉 इसमें चूना, पोटाश, फास्फोरस की मात्रा कम होती है और इसका रंग लौह अंश के कारण लाल होता है।
👉 यह मृदा डूंगरपुर व उदयपुर के मध्य एवं दक्षिणी भागों में फैली हुई है।

राजस्थान में नॉन- कैल्साइट ब्राउन (भूरी) मृदा किन्न जिलों में पाई जाती है ?  

[EO RO (Re Exam) 23 मार्च 2025]

  • प्रतापगढ़, डूंगरपुर तथा बांसवाड़ा 

  • गंगानगर, चूरू तथा बीकानेर 

  • जालौर, पाली तथा बालोतरा 

  • जयपुर, सीकर तथा झुन्झुनूँ

🔹 व्याख्या:

👉 नॉन-केल्सिल ब्राउन (भूरी) मृदा का विस्तार जयपुर, सीकर और झुंझुनूं जिलों में होता है।
👉 इसके अतिरिक्त यह मृदा नागौर, अजमेर, ब्यावर और अलवर जिलों में भी पाई जाती है।
👉 यह मृदा कृषि विभागीय वर्गीकरण के अंतर्गत आती है।

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए कूट का  प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए -  

      सूची-I       सूची-II  

(मिट्टी के प्रकार) (जिले)  

A एरिडीसोल्स     1. पाली , सिरोही , राजसमंद , भीलवाड़ा 

B. इनसैप्टीसोल्स 2. झालावाड , बारां , कोटा , बूंदी 

C. वर्टीसोल्स      3. चुरू , सीकर , झुंझुनू , नागौर 

D. अल्फीसोल्स  4. जयपुर , अलवर , भरतपुर , सवाई माधोपुर 

[Asst. Prof. (भूगोल) 04.07.2016]

  • A-3, B-1, C-2, D-4  

  • A-2, B-1, C-4, D-3  

  • A-1, B-2, C-3 D-4  

  • A-4, B-3, C-1, D-2  

🔹 व्याख्या:

👉 A. एरिडीसोल्स — 3. चूरू, सीकर, झुंझुनूं, नागौर
👉 B. इनसेप्टीसोल्स — 1. पाली, सिरोही, राजसमंद, भीलवाड़ा
👉 C. वर्टीसोल्स — 2. झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी
👉 D. अल्फीसोल्स — 4. जयपुर, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर

सही कूट है — A-3, B-1, C-2, D-4

राजस्थान के कौन से जिलों के समूह में वर्टीसोल्स प्रकार की मृदा पाई जाती है?  

[वरिष्ठ अध्यापक (SST) 08.02.2018]

  • टॉक, जयपुर, दौसा एव धौलपुर  

  • सीकर, झुंझुनू, नागौर एवं चुरू  

  • बांसवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर एवं राजसमन्द  

  • कोटा, बूंदी, झालावाड़ एव बारां  

🔹 व्याख्या:

👉 वर्टीसोल्स मृदा का विस्तार मुख्यतः कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां जिलों में होता है।
👉 यह मृदा काली मिट्टी का वैज्ञानिक वर्गीकरण मानी जाती है।

राजस्थान में निम्न में से कौन से जिले मुख्यतः बीहड़ प्रभावित हैं

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, जैसलमेर 

  • अजमेर, भीलवाड़ा, पाली 

  • भीलवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमन्द

  • कोटा, सवाई माधोपुर, धौलपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में बीहड़ प्रभावित जिले हैं — धौलपुर और सवाई माधोपुर, जहाँ चम्बल नदी और उसकी सहायक नदियाँ भूमि का गहरा कटाव करती हैं।
👉 इन जिलों में अधिक अवनालिका अपरदन के कारण हजारों हैक्टेयर भूमि नष्ट हो चुकी है।
👉 हाड़ौती क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला कोटा जिला भी जल अपरदन से प्रभावित है।

राजस्थान के किन जिलों में लाल लोमीं मिट्टी पायी जाती है ?  

[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]

  • नागौर, अजमेर 

  • जैसलमेर, जालौर 

  • उदयपुर, डूंगरपुर 

  • कोटा, बारां 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल-लोमी मृदा प्रमुखतः उदयपुर जिले के मध्य एवं दक्षिणी भाग में पाई जाती है।
👉 इसके अलावा यह मृदा डूंगरपुर जिले में भी मुख्य रूप से मिलती है।
👉 इसमें लौह अंश के कारण इसका रंग लाल होता है और यह सामान्य उपजाऊ मानी जाती है।
👉 इसमें मक्का, चावल, गन्ना जैसी फसलें सामान्यतः उगाई जाती हैं।

राजस्थान में निम्नलिखित में से कौनसी मृदा दक्कन ट्रैप से विकसित/निर्मित हुई है ?  

[सहायक सांख्यिकी अधि. 25.08.2024]

  • स्लेटी भूरी 

  • काली 

  • लाल लोमी 

  • भूरी 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़) में गहरे काले रंग की 'काली मृदा' पाई जाती है。 इसे 'कपास वाली मिट्टी' या 'रेगुर मिट्टी' भी कहते हैंकाली मृदा (Black Soil) का निर्माण मुख्य रूप से ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान निकले लावे और बेसाल्ट (Basalt) चट्टानों के टूटने-फूटने और उनके अपक्षय (weathering) से हुआ है।

इसरो के भारत-मरुस्थलीकरण एटलस-2016 के अनुसार 2011 से 2013 के बीच राजस्थान का कितना प्रतिशत भू–भाग मरुस्थलीकरण/भूमि अवनयन के अंतर्गत था ?  

[Technical Assistant 07.07.2025]

  • 60.73% 

  • 64.34% 

  • 62.90% 

  • 63.90% 

🔹 व्याख्या:

👉 इसरो के भारत–मरुस्थलीकरण एटलस 2016 में आँकड़े दिए गए हैं।
👉 2011 से 2013 के बीच राजस्थान का लगभग 62.90% भू-भाग मरुस्थलीकरण/भूमि अवनयन के अंतर्गत था।

✍️ सही उत्तर है – 62.90% 

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सही उत्तर का चयन नीचे दिये गए कूट से कीजिये :

सूची-I (मृदा)

सूची-II (जिला)

A. रेवेरिना

i. डूंगरपुर

B. लाल-लोम

ii. झालावाड़

C. जिप्सीफेरस

iii. बीकानेर

D. काली गहरी मध्यम मृदा

iv. गंगानगर

कूट :

A B C D

[Asst. Prof. (Geo -II) 17.12.2025]

  • iii ii iv i

  • iv ii i iii

  • iv i iii ii

  • iii iv ii i

🔹 व्याख्या

👉 रेवेरिना मृदा का संबंध गंगानगर से है।
👉
लाल-लोम मृदा डूंगरपुर में पाई जाती है।
👉
जिप्सीफेरस मृदा बीकानेर क्षेत्र में मिलती है।
👉
काली गहरी मृदा झालावाड़ में पाई जाती है।

✍️ सही उत्तर है – iv, i, iii, ii

उदयपुर तथा कोटा जिलों में अधिकांशतः है 

[Food Safety Officer 27.06.2023]

  • नवीन भूरी मृदा 

  • कैल्सी ब्राउन मृदा 

  • लाल दुमर 

  • पर्वतीय मृदा

🔹 व्याख्या:

👉 पर्वतीय मृदा (Hilly Soils) का विस्तार मुख्यतः उदयपुर और कोटा जिलों में पाया जाता है।
👉 इसके साथ ही यह मृदा सलुम्बर क्षेत्र में भी पाई जाती है।
👉 यह वर्गीकरण राजस्थान के कृषि विभाग द्वारा किया गया है।

राजस्थान में 'मिश्रित लाल एवं काली' मृदा मुख्यतः पायी जाती है :

[Sub Inspector Exam 06.04.2026]

  • भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में

  • बाड़मेर और बालोतरा में

  • नागौर और झुन्झुनूं में

  • अजमेर और टोंक में

🔹 व्याख्या

👉 मिश्रित लाल एवं काली मृदा राजस्थान के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी जिलों में मुख्य रूप से पाई जाती है।

👉 यह मृदा विशेष रूप से भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर और बांसवाड़ा के क्षेत्रों में विस्तृत है।

👉 इसमें फास्फोरस, नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी होती है, परंतु यह कपास और मक्का हेतु उपयुक्त है।

👉 मालवा पठार के प्रभाव के कारण इस क्षेत्र में काली मिट्टी के अंश लाल मिट्टी के साथ मिश्रित मिलते हैं।

✍️ सही उत्तर है – भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में

राजस्थान सरकार ने "राज्य में उपजाऊ भूमि के मरुस्थलीकरण को रोककर और उलट कर" मिट्टी को बचाने के लिए किसके साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं ?

[Asst. Town Planner 16.06.2023]

  • रिलायंस फाउंडेशन 

  • श्री लाइफ ग्लोबल फाउंडेशन 

  • पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन 

  • ईशा फाउंडेशन 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान सरकार ने राज्य में उपजाऊ भूमि के मरुस्थलीकरण को रोकने व उलटने के लिए मिट्टी बचाओ अभियान के अंतर्गत ईशा फाउंडेशन के साथ एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं।
👉 यह पहल मृदा अपरदन की गंभीर समस्या से निपटने और भूमि की उत्पादकता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
👉 राजस्थान में मृदा की बड़ी समस्या वायु और जल अपरदन के रूप में सामने आती है, जिससे चार लाख हैक्टेयर भूमि प्रभावित है।
👉 इस दिशा में वृक्षारोपण, नियंत्रित पशु-चारण, फसल चक्र में परिवर्तन जैसे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं।

रजस्थान में कौन सा एक मरुस्थलीकरण का मानवजनित कारण नहीं है ? [*]

[स्कूल व्याख्याता (भूगोल) 2013]

  • भूमि उपयोग प्रारूप में परिवर्तन 

  • प्रौधोगिकी विकास 

  • अतिचारण 

  • जनसंख्या का दबाब 

📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है।  

लैटेराइट प्रकार की मिट्टी ______________में पाई जाती है। 

[EO RO (Shift I) 14.05.2023]

  • चूरू 

  • करौली

  • जोधपुर 

  • डूंगरपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 लेटेराइट मृदा डूंगरपुर जिले में प्रमुख रूप से पाई जाती है।
👉 यह मृदा सामान्य उपजाऊ होती है और इसमें मक्का, चावल, गन्ना जैसी फसलें उगाई जाती हैं।
👉 इसमें चूना, पोटाश, फास्फोरस की मात्रा कम होती है और इसका रंग लौह अंश के कारण लाल होता है।
👉 यह मृदा डूंगरपुर व उदयपुर के मध्य एवं दक्षिणी भागों में पाई जाती है।

'नालीनुमा' अपरदन सर्वाधिक पाया जाता है 

[मूल्यांकन अधिकारी 23.08.2020]

  • सिरोही में 

  • कोटा में

  • बीकानेर में 

  • जोधपुर में 

🔹 व्याख्या:

👉 नालीनुमा अपरदन मुख्यतः उन क्षेत्रों में होता है जहाँ जल तेज़ ढाल पर बहता है।
👉 यह समस्या कोटा सहित हाड़ौती पठार में अधिक पाई जाती है।
👉 यहाँ की भूमि पर वर्षा का जल तेजी से बहकर गहरे नालों (गर्लियों) का निर्माण करता है।
👉 इस प्रकार की कटाव प्रक्रिया से मृदा ह्रास और भूमि की उपजाऊ परत का नुकसान होता है।

राजस्थान के निम्नलिखित में से किन जिलों में लाल रेतीली मिट्टी पायी जाती है ? 

[पुरालेखपाल परीक्षा 03.08.2024]

  • अजमेर, जयपुर, दौसा 

  • जोधपुर, चूरू, झुन्झुनू 

  • कोटा, बारां, झालावाड़ 

  • सिरोही, प्रतापगढ़, राजसमन्द 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल रेतीली मृदा राजस्थान में विशेष रूप से जोधपुर, चूरू और झुंझुनूं जिलों में पाई जाती है।
👉 इसके अतिरिक्त यह मृदा नागौर, फलोदी और पाली जिलों में भी मिलती है।
👉 यह रेतीली मृदा का एक प्रकार है जो थार के मरुस्थलीय क्षेत्र में फैली हुई है।

डूंगरपुर तथा बाँसवाड़ा में अधिकांशत: है 

[वरिष्ठ अध्यापक (SST) 13.02.2023]

  • पर्वतीय मृदा

  • ग्रे ब्राउन जलोढ़ मृदा 

  • लाल लोम मृदा 

  • जिप्सीफेरस मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 डूंगरपुर तथा बाँसवाड़ा जिलों में अधिकांशतः लाल-लोम मृदा पाई जाती है।
👉 यह मृदा सामान्य उपजाऊ होती है और इसमें मक्का, चावल, गन्ना आदि फसलें उगाई जाती हैं।
👉 इसमें चूना, पोटाश, लौह-ऑक्साइड और फास्फोरस की मात्रा कम होती है।
👉 इसका रंग लौह अंश की उपस्थिति के कारण लाल होता है।

कृषि विभाग, राजस्थान के मृदा वर्गीकरण के अनुसार 'रेवरिना' मृदा पायी जाती है - 

[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]

  • जालौर  

  • उदयपुर

  • बीकानेर 

  • गंगानगर 

🔹 व्याख्या:

👉 रेवेरिना मृदा राजस्थान के गंगानगर जिले में पाई जाती है।
👉 यह वर्गीकरण राज्य के कृषि विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
👉 गंगानगर जिले में इसके साथ-साथ सी-रोजेम्स मृदा भी पाई जाती है।

राजस्थान के निम्न बेसिनों में से कहाँ अधिकतम बीहड़ भूमि पायी जाती है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]

  • मध्य माही 

  • लूनी 

  • चम्बल 

  • ऊपरी बनास 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में अधिकतम बीहड़ भूमि चम्बल बेसिन में पाई जाती है।
👉 विशेषकर धौलपुर और सवाई माधोपुर क्षेत्रों में चम्बल एवं उसकी सहायक नदियों के कारण बीहड़ों का तीव्र विकास हुआ है।
👉 बीहड़ों के निर्माण से हजारों हैक्टेयर भूमि नष्ट हो चुकी है।
👉 यह प्रदेश जल अपरदन से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है।

जयपुर, दौसा और अलवर जिलों में किस मृदा की प्रधानता है ?  

[RAS Pre परीक्षा 02.02.2025]

  • एन्टीसोल 

  • अल्फ़ीसोल्स 

  • वींसोल्स 

  • इनसेप्टीसोल्स 

🔹 व्याख्या:

👉 अल्फीसोल्स मृदा का विस्तार जयपुर, दौसा और अलवर जिलों में प्रमुख रूप से होता है।
👉 यह मृदा भरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा, कोटा, बारां, झालावाड़ आदि में भी पाई जाती है।
👉 यह मृदा अर्द्ध-शुष्क से आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में पाई जाती है।

राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है ? 

[AEN CIVIL 21 मई 2023]

  • बारां

  • कोटा

  • दौसा 

  • बूँदी

🔹 व्याख्या:

👉 जलोढ़ अथवा कच्छारी मृदा राजस्थान के पूर्वी भागों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा विशेषकर भरतपुर, धौलपुर, दौसा, जयपुर, टोंक तथा सवाई माधोपुर जिलों में विस्तृत है।
👉 इसमें चूना, फास्फोरिक अम्ल और ह्यूमस की कमी होती है।
👉 यह मृदा उत्पादकता की दृष्टि से उत्तम मानी जाती है। 

निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर राजस्थान में पायी जाने वाली मृदा की पहचान कीजिए :

(A) इस मृदा का निर्माण प्राचीन क्रिस्टलीय तथा कायान्तरित चट्टानों से हुआ है ।

(B) इस मृदा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा ह्यूमस की कमी पायी जाती है ।

(C) यह मृदा अधिकांशतः डूंगरपुर एवं बाँसवाड़ा जिलों में पायी जाती है ।

[A.En (Pre) EXAM 28.09.2025]

  • भूरी मृदा

  • मध्यम काली मृदा

  • लाल लोमी मृदा

  • जलोढ़ मृदा

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में पाई जाने वाली लाल लोमी मिट्टी प्राचीन क्रिस्टलीय चट्टानों एवं कायांतरित शैलों के अपक्षय से निर्मित होती है।
👉 इस मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा ह्यूमस जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की स्पष्ट कमी पाई जाती है।
👉 लाल दोमट मिट्टी का प्रमुख भौगोलिक विस्तार राज्य के दक्षिणी भागों में देखा जाता है।
👉 यह मिट्टी विशेष रूप से डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में अधिक मात्रा में पाई जाती है।
👉 पोषक तत्वों की कमी के कारण यह मिट्टी उर्वरता स्तर में अपेक्षाकृत निम्न होती है।

✍️ सही उत्तर है – लाल लोमी मिट्टी 

राजस्थान में मक्का की कौनसी एक किस्म नहीं है?

[Deputy Commandant 11.01.2026]

  • आर. सी. बी. - 911

  • नवज्योत

  • धवल

  • माही - कंचन

🔹 व्याख्या

👉 RCB-911 किस्म मक्का की नहीं है।
👉
यह बाजरा फसल की उन्नत किस्म है।
👉
जबकि माही कंचन, नवज्योत मक्का की प्रमुख किस्में हैं।
👉
इसका उत्पादन भीलवाड़ा, उदयपुर क्षेत्रों में अधिक है।

✍️ सही उत्तर है – आर. सी. बी. - 911

निम्नलिखित मृदा विशेषताएँ यथा :

(a) लवणों का उच्च प्रतिशत

(b) उच्च पी. एच. मान तथा जैविक पदार्थों की कमी

किस प्रकार की मृदा में पायी जाती है ?

[कृषि अधिकारी 20.04.2025]

  • रेतीली/बालू मृदा

  • लाल लोम मृदा

  • जलोढ़ मृदा/कछारी मृदा

  • काली मृदा

🔹 व्याख्या:

👉 दी गई विशेषताएँ – लवणों का उच्च प्रतिशत, उच्च pH मान और जैविक पदार्थों की कमी।
👉 ये विशेषताएँ राजस्थान की रेतीली/बालू मृदा में पाई जाती हैं।

✍️ सही उत्तर है – रेतीली/बालू मृदा

एरिडोसॉल मिट्टियाँ राजस्थान के निम्न में से कौन से जिला-युग्म में पाई जाती हैं ?

[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]

  • चुरू, झुन्झुनूं

  • नागौर, टोंक

  • नागौर, अजमेर

  • बाड़मेर, बीकानेर

🔹 व्याख्या

👉 एरिडोसॉल मिट्टी शुष्क व अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है।
👉
यह मुख्यतः राजस्थान के पश्चिमी जिलों में मिलती है।
👉
यह कम वर्षा वाले क्षेत्र की प्रमुख विशेषता है।
👉
उपयुक्त जिला-युग्म चूरू, झुंझुनूं है।

✍️ सही उत्तर है – चूरू, झुंझुनूं

लैटेराइट मिट्टी का निर्माण प्रधानतः उन क्षेत्रों में पाया जाता है, जहाँ होते हैं :

[वरिष्ठ अध्यापक (SST) 03.07.2019]

  • निम्न तापमान एवं भारी वर्षा 

  • उच्च तापमान एवं निम्न वर्षा

  • उच्च तापमान एवं भारी वर्षा

  • निम्न तापमान एवं निम्न वर्षा

🔹 व्याख्या:

👉 लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया से बनती है। यह मुख्य रूप से लौह (Iron) और एल्यूमीनियम से समृद्ध होती है, लेकिन इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की कमी होती है। यह कम उपजाऊ होती है, लेकिन उर्वरक डालने पर चाय, कॉफी और काजू के लिए बेहतरीन है।लैटेराइट मृदा की मुख्य विशेषताएं. नाम का अर्थ: लैटिन भाषा के शब्द 'लेटर' (Later) से बना है, जिसका अर्थ 'ईंट' होता है। भीगने पर यह मुलायम और सूखने पर अत्यंत कठोर हो जाती है, इसलिए इसका उपयोग ईंटें बनाने में किया जाता है।रंग: लौह ऑक्साइड (Iron Oxide) की प्रचुरता के कारण इसका रंग ईंट जैसा लाल होता है। निर्माण प्रक्रिया: भारी वर्षा के कारण मिट्टी के पोषक तत्व धुलकर नीचे चले जाते हैं, जिसे निक्षालन कहा जाता है।

मृदा का प्रकार जो कि राजस्थान में प्रमुखतया झालावाड़, बारां एवं कोटा जिलों में पाया जाता है ? 

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 12.11.2021]

  • काली रेगुर मृदा

  • लवणीय रेतीली मृदा

  • भूरी रेतीली मृदा

  • लाल मृदा

🔹 व्याख्या:

👉 मध्यम प्रकार की काली मृदा प्रमुखतः कोटा, बारां, झालावाड़ एवं बूँदी जिलों में पाई जाती है।
👉 इसका रंग गहरा भूरा से काला होता है और इसमें कच्छारी मृदा भी मिश्रित होती है।
👉 इसमें कैल्शियम व पोटाश पर्याप्त, परंतु फास्फेट, नाइट्रोजन व जैविक पदार्थ कम होते हैं।
👉 यह मृदा कपास, मूँगफली, दालों आदि की फसलों के लिए उपयुक्त है।

राजस्थान के किस जिले में लाल मिट्टी मिलती है ?

[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]

  • सिरोही 

  • बाँसवाड़ा 

  • जोधपुर 

  • कोटा 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल मिट्टी राजस्थान में बाँसवाड़ा जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा सामान्यतः काली मिट्टी के साथ मिश्रित रूप में मिलती है।
👉 इसमें फास्फेट, नाइट्रोजन, कैल्शियम की कमी होती है और इसका रंग लौह अंश के कारण लाल होता है।
👉 इसमें सामान्यतः कपास, मक्का जैसी फसलें उत्पादित होती हैं।

सिरोही, पाली तथा राजसमन्द में अधिकांशतः निम्नलिखित में से किस प्रकार की मृदा पाई जाती है ? 

[संग्रहाध्यक्ष पुरातत्व विभाग 19.06.2024]

  • एन्टिसोल्स 

  • एरिडीसोल्स 

  • इन्सेप्टीसोल्स 

  • वर्टीसोल्स 

🔹 व्याख्या:

👉 इनसेप्टी सॉइल्स (Incepti Soils) मुख्यतः सिरोही, पाली और राजसमंद जिलों में पाई जाती हैं।
👉 यह मृदा अर्द्ध शुष्क से आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में विकसित होती है।
👉 इसके अलावा यह मृदा उदयपुर, सलुम्बर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ में भी पाई जाती है।
👉 जयपुर, सवाई माधोपुर, झालावाड़ में यह मृदा कहीं-कहीं मिलती है।

वर्टीसोल्स राजस्थान के कौन से जिलो में पायी जाती है ? 

[स्कूल व्याख्याता (भूगोल) 2013]

  • नागौर - पाली 

  • झालावाड - बांरा

  • गंगानगर - हनुमानगढ़ 

  • जयपुर - दौसा 

🔹 व्याख्या:

👉 वर्टीसोल्स मृदा राजस्थान में मुख्यतः झालावाड़ और बारां जिलों में पाई जाती है।
👉 इसके अतिरिक्त यह मृदा कोटा और बूंदी में भी विस्तारित है।
👉 यह काली मिट्टी का वैज्ञानिक वर्गीकरण है और इसमें जल धारण क्षमता अधिक होती है।
👉 यह मृदा विशेष रूप से हाड़ौती क्षेत्र में मिलती है।

राजस्थान सरकार ने, 'स्टेट वेटलैण्ड अथॉरिटी' की स्थापना हेतु अधिसूचना किस वर्ष में जारी की थी ? 

[PTI & Librarian 03.05.2025]

  • 2016 

  • 2019 

  • 2017 

  • 2018 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में वेटलैण्ड संरक्षण हेतु विशेष प्राधिकरण बनाया गया।
👉 इसके लिए अधिसूचना वर्ष 2018 में जारी की गई थी।

✍️ सही उत्तर है – 2018 

डीडवाना, पचपद्रा, सांभर झीलों में मृदा पायी जाती है - 

[पशु चिकित्सा अधिकारी 02.08.2020]

  • सोलनचाँक 

  • लिथोसोल्स 

  • ब्राउन मृदा 

  • सीरोजेम्स 

🔹 व्याख्या:

👉 डीडवाना, पचपद्रा और सांभर जैसे क्षेत्रों में आसपास की भूमि में खारी मृदा पाई जाती है।
👉 यह मृदा आमतौर पर निम्न भूमि या गर्तों में पाई जाती है और इसमें लवण की मात्रा अधिक होती है।
👉 यह मृदा बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर और डीडवाना-कुचामन जिलों में मिलती है।
👉 यह मृदा अत्यधिक लवणीय होती है, जिससे कृषि उपयोगिता सीमित हो जाती है।

राजस्थान में निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्र -सतही जल द्वारा मृदा-अपरदन से सर्वाधिक प्रभावित है? 

सहायक आचार्य [22.09.2021]

  • गोडवाड़ प्रदेश 

  • चम्बल प्रदेश 

  • मारवाड़ प्रदेश 

  • शेखावाटी प्रदेश 

🔹 व्याख्या:

👉 चम्बल प्रदेश राजस्थान में सतही जल द्वारा मृदा अपरदन से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र है।
👉 विशेषकर धौलपुर और सवाई माधोपुर जिलों में बीहड़ों (ravines) का तीव्र निर्माण हुआ है।
👉 यह स्थिति चम्बल तथा उसकी सहायक नदियों के कारण उत्पन्न हुई है।
👉 इसके अतिरिक्त हाड़ौती पठार और अरावली के पूर्वी ढाल पर भी जल अपरदन होता है।

राजस्थान में मध्यम काली मिट्टी का विस्तार किस प्रदेश में है ?

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 11.11.2021]

  • हाडौती 

  • अर्द्ध-शुष्क मरुस्थल 

  • अरावली 

  • पूर्वी मैदान

🔹 व्याख्या:

👉 मध्यम प्रकार की काली मृदा का विस्तार हाड़ौती पठार में पाया जाता है।
👉 यह मुख्यतः कोटा, बारां, बूँदी और झालावाड़ जिलों में विस्तारित है।
👉 इसमें कैल्शियम व पोटाश पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जबकि फास्फेट व नाइट्रोजन कम।
👉 यह मृदा कपास, मूँगफली, दालों जैसी व्यापारिक फसलों के लिए उपयुक्त है।

लाल-पीली मिट्टी राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में पायी जाती है ? 

[EO RO (Shift II) 14.05.2023]

  • कोटा 

  • बारां 

  • बूँदी 

  • सवाई माधोपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के मध्य और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में लाल-पीली मिट्टी पाई जाती है, जिसका मुख्य कारण लोहे के अंश और नमी की उपस्थिति है。यह कम उपजाऊ होती है, लेकिन सिंचाई और उर्वरकों की मदद से इसमें मूंगफली, कपास और मोटे अनाज की अच्छी खेती की जाती है。प्रमुख क्षेत्र यह मिट्टी मुख्य रूप से राजस्थान के निम्नलिखित जिलों में फैली हुई है :भीलवाड़ा,अजमेर,सवाई माधोपुर,सिरोही,टोंक और करौली

राजस्थान में पीली-भूरी मृदा के क्षेत्र हैं - 

[Technical Assistant 07.07.2025]

  • भीलवाड़ा, टोंक, उदयपुर 

  • जोधपुर, अलवर, भीलवाड़ा

  • नागौर, अजमेर, टोंक 

  • उदयपुर, कोटा, बाँसवाड़ा 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में पीली-भूरी मृदा कुछ जिलों में पाई जाती है।
👉 इसके प्रमुख क्षेत्र हैं – भीलवाड़ा, टोंक और उदयपुर।

✍️ सही उत्तर है – भीलवाड़ा, टोंक, उदयपुर 

अर्द्ध-शुष्क जलवायु के लिए नमी की कमी सूचकांक मान कितना होता है ?

[कृषि अधिकारी 20.04.2025]

  • – 66.6 से ऊपर

  • 0 से - 33.3

  • - 33.3 से – 66.6

  • 0 से 33.3

🔹 व्याख्या:

👉 नमी की कमी सूचकांक (Moisture Deficiency Index) से जलवायु का आकलन किया जाता है।
👉 अर्द्ध-शुष्क जलवायु के लिए इसका मान –33.3 से –66.6 के बीच होता है।

✍️ सही उत्तर है = –33.3 से –66.6

राजस्थान के निम्नांकित किन जिलों में 'लाल लोम' (Red Loam) मृदा पाई जाती है ? 

सहायक आचार्य [24.04.2016]

  • भीलवाड़ा  -अजमेर 

  • जयपुर - दौसा 

  • बाँसवाड़ा - डूंगरपुर 

  • उदयपुर - कोटा 

🔹 व्याख्या:

👉 'लाल-लोम' (Red Loam) मृदा राजस्थान के डूंगरपुर एवं बाँसवाड़ा जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा राज्य के कृषि विभागीय वर्गीकरण में उल्लिखित है।
👉 इसके अतिरिक्त इन जिलों में लाल और काली मृदा का भी विस्तार है, जिसमें उत्पादकता में विविधता पाई जाती है।
👉 इस मृदा में सामान्यतः कपास, मक्का आदि फसलें ली जाती हैं।

राजस्थान के सिरोही और पाली जिलों में कौन से प्रकार की प्रधान मृदा मिलती है ? 

[लाइब्रेरियन ग्रेड -II [02.08.2020]

  • एण्टीसोल्स 

  • वर्टीसोल्स 

  • अल्फीसोल्स 

  • इनसेप्टीसोल्स 

🔹 व्याख्या:

👉 सिरोही और पाली जिलों में प्रमुख रूप से इनसेप्टीसोल्स (Incepti Soils) मृदा पाई जाती है।
👉 यह मृदा अर्द्ध शुष्क से आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में विकसित होती है।
👉 इसके अलावा यह मृदा राजसमंद, उदयपुर, सलुम्बर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ आदि में भी पाई जाती है।
👉 यह मृदा सामान्यत: ढलवां एवं पर्वतीय क्षेत्रों में मिलती है।

ग्रे- ब्राउन जलोढ़ मृदा पाई जाती है -

[Development Officer 29.07.2025]

  • उदयपुर तथा राजसमंद में

  • जोधपुर तथा बीकानेर में

  • भीलवाड़ा तथा चित्तौड़गढ़ में

  • जालौर तथा पाली में

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में पाई जाने वाली ग्रे–ब्राउन जलोढ़ मृदा एक हल्की भूरी से राख-भूरी मिट्टी होती है, जो जलोढ़ प्रकृति की विशेषताएँ रखती है।
👉 यह मिट्टी मुख्यतः लूणी बेसिन क्षेत्र में पाई जाती है, जहाँ जलोढ़ निक्षेपों का विस्तृत संचय मिलता है।
👉 इसका रंग हल्के भूरा से राख-भूरा होता है और बनावट रेतीली दोमट से लेकर चिकनी दोमट तक परिवर्तित हो सकती है।
👉 इस मृदा का प्रमुख भौगोलिक विस्तार पाली, जोधपुर, नागौर, जालौर और सिरोही जिलों में देखा जाता है।
👉 यह मिट्टी प्राकृतिक जलोढ़ प्रक्रियाओं से बनी होने के कारण उपयुक्त भौतिक गुण दर्शाती है।

✍️ सही उत्तर है – जालौर तथा पाली में  

निम्नलिखित में से कौनसा (मृदा प्रकार जिला/जिले) सुमेलित नहीं है ?  

[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]

  • सीरोजम - हनुमानगढ़, चूरू 

  • स्लेटी भूरी - जालोर, पाली 

  • जिप्सीफेरस - बीकानेर

  • रेवेरिना - गंगानगर 

🔹 व्याख्या:

👉 रेवेरिना – गंगानगर, जिप्सीफेरस – बीकानेर और स्लेटी भूरी (ग्रे-ब्राउन जलोढ़) – जालोर, पाली — ये सभी सही सुमेलित हैं।
👉 जबकि सी-रोजेम – हनुमानगढ़, चूरू गलत सुमेल है, क्योंकि यह मृदा केवल गंगानगर में पाई जाती है।
👉 अतः विकल्प में केवल रेवेरिना – गंगानगर आदि का समूह सुमेलित है।
👉 यह वर्गीकरण राज्य कृषि विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया है। 

वर्टीसोल मृदा मुख्य रूप से पाई जाती है

[स. सांख्यिकी अधिकारी 08.07.2022]

  • जैसलमेर, बाड़मेर, 'बीकानेर, जोधपुर ज़िलों में 

  • चूरू, सीकर, झुन्झुनू, नागौर जिलों में 

  • सिरोही, पाली, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ जिलों में 

  • झालावाड़, कोटा, बून्दी, बारां जिलों में

🔹 व्याख्या:

👉 वर्टी सॉइल्स (Verti Soils) राजस्थान में मुख्यतः झालावाड़, कोटा, बूंदी और बारां जिलों में पाई जाती हैं।
👉 इसके अतिरिक्त यह मृदा सवाई माधोपुर, भरतपुर, गंगापुर सिटी, डूंगरपुर और बाँसवाड़ा में सीमित रूप में मिलती है।
👉 यह मृदा काली मिट्टी का वैज्ञानिक वर्गीकरण मानी जाती है।
👉 इसका विस्तार विशेष रूप से हाड़ौती क्षेत्र में है।

नागौर तथा पाली की मुख्य मृदा प्रकार है -

[भूवैज्ञानिक परीक्षा 07.05.2025]

  • अल्फी मृदा 

  • लाल रेतीली मृदा 

  • लाल तथा पीली मृदा 

  • पीली, भूरी रेतीली मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 नागौर और पाली जिलों में पाई जाने वाली प्रमुख मृदा प्रकार है।
👉 यहाँ की मुख्य मृदा पीली, भूरी रेतीली मृदा है।

✍️ सही उत्तर है – पीली, भूरी रेतीली मृदा 

राजस्थान के कृषि विभाग के मिट्टी वर्गीकरण के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा जोड़ा सुमेलित नहीं है? 

[वरिष्ठ अध्यापक (SST) 29.10.2018]

मृदा का प्रकार – जिला / जिले 

  • सीरोज़ेम / साई रोजेम्स  – श्री गंगानगर 

  • नवीन उत्पत्ति वाली भूरी मृदा  – जालौर, पाली तथा नागौर 

  • रेवेरिना  –  श्री गंगानगर तथा हनुमानगढ़ 

  • लाल-लो – डूंगरपुर तथा बांसवाडा 

🔹 व्याख्या:

👉 सी-रोजेम्स – श्रीगंगानगर, रेवेरिना – श्रीगंगानगर, और लाल-लोम – डूंगरपुर, बाँसवाड़ा — ये सभी सही सुमेलित हैं।
👉 जबकि नवीन उत्पत्ति वाली भूरी मृदा का विस्तार भीलवाड़ा, अजमेर और ब्यावर में बताया गया है। 
👉 यह वर्गीकरण राज्य कृषि विभाग द्वारा किया गया है।

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए -

सूची-I (मृदा का प्रकार)

सूची-II (जिला)

(A) रिवेरिना

(i) कोटा

(B) जिप्सीफेरस

(ii) बांसवाड़ा

(C) लाल लोम

(iii) बीकानेर

(D) पर्वतीय मृदा

(iv) श्री गंगानगर

कूट -  

[Research Assistant 10.07.2025]

  • (A)-(i), (B)-(ii), (C)-(iii), (D)-(iv)

  • (A)-(iv), (B)-(iii), (C)-(ii), (D)-(i)

  • (A)-(iii), (B)-(ii), (C)-(i), (D)-(iv)

  • (A)-(ii), (B)-(i), (C)-(iv), (D)-(iii)

🔹 व्याख्या:

👉 रिवेरिना मृदा – श्री गंगानगर (iv)
👉 जिप्सीफेरस मृदा – बीकानेर (iii)
👉 लाल लोम मृदा – बांसवाड़ा (ii)
👉 पर्वतीय मृदा – कोटा (i)

✍️ सही उत्तर है – (A)-(iv), (B)-(iii), (C)-(ii), (D)-(i) 

 निम्न में से कौन सा एक उपाय मृदा संरक्षण का नहीं है ?

[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]

  • फसलों की हेराफेरी

  • वृक्षारोपण 

  • ऐनिकट का निर्माण

  • अत्यधिक जलापूर्ति

🔹 व्याख्या:

👉 अत्यधिक जलापूर्ति मृदा में अतिरिक्त नमी लाकर उसे क्षारीय या लवणीय बना सकती है।
👉 यह प्रक्रिया मृदा अपरदन या ह्रास को बढ़ावा देती है।
👉 जबकि वृक्षारोपण, नियंत्रित पशु-चारण, फसल चक्र में परिवर्तन जैसे उपाय मृदा संरक्षण के अंतर्गत आते हैं। 

केम्बोर्थिड्स, केल्सीऑर्थिड्स, सेलोर्थिड्स और पेलिऑर्थिड्स निम्न में से राजस्थान की किस मृदा के उप-विभाग हैं ?  

[AEN परीक्षा 30.06.2024]

  • वर्टीसोल्स 

  • एल्फीसोल्स 

  • एण्टीसोल्स 

  • एरिडोसोल्स

🔹 व्याख्या:

👉 केम्बो ऑरथिड्स, केल्सी ऑरथिड्स, सेलोर्थिड्स और पेलि ऑरथिड्स — ये सभी एरिडी सॉइल्स (Aridi Soils) के उपविभाग हैं।
👉 यह मृदा समूह विशेषकर शुष्क जलवायु में पाया जाता है।
👉 राजस्थान में यह मृदा पश्चिमी प्रदेशों में प्रमुखता से पाई जाती है।
👉 यह मृदा मरुस्थलीय विस्तार और वायु अपरदन से प्रभावित क्षेत्रों में फैली है। 

राजस्थान के कौन से क्षेत्रों में, तारा बालुका स्तूप पाये जाते हैं ? 

[स्कूल व्याख्याता 15.10.2022]

  • मोहनगढ़ क्षेत्र (जैसलमेर) एवं सूरतगढ़ क्षेत्र (गंगानगर) 

  • सरदारशहर क्षेत्र (चूरू) एवं शेखावटी क्षेत्र (सीकर) 

  • सिवाना क्षेत्र (बाड़मेर) एवं फलौदी क्षेत्र (जोधपुर) 

  • मोहनगढ़ क्षेत्र (जैसलमेर) एवं कोलायत क्षेत्र (बीकानेर) 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मरुस्थल एवं बालूका स्तूप मुख्यतः जोधपुर, फलोदी, बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर एवं बीकानेर जिलों में पाये जाते हैं।
👉 ये क्षेत्र मरुस्थली मृदा तथा रेतीली मृदा से युक्त हैं, जिनमें रेत के टीलों का विस्तार होता है।
👉 ये स्तूप वायु प्रवाह द्वारा सतत् रूप से परिवर्तित होते रहते हैं।

राजस्थान के कौन-से भाग में काली मृदा पायी जाती है ? 

[Supt. Garden 28.07.2021]

  •  मध्यवर्ती भाग

  • दक्षिणी अरावली क्षेत्र

  • उत्तरी-पूर्वी भाग

  • दक्षिणी-पूर्वी भाग

🔹 व्याख्या:

👉 काली मृदा राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में पाई जाती है।
👉 यह मृदा विशेषकर कोटा, बारां, बूँदी और झालावाड़ जिलों में विस्तारित है।
👉 इसे मध्यम प्रकार की काली मृदा कहा जाता है, जो व्यापारिक फसलों के लिए उपयुक्त होती है।
👉 इसमें कैल्शियम व पोटाश पर्याप्त मात्रा में होते हैं।

जिप्सीफेरस मृदा पाई जाती है 

[योगा चिकित्सा अधिकारी 10.03.2021]

  • भरतपुर 

  • कोटा 

  • बीकानेर 

  • श्रीगंगानगर 

🔹 व्याख्या:

👉 जिप्सीफेरस मृदा विशेष रूप से बीकानेर जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा वर्गीकरण कृषि विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
👉 यह मृदा सामान्यतः शुष्क एवं मरुस्थलीय क्षेत्रों की विशेषता है।

लाल लोभी मृदा पाई जाती है 

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 13.11.2021]

  • जैसलमेर, जोधपुर और बाड़मेर जिलों में

  • डूंगरपुर और उदयपुर जिलों के मध्य में 

  • कोटा और बारां जिलों के मध्य में

  • अलवर, भरतपुर और दौसा जिलों में 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल-लोमी मृदा मुख्यतः उदयपुर जिले के मध्य एवं दक्षिणी भाग तथा डूंगरपुर में पाई जाती है।
👉 इसमें चूना, पोटाश, लौह-ऑक्साइड और फास्फोरस की मात्रा कम होती है।
👉 यह मृदा सामान्य उपजाऊ होती है और इसमें मक्का, चावल, गन्ना आदि फसलें उगाई जाती हैं।
👉 इसके लाल रंग का कारण लौह अंश की उपस्थिति है।

राजस्थान के किस जिले में जिप्सीफेरस मृदा मिलती है ? 

[Head Master 11.10.2021]

  • भीलवाड़ा 

  • हनुमानगढ़ 

  • सवाई माधोपुर 

  • बीकानेर 

🔹 व्याख्या:

👉 जिप्सीफेरस मृदा राजस्थान में विशेष रूप से बीकानेर जिले में पाई जाती है।
👉 बीकानेर में इसके अतिरिक्त मरुस्थली मृदा और केल्सी ब्राउन मरुस्थली मृदा भी मिलती है।
👉 यह क्षेत्र वायु अपरदन से भी अत्यधिक प्रभावित है।

हाड़ौती पठार पर निम्नलिखित में से कौन-सी मृदा पाई जाती है ?  

[Research Assistant 24.08.2017]

  • इन्सेप्टीसोल्स  

  • एन्टीसोल्स    

  • अल्फीसोल्स 

  • वर्टीसोल्स  

🔹 व्याख्या:

👉 हाड़ौती पठार में प्रमुख रूप से वर्टीसोल्स (Verti Soils) मृदा पाई जाती है।
👉 यह मृदा विशेषकर झालावाड़, कोटा, बारां और बूंदी जिलों में विस्तारित है।
👉 इसमें जल धारण क्षमता अधिक होती है और यह काली मृदा का वैज्ञानिक वर्गीकरण मानी जाती है।
👉 यह मृदा व्यापारिक फसलों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिलों में किस प्रकार की मृदा मिलती है ? 

[हॉस्पिटल केयर टेकर 10.02.2023]

  • पीली-भूरी मृदा 

  • जलोढ़ मृदा 

  • लाल-लोम मृदा

  • काली मृदा

🔹 व्याख्या:

👉 डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिलों में प्रमुख रूप से लाल-लोम मृदा पाई जाती है।
👉 इस मृदा में लौह अंश के कारण इसका रंग लाल होता है।
👉 इसमें चूना, पोटाश, फास्फोरस की मात्रा कम होती है।
👉 यह मृदा सामान्य उपजाऊ होती है और इसमें मक्का, चावल, गन्ना जैसी फसलें उगाई जाती हैं।

दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान में इनमें से कौन-सी मृदा की प्रधानता है ? 

[स्टेनोग्राफर (RPSC) 2011]

  • भूरी रेतीली मृदा 

  • लाल एवं पीली मृदा 

  • लाल मृदा 

  • मध्यम काली मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 मध्यम प्रकार की काली मृदा का विस्तार दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान के हाड़ौती पठार में होता है।
👉 यह विशेषकर कोटा, बारां, बूँदी और झालावाड़ जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा गहरे भूरे से काले रंग की होती है तथा इसमें कच्छारी मृदा भी मिश्रित पाई जाती है।
👉 यह कपास, मूँगफली, दालों जैसी व्यापारिक फसलों के लिए उपयुक्त है।

एरिडी मृदा समूह प्रधानतः राजस्थान के किस प्रदेश में पाया जाता है ?

[सांख्यिकी अधिकारी 25.02.2024]

  • पश्चिमी राजस्थान

  • दक्षिणी राजस्थान 

  • उत्तर-पूर्वी राजस्थान 

  • दक्षिण-पूर्वी राजस्थान 

🔹 व्याख्या:

👉 एरिडी मृदा समूह मुख्यतः शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में पाया जाता है।
👉 इसके विभिन्न उपवर्ग जैसे केम्बो ऑरथिड्स, केल्सी ऑरथिड्स आदि राजस्थान में पाए जाते हैं।
👉 यह मृदा समूह विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान में प्रधानता से विस्तारित है।
👉 इस क्षेत्र में मरुस्थलीय विस्तार और वायु अपरदन का प्रभाव भी अधिक है।