चित्रकला की कौनसी शैली में "श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी" ग्रंथ चित्रित किया गया है ?
[अन्वेषण उत्खनन अधिकारी 19.06.2024]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन और मौलिक शैली है।
👉 इस शैली का प्रथम उपलब्ध चित्रित ग्रंथ “श्रावक-प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी” है।
👉 यह ग्रंथ 1260 ई. में गुहिल शासक तेजसिंह के काल में आहड़ (उदयपुर) में चित्रित किया गया।
👉 इसकी सजावट नागदा और चित्तौड़ के मंदिरों की तक्षणकला के समान मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
राजस्थानी चित्रकला की किस शैली से निहालचन्द का सम्बन्ध था ?
[SI (मोटर वाहन) 2013]
👉 निहालचंद राजस्थान का अत्यंत प्रसिद्ध चित्रकार था।
👉 उसका संबंध किशनगढ़ शैली से रहा।
👉 उसने राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के दरबार में कार्य किया।
👉 उसकी अमर कृति “बणी-ठणी” किशनगढ़ शैली की पहचान बन गई।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़
'बणी-ठणी' चित्र किस शैली का है ?
[उपनिरीक्षक (SI) 14.09.2021]
👉 बणी-ठणी चित्र राजस्थान की प्रसिद्ध किशनगढ़ शैली से जुड़ा हुआ है।
👉 इस चित्र का निर्माण चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के आदेश पर किया।
👉 इसमें सावंतसिंह को कृष्ण और बणी-ठणी को राधा के रूप में चित्रित किया गया।
👉 यह चित्र किशनगढ़ शैली की पहचान और प्रतीक माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़
रामलाल, अली रजा एवं हसन जैसे विख्यात चित्रकारों का त्रिगुट किस चित्रशैली से संबंधित है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
👉 बीकानेर शैली का विकास मुगल और राजस्थानी कला के मिश्रण से हुआ।
👉 इस शैली में अनेक प्रसिद्ध चित्रकारों ने कार्य किया।
👉 इनमें रामलाल, अली रजा और हसन का नाम एक साथ लिया जाता है।
👉 इन चित्रकारों की कृतियों से बीकानेर शैली को अपनी विशिष्ट पहचान मिली।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर चित्रकला शैली
दुगारी चित्र संबंधित है
[ATO परीक्षा 27.07.2021]
👉 दुगारी हाड़ौती क्षेत्र का एक प्रमुख ठिकाना रहा है।
👉 यहाँ की चित्रकला पर बूँदी शैली का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है।
👉 दुगारी में बने चित्रों में बूँदी शैली की प्राकृतिकता और सौंदर्य दृष्टिगोचर होता है।
👉 इसलिए दुगारी चित्रों को बूँदी शैली से संबंधित माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – बूँदी शैली
पशु-पक्षी को जिस चित्रकला में विशेष स्थान मिलता है, वह है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)
👉 बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल की प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इस शैली में प्राकृतिक दृश्यों और पशु-पक्षियों का विस्तृत चित्रण मिलता है।
👉 बूँदी शैली को ‘पक्षी शैली’ भी कहा जाता है क्योंकि इसमें कबूतर, बतख, मोर आदि का खूब अंकन हुआ।
👉 चित्रों में बादल, वर्षा और प्रकृति सौंदर्य के साथ पशु-पक्षियों की सजीवता प्रमुख रही।
✍️ सही उत्तर है – बूँदी शैली
गोपाल, उदय, हुकमा, जीवन चित्रकला की किस शैली से सम्बन्धित थे ?
[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]
👉 आमेर–जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख धारा रही है।
👉 इस शैली को विशेष संरक्षण सवाई प्रतापसिंह व अन्य कछवाहा शासकों ने दिया।
👉 इस समय दरबार में अनेक प्रतिभाशाली चित्रकार कार्यरत थे।
👉 इनमें गोपाल, उदय, हुकमा और जीवन के नाम प्रमुख रूप से मिलते हैं।
✍️ सही उत्तर है – आमेर–जयपुर शैली
ढूंढाड़ी के भित्ति चित्र मिलते हैं -
(A) आमेर
(B) बैराठ
(C) मोजमाबाद
(D) भावपुरा
[अनुसंधान अधिकारी पुरा. 04.08.2024]
👉 ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख धारा आमेर–जयपुर शैली है।
👉 इसके भित्ति चित्रण के उदाहरण आमेर की छतरियों और महलों में मिलते हैं।
👉 बैराठ के मुगल गार्डन तथा मौजमाबाद को आरम्भिक आमेर शैली का गढ़ माना गया।
✍️ सही उत्तर है – A, B, C, D
कोटा के किस शासक के काल को कोटा स्कूल की चित्रशैली का उत्कृष्ट काल माना जा सकता है ?
[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]
👉 कोटा शैली में विशेष रूप से शिकार के दृश्यों को प्रधानता दी गई है साथ ही इस शैली में सबसे अनोखी विशेषता यह है कि राजाओं के साथ-साथ रानियां और दरबारी महिलाओं को भी शिकार करते हुए दिखाया गया है तथा प्रकृति का चित्रण मधुरता से प्रस्तुत किया गया है
👉 इसका उत्कर्ष महाराव उम्मेदसिंह प्रथम के शासनकाल में हुआ।
👉 इस समय शिकार के विविध दृश्यों और जंगलों की झलक वाले चित्रों की बहुलता रही।
👉 इसलिए उम्मेदसिंह का काल कोटा स्कूल का स्वर्णकाल माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – महाराव उम्मेदसिंह प्रथम
निम्नांकित में से राजस्थान की किस चित्रकला शैली पर सर्वाधिक मुगल प्रभाव दृष्टिगोचर होता है ?
[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 21.12.2022]
👉 मुगल प्रभाव से सर्वाधिक प्रभावित शैली जयपुर (आमेर) शैली थी उसके बाद दूसरे नंबर पर बीकानेर की शैली थी जो मुगल प्रभाव से प्रभावित थी
👉 इस शैली में कछवाहा शासकों के कारण मुगलों से घनिष्ठ संबंध बने रहे।
👉 जयपुर के भित्ति चित्रों में आलागीला / अराइश तकनीक और मुगल दरबार की झलक स्पष्ट मिलती है।
👉 यहाँ उद्यान दृश्य, हाथियों की लड़ाई और दरबारी जीवन के चित्रण में मुगल प्रभाव गहराई से दिखाई देता है।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर शैली
नूर मोहम्मद राजपूताने के किस राज्य का प्रमुख चित्रकार था ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (विज्ञान)
👉 नूर मोहम्मद के अलावा डालू,लच्छी राम, गोविंद राम, रघुनाथ आदि कोटा चित्र शैली के प्रमुख चित्रकार थे
✍️ सही उत्तर है – कोटा
रुक्नुद्दीन राजस्थानी चित्रकला की किस शैली से सम्बद्ध था ?
[वरिष्ठ अध्यापक (Spl Edu) 07.02.2018]
👉 बीकानेर शैली का विकास 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ। रुकनुद्दीन को उस्ता कला का प्रणेता माना जाता है जो ऊंट की खाल पर सोने की नक्काशी की जाती है। है
👉 महाराजा रायसिंह और अनूपसिंह के काल में इसे मुगल प्रभाव के साथ विशेष संरक्षण मिला।
👉 इस शैली से जुड़े प्रमुख कलाकारों में रूकनुद्दीन (हामिद व मुसव्विर दोनों) का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।
👉 रूकनुद्दीन ने रसिकप्रिया, बारहमासा और भागवत पुराण पर आधारित उत्कृष्ट चित्र बनाए।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर शैली
जमनादास, छोटेलाल, बक्साराम व नन्दलाल चित्रकला की किस शैली से संबद्ध हैं ?
[RAS Pre. 31.10.2015]
👉 अलवर शैली का विकास राजा प्रतापसिंह के काल से हुआ और इसका उत्कर्ष महाराजा विनयसिंह के समय दिखाई देता है।
👉 इस शैली में अनेक प्रतिभाशाली चित्रकारों ने कार्य किया, जिनमें जमनादास, छोटेलाल, बक्साराम और नन्दलाल के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं।
✍️ सही उत्तर है – अलवर शैली
सीताराम, बदनसिंह और नानकराम चित्रकार चित्रकला की किस शैली से सम्बद्ध थे ?
[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]
👉 किशनगढ़ शैली मारवाड़ स्कूल की एक प्रसिद्ध उपशैली है।
👉 इसका स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय रहा।
👉 इस शैली से अनेक प्रतिभाशाली चित्रकार जुड़े, जिनमें सीताराम, बदनसिंह और नानकराम विशेष उल्लेखनीय हैं।
👉 इन कलाकारों ने राधा–कृष्ण, प्राकृतिक सौंदर्य और बणी-ठणी जैसे अमर चित्रों का निर्माण किया।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़ शैली
चित्रकार नानकराम, रामनाथ और जोशी सवाईराम किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित हैं ?
[सहायक आचार्य परीक्षा 08.09.2024]
👉 किशनगढ़ शैली का विकास 17वीं–18वीं शताब्दी में हुआ और इसका स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय रहा।
👉 इस शैली में अनेक प्रसिद्ध चित्रकारों ने कार्य किया, जिनमें नानकराम, रामनाथ और जोशी सवाईराम के नाम विशेष रूप से मिलते हैं।
👉 इनके योगदान से किशनगढ़ शैली को “कागजी शैली” भी कहा गया और यह शैली विश्वप्रसिद्ध बनी।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़
प्रसिद्ध चित्रकार मुहम्मद शाह जयपुर के किस महाराजा का दरबारी चित्रकार था ?
[RAS Pre. 01.10.2023]
👉 मुहम्मद शाह जयपुर शैली का प्रमुख चित्रकार था।
👉 वह महाराजा सवाई जयसिंह के दरबार में दरबारी चितेरा रहा।
👉 इस काल में जयपुर में 36 कारखाने स्थापित हुए, जिनमें सूरतखाना (चित्र निर्माण केन्द्र) भी था।
👉 यहाँ पर रसिकप्रिया, गीतगोविन्द, बारहमासा और रागमाला जैसे विषयों पर चित्रण हुआ।
✍️ सही उत्तर है – सवाई जयसिंह
चित्रकार निहालचंद---------------------से सम्बन्धित था।
सहायक आचार्य [ 07.01.2024]
👉 निहालचंद किशनगढ़ दरबार के सर्वाधिक प्रसिद्ध चित्रकार थे।
👉 उन्होंने राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के आदेश पर अनेक चित्र बनाए।
👉 इन्हीं में उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति “बणी-ठणी” है, जिसे “भारत की मोनालिसा” कहा गया।
👉 निहालचंद के कार्यों से किशनगढ़ शैली को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़ स्कूल
चन्दूलाल, मुकुन्द, मुन्नालाल किस चित्र-शैली के चित्रकार थे ?
[Protection Officer 28.01.2023]
👉 बीकानेर शैली का विकास 16वीं–17वीं शताब्दी में हुआ और इसका उत्कर्ष महाराजा अनूपसिंह के काल में दिखाई देता है।
👉 इस शैली में उस्ता व मथेरण समुदाय के साथ अनेक चित्रकार परिवारों ने योगदान दिया।
👉 मथेरण परिवार के प्रमुख चित्रकारों में चन्दूलाल, मुकुन्द और मुन्नालाल के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं।
👉 इन कलाकारों ने बीकानेर शैली को उसकी विशिष्ट पहचान दिलाई।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर शैली
किस चित्रकला शैली में पुरुषों के चेहरों पर चोट व चेचक के दाग प्रदर्शित हैं ?
[वरिष्ठ अध्यापक Spl Edu 03.07.2019]
👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख चित्रकला शैली है।
👉 इस शैली में चित्रकारों ने मानव आकृतियों को अत्यंत यथार्थवादी रूप में प्रस्तुत किया।
👉 पुरुषों के चित्रण में चेहरे पर चोट और चेचक के दाग भी दर्शाए गए हैं।
👉 यह विशेषता जयपुर शैली की निजी पहचान मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर
चित्रकार मोहम्मद शाह जिन्होंने भगवान कृष्ण का चित्रांकन अपने चित्रों में किया, संबंधित थे :
[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]
👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख धारा रही है, जिसका विशेष संरक्षण सवाई जयसिंह द्वितीय ने किया।
👉 इस समय दरबार में कई प्रतिभाशाली चित्रकार सक्रिय थे।
👉 इनमें से एक प्रमुख चित्रकार मोहम्मद शाह था, जिसने अपने चित्रों में भगवान कृष्ण की विविध लीलाओं का अंकन किया।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर राज्य
बीकानेर के मथेरण समुदाय के सम्बन्ध में दिए गए निम्नलिखित कथनों को सावधानी से पढ़िये :
(i) बीकानेर चित्र शैली के विकास में इनका प्रचुर योगदान है।
(ii) महाराजा अनूप सिंह के काल में मथेरण समुदाय को संरक्षण मिला।
(iii) मथेरण विशेषकर शासकों के व्यक्तिगत चित्र उकेरने के लिए जाने जाते हैं।
(iv) मथेरण, जो अपने आप को महात्मा भी कहते हैं, एक जैन समुदाय है।
सहायक आचार्य [24.04.2016]
👉 बीकानेर शैली के विकास में मथेरण समुदाय का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
👉 इस समुदाय को विशेष संरक्षण महाराजा अनूपसिंह के समय प्राप्त हुआ।
👉 मथेरण चित्रकार शासकों के व्यक्तिगत चित्रांकन के लिए प्रसिद्ध थे।
👉 यह समुदाय अपने को महात्मा कहने वाला जैन समुदाय माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – ये सभी
किशनगढ़ शैली का प्रसिद्ध चित्रकार था :
[वरिष्ठ अध्यापक 21.02.2014]
👉 किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह के समय रहा।
👉 सावंतसिंह ने कवि रूप में “नागरीदास” उपनाम से काव्य रचना की।
👉 उनके काव्य और व्यक्तित्व ने किशनगढ़ शैली को नई पहचान दी।
👉 इसी काल में निहालचंद ने उनका रूप लेकर कृष्ण और बणी-ठणी को राधा के रूप में चित्रित किया।
✍️ सही उत्तर है – नागरीदास
घाणेराव, रियाँ, भिनाय, जूनियाँ आदि ठिकाणा कला सम्बन्धित हैं -
[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]
👉 मारवाड़ स्कूल जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़, नागौर, अजमेर, पाली व सिरोही की शैलियों व उपशैलियों से संबंधित है।
👉 इस शैली से अनेक सामंती ठिकानों की चित्र परम्परा भी जुड़ी हुई है।
👉 घाणेराव, रियाँ, भिनाय और जूनियाँ जैसे ठिकानों की चित्रकला इसी मारवाड़ स्कूल की देन है।
👉 इन ठिकानों की चित्रकला ने मारवाड़ शैली को और अधिक विविधता व समृद्धि प्रदान की।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ स्कूल चित्रशैली
निम्नलिखित में से कौन सा चित्रकार, बीकानेर चित्रकला शैली से जुड़ा हुआ नहीं था ?
[Asst. Prof. (History) 30.06.2016]
👉 बीकानेर शैली का विकास महाराजा रायसिंह और अनूपसिंह के काल में हुआ। राजस्थानी चित्रकला के इतिहास में नानकराम नाम के मुख्य रूप से दो प्रसिद्ध चित्रकार हुए 1. किशनगढ़ चित्र शैली में और 2.नाथद्वारा चित्र शैली में
👉 इस शैली से जुड़े प्रमुख कलाकारों में हामिद रूक्नुद्दीन, मुसव्विर रूक्नुद्दीन, साहिबद्दीन, शाह मोहम्मद, अहमद अली, रामलाल, अली रजा आदि रहे।
👉 प्रश्न में दिया गया नानक राम बीकानेर शैली से नहीं, बल्कि अन्य शैली से संबंधित चित्रकार था।
👉 अतः नानक राम को बीकानेर चित्रकला शैली का चित्रकार नहीं माना जाता।
✍️ सही उत्तर है – नानक राम
निम्नलिखित में से कौनसा ठिकाना मेवाड़ की चित्रांकन शैली का केन्द्र नहीं था ?
[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]
👉 बर्र क्षेत्र भौगोलिक रूप से मारवाड़ क्षेत्र में आता है
👉 मेवाड़ स्कूल राजस्थानी चित्रकला की मूल शैली है।
👉 इसके प्रमुख केन्द्र रहे – देवगढ़, सावर, शाहपुरा, प्रतापगढ़ आदि।
👉 इन स्थानों पर मेवाड़ शैली की उपशैलियाँ और भित्ति चित्रण परम्परा विकसित हुई।
✍️ सही उत्तर है – बर्र
'प्रतिक्रमण चूर्णि ग्रंथ किस चित्रशैली से सम्बन्धित है ?
[कृषि अधिकारी 19.01.2021]
👉 श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी (1261) मेवाड़ शैली का सबसे पहला और प्राचीनतम उपलब्ध चित्रित ग्रंथ है जो तेज सिंह के शासनकाल में चित्रकार कमल चंद्र द्वारा चित्रित किया गया था यह ग्रंथ ताड़ के पत्तों पर चित्रित किया गया है जो मेवाड़ कला की शुरुआत को दर्शाता है
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ शैली
मेवाड़ के अमर सिंह I के कार्यकाल में रागमाला चित्रित करने वाले चित्रकार का नाम बताइए ।
[स्कूल व्याख्याता GK (B) 26.06.2025]
👉 मेवाड़ स्कूल की चावण्ड उपशैली का उत्कर्ष महाराणा अमरसिंह प्रथम के शासनकाल में हुआ।
👉 इसी काल में प्रसिद्ध चित्रकार निसारदीन (नसिरुद्दीन) दरबार से जुड़ा रहा।
👉 उसने चावण्ड में वर्ष 1605 ई. में रागमाला का सुंदर चित्रण किया।
👉 इसलिए अमरसिंह प्रथम के काल को चावण्ड शैली का स्वर्णकाल कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – निसारदीन
आदमकद व्यक्ति चित्रों के चित्रण के लिए प्रसिद्ध चित्रकार है
[सांख्यिकी अधिकारी 25.02.2024]
👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख धारा है, जहाँ बड़े-बड़े पोर्ट्रेट और भित्ति चित्रों की परम्परा रही।
👉 इस शैली में अनेक चित्रकार सक्रिय रहे, जिनमें सबसे प्रसिद्ध नाम साहिबराम का है।
👉 साहिबराम ने महाराजा ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र बनाया, जो राजस्थान का प्रथम आदमकद चित्र माना जाता है।
👉 इसलिए उन्हें आदमकद व्यक्ति चित्रों के चित्रण के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध चित्रकार कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – साहिबराम
मेवाड़ शैली की चित्रकला का स्वर्णयुग निम्न में से कौन सा है
[Protection Officer 29.05.2019]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन और मौलिक शैली है।
👉 इसका स्वर्णकाल महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–1651 ई.) के शासनकाल में रहा।
👉 इसी समय उदयपुर राजमहल में ‘तस्वीरों रो कारखानो’ नामक चित्रकला विद्यालय स्थापित हुआ।
👉 इस काल में साहिबदीन और मनोहर जैसे चित्रकारों ने रागमाला, गीतगोविन्द, रामायण, भागवत पुराण आदि पर सुंदर चित्र बनाए।
✍️ सही उत्तर है – 1628–1651 ई., महाराणा जगतसिंह के शासनकाल में
चावंड शैली की चित्रकला किसके शासन काल में प्रारम्भ हुई ?
[कृषि अधिकारी 2011]
👉 चावंड शैली मेवाड़ स्कूल की एक महत्वपूर्ण उपशैली है।
👉 इस शैली का प्रारम्भ महाराणा प्रताप के शासनकाल में हुआ।
👉 प्रताप ने अपनी आपातकालीन राजधानी चावंड में स्थापित की, जहाँ चित्रकला का विकास शुरू हुआ।
👉 इसी काल की प्रसिद्ध कृति “ढोला-मारू री चौपाई” (1552 ई.) मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – प्रताप
सुरजन, अहमद अली, रामलाल, श्री किसन और साधुराम किस शैली के प्रमुख चित्रकार थे ?
[Asst. Town Planner 16.06.2023]
👉 बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल की एक प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इस शैली में प्राकृतिक दृश्य, पशु-पक्षी और शिकार चित्रण की विशेषता रही।
👉 इसके प्रमुख चित्रकारों में सुरजन, अहमद अली, रामलाल, श्रीकिसन और साधुराम के नाम उल्लेखनीय हैं।
👉 इन कलाकारों ने बूँदी शैली को उसकी विशिष्ट पहचान और समृद्धि प्रदान की।
✍️ सही उत्तर है – बूँदी
निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता जयपुर शैली की चित्रकला की नहीं है ?
[PTI Grade -III (RPSC) 2011]
👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख चित्रकला शैली है।
👉 इसकी विशेषताओं में भित्ति चित्रण, बड़े-बड़े आदमकद पोट्रेट और दरबारी जीवन का चित्रण प्रमुख है।
👉 इसमें राधा–कृष्ण लीला, राग–रागिनी, युद्ध व शिकार के दृश्य भी चित्रित किए गए।
👉 जबकि शैलचित्र (गुफाओं या शैलाश्रयों पर बने चित्र) जयपुर शैली की विशेषता नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – शैलचित्र
सावंतसिंह का संबंध किस चित्रकला शैली से था ?
[सहायक कृषि अधिकारी 28.08.2022]
👉 सावंतसिंह (नागरीदास) किशनगढ़ रियासत के प्रसिद्ध शासक और कवि थे।
👉 उनके काल को किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल कहा जाता है।
👉 सावंतसिंह ने अपने काव्य और आस्था से चित्रकला को नई प्रेरणा दी।
👉 इन्हीं के आदेश पर चित्रकार निहालचंद ने प्रसिद्ध बणी-ठणी चित्र बनाया।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़ शैली
निम्नलिखित में से कोटा का कौनसा शासक अपने शिकार अभियान के दौरान चित्रकारों को अपने साथ ले जाता था ?
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 18.10.2022]
👉 कोटा शैली हाड़ौती स्कूल की प्रमुख धारा है, जिसका उत्कर्ष महाराव उम्मेदसिंह प्रथम के समय हुआ।
👉 उनके शासनकाल में शिकार दृश्यों का अत्यधिक चित्रांकन हुआ।
👉 महाराव उम्मेदसिंह अपने शिकार अभियानों में चित्रकारों को साथ ले जाते थे।
👉 परिणामस्वरूप कोटा शैली की सबसे बड़ी पहचान शिकार दृश्य बन गए।
✍️ सही उत्तर है – उम्मेदसिंह प्रथम
महाराणा प्रताप के समय में चावण्ड में चित्रित प्रसिद्ध कृति है - [*]
[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]
📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' घोषित किया गया है।
इलायची एवं कमला राजस्थान की किस चित्रशैली की चित्रकार थीं ?
[सहायक सांख्यिकी अधि. 25.08.2024]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली की मौलिक देन पिछवाई चित्रण मानी जाती है।
👉 नाथद्वारा शैली में अनेक कलाकार सक्रिय रहे, जिनमें महिला चित्रकार इलायची और कमला के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं।
👉 इन कलाकारों ने श्रीनाथजी से जुड़ी कृष्ण लीलाओं का सजीव चित्रण किया।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा उपशैली
रूक्नुद्दीन, शाहदीन, रशीद और कासिम किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित थे ?
[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]
👉 बीकानेर शैली मारवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका उत्कर्ष महाराजा अनूपसिंह के काल में हुआ, जब अनेक कलाकारों को संरक्षण मिला।
👉 इस शैली में अनेक मुस्लिम चित्रकारों ने भी योगदान दिया।
👉 प्रमुख चित्रकारों में रूक्नुद्दीन, शाहदीन, रशीद और कासिम के नाम उल्लेखनीय हैं।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर शैली
श्रीलाल जोशी किस कला से सम्बन्धित है ?
[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]
👉 राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा कस्बे में फड़ चित्रकला की परंपरा विकसित हुई।
👉 इस परंपरा को आगे बढ़ाने में जोशी परिवार का विशेष योगदान रहा।
👉 इसी परिवार के प्रसिद्ध कलाकार श्रीलाल जोशी थे।
👉 उन्होंने फड़ चित्रण की परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई।
✍️ सही उत्तर है – फड़
चावण्ड शैली के प्रसिद्ध चितेरे नासीरुद्दीन (नासरदी) ने रागमाला का चित्रण किस शासक के संरक्षण में किया-
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)
👉 चावण्ड शैली मेवाड़ स्कूल की महत्वपूर्ण उपशैली है।
👉 इसका स्वर्णकाल महाराणा अमरसिंह प्रथम के शासनकाल में माना जाता है।
👉 इसी काल में प्रसिद्ध चित्रकार नासीरुद्दीन (नासरदी) सक्रिय रहे।
👉 उन्होंने अमरसिंह प्रथम के संरक्षण में रागमाला का सुंदर चित्रण किया।
✍️ सही उत्तर है – अमरसिंह प्रथम
निम्नलिखित में से कौन - सा चित्रकार चित्रकला की मेवाड़ शैली से सम्बद्ध था ?
[Head Master 2011]
👉 साहिब दिन के अलावा मनोहर, निसारद्दीन मेवाड़ चित्र शैली के प्रमुख चित्रकार है। मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की मूल और मौलिक शैली मानी जाती है।
👉 महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–1652 ई.) के काल में यह शैली अपने स्वर्णिम युग में पहुँची।
👉 इसी काल में प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन ने ‘भागवत पुराण’, ‘आर्ष रामायण’, ‘रागमाला’ आदि पर उत्कृष्ट चित्र बनाए।
👉 साहिबदीन का योगदान मेवाड़ शैली को विशिष्ट पहचान प्रदान करने में रहा।
✍️ सही उत्तर है – साहिबदीन
लोक गायिकी की 'चार बैत' शैली राजस्थान के किस नगर में प्रचलित रही है ?
[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]
👉 टोंक रियासत में चार बेत शैली की शुरुआत नवाब फैजुल्लाह खान के शासनकाल में हुई थी। राजस्थान की लोक गायिकी में अनेक विशिष्ट शैलियाँ प्रचलित रही हैं।
👉 इन्हीं में से एक प्रमुख शैली ‘चार बैत’ रही है।
👉 यह शैली विशेषकर टोंक नगर में गाई और विकसित की जाती थी।
✍️ सही उत्तर है – टोंक
किशनगढ़ चित्रशैली के विषय में कौन-सा कथन असत्य है ?
[PTI Grade -II (RPSC) 2011]
👉 रुकनुद्दीन बीकानेर चित्र शैली का चित्रकार है
सावर व शाहपुरा किस चित्रकला शैली की उपशैलियाँ हैं ?
[Deputy Commandant 23.08.2020]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की मूल और मौलिक शैली है।
👉 इसके अंतर्गत कई उपशैलियाँ विकसित हुईं।
👉 इनमें सावर और शाहपुरा की चित्रकला उपशैलियाँ विशेष महत्व रखती हैं।
👉 इन उपशैलियों ने मेवाड़ शैली को और अधिक विविधता और समृद्धि प्रदान की।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
'निहालचंद' किसके दरबारी चित्रकार थे ?
[सहायक कृषि अधिकारी 2011]
👉 निहालचंद किशनगढ़ शैली के सबसे प्रसिद्ध चित्रकार थे।
👉 उनका संबंध राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के दरबार से था।
👉 सावंतसिंह के आदेश पर निहालचंद ने उनकी प्रेमिका बणी-ठणी का प्रसिद्ध चित्र बनाया।
👉 इस चित्र ने किशनगढ़ शैली को विश्वस्तरीय पहचान प्रदान की।
✍️ सही उत्तर है – सावंतसिंह
पशुपक्षियों को महत्व देने वाली चित्र शैली है :
[कृषि अधिकारी 2011]
👉 बूंदी चित्र शैली में पशु पक्षियों और प्रकृति का सर्वश्रेष्ठ अंकन मिलता है इसलिए इस शैली को राजस्थान चित्रकला में "पशु पक्षियों की चित्र शैली" कहा जाता है, पानी और आकाश का अनोखा चित्रण भी इस चित्र शैली में देखने को मिलता है
✍️ सही उत्तर है – बूँदी
पक्षियों को महत्व देने वाली चित्र शैली है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (संस्कृत)
👉 हाड़ौती स्कूल की प्रमुख धारा बूँदी शैली मानी जाती है।
👉 इस शैली में प्रकृति और विशेषकर पक्षियों का अत्यधिक अंकन किया गया।
👉 यहाँ कबूतर, बतख, मोर जैसे पक्षी चित्रण प्रमुख विषय बने।
👉 इसलिए बूँदी शैली को ‘पक्षी शैली’ भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – बूँदी शैली
प्रसिद्ध चित्रकार नागरीदास का मूल नाम क्या था ?
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
👉 किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह के समय माना जाता है।
👉 उन्होंने कवि रूप में “नागरीदास” उपनाम से काव्य रचना की।
👉 उनके काव्य और संरक्षण से किशनगढ़ चित्रकला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।
✍️ सही उत्तर है – सावंतसिंह
निहालचन्द किस चित्र शैली का चित्रकार था ?
[कृषि अधिकारी 2011]
👉 प्रसिद्ध कलाकार निहालचंद किशनगढ़ शैली का प्रमुख चित्रकार था।
👉 उसने राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के दरबार में कार्य किया।
👉 उसकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति “बणी-ठणी” है, जिसे “भारत की मोनालिसा” कहा गया।
👉 निहालचंद की चित्रकला ने किशनगढ़ शैली को अमर पहचान दी।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़
लाडली दास निम्न में से किस चित्रकला, शैली का चित्रकार था ?
[EO RO (Re Exam) 23 मार्च 2025]
👉 किशनगढ़ शैली मारवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के काल में माना जाता है।
👉 इस शैली से जुड़े अनेक चित्रकारों में लाड़लीदास का नाम भी प्रमुख है।
👉 इन कलाकारों ने किशनगढ़ शैली को उसकी विशिष्ट पहचान और समृद्धि दी।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़
कथन (A) : राजस्थानी चित्रशैलियों की विषयवस्तु मुख्यतः धार्मिक है ।
कारण (R) : राजस्थान का समाज धार्मिकता की भावना से ओतप्रोत है ।
[स्टेनोग्राफर (RPSC) 2011]
👉 राजस्थानी चित्रशैलियों की विषयवस्तु में मुख्यतः धार्मिक कथाएँ जैसे कृष्ण लीला, रामायण, महाभारत, भागवत पुराण आदि चित्रित की गई हैं।
👉 इसका कारण यह है कि राजस्थान का समाज गहरी धार्मिक भावना और आस्था से जुड़ा रहा।
👉 इसलिए चित्रकारों ने समाज की इस धार्मिक प्रवृत्ति को ही अपनी कला का आधार बनाया।
👉 अतः (A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की ठीक व्याख्या करता है।
✍️ सही उत्तर है – (A) और (R) दोनों सही हैं, किन्तु (R), (A) की ठीक व्याख्या करता है।
इनमें से कौन सम्राट अकबर के दरबार में चित्रकारी के उस्ताद थे ?
[स्कूल व्याख्याता 03.01.2020]
👉 ख्वाजा अब्दुस समद के अलावा अकबर के दरबार में प्रमुख चित्रकार मीर सैयद अली, दसवंत बसावन, ताराचंद, मिस्किन आदि थे
👉 वे अकबर के दरबार में चित्रकला के उस्ताद के रूप में प्रसिद्ध हुए।
👉 इनके योगदान से मुगल दरबार की चित्रकला परम्परा अत्यधिक समृद्ध हुई।
✍️ सही उत्तर है – ख्वाजा अब्दुस समद
“अटपटी पगड़ी” चित्रकला की किस शैली से संबंधित है ?
[उपनिरीक्षक (SI) 14.09.2021]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की मूल शैली मानी जाती है।
👉 इसमें पुरुषों के चित्रण में उदयपुरी पगड़ी और लंबा साफ़ा विशेष रूप से दर्शाए गए हैं।
👉 इस शैली में बनाई गई पगड़ी को ही स्थानीय भाषा में “अटपटी पगड़ी” कहा गया है।
👉 यह पगड़ी मेवाड़ चित्रशैली की निजी विशेषता के रूप में प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
शेखावाटी में "कृष्ण की आठ गोपियाँ एक हाथी के रूप में चित्रित" भित्तिचित्र कहाँ मिला है ?
[सहायक सांख्यिकी अधि. 25.08.2024]
👉 शेखावाटी क्षेत्र अपने भित्तिचित्रों और हवेलियों के कारण ओपन एयर आर्ट गैलरी के नाम से प्रसिद्ध है।
👉 यहाँ के चित्रण में लोकजीवन, धार्मिक कथाएँ और श्रृंगारिक प्रसंग प्रमुखता से मिलते हैं।
👉 शेखावाटी की हवेलियों में कृष्ण लीलाओं का चित्रण विशेष महत्व रखता है।
👉 ऐसा ही अद्भुत चित्र “कृष्ण की आठ गोपियाँ एक हाथी के रूप में” फतेहपुर की गोयनका हवेली में मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – गोयनका हवेली, फतेहपुर
निम्नलिखित में से कौन सा चित्रकार अलवर शैली की चित्रकला से संबंधित नहीं है ?
[RAS Pre. 05.08.2018]
👉 नानकराम किशनगढ़ शैली से संबंधित चित्रकार है
👉 अलवर शैली का आरंभ राजा प्रतापसिंह (1775 ई.) के समय हुआ और इसका स्वर्णकाल महाराजा विनयसिंह के शासन में रहा।
👉 इस शैली में प्रमुख चित्रकार बलदेव, गुलाम अली, जमुनादास, मूलचंद, जगन्नाथ, रामगोपाल, रामप्रसाद, रामसहाय, सालिगराम, छोटे लाल, नंदराम आदि थे।
👉 इनमें से नानकराम का नाम अलवर शैली के चित्रकारों की सूची में नहीं आता।
👉 नानकराम अन्य क्षेत्रीय शैली से जुड़ा चित्रकार रहा, परन्तु अलवर शैली से उसका संबंध नहीं था।
✍️ सही उत्तर है – नानकराम
बूँदी शैली, कोटां शैली, झालावाड़ उपशैली राजस्थानी चित्रकला को किस श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है ?
[EO RO (Shift II) 14.05.2023]
👉 राजस्थानी चित्रकला को उसकी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के आधार पर विभिन्न स्कूलों में बाँटा गया है।
👉 इनमें बूँदी शैली, कोटा शैली और झालावाड़ उपशैली को एक ही समूह में रखा गया है।
👉 इन सभी का संबंध हाड़ौती क्षेत्र से है।
👉 इसलिए इन्हें सामूहिक रूप से हाड़ौती स्कूल के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – हाड़ौती स्कूल
चित्रकार साहिब राम राजस्थानी चित्रकला के किस स्कूल से संबद्ध थे ?
[स्कूल व्याख्याता 21.10.2022]
👉 ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख धारा जयपुर शैली रही है।
👉 इस शैली का उत्कर्ष सवाई जयसिंह द्वितीय और उसके उत्तराधिकारियों के समय हुआ।
👉 इन्हीं दिनों के प्रमुख चित्रकारों में साहिब राम का नाम विशेष रूप से लिया जाता है।
👉 साहिब राम ने जयपुर दरबार में अनेक आदमकद चित्रों और राधा-कृष्ण विषयक चित्रों का निर्माण किया।
✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़ स्कूल
रामनाथ, तुलसीदास, सवाईराम और लांडलीदास चित्रकला की किस शैली से सम्बन्धित हैं ?
[PTI GRADE -II & III (RPSC) 2013]
👉 किशनगढ़ शैली मारवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय माना जाता है।
👉 इस शैली में अनेक चित्रकारों ने कार्य किया, जिनमें रामनाथ, तुलसीदास, सवाईराम और लांडलीदास प्रमुख हैं।
👉 इन कलाकारों ने राधा–कृष्ण, प्राकृतिक सौंदर्य और बणी-ठणी जैसे अमर चित्रों का निर्माण किया।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़
राजस्थानी चित्रकला का प्राचीनतम केन्द्र माना जाता है :
[Asst. Jailor 15.03.2016]
👉 राजस्थानी चित्रकला की जन्मभूमि और प्राचीनतम केन्द्र मेदपाट/मेवाड़ को माना जाता है।
👉 यहाँ की चित्रकला जैन, अपभ्रंश, गुजरात और अजन्ता परम्पराओं के समन्वय से विकसित हुई।
👉 श्रावक-प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि (1260 ई.) इसका सबसे प्राचीन उपलब्ध उदाहरण है।
👉 इसलिए ऐतिहासिक दृष्टि से मेवाड़ शैली को ही राजस्थानी चित्रकला का प्रारम्भिक और प्रमुख केन्द्र माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
राजस्थानी चित्रकला की जन्मभूमि है :
[कृषि अधिकारी 24.11.2020]
👉 राजस्थानी चित्रकला का उद्भव 15वीं शताब्दी के लगभग अपभ्रंश, गुजरात, अजन्ता और जैन शैली से हुआ।
👉 इसकी जन्मभूमि मानी जाती है मेदपाट / मेवाड़।
👉 मेवाड़ शैली को राजस्थानी चित्रकला की मूल शैली और ऐतिहासिक परम्परा में सर्वोपरि स्थान प्राप्त है।
👉 महाराणा कुंभा और उनके उत्तराधिकारियों के संरक्षण में यह शैली समृद्ध और विकसित हुई।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
राजस्थानी चित्रकला की सिरोही शैली, निम्न में किस शाखा से सम्बन्धित है ?
[Research Scholar 04.08.2024]
👉 सिरोही शैली राजस्थानी चित्रकला की एक स्थानीय धारा है। हाड़ौती स्कूल में कोटा चित्र शैली और बूंदी चित्र शैली शामिल है
👉 यह शैली मारवाड़ स्कूल की शाखा मानी जाती है।
👉 मारवाड़ स्कूल में जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़, नागौर, अजमेर, पाली और सिरोही की शैलियाँ सम्मिलित हैं।
👉 इसलिए सिरोही शैली का संबंध प्रत्यक्ष रूप से मारवाड़ स्कूल से है।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़
निम्नलिखित में से कौन-सी राजस्थानी चित्रकला की विशेषता नहीं है ?
[PTI Grade -III (RPSC) 2011]
👉 राजस्थानी चित्रकला में लोक जीवन से गहरा संबंध दिखाई देता है।
👉 इसमें ग्रामीण परिवेश, नारी सौंदर्य और धार्मिक भावनाओं का जीवंत चित्रण हुआ।
👉 यहाँ लोक जीवन की झलक सभी शैलियों में प्रमुख रूप से मिलती है।
👉 इसलिए “लोक जीवन के चित्रण का उपेक्षापूर्ण अभाव” राजस्थानी चित्रकला की विशेषता नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – लोक जीवन के चित्रण का उपेक्षापूर्ण अभाव
जमनादास, छोटेलाल, बक्साराम और नन्दलाल चित्रकला की किस शैली से संबन्धित हैं ?
👉 अलवर शैली ढूंढाड़ स्कूल की एक प्रमुख चित्रकला शैली है।
👉 इसका विकास राजा प्रतापसिंह के काल से हुआ और उत्कर्ष महाराजा विनयसिंह के शासन में मिला।
👉 इस शैली से जुड़े प्रमुख चित्रकारों में जमनादास, छोटेलाल, बक्साराम और नन्दलाल विशेष रूप से प्रसिद्ध रहे।
👉 इन कलाकारों ने अलवर दरबार की चित्रकला को नया स्वरूप और पहचान दी।
✍️ सही उत्तर है – अलवर शैली
जमनादास, छोटेलाल और बक्साराम चित्रकला की निम्नलिखित में से किस शैली से संबंधित है ?
[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]
👉 अलवर शैली ढूंढाड़ स्कूल की एक महत्वपूर्ण चित्रकला शैली है।
👉 इसका विकास राजा प्रतापसिंह से प्रारम्भ हुआ और उत्कर्ष महाराजा विनयसिंह के काल में हुआ।
👉 इस शैली से जुड़े अनेक प्रमुख चित्रकारों में जमनादास, छोटेलाल और बक्साराम के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं।
👉 इन कलाकारों ने अलवर दरबार में चित्रण कर इस शैली को विशिष्ट पहचान दी।
✍️ सही उत्तर है – अलवर शैली
बूंदी दुर्ग में 'रंगविलास' नामक चित्रशाला का निर्माण किस शासक के काल में हुआ ?
[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]
👉 बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल की प्रमुख धारा है, जिसका स्वर्णकाल महाराव उम्मेदसिंह प्रथम का समय रहा।
👉 उन्हीं के काल में बूँदी दुर्ग में ‘रंगविलास चित्रशाला’ का निर्माण हुआ।
👉 इस चित्रशाला को “भित्ति चित्रों का स्वर्ग” कहा जाता है।
👉 यहाँ भावनाओं की सरलता, प्रकृति व शिकार दृश्य का अद्भुत चित्रण मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – महाराव उम्मेदसिंह
अठारहवीं शताब्दी में जयपुर का प्रख्यात पोर्ट्रेट चित्रकार कौन था ?
[कृषि अधिकारी 24.11.2020]
👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख धारा है, जिसका उत्कर्ष 18वीं शताब्दी में हुआ।
👉 इस काल में अनेक प्रतिभाशाली चित्रकार दरबार में कार्यरत थे।
👉 इनमें सबसे प्रसिद्ध पोर्ट्रेट चित्रकार का नाम साहिब राम था।
👉 साहिब राम ने महाराजा ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र बनाया, जो जयपुर शैली की अनूठी पहचान है।
✍️ सही उत्तर है – साहिब राम
कोटा के किस शासक के काल से शिकार का चित्रण कोटा शैली की एक प्रमुख विशेषता बनी ?
[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]
👉 कोटा शैली हाड़ौती स्कूल की प्रमुख धारा है, जिसका उत्कर्ष 18वीं सदी में हुआ।
👉 इस शैली का स्वर्णकाल महाराव उम्मेदसिंह प्रथम का शासनकाल माना जाता है।
👉 उनके समय गहन जंगलों और आखेट पर आधारित शिकार दृश्य चित्रण का मुख्य विषय बने।
👉 इसी कारण शिकार का चित्रण कोटा शैली की प्रमुख पहचान और विशेषता बन गया।
✍️ सही उत्तर है – उम्मेदसिंह प्रथम
चित्रकार जो अपने आदमंकर व्यक्ति चित्रों के लिए जाना जाता है
[स. सांख्यिकी अधिकारी 08.07.2022]
👉 जयपुर शैली में बड़े-बड़े आदमकद पोट्रेट चित्रण की परम्परा विकसित हुई।
👉 इस परम्परा को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख चित्रकार साहिबराम थे।
👉 उन्होंने महाराजा ईश्वरीसिंह का आदमकद चित्र बनाया, जो इस शैली की अनूठी पहचान है।
👉 इसलिए साहिबराम को आदमकद व्यक्ति चित्रों का प्रसिद्ध चित्रकार कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर का साहिबराम
निम्न में से कौनसी चित्रकला शैली मुगल चित्रकला से सर्वाधिक प्रभावित हुई ?
[Head Master 11.10.2021]
👉 जयपुर शैली का उद्भव आमेर शैली से हुआ और यह ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख धारा है।
👉 इस शैली पर मुगल दरबार के साथ कछवाहा शासकों के घनिष्ठ सम्बन्धों का प्रभाव रहा।
👉 जयपुर चित्रशैली में भित्ति चित्रण में आलागीला/अराइश तकनीक तथा मुगल दरबार के उद्यान दृश्य, हाथियों की लड़ाई जैसे प्रसंग स्पष्ट मिलते हैं।
👉 इसलिए यह शैली राजस्थान की वह शैली है, जो मुगल चित्रकला से सर्वाधिक प्रभावित हुई।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर शैली
वर्ष 1628 ई. में मेवाड़ में रागमाला चित्रांकन को किसने चित्रित किया था ?
[ACF 18.02.2021]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन और मौलिक शैली है।
👉 इसका स्वर्णकाल महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–1652 ई.) का समय माना जाता है।
👉 इसी काल में प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन सक्रिय रहे।
👉 उन्होंने वर्ष 1628 ई. में रागमाला का चित्रण किया।
✍️ सही उत्तर है – साहिबदीन
त्रिलोक, हीरानन्द साहिबराम एवं रामजीदास किस देशी रियासत के चित्रकार थे ?
[सहायक कृषि अधिकारी 28.05.2022]
👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख चित्रकला शैली है।
👉 इस शैली को विशेष संरक्षण सवाई जयसिंह द्वितीय और उसके उत्तराधिकारियों ने दिया।
👉 जयपुर दरबार में अनेक प्रतिभाशाली चित्रकार सक्रिय रहे।
👉 इनमें त्रिलोक, हीरानन्द, साहिबराम और रामजीदास प्रमुख रूप से उल्लेखनीय हैं।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर
प्रसिद्ध चित्रकार धीमा, मीरबक्स, काशी एवं रामलखन राजस्थान की किस चित्रशैली से सम्बन्धित रहे ?
[स. सांख्यिकी अधिकारी 27.05.2019]
👉 उणियारा शैली ढूंढाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली में अनेक प्रतिभाशाली चित्रकारों ने कार्य किया।
👉 इनमें धीमा, मीरबक्स, काशी और रामलखन के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
👉 इन कलाकारों ने उणियारा शैली को अपनी कृतियों से विशिष्ट पहचान दी।
✍️ सही उत्तर है – उणियारा शैली
अमर सिंह के शासन काल में चावण्ड में रागमाला के चित्र किसके द्वारा चित्रित किये गये ?
[सहायक कृषि अधिकारी 27.08.2022]
👉 चावण्ड शैली मेवाड़ स्कूल की उपशैली है, जिसका उत्कर्ष महाराणा अमरसिंह प्रथम के समय हुआ।
👉 इसी काल में चित्रकार निसारदीन (नसिरुद्दीन) दरबार से जुड़ा रहा।
👉 उसने 1605 ई. में चावण्ड में प्रसिद्ध रागमाला का चित्रण किया।
👉 इसलिए अमरसिंह प्रथम के काल को चावण्ड शैली का स्वर्णकाल माना गया।
✍️ सही उत्तर है – निसारदीन
किस शैली में चमकीले पीले रंग और लाख के लाल रंग की प्रधानता देखी जाती है ?
[सहायक कृषि अधिकारी 27.08.2022]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन और मौलिक शैली है।
👉 इस शैली में रंगों का प्रयोग अत्यंत चटकीला और आकर्षक किया गया।
👉 विशेषकर इसमें पीले रंग और लाख के लाल रंग की प्रधानता स्पष्ट दिखाई देती है।
👉 यही विशेषता मेवाड़ शैली को अन्य सभी शैलियों से भिन्न पहचान प्रदान करती है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ शैली
कपड़े पर चित्रित .......नाथद्वारा चित्रकला शैली का सजीव उदाहरण है।
[स्कूल व्याख्याता 11.10.2022]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली की सबसे बड़ी मौलिक देन “पिछवाई” चित्रांकन है।
👉 पिछवाई प्रायः कपड़े पर चित्रित की जाती है और इसमें कृष्ण लीलाओं का अंकन मिलता है।
👉 यह शैली धार्मिक आस्था और भक्ति भावना का सजीव उदाहरण है।
✍️ सही उत्तर है – पिछवाई
किसके कथनानुसार “राजस्थानी चित्रशैली स्त्रियों की सुंदरता की खान है” ?
[पुरालेखपाल परीक्षा 03.08.2024]
👉 राजस्थानी चित्रकला में नारी सौंदर्य का अद्वितीय और आकर्षक चित्रण मिलता है।
👉 इसमें स्त्रियों के रूप, श्रृंगार और भावों को अत्यंत सजीव और मनोहर रूप में प्रस्तुत किया गया है।
👉 प्रसिद्ध विद्वान डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल ने इसकी विशेषता पर टिप्पणी की।
👉 उनके अनुसार “राजस्थानी चित्रशैली स्त्रियों की सुंदरता की खान है।”
✍️ सही उत्तर है – डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल
कलाकार निहालचंद चित्रकला के किस स्कूल से सम्बन्धित है ?
👉 प्रसिद्ध कलाकार निहालचंद का संबंध किशनगढ़ स्कूल से रहा।
👉 उन्होंने राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के काल में दरबारी चित्रकार के रूप में कार्य किया।
👉 निहालचंद की सबसे प्रसिद्ध रचना “बणी-ठणी” है, जो किशनगढ़ शैली की पहचान बनी।
👉 इस चित्र के कारण किशनगढ़ शैली को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़ स्कूल
निम्नलिखित में से किस चित्रशैली में फरुखफाल का चित्र' मिलता है जिस पर "आसिफ खाँ रो बेटो" लिखा हुआ है ?
[वरिष्ठ अध्यापक (पेपर -I) 29.12.2024]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन और मौलिक धारा है।
👉 इस शैली में अनेक धार्मिक ग्रंथों के साथ–साथ समकालीन व्यक्तियों के चित्र भी बनाए गए।
👉 इसी शैली में ‘फरुखफाल का चित्र’ प्राप्त होता है।
👉 इस चित्र पर स्पष्ट रूप से “आसिफ खाँ रो बेटो” अंकित है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
सूची-I व सूची-II को सुमेलित करते हुए राजस्थान की प्रसिद्ध चित्रकला शैलियों एवं उनके चित्रकारों के संबंध में सही विकल्प चुनिये :
[RAS Pre परीक्षा 02.02.2025]
|
सूची-I |
सूची-II |
|
A. किशनगढ़ |
i. साहिबदीन |
|
B. बीकानेर |
ii. निहालचंद |
|
C. मेवाड़ |
iii. अली रज़ा |
|
D. मारवाड़ |
iv. शिवदास |
कूट :
A B C D
👉 किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) का काल था, इसके प्रमुख चित्रकार निहालचंद रहे।
👉 बीकानेर शैली में उस्ता परिवार व मुस्लिम चित्रकारों ने योगदान दिया, जिनमें अली रज़ा प्रमुख थे।
👉 मेवाड़ शैली का स्वर्णकाल महाराणा जगतसिंह प्रथम का काल था, इस समय के प्रमुख चित्रकार साहिबदीन थे।
👉 मारवाड़ शैली के अंतर्गत जोधपुर शैली आती है, जिसके प्रमुख चित्रकार शिवदास रहे।
✍️ सही उत्तर है – A–ii, B–iii, C–i, D–iv
अजमेर लघु-चित्र शैली को समृद्ध करने वाले चित्रकारों में एक स्त्री चित्रकार का प्रमुख स्थान है। वह कौन है ?
[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]
👉 अजमेर शैली मारवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली में दरबारी संस्कृति, लोक–संस्कृति और ठिकानों की चित्र परंपरा समृद्ध हुई।
👉 अजमेर शैली के चित्रकारों में कई नाम मिलते हैं, जिनमें एक स्त्री चित्रकार साहिबा का प्रमुख स्थान है।
👉 साहिबा ने अपने चित्रों से इस शैली को विशिष्ट पहचान और समृद्धि प्रदान की।
✍️ सही उत्तर है – साहिबा
………………..पर चित्रित पिछवाई नाथद्वारा चित्रकला शैली का सजीव उदाहरण है।
[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]
👉 नाथद्वारा शैली की मुख्य विशेषताएं - यह शैली पूरी तरह से कृष्ण भक्ति और पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के इर्द-गिर्द घूमती है: पिछवाई चित्रण: इस शैली की सबसे बड़ी खासियत 'पिछवाई ' (Pichwai) है। इसमें मंदिर में मूर्ति के पीछे लगाने के लिए बड़े कपड़ों पर भगवान कृष्ण की रासलीलाओं और त्योहारों के सुंदर चित्र बनाए जाते हैं। प्रमुख विषय: कृष्ण लीला, यशोदा मैया, बाल-ग्वाल, गायें और कमल के फूल इस शैली के मुख्य केंद्र हैं। रंगों का चयन: इसमें मुख्य रूप से हरे और पीले रंगों का भरपूर उपयोग किया जाता है। प्रमुख चित्रकार: बाबा रामचंद्र, नारायण, चतुर्भुज, घासीराम, और उदयराम इस शैली के प्रसिद्ध कलाकार रहे हैं। इस शैली की एक अनोखी बात यह भी है कि इसमें कमला और इलायची जैसी महिला चित्रकारों का भी विशेष योगदान रहा है।
पिछवाई चित्रकला कहाँ की प्रसिद्ध है ?
[वरिष्ठ अध्यापक 28.10.2018]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली की सबसे मौलिक और विशिष्ट देन पिछवाई चित्रकला है।
👉 पिछवाई प्रायः कपड़े पर चित्रित की जाती है और इसमें श्रीकृष्ण की लीलाओं का अंकन प्रमुख है।
👉 नाथद्वारा पिछवाई को इस शैली की जीवंत पहचान माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा
“बणी-ठणी” चित्र के चित्रकार का क्या नाम था ?
[उपनिरीक्षक (SI) 15.09.2021]
👉 किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय रहा।
👉 इसी काल में उनकी प्रेमिका बणी-ठणी को आधार बनाकर चित्रकला का विकास हुआ।
👉 राजा सावंतसिंह के आदेश पर प्रसिद्ध चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने बणी-ठणी का चित्र बनाया।
✍️ सही उत्तर है – निहालचंद
निम्नलिखित में से कौन सी शैली यूनानी बौद्ध कला शैली कहलाती है ?
[AEN Pre. 2013]
👉 प्राचीन भारत में अनेक कला शैलियाँ विकसित हुईं।
👉 इनमें गांधार शैली यूनानी और भारतीय कला-संस्कृति के मिश्रण से विकसित हुई।
👉 गांधार शैली को यूनानीबौद्ध शैली भी कहा जाता है क्योंकि इस शैली का विषय भारतीय था जिसमें मुख्य रूप से भगवान बुद्ध थे जबकि निर्माण तकनीक यूनानी थी
✍️ सही उत्तर है – गांधार
सवाई जयसिंह के द्वारा चित्रकारों के लिए बनाये गये कारखाने क्या कहलाते थे ?
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]
👉 सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर में कला और शिल्प को बढ़ावा दिया।
👉 उन्होंने विभिन्न कलाओं के लिए 36 कारखाने स्थापित किए।
👉 जिस तरह सूरत खाना चित्रकारों और कलाकारों के लिए था उसी प्रकार तोशाखान राजकीय रत्न आभूषण ,कीमती वस्त्र और राजसी पोशाक का कारखाना था ,मोदी खाना राजकीय अन्न भंडार और रसद विभाग था जबकि ख्याल खान मुख्य रूप से पशुपालन और विशेष राजकीय हाथी और उनके साज सामान से जुड़ा विभाग था । यह सभी सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा बनाए गए 36 कारखाने में से थे।
✍️ सही उत्तर है – सूरतखाना
निम्नलिखित में से कौन-सी शैली मारवाड़ चित्रकला की उपशैली नहीं है ?
[PTI Grade -III (RPSC) 2011]
👉 देवगढ़ शैली मारवाड़ स्कूल की एक उप शैली है
मौजमाबाद निम्नलिखित में से किस चित्रकला शैली का केन्द्र था ?
[सांख्यिकी अधिकारी 18.12.2021]
👉 मौजमाबाद आमेर के शासक मानसिंह प्रथम की जन्मस्थली है यहां पुराने महलों , छतरियों और किलो में भित्ति चित्र के अनेक प्रमाण मिलते हैं जिनमें राजपूत के शान शौकत ,शिकार की दृश्य और धार्मिक चित्रांकन दिखाया गया है
✍️ सही उत्तर है – आमेर
1973 में भारत सरकार द्वारा राजस्थानी चित्रशैली के किस चित्र पर स्मरणीय डाक टिकट जारी किया गया -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
👉 किशनगढ़ शैली का प्रतीक चित्र बणी-ठनी है, जिसे चित्रकार निहालचंद ने बनाया।
👉 इस चित्र में बणी-ठनी को राधा और राजा सावंतसिंह को कृष्ण के रूप में अंकित किया गया।
👉 बणी-ठनी को “भारत की मोनालिसा” भी कहा जाता है।
👉 5 मई 1973 को भारत सरकार ने इसी चित्र पर स्मरणीय डाक टिकट जारी किया।
✍️ सही उत्तर है – बणी-ठनी
निम्नलिखित में से कौन सी मारवाड़ शैली की उपशैली नहीं है ?
[Supt. Garden 28.07.2021]
👉 मारवाड़ स्कूल की उपशैलियों में जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़, नागौर, अजमेर, पाली, सिरोही आदि सम्मिलित हैं।
👉 इसके साथ घाणेराव, रियाँ, भिनाय, जूनियाँ जैसे ठिकाने भी मारवाड़ शैली से संबंधित हैं।
👉 जबकि देवगढ़ शैली का विकास मेवाड़ स्कूल के अंतर्गत हुआ।
👉 इसलिए देवगढ़ को मारवाड़ शैली की उपशैली नहीं माना जाता।
✍️ सही उत्तर है – देवगढ़
महा-मारू शैली का प्रचलन किसके शासनकाल में हुआ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (SST)
👉 गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक राजा वत्सराज प्रतिहार और नागभट्ट द्वितीय का काल इस शैली का चरमोत्कर्ष काल था, इस शैली से निर्मित मंदिरों में ओसिया के मंदिर जोधपुर आबानेरी का हर्षत माता का मंदिर दौसा और किराडू के मंदिर बाड़मेर प्रमुख है
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर प्रतिहार के
मारवाड़ चित्रकला शैली की ठिकाणां कला के अंतर्गत निम्न में से क्या सम्मिलित नहीं है ?
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]
👉 मारवाड़ शैली में जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़, नागौर, अजमेर, पाली और सिरोही की उपशैलियाँ सम्मिलित हैं।
👉 इसके अंतर्गत ठिकाणों की चित्रकला में घाणेराव, रियाँ, भिनाय, जूनियाँ जैसे स्थान आते हैं।
👉 जबकि बनेड़ा का संबंध मेवाड़ शैली से है, न कि मारवाड़ से।
👉 इसलिए बनेड़ा मारवाड़ चित्रकला की ठिकाणां कला में सम्मिलित नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – बनेड़ा
निम्नलिखित में से वह कौन सा चित्रकार है जिसका बीकानेर चित्रशैली से सम्बन्ध नहीं है ?
[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]
👉 बीकानेर शैली का विकास महाराजा रायसिंह और अनूपसिंह के संरक्षण में हुआ।
👉 इस शैली से जुड़े प्रमुख चित्रकार थे – हामिद रूकनुद्दीन, मुसव्विर रूकनुद्दीन, साहिबद्दीन, शाह मोहम्मद, अहमद अली, अबू हामिद आदि।
👉 वहीं साहिबराम का संबंध बीकानेर से नहीं, बल्कि जयपुर शैली (ढूंढाड़ स्कूल) से था।
👉 अतः बीकानेर चित्रशैली से उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – साहिबराम
अलवर चित्रशैली के वह कौन से कलाकार थे जिन्होंने महाराजा मंगलसिंह के समय हाथीदाँत के फलकों पर सूक्ष्म चित्र बनायें ?
[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]
👉 अलवर शैली ढूंढाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका स्वर्णकाल महाराजा विनयसिंह के समय रहा, परंतु बाद में भी इसमें उत्कृष्ट कृतियाँ बनीं।
👉 महाराजा मंगलसिंह के काल में इस शैली में हाथीदाँत के फलकों पर सूक्ष्म चित्रांकन किया गया।
👉 इन चित्रों का निर्माण प्रसिद्ध कलाकार मूलचन्द और उदयराम ने किया।
✍️ सही उत्तर है – मूलचन्द और उदयराम
निहालचंद किस शैली का चित्रकार था -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (संस्कृत)
👉 प्रसिद्ध चित्रकार निहालचंद का संबंध किशनगढ़ शैली से था।
👉 उसने राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के दरबार में कार्य किया।
👉 निहालचंद की सबसे प्रसिद्ध कृति “बणी-ठणी” है, जिसे “भारत की मोनालिसा” कहा गया।
👉 इस चित्र ने किशनगढ़ शैली को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़
मारवाड़ चित्रकला शैली के प्रसिद्ध चित्रकारों में कौन नहीं था ?
[कृषि अधिकारी 24.11.2020]
👉 मारवाड़ शैली में जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, किशनगढ़ आदि की उपशैलियाँ सम्मिलित हैं।
👉 इसके प्रमुख चित्रकार वीरजी, नारायणदास, अमरदास भाटी, डालचंद, जीतमल, माधोदास, रामसिंह भाटी आदि थे।
👉 प्रश्न में दिया गया नाम गंगाराम बीकानेर चित्रशैली से जुड़ा चित्रकार था।
👉 अतः उसे मारवाड़ शैली के चित्रकारों में सम्मिलित नहीं किया जा सकता।
✍️ सही उत्तर है – गंगाराम
निम्नांकित चित्रकारों को उनकी चित्रशैली / उपशैली से सुमेलित कीजिए एवं नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर का चयन कीजिए :
(शैली/उपशैली) (चित्रकार)
A. तिजारा I. बलदेव, गुलाम अली
B. अलवर II. साहिबराय, मुहम्मदशाह
C. जयपुर III. नंदराम, जमुनादास
D. किशनगढ़ IV. मूलराज, भीकचन्द
[कृषि अधिकारी 19.01.2021]
कूट :
A B C D
👉 तिजारा उपशैली से जुड़े प्रमुख चित्रकार थे – नंदराम और जमुनादास।
👉 अलवर शैली के चित्रकारों में बलदेव और गुलाम अली जैसे नाम आते हैं।
👉 जयपुर शैली में साहिबराम और मुहम्मदशाह प्रमुख दरबारी चित्रकार रहे।
👉 किशनगढ़ शैली से मूलराज और भीकचन्द जुड़े हुए थे।
✍️ सही उत्तर है – A–III, B–I, C–II, D–IV
मेवाड़ चित्रकला शैली से संबंधित रचना है :
[सहायक कृषि अधिकारी 2011]
👉 गीत गोविंद के अलावा श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी, सुपासनाह चरियम ,राग माला, रसिकप्रिया ,भागवत पुराण, रामायण ,कादंबरी ,पृथ्वीराज रासो, वेली किसन रुक्मणी री बिहारी सतसई आदि चित्र भी इस चित्र शैली से संबंधित है
उस/उन चित्रशैली/शैलियों को चिह्नित कीजिए, जहाँ मतिराम की साहित्यिक रचना रसराज का विषयवस्तु के रूप में उपयोग हुआ है :
(i) जोधपुर
(ii) जयपुर
(iii) अलवर
(iv) बीकानेर
[स्कूल व्याख्याता (पेपर -I) 17.11.2024]
सही कूट का चयन कीजिए :
👉 कवि मतिराम की साहित्यिक रचना ‘रसराज’ राजस्थानी चित्रकला का महत्वपूर्ण विषय रही। रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि मतिराम द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ रसराज को राजस्थान में बूंदीचित्र शैली ,और मारवाड़/जोधपुर चित्र शैली में विषय वस्तु के रूप में प्रयुक्त किया गया है
👉 अन्य शैलियों – जयपुर, अलवर और बीकानेर में इसका उल्लेख नहीं मिलता।
👉 अतः सही उत्तर केवल जोधपुर शैली है।
✍️ सही उत्तर है – केवल (i)
महिला चित्रकारों कमला एवं इलायची के नाम किस चित्रशैली से सम्बंधित हैं ?
[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली का स्वर्णकाल महाराणा राजसिंह के समय माना जाता है।
👉 नाथद्वारा शैली में अनेक चित्रकारों ने कार्य किया, जिनमें महिला चित्रकार कमला और इलायची के नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
👉 इन महिला कलाकारों ने पिछवाई और कृष्ण लीलाओं के चित्रण में अहम योगदान दिया।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा
हुमायूं कौन से ईरानी चित्रकार / कलाकार को अपने साथ भारत लाया ?
[स्कूल व्याख्याता 17.10.2022]
👉 शेरशाह सूरी की मृत्यु के बाद जब हुमायूं को भारत का सिंहासन प्राप्त हुआ तब वो अपने साथ ईरान के प्रसिद्ध और महान चित्रकार मीर सैयद अली और ख्वाजा अब्दुल समद को साथ लेकर आया था
👉 मीर सैय्यद अली ने आगे चलकर मुगल दरबार की चित्रकला परम्परा को नई दिशा दी।
✍️ सही उत्तर है – मीर सैय्यद अली
मेवाड़ शैली के चित्रित ग्रन्थों एवम् चित्रों का सही कालक्रम है -
1. मनोहर द्वारा चित्रित रामायण
2. साहिबदीन द्वारा चित्रित मेवाड़ भागवत
3. साहिबदीन द्वारा चित्रित आर्ष रामायण
4. निसारदीन द्वारा चित्रित रागमाला के चित्र
[संग्रहाध्यक्ष पुरातत्व विभाग 19.06.2024]
कूट -
👉 निसारदीन ने 1605 ई. में चावण्ड में रागमाला का चित्रण किया।
👉 इसके बाद 1648 ई. में साहिबदीन ने मेवाड़ भागवत का चित्रण किया।
👉 फिर 1649 ई. में मनोहर ने रामायण का चित्रण किया।
👉 अंत में 1655 ई. में साहिबदीन ने आर्ष रामायण का चित्रांकन किया।
✍️ सही उत्तर है – 4, 2, 1, 3