अगरणी संस्कार सम्बन्धित है
[Deputy Commandant 11.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉
अगरणी
संस्कार
गर्भकाल में
शिशु
सुरक्षा
से संबंधित
है।
👉
यह
सातवें
महीने
में गोद
भराई से
होता है।
👉
इसका
उद्देश्य
मानसिक/शारीरिक
विकास
व मां की
सलामती
है।
👉
इसमें
खीर खिलाना
व सुवचन
कहना
शामिल है।
✍️ सही उत्तर है – गर्भ काल में शिशु सुरक्षा
निम्नलिखित में से कौन सी प्रथा विवाह से संबंधित नहीं है ?
[Protection Officer 28.01.2023]
👉 राजस्थान की कई परम्पराएँ विशेष रूप से विवाह से जुड़ी हैं।
👉 लेकिन कुछ रस्में शोक संस्कार से संबंधित होती हैं।
👉 सातरवाड़ा (सांतरवाड़ा) मृत्यु के बाद किया जाने वाला शोक व्यवहार है।
👉 यह मृतक की अंत्येष्टि के उपरांत घर-परिवार से जुड़ी रस्म है।
✍️ सही उत्तर है – सातरवाड़ा
अलवर में बनवारा; खोड़िया और बढ़ार की रस्में संबंधित हैं -
[Research Assistant 10.07.2025]
👉 राजस्थान की विभिन्न रियासतों में विवाह से जुड़ी कई विशिष्ट रस्में होती हैं।
👉 अलवर क्षेत्र में भी विवाह अवसर पर कुछ प्रमुख रस्में निभाई जाती हैं।
👉 इनमें बनवारा, खोड़िया और बढ़ार प्रमुख रस्में हैं।
👉 ये सभी रस्में विशेष रूप से विवाह से संबंधित हैं।
✍️ सही उत्तर है – विवाह से
निम्न में से कौनसा युग्म (सती प्रथा उन्मूलन वर्ष रियासती राज्य) सुमेलित नहीं है ?
[Research Assistant 10.07.2025]
👉 राजस्थान में कई रियासतों ने सती प्रथा पर अलग-अलग वर्षों में रोक लगाई।
👉 बूंदी में 1822, बीकानेर में 1825, अलवर में 1830, जयपुर और डूंगरपुर में 1844, बाँसवाड़ा व प्रतापगढ़ में 1861 में इसे समाप्त किया गया।
👉 प्रश्न में दिया गया युग्म 1865 – उदयपुर सही नहीं है।
👉 उदयपुर में सती प्रथा पर रोक इससे पहले ही लागू कर दी गई थी।
✍️ सही उत्तर है – 1865 – उदयपुर
निम्न में से किस सामाजिक प्रथा से 'फरगती' सम्बन्धित हैं ?
[Asst. Testing Officer 08.07.2025]
👉 राजस्थान की संस्कृति में कई सामाजिक प्रथाएँ प्रचलित हैं।
👉 इन्हीं में एक प्रमुख प्रथा नाता प्रथा है।
👉 नाता से जुड़ी ही एक सामाजिक परिभाषा फरगती कहलाती है।
👉 इसका संबंध वैवाहिक रिश्तों के पुनर्गठन से होता है।
✍️ सही उत्तर है – नाता
'अगेती' एवं 'पछेती' शब्द प्रयुक्त होते हैं :
[सहायक कृषि अधिकारी 2011]
👉 राजस्थान की कृषि में कई स्थानीय शब्दावली प्रयोग होती है।
👉 अगेती शब्द का अर्थ है फसलों की जल्दी बीजाई।
👉 वहीं पछेती शब्द का संबंध विलम्बित बीजाई से है।
👉 ये दोनों शब्द किसानों की खेती पद्धति को दर्शाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – जल्दी एवं विलम्बित बीजाई
पुत्र जन्म के दसवें दिन किस रिवाज को मनाया जाता है ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]
👉 दसोटण वह पारंपरिक रिवाज है जो पुत्र जन्म के दसवें दिन मनाया जाता है।
👉 इस रिवाज में नवजात को शुभ माना जाता है और परिवार में उत्सव जैसा माहौल होता है।
👉 दसोटण संस्कार जन्म उपरांत होने वाली उन रस्मों में से है जिसका संबंध आगे होने वाले नामकरण से भी जुड़ सकता है।
✍️ सही उत्तर है – दसोटण
कन्या वध को गैर कानूनी घोषित करने वाली राजस्थान की पहली रियासत थी
[Head Master 11.10.2021]
👉 राजस्थान में पहले कन्या जन्म पर कन्या वध जैसी कुप्रथा प्रचलित थी।
👉 समाज में दहेज और त्याग प्रथा इसके प्रमुख कारण माने जाते थे।
👉 अंग्रेजी शासन के दबाव और जागरूकता से इसे गैर-कानूनी घोषित किया गया।
👉 राजस्थान में सर्वप्रथम यह कदम कोटा रियासत ने उठाया था।
✍️ सही उत्तर है – कोटा
चर्चरी रचना निम्न में से किससे संबंधित है ?
[PTI & Librarian 03.05.2025]
👉 राजस्थान की संस्कृति में अनेक संगीतमयी रचनाएँ प्रचलित हैं।
👉 इन्हीं में एक विशेष रचना चर्चरी कहलाती है।
👉 यह रचना विभिन्न उत्सवों पर गाई जाती है।
👉 इसमें गीत के साथ ताल और नृत्य का समावेश होता है।
✍️ सही उत्तर है – उत्सव में ताल व नृत्य के साथ गाई जाने वाली रचनाएं
'छेड़े' किस अवसर पर गाये जाते हैं ?
[वरिष्ठ अध्यापक Spl Edu 03.07.2019]
👉 राजस्थान की परम्पराओं में विभिन्न अवसरों पर अलग-अलग लोकगीत गाए जाते हैं।
👉 छेड़े ऐसे गीत हैं जो शोक अवसर पर गाए जाते हैं।
👉 ये गीत विशेष रूप से शिशु मृत्यु के समय गाए जाते हैं।
👉 इनसे परिवार के दुख और वेदना की अभिव्यक्ति होती है।
✍️ सही उत्तर है – शिशु मृत्यु
राजस्थान के रीति-रिवाजों में 'आंणौ' क्या है ?
[RAS Pre. 27.10.2021]
👉 राजस्थान की संस्कृति में विवाह के बाद कई विशेष रस्में निभाई जाती हैं।
👉 इन्हीं में एक प्रथा आंणौ कहलाती है।
👉 इसमें विवाह के बाद दुल्हन को दूसरी बार ससुराल भेजा जाता है।
👉 यह परम्परा नवविवाहिता के गृह प्रवेश से जुड़ी होती है।
✍️ सही उत्तर है – विवाह के पश्चात् दुल्हन को दूसरी बार ससुराल भेजना
राजस्थान में वर पक्ष का किये जाने के रिवाज को वधू के पिता द्वारा स्वागत क्या कहा जाता है ?
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]
👉 राजस्थान की विवाह परम्पराओं में वर पक्ष के स्वागत की कई रस्में होती हैं।
👉 वधू के पिता द्वारा वर और बारात का आदर-सत्कार किया जाता है।
👉 इस स्वागत की रस्म को मधुपर्क / सामेला / आगवानी कहा जाता है।
👉 यह प्रथा विवाह अवसर पर निभाई जाने वाली मुख्य परम्परा है।
✍️ सही उत्तर है – मधुपर्क
प्रथम बार पुत्र के जन्म के अवसर पर बालक और उसके परिवार को ननिहाल पक्ष द्वारा वस्त्र व आभूषण दिए जाते हैं। यह रिवाज कहलाता है
[सांख्यिकी अधिकारी 25.02.2024]
👉 राजस्थान की परम्पराओं में शिशु जन्म पर कई विशेष रस्में होती हैं।
👉 प्रथम बार पुत्र जन्म पर ननिहाल पक्ष की ओर से उपहार दिए जाते हैं।
👉 इसमें बालक व उसकी माँ को वस्त्र और आभूषण भेंट किए जाते हैं।
👉 इस रिवाज को जामणा कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जामणा
'पाग- दस्तूर' किसे कहा जाता है ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- C) 09.09.2025]
👉 पाग-दस्तूर वह रिवाज है जो परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद निर्धारित दिन पर किया जाता है।
👉 इसमें परिवार का नया मुखिया पगड़ी (पाग) धारण करता है, जो जिम्मेदारी और उत्तराधिकार का प्रतीक होता है।
👉 यह दस्तूर परिवार और समाज में नए मुखिया की औपचारिक स्वीकृति मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – यह परिवार में मुखिया की मृत्यु के बाद निश्चित दिन पर होने वाला दस्तूर था।
निम्न में से किस राज्य के शासक ने 1837 में अपनी गया तीर्थयात्रा में अपने सामंतों को कन्यावध न करने के लिए शपथ दिलाई थी ?
[Deputy Jailor Exam 13.07.2025]
👉 राजस्थान में पहले कन्यावध प्रथा प्रचलित थी।
👉 इस कुप्रथा को समाप्त करने हेतु शासकों ने कई कदम उठाए।
👉 सन् 1837 में एक शासक ने अपने सामंतों को शपथ दिलाई।
👉 यह कदम बीकानेर राज्य के शासक ने उठाया था।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर
मोर बांधिया, पहरावणा और ताणना नामक तीन प्रकार के विवाह किस जनजाति में प्रचलित हैं ?
[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]
👉 राजस्थान की विभिन्न जनजातियों में अलग-अलग प्रकार के विवाह प्रचलित हैं।
👉 गरासिया जनजाति में तीन प्रमुख प्रकार के विवाह किए जाते हैं।
👉 ये विवाह हैं – मोर बांधिया, पहरावणा और ताणना।
👉 यह जनजाति की विशिष्ट सांस्कृतिक परम्परा को दर्शाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – गरासिया
निम्नलिखित में से किस अवसर पर 'कांकन-डोरडा' की प्रथा का अभ्यास किया जाता है ?
[वरिष्ठ अध्यापक (पेपर -I) 29.12.2024]
👉 राजस्थान की विवाह परम्पराओं में अनेक विशिष्ट रस्में होती हैं।
👉 उन्हीं में से एक रस्म कांकन-डोरड़ा कहलाती है।
👉 इसमें वर-वधू के हाथ-पाँव में विशेष मौली का डोरा बाँधा जाता है।
👉 यह रस्म केवल विवाह अवसर पर निभाई जाती है।
✍️ सही उत्तर है – विवाह
निम्नलिखित में से किस ब्रिटिश अधिकारी ने बूंदी के शासक राव राजा बिशन सिंह पर दबाव डालकर सती प्रथा के विरुद्ध वातावरणं तैयार करने में सफलता प्राप्त की ?
[EO RO (Re Exam) 23 मार्च 2025]
👉 राजस्थान में पहले सती प्रथा व्यापक रूप से प्रचलित थी।
👉 ब्रिटिश शासनकाल में इस प्रथा को समाप्त करने के लिए कई प्रयास किए गए।
👉 बूंदी के शासक राव राजा बिशन सिंह पर दबाव डालने का कार्य किया गया।
👉 यह दबाव ब्रिटिश अधिकारी जेम्स टॉड ने बनाया और विरोध का वातावरण तैयार किया।
✍️ सही उत्तर है – जेम्स टॉड
'सावित्री व्रत' में किस पेड़ की पूजा की जाती है?
[Lecturer (Ayurved) 12.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉
वट
सावित्री व्रत
में बरगद
वृक्ष
की पूजा होती
है।
👉
यह
व्रत पति
दीर्घायु
हेतु रखा जाता
है।
👉
सावित्री
ने वट
वृक्ष
के नीचे तप
किया।
👉
इसमें
सूत धागा
लपेटकर परिक्रमा
की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – वट
राजस्थान के रीति-रिवाजों में 'मौसर' किसे कहा जाता है ?
[PTI Grade -III (RPSC) 2011]
👉 राजस्थान के रीति-रिवाजों में मृत्यु के बाद कई शोक रस्में निभाई जाती हैं।
👉 इनमें एक प्रमुख रस्म मौसर कहलाती है।
👉 यह रस्म मृत्यु के 12वें या 13वें दिन सम्पन्न होती है।
👉 इसमें परिजन समाजजनों को भोज कराते हैं, जिसे मृत्यु-भोज भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मृत्यु-भोज
'कुसुम्बा' निम्न में से किससे संबंधित है ?
[कृषि अधिकारी 29.08.2022]
👉 राजस्थान की संस्कृति में कई विशेष परम्पराएँ नशे से जुड़ी रही हैं।
👉 इन्हीं में एक प्रमुख नाम कुसुम्बा है।
👉 यह प्रथा मुख्यतः अफीम और शराब से संबंधित होती है।
👉 इसका उपयोग सामाजिक अवसरों पर सत्कार व लेन-देन में किया जाता था।
✍️ सही उत्तर है – अफीम एवं शराब
आदिवासियों में प्रचलित लीला- मोरिया संस्कार किस अवसर से जुड़ा हुआ है ?
[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]
👉 राजस्थान के आदिवासियों में अनेक विशिष्ट संस्कार प्रचलित हैं।
👉 इन्हीं में एक प्रमुख लीला–मोरिया संस्कार है।
👉 यह संस्कार विशेष रूप से विवाह अवसर से जुड़ा हुआ है।
👉 इसमें पारम्परिक ढंग से विवाह संबंधी क्रियाएँ और रस्में सम्पन्न होती हैं।
✍️ सही उत्तर है – विवाह
निम्नलिखित में से किस अवसर पर जलवा पूजन किया जाता है ?
[Research Assistant 24.08.2017]
👉 राजस्थान की परम्पराओं में शिशु जन्म पर कई विशेष रस्में होती हैं।
👉 इनमें एक प्रमुख रस्म जलवा पूजन कहलाती है।
👉 इसे कुआँ पूजन या पनघट पूजन भी कहा जाता है।
👉 यह शिशु जन्म के कुछ दिनों बाद (21वें दिन) किया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – शिशु जन्म के कुछ दिनों बाद
'जडूला' एक प्रमुख संस्कार है, इसे कहते हैं :
[सहायक कृषि अधिकारी 2011]
👉 राजस्थान में बच्चों से जुड़े कई संस्कार किए जाते हैं।
👉 इनमें एक प्रमुख संस्कार जडूला कहलाता है।
👉 जडूला का ही दूसरा नाम चूड़ाकर्म/मुंडन है।
👉 इसमें पहले या तीसरे वर्ष में बच्चे के सिर के बाल उतारे जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – चूड़ाकर्म
निम्न में से कौन सी रस्म मृत्यु के दुख से सम्बन्धित नहीं है ?
[स्कूल व्याख्याता GK (C) 03.07.2025]
👉 राजस्थान की परम्पराओं में मृत्यु के बाद कई शोक रस्में निभाई जाती हैं।
👉 इनमें सांतरवाड़ा, मौसर, पगड़ी बाँधना जैसी रस्में प्रमुख हैं।
👉 ढूकाव ऐसी रस्म है जो मृत्यु के दुख से संबंधित नहीं है।
👉 यह रस्म अन्य सामाजिक अवसरों से जुड़ी हुई मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – ढूकाव