पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक थे ?
[स्कूल व्याख्याता 09.01.2020]
👉 पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय को ही वल्लभ सम्प्रदाय कहा जाता है।
👉 इसके प्रवर्तक संत वल्लभाचार्य जी थे।
👉 वल्लभाचार्य ने शुद्धाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया।
👉 इस सम्प्रदाय में कृष्ण के बालरूप (श्रीनाथजी) की भक्ति की जाती है और सेवा को ही भक्ति माना गया है।
✍️ सही उत्तर है – वल्लभाचार्य
निरंजनी संप्रदाय की स्थापना किसने की ?
[EO RO (Shift I) 14.05.2023]
👉 निरंजनी सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति धारा से सम्बन्धित है।
👉 इसके प्रवर्तक संत हरिदास जी थे।
👉 इनका जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था।
👉 इन्होंने परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहकर निर्गुण उपासना का प्रचार किया और समाज की कुरीतियों का विरोध किया।
✍️ सही उत्तर है – हरिदास
निम्न में से कौन दादू पंथ की शाखाओं में सम्मिलित नहीं है ?
[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]
👉 दादूपंथ की स्थापना संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में की थी।
👉 इस पंथ की पाँच प्रमुख शाखाएँ हैं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे (स्थानधारी) और विरक्त।
👉 प्रश्न में दिया गया ‘गौड़ीय’ वास्तव में चैतन्य महाप्रभु द्वारा स्थापित सम्प्रदाय है।
👉 अतः यह दादूपंथ की शाखाओं में सम्मिलित नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – गौड़ीय
दादू की शिक्षाओं का संकलन “दादूवाणी” रचित है
[Deputy Commandant 23.08.2020]
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के महान संत थे।
👉 इनके उपदेशों और विचारों का संकलन “दादू वाणी” के नाम से प्रसिद्ध है।
👉 इस वाणी का साहित्य मुख्यतः ढूंढ़ाड़ी बोली में रचा गया है।
👉 इसमें सधुक्कड़ी और हिन्दी मिश्रण की भी झलक मिलती है।
✍️ सही उत्तर है – ढूंढ़ाड़ी बोली में
श्री वैष्णव सम्प्रदाय से निम्न में से कौन संबंधित है ?
[स्कूल व्याख्याता 03.01.2020]
👉 श्रीवैष्णव सम्प्रदाय वैष्णव भक्ति धारा का एक प्रमुख सम्प्रदाय है। श्री संप्रदाय रामानुजाचार्य, ब्रह्म संप्रदाय- माधवाचार्य ,रुद्र संप्रदाय- विष्णु स्वामी/वल्लभाचार्य, सनकादिक संप्रदाय - निंबार्काचार्य
👉 इसके प्रवर्तक संत रामानुजाचार्य माने जाते हैं।
👉 रामानुजाचार्य ने विशिष्टाद्वैत दर्शन का प्रतिपादन किया।
👉 इस सम्प्रदाय में भगवान विष्णु और उनके अवतारों की भक्ति की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – रामानुज
निम्नांकित संतों को उनकी जाति से सुमेलित कीजिए एवं नीचे दिये गये सही कूट का चयन कीजिए :
(संत) (जाति)
A. जसनाथ I. पठान
B. लालदास II. जाट
C. रज्जब III. मिरासी
D. बखना IV. मेव
[कृषि अधिकारी 19.01.2021]
कूट :
A B C D
👉 संत जसनाथ जी जाट समुदाय से सम्बन्धित थे।
👉 संत लालदास जी मेव जाति (मुसलमान लकड़हारे) से थे।
👉 संत रज्जब जी जाति से पठान थे।
👉 संत बखना जी मिरासी जाति से सम्बन्धित थे।
✍️ सही उत्तर है – A-II, B-IV, C-I, D-III
संत पीपा के गुरु थे -
[AEN Pre. 2013]
👉 संत पीपा जी गागरोन (झालावाड़) के खींची राजपरिवार से थे और गागरोन के शासक भी रहे।
👉 उन्होंने अपना राज्य त्यागकर संत रामानन्द से दीक्षा ली।
👉 गुरु रामानन्द की प्रेरणा से पीपा जी ने निर्गुण भक्ति को अपनाया।
👉 इन्होंने अपनी रचना ‘चिन्तावणी’ में भक्ति मार्ग का संदेश दिया।
✍️ सही उत्तर है – रामानन्द
रामस्नेही संप्रदाय की सिंहथल शाखा के प्रवर्तक थे -
[स. सांख्यिकी अधिकारी 08.07.2022]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना संत रामचरण जी ने की थी।
👉 इस सम्प्रदाय की चार प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं – शाहपुरा, रैण, सिंथल और खेड़ापा।
👉 इनमें से सिंहथल शाखा के प्रवर्तक संत हरिरामदास जी थे।
👉 उन्होंने रामस्नेही सम्प्रदाय की शिक्षाओं का सिंहथल (बीकानेर) क्षेत्र में प्रचार-प्रसार किया।
✍️ सही उत्तर है – हरिराम दास जी
निम्नलिखित स्थानों में से संत रैदास का जन्म स्थान कौन सा है ?
[Asst. Jailor 15.03.2016]
👉 संत रैदास जी निर्गुण भक्ति धारा के महान संत थे।
👉 इनका जन्म 1388 ई. में हुआ था।
👉 जन्मस्थान सीर गोवर्धनपुर, काशी (वाराणसी/बनारस) बताया गया है।
👉 संत रैदास ने समानता, भक्ति और मानवता का संदेश दिया।
✍️ सही उत्तर है – बनारस
वैष्णव धर्म के निम्नलिखित सम्प्रदायों में से राजस्थान में सबसे कम लोकप्रिय कौन- सा सम्प्रदाय है ?
[स्टेनोग्राफर (RPSC) 2011]
👉 राजस्थान में वैष्णव धर्म की कई शाखाएँ प्रचलित रहीं – रामानुजी (रामानन्दी), वल्लभ सम्प्रदाय (पुष्टिमार्ग), निम्बार्क सम्प्रदाय और गौड़ीय/चैतन्य सम्प्रदाय।
👉 इनमें से रामानन्दी, वल्लभ और निम्बार्क सम्प्रदाय का प्रभाव राजस्थान में व्यापक रूप से देखा गया।
👉 जबकि चैतन्य (गौड़ीय) सम्प्रदाय का प्रभाव राजस्थान में सबसे कम लोकप्रिय रहा।
✍️ सही उत्तर है – चैतन्य
वाद-विवाद शैली में लिखे गए ग्रंथ 'चौपड़ा' सम्बन्धित हैं -
[कृषि अधिकारी 29.08.2022]
👉 संत मावजी ने डूंगरपुर क्षेत्र में निष्कलंक सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इन्होंने पाँच बड़े ग्रंथ लिखे – मेघसागर, प्रेमसागर, सामसागर, रतनसागर और अनन्तसागर।
👉 इन ग्रंथों को सामूहिक रूप से ‘चौपड़ा’ कहा जाता है।
👉 ‘चौपड़ा’ वाद–विवाद शैली में रचित होने के कारण विशेष प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – निष्कलंक सम्प्रदाय
जाम्भोजी के 29 नियमों का पालन करनेवाले अनुयायी कहलाये
[कृषि अधिकारी 2011]
👉 गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 उन्होंने समाज को 29 नियम दिए, जिनमें प्रकृति संरक्षण, अहिंसा और सत्य आचरण पर विशेष बल था।
👉 इन 29 नियमों का पालन करने वाले उनके अनुयायी विश्नोई कहलाए।
👉 विश्नोई समाज ने वन्य जीवों और हरे वृक्षों की रक्षा को धर्म का अंग माना।
✍️ सही उत्तर है – विश्नोई
निम्न में से किसने जयपुर में नाथों का प्रभाव समाप्त कर रामानंदी भक्ति परंपरा स्थापित की ?
[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]
👉 रामानंदी सम्प्रदाय की प्रधान पीठ राजस्थान में गलता जी (जयपुर) में है।
👉 यहाँ रामानंदी भक्ति परम्परा का प्रचार-प्रसार कृष्णदास पयहारी (पयहारी स्वामी) ने किया।
👉 इन्होंने जयपुर क्षेत्र में नाथ सम्प्रदाय का प्रभाव समाप्त कर रामानंदी सम्प्रदाय को स्थापित किया।
👉 इनके प्रयासों से गलता जी को उत्तरी तोताद्री और राजस्थान का बनारस कहा जाने लगा।
✍️ सही उत्तर है – पयहारी स्वामी
निम्न में से कौन विश्नोई सम्प्रदाय का संस्थापक था ?
[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]
👉 विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में की गई थी।
👉 इसके संस्थापक गुरु जाम्भोजी (जाम्भेश्वर जी) थे।
👉 इन्होंने समाज को 29 नियम दिए, जिनमें प्रकृति और जीव संरक्षण पर विशेष बल था।
👉 इस कारण विश्नोई समाज को पर्यावरण संरक्षण का अग्रदूत माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
निम्नलिखित में से कौन सी रचना मीराबाई की है ?
[Head Master 02.09.2018]
👉 संत मीराबाई 16वीं शताब्दी की महान कृष्ण भक्त कवयित्री थीं।
👉 इन्होंने अपनी भक्ति को पदों और भजनों के माध्यम से व्यक्त किया।
👉 उनकी प्रमुख और सर्वाधिक प्रसिद्ध रचना ‘पदावली’ है।
👉 इसमें श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति और माधुर्य भाव का वर्णन मिलता है।
👉 बीजक -संत कबीर दास की वाणियों का प्रमाणिक संग्रह जिनका संकलन उनके शिष्य धर्मदास ने किया था बीजक का प्रथम भाग सखी कहलाता है ,दूसरा भाग सबद कहलाता है ,तीसरा भाग रमैनी कहलाता है
✍️ सही उत्तर है – पदावली
राजस्थान में वल्लभ संप्रदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)
👉 वल्लभ सम्प्रदाय को ही पुष्टिमार्ग कहा जाता है।
👉 इसके प्रवर्तक वल्लभाचार्य जी थे, जिन्होंने कृष्ण के बालरूप (श्रीनाथजी) की भक्ति का प्रचार किया।
👉 राजस्थान में इस सम्प्रदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल नाथद्वारा (राजसमंद) है।
👉 यहाँ स्थित श्रीनाथजी मंदिर वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा
निम्नांकित में से कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है ?
[स्कूल व्याख्याता 17.07.2016]
👉 संत पीपा जी गागरोन (झालावाड़) के खींची राजपरिवार से थे और संत रामानन्द के शिष्य बने।
👉 इन्होंने प्रारम्भ में मूर्ति पूजा की, लेकिन बाद में निर्गुण भक्ति का प्रचार किया।
👉 सही युग्म होना चाहिए – “पीपा – निर्गुण भक्ति”।
✍️ सही उत्तर है – पीपा – सगुण भक्ति
संत मावजी का संबंध है
[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]
👉 संत मावजी का जन्म 1714 ई. में साबला (डूंगरपुर) में हुआ था।
👉 इन्हें ‘वागड़ का धणी’ और ‘कल्कि अवतार’ कहा जाता है।
👉 इन्होंने माही और सोम नदी के संगम पर बेणेश्वर धाम की स्थापना की।
👉 मावजी ने निष्कलंक सम्प्रदाय की स्थापना की और भीलों में सामाजिक सुधार के लिए लसाड़िया आन्दोलन चलाया।
✍️ सही उत्तर है – डूंगरपुर
निम्नलिखित में से कौन सा दादूपंथ का उप-संप्रदाय नहीं है ?
[LDC (RPSC) 23.10.2016]
👉 दादूपंथ की स्थापना संत दादू दयाल जी ने की थी।
👉 इसके पाँच प्रमुख उप-सम्प्रदाय हैं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे (स्थानधारी) और विरक्त।
👉 अतः सतनामी दादूपंथ का उप-सम्प्रदाय नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – सतनामी
'सामीप्य मुक्ति' संबंधित है -
[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]
👉 मीरा बाई 16वीं शताब्दी की महान कृष्ण भक्त संत कवयित्री थीं।
👉 उनकी भक्ति का स्वरूप माधुर्य भाव पर आधारित था।
👉 मीरा जी ने भगवान कृष्ण को पति मानकर आजीवन भक्ति की।
👉 उनकी भक्ति से प्राप्त मुक्ति को ‘सामीप्य मुक्ति’ कहा गया है, जिसका अर्थ है – ईश्वर के समीप रहने की मुक्ति।
✍️ सही उत्तर है – मीरा
निम्नलिखित में से कौन-सा संप्रदाय निर्गुण भक्ति संप्रदाय नहीं है ?
[PTI Grade -II (RPSC) 2011]
👉 राजस्थान में कई संत सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति से जुड़े हैं, जैसे – दादूपंथ, जसनाथी, विश्नोई, निरंजनी, लालदासी, रामस्नेही आदि।
👉 इन सम्प्रदायों में ईश्वर को निर्गुण निराकार रूप में पूजते हैं।
👉 जबकि रामदासी सम्प्रदाय का आधार रामभक्ति (सगुण उपासना) है।
👉 इसलिए यह सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति सम्प्रदाय नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – रामदासी
मावजी के अनुयायी उन्हें विष्णु का ___________ मानते हैं ।
[EO RO (Shift II) 14.05.2023]
👉 संत मावजी का जन्म 1714 ई. में साबला (डूंगरपुर) में हुआ था।
👉 उन्होंने माही और सोम नदी के संगम पर बेणेश्वर धाम की स्थापना की।
👉 मावजी ने सामाजिक सुधार और धार्मिक समरसता का संदेश दिया।
👉 उनके अनुयायी उन्हें भगवान विष्णु का दसवां अवतार – कल्कि अवतार मानते हैं।
✍️ सही उत्तर है – कल्कि अवतार
जाम्भोजी के अनुयायी किस रूप में जाने जाते हैं -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (संस्कृत)
👉 गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 उन्होंने समाज को 29 नियम दिए, जिनमें प्रकृति और जीव संरक्षण पर विशेष बल दिया गया।
👉 जाम्भोजी के अनुयायी इन्हीं नियमों का पालन करते हैं।
👉 इसलिए उन्हें विश्नोई के नाम से जाना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – विश्नोई
राजस्थान का फूलडोल महोत्सव किस धार्मिक सम्प्रदाय द्वारा मनाया जाता है ?
[स्कूल व्याख्याता 21.10.2022]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना 18वीं शताब्दी में संत रामचरण जी ने की थी।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
👉 यहाँ प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण 1 से चैत्र कृष्ण 5 तक फूलडोल महोत्सव आयोजित किया जाता है।
👉 यह उत्सव रामस्नेही सम्प्रदाय का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – रामस्नेही सम्प्रदाय
उस युग्म को चुनिए जिसके दोनों संत रामानंद के शिष्य थे
[पशु चिकित्सा अधिकारी 02.08.2020]
👉 संत रामानन्द जी ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को व्यापक बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
👉 इनके शिष्यों में कई संत शामिल थे, जिनमें संत धन्ना जाट और संत पीपा जी भी प्रमुख हैं।
👉 धन्ना जी ने निर्गुण भक्ति को अपनाया और पीपा जी ने अपना राज्य त्यागकर भक्ति मार्ग चुना।
👉 दोनों संतों ने गुरु रामानन्द की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार किया।
✍️ सही उत्तर है – धन्ना एवं पीपा
मुगल सम्राट अकबर द्वारा जिस सन्त को फतहपुर सीकरी आमंत्रित किया गया था, वह था :
[Head Master 2011]
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के महान संत थे।
👉 इन्होंने 1574 ई. में दादूपंथ (परब्रह्म सम्प्रदाय) की स्थापना की।
👉 1585 ई. में मुगल सम्राट अकबर ने उन्हें धार्मिक चर्चा हेतु फतेहपुर सीकरी के इबादतखाने में आमंत्रित किया।
👉 यहाँ दादू जी ने लगभग 40 दिन तक प्रवचन और विचार-विमर्श किया।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ?
[कृषि अधिकारी 29.08.2022]
👉 संत दरियाव जी रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक थे।
👉 इनका जन्म जैतारण (ब्यावर) में हुआ और बाद में ये रैण (नागौर) में आकर साधना करने लगे।
✍️ सही उत्तर है – संत दरियाव जी – रेंवासा
बिश्नोई निम्नलिखित में से किसकी पूजा करते हैं ?
[स्टेनोग्राफर (RPSC) 2011]
👉 बिश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में गुरु जाम्भोजी ने की थी।
👉 उन्होंने समाज को 29 नियम दिए और प्रकृति संरक्षण को धर्म का अंग बनाया।
👉 बिश्नोई समाज अपने प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी की पूजा और स्मरण करता है।
👉 इनके उपदेशों को ‘सबदवाणी’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी की
निम्न में से रामस्नेही सम्प्रदाय की सिंहथल शाखा के संस्थापक कौन थे ?
[PTI Grade -II (RPSC) 30.04.2023]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना संत रामचरण जी ने 18वीं शताब्दी में की थी।
👉 इस सम्प्रदाय की चार प्रमुख शाखाएँ हैं – शाहपुरा, रैण, सिंथल और खेड़ापा।
👉 इनमें से सिंहथल शाखा के प्रवर्तक संत हरिरामदास जी थे।
👉 इन्होंने रामधुन और गुरु भक्ति के माध्यम से इस शाखा का प्रचार-प्रसार किया।
✍️ सही उत्तर है – हरि रामदास जी
निम्नांकित में से रामस्नेही सम्प्रदाय की सिंहथल शाखा के प्रवर्तक संत कौन थे ?
[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 21.12.2022]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना संत रामचरण जी ने की थी।
👉 इस सम्प्रदाय की चार प्रमुख शाखाएँ हैं – शाहपुरा, रैण, सिंथल और खेड़ापा।
👉 इनमें से सिंहथल (सिंथल) शाखा के प्रवर्तक संत हरिरामदास जी थे।
👉 इन्होंने इस शाखा के माध्यम से रामस्नेही सम्प्रदाय की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार किया।
✍️ सही उत्तर है – हरिरामदास
गरीब दासजी, संत दासजी, जगन्नाथजी, माधोदासजी आदि सन्तों का सम्बन्ध किस सम्प्रदाय से माना जाता है ?
[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]
👉 संत दादूदयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इनके 152 शिष्यों में 52 प्रमुख शिष्य ‘बावन स्तम्भ’ कहलाए।
👉 गरीबदास जी, संतदास जी, जगन्नाथ जी और माधोदास जी इन्हीं प्रमुख शिष्यों में सम्मिलित थे।
👉 ये सभी संत निर्गुण भक्ति और दादू जी की शिक्षाओं का प्रचार करते थे।
✍️ सही उत्तर है – दादू पंथ
सही युग्मों को सुमेलित कीजिए और नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर चुनिए :
A. जसनाथजी (i) रेवासा (सीकर)
B. शीतलाजी (ii) चाकसू (जयपुर)
C. जाम्भोजी (iii) मुकाम (नोखा)
D. जीण माता (iv) कतरियासर (बीकानेर)
[ACF 18.02.2021]
कूट :
A B C D
👉 जसनाथ जी की प्रधान गद्दी कतरियासर (बीकानेर) में है।
👉 शीतला जी का प्रसिद्ध मंदिर चाकसू (जयपुर) में है।
👉 जाम्भोजी का समाधि स्थल मुकाम (नोखा, बीकानेर) है।
👉 जीण माता का मंदिर रेवासा (सीकर) में स्थित है।
✍️ सही उत्तर है – A-(iv), B-(ii), C-(iii), D-(i)
'धोलीदूब' ग्राम किस सम्प्रदाय से सम्बन्धित है ?
[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]
👉 धोलीदूब ग्राम (अलवर) संत लालदास जी की जन्मस्थली है।
👉 संत लालदास जी ने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 ये जाति से मेव मुसलमान थे और हिन्दू-मुस्लिम एकता व सद्भावना का संदेश दिया।
👉 इसलिए धोलीदूब ग्राम का सम्बन्ध लालदासी सम्प्रदाय से है।
✍️ सही उत्तर है – लालदासी
मेवात क्षेत्र के प्रमुख संत हैं -
[सहायक कृषि अधिकारी 27.08.2022]
👉 संत लालदास जी का जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर, मेवात क्षेत्र) में हुआ था।
👉 इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इनके अनुयायियों में विशेषकर मेव मुसलमान अधिक थे।
👉 संत लालदास जी साम्प्रदायिक सद्भाव और हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए प्रसिद्ध हुए।
✍️ सही उत्तर है – लालदास
दादू पंथ का प्रमुख केन्द्र है
[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 दादू जी का अधिकांश जीवन नारायणा (जयपुर) में व्यतीत हुआ।
👉 यहाँ उनका विशाल दादूद्वारा स्थित है, जिसे पंथ का प्रधान केन्द्र माना जाता है।
👉 यहीं 1603 ई. में दादू जी ने अपना निधन भी किया।
✍️ सही उत्तर है – नारायणा
मीरां ने अपना अन्तिम समय किस स्थान पर बिताया था ?
[कृषि अधिकारी 2011]
👉 संत मीरां बाई का जन्म 1498 ई. में कुड़की (पाली) में हुआ था।
👉 विवाह के बाद वे मेवाड़ की रानी बनीं, परन्तु पति भोजराज की मृत्यु के बाद वे पूरी तरह कृष्ण भक्ति में लीन हो गईं।
👉 चित्तौड़ और मेड़ता छोड़कर वे अंततः वृंदावन और फिर द्वारका (गुजरात) चली गईं।
👉 अपना अंतिम समय उन्होंने द्वारका में ही व्यतीत किया और यहीं उनका देहावसान हुआ।
✍️ सही उत्तर है – द्वारका
संत लालदास के सम्बन्ध में कौन सा तथ्य असत्य है ?
[कृषि अधिकारी 24.11.2020]
👉 संत लालदास जी का जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर) में हुआ था।
👉 इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की और हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
👉 इनका देहान्त 1648 ई. में नगला जहाज (भरतपुर) में हुआ था।
✍️ सही उत्तर है – 1688 ई. में इनका देहान्त हुआ
"ईश्वर मनुष्य के सद्गुण को पहचानता है तथा उसकी जाति नहीं पूछता, आगामी दुनिया में कोई जाति नहीं होगी" यह सिद्धान्त किस संत का है ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (SST)
👉 गुरु नानक देव जी सिख धर्म के प्रवर्तक थे।
👉 उन्होंने जाति-पाति और भेदभाव का कड़ा विरोध किया।
👉 उनका उपदेश था कि ईश्वर केवल मनुष्य के सद्गुणों को देखता है, जाति को नहीं।
👉 वे कहते थे कि आगामी दुनिया में कोई जाति नहीं होगी, सब समान होंगे।
✍️ सही उत्तर है – नानक
बखनाजी, संतदास जी, जगन्नाथ दास और माधोदास नामक संतों का संबंध निम्नलिखित में से किस सम्प्रदाय के साथ था ?
[RAS Pre. 27.10.2021]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की। दादू पंथ की मुख्य पीठ नरेना (जयपुर) में स्थित है इनके उपदेशों का संकलन दादू दयाल री वाणी कहा जाता है
👉 इनके कुल 152 शिष्यों में से 52 प्रमुख शिष्य ‘बावन स्तम्भ’ कहलाए।
👉 बखनाजी, संतदास जी, जगन्नाथ दास और माधोदास इन्हीं प्रमुख शिष्यों में सम्मिलित थे।
✍️ सही उत्तर है – दादू पंथ
जोधपुर का महामंदिर उपासना स्थल है
[ATO परीक्षा 27.07.2021]
👉 नाथ संप्रदाय शैव मत की एक प्रमुख शाखा है।
👉 राजस्थान में इस संप्रदाय का प्रमुख केन्द्र महामंदिर, जोधपुर है।
👉 इस मंदिर का निर्माण महाराजा मानसिंह ने 1805 ई. में कराया था।
👉 यह स्थल नाथ संप्रदाय का प्रधान उपासना स्थल (गद्दी) माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – नाथ संप्रदाय
लाल दासी सम्प्रदाय के संस्थापक का तीर्थ किस स्थान को माना जाता है ?
[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]
👉 लालदासी सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत लालदास जी थे।
👉 इनका जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर) में हुआ था।
👉 इनकी समाधि नगला जहाज (भरतपुर) में बनी हुई है।
👉 इस स्थान को लालदासी सम्प्रदाय का प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – नगला जहाज (भरतपुर)
सुमेलित कीजिए :
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रचना |
रचनाकार |
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A. पाबूजी के छन्द |
i. आसिया मोदजी |
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B. पाबूजी के गीत |
ii. रामनाथ |
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C. पाबूजी के सोरठे |
iii. मेहा चारण |
|
D. पाबू प्रकाश |
iv. बांकीदास |
सहायक आचार्य [ 07.01.2024]
A B C D
👉 पाबूजी के छन्द के रचनाकार मेहा चारण थे।
👉 पाबूजी के गीत की रचना बांकीदास ने की।
👉 पाबूजी के सोरठे के रचनाकार रामनाथ माने जाते हैं।
👉 पाबू प्रकाश की रचना आसिया मोदजी ने की।
✍️ सही उत्तर है – A-iii, B-iv, C-ii, D-i
नारी संत दयाबाई शिष्या थी -
[RAS Pre. 05.08.2018]
👉 दयाबाई 18वीं शताब्दी की प्रमुख महिला संत कवयित्री थीं। संत चरण दास जी ने चरण दासी संप्रदाय की स्थापना की, इनका मुख्य पीठ दिल्ली में स्थित है, चरण दासी संप्रदाय के अनुयाई 42 नियमों का पालन करते हैं इनकी भक्ति का स्वरूप सगुण और निर्गुण भक्ति का मिश्रण माना जाता है
👉 वे संत चरणदास जी की प्रमुख शिष्या थीं।
👉 दयाबाई ने अपनी रचनाओं में मेवाती बोली का प्रयोग किया।
👉 उनकी प्रमुख कृतियाँ ‘दया बोध’ और ‘विनय मालिका’ हैं।
✍️ सही उत्तर है – संत चरणदास
'चौपड़ा' नामक ग्रन्थ की रचना किसने की ?
[सहायक कृषि अधिकारी 28.08.2022]
👉 संत मावजी का जन्म 1714 ई. में साबला (डूंगरपुर) में हुआ था।
👉 इन्हें अनुयायी ‘वागड़ का धणी’ और ‘कल्कि अवतार’ मानते हैं।
👉 इन्होंने पाँच बड़े ग्रंथ लिखे – मेघसागर, प्रेमसागर, सामसागर, रतनसागर और अनन्तसागर।
👉 इन सभी ग्रंथों को सामूहिक रूप से ‘चौपड़ा’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मावजी
जसनाथी संप्रदाय के नियमों की संख्या है
[Protection Officer 29.05.2019]
👉 36 नियम जसनाथी, 29 नियम विश्नोई, 42 नियम चरण दासी
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इन नियमों में सदाचार, भक्ति और सामाजिक अनुशासन पर बल दिया गया।
👉 इन्हीं नियमों के पालन से जसनाथी सम्प्रदाय की पहचान बनी।
✍️ सही उत्तर है – 36
रामस्नेही संप्रदाय की शाहपुरा शाखा के संस्थापक कौन थे ?
[Head Master 11.10.2021]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना संत रामचरण जी ने 18वीं शताब्दी में की थी।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
👉 संत रामचरण जी ने 1760 ई. में इस शाखा की नींव रखी।
👉 यहीं 1798 ई. में उनका निधन हुआ और समाधि बनाई गई।
✍️ सही उत्तर है – रामचरण जी
बीकानेर के निकट समराथल को किसने अपना कर्म-स्थल बनाया ?
👉 गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था।
👉 उन्होंने 1485 ई. में बीकानेर के निकट समराथल धोरा को अपनी कर्मस्थली बनाया।
👉 यहीं से उन्होंने समाज सुधार और विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस स्थान को धोक धोरा भी कहा जाता है और यह विश्नोई समाज का प्रमुख तीर्थ है।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
वैष्णवों की "सर्व प्रधान गद्दी" गलता (जयपुर) के संस्थापक कौन थे ?
[Research Scholar 04.08.2024]
👉 राजस्थान में वैष्णव सम्प्रदाय की सर्व प्रधान गद्दी जयपुर के गलता जी में स्थित है।
👉 इस गद्दी की स्थापना संत कृष्णदास पयहारी (पयहारी स्वामी) ने की थी।
👉 इन्होंने जयपुर क्षेत्र में नाथ सम्प्रदाय का प्रभाव समाप्त कर रामानंदी भक्ति परंपरा को स्थापित किया।
👉 गलता जी को उत्तरी तोताद्री और राजस्थान का बनारस भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – कृष्णादास पयहारी
राजस्थान के वे सन्त कौन हैं जो राजस्थान छोड़ कर बनारस गए और रामानन्द के शिष्य बन गए -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
👉 संत धन्ना जी का जन्म 1415 ई. में धुवन ग्राम (टोंक) में हुआ था।
👉 प्रारंभ में वे मूर्तिपूजक थे, बाद में भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर हुए।
👉 धन्ना जी राजस्थान छोड़कर बनारस चले गए।
👉 वहाँ उन्होंने संत रामानन्द से दीक्षा लेकर उनके शिष्यत्व को स्वीकार किया।
✍️ सही उत्तर है – धन्ना
राजस्थान में रामद्वारा की स्थापना किस धार्मिक सम्प्रदाय द्वारा की गई ?
[अनुसंधान अधिकारी पुरा. 04.08.2024]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना 18वीं शताब्दी में संत रामचरण जी ने की थी।
👉 इस सम्प्रदाय में भक्ति का मुख्य आधार रामधुन और गुरु भक्ति है।
👉 इनके उपासना स्थल को रामद्वारा कहा जाता है।
👉 रामद्वारे में मूर्ति नहीं होती, बल्कि गुरु का चित्र सामने रखकर भक्ति की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – रामस्नेही सम्प्रदाय
'फूलडोल-उत्सव' मनाया जाता है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (गणित)
👉 रामस्नेही पंथ की स्थापना संत रामचरण जी ने 18वीं शताब्दी में की थी।
👉 इस पंथ की प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
👉 यहाँ प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से पंचमी तक फूलडोल उत्सव मनाया जाता है।
👉 यह उत्सव रामस्नेही सम्प्रदाय का सबसे विशिष्ट पर्व माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – रामस्नेही पंथ
निम्नलिखित में से कौन सा वैष्णव संप्रदाय नहीं है ?
सहायक आचार्य [22.09.2021]
👉 राजस्थान में प्रमुख वैष्णव संप्रदाय हैं – रामानुजी (रामावत/रामानन्दी), वल्लभ सम्प्रदाय (पुष्टिमार्ग), निम्बार्क सम्प्रदाय, गौड़ीय सम्प्रदाय।
👉 इन संप्रदायों में भगवान विष्णु या कृष्ण की भक्ति की जाती है।
👉 लालदासी सम्प्रदाय संत लालदास जी द्वारा स्थापित था, जो निर्गुण भक्ति पर आधारित है।
👉 वैष्णव संप्रदाय उन मतों को कहा जाता है जो भगवान विष्णु या विभिन्न सगण अवतार जैसे राम,कृष्ण आदि को आराध्या मानकर उनकी उपासना करते हैं, जबकि लालदासी संप्रदाय के प्रवर्तक संत लाल दास जी महाराज थे यह निर्गुण भक्ति धारा का संप्रदाय है
✍️ सही उत्तर है – लालदासी
दादू के देहान्त के पश्चात नारायण दादू पंथ की किस उपशाखा का मुख्य स्थान रहा ?
[कृषि अधिकारी 2011]
👉 संत दादू दयाल जी ने 1603 ई. में नरैना (जयपुर) में देह त्याग किया।
👉 इनके बाद दादूपंथ की कई उपशाखाएँ बनीं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे और विरक्त।
👉 दादू के देहांत के पश्चात नरैना दादूपंथ की खालसा उपशाखा का मुख्य स्थान बना।
👉 यहाँ स्थित दादूद्वारा आज भी प्रमुख पीठ के रूप में प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – खालसा
दयाबाई और सहजोबाई राजस्थान के किस संत की शिष्याएं थीं ?
[सहायक सांख्यिकी अधि. 25.08.2024]
👉 दयाबाई और सहजोबाई 18वीं शताब्दी की प्रसिद्ध महिला संत कवयित्रियाँ थीं।
👉 दोनों संत चरणदास जी की प्रमुख शिष्याएँ थीं।
👉 दयाबाई की प्रमुख रचनाएँ दया बोध और विनय मालिका हैं।
👉 सहजोबाई की रचनाएँ सहजप्रकाश, सात वार निर्णय, 16 तिथि निर्णय प्रसिद्ध हैं।
✍️ सही उत्तर है – संत चरणदास
राजस्थान का वह कौनसा सन्त है जिसने फतेहपुर सीकरी में अकबर से भेंट की -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के महान संत थे।
👉 उन्होंने 1574 ई. में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 1585 ई. में मुगल सम्राट अकबर ने उन्हें फतेहपुर सीकरी बुलाकर धार्मिक चर्चा की।
👉 दादूजी ने लगभग 40 दिन वहाँ रहकर उपदेश दिए।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
मुकाम प्रसिद्ध है :
[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]
👉 मुकाम स्थल बीकानेर जिले में स्थित है।
👉 यह स्थान विश्नोई समाज का सबसे प्रमुख तीर्थ माना जाता है।
👉 यहाँ 1536 ई. में गुरु जाम्भोजी को समाधि दी गई थी।
👉 प्रतिवर्ष यहाँ फाल्गुन अमावस्या और आश्विन अमावस्या को विशाल मेला लगता है।
✍️ सही उत्तर है – विश्नोइयों के लिए
'निष्कलंक संप्रदाय' के संस्थापक थे
[सांख्यिकी अधिकारी 25.02.2024]
👉 संत मावजी का जन्म 1714 ई. में साबला (डूंगरपुर) में हुआ था।
👉 इन्हें उनके अनुयायी ‘वागड़ का धणी’ और ‘कल्कि अवतार’ मानते हैं।
👉 मावजी ने माही और सोम नदी के संगम पर बेणेश्वर धाम की स्थापना की।
👉 इन्होंने आगे चलकर ‘निष्कलंक सम्प्रदाय’ की स्थापना की, जिसे पाप रहित सम्प्रदाय भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – संत मावजी
निम्नलिखित में से कौन-से संत राजस्थान के नहीं है ?
[PTI Grade -III (RPSC) 2011]
👉 राजस्थान के प्रमुख संतों में जाम्भोजी, जसनाथ जी, दादूदयाल, रज्जब जी, सुन्दरदास, लालदास, रामचरण जी, चरणदास जी, पीपा, धन्ना, मीराबाई आदि सम्मिलित हैं।
👉 संत रामानन्द जी का जन्म प्रयाग (इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश) में हुआ था।
👉 इसलिए इन्हें राजस्थान का संत नहीं माना जाता।
✍️ सही उत्तर है – संत रामानन्द
निम्न में से कौन सी दादूपंथ की शाखा नहीं है ?
सहायक आचार्य [ 07.01.2024]
👉 दादूपंथ की स्थापना संत दादू दयाल जी ने की थी।
👉 इस पंथ की पाँच प्रमुख शाखाएँ हैं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे (स्थानधारी) और विरक्त। दादू जी के 52 मुख्य शिष्य थे जिन्हें दादू पंथ में 52 थांभा /स्तंभ कहा जाता है
✍️ सही उत्तर है – थाम्भा
नाथ सम्प्रदाय के केन्द्रीय मठ की स्थापना किस स्थान पर हुई थी ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
👉 नाथ सम्प्रदाय शैव मत की एक प्रमुख शाखा है, जिसके प्रवर्तक मत्स्येन्द्रनाथ माने जाते हैं।
👉 राजस्थान में इसका प्रमुख केन्द्र महामंदिर, जोधपुर है।
👉 इस केन्द्रीय मठ का निर्माण महाराजा मानसिंह ने 1805 ई. में कराया था।
👉 यहाँ से नाथ सम्प्रदाय की शिक्षाओं और साधना पद्धति का प्रचार-प्रसार हुआ।
✍️ सही उत्तर है – जोधपुर
दादूपंथ की मुख्य गद्दी (गादी)………………….. में स्थित है।
[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 उनका अधिकांश समय नरैना (जयपुर) में बीता।
👉 यहीं पर उनका दादूद्वारा स्थित है, जिसे दादूपंथ की मुख्य गद्दी माना जाता है।
👉 नरैना दादूपंथ का प्रमुख सत्संग और साधना स्थल है।
✍️ सही उत्तर है – नरैना
दादूजी के गुरु____ थे।
[हॉस्पिटल केयर टेकर 10.02.2023]
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के प्रवर्तक थे।
👉 उन्होंने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 दादूजी के गुरु बुड़धन जी (वृद्धानन्द जी) माने जाते हैं, जो स्वयं संत कबीर के शिष्य थे।
👉 अतः दादूजी के गुरु ब्रह्मानन्द नहीं, बल्कि बुड़धन जी थे।
✍️ सही उत्तर है – बुड़धन जी
रामस्नेही सम्प्रदाय अपना फूलडोल महोत्सव किस स्थान पर मनाते है ?
[कृषि अधिकारी 2011]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत रामचरण जी थे।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
👉 यहीं प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण 1 से चैत्र कृष्ण 5 तक फूलडोल महोत्सव मनाया जाता है।
👉 यह इस सम्प्रदाय का सबसे प्रमुख और विशिष्ट धार्मिक उत्सव है।
✍️ सही उत्तर है – शाहपुरा
किस लोक - संत की स्मृति में प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या को जोधपुर के कोलू अथवा कोलूमंड ग्राम में विशाल मेला लगता है ?
[स्कूल व्याख्याता 21.10.2022]
👉 पाबूजी को" लक्ष्मण का अवतार , ऊँट के देवता ,प्लेग रक्षक , हाड़ फाड़ के देवता के रूप में जाना जाता है राजस्थान में ऊंट लाने का श्री पाबूजी को जाता है, केसर पाल भी पाबूजी की प्रसिद्ध घोड़ी थी, पाबूजी की फड़ राजस्थान में सबसे लोकप्रिय फड़ है जो भील जाति के भोपो द्वारा रावणहत्था के साथ वाचन किया जाता है, पीपा जी का मेला चैत्र पूर्णिमा समदड़ी बालोतरा में लगता है यह दर्जी समुदाय के आराध्य देव है
✍️ सही उत्तर है – पाबूजी
निम्नलिखित में से किस संप्रदाय के अनुयायी मेव भी हैं ?
[पशु चिकित्सा अधिकारी 02.08.2020]
लालदासी
👉 संत लालदास जी ने 16वीं शताब्दी में लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इनका जन्म धोलीदूब (अलवर) में हुआ था और ये जाति से मेव मुसलमान लकड़हारे थे।
👉 इस सम्प्रदाय में विशेषकर मेव मुसलमानों की संख्या अधिक रही।
👉 लालदास जी ने हिन्दू-मुस्लिम एकता और साम्प्रदायिक सद्भाव का संदेश दिया।
✍️ सही उत्तर है – लालदासी
संत दरियावजी का संबंध है :
[सहायक कृषि अधिकारी 2011]
👉 संत दरियाव जी का जन्म जैतारण (ब्यावर) में हुआ था।
👉 उन्होंने संत प्रेमनाथ जी से दीक्षा ली और आगे चलकर रामस्नेही सम्प्रदाय में सक्रिय हुए।
👉 दरियाव जी ने रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण शाखा की स्थापना की।
👉 इन्होंने राम नाम को राम और मुहम्मद दोनों का प्रतीक बताकर हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
✍️ सही उत्तर है – रामस्नेही मत
विश्नोई सम्प्रदाय के प्रवर्तक जम्भोजी का निधन, कहाँ हुआ था ?
[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]
👉 जांभोजी का जन्म 1451 ईस्वी में नागौर जिले के पीपासर गांव में हुआ था यह पवार वंश के राजपूत थे उनके पिता लोहाट जी पवार माता का नाम हँसा देवी था 1485 में बीकानेर जिले की समराथल धोरा नामक स्थान पर कार्तिक कृष्ण अष्टमी को विश्नोई संप्रदाय की स्थापना की, जंभ सहिंता, जम्भ सागर उनके शिष्य द्वारा संकलित किए गए उनके उपदेश है
👉 1536 ई. में उन्होंने शरीर त्याग किया।
👉 उनका निधन तालवा गाँव के निकट (बीकानेर) हुआ था।
👉 बाद में उनकी समाधि मुकाम (बीकानेर) में बनाई गई, जो विश्नोई समाज का प्रमुख तीर्थ है।
✍️ सही उत्तर है – तालवा
निम्नलिखित में से कौन-सा जसनाथी सम्प्रदाय का मुख्य केंद्र है ?
[वरिष्ठ अध्यापक (Spl Edu) 07.02.2018]
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान गद्दी कतरियासर (बीकानेर) में स्थित है।
👉 कतरियासर ही संत जसनाथ जी की कर्मस्थली रही।
👉 यहाँ प्रतिवर्ष तीन बार (आश्विन शुक्ल सप्तमी, माघ शुक्ल सप्तमी, चैत्र शुक्ल सप्तमी) विशाल मेले आयोजित होते हैं।
✍️ सही उत्तर है – कतरियासर
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए -
रामस्नेही सम्प्रदाय की शाखा प्रवर्तक
A सिंहथल I सन्त रामचरण
B रेण II सन्त हरिराम दास
C खेड़ापा III सन्त रामदास
D शाहपुरा IV सन्त दरियाव
[वरिष्ठ अध्यापक 28.10.2018]
A B C D
👉 सिंहथल शाखा के प्रवर्तक संत हरिरामदास जी थे।
👉 रेण शाखा की स्थापना संत दरियाव जी ने की थी।
👉 खेड़ापा शाखा के प्रवर्तक संत रामदास जी थे।
👉 शाहपुरा शाखा की स्थापना संत रामचरण जी ने की थी।
✍️ सही उत्तर है – A-II, B-IV, C-III, D-I
मेवाड़ में स्थित एकलिंग मंदिर किस सम्प्रदाय से संबंधित है ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (विज्ञान)
👉 राजस्थान में लकुलीश सम्प्रदाय शैव मत की एक प्रमुख शाखा थी।
👉 लकुलीश को भगवान शिव का 24वां अवतार माना गया है।
👉 मेवाड़ क्षेत्र का प्रसिद्ध एकलिंगजी मंदिर (उदयपुर) भी लकुलीश सम्प्रदाय से सम्बद्ध है।
👉 यहाँ भगवान शिव की पूजा लिंग रूप में की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – लकुलीश
समराथल धोरा स्थित है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (ENG)
👉 समराथल धोरा को विश्नोई सम्प्रदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।
👉 यही वह स्थान है जहाँ गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की थी।
👉 इसे धोक धोरा भी कहा जाता है।
👉 यह स्थल राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर जिले में
'धर्म जहाज', 'भक्ति पदारथ' एवं 'नासकेत' लीला' रचनाएं निम्न में से किस संत की हैं ?
[स्कूल व्याख्याता 15.11.2022]
👉 संत चरणदास जी ने सगुण और निर्गुण भक्ति का मिश्रित रूप प्रस्तुत किया।
👉 इन्होंने अपने जीवन में अनेक ग्रंथों की रचना की।
👉 इनमें प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘धर्म जहाज’, ‘भक्ति पदारथ’, ‘नासकेत लीला’, ब्रज चरित्र, ज्ञान स्वरोजदय आदि।
👉 चरणदास जी की प्रमुख पीठ दिल्ली में स्थित है।
✍️ सही उत्तर है – चरणदास
निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ स्थित है ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (ENG)
👉 निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रवर्तक निम्बार्काचार्य जी माने जाते हैं।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ राजस्थान के सलेमाबाद (अजमेर) में स्थित है।
👉 इस पीठ की स्थापना आचार्य परशुराम देव ने की थी।
👉 यहाँ राधा-कृष्ण की युगल उपासना की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – सलेमाबाद
निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ कहाँ स्थित है ?
[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]
👉 निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रवर्तक निम्बार्काचार्य जी थे।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ सलेमाबाद (अजमेर, राजस्थान) में स्थित है।
👉 इसकी स्थापना आचार्य परशुराम देव ने की थी।
👉 यहाँ पर राधा-कृष्ण की युगल उपासना की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – सलेमाबाद
ख्याल, जो संत पीर शाहवली और तुकनगीर ने मेवाड़ क्षेत्र में रचा -
[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]
👉 मेवाड़ क्षेत्र में संत पीर शाहवली और तुकनगीर द्वारा एक विशेष ख्याल की रचना की गई।
👉 इस ख्याल को “तुर्रा-कलंगी” कहा जाता है।
👉 इसमें दो पक्षों द्वारा प्रश्नोत्तर और तर्क-वितर्क के माध्यम से वाद-विवाद शैली में प्रस्तुति दी जाती है।
👉 यह लोकनाट्य रूप राजस्थान की ख्याल परंपरा का महत्वपूर्ण अंग है।
✍️ सही उत्तर है – तुर्रा कलंगी
रामस्नेही सम्प्रदाय की शाहपुरा शाखा के संस्थापक थे -
[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना 18वीं शताब्दी में संत रामचरण जी ने की थी।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थापित की गई।
👉 शाहपुरा में ही संत रामचरण जी ने 1798 ई. में समाधि ली थी।
👉 इसलिए शाहपुरा शाखा के संस्थापक संत रामचरण जी ही माने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – रामचरण जी
सन्त मीराबाई का जन्म स्थान “कुडकी” वर्तमान में राजस्थान के किस जिले में स्थित है ?
[उपनिरीक्षक (SI) 15.09.2021]
👉 संत मीराबाई का जन्म 1498 ई. में कुड़की गाँव में हुआ था।
👉 यह स्थान वर्तमान राजस्थान के पाली जिले में स्थित है।
👉 मीरा बचपन से ही भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त रहीं।
👉 विवाह के बाद वे मेवाड़ के राजपरिवार में आईं और बाद में अपनी भक्ति के लिए विख्यात हुईं।
✍️ सही उत्तर है – पाली
निम्नलिखित संतों में से किसने अपने लेखन में मेवाती बोली का प्रयोग नहीं किया ?
[AEN 16 दिसम्बर 2018]
👉 दयाबाई और सहजोबाई ने अपने लेखन कार्य में मेवाती बोली का प्रयोग किया।
👉 दोनों संत चरणदास जी की प्रमुख शिष्याएँ थीं।
👉 जबकि संत सुन्दरदास जी दादूदयाल के शिष्य थे और उन्होंने अपनी रचनाएँ मुख्यतः पिंगल व सधुक्कड़ी मिश्रित भाषा में कीं।
👉 इसलिए उन्होंने अपने लेखन में मेवाती बोली का प्रयोग नहीं किया।
✍️ सही उत्तर है – सुन्दरदास
दादूपंथ में नागा उप संप्रदाय के प्रवर्तक थे
सहायक आचार्य [22.09.2021]
👉 दादूपंथ की स्थापना संत दादू दयाल जी ने की थी।
👉 इस पंथ की पाँच प्रमुख शाखाएँ हैं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे (स्थानधारी) और विरक्त।
👉 इनमें से नागा उपसंप्रदाय के प्रवर्तक दादू जी के शिष्य सुन्दरदास जी थे।
👉 नागा दादूपंथी साधु अपने पास हथियार भी रखते थे और राजाओं की सहायता भी करते थे।
👉 रज्जब जी -दादू के उपदेशों से प्रेरित होकर विवाह के मंडप से ही वैराग्य ले लिया और आजीवन दूल्हे के वेश में रहकर दादू पंथ का प्रचार किया, गरीब दास जी यह संत दादू दयाल के ज्येष्ठ पुत्र थे दादू पंथ की खालसा शाखा को आगे बढ़ने का श्रेय इन्हीं को जाता है, मलूक दास जी निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत थे जिनका संबंध उत्तर प्रदेश से रहा है
✍️ सही उत्तर है – सुन्दरदास
'जाति न पूछो साधु की, किस संत की पंक्ति है ?
[पुरालेखपाल परीक्षा 03.08.2024]
👉 भक्ति आंदोलन में संत कबीर दास निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत थे।
👉 उन्होंने समाज में व्याप्त जाति-पाति और भेदभाव का कड़ा विरोध किया।
👉 उनकी वाणी में प्रसिद्ध पंक्ति है – “जाति न पूछो साधु की”।
👉 इसका अर्थ है कि ईश्वर के मार्ग में जाति का कोई महत्व नहीं, केवल सद्गुण और भक्ति ही प्रमुख है।
✍️ सही उत्तर है – कबीर
निम्न में से कौन 'दादू' के शिष्य नहीं हैं ?
[मूल्यांकन अधिकारी 23.08.2020]
👉 संत दादू दयाल जी के प्रमुख शिष्यों में सुन्दरदास, रज्जब जी, संतदास, गरीबदास, माधोदास, बखनाजी, जगन्नाथदास आदि शामिल हैं।
👉 महिला संतों में दयाबाई और सहजोबाई वास्तव में संत चरणदास जी की शिष्याएँ थीं।
✍️ सही उत्तर है – दयाबाई
संत पीपा के गुरु थे
[वरिष्ठ अध्यापक 17.02.2019]
👉 संत पीपा जी गागरोन (झालावाड़) के खींची राजपरिवार से सम्बन्धित थे।
👉 इन्होंने अपना राज्य त्यागकर भक्ति मार्ग अपनाया।
👉 संत पीपा जी ने संत रामानन्द से दीक्षा ली और उनके शिष्य बने।
👉 गुरु की प्रेरणा से इन्होंने निर्गुण भक्ति का प्रचार किया।
✍️ सही उत्तर है – रामानंद
राजस्थान के प्रमुख संत तथा उनके द्वारा स्थापित सम्प्रदायों के सम्बन्ध में कौन से युग्म सही हैं ?
A. रामचरणजी- राम स्नेही सम्प्रदाय(शाहपुरा)
B. लालगिरिजी — अलखिया सम्प्रदाय
C. हरिदासजी ― निरंजनी सम्प्रदाय
D. संतदासजी ― गूदड़ सम्प्रदाय
अपने उत्तर निम्न कूटों की सहायता से दीजिए :
[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]
👉 रामचरण जी ने 18वीं शताब्दी में रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की, जिसकी प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में है।
👉 लालगिरी जी ने अलखिया सम्प्रदाय की स्थापना की, जिसकी प्रमुख पीठ बीकानेर में है।
👉 संत हरिदास जी ने निरंजनी सम्प्रदाय की स्थापना की, जहाँ परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहा गया।
👉 संतदास जी ने गूदड़ सम्प्रदाय की स्थापना की, जिसकी पीठ दांतड़ा (भीलवाड़ा) में है।
✍️ सही उत्तर है – A, B, C और D सभी युग्म सही हैं।
वैष्णव सम्प्रदाय के पुष्ठिमार्ग से सम्बंधित केन्द्रों को चिन्हित कीजिये -
(i) नाथद्वारा (ii) कांकरौली
(iii) सलेमाबाद (iv) गलता
सही कूट को चुनिए :
[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]
👉 पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय की स्थापना वल्लभाचार्य जी ने की थी।
👉 इस सम्प्रदाय के प्रमुख केन्द्र हैं – नाथद्वारा (राजसमंद) जहाँ श्रीनाथजी का मंदिर है, और कांकरौली (राजसमंद) जहाँ द्वारकाधीश मंदिर स्थित है।
👉 जबकि सलेमाबाद निम्बार्क सम्प्रदाय का केन्द्र है और गलता जी रामानुजी/रामानंदी सम्प्रदाय का।
👉 अतः पुष्टिमार्ग से केवल नाथद्वारा और कांकरौली सम्बंधित हैं।
✍️ सही उत्तर है – (i) और (ii)
निम्नलिखित में से किस संत को 'राजस्थान का कबीर' कहा जाता है ?
[EO RO (Shift I) 14.05.2023]
👉 संत दादूदयाल जी 16वीं शताब्दी के महान निर्गुण भक्ति संत थे।
👉 इन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध कर निर्गुण निराकार ईश्वर की उपासना पर बल दिया।
👉 1574 ई. में इन्होंने दादूपंथ की स्थापना की।
👉 समानता, सामाजिक सुधार और निर्गुण भक्ति के कारण इन्हें ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दादूदयाल
दादू पंथ के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है ?
[ACF परीक्षा 2011]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 दादूपंथी संत विवाह नहीं करते और साधारण जीवन जीते हैं।
👉 मृतकों के संदर्भ में दादूपंथी न तो शव जलाते हैं और न ही दफनाते, बल्कि शव को जंगल में छोड़ देते हैं ताकि पशु-पक्षी उसका उपयोग कर सकें।
✍️ सही उत्तर है – “दादूपंथी मृतकों के शव को जलाने में विश्वास करते हैं”
दादू पंथ की प्रमुख पीठ स्थित है
[उपनिरीक्षक (SI) 13.09.2021]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 दादू जी का अधिकांश जीवन नरैना (जयपुर) में व्यतीत हुआ।
👉 यहाँ पर उनका विशाल दादूद्वारा बना हुआ है।
👉 इसलिए नरैना को दादूपंथ की प्रमुख पीठ माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – नरैना
निम्नलिखित में से कौनसा सम्प्रदाय निर्गुणोपासक नहीं है ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (विज्ञान)
👉 राजस्थान में अनेक संत सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति पर आधारित रहे हैं, जैसे – दादूपंथ, जसनाथी, विश्नोई, निरंजनी, लालदासी आदि।
👉 इन सम्प्रदायों में ईश्वर की निर्गुण निराकार उपासना की जाती है।
👉 जबकि नाथ सम्प्रदाय शैव मत का रूप है, जिसमें भगवान शिव के सगुण स्वरूप की उपासना होती है।
✍️ सही उत्तर है – नाथ
निम्नलिखित में से दादूपंथी संत कौन है ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (ENG)
👉 दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इनके प्रमुख शिष्यों में रज्जब जी, सुन्दरदास जी, संतदास जी, गरीबदास जी आदि शामिल हैं।
👉 संत रज्जब जी दादू जी के परम शिष्य थे, जिन्होंने आजीवन दूल्हे के वेश में रहकर भक्ति की।
👉 इनकी रचनाएँ ‘रज्जब वाणी’ नाम से प्रसिद्ध हैं।
✍️ सही उत्तर है – रज्जब जी
निम्न में से कौन सा सम्प्रदाय संत मावजी के द्वारा स्थापित किया गया ?
[कृषि अधिकारी 30.08.2022]
👉 संत मावजी का जन्म 1714 ई. में साबला (डूंगरपुर) में हुआ था।
👉 इन्हें अनुयायी ‘वागड़ का धणी’ और ‘कल्कि अवतार’ मानते हैं।
👉 मावजी ने माही और सोम नदी के संगम पर बेणेश्वर धाम की स्थापना की।
👉 उन्होंने आगे चलकर निष्कलंकी सम्प्रदाय की स्थापना की।
✍️ सही उत्तर है – निष्कलंकी सम्प्रदाय
निम्नलिखित में से कौन सा सुमेलित नहीं है ?
[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]
(संप्रदाय) (संत)
👉 गूदड़ सम्प्रदाय के प्रवर्तक संतदास जी थे और इसकी प्रमुख पीठ दांतड़ा (भीलवाड़ा) में है।
👉 नवल सम्प्रदाय के प्रवर्तक नवलदास जी थे और इसकी पीठ जोधपुर में है।
✍️ सही उत्तर है – गूदड़ – नवलदास जी
सन्त मावजी की पीठ कहाँ पर स्थित है ?
[ACF परीक्षा 2011]
👉 संत मावजी का जन्म 1714 ई. में साबला (डूंगरपुर) में हुआ था।
👉 इन्हें अनुयायी ‘वागड़ का धणी’ और ‘कल्कि अवतार’ मानते हैं।
👉 संत मावजी की प्रधान पीठ साबला ग्राम (डूंगरपुर) में स्थित है।
👉 यहाँ स्थित मंदिर में संत मावजी की चतुर्भुज मूर्ति स्थापित है।
✍️ सही उत्तर है – साबला ग्राम (डूंगरपुर)
दादूपंथ का अधिकांश साहित्य किस बोली में लिपिबद्ध है ?
सहायक आचार्य [ 07.01.2024]
👉 दादूपंथ की स्थापना संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में की।
👉 इनके उपदेशों और वाणियों को शिष्यों ने संकलित किया।
👉 दादूपंथ का अधिकांश साहित्य ढूंढाड़ी बोली में मिलता है।
👉 इसमें सधुक्कड़ी और हिन्दी मिश्रण का भी प्रभाव देखा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़ी
जसनाथी सम्प्रदाय की उत्पत्ति राजस्थान के किस रियासती राज्य में हुई ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (विज्ञान)
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय की उत्पत्ति राजस्थान के बीकानेर रियासत में हुई।
👉 इसकी प्रधान गद्दी कतरियासर (बीकानेर) में स्थित है।
👉 यहाँ के अनुयायी विशेष रूप से अग्नि नृत्य करते हैं, जो इस सम्प्रदाय की पहचान है।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर
दादू पंथ की नागा शाखा किसके द्वारा स्थापित की गई थी ?
[सहायक कृषि अधिकारी 28.05.2022]
👉 दादूपंथ की स्थापना संत दादू दयाल जी ने की थी।
👉 इस पंथ की पाँच प्रमुख शाखाएँ हैं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे और विरक्त।
👉 इनमें से नागा शाखा की स्थापना संत सुन्दरदास जी ने की थी।
👉 नागा दादूपंथी साधु अपने पास हथियार रखते थे और राजाओं की सैन्य सहायता भी करते थे।
👉 गरीबदास, दादू दयाल के पुत्र इन्होंने खालसा उप संप्रदाय की नींव रखी, मिस्किनदास दादू दयाल जी के पुत्र व प्रमुख शिष्य । बनवारी दास दादू पंत की उत्तरादे शाखा की स्थापना की
✍️ सही उत्तर है – सुन्दरदास
निम्न को सुमेलित कीजिये और नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही उत्तर चुनिये :
संत जन्म स्थान
a. रामदास i. डेहरा
b. जसनाथ ii. जैतारण
c. दरियाव iii. कतरियासर
d. चरणदास iv. बीकमकोर
सहायक आचार्य [30.05.2019]
कूट :
a b c d
👉 रामदास जी का जन्म भीकमकोर (जोधपुर) में हुआ था।
👉 संत जसनाथ जी की जन्मस्थली कतरियासर (बीकानेर) मानी जाती है।
👉 संत दरियाव जी का जन्म जैतारण (ब्यावर) में हुआ था।
👉 संत चरणदास जी का जन्म डेहरा (अलवर) में हुआ था।
✍️ सही उत्तर है – a-(iv), b-(iii), c-(ii), d-(i)
दादू पंथी कितने उपसम्प्रदाय में विभाजित थे ?
[SI (मोटर वाहन) 2013]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 समय के साथ यह पंथ कई शाखाओं में विभाजित हुआ।
👉 दादूपंथ की कुल 5 उपशाखाएँ मानी जाती हैं।
👉 ये हैं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे (स्थानधारी) और विरक्त।
✍️ सही उत्तर है – 5
रामस्नेही सम्प्रदाय की “सिंहथल शाखा” के संस्थापक कौन थे ?
[AEN परीक्षा 30.06.2024]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना संत रामचरण जी ने की थी।
👉 इस सम्प्रदाय की चार प्रमुख शाखाएँ हैं – शाहपुरा, रैण, सिंथल और खेड़ापा।
👉 इनमें से सिंहथल शाखा के प्रवर्तक संत हरिरामदास जी थे।
👉 इन्होंने सिंथल क्षेत्र में रहकर रामस्नेही भक्ति परंपरा का प्रचार-प्रसार किया।
✍️ सही उत्तर है – हरिरामदास जी
निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ राजस्थान में स्थित है -
[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]
👉 निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रवर्तक निम्बार्काचार्य जी थे।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ राजस्थान के सलेमाबाद (अजमेर) में स्थित है।
👉 इस पीठ की स्थापना आचार्य परशुराम देव ने की थी।
👉 यहाँ राधा-कृष्ण की युगल उपासना की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – सलेमाबाद
निम्नलिखित में से कौन भक्ति मार्ग के निर्गुण पथ के अनुयायी थे ?
(अ) कबीर
(स) रैदास
(ब) नानक
(द) मीरा
नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर का चयन करें -
[संग्रहाध्यक्ष पुरातत्व विभाग 19.06.2024]
👉 कबीर दास ने मूर्ति पूजा का विरोध कर निर्गुण निराकार भक्ति पर बल दिया।
👉 संत रैदास भी संत रामानन्द के शिष्य थे और उन्होंने निर्गुण उपासना को अपनाया।
👉 गुरु नानक देव ने जाति-पाँति का विरोध कर ईश्वर के निर्गुण स्वरूप की भक्ति पर जोर दिया।
👉 जबकि मीरा बाई सगुण भक्ति धारा की अनुयायी थीं और कृष्ण को पति रूप में पूजती थीं।
✍️ सही उत्तर है – अ, ब और स (कबीर, नानक और रैदास)