प्राचीन राजस्थान में स्त्रियाँ ग्रीष्म काल में ______ वस्त्र की साड़ियों का प्रयोग पसंद करती थी। 

[Asst. Prof. (History) 17.05.2024]

  • स्तनोत्तरीय 

  • बृहत्तिका 

  • कुरपासक 

  • क्षौम 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की स्त्रियों द्वारा विभिन्न अवसरों और ऋतुओं में अलग-अलग वस्त्रों का प्रयोग किया जाता था।
👉 प्राचीन काल में ग्रीष्म ऋतु के लिए हल्के और आरामदायक कपड़े पसंद किए जाते थे।
👉 इस समय स्त्रियाँ विशेष रूप से क्षौम वस्त्र की साड़ियाँ पहनती थीं।
👉 यह ग्रीष्मकालीन परिधान सुविधाजनक और उपयुक्त माना जाता था।

✍️ सही उत्तर है – क्षौम 

भील जनजाति में कछावु कौन पहनता है ? 

[कृषि अधिकारी 2011]

  • पुरूष 

  • बालक 

  • नवयुवक लड़का 

  • महिलाएँ 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की भील जनजाति के अपने पारंपरिक परिधान हैं।
👉 स्त्रियाँ विशेष रूप से लंबा घाघरा धारण करती हैं।
👉 इस लंबे घाघरे को कछावु कहा जाता है।
👉 यह परिधान भील जनजाति की महिलाएँ पहनती हैं।

✍️ सही उत्तर है – महिलाएँ 

मेवाड़ महाराणा के पगड़ी बाँधने वाला व्यक्ति कहलाता था 

[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]

  • जांगड़ 

  • पानेरी 

  • छाबदार 

  • छड़ीदार

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में पगड़ी बाँधना एक विशेष कला मानी जाती थी।
👉 प्रत्येक क्षेत्र में पगड़ी बाँधने वाले व्यक्तियों के अलग-अलग नाम प्रचलित थे।
👉 मेवाड़ में पगड़ी बाँधने वाले को छाबदार कहा जाता था।
👉 यह कार्य महाराणा के दरबार में विशेष सम्मान रखता था।

✍️ सही उत्तर है – छाबदार 

स्त्रियों के वस्त्रों के विषय में निम्नांकित में से कौनसा कथन असत्य है ?  

[Asst. Testing Officer 08.07.2025]

  • ओढ़नी को कीर गोटे तथा लप्पे से सजाया जाता है। 

  • तीज के अवसर पर बहुरंगा लहरिया पहना जाता है। 

  • पुत्र जन्म के अवसर पर लाल रंग की ओढ़नी पहनी जाती है। 

  • होली के अवसर पर फागड़िया पहनने का रिवाज़ रहा है। 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में स्त्रियाँ विशेष अवसरों पर अलग-अलग रंग की ओढ़नियाँ धारण करती हैं।
👉 नवजात पुत्री की माँ को गुलाबी पोमचा दिया जाता है।
👉 माँ बनने के उत्सव पर पीला पोमचा पहनने की परंपरा है।
👉 अतः पुत्र जन्म पर लाल रंग की ओढ़नी पहनने का कथन असत्य है।

✍️ सही उत्तर है – पुत्र जन्म के अवसर पर लाल रंग की ओढ़नी पहनी जाती है। 

निम्नलिखित में से कौनसा/से पुरुषों का/के वस्त्र नहीं है/हैं ? 

(अ) जामा 

(ब) चोगा 

(स) अंगरखी 

(द) लप्पा  

[EO RO (Re Exam) 23 मार्च 2025]

कूट -

  • केवल (द) 

  • (अ) और (द) 

  • केवल (अ) 

  • अनुत्तरित प्रश्न 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में पुरुषों के प्रमुख परिधान जामा, चोगा और अंगरखी रहे हैं।
👉 ये सभी पुरुषों के पारंपरिक ऊपरी वस्त्र हैं।
👉 इनमें से लप्पा पुरुषों का वस्त्र नहीं है।
👉 अतः सही उत्तर केवल विकल्प (द) लप्पा है।

✍️ सही उत्तर है – केवल (द) 

मोठड़े की पगड़ी पहनी जाती है - 

[कृषि अधिकारी 30.08.2022] 

  • होली पर 

  • विवाहोत्सव पर 

  • सक्रांति पर 

  • श्रावण में 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में विभिन्न अवसरों पर अलग-अलग प्रकार की पगड़ियाँ पहनी जाती हैं।
👉 विवाह के अवसर पर पुरुष विशेष रूप से मोठड़े की पगड़ी पहनते हैं।
👉 यह पगड़ी रंग-बिरंगी और आकर्षक बंधेज में तैयार की जाती है।
👉 इसे विवाह की शुभता और परंपरा का प्रतीक माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – विवाहोत्सव पर 

'तनसुख', 'गदर', 'गाबा' एवं 'डोढ़ी' क्या है ? 

[ACF परीक्षा 2011]

  • मनोरंजन के साधन 

  • राजस्थानी व्यंजन की किस्में 

  • पुरुषों के वस्त्र

  • साड़ियों के नाम 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में पुरुषों का प्रमुख परिधान अंगरखी कहलाता है।
👉 अंगरखी के कई प्रकार प्रचलित रहे हैं।
👉 इनमें तनसुख, गदर, गाबा और डोढ़ी प्रमुख रूप से उल्लेखित हैं।
👉 ये सभी पारंपरिक अंगरखी के प्रकार हैं।

✍️ सही उत्तर है – अंगरखी के प्रकार 

राजस्थान की वेशभूषा में प्रयुक्त 'कसूमल' निम्न में से कौन सा रंग होता है ?  

[RAS Pre परीक्षा 02.02.2025]

  • गुलाबी 

  • केसरिया 

  • लाल 

  • पीला 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा में कई प्रकार के रंग प्रचलित हैं।
👉 लोकगीतों और कहावतों में भी इन रंगों का विशेष उल्लेख मिलता है।
👉 ‘मारू थारे देश में उपजे तीन रतन, इक ढोला, दूजी मारवण, तीजो कसूमल रंग’।
👉 यहाँ कसूमल शब्द का आशय लाल रंग से है।

✍️ सही उत्तर है – लाल 

निम्नांकित में से कौन से विकल्प का संबंध पोमचा से है

[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 21.12.2022]

  • संस्कार 

  • मिठाई 

  • वस्त्र 

  • आभूषण 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की स्त्रियों में प्रचलित एक विशेष ओढ़नी को पोमचा कहा जाता है।
👉 यह परिधान प्रायः पीले रंग का होता है।
👉 पोमचा स्त्रियों द्वारा मांगलिक अवसरों पर धारण किया जाता है।
👉 अतः इसका संबंध सीधे तौर पर वस्त्र से है।

✍️ सही उत्तर है – वस्त्र 

'तगड़ी' का उपयोग होता है : 

[सहायक कृषि अधिकारी 2011]

  • भुजा पर 

  • गले पर

  • हाथ पर 

  • कमर पर 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की वेशभूषा में अनेक प्रकार के आभूषण और वस्त्र प्रयोग किए जाते हैं।
👉 इनमें एक प्रमुख आभूषण तगड़ी कहलाता है।
👉 इसका उपयोग विशेष रूप से कमर पर किया जाता है।
👉 यह महिलाओं की पारंपरिक शोभा का प्रतीक है।

✍️ सही उत्तर है – कमर पर 

'बगल बंडी' क्या है ? 

[सहायक आचार्य परीक्षा 08.09.2024]

  • साफे का एक प्रकार 

  • पुरुषों का ऊपरी वस्त्र

  • विशेष प्रकार का आभूषण 

  • महिलाओं का ऊपरी वस्त्र 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में पुरुषों के अनेक प्रकार के ऊपरी वस्त्र प्रचलित थे।
👉 इनमें अंगरखी, अचकन, चोगा, डगला आदि के साथ बंडी भी प्रमुख है।
👉 बंडी का एक रूप बगल बंडी कहलाता है।
👉 यह पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला पारंपरिक ऊपरी वस्त्र है।

✍️ सही उत्तर है – पुरुषों का ऊपरी वस्त्र 

'बेसर' और 'भंवरकड़ी' नामक आभूषण महिलाओं द्वारा___________में पहना जाता है। 

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • पैर 

  • नाक

  • गले 

  • हाथ 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में महिलाओं के लिए अनेक प्रकार के आभूषण प्रचलित हैं।
👉 इनमें कुछ विशेष आभूषण नाक में धारण किए जाते हैं।
👉 बेसर और भंवरकड़ी ऐसे ही नासिका आभूषण हैं।
👉 ये महिलाओं की पारंपरिक श्रृंगार सामग्री का हिस्सा हैं।

✍️ सही उत्तर है – नाक

राजस्थान में ताराभांत की ओढनी किस वर्ग की महिलाओं में प्रचलित है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 2011]

  • आदिवासी 

  • दलित 

  • राजपूत 

  • जाट 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में अनेक प्रकार की ओढ़नियाँ स्त्रियों द्वारा पहनी जाती हैं।
👉 इनमें एक विशेष ओढ़नी तारा भांत की ओढ़नी कहलाती है।
👉 इसकी जमीन भूरी व लाल तथा किनारों पर तारों जैसी आकृति होती है।
👉 यह ओढ़नी विशेष रूप से आदिवासी वर्ग की महिलाओं में प्रचलित है।

✍️ सही उत्तर है – आदिवासी  

आदिवासियों द्वारा पहने जाने वाला सबसे प्राचीन वस्त्र कौन-सा है ? 

[PTI Grade -III (RPSC) 2011]

  • क्रटकी 

  • लूगड़ा 

  • नांदणा 

  • चुनड़ 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में आदिवासी समुदाय के अपने विशिष्ट परिधान प्रचलित रहे हैं।
👉 आदिवासी समाज में कई प्रकार की ओढ़नियाँ और वस्त्र उपयोग किए जाते हैं।
👉 इनमें सबसे प्राचीन परिधान नांदणा माना जाता है।
👉 यह परिधान विशेष रूप से शाहपुरा (भीलवाड़ा) क्षेत्र में बनाया जाता है।

✍️ सही उत्तर है – नांदणा 

राजस्थान में त्योहारों की शुरुआत श्रावणी तीज से होती है और अंत ___________ से होता है। 

  • चतरा चौथ 

  • शीतलाष्टमी 

  • हरियाली तीज 

  • गणगौर 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में अनेक पारंपरिक त्योहार बड़े उत्साह से मनाए जाते हैं।
👉 इन त्योहारों की शुरुआत श्रावणी तीज से होती है।
👉 पूरे वर्ष के उत्सवों का समापन गणगौर से माना जाता है।
👉 यह परंपरा स्त्रियों की आस्था और संस्कृति से जुड़ी है।

✍️ सही उत्तर है – गणगौर 

दुतई, गदर, कानो एवं मिरजाई किससे सम्बन्धित हैं ?

[लाइब्रेरियन ग्रेड -II [02.08.2020] 

  • अंगरखी 

  • ओढ़नी 

  • तलवार 

  • पगड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में पुरुषों द्वारा पहना जाने वाला प्रमुख परिधान अंगरखी है।
👉 यह बिना कॉलर और बिना बटन का चुस्त ऊपरी वस्त्र होता है।
👉 अंगरखी के विभिन्न रूपों में दुतई, गदर, कानो और मिरजाई सम्मिलित हैं।
👉 ये सभी परिधान अंगरखी के भिन्न प्रकार माने जाते हैं।

✍️ सही उत्तर है – अंगरखी 

निम्नलिखित में से राजस्थान में प्रचलित प्रसिद्ध साफे (पगड़ी) के प्रकार कौनसे हैं ? 

(अ) अमरशाही 

(ब) विजयशाही 

(स) खंजरशाही 

(द) शाहजहानी 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]

  • केवल (अ) एवं (ब) 

  • केवल (अ), (ब) एवं (स) 

  • केवल (ब) एवं (द) 

  • उपरोक्त सभी 

🔹 व्याख्या:

👉 अमरशाही, विजयशाही, खंजरशाही और शाहजहानी — ये सभी राजस्थान में प्रचलित साफे (पगड़ी) की प्रसिद्ध शैलियाँ हैं।
👉 अमरशाही एक पारंपरिक एवं सम्मानित पगड़ी शैली है।
👉 विजयशाही राजस्थान की लोकप्रिय और विशिष्ट साफा शैली मानी जाती है।
👉 खंजरशाही भी प्रदेश में पहने जाने वाले प्रसिद्ध साफों में से एक है।
👉 शाहजहानी राजस्थान की पारंपरिक साफा–शैली का प्रतिनिधित्व करती है।

✍️ सही उत्तर है – उपरोक्त सभी  

पछेवड़ा है : 

[सहायक कृषि अधिकारी 2011]

  • मोटा सूती शॉल 

  • गलीचा 

  • ऊनी कम्बल 

  • यंत्र 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में सर्दी से बचने हेतु मोटे वस्त्र उपयोग किए जाते हैं।
👉 इन्हीं में एक प्रमुख ओढ़ने वाला परिधान पछेवड़ा कहलाता है।
👉 यह सामान्यतः मोटे सूती कपड़े से बनाया जाता है।
👉 इसे शॉल की तरह ओढ़कर सर्दी से सुरक्षा की जाती है।

✍️ सही उत्तर है – मोटा सूती शॉल 

'खोयतू' वस्त्र सम्बन्धित है 

[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]

  • सहरिया जनजाति से 

  • मीणा जनजाति से 

  • भील जनजाति से 

  • गरासिया जनजाति से 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की विभिन्न जनजातियों के अपने-अपने पारंपरिक परिधान रहे हैं।
👉 भील जनजाति के पुरुष कमर पर विशेष प्रकार का वस्त्र बाँधते हैं।
👉 इस लंगोटिया रूपी वस्त्र को खोयतु कहा जाता है।
👉 यह भील पुरुषों का पारंपरिक वस्त्र है।

✍️ सही उत्तर है – भील जनजाति से 

‘मटिला’ निम्न में से किसका प्रकार था -

[Lecturer (Ayurved) 12.01.2026]

  • दुपट्टा

  • अंगरखी

  • जूतियां

  • पगड़ी

🔹 व्याख्या

👉 ‘महिला/महीला’ पगड़ी का विशेष प्रकार है।
👉
यह राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा से जुड़ी है।
👉
यहाँ कई प्रकार की पगड़ियाँ प्रचलित हैं।
👉
जैसे अमरशाही, बूंदीशाही आदि।

✍️ सही उत्तर है – पगड़ी

राजस्थान में पोमचा, एक प्रकार की ओढ़नी पहनी जाती है 

[पशु चिकित्सा अधिकारी 02.08.2020]

  • विवाह के अवसर पर 

  • माँ बनने के उत्सव पर 

  • एक विधवा द्वारा 

  • एक अविवाहित कन्या द्वारा 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में स्त्रियों द्वारा पहनी जाने वाली विशेष ओढ़नी पोमचा कहलाती है।
👉 यह परिधान मुख्यतः पीले रंग का होता है।
👉 पोमचा को मांगलिक और विशेष अवसरों पर धारण किया जाता है।
👉 इसे विशेष रूप से माँ बनने के उत्सव पर पहनने की प्रथा है।

✍️ सही उत्तर है – माँ बनने के उत्सव पर 

अजमेर जिले का कौनसा स्थान 'कोड़ामार होली' उत्सव हेतु प्रसिद्ध है ?  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (ENG)

  • नसीराबाद 

  • भिनाय 

  • किशनगढ़ 

  • सांभर 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान के विभिन्न जिलों में अलग-अलग होली उत्सव प्रसिद्ध हैं।
👉 अजमेर जिले का एक प्रमुख स्थान भिनाय है।
👉 यह स्थान अपनी विशिष्ट 'कोड़ामार होली' के लिए जाना जाता है। 

✍️ सही उत्तर है – भिनाय 

'पोमचा' (स्त्री परिधान) को बोलचाल की भाषा में कहा जाता है 

[योगा चिकित्सा अधिकारी 10.03.2021]

  • कँवर जोड़ 

  • कटकी 

  • फेटिया 

  • पीला 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की स्त्रियों में विशेष प्रकार की ओढ़नी को पोमचा कहा जाता है।
👉 यह प्रायः पीले रंग में प्रचलित होती है।
👉 इसे स्त्रियाँ विशेष रूप से मांगलिक अवसरों पर पहनती हैं।
👉 इसलिए बोलचाल की भाषा में पोमचा को पीला कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – पीला 

राजस्थान में कमल पुष्प के छापे से बनी ओढ़नी को किस नाम से जाना जाता है ?

[स्कूल व्याख्याता GK (D) 04.07.2025]

  • पोमचा

  • पतंगा

  • लहरिया

  • चुनड़ी

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में स्त्रियों द्वारा पहनी जाने वाली विभिन्न प्रकार की ओढ़नियाँ प्रसिद्ध हैं।
👉 इनमें विशेष रूप से कमल पुष्प के छापे से सजी ओढ़नी उल्लेखनीय है।
👉 इस प्रकार की ओढ़नी को पोमचा कहा जाता है।
👉 यह स्त्रियों के पारंपरिक परिधान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

✍️ सही उत्तर है – पोमचा 

'झिम्मी' क्या है ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]

  • फेरे अथवा सप्तपदी के समय मामा द्वारा दी गई और वधू द्वारा पहनी गई गोटे -किनारी युक्त लाल-गुलाबी ओढ़नी 

  • संतान प्राप्ति के बाद बेटी को विधि- विधान से ससुराल विदा करने की प्रक्रिया

  • पुत्र - जन्म के पश्चात् चौदहवें दिन होने वाली रस्म

  • पर्यूषण पर्व के दौरान तीन दिन का उपवास

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में विवाह के समय वधू को अनेक विशेष परिधान और ओढ़नियाँ दी जाती हैं।
👉 इन्हीं में एक परिधान झिम्मी कहलाता है।
👉 यह गोटे-किनारी युक्त लाल-गुलाबी ओढ़नी होती है।
👉 इसे वधू फेरे अथवा सप्तपदी के समय मामा द्वारा दी जाने की परंपरा है।

✍️ सही उत्तर है – फेरे अथवा सप्तपदी के समय मामा द्वारा दी गई और वधू द्वारा पहनी गई गोटे-किनारी युक्त लाल-गुलाबी ओढ़नी 

निम्न में से कौनसा पुरुषों का वस्त्र नहीं है ?

[व्याख्याता (आयुर्वेद) 12.11.2021]

  • जामा 

  • चुगा 

  • लप्पा 

  • अंगरखी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में पुरुषों के प्रमुख वस्त्रों में अंगरखी, अचकन, चोगा, धोती, पगड़ी आदि शामिल हैं।
👉 इनमें विशेष अवसरों पर जामा, शेरवानी और अन्य परिधान भी पहने जाते हैं। 
👉 अतः यह पुरुषों का वस्त्र नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – लप्पा 

“तख्तेशाही” पगड़ी कहाँ पहनी जाती है ? 

[हॉस्पिटल केयर टेकर 10.02.2023]

  • कोटा 

  • जोधपुर 

  • जयपुर

  • उदयपुर

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में अनेक शाही प्रकार की पगड़ियाँ प्रचलित थीं।
👉 मारवाड़ क्षेत्र में कई पगड़ियाँ विशेष रूप से प्रसिद्ध हुईं।
👉 इनमें एक तख्तेशाही पगड़ी है।
👉 यह पगड़ी विशेष रूप से जोधपुर में पहनी जाती थी।

✍️ सही उत्तर है – जोधपुर 

निम्नलिखित में से कौन-सी राजस्थानी महिलाओं की वेशभूषा नहीं है ? 

[ACF परीक्षा 2011]

  • बन्धेज 

  • पटका 

  • लहरिया 

  • चूँदड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की स्त्रियों की वेशभूषा में घाघरा, लहंगा, ओढ़नी, पोमचा, साड़ी आदि प्रमुख हैं।
👉 इन परिधानों में अनेक प्रकार की ओढ़नियाँ और चुनरियाँ सम्मिलित हैं।
👉 पटका का उपयोग पुरुष परिधान में कमर पर किया जाता है।
👉 अतः यह स्त्रियों की वेशभूषा का अंग नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – पटका 

मोठड़ा वेशभूषा के कौनसे प्रकार के अन्तर्गत आता है ?  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (विज्ञान)

  • ओढ़नी 

  • पगड़ी

  • लहंगा

  • चुनरी

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में पुरुषों की वेशभूषा में पगड़ी का विशेष महत्व है।
👉 विभिन्न अवसरों पर अलग-अलग प्रकार की पगड़ियाँ पहनी जाती हैं।
👉 विवाह के अवसर पर पहनी जाने वाली विशेष पगड़ी को मोठड़ा कहा जाता है।
👉 यह पारंपरिक और मांगलिक अवसरों की शोभा है।

✍️ सही उत्तर है – पगड़ी 

तिमणिया पहना जाता है : 

सहायक आचार्य [24.04.2016]

  • महिलाओं द्वारा, ललाट पर। 

  • महिलाओं द्वारा, गले पर।

  • पुरुषों द्वारा, बाजू पर।

  • पुरुषों द्वारा, हाथ पर। 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में महिलाओं के लिए अनेक प्रकार के गहने प्रचलित हैं।
👉 इनमें गले में पहना जाने वाला आभूषण तिमणिया विशेष है।
👉 यह आभूषण मुख्यतः महिलाओं द्वारा धारण किया जाता है।
👉 इसे गले पर पहनना श्रृंगार और परंपरा का प्रतीक है।

✍️ सही उत्तर है – महिलाओं द्वारा, गले पर 

निम्न में से 'पछेवड़ा' संबंधित है : 

S.I. Telecom (Paper-II) 09.11.2025

  • स्त्री परिधान

  • पुरुष परिधान

  • आभूषण

  • लोक गीत

🔹 व्याख्या

👉 ‘पछेवड़ा’ राजस्थान में पुरुषों द्वारा कमर के नीचे लपेटा जाने वाला पारम्परिक वस्त्र माना जाता है।

👉 यह प्रायः ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों द्वारा दैनिक उपयोग में लाया जाता है।

👉 इसे पहनने का ढंग धोती या लुंगी के समान होता है, इसलिए इसे पुरुष परिधान की श्रेणी में रखा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – पुरुष परिधान

'जोधपुरी साफा' को प्रसिद्ध करने का श्रेय जाता है [*]

[कृषि अधिकारी 29.08.2022]

  • महाराजा सुमेर सिंह 

  • महाराजा उदय सिंह 

  • महाराजा केसर सिंह 

  • महाराजा जसवन्त सिंह 

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

दुकूल, अंसुक, वसन और चोल किस प्रकार के वस्त्र - परिधान के प्रचलित नाम हैं ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- B) 08.09.2025]

  • घाघरा 

  • साड़ी 

  • चोली 

  • ओढ़नी 

🔹 व्याख्या:

👉 दुकूल, अंसुक, और वसन—ये सभी प्राचीन काल में साड़ी या वस्त्र के लिए प्रयुक्त होने वाले नाम हैं।
👉 इनका उपयोग स्त्रियों के परिधानों के संदर्भ में व्यापक रूप से किया जाता था।
👉 चोल शब्द मुख्यतः चोली (ऊपरी परिधान) के लिए प्रयुक्त होता था, हालांकि कुछ प्रसंगों में यह साड़ी के रूप में भी उल्लेखित मिलता है।
👉 इसलिए ये चारों शब्द स्त्री परिधानों, विशेषकर साड़ी और उसके अंगों के प्राचीन नाम माने जाते हैं।

✍️ सही उत्तर है – साड़ी   

धींगा गणगौर किस शहर की प्रसिद्धि है ? [*]

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (ENG)

  • अजमेर 

  • झालावाड़ 

  • उदयपुर 

  • कोटा 

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है।