बोली, जिसमें सुन्दरदास (दादू पंथ) का साहित्य प्राप्त होता है -  

[सहायक कृषि अधिकारी 29.04.2018]

  • मेवाती  

  • ढूढ़ाड़ी  

  • रांगडी  

  • अहीरवाटी  

🔹 व्याख्या

👉 संत दादूदयाल और उनके शिष्यों की रचनाएँ ढूंढाड़ी में उपलब्ध हैं।
👉 दादूपंथ के संत सुन्दरदास का साहित्य भी इसी भाषा में मिलता है।
👉 ढूंढाड़ी बोली को साहित्यिक रूप में पिंगल भी कहा गया है।
👉 इसलिए सुन्दरदास के साहित्य की भाषा ढूंढाड़ी है।

✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़ी 

'लीलटांस', 'सबद' एवं 'निर्ग्रथ' के लेखक कौन हैं ? 

[कृषि अधिकारी 24.11.2020]

  • चन्द्रसिंह बिरकाली 

  • कन्हैयालाल सेठिया 

  • मेघराज 'मुकुल' 

  • रेवतदान 'कल्पित'

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी साहित्य में अनेक महत्वपूर्ण रचनाएँ हुईं।
👉 'लीलटांस', 'सबद' और 'निर्ग्रथ' नामक कृतियाँ विशेष उल्लेखनीय हैं।
👉 इनका लेखन प्रसिद्ध साहित्यकार कन्हैयालाल सेठिया ने किया।
👉 उन्होंने राजस्थानी भाषा और संस्कृति को नई पहचान दी।

✍️ सही उत्तर है – कन्हैयालाल सेठिया 

निम्नलिखित में से कौन-सी बोली राजस्थानी बोलियों के अन्तर्गत नहीं गिनी जाती ? 

[PTI Grade -II (RPSC) 2011]

  • अहीरवाटी 

  • बागड़ी 

  • मेवाती 

  • ब्रज 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा की अनेक बोलियाँ मानी गई हैं।
👉 इनमें मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मालवी, मेवाती, बागड़ी आदि शामिल हैं।
👉 प्रश्न में दी गई ब्रज भाषा मुख्यतः उत्तरप्रदेश क्षेत्र की बोली है।
👉 इसका प्रभाव राजस्थान के कुछ जिलों में है, पर यह राजस्थानी बोली नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – ब्रज 

मध्ययुगीन राजस्थानी वात साहित्य पर निम्नांकित में से किन विद्वानों ने महत्त्वपूर्ण कार्य किया हैं?

(A) लक्ष्मी कुमारी चुंडावत

(B) एल.पी. टेस्सीटोरी

(C) मनोहर शर्मा

(D) श्रीलाल नथमल जोशी

सही उत्तर का चयन कीजिए

[Deputy Commandant 11.01.2026]

  • (A), (B) एवं (D)

  • (A), (C) एवं (D)

  • (C) एवं (D)

  • (A), (B), (C) एवं (D)

🔹 व्याख्या

👉 लक्ष्मी कुमारी चुंडावत ने वात साहित्य पर कार्य किया।
👉
एल.पी. टेस्सीटोरी ने भी महत्त्वपूर्ण शोध किया।
👉
मनोहर शर्मा का इसमें योगदान रहा।
👉
श्रीलाल नथमल जोशी ने भी कार्य किया।

✍️ सही उत्तर है – (A), (B), (C) एवं (D)

आधुनिक राजस्थानी साहित्यकारों को उनकी रचनाओं से सुमेलित कीजिए :

(रचनाकार)

(रचना)

A. रामकरण आसोपा

i. राजिया के सोरठे

B. कृपाराम चारण

ii. कनकसुन्दर

C. उमरदान लालस

iii. मारवाड़ी व्याकरण

D. शिवचन्द्र भरतिया

iv. उमर काव्य

सही उत्तर का चयन कीजिए :

A B C D

[Asst. Prof. (History-II) 10.12.2025]

  • iii i iv ii

  • iv iii ii i

  • i ii iii iv

  • ii iii iv i

🔹 व्याख्या

👉 रामकरण आसोपा की रचना मारवाड़ी व्याकरण है।
👉
कृपाराम चारण ने राजिया के सोरठे लिखे।
👉
उमरदान लालस की रचना उमर काव्य है।
👉
शिवचन्द्र भरतिया ने कनकसुन्दर लिखी।

✍️ सही उत्तर है – iii i iv ii

राजस्थान के प्रमुख कहानीकार हैं : 

[सहायक कृषि अधिकारी 2011]

  • सूर्यमल मिश्रण 

  • सुन्दरदास 

  • लक्ष्मी कुमारी चूंडावत 

  • मण्डन 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा-साहित्य में कई कहानीकारों का योगदान रहा है।
👉 इनमें सबसे प्रमुख नाम लक्ष्मी कुमारी चूंडावत का लिया जाता है।
👉 उन्होंने अपनी रचनाओं से राजस्थानी कहानी साहित्य को समृद्ध किया।
👉 इसलिए उन्हें राजस्थान की प्रमुख कहानीकार माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – लक्ष्मी कुमारी चूंडावत 

मुड़िया लिपि के बारे में कौनसा कथन सही नहीं है ?  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • मुड़िया लिपि के शब्दों को अलग-अलग न लिखकर एक ही क्रम में लिखकर वाक्य पूर्ण किया जाता है। 

  • मुड़िया लिपि, ब्राह्मी लिपि पर आधारित महाजनी लिपि के नाम से भी जानी जाती है। 

  • यह दाएं से बाएं लिखी जाती है। 

  • इसका उपयोग मुख्य रूप से वित्तीय रिकॉर्ड बनाने और व्यवसायिक विवरण लिखने में किया जाता है।

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा की एक प्रमुख लिपि मुड़िया लिपि कहलाती है।
👉 इसे ही महाजनी या बनियाणवी लिपि भी कहा जाता है।
👉 यह लिपि सामान्य रूप से बाएँ से दाएँ लिखी जाती है। 

✍️ सही उत्तर है – यह दाएँ से बाएँ लिखी जाती है। 

अहीरवाटी बोली राजस्थान के किस क्षेत्र बोली जाती है ? 

  • मेवात 

  • मेवाड़

  • ढूंढाड़

  • मारवाड़

🔹 व्याख्या

👉 अहीरवाटी बोली को राठी भी कहा जाता है।
👉 यह बोली पूर्वोत्तर राजस्थान वर्ग की महत्वपूर्ण बोली है।
👉 इसका प्रभाव कोटपूतली-बहरोड़ व किशनगढ़ के पश्चिमी भाग तक है।
👉 ऐतिहासिक रूप से यह बोली मेवात क्षेत्र से जुड़ी हुई है।

✍️ सही उत्तर है – मेवात 

वागड़ी बोली मूल रूप से राजस्थान के निम्न में से किन जिलों में बोली जाती है ?

[Development Officer 29.07.2025]

  • डूंगरपुर एवं बाँसवाड़ा

  • बाँसवाड़ा एवं चित्तौड़गढ़

  • डूंगरपुर एवं सिरोही

  • बाँसवाड़ा एवं सिरोही

🔹 व्याख्या:

👉 वागड़ी बोली मुख्य रूप से राजस्थान के डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में बोली जाती है।
👉 यह बोली वागड़ क्षेत्र की प्रमुख भाषा है, जो राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित है।
👉 गुजरात की निकटता के कारण वागड़ी पर गुजराती भाषा का स्पष्ट प्रभाव देखा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – डूंगरपुर और बांसवाड़ा 

निम्न में से 'बागड़ी' बोली किन जिलों में बोली जाती है ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 28.08.2022]

  • अलवर एवं भरतपुर 

  • पाली एवं राजसमन्द 

  • अजमेर एवं भीलवाड़ा 

  • डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान के वागड़ क्षेत्र की प्रमुख बोली बागड़ी है।
👉 इसे भीलों की मुख्य बोली भी कहा गया है।
👉 यह बोली मुख्यतः डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में बोली जाती है।
👉 इसके अतिरिक्त प्रतापगढ़ और सिरोही के कुछ हिस्सों में भी इसका प्रभाव है।

✍️ सही उत्तर है – डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा 

नेहड़ी, कठेर और राठी किस बोली के रूप हैं ?  

[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]

  • हाड़ौती 

  • मेवाड़ी 

  • मेवाती 

  • बागड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 मेवाती बोली अलवर, भरतपुर, धौलपुर आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।
👉 इसमें स्थान-भेद के आधार पर कई रूप पाए जाते हैं।
👉 इनमें नेहड़ी, कठेर और राठी प्रमुख हैं।
👉 इसलिए ये सभी रूप मेवाती बोली से संबंधित हैं।

✍️ सही उत्तर है – मेवाती 

निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन राजस्थानी कवि केशवदास (केसोदास गाडण) के बारे में सही है/हैं ? 

(A) उसने 'गुणरूपक' नामक ग्रंथ की रचना की थी। 

(B) गुणरूपक ग्रंथ में बीकानेर के शासक रायसिंह का वर्णन है। 

[भूवैज्ञानिक परीक्षा 07.05.2025]

  • केवल (B) सही है। 

  • केवल (A) सही है। 

  • (A) और (B) दोनों सही हैं। 

  • न तो (A) न ही (B) सही है।

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी कवि केशवदास (केसोदास गाडण) ने कई रचनाएँ कीं।
👉 उनकी प्रमुख कृति का नाम 'गुणरूपक' है।
👉 प्रश्न में दिए गए अनुसार यह तथ्य सही है।
👉 परन्तु इसमें बीकानेर के शासक रायसिंह का वर्णन नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – केवल (A) सही है 

राजस्थानी गद्य और पद्य में निम्नलिखित में से कौनसा सत्य नहीं है ?  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • मर्सिया इसमें आध्यात्मिक अनुभव और ज्ञान समाहित है। 

  • रूपक - एक प्रकार का काव्य है, जो व्यक्ति या राजवंशों की उपलब्धियों का वर्णन करता है। 

  • ख्यात वीरता, विजय और महत्त्वपूर्ण कार्यों का लेखा जोखा। 

  • पर्ची-संतों का जीवन इतिहास जो कविता के रूप में उपलब्ध है। 

🔹 व्याख्या

👉 रूपक – यह एक प्रकार का काव्य है, जिसमें किसी व्यक्ति या राजवंश की उपलब्धियों का वर्णन किया जाता है।
👉 पर्ची – इसमें संतों का जीवन इतिहास काव्य रूप में मिलता है।
👉 ख्यात – इसमें वीरता, विजय और अन्य महत्त्वपूर्ण कार्यों का लेखा-जोखा होता है।
👉 ये तीनों ही राजस्थानी गद्य और पद्य की प्रमुख शैलियाँ हैं।

✍️ सही उत्तर है – मर्सिया इसमें आध्यात्मिक अनुभव और ज्ञान समाहित है। 

किसी व्यक्ति विशेष और राजवंश की उपलब्धियों और घटनाओं पर प्रकाश डालने वाली कृतियों ___________को कहा जाता है। 

[AEN CIVIL 21 मई 2023]

  • साखी 

  • वेली 

  • प्रकास

  • विगत

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान के साहित्य में कई प्रकार की कृतियाँ लिखी गईं।
👉 इनमें कुछ रचनाएँ किसी व्यक्ति विशेष या राजवंश की उपलब्धियों पर आधारित होती हैं।
👉 ऐसी रचनाओं में उनके कार्यों और महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया जाता है।
👉 इन कृतियों को 'प्रकास' कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – प्रकास 

हरिषेण द्वारा रचित प्रयागप्रशस्ति की भाषा है - 

[Head Master 11.10.2021]

  • पाली 

  • प्राकृत 

  • मैथिली 

  • संस्कृत 

🔹 व्याख्या

👉 प्रयाग प्रशस्ति रचनाकार हरिषेण थे।
👉 इसकी भाषा संस्कृत है।
👉 यह शिलालेख शास्त्रीय संस्कृत में लिखा गया।
👉 इसमें गद्य-पद्य मिश्रित चम्पू शैली का प्रयोग हुआ।

✍️ सही उत्तर है – संस्कृत 

अरविन्द घोष के द्वारा रचित 'भवानी मन्दिर' निम्न में से किस रचना से प्रेरित थी ? 

[Head Master 11.10.2021]

  • आनन्द मठ 

  • दुर्गेश नन्दिनी 

  • देवी चौधरानी 

  • वर्तमान रणनीति 

🔹 व्याख्या

👉 अरविन्दो घोष ने ‘भवानी मंदिर’ नामक रचना लिखी।
👉 यह रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की ‘आनंद मठ’ से प्रेरित थी।
👉 इसमें क्रांतिकारियों को संन्यासी जीवन अपनाने का संदेश दिया गया।
👉 उद्देश्य था देश की स्वतंत्रता प्राप्ति तक संघर्षरत रहना।

✍️ सही उत्तर है – आनंद मठ 

निम्नलिखित में कौन सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं ?

राजस्थानी कवि — ग्रंथ

A. शिवदास गाडण — अचलदास खीची री वचनिका
B.
बादर ढाढी — वीरमायण
C.
दुरसा आढ़ा — विरुद छहत्तरी
D.
पृथ्वीराज राठौड़ — वेंलि क्रिसन रुकमणी री

कूट :

[Asst. Prof. (History-II) 10.12.2025]

  • A, B और D

  • केवल D

  • A और D

  • A, B, C और D

🔹 व्याख्या

👉 शिवदास गाडण की रचना अचलदास खीची री वचनिका है।
👉
बादर ढाढी ने वीरमायण की रचना की।
👉
दुरसा आढ़ा की कृति विरुद छहत्तरी है।
👉
पृथ्वीराज राठौड़ ने वेंलि क्रिसन रुकमणी री लिखी।

✍️ सही उत्तर है – A, B, C और D

निम्नलिखित में से कौनसा राजस्थानी काव्य '1857 का दस्तावेजी काव्य' कहलाता है ?  

[Technical Assistant 07.07.2025]

  • सदाशिव - राजरत्नाकर 

  • सूर्यमल्ल मिश्रण - वीर सतसई 

  • करणीदान - सूरज प्रकाश 

  • वीरभान - राजरूपक 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी साहित्य में अनेक काव्य ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़े हैं।
👉 कवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने भी महत्वपूर्ण काव्य की रचना की।
👉 उनकी रचना 'वीर सतसई' विशेष प्रसिद्ध है।
👉 इसे ही 1857 का दस्तावेजी काव्य कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – सूर्यमल्ल मिश्रण – वीर सतसई 

'देवड़ावाटी' किस क्षेत्र की बोली है ? 

[PTI Grade -III (RPSC) 2011]

  • जयपुर क्षेत्र 

  • उदयपुर क्षेत्र 

  • अलवर क्षेत्र 

  • सिरोही क्षेत्र 

🔹 व्याख्या

👉 देवड़ावाटी बोली राजस्थानी की एक उपबोली है।
👉 यह बोली मुख्य रूप से मारवाड़ी भाषा से जुड़ी हुई है।
👉 इसका प्रचलन विशेषकर सिरोही क्षेत्र में मिलता है।
👉 इसी कारण इसे सिरोही बोली भी कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – सिरोही क्षेत्र 

कुवलयमाला नामक कथा संग्रह में कितनी देशी भाषाओं के नाम का उल्लेख हुआ है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

  • 18 

  • 15 

  • 16 

  • 17 

🔹 व्याख्या

👉 विक्रम संवत् 835 में उद्योतन सूरि ने जालौर में 'कुवलयमाला' ग्रंथ रचा।
👉 इस ग्रंथ में अनेक देशी भाषाओं का उल्लेख मिलता है।
👉 इसमें विशेष रूप से मरुभाषा का भी नाम सम्मिलित है।
👉 कुल मिलाकर इसमें 18 देशी भाषाओं के नाम आए हैं।

✍️ सही उत्तर है – 18 

कवि शंकर राव द्वारा रचित 'भीम विलास' राजस्थानी की किस बोली में लिखी गई है ?

[कृषि अधिकारी 20.04.2025]

  • बागड़ी

  • मेवाड़ी

  • अहीरवाटी

  • ढूंढाड़ी

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी साहित्य में कई रचनाएँ विशिष्ट बोलियों में लिखी गईं।
👉 कवि शंकर राव ने प्रसिद्ध कृति 'भीम विलास' की रचना की।
👉 यह कृति राजस्थानी की अहीरवाटी बोली में लिखी गई है।
👉 इससे अहीरवाटी बोली की साहित्यिक महत्ता सिद्ध होती है।

✍️ सही उत्तर है – अहीरवाटी 

राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में मेवाती भाषा बोली जाती है ? 

[LDC (RPSC) 23.10.2016]

  • भीलवाड़ा 

  • डूंगरपुर 

  • अलवर 

  • सीकर 

🔹 व्याख्या

👉 मेवाती बोली पश्चिमी हिंदी और राजस्थानी भाषा के बीच सेतु का कार्य करती है।
👉 यह बोली अलवर, भरतपुर, धौलपुर सहित कई क्षेत्रों में बोली जाती है।
👉 स्थान-भेद के अनुसार इसके कई रूप मिलते हैं।
👉 प्रमुख रूप से यह बोली अलवर जिले में प्रचलित है।

✍️ सही उत्तर है – अलवर 

मारवाड़ी की साहित्यिक भाषा का नाम क्या है ?  

[अनुसंधान अधिकारी पुरा. 04.08.2024]

  • बागड़ी 

  • डिंगल 

  • ढटकी 

  • पिंगल 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की प्रधान बोली मारवाड़ी मानी जाती है।
👉 इसका प्राचीन रूप साहित्य में भी उपयोग हुआ है।
👉 मारवाड़ी की साहित्यिक भाषा को विशेष नाम दिया गया।
👉 इसे डिंगल कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – डिंगल 

खींच (खींचड़ौ) राजस्थान के कौन से मुख्य अनाज से बनाया जाता है?

[Lecturer (Ayurved) 12.01.2026]

  • बाजरा

  • गेहूँ

  • ज्वार

  • जौ

🔹 व्याख्या

👉 खींच/खीचड़ो राजस्थान का पारंपरिक व्यंजन है।
👉
इसका मुख्य अनाज बाजरा होता है।
👉
इसमें मूंग दाल व देसी घी डाला जाता है।
👉
इसे प्रायः सर्दियों में खाया जाता है।

✍️ सही उत्तर है – बाजरा

अधोलिखित को सुमेलित कीजिए : 

    संगीत घराना       कलाकार 

A. डागर घराना    i.मोतीराम ज्योतिराम 

B. जयपुर घराना  ii. बहराम खाँ 

C. मेवाती घराना  iii. मनरंग  

D. अतरौली घरानाiv. दुल्लु खाँ 

[कृषि अधिकारी 24.11.2020]

            A     B     C     D

  • i     iv     iii     ii 

  • iv     i     iii     ii

  • ii     iii     i     iv 

  • iii     i     iv     ii 

🔹 व्याख्या

👉 डागर घराना ध्रुपद परम्परा से जुड़ा है, इसके प्रमुख कलाकार बहराम खाँ रहे।
👉 जयपुर घराना की विशेष पहचान है, इसके प्रतिनिधि कलाकार मनरंग माने जाते हैं।
👉 मेवाती घराना में प्रमुख नाम मोतीराम-ज्योतिराम का आता है।
👉 अतरौली घराना से प्रसिद्ध कलाकार दुल्लु खाँ जुड़े रहे।

✍️ सही उत्तर है – (A)-(ii), (B)-(iii), (C)-(i), (D)-(iv) 

मेवाड़ी भाषा में योगसूत्र, भगवद्गीता एवं सांख्यकारिका ग्रंथों की रचना किसने की ? 

[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]

  • शिवदास  

  • चतुरसिंह 

  • पृथ्वीराज राठौड़ 

  • दुरसा आढ़ा 

🔹 व्याख्या

👉 मेवाड़ी भाषा में भी अनेक धार्मिक व दार्शनिक ग्रंथों की रचना हुई।
👉 इनमें योगसूत्र, भगवद्गीता और सांख्यकारिका का अनुवाद/रचनाएँ शामिल हैं।
👉 इन ग्रंथों की रचना मेवाड़ी साहित्यकार चतुरसिंह ने की।
👉 इससे मेवाड़ी भाषा की दार्शनिक परम्परा और भी समृद्ध हुई।

✍️ सही उत्तर है – चतुरसिंह 

संत चरणदास का साहित्य किस बोली में मित्रता है ?  

[सहायक कृषि अधिकारी 25.04.2018]

  • ढूढाडी

  • मेवाती  

  • तोरावटी 

  • शेखावाटी  

🔹 व्याख्या

👉 मेवाती बोली अलवर, भरतपुर, धौलपुर आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।
👉 इस बोली में अनेक संतों ने अपना साहित्य रचा है।
👉 संत चरणदास जी का साहित्य भी मेवाती बोली में मिलता है।
👉 मेवाती बोली पश्चिमी हिंदी और राजस्थानी के बीच एक सेतु मानी जाती है।

✍️ सही उत्तर है – मेवाती 

थली, धातकी, देवड़ावाटी किसकी उप-बोलियाँ हैं ?  

[वरिष्ठ अध्यापक (पेपर -I) 29.12.2024]

  • हाड़ौती 

  • बागड़ी 

  • मेवाती 

  • मारवाड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की प्रधान बोली मारवाड़ी मानी जाती है।
👉 इसके अंतर्गत कई उपबोलियाँ आती हैं।
👉 इनमें थली, ढटकी (धातकी) और देवड़ावाटी प्रमुख हैं।
👉 ये सभी मारवाड़ी बोली की शाखाएँ हैं।

✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी 

निम्नांकित में से कौन - सा युग्म सुमेलित नहीं है ? 

[कृषि अधिकारी 2011]

            बोली      -    जिले 

  • ढुढ़ाडी  - जयपुर 

  • मालवी  - बाँसवाड़ा 

  • मेवाती  -  अलवर 

  • मेवाडी  - चितोड़ और भीलवाड़ा 

🔹 व्याख्या

👉 मालवी बोली का क्षेत्र झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ है।
👉 प्रश्न में इसे बांसवाड़ा से जोड़ा गया है।
👉 बांसवाड़ा में मुख्यतः वागड़ी बोली बोली जाती है।
👉 इसलिए यह युग्म सही सुमेलित नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – मालवी – बाँसवाड़ा 

'तोरावाटी' है : 

[सहायक कृषि अधिकारी 2011]

  • हाड़ोती बोली 

  • ढूंढाड़ी बोली 

  • मेवाड़ी बोली 

  • मारवाड़ी बोली 

🔹 व्याख्या

👉 तोरावाटी राजस्थान की एक उपबोली है।
👉 यह बोली मुख्यतः जयपुर के उत्तर के पर्वतीय क्षेत्र में बोली जाती है।
👉 ढूंढाड़ी बोली की उपबोलियों में तोरावाटी भी सम्मिलित है।
👉 इसका प्रमुख क्षेत्र सीकर जिले के नीमकाथाना व श्रीमाधोपुर हैं।

✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़ी बोली 

'ढ़टकी', 'थाली' एवं 'खैराड़ी' उपबोलियाँ राजस्थान की किस बोली से सम्बन्धित हैं ? 

[कृषि अधिकारी 19.01.2021][कृषि अधिकारी 19.01.2021]

  • मेवाती 

  • मेवाड़ी 

  • मारवाड़ी 

  • ढूंढाड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की प्रधान बोली मारवाड़ी है।
👉 इसके अंतर्गत कई प्रमुख उपबोलियाँ आती हैं।
👉 इनमें ढ़टकी, थली और खैराड़ी भी सम्मिलित हैं।
👉 ये उपबोलियाँ मारवाड़ी बोली के क्षेत्र में प्रचलित हैं।

✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी 

मालव प्रदेश के राजपूतों में प्रचलित मारवाड़ी और मालवी के सम्मिश्रण से उत्पन्न बोली का क्या नाम है ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]

  • मेवाड़ी 

  • मालवी 

  • रांगड़ी 

  • मालड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 मालव प्रदेश में एक विशेष संकर बोली बोली जाती है।
👉 यह बोली मारवाड़ी और मालवी बोलियों के मिश्रण से बनी है।
👉 इसे मालवा क्षेत्र के राजपूतों की बोली कहा गया है।
👉 इस मिश्रण से उत्पन्न बोली का नाम रांगड़ी है।

✍️ सही उत्तर है – रांगड़ी 

"ढटकी" उपबोली किस भाषा से संबंधित है ? 

[कृषि अधिकारी 29.08.2022]

  • मेवाड़ी 

  • मारवाड़ी 

  • हाड़ौती 

  • ढूंढाड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 ढटकी बोली का उल्लेख राजस्थानी की उपबोलियों में किया गया है।
👉 यह बोली विशेष रूप से मारवाड़ी भाषा से संबंधित है।
👉 इसका प्रचलन बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर और फलौदी क्षेत्रों में है।
👉 इसलिए इसे मारवाड़ी की एक प्रमुख उपबोली माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी 

कोटा और बुन्दी का क्षेत्र राजस्थान में कहलाता है ? 

[कृषि अधिकारी 2011]

  • वागड़ 

  • हाड़ोती 

  • शेखावारी 

  • जांगल 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में प्रत्येक अंचल की अपनी प्रमुख बोली है।
👉 कोटा और बूंदी क्षेत्र की बोली विशेष पहचान रखती है।
👉 इस अंचल की बोली को हाड़ौती कहा जाता है।
👉 इसलिए कोटा-बूंदी का क्षेत्र राजस्थान में हाड़ोती अंचल कहलाता है।

✍️ सही उत्तर है – हाड़ोती 

दादूपंथ का साहित्य किस भाषा में संगृहीत है

[वरिष्ठ अध्यापक 19.02.2019]

  • मारवाड़ी 

  • मेवाती

  • ढूंढाड़ी 

  • बागड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 संत दादूदयाल ने निर्गुण भक्ति का प्रचार किया।
👉 उन्होंने अपनी साधना की भूमि नारायणा (जयपुर) को बनाया।
👉 दादूपंथ का विशाल साहित्य संग्रह उपलब्ध है।
👉 यह साहित्य मुख्य रूप से ढूंढाड़ी भाषा में संगृहीत है।

✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़ी 

तोरावाटी बोली प्रचलित है 

[पशु चिकित्सा अधिकारी 02.08.2020]

  • नीम का थाना में

  • कुचामन में 

  • बहरोड़ में 

  • झुन्झुनू में 

🔹 व्याख्या

👉 तोरावाटी बोली ढूंढाड़ी की एक उपबोली है।
👉 यह बोली जयपुर के उत्तर के पर्वतीय प्रदेश में प्रचलित है।
👉 इसका मुख्य क्षेत्र सीकर जिले का नीमकाथाना और श्रीमाधोपुर माना गया है।
👉 इसलिए तोरावाटी बोली विशेषतः नीमकाथाना में बोली जाती है।

✍️ सही उत्तर है – नीमकाथाना 

राजस्थान में गोला, दरोगा, चाकर, चेला आदि सम्बोधन किसके लिए प्रयुक्त होते थे ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]

  • घरेलू दास के लिए 

  • पुलिसकर्मी के लिए 

  • तांत्रिक के लिए 

  • बन्धुआ मजदूर के लिए 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान के समाज में अनेक प्रकार के संबोधन प्रचलित थे।
👉 इनमें गोला, दरोगा, चाकर और चेला प्रमुख थे।
👉 इन संबोधनों का प्रयोग विशेष वर्ग के लिए किया जाता था।
👉 ये संबोधन मुख्यतः घरेलू दास के लिए प्रयुक्त होते थे।

✍️ सही उत्तर है – घरेलू दास 

'किरतार बावनी' के लेखक हैं : 

[सहायक कृषि अधिकारी 2011]

  • गिरधर 

  • करणीदान 

  • नल्लसिंह 

  • दुरसा आढ़ा 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी साहित्य में दुरसा आढ़ा का विशेष स्थान है।
👉 उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण रचनाएँ कीं।
👉 उनकी ही कृतियों में प्रसिद्ध 'किरतार बावनी' सम्मिलित है।
👉 इसमें उनके साहित्यिक कौशल और इतिहासबोध की झलक मिलती है।

✍️ सही उत्तर है – दुरसा आढ़ा 

राजस्थानी 'शब्दकोश' का निर्माण किया : 

[सहायक कृषि अधिकारी 2011]

  • मुन्नालाल पुरोहित 

  • बांकीदास 

  • सीताराम लालस 

  • श्रीलाल 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा के विकास में शब्दकोश निर्माण का विशेष महत्व है।
👉 इस दिशा में कार्य करने वाले प्रमुख विद्वान सीताराम लालस थे।
👉 उन्होंने राजस्थानी भाषा का विशाल 'शब्दकोश' तैयार किया।
👉 इससे राजस्थानी भाषा की सामग्री और शब्दभंडार संरक्षित हुआ।

✍️ सही उत्तर है – सीताराम लालस 

सुमेलित कीजिये -

  बोली              जिला 

A. जगरौती     i उदयपुर 

B. ढाटी          ii टोंक 

C. नागरचाल   iii. बाड़मेर 

D. धावड़ी       iv. करौली 

सहायक आचार्य [24.04.2016]

 कूट: 

    A     B     C    D 

  •  i  ii  iii  iv 

  • iv  iii  ii  i 

  • iii  i  iv  ii 

  • iv  i  ii  iii 

🔹 व्याख्या

👉 जगरौती बोली का क्षेत्र मुख्यतः करौली है।
👉 ढाटी बोली पश्चिमी राजस्थान के बाड़मेर जिले में बोली जाती है।
👉 नागरचोल बोली ढूंढाड़ी की उपबोली है, जो टोंक व सवाईमाधोपुर क्षेत्र में बोली जाती है।
👉 धावड़ी बोली मुख्यतः उदयपुर व सलूम्बर में बोली जाती है।

✍️ सही उत्तर है – (A)-(iv), (B)-(iii), (C)-(ii), (D)-(i) 

राजस्थानी साहित्य की किस विधा में नृत्य, गायन और अभिनय तीनों कलाओं का समावेश मिलता है ? 

[PTI & Librarian 03.05.2025]

  • वचनिका 

  • रास 

  • ख्यात 

  • बात 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी साहित्य में अनेक विधाएँ पाई जाती हैं।
👉 इनमें एक प्रमुख विधा है रास।
👉 रास में नृत्य, गायन और अभिनय तीनों कलाओं का समावेश होता है।
👉 यह साहित्य और कला का संयोजन माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – रास 

निम्न में से कौन विद्वान हैं, जो राजस्थानी भाषा-बोलियों से सम्बन्धित कार्य के लिए नहीं जाने जाते ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]

  • डॉ. मोतीलाल मेनारिया 

  • जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन 

  • डॉ. हीरालाल माहेश्वरी 

  • नोम चोम्स्की 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा-बोलियों पर कार्य करने वाले विद्वानों में एल.पी. टैस्सीटोरी, जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन, रामकर्ण आसोपा आदि शामिल हैं।
👉 इन विद्वानों ने राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति, विकास और बोलियों पर विस्तृत अध्ययन किया।
👉 प्रश्न में दिया गया नाम नोम चोम्स्की भाषाविज्ञान से जुड़े हैं।
👉 वे राजस्थानी भाषा-बोलियों से संबंधित कार्यों के लिए प्रसिद्ध नहीं हैं।

✍️ सही उत्तर है – नोम चोम्स्की 

माघ मास की संक्रांति के दिन सूर्य पूजा के निमित सात धान्यों की “खीच” और “गुड़राब” को क्या कहा जाता है?

[Lecturer (Ayurved) 12.01.2026]

  • सोगरी

  • खीचियौ

  • खीचड़वार

  • राबड़ी

🔹 व्याख्या

👉 मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा की जाती है।
👉
इस दिन सात धान्यों की खीच बनाई जाती है।
👉
साथ में गुड़राब का भी प्रयोग होता है।
👉
इसे खीचड़वार कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – खीचड़वार

मध्यकालीन राजस्थानी समाज में 'मोफोर' पद का प्रयोग किया गया था -  

[सहायक आचार्य (इतिहास) 12.09.2024]

  • आउटडोर' खेल के एक प्रकार के लिए 

  • शराब के एक प्रकार के लिए 

  • मनोरंजन के एक प्रकार के लिए  

  • 'इंडोर खेल के एक प्रकार के लिए 

🔹 व्याख्या

👉 मध्यकालीन राजस्थानी समाज में कई विशिष्ट पदों का प्रयोग होता था।
👉 इन्हीं में से एक पद था 'मोफोर'।
👉 यह पद किसी वस्तु विशेष को सूचित करता था।
👉 इसका प्रयोग शराब के एक प्रकार के लिए किया जाता था।

✍️ सही उत्तर है – शराब के एक प्रकार के लिए 

डॉ. ग्रियर्सन ने अपनी पुस्तक “लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया" में राजस्थानी बोलियों को_______________मुख्य समूहों में विभाजित किया है। 

[EO RO (Shift I) 14.05.2023]

  • सात 

  • पाँच

  • तीन 

  • नौ 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी बोलियों का पहला बड़ा सर्वेक्षण डॉ. जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने किया।
👉 उन्होंने अपनी पुस्तक "लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया" में इनका वर्गीकरण प्रस्तुत किया।
👉 ग्रियर्सन ने राजस्थानी बोलियों को अलग-अलग मुख्य समूहों में बाँटा।
👉 कुल मिलाकर इन्हें पाँच मुख्य समूहों में विभाजित किया गया।

✍️ सही उत्तर है – पाँच 

राजस्थानी भाषा का उद्भव किस से माना जा सकता है ? 

(A) मारू-गुर्जरी अपभ्रंश 

(B) नागर अपभ्रंश 

(C) शौरसेनी अपभ्रंश 

(D) मागधी अपभ्रंश 

सही विकल्प चुनिए  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • (A), (C), (D) 

  • (A), (B), (C)

  • (B), (C), (D) 

  • (A), (B), (C), (D) 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति के बारे में विद्वानों ने अलग-अलग मत दिए हैं।
👉 कुछ विद्वान इसका उद्भव मारू-गुर्जरी अपभ्रंश से मानते हैं।
👉 कुछ विद्वान इसे नागर अपभ्रंश से जोड़ते हैं।
👉 वहीं अनेक विद्वान इसका स्रोत शौरसेनी अपभ्रंश मानते हैं। 

✍️ सही उत्तर है – (A), (B), (C) 

बोली, जिसमें भक्ति संत सहजोबाई तथा दयाबाई की रचनाएँ प्राप्त होती हैं - 

[Protection Officer 28.01.2023]

  • ढूंढाड़ी 

  • मालवी 

  • निमाड़ी

  • मेवाती 

 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की एक प्रमुख बोली मेवाती है।
👉 इस बोली में कई संतों ने अपने भक्ति साहित्य की रचना की।
👉 संत सहजोबाई और दयाबाई की रचनाएँ भी इसी बोली में उपलब्ध हैं।
👉 अतः इनका साहित्य मेवाती बोली से सम्बंधित है।

✍️ सही उत्तर है – मेवाती 

निम्नलिखित में से किस जिलें में 'गोडवाडी' बोली बोली जाती है ? 

[PTI Grade -II (RPSC) 2011]

  • अजमेर 

  • जालोर 

  • डूंगरपुर 

  • जैसलमेर 

🔹 व्याख्या

👉 गोड़वाड़ी बोली मारवाड़ी भाषा की एक उपबोली है।
👉 इसका क्षेत्र गोड़वाड़ प्रदेश कहलाता है।
👉 यह क्षेत्र जालोर की आहोर तहसील के पूर्वी भाग से प्रारंभ होकर पाली की बाली तहसील तक फैला है।
👉 अतः यह बोली मुख्यतः जालोर जिले में बोली जाती है।

✍️ सही उत्तर है – जालोर 

राजस्थानी भाषा का पहला माने जाने वाला नाटक किसने लिखा था ?  

[Research Assistant 24.08.2017]

  • बालकृष्ण लाहौटी  

  • जमनाप्रसाद पचोरिया  

  • मदनमोहन सिद्ध  

  • शिवचन्द्र भरतिया    

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी साहित्य में नाट्य लेखन की परम्परा आधुनिक काल में विकसित हुई।
👉 इसका प्रारम्भिक श्रेय शिवचन्द्र भरतिया को दिया जाता है।
👉 उन्होंने राजस्थानी भाषा का पहला माना जाने वाला नाटक लिखा।
👉 इस कृति से राजस्थानी नाट्य साहित्य की नींव पड़ी।

✍️ सही उत्तर है – शिवचन्द्र भरतिया 

किसकी बहादुरी के कृत्य 'बीठू मेहा के रावले' में उल्लेखित हैं ? 

[स. सांख्यिकी अधिकारी 27.05.2019]

  • तेजाजी

  • गोगाजी 

  • हड़बूजी 

  • रामदेवजी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान के लोक साहित्य में अनेक वीरों के कृत्य वर्णित हैं।
👉 'बीठू मेहा के रावले' नामक कृति भी इसी परम्परा से जुड़ी है।
👉 इसमें वीर गोगाजी के बहादुरी के कृत्यों का उल्लेख मिलता है।
👉 गोगाजी को लोकमानस में महान वीर और रक्षक के रूप में स्मरण किया जाता है।

✍️ सही उत्तर है – गोगाजी 

 “राजस्थानी” का स्वतंत्र भाषा के रूप में वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत करने वाले प्रथम विद्वान कौन थे ?

[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]

  • टेलर होमस

  • जॉर्ज गिब्सन

  • जॉर्ज सी. एल. शार्वस

  • जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा पर अनेक विद्वानों ने अध्ययन किया।
👉 परन्तु इसे स्वतंत्र भाषा के रूप में वैज्ञानिक विश्लेषण सबसे पहले प्रस्तुत किया गया।
👉 यह कार्य प्रसिद्ध भाषाविज्ञानी जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने किया।
👉 उन्होंने अपनी पुस्तक "लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया" में यह प्रतिपादित किया।

✍️ सही उत्तर है – जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन 

थाली, खैरारी तथा गोरवारी किस प्रधान बोली की उप-बोलियाँ हैं ?  

[अन्वेषण उत्खनन अधिकारी 19.06.2024]

  • ढूंढाड़ी 

  • मेवाड़ी 

  • मारवाड़ी 

  • बागड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की प्रधान बोली मारवाड़ी मानी जाती है।
👉 इसके अंतर्गत कई उपबोलियाँ सम्मिलित हैं।
👉 इनमें थली, खैराड़ी और गोडवाड़ी प्रमुख हैं।
👉 ये सभी उपबोलियाँ मारवाड़ी बोली की शाखाएँ हैं।

✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी 

राजस्थान की कौन-सी बोली में 'मेवाड़ी' एवं 'बागड़ी' का सम्मिश्रण देखने को मिलता है ? [*]

[ACF परीक्षा 2011]

  • खेराड़ी 

  • मेवाती 

  • मालवी 

  • रांगड़ी 

📌 नोट - इस प्रश्न को बोर्ड ने डिलीट (Delete) माना है। 

डूंगरपुर में बोलीजाने वाली बोली कहलाती है : 

[कृषि अधिकारी 2011]

  • मालवी 

  • मेवाड़ी 

  • वागड़ी 

  • वृज 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान के दक्षिणी क्षेत्र को वागड़ क्षेत्र कहा जाता है।
👉 यहाँ के बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में एक विशेष बोली प्रचलित है।
👉 इस बोली को वागड़ी बोली कहा जाता है।
👉 वागड़ी को भीलों की मुख्य बोली माना गया है।

✍️ सही उत्तर है – वागड़ी 

आधुनिक राजस्थान में उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद और भीलवाड़ा के क्षेत्र को _______ बोली का क्षेत्र कहा जा सकता है। 

[Asst. Town Planner 16.06.2023]

  • मालवी 

  • मारवाड़ी

  • मेवाती  

  • मेवाड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की एक प्रमुख बोली मेवाड़ी है।
👉 इसका प्रचलन कई जिलों में देखने को मिलता है।
👉 विशेष रूप से उदयपुर, चित्तौड़गढ़, राजसमंद और भीलवाड़ा इसके मुख्य क्षेत्र हैं।
👉 इसलिए इन जिलों को मेवाड़ी बोली क्षेत्र कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ी 

निम्नलिखित में से कौन सुमेलित नहीं है ? 

[Supt. Garden 28.07.2021]

      बोली                   जिला 

  • गौड़वाड़ी  -  जालौर

  • खैराडी  -  भीलवाड़ा 

  • बागडी  -  बांसवाड़ा 

  • निमाडी  -  नागौर 

🔹 व्याख्या

👉 नीमाड़ी बोली मालवी की प्रमुख उपबोली है।
👉 इसका प्रचलन मुख्यतः झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़ और चित्तौड़गढ़ क्षेत्रों में है। 
👉 यह युग्म सही नहीं है, अतः यह गलत सुमेलित है।

✍️ सही उत्तर है – नीमाड़ी – नागौर 

'डिंगल' और 'पिंगल' क्या है ? 

[ACF परीक्षा 2011]

  • राजस्थान का प्रसिद्ध प्रेमी युगल 

  • राजस्थानी भाषा की शैलियाँ 

  • राजस्थानी भाषा के कवि एवं कवयित्री 

  • राजस्थानी ग्रंथ 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा के दो प्रमुख रूप बताए गए हैं।
👉 इन्हें डिंगल और पिंगल कहा जाता है।
👉 डिंगल का विकास प्राकृत भाषा से हुआ और इसमें वीरगाथाएँ मिलती हैं।
👉 पिंगल का उद्गम संस्कृत भाषा से हुआ और इसमें भक्ति व श्रृंगार प्रधान है।

✍️ सही उत्तर है – राजस्थानी भाषा की शैलियाँ 

राजस्थानी भाषा का प्रथम राजनीतिक समाचार- पत्र निम्नलिखित में से कौन सा था ?  

[स्कूल व्याख्याता (पेपर -I) 17.11.2024]

  • जयभूमि 

  • आगीवाण 

  • जयध्वनी 

  • लोकवाणी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा में कई समाचार पत्र प्रकाशित हुए।
👉 इनमें पहला राजनीतिक समाचार पत्र विशेष महत्व रखता है।
👉 इस प्रथम राजनीतिक समाचार पत्र का नाम 'आगीवाण' था।
👉 इसने जनता को राजनीतिक रूप से जागरूक करने का कार्य किया।

✍️ सही उत्तर है – आगीवाण 

गोड़वाडी बोली का क्षेत्र है-  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (ENG)

  • सिरोही 

  • अलवर 

  • चुरु 

  • बून्दी 

🔹 व्याख्या

👉 गोड़वाड़ी बोली राजस्थानी की एक प्रमुख उपबोली है।
👉 इसका क्षेत्र सिरोही से लेकर पाली जिले की बाली तहसील तक माना जाता है।
👉 इस बोली में कई उप रूप भी मिलते हैं।
👉 इसे मारवाड़ी बोली की उपबोली माना गया है।

✍️ सही उत्तर है – सिरोही 

'रांगड़ी' और 'नीमाड़ी' उप-बोलियाँ हैं -

[उपनिरीक्षक (SI) 15.09.2021]

  • मेवाती की 

  • मालवी की

  • मेवाड़ी की 

  • वागड़ी की

🔹 व्याख्या

👉 मालवी बोली मालवा प्रांत में बोली जाती है।
👉 इस बोली पर गुजराती व मराठी का भी प्रभाव है।
👉 मालवी की प्रमुख उपबोलियाँ कई हैं।
👉 इनमें रांगड़ी और नीमाड़ी भी सम्मिलित हैं।

✍️ सही उत्तर है – मालवी 

निम्नांकित में से कौन सी बोली मारवाड़ी और मालवी का मिश्रण मानी जाती है ? 

[लाइब्रेरियन ग्रेड -II [02.08.2020]

  • मेवाती

  • बागड़ी 

  • अहीरवाटी 

  • रांगड़ी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की एक विशेष बोली है रांगड़ी।
👉 यह बोली दो प्रमुख बोलियों के संयोग से बनी है।
👉 इसमें मारवाड़ी और मालवी दोनों की भाषिक विशेषताएँ मिलती हैं।
👉 इसलिए इसे दोनों का मिश्रण बोली माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – रांगड़ी 

2015 के लिए राजस्थानी भाषा में साहित्य अकादमी पुरस्कार इस साहित्यिक कृति के लिए दिया गया है ?

[स्कूल व्याख्याता 17.07.2016]

  • 'गवाड' 

  • 'जून जात्रा' 

  • आंथ्योई नहीं दिन हाल' 

  • 'सुंदर नैन सुधा 

🔹 व्याख्या

👉 साहित्य अकादमी द्वारा प्रत्येक वर्ष राजस्थानी भाषा में भी पुरस्कार दिया जाता है।
👉 वर्ष 2015 के लिए यह पुरस्कार प्रदान किया गया।
👉 यह सम्मान राजस्थानी की प्रसिद्ध कृति 'गवाड' को मिला।
👉 इस कृति को साहित्यिक योगदान और महत्व के आधार पर चुना गया।

✍️ सही उत्तर है – 'गवाड' 

'मारवाड़ रा परगना री विगत' का लेखक _______ है। 

[ACF 18.02.2021]

  • दयाल दास 

  • मुहणोत नैणसी 

  • पद्मनाभ 

  • चारण शिवदास 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान के इतिहास लेखन में कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथ रचे गए।
👉 इनमें एक प्रमुख कृति है 'मारवाड़ रा परगना री विगत'।
👉 इस ग्रंथ की रचना प्रसिद्ध इतिहासकार मुहणोत नैणसी ने की।
👉 नैणसी की रचनाओं से मारवाड़ का राजनीतिक व सामाजिक इतिहास स्पष्ट होता है।

✍️ सही उत्तर है – मुहणोत नैणसी 

ग्रियर्सन ने किस बोली को 'भीली' बोली भी कहा है ? 

[योगा चिकित्सा अधिकारी 10.03.2021]

  • डिंगल 

  • अहीरवाटी 

  • बागड़ी 

  • हाड़ौती 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा की एक प्रमुख बोली बागड़ी है।
👉 यह मुख्यतः बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सिरोही क्षेत्रों में बोली जाती है।
👉 विद्वान जॉर्ज अब्राहम ग्रियर्सन ने इसे विशेष नाम दिया।
👉 उन्होंने बागड़ी को ही 'भीली' बोली कहा है।

✍️ सही उत्तर है – बागड़ी 

राजस्थान की बोली एवं उनके प्रचलन क्षेत्रों के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से गलत युग्म को पहचानिए 

[PTI Grade -III (RPSC) 2011]

  • हाड़ौती कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड

  • बागड़ी : अजमेर, नागौर, चितौड़गढ़ 

  • ढूंढ़ाडी : जयपुर, दौसा, किशनगढ़, टोंक 

  • मेवाती : अलवर, भरतपुर, करौली, धौलपुर 

🔹 व्याख्या

👉 बागड़ी बोली का संबंध वागड़ क्षेत्र से है।
👉 यह मुख्यतः बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सिरोही जिलों में बोली जाती है।
👉 प्रश्न में दिया गया युग्म "बागड़ी : अजमेर, नागौर, चितौड़गढ़" सही नहीं है।
👉 अतः यह युग्म राजस्थान की बोलियों के क्षेत्रों के संदर्भ में गलत है।

✍️ सही उत्तर है – बागड़ी : अजमेर, नागौर, चितौड़गढ़ 

भील जनजाति द्वारा किए जाने वाले ‘गवरी नृत्य’ के विषय में निम्न में से कौन सा कथन सत्य नहीं है?

[Lecturer (Ayurved) 12.01.2026]

  • यह परंपरागत रूप में फाल्गुन एवं चैत्र माह में किया जाता है।

  • यह एक नाट्य के रूप में किया जाता है।

  • इसे ‘राई’ नृत्य भी कहा जाता है।

  • ‘पूरिया’ इस नृत्य के प्रमुख पात्र है।

🔹 व्याख्या

👉 गवरी नृत्य एक नाट्य रूप में किया जाता है।
👉
इसमें पूरिया पात्र प्रमुख होता है।
👉
यह भाद्रपद माह में किया जाता है।
👉
इसे राई नृत्य नहीं कहा जाता।

✍️ सही उत्तर है – यह परंपरागत रूप में फाल्गुन एवं चैत्र माह में किया जाता है।

रांगडी बोली मिश्रण है 

[PTI GRADE -II & III (RPSC) 2013]

  • मारवाड़ी - ब्रज 

  • मारवाड़ी - हाड़ौती 

  • मारवाड़ी - मालवी

  • ढूंढाड़ी - मारवाड़ी

🔹 व्याख्या

👉 रांगड़ी बोली को मालवा क्षेत्र के राजपूतों की बोली कहा गया है।
👉 यह बोली दो प्रमुख बोलियों के मिश्रण से बनी है।
👉 इसमें मारवाड़ी और मालवी दोनों की विशेषताएँ पाई जाती हैं।
👉 इस कारण रांगड़ी को दोनों का संकर रूप माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी – मालवी 

बीकानेर महाराजा रायसिंह ने 'रायसिंह महोत्सव ग्रन्थ के आरम्भ में राव सीहा से लेकर रायसिंह तक की वंशावली किस भाषा में लेखबद्ध की है ?  

[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]

  • डिंगल 

  • संस्कृत 

  • मारवाड़ी 

  • हिन्दी 

🔹 व्याख्या

👉 बीकानेर के महाराजा रायसिंह ने एक महत्त्वपूर्ण ग्रंथ की रचना करवाई।
👉 इसका नाम 'रायसिंह महोत्सव ग्रंथ' है। 
👉 इस वंशावली को संस्कृत भाषा में लेखबद्ध किया गया है।

✍️ सही उत्तर है – संस्कृत 

निम्नांकित राजस्थानी बोलियों को उनके क्षेत्र से सुमेलित कीजिए

(बोलियाँ)

(क्षेत्र)

(A) खेराडी

(I) दक्षिणी राजस्थानी

(B) निमाड़ी

(II) दक्षिण-पूर्वी राजस्थानी

(C) राजावाटी

(III) पश्चिमी राजस्थानी

(D) सोंडवाड़ी

(IV) मध्य-पूर्वी राजस्थानी

सही उत्तर का चयन कीजिए

[Deputy Commandant 11.01.2026]

  • (A)-(II), (B)-(I), (C)-(III), (D)-(IV)

  • (A)-(IV), (B)-(II), (C)-(I), (D)-(III)

  • (A)-(I), (B)-(IV), (C)-(III), (D)-(II)

  • (A)-(III), (B)-(I), (C)-(IV), (D)-(II)

🔹 व्याख्या

👉 खेराडी बोली का क्षेत्र पश्चिमी राजस्थानी है।
👉
निमाड़ी बोली का क्षेत्र दक्षिणी राजस्थानी है।
👉
राजावाटी बोली का क्षेत्र मध्य-पूर्वी राजस्थानी है।
👉
सोंडवाड़ी बोली का क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी राजस्थानी है।

✍️ सही उत्तर है – (A)-(III), (B)-(I), (C)-(IV), (D)-(II)

निम्न में से कौनसी राजस्थानी भाषा की रचना जयनारायण व्यास द्वारा रचित नहीं है ?  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • मत दूध लजाइजे 

  • पंछीड़ा 

  • रामजी सूं ओलमौ 

  • म्हानै ऐसौ दीजौ राज 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी साहित्य में जयनारायण व्यास का महत्वपूर्ण योगदान है।
👉 उन्होंने कई कृतियाँ लिखीं, जो भाषा और समाज से संबंधित हैं।
👉 प्रश्न में दी गई रचना 'पंछीड़ा' उनकी कृति नहीं है।
👉 अतः यह जयनारायण व्यास द्वारा रचित नहीं मानी जाती।

✍️ सही उत्तर है – पंछीड़ा 

राजस्थानी लिपि को किस रूप में लिखा जाता था ? 

(i) महाजनी 

(ii) कामदारी 

(iii) शास्त्री 

सही विकल्प चुनिये - 

[PTI & Librarian 03.05.2025]

  • (i), (ii) 

  • (i), (iii) 

  • (i), (ii), (iii) 

  • (ii), (iii) 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा को लिखने के लिए विभिन्न प्रकार की लिपियाँ प्रयोग में ली जाती थीं।
👉 इसमें महाजनी लिपि का प्रमुख स्थान था।
👉 साथ ही इसे कामदारी और शास्त्री रूपों में भी लिखा जाता था।
👉 अतः तीनों विकल्प सही सिद्ध होते हैं।

✍️ सही उत्तर है – (i), (ii), (iii) 

राजस्थान की निम्नलिखित बोली में से कौन-सी उसकी उपबोली से सुमेलित है ? 

[ACF परीक्षा 2011]

  • मारवाड़ी : राठी 

  • मालवी : राजावाटी 

  • मेवाती : खैराड़ी 

  • ढूंढाडी : नागरचोल 

🔹 व्याख्या

👉 ढूंढाड़ी बोली जयपुर, टोंक, अजमेर, सवाईमाधोपुर क्षेत्रों में बोली जाती है।
👉 इसकी कई प्रमुख उपबोलियाँ मानी गई हैं।
👉 इनमें नागरचोल का भी उल्लेख मिलता है।
👉 अतः यह युग्म सही रूप से सुमेलित है।

✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़ी : नागरचोल 

मारवाड़ी भाषा का विशुद्ध रूप कहाँ दृष्टिगत होता है -  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)

  • जोधपुर और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में 

  • सिरोही और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में 

  • बीकानेर और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में 

  • उदयपुर एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में 

🔹 व्याख्या

👉 मारवाड़ी बोली पश्चिमी राजस्थान की प्रधान बोली है।
👉 इसमें प्राकृत, संस्कृत और अपभ्रंश के शब्द मिलते हैं।
👉 इसका विशुद्ध रूप केवल कुछ क्षेत्रों में मिलता है।
👉 यह शुद्ध रूप जोधपुर और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में दृष्टिगत होता है।

✍️ सही उत्तर है – जोधपुर और उसके सीमावर्ती क्षेत्रों में 

निम्नलिखित में से कौनसी ढूंढाड़ी की उपबोली नहीं है ?

[उपनिरीक्षक (SI) 07.10.2018]

  • राजावटी 

  • राठी 

  • नागर चोल 

  • तोरावटी 

राजस्थानी भाषा एवं संस्कृति में, डिंगल है 

सहायक आचार्य [22.09.2021]

  • गद्य-गीत 

  • काव्य की शैली 

  • बोली 

  • लिपि 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा की दो प्रमुख शैलियाँ हैं – डिंगल और पिंगल।
👉 डिंगल शैली का उद्भव प्राकृत भाषा से हुआ था।
👉 इसमें वीरगाथाओं और राजपूत इतिहास का वर्णन मिलता है।
👉 इसलिए डिंगल को राजस्थानी भाषा की काव्य शैली माना गया है।

✍️ सही उत्तर है – काव्य की शैली 

पृथ्वीराज राठौड़ द्वारा रचित पुस्तक 'वेलि कृष्ण रुखमणी री' किस भाषा में लिखी गई है

[वरिष्ठ अध्यापक 19.02.2019]

  • पिंगल 

  • संस्कृत 

  • मारवाड़ी 

  • डिंगल 

🔹 व्याख्या

👉 पृथ्वीराज राठौड़ ने अनेक रचनाएँ कीं।
👉 उनकी प्रमुख कृति 'वेलि कृष्ण रुखमणी री' है।
👉 यह कृति उत्तरी मारवाड़ी क्षेत्र में लिखी गई।
👉 मारवाड़ी की साहित्यिक शैली डिंगल कहलाती है।

✍️ सही उत्तर है – डिंगल 

किस भाषा से राजस्थानी का उद्भव हुआ है ? 

सहायक आचार्य [30.05.2019]

  • बंगाली 

  • शौरसेनी अपभ्रंश

  • भोजपुरी 

  • मराठी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति शौरसेनी प्राकृत से मानी जाती है।
👉 इसका विकास क्रम था – वैदिक संस्कृत → पाली → शौरसेनी प्राकृत → गुर्जरी अपभ्रंश → राजस्थानी।
👉 अनेक विद्वानों ने भी राजस्थानी का उद्भव शौरसेनी अपभ्रंश से बताया है।
👉 जैन रचनाओं में भी इसी काल में राजस्थानी का प्रारंभिक रूप मिलता है।

✍️ सही उत्तर है – शौरसेनी अपभ्रंश 

निम्न में से किसकी सलाह पर दयानन्द सरस्वती ने हिन्दी भाषा में अपने विचारों के प्रचार का निर्णय किया था ? 

[स्कूल व्याख्याता 15.11.2022]

  • बंकिम चन्द्र 

  • भारतेन्दु हरिश्चन्द्र 

  • महादेव गोविन्द रानाडे 

  • केशव चन्द्र सेन 

🔹 व्याख्या

👉 स्वामी दयानन्द सरस्वती ने अपने विचारों के प्रचार हेतु भाषा का चयन किया।
👉 इस निर्णय में उन्हें सलाह दी गई थी।
👉 यह सलाह केशवचन्द्र सेन द्वारा दी गई थी।
👉 इसके बाद दयानन्द ने अपने विचारों का प्रचार हिन्दी भाषा में करना आरम्भ किया।

✍️ सही उत्तर है – केशव चन्द्र सेन 

'धरती धोरां री' रचना है - 

[Supt. Garden 28.07.2021]

  • मेघराज मुकुल की 

  • सत्यप्रकाश जोशी की

  • रेवतदान चरण की

  • कन्हैयालाल सेठिया की

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी साहित्य में अनेक कवियों ने भूमि और संस्कृति का चित्रण किया।
👉 इनमें सुप्रसिद्ध कवि कन्हैयालाल सेठिया का नाम प्रमुख है।
👉 उनकी रचना 'धरती धोरां री' राजस्थानी अस्मिता की पहचान है।
👉 इस कृति में राजस्थान की रेतीली धरती और वीरता का चित्रण है।

✍️ सही उत्तर है – कन्हैयालाल सेठिया 

गलत युग्म पहचानिये : 

[AEN Pre. 2013]

  • बारां : हाडौती 

  • टोंक : ढूंढाड़ी 

  • करौली : मेवाती 

  • पाली : बागडी 

🔹 व्याख्या

👉 बागड़ी बोली वागड़ क्षेत्र की प्रमुख बोली है।
👉 यह मुख्यतः बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सिरोही जिलों में बोली जाती है।
👉 प्रश्न में इसे पाली जिले से जोड़ा गया है।
👉 यह युग्म सही नहीं है, क्योंकि पाली क्षेत्र में मारवाड़ी बोली बोली जाती है।

✍️ सही उत्तर है – पाली : बागड़ी 

निम्न में से किसके लिए राजस्थानी भाषा में आड़ी, हीयाली शब्द प्रचलित हैं ?  

[RAS Pre परीक्षा 02.02.2025]

  • मुहावरे 

  • लोकोक्ति 

  • पहेलियाँ 

  • फड़ 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा में अनेक लोक साहित्यिक रूप प्रचलित हैं।
👉 इनमें पहेलियों के लिए विशेष शब्दावली प्रयोग की जाती है।
👉 राजस्थानी में पहेलियों को आड़ी और हीयाली कहा जाता है।
👉 यह लोकजीवन की बुद्धि और मनोरंजन परंपरा को दर्शाती है।

✍️ सही उत्तर है – पहेलियाँ 

राजस्थानी भाषा के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए -

(अ) मध्यकालीन राजस्थानी भाषा में "गीत" और "दूहा" प्रमुख छंद थे। 

(ब) इस समय पिंगल भाषा का प्रचलन हुआ, जिस पर ब्रज भाषा का प्रभाव था। 

नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए - 

[PTI & Librarian 03.05.2025]

  • केवल (ब) सही है। 

  • केवल (अ) सही है। 

  • (अ) एवं (ब) दोनों सही नहीं हैं 

  • (अ) एवं (ब) दोनों सही हैं। 

🔹 व्याख्या 

👉 मध्यकालीन राजस्थानी भाषा में गीत और दूहा प्रमुख छंदों के रूप में प्रयुक्त होते थे।
👉 इसी काल में पिंगल भाषा का भी प्रचलन हुआ।
👉 पिंगल पर ब्रज भाषा का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
👉 इसलिए दिए गए दोनों कथन सही सिद्ध होते हैं।

✍️ सही उत्तर है – (अ) एवं (ब) दोनों सही हैं

'खेराड़ी' बोली जिस क्षेत्र में प्रचलित है : 

[सहायक कृषि अधिकारी 2011]

  • टोंक - भीलवाड़ा 

  • उदयपुर - चितौड़ 

  • भरतपुर- धोलपुर 

  • डूंगरपुर-बांसवाड़ा 

🔹 व्याख्या

👉 खेराड़ी बोली ढूंढाड़ी, मेवाड़ी और हाड़ौती के मिश्रण से बनी है।
👉 यह बोली राजस्थान के कुछ विशेष क्षेत्रों में प्रचलित है।
👉 इसका प्रयोग मुख्यतः टोंक और भीलवाड़ा के इलाकों में होता है।
👉 मालपुरा (टोंक) क्षेत्र में इसे मालखेराड़ी कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – टोंक – भीलवाड़ा 

ढूंढाड़ी बोली के प्रचलित विविध रूपों में निम्न में से कौन सा सही नहीं है ? 

[सहायक कृषि अधिकारी 31.05.2019]

  • नागरचोल 

  • खेराड़ी 

  • तोरावाटी 

  • चौरासी 

🔹 व्याख्या

👉 ढूंढाड़ी बोली जयपुर, टोंक, अजमेर, सवाईमाधोपुर आदि जिलों में बोली जाती है।
👉 इसकी प्रमुख उपबोलियाँ हैं – चौरासी, नागरचोल, काठेड़ी, राजावटी, तोरावटी, हाड़ौती, किशनगढ़ी, अजमेरी आदि।
👉 प्रश्न में दिया गया "खेराड़ी" ढूंढाड़ी बोली का रूप नहीं है।
👉 यह अन्य बोलियों से संबंधित है।

✍️ सही उत्तर है – खेराड़ी 

निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए : 

     बोली              जिला

(A) बागड़ी      (i)हनुमानगढ़

(B) जगरौती    (ii) उदयपुर 

(C) धावडी      (iii) करौली

(D) गौड़वाड़ी  (iv) सिरोही 

सहायक आचार्य [22.09.2021]

कूट - 

            (A)  (B)  (C)  (D)

  • (i)   (iii)   (ii)   (iv)

  • (i)   (iii)   (iv)   (ii) 

  • (i)   (ii)   (iii)   (iv) 

  • (iii)   (ii)   (i)   (iv) 

🔹 व्याख्या

👉 बागड़ी बोली मुख्यतः हनुमानगढ़ सहित बांसवाड़ा, डूंगरपुर क्षेत्रों में बोली जाती है।
👉 जगरौती बोली का क्षेत्र करौली माना गया है।
👉 धावड़ी बोली मुख्यतः उदयपुर और सलूम्बर में बोली जाती है।
👉 गौड़वाड़ी बोली सिरोही क्षेत्र की उपबोली है, जिसे सिरोही बोली भी कहते हैं।

✍️ सही उत्तर है – (A)-(i), (B)-(iii), (C)-(ii), (D)-(iv) 

बीकानेरी, बागड़ी, शेखावाटी, मेवाड़ी, खैराडी, गोडवाडी, नागौरी, देवड़ावाड़ी आदि उपबोलियाँ हैं - 

[पुरालेखपाल परीक्षा 03.08.2024]

  • मेवाड़ी की 

  • मेवाती की 

  • मारवाड़ी की 

  • ढूंढाड़ी की 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की सबसे बड़ी बोली मारवाड़ी है।
👉 इसके अंतर्गत अनेक उपबोलियाँ सम्मिलित हैं।
👉 इनमें बीकानेरी, बागड़ी, शेखावाटी, मेवाड़ी, खैराड़ी, गोडवाड़ी, नागौरी और देवड़ावाड़ी प्रमुख हैं।
👉 ये सभी उपबोलियाँ मिलकर मारवाड़ी बोली की विशेष पहचान बनाती हैं।

✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी की 

हाड़ा राजपूतों द्वारा शासित क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली को _____________ बोली कहा जाता है। 

[EO RO (Shift II) 14.05.2023]

  • मेवाती 

  • भीली 

  • वागड़ी

  • हाड़ौती 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में प्रत्येक अंचल की अपनी विशिष्ट बोली रही है।
👉 हाड़ा राजपूतों का शासन कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां क्षेत्र में था।
👉 इस क्षेत्र की पहचान एक अलग भाषाई रूप से होती है।
👉 यहाँ बोली जाने वाली भाषा को हाड़ौती बोली कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – हाड़ौती 

निम्न को सुमेलित कीजिए :

ग्रंथ

लेखक

A. अजीत विलास

i. जोगीदास

B. निबंधाबंध

ii. केशवदास

C. वरसलपुर गढ़विजय

iii. गाडण पसाइत

D. विवेक बार निसानी

iv. धधवाडियो चूंडो

S.I. Telecom (Paper-II) 09.11.2025

कूट : A B C D

  • iv ii iii i

  • iii iv i ii

  • ii iii iv i

  • i iv ii iii

🔹 व्याख्या

👉 A. अजीव विलास → iii. गाड़ण प्रसाद
यह ग्रंथ गाड़ण प्रसाद द्वारा रचित माना जाता है, इसलिए इसका सुमेल iii सही है।

👉 B. निषेधबंध → iv. धधवाडियो झूंझा
निषेधबंध ग्रंथ का संबन्ध धधवाडियो झूंझा से माना जाता है, अतः इसके लिए iv उपयुक्त है।

👉 C. वसन्तपुर गढ़विजय → i. जोगीदास
इस ग्रंथ के रचयिता जोगीदास हैं, अतः इसका सुमेल i सही है।

👉 D. विवेक बार निशानी → ii. केसवदास
यह ग्रंथ केसवदास से संबंधित है, इसलिए ii उपयुक्त सुमेल है।

✍️ सही उत्तर है – iii iv i ii

राजस्थानी भाषा का निम्न में से कौनसा ग्रंथ गद्य एवं पद्य दोनों में लिखा गया ? 

[PTI & Librarian 03.05.2025]

  • हरिकेलि 

  • अचलदास खीची री वचनिका 

  • वेलि क्रिसन रुकमणी री 

  • कान्हड़दे प्रबंध 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी भाषा में अनेक ग्रंथ रचे गए।
👉 इनमें से कुछ ग्रंथ केवल पद्य में तथा कुछ केवल गद्य में थे।
👉 परंतु 'अचलदास खीची री वचनिका' एक ऐसा ग्रंथ है, जो दोनों रूपों में उपलब्ध है।
👉 इसमें गद्य और पद्य का मिश्रित स्वरूप मिलता है।

✍️ सही उत्तर है – अचलदास खीची री वचनिका 

राजस्थान के पूर्व मध्यकालीन राज्यों में "नैमित्तिक" पदनाम का प्रयोग किया जाता था

[RAS Pre. 05.08.2018]

  • राजकीय ज्योतिष के लिए। 

  • लोक स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख के लिए। 

  • राजकीय कवि के लिए। 

  • मुख्य न्यायिक अधिकारी के लिए।

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान के पूर्व मध्यकालीन राज्यों में अनेक प्रकार के पदनाम प्रचलित थे।
👉 इनमें "नैमित्तिक" पद का प्रयोग विशेष रूप से किया जाता था।
👉 यह पद राजकीय ज्योतिष के लिए प्रयुक्त होता था।
👉 अर्थात राज्य में ज्योतिषीय कार्यों हेतु नैमित्तिक अधिकारी नियुक्त किए जाते थे।

✍️ सही उत्तर है – राजकीय ज्योतिष के लिए। 

'अर्ली चौहान डायनेस्टीज़' पुस्तक के लेखक हैं - 

[स्कूल व्याख्याता 11.10.2022]

  • दशरथ शर्मा 

  • के. एस. गुप्ता 

  • जी. एच. ओझा 

  • जी. एन. शर्मा 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी इतिहास पर अनेक विद्वानों ने महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे।
👉 इनमें से एक प्रसिद्ध पुस्तक है 'अर्ली चौहान डायनेस्टीज़'।
👉 इस ग्रंथ के लेखक इतिहासकार दशरथ शर्मा हैं।
👉 उन्होंने चौहान वंश के प्रारंभिक इतिहास को इसमें प्रस्तुत किया।

✍️ सही उत्तर है – दशरथ शर्मा 

'कुवलयमाला कहा' ग्रंथ में उल्लिखित क्षेत्रीय भाषाओं की संख्या है 

[ATO परीक्षा 27.07.2021] 

  • 20 

  • 18 

  • 15 

  • 16 

🔹 व्याख्या

👉 विक्रम संवत् 835 में उद्योतन सूरि ने 'कुवलयमाला' ग्रंथ की रचना की।
👉 यह ग्रंथ जालौर नगर में रचा गया था।
👉 इसमें अनेक देशी भाषाओं का उल्लेख किया गया है।
👉 कुल मिलाकर इसमें 18 क्षेत्रीय भाषाओं के नाम आए हैं।

✍️ सही उत्तर है – 18 

राजपूताने में प्रचलित प्राचीन लिपि का क्या नाम था ?  

[सहायक पुरालेखपाल 03.08.2024]

  • नागरी 

  • कुटिल 

  • ब्राह्मी 

  • प्राकृत 

🔹 व्याख्या

👉 राजपूताने में प्राचीन समय में अनेक लिपियाँ प्रचलित थीं।
👉 उनमें सबसे प्रमुख और प्राचीन लिपि ब्राह्मी लिपि मानी जाती है।
👉 शिलालेखों और अभिलेखों में इसका प्रयोग हुआ है। 

✍️ सही उत्तर है – ब्राह्मी 

'रांगड़ी' बोली किस भाषा की उप-बोली है ?  

[Technical Assistant 07.07.2025]

  • अहीरवाटी 

  • ढूँढाड़ी 

  • मालवी 

  • हाड़ौती 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की एक प्रमुख बोली मालवी है।
👉 इस बोली की कई उपबोलियाँ मानी गई हैं।
👉 इनमें से एक उपबोली रांगड़ी है।
👉 रांगड़ी को मारवाड़ी और मालवी के मिश्रण से उत्पन्न माना गया है।

✍️ सही उत्तर है – मालवी 

'बेलि क्रिसण रूक्मणि' किस भाषा का ग्रंथ है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 2011]

  • पूर्वी मारवाड़ी

  • उत्तरी मारवाड़ी 

  • उत्तर-पूर्वी मारवाड़ी 

  • दक्षिणी मारवाडी 

🔹 व्याख्या

👉 'बेलि क्रिसण रूक्मणि' एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
👉 इसका लेखन कार्य उत्तरी मारवाड़ी क्षेत्र में हुआ।
👉 मारवाड़ी बोली राजस्थानी की प्रमुख और प्रधान बोली मानी जाती है।
👉 इस ग्रंथ में उत्तरी मारवाड़ी की भाषिक विशेषताएँ मिलती हैं।

✍️ सही उत्तर है – उत्तरी मारवाड़ी 

राजस्थानी भाषा में मुड़िया लिपि को और किस नाम से जाना जाता है ? 

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • ब्रज 

  • महाजनी 

  • मारवाड़ी 

  • देवनागरी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान की मातृभाषा राजस्थानी है।
👉 इसकी लिपि को महाजनी / बनियाणवी कहा जाता है।
👉 इसी लिपि को मुड़िया लिपि नाम से भी जाना जाता है।
👉 यह राजस्थानी भाषा की एक प्रमुख लिपि पहचान है।

✍️ सही उत्तर है – महाजनी 

'स्वतन्त्र बावनी' रचना है : 

  • तेज कवि की 

  • फागू महाराज की 

  • मनीराम व्यास की

  • तुलसीदास की 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थानी साहित्य में बावनी कृतियाँ विशेष प्रसिद्ध रही हैं।
👉 इनमें एक महत्वपूर्ण कृति है 'स्वतन्त्र बावनी'।
👉 इस कृति की रचना सुप्रसिद्ध कवि तेज कवि ने की थी।
👉 इसमें स्वतंत्रता और वीरता की भावना का चित्रण है।

✍️ सही उत्तर है – तेज कवि