हस्तशिल्प - RPSC राजस्थान कला एवं संस्कृति (Topic-Wise Official PYQs) — Agri Master Mind
निम्नांकित में से कौन-सा स्थान 'थेवा कला' के लिए प्रसिद्ध है ?
[SI (मोटर वाहन) 2013]
बाँसवाड़ा
जोधपुर
प्रतापगढ़
डूंगरपुर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की अनोखी मीनाकारी शैली थेवा कला कहलाती है।
👉 इसमें रंगीन काँच पर सोने की बारीक नक्काशी की जाती है।
👉 यह कला लगभग 500 वर्ष पुरानी परंपरा है।
👉 इसका प्रमुख और प्रसिद्ध केंद्र केवल प्रतापगढ़ है।
✍️ सही उत्तर है – प्रतापगढ़
'ब्लू पॉटरी' की प्रसिद्ध कला इससे पूर्व किस नाम से जानी जाती थी ?
[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]
जामदानी
नीलगिरि
कामचीनी
मृण्मय
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की प्रसिद्ध कला ब्लू पॉटरी का उद्भव 19वीं सदी में हुआ।
👉 ब्लू पॉटरी या कामचीनी कल मूल रूप से फारस( ईरान) और मध्य एशिया की देन है! भारत में इस कला को लाने का श्रेय मुगल सम्राट अकबर को जाता है, राजस्थान में इस कला को लाने का श्रेय राजा मानसिंह प्रथम को जाता है लेकिन राजस्थान में कि कला का स्वर्ण काल महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय के काल को माना जाता है, पद्मश्री कृपाल सिंह शेखावत को ब्लू पॉटरी का जादूगर माना जाता है वर्तमान में जयपुर की इस ब्लू पॉटरी को भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त है यह कला विदेशों से आकर जयपुर में विकसित हुई।
👉 प्रारंभ में इसे कामचीनी के नाम से जाना जाता था।
👉 बाद में यह कला ब्लू पॉटरी नाम से प्रसिद्ध हुई।
✍️ सही उत्तर है – कामचीनी
कठपुतलियों का निर्माण मुख्य रूप से होता है :
[सहायक कृषि अधिकारी 2011]
फलोदी
दौसा
जोधपुर
उदयपुर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में कठपुतली कला उदयपुर ,जयपुर और चित्तौड़गढ़ जिलों की प्रसिद्ध है उदयपुर में स्थित "भारतीय लोक कला मंडल "कठपुतली कला के संरक्षण, प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत है कठपुतली कला के माध्यम से राजस्थान की प्राचीन लोक गाथाएं और वर्तमान में सामाजिक जागरूकता ( जैसे बाल विवाह कन्या भ्रूण हत्या और साक्षरता अभियान) जैसे विषयों पर मनोरंजन के माध्यम से सीख देने का प्रयास करते हैं
👉 कठपुतलियों को नचाने वाले लोग सामान्यतः भाट या नट जाति से होते हैं।
👉 कठपुतलियों का निर्माण मुख्य रूप से उदयपुर में किया जाता है।
👉 यहाँ बनी कठपुतलियाँ अपनी विशेष शैली और लोकप्रियता के लिए जानी जाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – उदयपुर
राजस्थान की कौन सी पारम्परिक कपड़ा रंगाई तकनीक से लम्बे समय तक सुगंधित रहने वाले कपड़े/वस्त्र का उत्पादन किया जाता था ?
[सांख्यिकी अधिकारी 18.12.2021]
मलागिरि (मलयगिरि)
अमोवा
सांगानेरी
पोमचा
🔹 व्याख्या
👉 मलयगिरि तकनीक जयपुर की प्रसिद्ध है जो राजस्थान की पारंपरिक कपड़ा रंगाई तकनीक के माध्यम से लंबे समय तक सुगंधित रखती है, अमोवा राजपूताना संस्कृत में शिकार के समय पहनी जाने वाली खाकी रंग की विशेष पोशाक है,
👉 राजस्थान में कपड़ा रंगाई की कई पारंपरिक तकनीकें प्रचलित रही हैं।
✍️ सही उत्तर है – मलागिरि (मलयगिरि)
'मसूरिया' प्रसिद्ध हस्तकला है -
[हॉस्पिटल केयर टेकर 10.02.2023]
जोधपुर की
सीकर की
कोटा की
बीकानेर की
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की प्रसिद्ध हस्तकला में मसूरिया मलमल / कोटा डोरिया साड़ी प्रमुख है।
👉 इसे सूती व रेशमी धागों के साथ जरी कार्य से बनाया जाता है।
👉 इस साड़ी का प्रमुख निर्माण केंद्र कोटा (कैथून) और बारां (मांगरोल) है।
👉 इसी कारण इसे राजस्थान की कोटा की बनारसी साड़ी भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – कोटा
राजस्थान में 'मलयागिरि' (मलागिरी) का सम्बन्ध निम्न में से किस हस्तकला से था ?
[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]
धातु कला
मीनाकारी
रंगाई
ब्लू पॉटरी
🔹 व्याख्या
👉 मलयागिरि (मलागिरी) राजस्थान की एक विशिष्ट एवं प्राचीन रंगाई की शैली है।
👉 इसमें वस्त्रों को भूरे (चंदन के समान) रंग में रंगा जाता है, जो स्थायी रहता है।
👉 इस रंगाई की मुख्य विशेषता इसकी सुगंध है, जो लंबे समय तक वस्त्र में बनी रहती है।
👉 इसका केंद्र मुख्य रूप से चित्तौड़गढ़ और जयपुर के कुछ राजसी क्षेत्रों में रहा है।
✍️ सही उत्तर है – रंगाई
शिल्पग्राम कहाँ स्थित है ?
[कृषि अधिकारी 24.11.2020]
सीकर
सिरोही
उदयपुर
जयपुर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में लोककला और शिल्पकला को प्रोत्साहन देने हेतु शिल्पग्राम की स्थापना की गई।
👉 यह केंद्र उदयपुर शहर से लगभग 13 किमी दूर स्थित है।
👉 यहाँ पर विभिन्न हस्तशिल्प और लोककलाओं का प्रदर्शन किया जाता है।
👉 शिल्पग्राम में प्रतिवर्ष शिल्पग्राम महोत्सव भी आयोजित होता है।
✍️ सही उत्तर है – उदयपुर
निम्न में से असत्य कथन है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)
डूंगरपुर जिले में देवल की खान से परेवा पत्थर निकलता है ।
राजस्थान को हस्तकलाओं के आगार के रूप में जाना जाता है ।
बाँसवाड़ा के चन्दूजी का गढ़ा तथा डूंगरपुर के बोड़ीगामा गाँव में बनने वाले तीर-कमान प्रसिद्ध है ।
काष्ठ पर कलात्मक मूर्तियाँ बनाने के लिए बाँसवाड़ा का तलवाड़ा गाँव प्रसिद्ध है।
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की काष्ठ कला में कई स्थान प्रसिद्ध हैं।
👉 तलवाड़ा (बाँसवाड़ा) वास्तव में काले संगमरमर की मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है।
👉 काष्ठ कला का प्रमुख केंद्र बस्सी (चित्तौड़गढ़) माना जाता है।
👉 अतः कथन कि “काष्ठ पर कलात्मक मूर्तियाँ बनाने के लिए बाँसवाड़ा का तलवाड़ा गाँव प्रसिद्ध है” असत्य है।
✍️ सही उत्तर है – काष्ठ पर कलात्मक मूर्तियाँ बनाने के लिए बाँसवाड़ा का तलवाड़ा गाँव प्रसिद्ध है।
दाबू प्रिंट के लिये प्रसिद्ध है :
[Asst. Jailor 15.03.2016]
हरजी गाँव
गाँव मोलेला
गाँव अकोला
प्रतापगढ़
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की पारंपरिक छपाई विधा दाबू प्रिंट विशेष पहचान रखती है।
👉 इसमें कपड़े पर लुगदी या मिट्टी लगाकर रंगाई की जाती है।
👉 यह कला मुख्यतः चित्तौड़गढ़ जिले के आकोला गाँव में प्रसिद्ध है।
👉 आकोला का दाबू प्रिंट देश-विदेश में बेहद लोकप्रिय है।
✍️ सही उत्तर है – गाँव अकोला
अजरका प्रिन्ट के लिये राजस्थान में कौन सा स्थान प्रसिद्ध है ?
[LDC (RPSC) 23.10.2016]
बाड़मेर
जैसलमेर
पाली
सांगानेर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की परंपरागत छपाई कलाओं में अजरक प्रिंट प्रमुख है।
👉 इसमें विशेष रूप से नीले और लाल रंगों का प्रयोग किया जाता है।
👉 इस प्रिंट में ज्यामितिक आकृतियों को अधिक महत्व दिया जाता है।
👉 इसका प्रमुख केंद्र बाड़मेर (बालोतरा क्षेत्र) है।
✍️ सही उत्तर है – बाड़मेर
रूमा देवी के बारे में निम्न में से कौनसा कथन सही नहीं है ?
[RAS Pre. 27.10.2021]
उन्होंने हजारों महिलाओं को रोजगार बढ़ावा देने में अहम भागीदारी निभाई।
उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा 2018 में 'नारी शक्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
वे जसरापुर (खेतड़ी) गाँव में पली बढ़ी।
उन्हें हस्तशिल्प के क्षेत्र में जाना जाता है ।
🔹 व्याख्या
👉 रुमा देवी की प्रारंभिक शिक्षा बाड़मेर के ग्रामीण क्षेत्र में आठवीं तक की है। 2008 में बाड़मेर के" ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान" से जुड़ी और 2010 में इसी एनजीओ के अध्यक्ष बनी। इन्हें हार्वर्ड यूनिवर्सिटी बोस्टन यूएसए द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में पेनलिस्ट के रूप में भी आमंत्रित किया गया था
'कावड़' कला किस वस्तु से सम्बन्धित है ?
[PTI Grade -III (RPSC) 2011]
पत्थर
कागज़
लकड़ी
कपड़ा
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की प्रमुख लोककला कावड़ कला है। कावड़ कला का प्रमुख केंद्र राजस्थान में बस्सी चित्तौड़गढ़ है यहां के खरादी समुदाय के लोग इस कला को जीवित रखे हुए हैं, कावड़ का उपयोग पौराणिक कथाएं व लोक गाथाएं व वंशावली सुनाने के लिए किया जाता है, कथा सुनने वाले कलाकार को कावड़िया भाट कहा जाता है
👉 कावड़ एक मंदिरनुमा आकृति होती है जिसमें देवी-देवताओं के चित्र बने होते हैं।
👉 इसका निर्माण मुख्यतः लकड़ी से किया जाता है।
👉 कावड़ को चलता-फिरता देवघर/देवालय भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – लकड़ी
नमदे निर्माण का प्रमुख केन्द्र है !
[कृषि अधिकारी 2011]
अजमेर
भीलवाड़ा
सिरोही
टोक
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में ऊन को कूट-कूटकर बनाए गए वस्त्र को नमदा कहा जाता है।
👉 नमदे विशेष रूप से टोंक जिले में बनाए जाते हैं।
👉 यहाँ के ऊनी नमदे अपनी गुणवत्ता और आकर्षक डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध हैं।
👉 इनका उपयोग घरेलू व धार्मिक अवसरों पर अधिक होता है।
✍️ सही उत्तर है – टोंक
माटी शिल्प के लिए प्रसिद्ध मोलेला अवस्थित है :
[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]
राजसमंद जिले में
बाड़मेर जिले में
जोधपुर जिले में
उदयपुर जिले में
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में माटी शिल्प (टेराकोटा कला) की विशेष पहचान है।
👉 इसका प्रमुख केंद्र मोलेला गाँव है।
👉 यह गाँव राजसमंद जिले में अवस्थित है।
👉 यहाँ देवी-देवताओं की मिट्टी की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – राजसमंद जिले में
निम्न में से कौनसा स्थान "कागज़ी" नामक बर्तनों के निर्माण के लिए प्रसिद्ध है ?
[Research Assistant 10.07.2025]
सीकर
बयाना
जयपुर
अलवर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में पॉटरी कला की कई विशिष्ट शैलियाँ प्रचलित हैं।
👉 राजस्थान की प्रमुख पॉटरी कलाएं - कागजी पॉटरी अलवर, ब्लू पॉटरी जयपुर, ब्लैक पॉटरी कोटा, सुनहरी पॉटरी बीकानेर और जैसलमेर की प्रसिद्ध है
👉 इनमें से एक है कागज़ी पॉटरी, जिसमें बर्तन बहुत पतले और हल्के बनाए जाते हैं।
👉 अलवर की कागज़ी पॉटरी अपनी नज़ाकत और सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – अलवर
'पीछवाइयाँ' हस्तशिल्प कला निम्न क्षेत्र से सम्बन्धित है:
सहायक आचार्य [22.09.2021]
बगरू
बाड़मेर
नाथद्वारा
जयपुर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की प्रसिद्ध चित्रकला शैली में पीछवाइयाँ विशेष स्थान रखती हैं।
👉 इनका चित्रण मुख्यतः भगवान श्रीनाथजी की लीलाओं पर आधारित होता है।
👉 यह कला विशेष रूप से नाथद्वारा (राजसमंद) क्षेत्र से जुड़ी है।
👉 पिछवाई चित्र मंदिरों में पृष्ठभूमि सजावट के रूप में टांगे जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा
हस्तकला जिसके लिए कुदरत सिंह को पद्मश्री से अलंकृत किया गया है -
[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]
मीनाकारी
पीतल का मुरादाबादी का काम
कपडे की छपाई
ब्लु पोटरी
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की पारंपरिक कला में मीनाकारी का विशेष महत्व है।
👉 इसमें धातु पर बारीक कढ़ाई व रंगाई कर अलंकरण किया जाता है।
👉 इस कला के श्रेष्ठ कलाकार कुदरत सिंह रहे हैं।
👉 इन्हें इसी योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
✍️ सही उत्तर है – मीनाकारी
पिछवाईयों के चित्रण का मुख्य विषय है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)
प्रणय-लीला
युद्ध प्रसंग
श्रीकृष्ण लीला
हाथियों की लड़ाई
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की पिछवाई पेंटिंग नाथद्वारा शैली से संबंधित है।
👉 इन चित्रों का मुख्य विषय भगवान श्रीनाथजी से जुड़ा होता है।
👉 इनमें विशेष रूप से श्रीकृष्ण लीला का चित्रण किया जाता है।
👉 यह पेंटिंग मंदिरों की पृष्ठभूमि सजावट हेतु बनाई जाती है।
✍️ सही उत्तर है – श्रीकृष्ण लीला
गलीचा निर्माण हेतु प्रसिद्ध है :
[सहायक कृषि अधिकारी 2011]
जयपुर
सिरोही
पाली
अजमेर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में हस्तशिल्प की परंपरा में गलीचा निर्माण विशेष स्थान रखता है।
👉 गलीचे ऊन से बनाए जाते हैं और इनमें फारसी व वियना डिज़ाइन प्रयुक्त होते हैं।
👉 इस कार्य का प्रमुख केंद्र जयपुर है।
👉 यहाँ निर्मित गलीचे अपनी सुंदरता और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर
थेवा कला का केन्द्र है :
[कृषि अधिकारी 2011]
बस्सी
नागौर
प्रतापगढ़
पुष्कर
🔹 व्याख्या
👉 प्रतापगढ़ की प्रसिद्ध कांच पर सोने की कसीदाकारी थेवा कला को वर्ष 2013-14 में भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्रदान किया गया था
👉 इसमें रंगीन काँच पर सोने की बारीक नक्काशी की जाती है।
👉 यह परंपरा लगभग 500 वर्ष पुरानी है।
👉 इसका प्रमुख और एकमात्र केंद्र प्रतापगढ़ है।
✍️ सही उत्तर है – प्रतापगढ़
मलीर प्रिंट का संबंध है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
सांगानेर
बाड़मेर
बूँदी
उदयपुर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की पारंपरिक छपाई कलाओं में मलीर प्रिंट विशेष प्रसिद्ध है।
👉 इसमें मुख्यतः कत्थई और काले रंग का प्रयोग किया जाता है।
👉 इस प्रिंट में ज्यामितिक आकृतियों को अधिक महत्व दिया जाता है।
👉 इसका प्रमुख केंद्र बाड़मेर (बालोतरा क्षेत्र) है।
✍️ सही उत्तर है – बाड़मेर
राजस्थान में मूर्तिकला लिये कौन सा शहर विख्यात है ?
[LDC (RPSC) 2011]
जयपुर
अजमेर
कोटा
भीलवाड़ा
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में कई क्षेत्रों में मूर्तिकला का कार्य प्रचलित है।
👉 इनमें प्रमुख केंद्र जयपुर शहर है।
👉 यहाँ मुख्यतः संगमरमर की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं।
👉 जयपुर की मूर्तिकला अपनी सूक्ष्मता और आकर्षण के लिए प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर
___________अपने काले - लाल प्रिंट के लिए प्रसिद्ध है जिसमें फूलों, पत्तियों, जानवरों और पक्षियों को मटिया (मिट्टी) रंग के आधार पर लाल और काले रंग में बनाया जाता है।
[AEN CIVIL 21 मई 2023]
बगरू
कैथून
सांगानेरी
अकोला
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान का प्रसिद्ध बगरू प्रिंट अपनी पारंपरिक छपाई शैली के लिए जाना जाता है। बगरू प्रिंट कार्य छीपा समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता हैं
👉 इसमें कपड़े पर फूल-पत्तियाँ, पशु-पक्षी की आकृतियाँ बनाई जाती हैं।
👉 यह कार्य मुख्यतः मटिया (मिट्टी) रंग की जमीन पर किया जाता है।
👉 इसमें प्रमुखतः लाल और काले रंग का प्रयोग होता है।
✍️ सही उत्तर है – बगरू
मारवाड़ में_______को बागुड़िया कहा जाता था।
[Asst. Prof. (History) 17.05.2024]
पत्थर के दैनिक उपयोग के बर्तन
लकड़ी के खिलौने
अनाज भरने के मृद्भाण्ड
हाथीदांत के खिलौने
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में कई विशिष्ट लोक हस्तशिल्प प्रचलित रहे।
👉 यहाँ बने हाथीदांत के खिलौने विशेष प्रसिद्ध थे।
👉 स्थानीय बोली में इन खिलौनों को बागुड़िया कहा जाता था।
👉 यह शिल्प मारवाड़ की पारंपरिक पहचान माना जाता था।
✍️ सही उत्तर है – हाथीदांत के खिलौने
'भीमभड़क' शैलचित्र पुरास्थल स्थित है -
[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]
बून्दी
जयपुर
अलवर
जोधपुर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में अनेक स्थानों पर शैलचित्र पुरास्थल पाए जाते हैं।
👉 इन शैलचित्रों में प्राचीन जीवन और संस्कृति का चित्रण मिलता है।
👉 भीमभड़क शैलचित्र पुरास्थल का प्रमुख केंद्र जोधपुर है।
👉 यह स्थल ऐतिहासिक और पारंपरिक धरोहर माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जोधपुर
राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मोहनलाल किस शिल्प से संबंधित है ?
[AEN Pre. 2013]
हाथी दांत कला
थेवा कला
मोलेला मृण्मूर्ति शिल्प
ब्लू पॉटरी
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान के राजसमंद जिले के मोलेला गाँव की पहचान मृण्मूर्ति शिल्प है।
👉 यहाँ की मिट्टी से देवी-देवताओं की परंपरागत मूर्तियाँ बनाई जाती हैं।
👉 इस शिल्प के ख्यात कलाकार मोहनलाल कुम्हार हैं।
👉 इन्हें उत्कृष्ट योगदान हेतु राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
✍️ सही उत्तर है – मोलेला मृण्मूर्ति शिल्प
निम्नलिखित में से कौनसा सुमेलित नहीं है ?
[उपनिरीक्षक (SI) 07.10.2018]
अजरक प्रिन्ट – सांगानेर
टेराकोटा शिल्प- मोलेला
थेवा कला - प्रतापगढ़
मीनाकारी - जयपुर
🔹 व्याख्या
👉 अजरक प्रिंट और मलीर प्रिंट बाड़मेर की प्रसिद्ध प्रिंट है जो कपड़ों पर हाथ से छपाई की जाती हैं,अदरक प्रिंट में मुख्य रूप से नीले वह लाल रंग का प्रयोग होता है जबकि मलीर प्रिंट में कत्थई और काले और गहरे लाल रंग का प्रयोग अधिक होता है
👉 सांगानेर अपनी सांगानेरी प्रिंट के लिए प्रसिद्ध है।
👉 प्रश्न में दिया युग्म अजरक प्रिंट – सांगानेर सही नहीं है।
👉 अतः यह सुमेलित नहीं माना जाएगा।
सूची-I को सूची II के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए
सूची-I सूची-II
(A) थेवा कला (i) जयपुर
(B) टेराकोटा (ii) बीकानेर
(C) मथैरणा कला (iii) मोलेला
(D) ब्लू पाटरी (iv) प्रतापगढ़
[ACF परीक्षा 2011]
कूट :
A B C D
(iv) (iii) (ii) (i)
(iii) (ii) (iv) (i)
(ii) (i) (iv) (iii)
(iv) (ii) (iii) (i)
🔹 व्याख्या
👉 थेवा कला का प्रमुख केंद्र प्रतापगढ़ है।
👉 टेराकोटा (मृण कला) के लिए मोलेला (राजसमंद) प्रसिद्ध है।
👉 मथैरणा कला धार्मिक भित्ति चित्रों से जुड़ी है और बीकानेर में प्रचलित है।
👉 ब्लू पॉटरी का प्रमुख केंद्र जयपुर है।
✍️ सही उत्तर है – A-(iv), B-(iii), C-(ii), D-(i)
'अजरख' प्रिन्ट हेतु मुख्यतः प्रसिद्ध है :
[सहायक कृषि अधिकारी 2011]
झुन्झनु
सिरोही
चुरु
बाड़मेर
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की पारंपरिक छपाई कलाओं में अजरख प्रिंट प्रमुख है।
👉 इसमें मुख्यतः लाल और नीले रंगों का प्रयोग किया जाता है।
👉 इस प्रिंट में ज्यामितिक आकृतियों को अधिक महत्व दिया जाता है।
👉 इसका प्रमुख केंद्र बाड़मेर (बालोतरा क्षेत्र) है।
✍️ सही उत्तर है – बाड़मेर
बाड़मेर ब्लॉक मुद्रित कपड़े का एक और नाम क्या है ?
[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]
अजरक
छींट
टोकरी बुनाई
शेवरॉन
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान का बाड़मेर ब्लॉक प्रिंटिंग कार्य के लिए प्रसिद्ध है।
👉 यहाँ विशेष रूप से नीले और लाल रंगों से छपाई की जाती है।
👉 इस पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग को ही अजरक प्रिंट कहा जाता है।
👉 अजरक प्रिंट की छपाई में ज्यामितिक आकृतियाँ प्रमुख होती हैं।
✍️ सही उत्तर है – अजरक
राजस्थान में भित्ति चित्रों को चिरकाल तक जीवित रखने के लिए एक आलेखन पद्धति है, जिसे कहते हैं -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)
सांझी चित्रण
मांडना
फड़
आरायश
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में भित्ति चित्रों की समृद्ध परंपरा रही है।
👉 इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए विशेष तकनीक अपनाई जाती थी।
👉 इस आलेखन पद्धति को आरायश कहा जाता है।
👉 आरायश से चित्रों की चमक और दीर्घायु बनी रहती है।
✍️ सही उत्तर है – आरायश
नाथद्वारा शैली के पेंटिग्स को सामान्यतः कहा जाता है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (SST)
बनी-ठनी
राग - माला
लहरिया
पिछवाई
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की प्रसिद्ध चित्रकला में नाथद्वारा शैली विशेष स्थान रखती है।
👉 इस शैली में भगवान श्रीनाथजी की लीलाओं का चित्रण किया जाता है।
👉 नाथद्वारा शैली के चित्रों को सामान्यतः पिछवाई कहा जाता है।
👉 इनका उपयोग मंदिरों की पृष्ठभूमि सजावट हेतु किया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – पिछवाई
विश्व प्रसिद्ध 'अजरक प्रिंट' निम्न में से किस स्थान से संबंधित है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
सांगानेर
बाड़मेर
पाली
बगरू
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की छपाई कलाओं में अजरक प्रिंट का विशेष स्थान है।
👉 इसमें मुख्यतः नीले और लाल रंगों का प्रयोग किया जाता है।
👉 इस प्रिंट में ज्यामितिक आकृतियाँ प्रमुख होती हैं।
👉 इसका प्रमुख और विश्व प्रसिद्ध केंद्र बाड़मेर (बालोतरा क्षेत्र) है।
✍️ सही उत्तर है – बाड़मेर
स्थान, जो अपने मृदा शिल्प के लिए विख्यात है
[RAS Pre. 31.10.2015]
सांगानेर
कुचामन
कैथून
मोलेला
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की प्रमुख शिल्पकलाओं में मृदा शिल्प (टेराकोटा कला) शामिल है।
👉 कैथून यह कोटा जिले में स्थित है जो अपनी मलमल की साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है| सांगानेर - जयपुर के पास स्थित है हस्त निर्मित कागज और ब्लॉक प्रिंटिंग के लिए जाना जाता है! कुचामन यह लकड़ी के खिलौने और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है
👉 इसमें मिट्टी से देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और अन्य कलात्मक वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
👉 इस कला का प्रमुख केंद्र राजसमंद जिले का मोलेला गाँव है।
👉 मोलेला की मृण कला को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है।
✍️ सही उत्तर है – मोलेला
सोमपुरा शैली जानी जाती है -
[कृषि अधिकारी 29.08.2022]
स्थापत्य के लिए
चमड़े के लिए
मिट्टी के बर्तन के लिए
चित्रकला के लिए
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में सोमपुरा शैली का विशेष महत्व है। सोमपुरा शैली से निर्मित प्रमुख मंदिरों में - अक्षरधाम मंदिर (गांधीनगर और दिल्ली) तथा सोमनाथ मंदिर गुजरात है
👉 यह शैली मुख्यतः मंदिर निर्माण और स्थापत्य से जुड़ी है।
👉 सोमपुरा जाति के कारीगर इस स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध हैं।
✍️ सही उत्तर है – स्थापत्य के लिए
'बनी-ठनी' पेंटिंग संबंधित है
[वरिष्ठ अध्यापक 2011]
जयपुर शैली से
जोधपुर शैली से
किशनगढ़ (अजमेर) शैली से
अलवर शैली से
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान की चित्रकला में किशनगढ़ शैली का विशेष स्थान है।
👉 इस शैली में बनी प्रसिद्ध पेंटिंग "बनी-ठनी" है।
👉 इसे चित्रकार निहालचंद ने बनाया था।
👉 यह चित्र किशनगढ़ (अजमेर) शैली की पहचान और प्रतीक बन गया।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़ (अजमेर) शैली
ऊँट की खाल पर सोने-चांदी से की जाने वाली कलात्मक नक्काशी कहलाती है
[ACF परीक्षा 2011]
उस्त-कला
बादला
जड़ाव
आलागीला
🔹 व्याख्या
👉 हिसामुद्दीन उस्ता को उस्ता कला का" भीष्म पितामह" माना जाता है इन्हें 1986 में पद्मश्री सम्मान मिला
👉 राजस्थान की विशिष्ट कला में ऊँट की खाल पर नक्काशी की जाती है। इसमें बारीक सोने-चाँदी की सजावट होती है।
👉 इस अनोखी शिल्पकला को उस्ता कला या मुनव्वती कला कहा जाता है।
👉 यह कला विशेष रूप से बीकानेर में विकसित हुई।
✍️ सही उत्तर है – उस्ता कला
'टसर' कृत्रिम रेशम का विकास राजस्थान में निम्न जगह किया जा रहा है -
सहायक आचार्य [22.09.2021]
कोटा, उदयपुर एवं बाँसवाड़ा जिले
चित्तौड़, उदयपुर एवं बाँसबाड़ा जिले
उदयपुर एवं नाथद्वारा जिले
कोटा एवं चित्तौड़गढ़ जिले
🔹 व्याख्या
👉 राजस्थान में कृत्रिम रेशम के रूप में टसर का विकास किया जा रहा है।
👉 यह कार्य वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए किया गया।
👉 टसर के विकास के प्रमुख केंद्र कोटा, उदयपुर और बाँसवाड़ा जिले हैं।
✍️ सही उत्तर है – कोटा, उदयपुर एवं बाँसवाड़ा जिले