राजस्थान में जल संरक्षण RPSC — Agri Master Mind
राजस्थान में 2022 में औसत वार्षिक वर्षा (से.मी.) हुई है - (जल संसाधन विभाग राजस्थान की वार्षिक वर्षा रिपोर्ट)
[Asst. Prof. (भूगोल) 18.05.2024]
66.14
77.31
79.11
81.13
🔹 व्याख्या:
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 2025 में राजस्थान में कुल मॉनसून वर्षा (जून-सितंबर) 715.2 मिमी दर्ज की गई, जो सामान्य (435.6 मिमी) से 164% अधिक थी。
- यह 1901 के बाद से इतिहास में दूसरी सबसे अधिक मॉनसून वर्षा है。
- क्षेत्रीय वर्षा का वितरण:राजस्थान में भौगोलिक भिन्नता के कारण वर्षा अलग-अलग क्षेत्रों में बँटी होती है :
- पूर्वी राजस्थान: औसत वार्षिक वर्षा लगभग 64.9 सेमी (649 मिमी) होती है。
- पश्चिमी राजस्थान: औसत वार्षिक वर्षा घटकर 32.7 सेमी (327 मिमी) रह जाती है。
- सामान्य औसत वर्षा: राज्य की सामान्य औसत वार्षिक वर्षा लगभग 57.5 सेमी (575 मिमी) है。
- ज़िलेवार मुख्य तथ्य:सबसे अधिक वर्षा: झालावाड़ ज़िले में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा होती है。
- सबसे कम वर्षा: जैसलमेर राज्य का सबसे शुष्क ज़िला है, जहाँ वार्षिक वर्षा 100 मिमी से भी कम होती
'थार का घड़ा' किसे कहा जाता है ?
[EO RO (Shift II) 14.05.2023]
चाँदन नलकूप
जय राजस्थान
मांडल नलकूप
दैनिक भास्कर
🔹 व्याख्या:
👉 'थार का घड़ा' चाँदन नलकूप का प्रसिद्ध नलकूप है।
👉 थार का घड़ा चांदन नलकूप को कहा जाता है。यह राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध नलकूप है。
इसे 'थार का घड़ा' इसलिए कहते हैं क्योंकि यह थार के शुष्क रेगिस्तानी क्षेत्र में मीठे पानी का एक बहुत बड़ा और स्थायी स्रोत है。
यह नलकूप 'लाठी सीरीज' (पोखरण से मोहनगढ़ के बीच की भूगर्भीय जलपट्टी) में स्थित है और इससे हर घंटे लगभग सवा दो लाख लीटर मीठा पानी निकलता है, जो इस इलाके के लिए किसी वरदान से कम नहीं है
✍️ सही उत्तर है – चाँदन नलकूप
निम्नलिखित में से कौन सा समूह उनके औसत वार्षिक वर्षा के अनुसार अवरोही क्रम में व्यवस्थित है ?
[स्कूल व्याख्याता (भूगोल) 07.01.2020]
गंगानगर, बूंदी, अजमेर, नागौर
बूंदी, अजमेर, नागौर, गंगानगर
अजमेर, बूंदी, गंगानगर, नागौर
अजमेर, बूंदी, नागौर, गंगानगर
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान में औसत वार्षिक वर्षा के अनुसार –
-
बूंदी में सबसे अधिक वर्षा होती है।
-
इसके बाद अजमेर, फिर नागौर।
-
सबसे कम गंगानगर में।
✍️ सही उत्तर है – बूंदी > अजमेर > नागौर > गंगानगर
"जायका" राजस्थान में किस क्षेत्र में कार्य करती है ?
[कृषि अधिकारी 29.08.2022]
सत्कार एवं पर्यटन क्षेत्र
मरु क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण
गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत
जल क्षेत्र आजीविका सुधार
🔹 व्याख्या:
👉 जायका (JICA) योजना, जापान सरकार की सहायता से भारत में चलाई जा रही विभिन्न विकास और कल्याणकारी परियोजनाओं का सामूहिक नाम है。
- 'जायका' का पूर्ण रूप जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (Japan International Cooperation Agency) है।
- इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, कृषि विकास, वानिकी, और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना है。
- मुख्य उद्देश्य और कार्यक्षेत्रजायका (JICA) द्वारा मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में कार्य किया जाता है:
- वानिकी और पर्यावरण संरक्षण: जंगलों की गुणवत्ता सुधारना, ग्रीन कवर बढ़ाना, और मृदा संरक्षण करना。
- कृषि और बागवानी विकास: किसानों को फसल विविधीकरण (crop diversification) का प्रशिक्षण देना, सिंचाई की सुविधा बढ़ाना, और बागवानी को बढ़ावा देना。
- महिला सशक्तिकरण और आजीविका: ग्रामीण क्षेत्रों और वन-सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली महिलाओं के लिए स्वयं सहायता समूह (SHG) बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना。
✍️ सही उत्तर है – जल क्षेत्र, आजीविका सुधार
राजस्थान में भारत के सतही जल का (लगभग) उपलब्ध प्रतिशत हिस्सा है:
[Research Assistant 24.08.2017]
11.40
0.27
13.20
1.16
🔹 व्याख्या:
👉 भारत के कुल सतही जल में से राजस्थान को बहुत कम भाग प्राप्त है।
👉 यह हिस्सा केवल 1.16% है।
✍️ सही उत्तर है – 1.16%
राजस्थान में कौन सा जिला फ्लोरोसिस से सर्वाधिक प्रभावित है जो पानी में फ्लोराइड के कारण होता है ?
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II [02.08.2020]
झालावाड़
सिरोही
नागौर
बीकानेर
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान में पानी में फ्लोराइड की अधिकता से फ्लोरोसिस रोग फैलता है।
👉 इस समस्या से सर्वाधिक प्रभावित जिला नागौर है।
✍️ सही उत्तर है – नागौर
'खड़ीन' है -
[स्कूल व्याख्याता (भूगोल) 07.01.2020]
जनजाति
जनजातीय गाँव
जल संरक्षण तकनीक
वन संरक्षण तकनीक
🔹 व्याख्या:
- 👉 खड़ीन राजस्थान के शुष्क और मरुस्थलीय इलाकों में वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और कृषि की एक पारंपरिक एवं उत्कृष्ट तकनीक है。
- इसे मुख्य रूप से 15वीं शताब्दी में जैसलमेर के पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा विकसित किया गया था。
- खड़ीन की मुख्य बातें:संरचना: यह खेत के ढलान के निचले हिस्से में बनाई गई एक लंबी (लगभग 100 से 300 मीटर) मिट्टी की मेड़ या तटबंध होता है。
- यह वर्षा के पानी को खेत में ही रोक कर रखने का काम करती है。कार्यप्रणाली: बारिश का पानी ऊपरी पथरीले क्षेत्रों से बहकर इस खादिन में इकट्ठा हो जाता है。
- जब पानी जमीन में रिस जाता है, तो इसके तल में पर्याप्त नमी (Moisture) बच जाती है, जिसका उपयोग रबी की फसल (जैसे- गेहूं, चना, सरसों) उगाने के लिए किया जाता है。
- बहुउद्देशीय लाभ: यह तकनीक न केवल खेती के लिए पानी और नमी प्रदान करती है, बल्कि आसपास के भू-जल स्तर (Groundwater) को भी बढ़ाती है, जिससे पीने के पानी की समस्या दूर होती है。
2020 में अटल भू-जल योजना किसकी वित्तीय सहायता से आरम्भ की गई है ?
[ATO परीक्षा 27.07.2021]
जापान
एशियन विकास बैंक
यू. एस. ए.
विश्व बैंक
🔹 व्याख्या:
👉 अटल भूजल योजना (Atal Jal) भारत सरकार की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, जिसे जल शक्ति मंत्रालय द्वारा 6,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ शुरू किया गया था।
- इसका मुख्य उद्देश्य सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल-संकट वाले क्षेत्रों में भूजल का टिकाऊ प्रबंधन करना है।अटल भूजल योजना के मुख्य बिंदुवित्तपोषण (Funding):
- यह योजना 50:50 के अनुपात में भारत सरकार और विश्व बैंक (World Bank) द्वारा वित्तपोषित है (3,000 करोड़ रुपये प्रत्येक द्वारा)।लक्ष्य (Goals):
- इसका लक्ष्य भूजल के गिरते स्तर में सुधार करना, पानी की मांग को नियंत्रित करना, और स्थानीय स्तर पर निवासियों को जागरूक करके व्यवहार में बदलाव लाना है।
- कहाँ लागू है?यह योजना देश के 7 चिह्नित राज्यों में, जहां भूजल की स्थिति अत्यधिक गंभीर है, लागू की गई है:गुजरात ,हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र ,राजस्थान, उत्तर प्रदेश
निम्न में से जिलों का कौन सा युग्म जलभराव (सेम) की समस्या से अधिक प्रभावित है ?
[कृषि अधिकारी 19.01.2021]
जयपुर एवं सीकर
जैसलमेर एवं नागौर
चुरू एवं भीलवाड़ा
गंगानगर एवं हनुमानगढ़
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान में 'सेम' समस्या मुख्यतः नहर सिंचित क्षेत्रों में पाई जाती है।
👉 राजस्थान में 'सेम' (Sem) एक गंभीर पारिस्थितिक समस्या है, जिसके तहत अत्यधिक सिंचाई और जल रिसाव के कारण जमीन दलदली हो जाती है और भूजल स्तर ऊपर आ जाता है।
इससे मिट्टी में लवणता (नमक) बढ़ जाती है, उपजाऊ भूमि बंजर हो जाती है और फसलें नष्ट होने लगती हैं।
1. मुख्य प्रभावित क्षेत्र (राजस्थान)यह समस्या मुख्य रूप से इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) और चंबल सिंचित क्षेत्रों में होती है।गंभीर रूप से प्रभावित जिले: श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ (विशेष रूप से बड़ोपल, टिब्बी और पीलीबंगा क्षेत्र)।अन्य प्रभावित जिले: बीकानेर और बूंदी।
2. सेम की समस्या के प्रमुख कारणनहरों से पानी का रिसाव: कच्ची नहरों से लगातार पानी रिसता रहता है, जो आसपास की जमीन को दलदल में बदल देता है।दोषपूर्ण सिंचाई पद्धतियाँ: किसान खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी भर देते हैं (बाढ़ सिंचाई), जिससे जमीन सोख नहीं पाती।जल स्तर का ऊपर आना: रिसाव और अति-सिंचाई से भूजल स्तर 5 से 10 फीट तक ऊपर आ जाता है, जिससे लवणीय पानी जड़ों को गला देता है।
✍️ सही उत्तर है – गंगानगर एवं हनुमानगढ़
राजस्थान में नए जल - संभर (watershed) के चुनाव में निम्न में से किस मानदंड को सर्वाधिक भारिता (महत्त्व) दी जाती है ?
[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]
जहाँ समाज परियोजना के पूर्णता के उपरांत उसके रख-रखाव को तत्पर हो ।
जिन क्षेत्रों में मजदूरी अत्यंत न्यून हो ।
क्षेत्र, जिसमें पेय जल की विकट कमी हो ।
क्षेत्र, जिसमें अनुसूचित जाति, जनजाति तथा गरीबी रेखा के नीचे की जनसंख्या 75% से अधिक हो ।
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान में नए जल-संभर (watershed) का चयन कुछ मानदंडों पर किया जाता है।
👉 इनमें सबसे अधिक महत्व उस क्षेत्र को दिया जाता है जहाँ पेयजल की विकट कमी हो।
✍️ सही उत्तर है – क्षेत्र, जिसमें पेय जल की विकट कमी हो
रंगाई एवं छपाई उद्योग के कारण निम्नलिखित में से राजस्थान का कौन सा जिला जल प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित हुआ है?
सहायक आचार्य [22.09.2021]
पाली
झालावाड़
दौसा
जैसलमेर
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान में जल प्रदूषण का प्रमुख कारण रंगाई एवं छपाई उद्योग है।
👉 इससे सर्वाधिक प्रभावित जिला पाली है।
✍️ सही उत्तर है – पाली
राजस्थान में जल संरक्षण के लिए “अमृतम् जलम्” _______________ का अभियान है ।
[EO RO (Shift II) 14.05.2023]
राजस्थान संदेश
राजस्थान पत्रिका
जय राजस्थान
दैनिक भास्कर
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान में जल संरक्षण हेतु विभिन्न जनअभियान चलाए गए हैं।
👉 “अमृतम् जलम्” अभियान राजस्थान पत्रिका द्वारा चलाया गया है।
✍️ सही उत्तर है – राजस्थान पत्रिका
बालोतरा और बगरू में जल प्रदूषण का प्रमुख कारण है :
[भूवैज्ञानिक परीक्षा 07.05.2025]
वस्त्र इकाइयाँ
उर्वरक इकाइयाँ
खनन क्रियाएँ
रसायन इकाइयाँ
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान के बालोतरा और बगरू क्षेत्र जल प्रदूषण से प्रभावित हैं।
👉 इसका प्रमुख कारण वहाँ की वस्त्र इकाइयाँ (डाईंग और प्रिंटिंग उद्योग) हैं।
✍️ सही उत्तर है – वस्त्र इकाइयाँ
लूनी नदी में जल प्रदूषण का मुख्य कारण है
सहायक आचार्य [ 07.01.2024]
सीमेण्ट उद्योग इकाइयाँ
वस्त्रों की रंगाई और छपाई इकाइयाँ
रसायन उद्योग
उर्वरक उद्योग
🔹 व्याख्या:
👉 लूणी नदी में प्रदूषण का मुख्य कारण औद्योगिक इकाइयों, विशेष रूप से रंगाई और छपाई (Dyeing and Printing) कारखानों से निकलने वाला untreated (बिना उपचारित) रासायनिक कचरा और जहरीला पानी है。मुख्य कारण और उनके प्रभाव निम्नलिखित हैं:कपड़ा उद्योग का कचरा: पाली, जोधपुर और बालोतरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित कपड़ा कारखानों से निकलने वाला रंगीन और रासायनिक पानी बिना साफ़ किए सीधे नदी में छोड़ दिया जाता है。बांडी नदी का प्रभाव: जोजरी और बांडी जैसी सहायक नदियों के माध्यम से यह जहरीला औद्योगिक अपशिष्ट लूनी नदी तक पहुँच जाता है。भूमिगत जल का दूषित होना: इस रासायनिक कचरे से न केवल नदी का पानी प्रदूषित होता है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों का भूजल भी जहरीला हो जाता है。
✍️ सही उत्तर है – वस्त्रों की रंगाई और छपाई इकाइयाँ
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) का गठन मूल रूप से किस अधिनियम के तहत किया गया था ?
[Development Officer 29.07.2025]
जल (प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974
वायु (प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981
जल सेस अधिनियम, 1977
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB) का गठन जल (प्रदूषण की रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 की धारा 4 के तहत किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य जल प्रदूषण नियंत्रण था।
👉 बोर्ड की स्थापना 7 फरवरी 1975 को की गई, जिससे राज्य में जल की गुणवत्ता के संरक्षण और निगरानी का कार्य प्रारम्भ हुआ।
👉 बाद में वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 के तहत इसे वायु प्रदूषण नियंत्रण की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रदान की गई।
👉 पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 ने बोर्ड के कार्यक्षेत्र को और विस्तृत अधिकार, दायित्व एवं पर्यावरण संरक्षण की समग्र भूमिका प्रदान की।
✍️ सही उत्तर है – राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (RSPCB)
केन्द्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट 2011 के अनुसार राजस्थान में सुरक्षित जल भंडार वाले विकास खण्डों की संख्या है [*]
[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]
25
40
30
35
📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है।
जैसलमेर में पालीवाल ब्राह्मणों द्वारा विकसित मौलिक पारम्परिक वर्षा जल संचयन पद्धति का नाम है :
[वरिष्ठ अध्यापक 21.02.2014]
उकेरी
खडीन
कुण्ड
बावड़ी
🔹 व्याख्या:
👉 जैसलमेर में पालीवाल ब्राह्मणों ने पारंपरिक वर्षा जल संचयन पद्धति विकसित की।
👉 इसका नाम खडीन (धोरा) है।
👉 इसमें सतही अपवाह जल को खेतों में रोककर मिट्टी में सोखने दिया जाता है।
👉 इससे फसल उत्पादन और जल संरक्षण दोनों में मदद मिलती है।
✍️ सही उत्तर है – खडीन
राजस्थान के किस जिले में 'खड़ीन' जल संरक्षण की प्रचलित विधि है ?
[RAS Pre परीक्षा 02.02.2025]
नागौर
बीकानेर
पाली
जैसलमेर
🔹 व्याख्या:
👉 खड़ीन जल संरक्षण की पारंपरिक विधि है।
👉 यह मुख्य रूप से जैसलमेर जिले में प्रचलित है।
✍️ सही उत्तर है – जैसलमेर
राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में सूखे की बारंबारता 8 वर्ष में एक बार है ?
[सहायक आचार्य परीक्षा 08.09.2024]
कोटा
भरतपुर
सिरोही
झालावाड़
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान के कुछ जिलों में सूखे की बारंबारता का आकलन किया गया है।
👉 भरतपुर जिले में सूखा लगभग हर 8 वर्ष में एक बार पड़ता है।
✍️ सही उत्तर है – भरतपुर
निम्नलिखित में से कौनसी राजस्थान में परम्परागत जल संरक्षण तकनीक नहीं है ?
[EO RO (Re Exam) 23 मार्च 2025]
टोबा
नाडी
झालरा
पैंडा
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान में कई पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकें विकसित हुई हैं।
👉 इनमें प्रमुख हैं – झालरा, टोबा और नाडी।
✍️ सही उत्तर है – पैंडा
पीने के पानी में फ्लोराइड की सांद्रता से जिलों का कौनसा समूह सर्वाधिक प्रभावित है ?
[कृषि अधिकारी 29.08.2022]
जालौर, बाड़मेर, सिरोही, बांसवाड़ा
बाराँ, झालावाड़, कोटा, सवाई माधोपुर
अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, बीकानेर
बूंदी, पाली, राजसमन्द, उदयपुर
🔹 व्याख्या:
👉 राजस्थान के कई जिले फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या से प्रभावित हैं।
👉 सबसे अधिक प्रभावित समूह है – जालौर, बाड़मेर, सिरोही, बांसवाड़ा।
✍️ सही उत्तर है – जालौर, बाड़मेर, सिरोही, बांसवाड़ा
निम्न में से कौन सी परम्परागत जल संरक्षण की विधि नहीं है ? [*]
सहायक आचार्य [24.04.2016]
टोबा
तालाब
खडीन
नाडी
📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है।
सुमेलित कीजिये -
लिफ्ट परियोजना पीने के पानी की आपूर्ति
(A) कंवरसेन लिफ्ट नहर (i) नागौर को
(B) गंधेली साहवा लिफ्ट परियोजना(ii) जोधपुर को
(C) राजीव गाँधी लिफ्टनहर (iii) चूरू को
(D) गजनेर परियोजना (iv) बीकानेर को
[Head Master 2011]
A B C D
(ii) (i) (iv) (iii)
(iii) (ii) (i) (iv)
(iv) (iii) (ii) (i)
(i) (iv) (iii) (ii)
🔹 व्याख्या:
👉 कंवरसेन लिफ्ट नहर → बीकानेर को (IV)
👉 गंधेली–साहवा लिफ्ट परियोजना → चूरू को (III)
👉 राजीव गाँधी लिफ्ट नहर → जोधपुर को (II)
👉 गजनेर परियोजना → नागौर को (I)