संत दादूदयाल के वे शिष्य कौन थे जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने 'अंगवधू' नाम से अपने गुरु की बानियों को संकलित किया था ?
[Asst. Prof. (Hindi-II) 08.12.2025]
Explanation: रज्जब ने दादू की बानियों का संग्रह अंगवधू नाम से किया ।
वैष्णव संप्रदाय की कौन सी पीठ राजस्थान में सलेमाबाद में स्थित है ?
[Development Officer 29.07.2025]
👉 राजस्थान के सलेमाबाद में वैष्णव संप्रदाय की प्रमुख पीठ निंबार्क पीठ स्थित है।
👉 यह पीठ निंबार्क सम्प्रदाय का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है।
👉 यहाँ श्रीनिंबार्काचार्य परंपरा की पूजा–पद्धति और वैष्णव दर्शन का पालन किया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – निंबार्क
निम्नलिखित में से कौन रामस्नेही संप्रदाय के संस्थापक थे ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]
👉 रामस्नेही संप्रदाय की स्थापना संत रामचरण द्वारा की गई थी।
👉 यह संप्रदाय निर्गुण भक्ति, अहिंसा और सरल जीवन के सिद्धांतों पर आधारित है।
👉 संत रामचरण ने लोकभाषा में भक्ति संदेश देकर इस संप्रदाय को व्यापक रूप से प्रसारित किया।
✍️ सही उत्तर है – संत रामचरण
राजस्थान में किस निर्गुणी सम्प्रदाय के प्रमुख "सिद्ध" कहलाते हैं ?
[Technical Assistant 07.07.2025]
👉 राजस्थान में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में की।
👉 यह सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति धारा से सम्बद्ध है।
👉 इस सम्प्रदाय के प्रमुखों को विशेष रूप से “सिद्ध” कहा जाता है।
👉 अनुयायी इन्हें मार्गदर्शक और गुरु स्वरूप मानते हैं।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी सम्प्रदाय
राजस्थान में भक्ति आंदोलन में योगदान देने वाले निर्गुणपंथियों में किस कवि को समुचित शिक्षा मिली थी और वे काव्यकला की रीति आदि से अच्छी तरह परिचित थे ?
[Asst. Prof. (Hindi-II) 08.12.2025]
Explanation: आचार्य शुक्ल-" निर्गुण पन्थियों में यही (सुंदर दास) एक ऐसे व्यक्ति हुए थे जिन्हें समुचित शिक्षा मिली थी और जो काव्य कला की रीति आदि से अच्छी तरह परिचित थे अतः इनकी रचना साहित्यिक और सरस है भाषा भी काव्य की मंझी हुई ब्रजभाषा है ।"
सीकर के पास रेवासा में अग्रदास जी ने निम्न में से किस सम्प्रदाय की ‘गद्दी' स्थापित की थी?
[Junior Chemist PHED 01.02.2026]
🔹 व्याख्या
👉
रेवासा
(सीकर)
में
अग्रदास
जी ने
गद्दी स्थापित
की।
👉
यह
रामानंदी
संप्रदाय
की रसिक शाखा
है।
👉
यहाँ
राम-सीता
की माधुर्य
भाव से पूजा
होती है।
👉
वे
कृष्णदास
पयहारी
के शिष्य थे।
✍️ सही उत्तर है – रामानंदी संप्रदाय
निम्न में से किस ग्रन्थ में सन्त चरणदास के सगुण भक्ति सम्बन्धी विवरण प्राप्त होते हैं ?
[A.En (Pre) EXAM 28.09.2025]
👉 संत चरणदास के सगुण भक्ति सम्बन्धी विवरण जिस ग्रन्थ में मिलते हैं, वह ‘सबद’ है।
👉 इस ग्रन्थ में चरणदास की भक्ति–भावना, उपदेश तथा सगुण ईश्वर के प्रति उनकी आस्था का वर्णन मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – सबद
आचार्य मिस्कीनदास दादू पंथ की निम्न में से किस शाखा के संत थे ?
[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]
🔹 व्याख्या
👉 दादू पंथ की स्थापना मध्यकालीन संत दादू दयाल ने राजस्थान में की थी।
👉 आचार्य मिस्कीनदास दादू दयाल जी के पुत्र और खालसा शाखा के संत थे।
👉 उन्होंने दादू जी के बाद नारायणा (जयपुर) मुख्य पीठ का कार्यभार संभाला था।
👉 दादू पंथ की अन्य शाखाओं में विरक्त, उत्तरादे, खाकी और नागा शामिल हैं।
✍️ सही उत्तर है – खालसा
राजस्थान में रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रमुख केन्द्रों को उनके संस्थापकों के साथ सुमेलित कीजिए एवं सही कूट का चयन कीजिए -
|
केन्द्र |
संस्थापक |
|
(I) रेण |
(A) रामचरण |
|
(II) शाहपुरा |
(B) रामदास |
|
(III) सिंहथल |
(C) दरियाव जी |
|
(IV) खेड़ापा |
(D) हरिराम दास |
कूट -
[Research Assistant 10.07.2025]
👉 रेण शाखा की स्थापना संत दरियाव जी ने की थी।
👉 शाहपुरा शाखा के संस्थापक संत रामचरण जी थे।
👉 सिंहथल शाखा की स्थापना संत हरिरामदास जी ने की।
👉 खेड़ापा शाखा के प्रवर्तक संत रामदास जी थे।
✍️ सही उत्तर है – (I)-(C), (II)-(A), (III)-(D), (IV)-(B)
कथन (अ) - लालदासी संतों के लिए भिक्षावृत्ति हेय समझी जाती हैं।
कारण (र) - वे अपनी आजीविका परिश्रम से कमाते हैं ।
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]
👉 कथन (अ) – लालदासी सम्प्रदाय में संतों के लिए भिक्षावृत्ति हेय समझी जाती है। यह कथन सही है।
👉 कारण (र) – इस सम्प्रदाय के संत अपनी आजीविका स्वयं परिश्रम से कमाकर चलाते हैं। यह भी सही है।
👉 वास्तव में परिश्रम से आजीविका कमाना ही इस बात का स्पष्टीकरण है कि वे भिक्षावृत्ति को हेय मानते हैं।
✍️ सही उत्तर है – (अ) और (र) दोनों पृथकतः सही हैं और (र), (अ) का सही स्पष्टीकरण है
निम्न में से कौन सी 'जसनाथी उप- पीठ' नहीं है ?
[कृषि अधिकारी 20.04.2025]
👉 लालासर विश्नोई संप्रदाय से संबंधित है जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना संत जसनाथ जी ने कतरियासर (बीकानेर) में की थी।
👉 इसकी पाँच प्रमुख उप-पीठें हैं – मालासर, लिखमादेसर, पुनरासर, बम्बलू और पांचला (नागौर)।
✍️ सही उत्तर है – लालासर
निम्नलिखित में से कौन सा स्थल संत जसनाथजी से संबंधित नहीं है ?
S.I. Telecom (Paper-II) 09.11.2025
👉 संत जसनाथजी से संबंधित प्रमुख स्थल कतरियासर और भागथली माने जाते हैं, जहाँ इनके उपदेश और परम्पराएँ विकसित हुईं।
👉 गोरखमालिया भी जसनाथी सम्प्रदाय से जुड़े स्थलों की सूची में आता है।
👉 पोलावास संत जसनाथजी से संबंधित स्थलों में सम्मिलित नहीं है। पोलावास का संबंध रामस्नेही संप्रदाय से है विशेष रूप से रेण शाखा के प्रवर्तक संत दरियाव जी
✍️ सही उत्तर है – पोलावास
रामस्नेही सम्प्रदाय के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य नहीं है ?
[A.En (Pre) EXAM 28.09.2025]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय के बारे में यह कथन कि इनके अनुयायी मूर्ति पूजा में विश्वास करते हैं, सत्य नहीं है।
👉 यह सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति पर आधारित है, जिसमें ईश्वर को निराकार रूप में माना जाता है।
👉 रामस्नेही साधु मूर्ति पूजा का खंडन करते हैं और केवल निराकार ईश्वर की आंतरिक उपासना को मान्यता देते हैं।
✍️ सही उत्तर है – इस मत को मानने वाले मूर्ति पूजा में विश्वास करते हैं।
गूदड़ सम्प्रदाय का प्रमुख पूजा स्थल (धाम) कहाँ स्थित है ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- C) 09.09.2025]
👉 गूदड़ सम्प्रदाय का प्रमुख पूजा स्थल या प्रधान पीठ राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के दांतड़ा गाँव में स्थित है।
👉 दांतड़ा का यह धाम गूदड़ सम्प्रदाय के अनुयायियों का मुख्य धार्मिक केंद्र माना जाता है।
👉 इस सम्प्रदाय की स्थापना संत दासजी द्वारा की गई थी, जिनकी परंपरा आगे चलकर दांतड़ा धाम में विकसित हुई। निर्गुण भक्ति परंपरा से जुड़े गुदड़ संप्रदाय के संस्थापक के प्रवर्तक संत दास जी को माना जाता है
✍️ सही उत्तर है – दांतड़ा
कथन (A) :भक्ति संतों ने आम जनता में अपनी शिक्षाओं के प्रसार के लिये क्षेत्रीय भाषाओं को माध्यम बनाया ।
कारण (R) : उनके समय में फारसी राजकीय भाषा थी ।
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 09.01.2020]
👉 कथन (A) – भक्ति संतों ने आम जनता तक अपनी शिक्षाएँ पहुँचाने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं (राजस्थानी, ब्रज, अवधी, पंजाबी, गुजराती आदि) को माध्यम बनाया। यह कथन सत्य है।
👉 कारण (R) – उस समय राजकीय कार्यों में फारसी भाषा का प्रयोग होता था। यह भी सत्य है।
👉 लेकिन क्षेत्रीय भाषाओं को अपनाने का कारण यह था कि जनसाधारण इन्हें आसानी से समझ सके, न कि केवल इसलिए कि राजकीय भाषा फारसी थी।
👉 अतः (A) और (R) दोनों सत्य हैं, किन्तु (R), (A) की उचित व्याख्या नहीं करता।
✍️ सही उत्तर है – (A) व (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की उचित व्याख्या नहीं करता है
रामानंदी गलता गद्दीं के संस्थापक माने जाते हैं
[Asst. Prof. (Hindi-II) 08.12.2025]
Explanation: रामानंदी गलता गद्दी के संस्थापक कृष्ण दास पयहारी माने जाते हैं । अग्रदासजी के शिष्य नाभादास जी थे, जिन्होंने 'भक्तमाल' ग्रन्थ की रचना की थी। अग्रदास "रसिक संप्रदाय" के संस्थापक आचार्य थे। रामायण महानाटक के रचयिता प्राणचन्द चौहान ।
संत मावजी के चौपड़ों की भाषा है
[वरिष्ठ अध्यापक (पेपर -I) 29.12.2024]
👉 संत मावजी ने पाँच बड़े ग्रंथों की रचना की – मेघसागर, प्रेमसागर, सामसागर, रतनसागर और अनन्तसागर।
👉 इन ग्रंथों को सामूहिक रूप से चौपड़ा कहा जाता है।
👉 मावजी के चौपड़ों की भाषा हिन्दी मिश्रित बागड़ी बताई जाती है।
👉 ये ग्रंथ केवल विशेष अवसरों पर बाहर निकाले जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – बागड़ी
सलेमाबाद में निम्बार्क पीठ के संस्थापक निम्न में से कौन थे ?
[PTI & Librarian 03.05.2025]
👉 निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रवर्तक निम्बार्काचार्य जी थे।
👉 राजस्थान में इसकी प्रमुख गद्दी सलेमाबाद (अजमेर) में स्थापित है।
👉 इस पीठ की स्थापना आचार्य परशुराम देव ने की थी।
👉 यहाँ पर राधा-कृष्ण की युगल उपासना की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – परशुराम देव
जसनाथी सिद्धों को 'निशान-नक्करा सहित पूरे भारत में घूमने का ताम्रपत्र किस बादशाह ने प्रदान किया?
[Deputy Commandant 11.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉 मुगल बादशाह औरंगजेब ने जसनाथी सिद्धों की आध्यात्मिक शक्ति से प्रभावित होकर उन्हें सम्मानित किया। सिकंदर लोदी ने जसनाथी संप्रदाय से प्रभावित होकर बीकानेर कतरियासर में भूमि दान दी।
👉 उन्होंने सिद्धों को निशान-नक्करा के साथ पूरे भारत में भ्रमण करने हेतु एक ताम्रपत्र प्रदान किया था।
👉 यह सम्मान जसनाथी संप्रदाय की धार्मिक स्वतंत्रता और उनके प्रभाव को प्रदर्शित करता था।
✍️ सही उत्तर है – औरंगज़ेब
पश्चिमी राजस्थान में कबीर से पूर्व निर्गुण भक्ति द्वारा दलित वर्ग को किस महिला संत ने भक्ति का मार्ग दिखाया था?
[Deputy Commandant 11.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉 रूपादे मारवाड़ के शासक राव मल्लीनाथ की रानी थीं।
👉 उन्होंने कबीर से पूर्व निर्गुण भक्ति के माध्यम से दलित वर्ग को भक्ति का मार्ग दिखाया।
👉 रूपादे ने निर्गुण मत और सामाजिक समानता का संदेश जन-जन तक पहुँचाया।
✍️ सही उत्तर है – रूपादे
राजस्थान के किस सन्त के प्रमुख शिष्य बावन स्तम्भ के नाम से जाने जाते हैं ?
[Research Assistant 24.08.2017]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इनके कुल 152 शिष्य थे।
👉 इनमें से 52 प्रमुख शिष्यों को विशेष रूप से “बावन स्तम्भ” कहा जाता है।
👉 इन शिष्यों ने विभिन्न क्षेत्रों में दादूजी की निर्गुण भक्ति धारा का प्रचार-प्रसार किया।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
निम्न में से किस संत को रामस्नेही की रैण शाखा का प्रवर्तक माना जाता है ?
[भूवैज्ञानिक परीक्षा 07.05.2025]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना संत रामचरण जी ने की थी।
👉 इस सम्प्रदाय की चार प्रमुख शाखाएँ बनीं – शाहपुरा, रैण, सिंथल और खेड़ापा।
👉 इनमें से रैण शाखा के प्रवर्तक संत दरियाव जी थे।
👉 संत दरियाव जी ने राम में ‘रा’ को राम और ‘म’ को मुहम्मद का प्रतीक मानकर हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
✍️ सही उत्तर है – संत दरियाव जी
संत लालदास के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं निम्नांकित में से सही विकल्प चुनिए :
A. संत लालदास आजीवन अविवाहित रहे।
B. संत लालदास की मृत्यु के पश्चात् उनके समाधि स्थान पर मन्दिर का निर्माण करवाया गया।
[RAS Pre परीक्षा 02.02.2025]
👉 संत लालदास जी का जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर) में हुआ था।
👉 इनकी मृत्यु 1648 ई. में नगला जहाज (भरतपुर) में हुई, जहाँ उनकी समाधि बनी और बाद में वहाँ मंदिर का निर्माण किया गया।
👉 लेकिन यह तथ्य सही नहीं है कि संत लालदास जी आजीवन अविवाहित रहे।
✍️ सही उत्तर है – केवल B सत्य है
रामानन्द के संदर्भ में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए एवं सही विकल्प चुनिए :
A. संत पीपा के निवेदन पर रामानन्द राजस्थान आए थे ।
B. रामानन्द का प्रभाव राजस्थान में व्यापक रूप से दिखाई नहीं देता है ।
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- B) 08.09.2025]
👉 संत पीपा के निमंत्रण पर रामानन्द राजस्थान आए थे; इसलिए कथन A सत्य है।
👉 रामानन्द का प्रभाव राजस्थान में विस्तृत रूप में नहीं दिखता, यह कथन यहाँ दी गई जानकारी के अनुसार सत्य के रूप में नहीं लिया गया है।
👉 अतः विकल्पों में केवल कथन A को ही सही माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – केवल A सत्य है
निम्नलिखित में से कौन सा भक्ति सन्त कृष्ण का उपासक नहीं था ?
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 09.01.2020]
👉 राजस्थान और उत्तर भारत के अनेक भक्ति संत कृष्ण भक्ति से जुड़े रहे जैसे – मीराबाई, निंबार्काचार्य, वल्लभाचार्य आदि।
👉 संत रामानंद जी ने अपने शिष्यों को मुख्यतः राम भक्ति का उपदेश दिया।
👉 इनके शिष्य धन्ना, कबीर, पीपा, रैदास आदि संत बने, पर इनकी धारा रामोपासना से जुड़ी रही।
👉 इसलिए रामानंद जी को कृष्ण का उपासक नहीं माना जाता।
✍️ सही उत्तर है – रामानंद
सन्त रामचरण से संबंधित निम्न कथनों के आधार पर नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
I. सन्त रामचरण का जन्म जयपुर के निकट सोडा (सूरसेन) नामक गाँव में हुआ था।
II. सन्त रामचरण का निधन राम नाम जपते हुए भीलवाड़ा के शाहपुरा में वर्ष 1798 में हुआ।
[Sub Inspector Exam 06.04.2026]
🔹 व्याख्या
👉 सन्त रामचरण का जन्म जयपुर रियासत के सोडा गाँव में माघ शुक्ल चतुर्दशी को हुआ था।
👉 इन्होंने रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की और शाहपुरा (भीलवाड़ा) को अपना प्रमुख केंद्र बनाया।
👉 इनका निधन वर्ष 1798 में शाहपुरा में हुआ, जहाँ आज भी 'फूलडोल महोत्सव' मनाया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – I और II दोनों सही हैं।
राजस्थान में निम्नलिखित सन्तों में से रामानन्दी सम्प्रदाय की 'रेवासा पीठ' के संस्थापक कौन थे ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]
👉 रेवासा पीठ के संस्थापक अग्रदास थे, जो कृष्णदास पयहारी के शिष्य थे।
👉 कृष्णदास पयहारी स्वयं रामानंद → अनंतानंद की गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़े थे।
👉 कृष्णदास पयहारी ने 1503 ई. में गलताजी (जयपुर) में रामानंदी संप्रदाय की मुख्य पीठ स्थापित की थी।
👉 बाद में उनके शिष्य अग्रदास ने सीकर के रेवासा में रामानंदी संप्रदाय की दूसरी प्रमुख पीठ की स्थापना की।
✍️ सही उत्तर है – अग्रदास
राजस्थान के भक्ति आंदोलन के अन्तर्गत संत पीपा का संबंध किस स्थान से है ?
[Asst. Prof. (Hindi-II) 08.12.2025]
🔹 व्याख्या
👉 संत पीपा राजस्थान के प्रमुख भक्त संत थे जो रामानंद के शिष्य थे।
👉 इनका संबंध गागरौन गढ़ (झालावाड़) से है जहाँ वे राजा थे।
👉 राजपाट छोड़कर संत पीपा ने भक्ति मार्ग अपनाया और जनसेवा में जीवन समर्पित किया।
✍️ सही उत्तर है – गागरौन गढ़