रसिया, फाग, बीजण, सियालो और पपैयो राजस्थान की किस लोक कला के प्रकार हैं ?
[A.En (Pre) EXAM 28.09.2025]
👉 रसिया, फाग, बीजण, सियालो और पपैयो — ये सभी राजस्थान की लोक कला के लोक संगीत प्रकार हैं।
👉 इनमें प्रेम, उत्सव, ऋतु-परिवर्तन, देवी-देवताओं और सामाजिक जीवन से जुड़े लोकगीतों की अभिव्यक्ति होती है।
👉 राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में ये गीत परंपरागत वाद्ययंत्रों के साथ गाए जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – लोक संगीत
निम्न में से कौनसा संगीतकार शास्त्रीय संगीत के अतरौली घराने से संबन्धित था ?
[Research Assistant 10.07.2025]
👉 खैराती खां का संबंध अतरौली घराने से था।
👉 इस घराने के वास्तविक संस्थापक उस्ताद अल्लादिया खां थे।
👉 उन्होंने 19वीं सदी के अंत में अतरौली-जयपुर घराने की स्थापना की।
👉 यह घराना ख्याल गायन शैली के लिए प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – खैराती खां
बिंदोली, सामेला और पड़ला किस समारोह से संबंधित हैं ?
[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]
👉 बिंदोली, सामेला और पड़ला सभी राजस्थान की विवाह परंपराओं से जुड़े हैं।
👉 बिंदोली दूल्हा-दुल्हन की निकासी की रस्म है।
👉 सामेला में दूल्हे का स्वागत किया जाता है।
👉 पड़ला दुल्हन पक्ष द्वारा दूल्हे पक्ष को उपहार स्वरूप भेंट होता है।
✍️ सही उत्तर है – विवाह
निम्न में से कौन सा एक लोकगीत राजस्थान के पर्वतीय क्षेत्र का नहीं है ?
सहायक आचार्य [30.05.2019]
👉 कुरजां गीत राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकगीत है।
👉 यह पर्वतीय क्षेत्र का गीत नहीं है।
👉 पर्वतीय क्षेत्र के गीत हैं – पटेल्या, मच्छर, नोखिला, थारी ऊँता री असवारी।
👉 मरुस्थलीय क्षेत्र के गीत हैं – कुरजां, पीपली, मूमल, रतन राणो।
✍️ सही उत्तर है – कुरजां
राजस्थान में मचर, बिछियों और लालार से क्या तात्पर्य है ?
[EO RO (Shift I) 14.05.2023]
👉 मचर, बिछियों और लालार मेवाड़ क्षेत्र के पारंपरिक लोकगीत हैं।
👉 ये गीत पहाड़ी इलाकों में गाए जाते हैं।
👉 इनमें स्थानीय जीवन, रीति-रिवाज और परंपराएँ झलकती हैं।
👉 बिछियों (बिछिया) विवाहित स्त्रियों की उंगलियों में पहना जाने वाला आभूषण है।
✍️ सही उत्तर है – लोक गीत
माण्ड गायिकी के लिए 1982 में पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध महिला थी-
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (विज्ञान)
👉 अल्ला जिलाई बाई राजस्थान की प्रसिद्ध माँड गायिका थीं।
👉 वे मूलतः बीकानेर की निवासी थीं।
👉 उन्होंने ‘केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश’ गीत को अमर बनाया।
👉 उन्हें 1982 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
✍️ सही उत्तर है – अल्ला जिलाई बाई
'ख्याल के जयपुर घराने' के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं ?
[कृषि अधिकारी 30.08.2022]
👉 ख्याल गायकी के जयपुर घराने के प्रवर्तक मनरंग (भूपत खां) माने जाते हैं।
👉 वे दिल्ली घराने के प्रवर्तक सदरंग खां के पुत्र थे।
👉 जयपुर घराना ख्याल गायन की एक प्रसिद्ध शैली है।
👉 इसमें ताल, लय और स्वर की जटिलता प्रमुख विशेषताएँ हैं।
✍️ सही उत्तर है – मनरंग
'बढ़ार' क्या है ?
[ACF परीक्षा 2011]
👉 ‘बढ़ार’ विवाह के दूसरे दिन का सामूहिक प्रीतिभोज होता है। मृत्यु भोज मौसर कहलाता है
👉 इसे “बढ़ार की दावत” भी कहा जाता है।
👉 यह भोज वर पक्ष द्वारा दुल्हन और उसके परिवार के लिए आयोजित किया जाता है।
👉 इसका उद्देश्य नवविवाहित जोड़े के सम्मान में उत्सव मनाना है।
✍️ सही उत्तर है – विवाह के अवसर पर प्रीतिभोज
राजस्थान के किस लोक कलाकार को 26 जनवरी 2012 को 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया ?
[ACF परीक्षा 2011]
👉 साकर खान (साकार खान मंगनियार) प्रसिद्ध राजस्थानी संगीतकार थे।
👉 वे कामयचा (कमाइचा) वाद्य के श्रेष्ठ वादक और प्रतिपादक माने जाते थे।
👉 यह वाद्य राजस्थान के मंगनियार समुदाय में लोकप्रिय है।
👉 उन्होंने इस वाद्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
✍️ सही उत्तर है – साकर खान
"केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देश' को अल्लाह जिल्लाह बाई ने किस राग में गाया?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (SST)
👉 मांड ,राजस्थान की एक प्रसिद्ध लोक गायन शैली है जिसका विकास मुख्य रूप से जैसलमेर और बीकानेर क्षेत्र में हुआ था अल्लाह जिलाई बाई जिनका जन्म बीकानेर में हुआ था जो मरू कोकिला के नाम से जानी जाती है 1982 में इन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था उनके 👉 द्वारा मांड गायन शैली में "केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश" गया था
अल्लाह जिलाई बाई राजस्थान की पहली अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त माँड गायिका थीं।
👉 उन्होंने प्रसिद्ध गीत “केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश” को माँड राग में गाया।
👉 यह गीत राजस्थानी लोकसंगीत की पहचान बन गया।
👉 उन्होंने इसे बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह के दरबार में प्रस्तुत किया था।
✍️ सही उत्तर है – मांड
'लांगुरिया' लोकगीत है-
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (गणित)
👉 लांगुरिया लोकगीत और नृत्य राजस्थान के पूर्वी भाग की सांस्कृतिक पहचान हैं।
👉 ये गीत देवी कैला माता की भक्ति में गाए जाते हैं।
👉 इनके साथ किया गया नृत्य लांगुरिया लोकनृत्य कहलाता है।
👉 यह परंपरा विशेष रूप से ब्रज व कैला देवी क्षेत्र में प्रचलित है।
✍️ सही उत्तर है – भक्ति गीत
चारबैंत, जो राजस्थान की प्रचलित लोक गायन शैली है, कहाँ की प्रसिद्ध है-
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
👉 चारबैंत राजस्थान की प्रसिद्ध लोक गायन शैली है।
👉 यह विशेष रूप से टोंक जिले में प्रचलित है।
👉 इसमें संगीत, नृत्य और नाट्य प्रदर्शन का सुंदर समन्वय होता है।
👉 इसे अब्दुल करीम खां निहंग ने नवाब फैजुल्ला खां के काल में आरंभ किया था।
✍️ सही उत्तर है – टोंक
निम्नांकित में से कौन सा विकल्प विवाह की रस्मों से संबंधित नहीं है ?
[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 21.12.2022]
👉 कर्णवेध विवाह की रस्म नहीं, बल्कि हिंदू धर्म का संस्कार है।
👉 यह बच्चों के कान छेदने की प्राचीन परंपरा है।
👉 इसका उद्देश्य श्रवण शक्ति बढ़ाना और स्वास्थ्य की रक्षा करना है।
👉 विवाह की रस्मों में इसके अतिरिक्त आठ प्रकार के विवाह माने गए हैं।
✍️ सही उत्तर है – कर्णवेध
गवरी देवी जिस गायन शैली से संबद्ध थी -
[RAS Pre. 05.08.2018]
👉 गवरी देवी को मरू कोकिला न कह कर "मरुभूमि की कोकिला "नाम से संबोधित किया जाता है "मरू कोकिला" अल्लाह जिलाई बाई को माना जाता है
✍️ सही उत्तर है – मांड
' पीड़ितों का पंछीड़ा' नामक गीत किसकी रचना है ? [*]
[कृषि अधिकारी 19.01.2021]
📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है।
निम्नलिखित लोकगीतों में से कौन से विवाह के अवसर पर गाए जाते हैं ?
(i) जला
(ii) परणेत
(iii) गोरबन्द
(iv) सीठणे
नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए :
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]
कूट :
👉 जला विवाह के अवसर पर गाया जाने वाला पारंपरिक लोकगीत है।
👉 परणेत भी विवाह से संबंधित विशिष्ट लोकगीत माना जाता है।
👉 सीठणे महिलाओं द्वारा विवाह रस्मों के दौरान गाया जाने वाला नृत्य-गीत है।
👉 गोरबन्द ऊँट के आभूषणों से जुड़ा लोकगीत है, जिसका विवाह से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – (i), (ii) और (iv)
गवरी देवी राजस्थान की किस गायन शैली से जुड़ी हुई है ?
[PTI Grade -III (RPSC) 2011]
👉 राजस्थान में गवरी देवी नाम से प्रसिद्ध दो मांड गायिका हुई
1. गवरी देवी जोधपुर-उन्होंने मांड गायकी के अलावा ठुमरी ,भजन और गजल में भी महारत हासिल की थी
2. गवरी बाई (पाली) इन्हें विशेष रूप से मांड गायकी के लिए जाना जाता है इन्हें भी मरुभूमि कोकिला या मरू कोकिला के नाम से संबोधित किया जाता है
👉 वे मुख्य रूप से माँड गायन शैली के लिए जानी जाती थीं।
👉 उन्होंने ठुमरी, भजन और ग़ज़ल भी गाईं।
👉 उन्हें राजस्थान की “मरू कोकिला” की उपाधि प्राप्त थी।
✍️ सही उत्तर है – माँड
मेवाड़ में दीपावली के 15 दिन पहले अकसर लड़के-लड़कियाँ घर-घर जाकर गीत गाते हैं । लड़कियों द्वारा गाए जाने वाले गीतों को _____ कहा जाता है ।
[Asst. Town Planner 16.06.2023]
👉 घड़ाल्यो गीत मेवाड़ क्षेत्र की एक सुंदर लोक परंपरा है।
👉 ये गीत दीपावली से 15 दिन पहले लड़कियों द्वारा गाए जाते हैं।
👉 लड़कियों की टोलियाँ घर-घर जाकर गीत गाती हैं।
👉 वहीं लड़कों द्वारा गाए जाने वाले गीत लोवड़ी या हरणी कहलाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – घड़ाल्यो
गवरी देवी राजस्थान की किस लोक संगीत गायन शैली से जुड़ी हुई ?
[AEN Pre. 2013]
👉 गवरी देवी (गवरी बाई) राजस्थान की प्रसिद्ध लोक गायिका थीं।
👉 वे विशेष रूप से माँड गायन शैली के लिए जानी जाती थीं।
👉 उन्होंने ठुमरी, भजन और ग़ज़ल भी गाईं।
👉 उन्हें राजस्थान की “मरू कोकिला” की उपाधि प्राप्त थी।
✍️ सही उत्तर है – मांड
अल्लाह जिलाई बाई की लोकप्रियता का कारण क्या है ?
[EO RO (Shift I) 14.05.2023]
👉 अल्लाह जिलाई बाई राजस्थान की प्रसिद्ध माँड गायिका थीं।
👉 उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण “केसरिया बालम” गीत था।
👉 उन्होंने राजस्थानी लोकसंगीत को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
👉 उन्हें 1982 में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
✍️ सही उत्तर है – मांड गायन
लोक गीत ओल्यूं गाया जाता है -
[पशु चिकित्सा अधिकारी 02.08.2020]
👉 ‘ओल्यूं’ राजस्थान का एक वियोग भाव वाला लोकगीत है।
👉 यह गीत प्रिय व्यक्ति के दूर जाने पर गाया जाता है।
👉 विशेष रूप से बेटी की विदाई के समय इसे गाया जाता है।
👉 इसे परिवार की महिलाएँ माहौल को हल्का करने हेतु गाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – प्रिय की याद में
घूघरी, केवड़ा आदि लोकगीत किस क्षेत्र से सम्बन्धित हैं ?
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II [02.08.2020]
👉 घूघरी और केवड़ा राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों के प्रसिद्ध लोकगीत हैं।
👉घूघरी गीत -बच्चे के जन्म के अवसर पर गाया जाता है । जबकि केवड़ा एक विरह गीत जो दूर अपने प्रेमी या प्रेमिका के लिए गाया जाता है
👉 ये मुख्यतः जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर और जोधपुर जिलों से संबंधित हैं।
👉 इन गीतों की विशेषता इनकी मधुरता और ऊँची स्वर लहरियाँ हैं।
👉 ये गीत मरुस्थल की लोकसंवेदना को प्रकट करते हैं।
✍️ सही उत्तर है – मरूस्थलीय क्षेत्र
राजस्थान में विवाह से पहले दूल्हे को रिश्तेदारों द्वारा आमंत्रित किया जाता है और लौटते समय _______________से संबंधित गीत गाया जाता है।
[EO RO (Shift I) 14.05.2023]
👉 बिंदोली राजस्थान की विवाह पूर्व रस्म है।
👉 इसमें दूल्हे को रिश्तेदारों द्वारा आमंत्रित किया जाता है।
👉 वापसी के समय बिंदोली गीत गाए जाते हैं।
👉 दूल्हे को घोड़े पर बैठाकर घुमाया जाता है और मंगल गीत गाए जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – बिंदोली
'जला' गीत स्त्रियों द्वारा कब गाया जाता है ?
[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]
👉 ‘जला’ गीत राजस्थान की विवाह परंपरा से जुड़ा लोकगीत है।
👉 इसे दुल्हन पक्ष की महिलाएँ गाती हैं।
👉 यह गीत तब गाया जाता है जब वर की बारात का डेरा देखने जाया जाता है।
👉 इसे ‘जालो’ या ‘जलाल’ के नाम से भी जाना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – वर की बारात का डेरा देखने जाने पर
निम्न में से "तोरण" का सम्बन्ध किससे है ?
[व्याख्याता (आयुर्वेद) 12.11.2021]
👉 ‘तोरण’ का संबंध मुख्य रूप से प्रवेश द्वार से है।
👉 यह हिंदू और बौद्ध वास्तुकला का एक सजावटी प्रतीकात्मक द्वार होता है।
👉 इसे धार्मिक और शुभ अवसरों पर सजावट के लिए लगाया जाता है।
👉 विवाह में दूल्हा तोरण मारने की रस्म भी निभाता है।
✍️ सही उत्तर है – विवाह
लंगा गायक निम्न में से किन रागों में राजस्थानी गीत गाते हैं?
(A) मांड, सूब, आसा
(B) सामेरी, सोरठ, तोड़ी
(C) काफी, सिंधी, भैरवी
(D) खमायची, गूंड, मल्हार
सही कूट का चयन करें
[Deputy Commandant 11.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉 लंगा गायक मुख्य रूप से जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र की एक पेशेवर लोक गायक जाति है।
👉 ये गायक सारंगी और कामायचा वाद्ययंत्रों के साथ शास्त्रीय पुट वाली लोक रागों का गायन करते हैं।
👉 इनके द्वारा मांड, सूब, आसा, सोरठ, काफी और सिंधी जैसी विभिन्न रागों का प्रयोग किया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – उपरोक्त (A), (B), (C), (D)
पहरावना तथा तन्ना विवाह प्रचलित हैं :
[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]
👉 गरासिया जनजाति में विवाह की अनेक प्रथाएँ प्रचलित हैं।
👉 इनमें प्रमुख हैं – पहरावना विवाह (नाममात्र के फेरे)।
👉 दूसरा है – तन्ना विवाह, जिसमें वर पक्ष कन्या मूल्य देता है और इसमें सगाई या फेरे नहीं होते।
✍️ सही उत्तर है – गरासिया जनजाति
कौनसा सही सुमेलित नहीं है ?
[सहायक कृषि अधिकारी 28.08.2022]
👉 जला गीत का संबंध विवाह संस्कार से होता है।
👉 कुआँ पूजन में सामान्यतः जच्चा गीत गाए जाते हैं।
👉 घोड़ी गीत, जच्चा गीत, रसिया गीत अपने-अपने अवसरों से सही जुड़े हैं।
'सारंग' संगीत किस समय गाया जाता है?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (SST)
👉 सारंग संगीत हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक प्रमुख राग समूह है।
👉 इसे सामान्यतः ग्रीष्म ऋतु की दोपहर में गाया जाता है।
👉 इसकी तासीर ठंडी मानी जाती है, जो मन को शांति प्रदान करती है।
👉 यह राग गर्मी की तीव्रता को कम करने का प्रतीक है।
✍️ सही उत्तर है – दोपहर काल
प्रसिद्ध राजस्थानी गीत 'धरती धोरां री' किसके द्वारा लिखा गया ?
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II [02.08.2020]
👉 ‘धरती धोरां री’ राजस्थान का प्रसिद्ध गीत और गौरवगान है।
👉 इसके रचयिता कन्हैयालाल सेठिया थे।
👉 वे एक प्रसिद्ध कवि और स्वतंत्रता सेनानी थे।
👉 यह गीत विश्वभर में राजस्थान के राष्ट्रगान के रूप में प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – कन्हैयालाल सेठिया
“म्हे तो थारा डेरा निरखण आई ओ, म्हारी जोड़ी रा जला।" नामक लोकगीत निम्न में से किस अवसर पर गाया जाता है ?
[भूवैज्ञानिक परीक्षा 07.05.2025]
👉 यह पंक्ति “म्हे तो थारा डेरा निरखण आई ओ, म्हारी जोड़ी रा जला” विवाह से संबंधित है।
👉 जन्म के अवसर पर जच्चा गीत या होलर गीत गाए जाते हैं यह गीत दुल्हन पक्ष की महिलाएँ गाती हैं।
👉 इसे तब गाया जाता है जब वर पक्ष का डेरा देखने जाया जाता है।
👉 यह गीत विवाह की रस्मों का हिस्सा है।
✍️ सही उत्तर है – विवाह
बारात के स्वागत की रस्म को कहा जाता है :
[सहायक कृषि अधिकारी 2011]
👉 सामेला राजस्थान की विवाह परंपरा की एक महत्वपूर्ण रस्म है।
👉 इसमें दुल्हन का परिवार बारात का स्वागत करता है।
👉 स्वागत के दौरान तिलक, माला पहनाना और आतिथ्य किया जाता है।
👉 यह रस्म दोनों परिवारों के मिलन का प्रतीक है।
✍️ सही उत्तर है – सामेला