चित्रकार साहबदी राजस्थान की किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित थे ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]

  • मारवाड़ 

  • जयपुर 

  • मेवाड़ 

  • बून्दी 

🔹 व्याख्या:

👉 चित्रकार साहबदी राजस्थान की मेवाड़ चित्रकला शैली से संबंधित एक महत्त्वपूर्ण लघु चित्रकार थे।
👉 वे 17वीं शताब्दी के प्रमुख कलाकारों में रहे, जिन्होंने मेवाड़ शैली को नई दिशा प्रदान की।
👉 उनके उल्लेखनीय कार्यों में भागवत पुराण (1648), रागमाला (1628) तथा रामायण का युद्ध कांड (1652) शामिल हैं।
👉 उनकी चित्रकला में पारंपरिक राजपूत शैली के साथ मुगल कला के तत्वों का सुंदर मिश्रण दिखाई देता है।

✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ 

चित्रकला की कोटा शैली के विषय में निम्न में कौन सा कथन सत्य नहीं है ?

[Sub Inspector Exam 05.04.2026]

  • महाराव उम्मेदसिंह के काल में शिकार चित्रों की प्रमुखता दिखाई देती है।

  • महाराव भीमसिंहजी के काल के चित्रों में वल्लभ संप्रदाय का प्रभाव प्रमुख था।

  • कोटा शैली जयपुर शैली से पृथक होकर स्वतंत्र शैली के रूप में विकसित हुई।

  • कोटा शैली सुंदर नारी आकृतियों के लिए प्रसिद्ध है।

🔹 व्याख्या

👉 कोटा चित्रकला शैली मुख्य रूप से बूंदी शैली से अलग होकर एक स्वतंत्र शैली के रूप में विकसित हुई थी।

👉 यह शैली अपनी बारीकियों और विशेष रूप से शिकार के दृश्यों के चित्रण के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है।

👉 कोटा शैली में नारियों और रानियों को भी शिकार करते हुए दिखाया जाना इसकी एक अद्वितीय विशेषता है।

👉 इस शैली का स्वर्ण काल महाराव उम्मेद सिंह प्रथम का शासनकाल माना जाता है, जिसमें प्राकृतिक सौंदर्य प्रमुख था।

✍️ सही उत्तर है – कोटा शैली जयपुर शैली से पृथक होकर स्वतंत्र शैली के रूप में विकसित हुई।

“भागवत पुराण का पारिजात अवतरण” किस मेवाड़ चित्रकार की कृति है ?

[स्कूल व्याख्याता GK (D) 04.07.2025]

  • उदयसिंह

  • बाना राम

  • नाना राम

  • रामसिंह

🔹 व्याख्या

👉 मेवाड़ शैली का विकास महाराणा उदयसिंह के काल में उदयपुर को राजधानी बनाने के बाद और अधिक हुआ।
👉 इस समय कई चित्रकार सक्रिय रहे जिन्होंने धार्मिक ग्रंथों का सुंदर चित्रांकन किया।
👉 इन्हीं में चित्रकार नाना राम ने “भागवत पुराण का पारिजात अवतरण” (1540 ई.) चित्रित किया।
👉 यह कृति मेवाड़ शैली के उत्कर्ष का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

✍️ सही उत्तर है – नाना राम 

निम्नलिखित में से कौनसी चित्रकला शैली 'ढूंढाड़ शैली' की 'ठिकाणा कला’ से सम्बंधित नहीं है ? 

[Technical Assistant 07.07.2025]

  • सामोद 

  • ईसरदा 

  • रियां 

  • झिलाय 

🔹 व्याख्या

👉 ढूंढाड़ स्कूल में आमेर, जयपुर, अलवर, शेखावाटी, करौली और उणियारा की उपशैलियाँ सम्मिलित हैं।
👉 इसकी ठिकाणा कला में ईसरदा, सामोद, शाहपुरा, झिलाय आदि स्थानों की चित्रकला आती है।
👉 जबकि रियां का संबंध मारवाड़ स्कूल की ठिकाणा कला से है।
👉 इसलिए रियां को ढूंढाड़ शैली की ठिकाणा कला से सम्बंधित नहीं माना जाता।

✍️ सही उत्तर है – रियां 

"माथेरण कला" किस चित्रकला शैली से संबंधित है ?  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • बीकानेर 

  • बूँदी 

  • अलवर 

  • किशनगढ़ 

🔹 व्याख्या

👉 बीकानेर शैली मारवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली के विकास में माथेरण परिवार का अत्यधिक योगदान रहा।
👉 मथेरण परिवार के चित्रकार चंदूलाल, मुकुंद, जयकिशन, रामकिशन आदि प्रसिद्ध हुए।
👉 इनके योगदान के कारण बीकानेर शैली में “माथेरण कला” का विशेष उल्लेख मिलता है।

✍️ सही उत्तर है – बीकानेर 

18वीं शताब्दी में मीरबक्स द्वारा चित्रित “राम, सीता, लक्ष्मण एवं हनुमान का चित्र", राजस्थानी चित्रकला की किस उपशैली से संबंधित था ?

[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]

  • उनियारा

  • घाणेराव

  • देवगढ

  • दुगारी

🔹 व्याख्या

👉 उनियारा शैली ढूँढाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली के रूप में जानी जाती है।

👉 प्रसिद्ध चित्रकार मीरबक्स ने 18वीं शताब्दी में इस शैली को ऊँचाइयों पर पहुँचाया।

👉 उनके द्वारा चित्रित राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान का चित्र इस शैली का बेजोड़ नमूना है।

👉 इस उपशैली पर जयपुर और बूंदी शैली का मिला-जुला प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

✍️ सही उत्तर है – उनियारा

प्रसिद्ध चित्रकार अली रजा, मुगल सेवा से मुक्त होकर राजस्थान में किस शासक के दरबार में शामिल हुए ? [*]

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- C) 09.09.2025]

  • गज सिंह 

  • कर्ण सिंह 

  • अनूप सिंह 

  • राय सिंह 

राजस्थान की "पिछवाई" शैली की क्या विशेषताएं हैं?

(A) वैष्णव मंदिरों में राधा-कृष्ण एवं श्रीनाथजी के पीछे, श्रृंगार युक्त चित्र बनाये जाते हैं।

(B) "पिछवाई" सूती कपड़े पर एक ही आकार में बनाई जाती है।

(C) कोटा, बूंदी, किशनगढ़ और नाथद्वारा में यह शैली विभिन्न प्रकार की शैलियों में बनायी जाती है।

(D) इस्तेमाल किये जाने वाले मुख्य रंग हैं, हिंगलू, पियावड़ी, सफेदा, काजल, नील, हड़मच, अलक्तक; हराभाटा, सोने की स्याही, चाँदी के लिए कथिर।

सही कूट का चयन करें

[Deputy Commandant 11.01.2026]

  • सभी (A), (B), (C), (D)

  • केवल (A), (C), (D)

  • केवल (C), (D)

  • केवल (A), (B)

🔹 व्याख्या

👉 पिछवाई चित्र में श्रीनाथजी/राधा-कृष्ण का चित्रण होता है।
👉
यह वैष्णव मंदिरों में पीछे स्थापित की जाती है।
👉
कोटा, बूंदी, नाथद्वारा में इसकी शैलियाँ मिलती हैं।
👉
इसमें हिंगलू, नील, काजल जैसे रंग प्रयोग होते हैं।

✍️ सही उत्तर है – केवल (A), (C), (D)

मारवाड़ चित्रकला शैली के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए एवं नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

(A) इस शैली में लाल एवं पीले रंगों का बहुलता से प्रयोग किया जाता था।

(B) अपने उत्तरकाल में इस शैली में भक्ति चित्रों की प्रधानता रही।

[Sub Inspector Exam 06.04.2026]

  • केवल (A) सही है।

  • केवल (B) सही है।

  • (A) एवं (B) दोनों सही हैं।

  • (A) एवं (B) दोनों सही नहीं हैं।

🔹 व्याख्या

👉 मारवाड़ चित्रकला शैली में लाल एवं पीले रंगों का प्रयोग प्रधानता के साथ किया जाता रहा है।

👉 इस शैली में स्थानीय लोक-गाथाओं के साथ-साथ उत्तरकाल में भक्ति चित्रों का बाहुल्य देखा गया।

👉 जोधपुर शैली के इन चित्रों में खंजन पक्षी और झाड़ियों का अंकन इसकी विशिष्ट पहचान है।

✍️ सही उत्तर है – (A)एवं (B) दोनों सही हैं।

चित्रकला की किशनगढ़ शैली के विषय में कौन से कथन सही हैं ? 

A. राधा और कृष्ण का रूप सौंदर्य ही चित्रांकन का मुख्य विषय है । 

B. अधिकांश चित्रों में स्त्रियों का पहनावा लहँगा, चोली और पारदर्शी आँचल हैं 

C. इस शैली के चित्रकार सीताराम, भवानीदास एवं कल्याणदास हैं । 

सही विकल्प चुनिए : 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- B) 08.09.2025]

  • A और B 

  • B और C 

  • A और C 

  • A, B और C 

🔹 व्याख्या:

👉 किशनगढ़ चित्रकला शैली में राधा-कृष्ण का रूप-सौंदर्य मुख्य चित्रण विषय होता है; यह कथन सही है।
👉 इस शैली के अधिकांश चित्रों में स्त्रियाँ लहँगा, चोली और पारदर्शी आँचल पहने दिखाई देती हैं; यह कथन भी सही है।
👉 किशनगढ़ शैली के प्रमुख चित्रकार सीताराम, भवानीदास और कल्याणदास थे; यह कथन भी सही है।

✍️ सही उत्तर है – A, B और C 

अलवर के राजा बलवंत सिंह के समय 'दुर्गा सप्तशती' का चित्रण किस चित्रकार ने किया था ?

[स्कूल व्याख्याता GK (E) 06.07.2025]

  • डालूराम एवं शिवकुमार

  • छोटेलाल एवं सालिगराम

  • बलदेव एवं बकसाराम

  • जमुनादास एवं नंदराम

🔹 व्याख्या

👉 अलवर शैली का विकास राजा प्रतापसिंह के काल से हुआ और आगे कई शासकों ने इसे संरक्षण दिया।
👉 राजा बलवंतसिंह के शासनकाल में इस शैली में धार्मिक ग्रंथों का सुंदर चित्रांकन हुआ।
👉 इसी समय दुर्गा सप्तशती का चित्रण प्रमुख चित्रकार छोटेलाल और सालिगराम ने किया।
👉 इनके कार्यों ने अलवर शैली को धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान दिलाई।

✍️ सही उत्तर है – छोटेलाल एवं सालिगराम 

निम्न में से कौन सा चित्रकार जयपुर के महाराजा प्रताप सिंह के राज दरबार में नहीं था ? 

S.I. Telecom (Paper-II) 09.11.2025

  • दयाराम

  • राम सेवक

  • मुहम्मद शाह

  • साहिब राम

🔹 व्याख्या

👉 जयपुर के महाराजा प्रताप सिंह के राज दरबार में साहिब राम, राम सेवक एवं दयाराम जैसे चित्रकार सक्रिय थे।

👉 इन चित्रकारों ने जयपुर शैली की राजस्थानी लघुचित्र परम्परा को आगे बढ़ाया।

👉 मुहम्मद शाह का नाम महाराजा प्रताप सिंह के दरबारी चित्रकारों में नहीं मिलता।

✍️ सही उत्तर है – मुहम्मद शाह

निम्न में से कौन सा चित्रकार 'पशु युद्ध' अंकित करने में दक्ष था ?

[Asst. Prof. (History-II) 10.12.2025]

  • साहिबराम

  • हीरानन्द

  • लाल

  • रामजीदास

🔹 व्याख्या

👉 लाल चित्रकार अपनी विशिष्ट कला शैली के लिए प्रसिद्ध था।
👉
वह विशेष रूप से पशु युद्ध चित्रण में दक्ष था।
👉
उसकी रचनाओं में युद्ध दृश्य स्पष्ट दिखाई देते हैं।
👉
इसलिए यह गुण लाल चित्रकार से संबंधित है।

✍️ सही उत्तर है – लाल

चित्रकला के कोटा स्कूल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए - 

(अ) कोटा के महाराव भीम सिंह ने अपने संरक्षण में चित्रकला में कृष्ण भक्ति एवं वल्लभ संप्रदाय को महत्त्व दिया। 

(ब) राजा उम्मेद सिंह ने कोटा शैली की चित्रकला में शिकार से संबंधित चित्रों को संरक्षण दिया। 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]

  • केवल (ब) सही है । 

  • (अ) एवं (ब) दोनों सही नहीं हैं। 

  • (अ) एवं (ब) दोनों सही हैं। 

  • केवल (अ) सही है । 

🔹 व्याख्या:

👉 कोटा के महाराव भीम सिंह ने अपने संरक्षण में चित्रकला में कृष्ण भक्ति और वल्लभ संप्रदाय विषयों को विशेष महत्त्व दिया था।
👉 राजा उम्मेद सिंह के काल में कोटा शैली में शिकार से संबंधित चित्रों को महत्वपूर्ण संरक्षण एवं प्रोत्साहन मिला।
👉 दोनों कथनों में कोटा शैली के विषय-विस्तार और राजकीय संरक्षण का सटीक वर्णन है।

✍️ सही उत्तर है – (अ) एवं (ब) दोनों सही हैं 

निम्नलिखित में से किस शासक के काल में साहिबराम ने 'आदमकद चित्र' बनाने की परम्परा की शुरुआत की? 

[स्कूल व्याख्याता GK (C) 03.07.2025]

  • ईश्वरी सिंह, जयपुर

  • रामसिंह, कोटा

  • अनिरुद्ध सिंह, बूँदी

  • विनयसिंह, अलवर

🔹 व्याख्या

👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख धारा है, जिसका उत्कर्ष 18वीं शताब्दी में हुआ।
👉 इसी समय प्रतिभाशाली चित्रकार साहिबराम सक्रिय थे।
👉 महाराजा ईश्वरीसिंह (1743–1750 ई.) के काल में साहिबराम ने आदमकद चित्रों की परम्परा शुरू की।
👉 उनका बनाया महाराजा ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र इस परम्परा का प्रथम उदाहरण है।

✍️ सही उत्तर है – ईश्वरीसिंह, जयपुर 

निम्न में से बूँदी के किस शासक का श्रीनाथजी की सेवा करते हुए चित्रांकन बूँदी के महल में स्थित चित्रशाला में है ?

[कृषि अधिकारी 20.04.2025]

  • उम्मेद सिंह

  • राम सिंह

  • भाव सिंह

  • छत्रशाल

🔹 व्याख्या

👉 बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल की एक प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इस शैली का स्वर्णकाल महाराव उम्मेदसिंह प्रथम के शासनकाल में माना जाता है।
👉 उनके काल में बूँदी महल की चित्रशाला (रंगमहल) में अनेक भित्ति चित्र बनाए गए।
👉 इन्हीं चित्रों में महाराव उम्मेदसिंह का श्रीनाथजी की सेवा करते हुए चित्रांकन भी मिलता है।

✍️ सही उत्तर है – उम्मेदसिंह 

निम्नलिखित कथनों को पढ़िये एवं सही विकल्प को चुनिये -

(A) ईश्वर सिंह जी का एक चित्र साहिबराम ने बनाया था।

(B) जयपुर के लाल चितारा ने पशु-पक्षियों की लड़ाई के अनेक चित्र बनाये थे।

कूट -

[Junior Chemist PHED 01.02.2026]

  • केवल (B) सही है।

  • केवल (A) सही है।

  • (A) और (B) दोनों सही हैं।

  • (A) और (B) दोनों गलत हैं।

🔹 व्याख्या

👉 ईश्वर सिंह का चित्र साहिबराम ने बनाया था।
👉
लाल चितारा ने पशु-पक्षी चित्रण किया।
👉
दोनों कथन तथ्यात्मक रूप से सही हैं।

✍️ सही उत्तर है – (A) और (B) दोनों सही हैं।

सवाई ईश्वरी सिंह के काल में निम्नलिखित में से किस चित्रकार ने पशु-पक्षियों के युद्धों के अनेक चित्र बनाए ?  

[Asst. Testing Officer 08.07.2025]

  • लाल चितारा 

  • हीरानन्द 

  • त्रिलोक 

  • रामजीदास 

🔹 व्याख्या

👉 जयपुर शैली का उत्कर्ष 18वीं शताब्दी में सवाई ईश्वरीसिंह के शासनकाल में हुआ।

👉 सवाई ईश्वर सिंह के प्रिय चित्रकार साहिब राम और लालचंद थे लालचंद को ही लाल चितारा कहा जाता था साहिब राम आदमकद चित्र बनाने में महारत हासिल थी तो वही लालचंद को जानवरों की शारीरिक बनावट मुद्राओं और मैदानी युद्धों को कैनवास पर उतारने का उस्ताद था
👉 इस समय कई प्रतिभाशाली चित्रकार सक्रिय थे, जिन्होंने दरबार और समाज से जुड़े विषयों पर चित्र बनाए।
👉 इन्हीं में प्रसिद्ध लाल चितारा थे, जिन्होंने विशेषकर पशु-पक्षियों की लड़ाइयों के अनेक चित्र बनाए। 

✍️ सही उत्तर है – लाल चितारा 

अलवर के पास राजगढ़ किले के शीशमहल में भित्ति चित्रण किस चित्रकार ने किया है ?

[Development Officer 29.07.2025]

  • बलदेव

  • शिवकुमार

  • डालूराम

  • जमुनादास

🔹 व्याख्या:

👉 राव राजा प्रताप सिंह के शासनकाल में प्रसिद्ध चित्रकार डालूराम जयपुर से अलवर आए थे।
👉 इनके आगमन से अलवर दरबार में नवीन चित्रकला परंपरा को बढ़ावा मिला।
👉 राजगढ़ किले के शीशमहल में बने भित्ति-चित्र प्रताप सिंह के काल में निर्मित किए गए थे।
👉 अलवर शैली की चित्रकला का आरंभ भी राजगढ़ महलों के शीशमहल का चित्रण करके हुआ माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – डालूराम

जयपुर रियासत के उणियारा की चित्रशैली में किस शैली के अभिलक्षण पाये जाते हैं ?

[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 27.06.2025]

  • मारवाड़ शैली

  • कोटा-बूँदी शैली

  • मेवाड़ शैली

  • किशनगढ़ शैली

🔹 व्याख्या

👉 उणियारा ढूंढाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है। उनियारा चित्र शैली ढूंढाड़ स्कूल की एक बेहद अनूठी उप शैली है उनियारा रियासत जयपुर और बूंदी रियासतों की सीमाओं के पास स्थित होने के कारण यह शैली ढूंढाड़ और हाडोती दोनों चित्र शैलियों से प्रभावित हुई है अर्थात जयपुर और बूंदी शैली का स्पष्ट प्रभाव उनियारा शैली पर देखने को मिलता है
👉 यहाँ की चित्रशैली में अन्य शैलियों के लक्षणों का समन्वय मिलता है।
👉 विशेष रूप से इसमें कोटा–बूँदी शैली के अभिलक्षण स्पष्ट दिखाई देते हैं।
👉 इसलिए उणियारा की चित्रकला को कोटा–बूँदी शैली से प्रभावित माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – कोटा–बूँदी शैली 

निम्न में से कौनसी चित्रकला शैली "दर्शन चौबीसिया” से संबन्धित है ? 

[Research Assistant 10.07.2025]

  • उणियारा 

  • सिरोही 

  • सामोद 

  • नाथद्वारा 

🔹 व्याख्या

👉 "दर्शन चौबीसिया" नाथद्वारा चित्रकला शैली से संबंधित है।

  • इस शैली के अंतर्गत भगवान श्रीकृष्ण (श्रीनाथजी) के चौबीस विभिन्न दर्शन (झांकियों) और उनके श्रृंगार का चित्रण प्रमुखता से किया जाता है।

राजस्थान की किस चित्रकला शैली में माथेराण परिवार का योगदान सर्वाधिक माना जाता है ? 

[PTI & Librarian 03.05.2025]

  • जोधपुर शैली 

  • बीकानेर शैली 

  • कोटा शैली 

  • जयपुर शैली 

🔹 व्याख्या

👉 बीकानेर शैली मारवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली का उत्कर्ष महाराजा अनूपसिंह के काल में हुआ।
👉 इसमें माथेराण परिवार के चित्रकारों का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा। 

✍️ सही उत्तर है – बीकानेर शैली