वाद्य यंत्र टामक राजस्थान के किस सांस्कृतिक क्षेत्र से सम्बंधित है ?
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 टामक (दमामा) एक अवनद्ध वाद्य है, जिसे रणभूमि का वाद्य भी कहा जाता है।
👉 इसका वादन मेवात क्षेत्र में जोगी समुदाय द्वारा पौराणिक आख्यानों व लोक गाथाओं के गायन में किया जाता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 टामक को दमामा भी कहा जाता है।
👉 यह मुख्यतः युद्ध घोषणा और लोक संगीत के साथ बजाया जाता है।
वाद्य यंत्र 'टामक' का सम्बंध ____क्षेत्र से है ।
[PTI ग्रेड -III 30.09.2018]
👉 टामक (दमामा) एक अवनद्ध वाद्य है, जिसे रणभूमि के वाद्य के रूप में जाना जाता है।
👉 इसका उपयोग मुख्य रूप से मेवात क्षेत्र में जोगियों द्वारा पौराणिक आख्यानों व लोक गाथाओं के गायन में किया जाता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 अवनद्ध वाद्य में इसे डंडे से बजाया जाता है तथा इसका स्वर गूंजता हुआ होता है।
लोक वाद्य यंत्र 'भपंग' राजस्थान के किस क्षेत्र से सम्बंधित है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 26.03.2019]
👉 भपंग - मेवात क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक वाद्य यंत्र है।
👉 यह कटे हुए तुम्बे पर चमड़ा मढ़कर तैयार किया जाता है।
👉 बजाने की विधि में एक हाथ से तार खींचा या ढीला छोड़ा जाता है, दूसरे हाथ से लकड़ी के टुकड़े से प्रहार किया जाता है।
👉 जहर खाँ इस वाद्य के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हैं।
राजस्थान के पं. शिवकुमार शर्मा का संबंध किस वाद्ययंत्र से है ?
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड -II 11.09.2022]
👉 पं. शिवकुमार शर्मा — प्रसिद्ध संतूर वादक;
👉 संतूर — तत् वाद्य यंत्र; भारतीय नाम शततंत्री वीणा (सौ तारों वाली वीणा);
👉 मूलतः कश्मीर का वाद्य; लकड़ी का चतुर्भुजाकार बक्सानुमा यंत्र; कुल 60 तार होते हैं;
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 प्रसिद्ध संतूर वादक — पं. शिवकुमार शर्मा, निखिल बनर्जी, सज्जाद हुसैन।
'नड़' वाद्य यंत्र राजस्थान के किस क्षेत्र में अधिकांशतः प्रयुक्त होता है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (मैकेनिक) 23.12.2019]
👉 नड़ एक सुषिर वाद्य यंत्र है, जो मुख्यतः जैसलमेर क्षेत्र में प्रयोग होता है।
👉 यह ढाई फीट लम्बा होता है और कैर/कगौर की लकड़ी से बनाया जाता है।
👉 चरवाहे और भोपे इस वाद्य का प्रमुखता से प्रयोग करते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 प्रसिद्ध नड़ वादक करणा राम भील थे, जिनका योगदान उल्लेखनीय रहा है।
राजस्थानी लोक संगीत वाद्ययंत्र "रावणहत्था” वाद्ययंत्रों की निम्नलिखित में से किस श्रेणी के अंतर्गत आता है ?
[Platoon Commander 22.11.2025]
🔹 व्याख्या
👉
रावणहत्था
एक पारंपरिक
राजस्थानी
लोक वाद्ययंत्र
है।
👉
इसे
धनुष (बो)
से
बजाया जाता
है और इसमें
तार लगे होते
हैं।
👉
तार
वाले वाद्ययंत्र
तत्त
श्रेणी
में आते हैं।
✍️ सही उत्तर है – तत्त
सुम्मेलित कीजिए :
(a) इकतारा (1) घन वाध
(b) अलगोज़ा (2) तत् वाद्य
(c) झांझ (3) सुषिर वाद्य
(d) मादल (4) अवनद्ध वाद्य
[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 26.03.2019]
कूट -
(a) (b) (c) (d)
👉 इकतारा - तत् वाद्य होता है।
👉 अलगोज़ा - सुषिर वाद्य के अंतर्गत आता है।
👉 झांझ - घन वाद्य है।
👉 मादल - अवनद्ध वाद्य है।
👉 इस प्रकार सही क्रम है — (2), (3), (1), (4)।
|
अवनद्ध वाद्य |
तत् वाद्य |
घन वाद्य |
सुषिर वाद्य |
|
तबला,अंक्य, अलिंग्या,ऊर्ध्वाका,खंजरी, चंग, डफ, डैरू, धौसा, तासा, कुंडी, मांदल, ढोल, डमरू, गडगड़ाटी,ढोलक,ढ़ाक, कमर, मृदंग, पखावज, नौबत, नगाड़ा, माठ, दमामा. (टामरू), माटा |
जन्तर, इकतारा, रावणहत्था, सारंगी, चिकारा, दो तारा, भपंग, अपंग, कमठ, भीलों की कौड़ी, पावरा, कामायचा, दुकाका, केनरा, बोली, सुरमण्डल, चौतारा, सुरिन्दा, रबाज/रवाज, रबाब, तन्दूरा, निशान, गूजरी। |
मंजीरा, झांझ, थाली, रमझौल, करताल, खड़ताल, झालर, श्रीमण्डल, घंटा, ताल, घुरालियां, भरनी, घुँघरू, घड़ा, कागरच्छ. तासली, चीपिया, टाली,वीरघंआ, चीपिया, टाली,टोकरियों, लेजिम (गरासिया),डंडिया, हांकल |
अलगोजा, पूंगी, शहना सतारा, बांसुरी या बंसी, मशक, नड़, मोरचंग, सुरनई, तुरड़ी,मुरला/ मुरली, बाकिया, तरपी, कानी, करणा, सींगा, सींगो, भूगल, रणभेरी, शंख, बरगू, नागफनी, पेली, टोये. हरनाई। |
भपंग किस श्रेणी के वाद्य यंत्रों में आता है ?
[JEN विद्युत डिप्लोमा 08.02.2025]
👉 भपंग एक दुर्लभ एकतार वाद्य यंत्र है, जिसे टॉमिंग ड्रम के रूप में जाना जाता है।
👉 यह अलवर जिले में स्थित मेवाती समुदाय से उत्पन्न होता है।
👉 इसका आकार लम्बी आलू की ट्यूब जैसा होता है, जिसकी लम्बाई डेढ़ बालिश्त और चौड़ाई एक अंगुल होती है।
👉 इसमें चार बालिश्त लम्बी लकड़ी लगी होती है जो तीन अंगुल चौड़े तुबके में जुड़ी रहती है।
👉 यह वाद्य यंत्र तालबद्ध स्वर उत्पन्न करता है और मेवाती लोकसंगीत की विशिष्ट पहचान है।
✍️ सही उत्तर है – तत्
पाबूजी के फड़ गाते समय, जिस वाद्य यंत्र का प्रयोग किया जाता है, वह ______ कहलाता है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (2nd Phase) 01.12.2024]
👉 रावणहत्था — तत् वाद्य; भोपों का प्रमुख वाद्य; पाबूजी की फड़ गाते समय प्रयोग होता है।
👉 नारियल की कटोरी पर खाल मढ़कर बनाई जाती है; डांड बाँस की होती है; 9 तार बाँधे जाते हैं।
👉 गज (घोड़े की पूँछ के बालों से निर्मित) द्वारा बजाया जाता है; घुंघरू की ध्वनि उत्पन्न होती है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 पाबूजी की फड़ वाचन में विशेष रूप से रावणहत्था का उपयोग होता है; यह लोक गाथाओं के गायन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नड़ क्या है ?
[CET (10+2 तृतीय चरण) 05.02.2023]
👉 नड़ — एक लम्बी बांसुरी; सुषिर वाद्य यंत्र; लगभग ढाई फीट लंबा; कैर/कगौर की लकड़ी से निर्मित; इसमें 4-6 छेद होते हैं
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 पश्चिमी राजस्थान के चरवाहों व भोपों में लोकप्रिय; प्रसिद्ध वादक — करणा राम भील; राजस्थान सरकार द्वारा 30 बीघा जमीन दी गई थी, बाद में उनकी हत्या कर दी गई।
'कनफटे जोगी डमरू एवं सारंगी वाद्य यन्त्रों के साथ किस देवी के गीत गाते हैं?
[CET (स्नातक) (चरण -III) 08.01.2023]
👉 जीण माता — इनसे जुड़े वाद्य यंत्र हैं डमरू व सारंगी। जीण माता के गीत लोकगीत को सबसे लंबा माना जाता है जिसे स्थानीय भाषा में "चिरजा" कहा जाता है नाथ संप्रदाय की कन फटे जोगी गायन के दौरान सारंगी और डमरू का प्रयोग करते हैं जीण माता का मंदिर रेवासा सीकर में स्थित है यह चौहान वंश की आराध्य देवी मानी जाती है, नागणेची माता का मंदिर नगाणा है यह मारवाड़ के राठौर राजवंश की कुलदेवी है
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 अन्य देवताओं से संबंधित वाद्य — कैला देवी → नगाड़ा, पाबूजी की फड़ → रावण हत्था, देवनारायण की फड़ → जंतर।
कौनसा सुषिर वाद्य यंत्र नहीं है ?
[JEN (Civil डिप्लोमा) 16.10.2016]
👉 सुरमंडल एक तत् वाद्य है, जो पश्चिमी राजस्थान (मुख्यतः जैसलमेर क्षेत्र) में मांगणियार जाति द्वारा प्रयोग होता है।
👉 इसकी लंबाई लगभग दो से ढाई फुट होती है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 सुषिर वाद्य में अलगोजा, सतारा, मोरचंग आते हैं।
👉 सुरमंडल तारों से ध्वनि उत्पन्न करने वाला तत् वाद्य है।
वाद्य यंत्र ‘खड़ताल’ सामान्यतः निम्नलिखित में से किस सामग्री से बनाया जाता है? (नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चुनाव करें)
[4th Grade 5th Phase) 21.09.2025]
👉 खड़ताल एक पारंपरिक भारतीय ताल वाद्य यंत्र है, जो सामान्यतः लकड़ी से निर्मित होता है।
👉 इसमें दो लकड़ी की पट्टियाँ होती हैं, जिन्हें आपस में टकराकर ताल उत्पन्न की जाती है।
👉 इसका नाम संस्कृत के शब्दों ‘कारा’ (हाथ) और ‘ताल’ (ताली) से मिलकर बना है।
👉 वादक प्रत्येक हाथ में एक-एक पट्टी रखकर इन्हें लयबद्ध रूप से बजाता है।
👉 इसमें ‘नर’ खड़ताल मोटी तथा ‘मादा’ खड़ताल पतली होती है, जिससे विभिन्न ताल ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं।
✍️ सही उत्तर है – लकड़ी
अधोलिखित में से (वाद्य यंत्र का प्रकार - वाद्य यंत्र) असंगत युग्म है
[हाउस कीपर परीक्षा 09.07.2022]
👉 अवनद्ध वाद्य - जन्तर — यह असंगत युग्म है, क्योंकि जन्तर एक तत् वाद्य है, ना कि अवनद्ध वाद्य।
👉 अवनद्ध वाद्य में चमड़े मढ़े वाद्य आते हैं — जैसे ढोल, तबला, मृदंग, डमरू, पखावज आदि।
📝 अतिरिक्त जानकारी
|
अवनद्ध वाद्य |
तत् वाद्य |
घन वाद्य |
सुषिर वाद्य |
|
तबला,अंक्य, अलिंग्या,ऊर्ध्वाका,खंजरी, चंग, डफ, डैरू, धौसा, तासा, कुंडी, मांदल, ढोल, डमरू, गडगड़ाटी,ढोलक,ढ़ाक, कमर, मृदंग, पखावज, नौबत, नगाड़ा, माठ, दमामा. (टामरू), माटा |
जन्तर, इकतारा, रावणहत्था, सारंगी, चिकारा, दो तारा, भपंग, अपंग, कमठ, भीलों की कौड़ी, पावरा, कामायचा, दुकाका, केनरा, बोली, सुरमण्डल, चौतारा, सुरिन्दा, रबाज/रवाज, रबाब, तन्दूरा, निशान, गूजरी। |
मंजीरा, झांझ, थाली, रमझौल, करताल, खड़ताल, झालर, श्रीमण्डल, घंटा, ताल, घुरालियां, भरनी, घुँघरू, घड़ा, कागरच्छ. तासली, चीपिया, टाली,वीरघंआ, चीपिया, टाली,टोकरियों, लेजिम (गरासिया),डंडिया, हांकल |
अलगोजा, पूंगी, शहना सतारा, बांसुरी या बंसी, मशक, नड़, मोरचंग, सुरनई, तुरड़ी,मुरला/ मुरली, बाकिया, तरपी, कानी, करणा, सींगा, सींगो, भूगल, रणभेरी, शंख, बरगू, नागफनी, पेली, टोये. हरनाई। |
निम्नलिखित में से कौनसा युग्म (वाद्ययंत्र-प्रकार) सुमेलित नहीं है ?
[फायरमैन परीक्षा 29.01.2022]
👉 नड़ - घन — यह सुमेलित नहीं है, क्योंकि नड़ एक सुषिर वाद्य है, ना कि घन।
👉 शेष युग्म —
भपंग - तत्,
सिंगी - सुषिर,
ताशा - अवनद्ध — ये सभी सही सुमेलित हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 नड़ — सुषिर वाद्य;
👉 करीब ढाई फीट लंबा; कैर/कगौर की लकड़ी से बना;
👉 चरवाहों व भोपों में लोकप्रिय।
निम्नलिखित में से कौन सा मिलान सही नहीं है?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कार्यशाला) 10.09.2022]
👉 रवि शंकर – नड़ वादक — यह सही मिलान नहीं है;
👉 पं. रवि शंकर विश्वविख्यात सितार वादक थे।
👉 नड़ वादक — करणा राम भील प्रसिद्ध कलाकार थे।
👉 शेष मिलान —
रजब अली खान → वीणा वादक,
आमिर खान → सितार वादक,
अल्लाह जिलाई बाई → मांड गायिका
👉 नड़ — सुषिर वाद्य; लगभग ढाई फीट लंबा; कैर/कगौर की लकड़ी से बना;
👉 पश्चिमी राजस्थान में चरवाहों व भोपों द्वारा बजाया जाता है;
👉 प्रसिद्ध वादक — करणा राम भील (जैसलमेर)।
निम्नलिखित में से कौन सा घन लोक वाद्य यन्त्र नहीं है ?
JEN (सिविल डिप्लोमाधारक) 18.05.2022
👉 बांकिया — एक सुषिर वाद्य है, इसीलिए यह घन वाद्य नहीं है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 यह पीतल का बना, वक्राकार वाद्ययंत्र है;
👉 मांगलिक अवसरों व त्योहारों में, विशेषकर मंदिरों में ढोल के साथ बजाया जाता है;
👉 सरगरा जाति के लोग इसे बजाते हैं।
👉 सही उत्तर — बांकिया (सुषिर वाद्य)।
निम्नलिखित में से राजस्थान का कौनसा लोकवाद्य तत् वाद्य हैं ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (विष) 14.09.2019]
👉 जन्तर एक तत् वाद्य है, जो वीणा के समान संरचना वाला होता है।
👉 तत् वाद्य में जन्तर, इकतारा, रावणहत्था, सारंगी, चिकारा, दो तारा, भपंग, सुरमण्डल आदि शामिल हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 जन्तर का वादन देवनारायण जी की फड़ वाचन के समय गूजर भोपों द्वारा किया जाता है।
👉 इसे खड़े होकर गले में लटकाकर बजाते हैं।
वाद्य यंत्र, जो कच्छी घोड़ी नृत्य में बजाया जाता है-
[VDO Pre. (प्रथम चरण) 27.12.2021]
👉 झांझ — कच्छी घोड़ी नृत्य में बजाया जाने वाला प्रमुख घन वाद्य है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 यह नृत्य शेखावाटी क्षेत्र व कुचामन, परबतसर, डीडवाना आदि में विवाह अवसर पर होता है;
👉 नर्तक बाँस की बनी घोड़ी कमर में बाँधकर, तलवार लेकर नकली युद्ध प्रस्तुत करते हैं।
👉 इस नृत्य में झांझ, ढोल, बाँकिया, थाली का प्रयोग होता है।
👉 सही उत्तर — झांझ (घन वाद्य)।
'रावणहत्था' किस प्रकार का वाद्य यन्त्र है?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 18.09.2021]
👉 रावणहत्था एक तत् वाद्य यंत्र है।
👉 यह भोपों का प्रमुख वाद्य है।
👉 इसमें नारियल की कटोरी पर खाल मढ़ी होती है, बाँस की डांड में ९ तार लगे होते हैं।
👉 इसे वायलिन की तरह गज से बजाया जाता है, गज में घोड़े की पूँछ के बाल होते हैं व अंतिम सिरे पर घुंघरू बंधे रहते हैं।
👉 पाबूजी की फड़ के वाचन में इसका प्रयोग होता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 रावणहत्था की ध्वनि में अद्भुत भावप्रधानता होती है।
👉 भोपे समुदाय इसे धार्मिक आयोजनों में प्रमुखता से बजाते हैं।
👉 लोकगीतों व कथाओं के साथ इसका संगीतात्मक योगदान रहता है।
उस प्रसिद्ध संगीतकार का नाम बताइए, जिन्हें प्रतिष्ठित ग्रैमी पुरस्कार सम्मानित किया गया था और जिन्होंने मोहन वीणा का आविष्कार भी किया से था।
[4th Grade (2nd Phase) 19.09.2025]
👉 पंडित विश्व मोहन भट्ट भारत के प्रसिद्ध संगीतकार और वादक हैं।
👉 उन्हें अपने एल्बम ‘A Meeting by the River’ के लिए ग्रैमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था।
👉 यह एल्बम उनके सहयोगी राय कूडर के साथ बनाया गया था।
👉 उन्होंने मोहन वीणा नामक एक संशोधित स्लाइड गिटार का आविष्कार किया।
👉 उनकी रचनाएँ भारतीय संगीत की गहराई और नवाचार का अद्भुत उदाहरण हैं।
✍️ सही उत्तर है – पंडित विश्व मोहन भट्ट
निम्नलिखित में से कौन-सा वाद्ययंत्र, “सुषिर” वाद्ययंत्र के वर्गीकरण के अंतर्गत आता है ?
[4th Grade (2nd Phase) 19.09.2025]
👉 अल्गोजा राजस्थान का प्रसिद्ध सुषिर वाद्य यंत्र है, जो फूँक या हवा से बजाया जाता है।
👉 यह एक द्वि-बाँसुरी वाद्य है, जिसमें एक बड़ी (नर) और एक छोटी (मादी) बाँसुरी होती है।
👉 इसे एक साथ बजाकर सुर और लय का सुंदर संयोजन बनाया जाता है।
👉 यह वाद्य मुख्यतः अलवर क्षेत्र के मेयो समुदाय द्वारा बजाया जाता है।
👉 सुषिर वाद्ययंत्रों के अन्य उदाहरणों में शहनाई, नागफणी और मोरचंग भी शामिल हैं।
✍️ सही उत्तर है – अल्गोजा
अलवर-भरतपुर के जोगियों द्वारा किस प्रकार की सारंगी बजाई जाती है ?
[पटवार (द्वितीय चरण) 23.10.2021]
👉 जोगिया सारंगी — अलवर-भरतपुर के जोगी समुदाय द्वारा बजाई जाती है।
👉 यह आम की लकड़ी से बनी होती है, जिसमें लंबी गूंजयमान यंत्र, फिंगरबोर्ड व चौकोर खूंटी का डिब्बा होता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 इसे घुमंतू संत धार्मिक व आध्यात्मिक गीतों के समय बजाते हैं।
👉 चाप पर लगी घंटियाँ इसमें लयबद्ध साज प्रदान करती हैं।
👉 जरी की सारंगी — गुजरात में प्रचलित।
👉 सिंधी सारंगी — पश्चिमी राजस्थान में लंगा समुदाय द्वारा प्रयोग होती है।
राजस्थान के किस क्षेत्र में 'नड़' वाद्ययंत्र अधिकतर प्रयुक्त होता है ?
कनिष्ठ अनुदेशक (रेफ्रिजरेशन) 18.11.2024
👉 नड़ एक सुषिर वाद्य यंत्र है, जो लगभग ढाई फीट लंबा होता है।
👉 यह कैर/कगौर की लकड़ी से बना होता है और इसमें 4 से 6 छेद होते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 नड़ मुख्यतः पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में चरवाहों व भोपों द्वारा प्रयुक्त होता है।
👉 प्रसिद्ध नड़ वादक — करणा राम भील (जैसलमेर), जिन्हें राजस्थान सरकार ने 30 बीघा भूमि प्रदान की थी।
“नगाड़ा” निम्नलिखित में से संगीत वाद्ययंत्रों की किस श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत किया जाता है ?
[4th Grade (4th Phase) 20.09.2025]
👉 नगाड़ा एक प्रमुख झिल्ली वाद्य (Membranophone) है, जिसमें चमड़े की झिल्ली के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
👉 यह भारतीय संगीत के अवनद्ध वाद्य या ताल वाद्ययंत्रों की श्रेणी में आता है।
👉 इस प्रकार के वाद्यों में फैली हुई झिल्ली को आघात या खींचने से स्वर निकलता है।
👉 नगाड़ा के समान अन्य वाद्य हैं — तबला, ढोलक, ढोल, डफ और मृदंगम।
👉 ये सभी वाद्य ताल और लय प्रदान कर संगीत को ऊर्जावान स्वरूप देते हैं।
✍️ सही उत्तर है – झिल्ली वाद्य (Membranophone)
जहूर खान किस लोकवाद्य से सम्बन्धित हैं ?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिप्लोमा) 20.05.2022
👉 जहूर खाँ — प्रसिद्ध भपंग वादक हैं;
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 भपंग — कटे हुए तुम्बे पर चमड़ा मढ़कर बनाया जाता है;
👉 एक हाथ से तांत को खींचकर या ढीला छोड़कर, दूसरे हाथ से लकड़ी के टुकड़े से प्रहार कर बजाते हैं;
👉 यह वाद्य मेवात क्षेत्र में लोकप्रिय है।
👉 जहूर खाँ — भपंग के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हैं।
रावण हत्था को निम्न में से किस से बनाया जाता है ?
[उद्योग निरीक्षक परीक्षा 24.06.2018]
👉 रावण हत्था एक तत् वाद्य है, जिसका निर्माण बड़े नारियल की कटोरी पर खाल मढ़कर किया जाता है।
👉 इसकी डांड बाँस की होती है, जिसमें नौ तार लगाए जाते हैं व इसे गज से बजाया जाता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 रावण हत्था का वादन पाबूजी की फड़ वाचन के समय भोपों द्वारा किया जाता है।
👉 गज के अंतिम सिरे पर घुंघुरू बँधे होते हैं, जिनके संचालन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
शेखावाटी और कुचामन के किस लोक नृत्य में ढोल या ड्रम वाद्ययन्त्र का प्रयोग होता है?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (2nd Phase) 01.12.2024]
👉 कच्छी घोड़ी नृत्य — शेखावाटी व कुचामन क्षेत्र का लोकप्रिय लोक नृत्य; विवाह अवसरों पर किया जाता है।
👉 नर्तक बाँस की घोड़ी कमर में बाँधकर, तलवार हाथ में लेकर नकली युद्ध का दृश्य प्रस्तुत करते हैं।
👉 वाद्य यंत्र — झांझ, ढोल, बाँकिया, थाली का प्रयोग होता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 यह नृत्य अब व्यावसायिक रूप ले चुका है; परबतसर, डीडवाना क्षेत्रों में भी प्रसिद्ध।
👉 डांडिया नृत्य मारवाड़ जोधपुर होली के अवसर पर किया जाता है, अग्नि नृत्य कतरियासर बीकानेर के जसनाथी संप्रदाय के सिद्ध पुरुषों द्वारा अंगारों पर किया जाता है जिन का मुख्य वाद्य यंत्र नगाड़ा है, घुडला नृत्य मारवाड़ जोधपुर का एक प्रसिद्ध महिला प्रधान लोक नृत्य है
लोक वाद्य यंत्र 'अलगोजा' निम्नलिखित में से किस श्रेणी के संगीत वाद्य यंत्रों में आता है ?
[Conductor Exam 06.11.2025]
🔹 व्याख्या
👉
अलगोजा
राजस्थान का
प्रसिद्ध लोक
वाद्य यंत्र
है।
👉
इसमें
फूँक मारकर
ध्वनि उत्पन्न
की जाती है।
👉
फूँक
से बजने वाले
वाद्य सुषिर
वाद्य
की श्रेणी में
आते हैं।
👉
इसलिए
अलगोजा सुषिर
वाद्य यंत्र
है।
✍️ सही उत्तर है – सुषिर
चौतारा, कामायचा कौन से लोकवाद्य परंपरा से जुड़े हैं ?
[उद्योग प्रचार अधिकारी 22.07.2018]
👉 चौतारा और कामायचा दोनों ही तत् वाद्य परंपरा से जुड़े लोकवाद्य हैं।
👉 तत् वाद्य में जन्तर, इकतारा, रावणहत्था, सारंगी, चिकारा, दो तारा, भपंग, सुरमण्डल, चौतारा, कामायचा आदि शामिल होते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 चौतारा का उपयोग रामदेवजी के भजन व नाथपंथी निर्गुण भजन में होता है।
👉 कामायचा विशेषकर मांगणियार जाति द्वारा बजाया जाता है।
कालबेलियों के प्रमुख वाद्य का नाम बताइए ।
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (3rd Phase) 02.12.2024]
👉 कालबेलियों का प्रमुख वाद्य है पुंगी।
👉 पुंगी को बीन भी कहते हैं; यह सुषिर वाद्य है।
👉 थार रेगिस्तान में जोगी व सपेरों द्वारा साँपों को मोहित करने हेतु प्रयोग।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 पुंगी में लोकी के तुम्बे में दो नालियाँ — एक में 3 छेद, दूसरी में 9 छेद।
👉 इसे नकसाँसी विधि से बजाया जाता है।
👉 राजस्थान के कालबेलिया नृत्य में इसकी धुन विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।
राजस्थानी संगीत में व्यापक रूप से प्रयुक्त होने वाला निम्नलिखित में से कौन-सा वाद्य एक “सुषिर वाद्य” है?
[4th Grade 6th Phase) 21.09.2025]
👉 पुंगी राजस्थानी संगीत का एक प्रमुख सुषिर वाद्य यंत्र है।
👉 इसमें साँस या फूँक के दबाव से ध्वनि उत्पन्न होती है।
👉 यह वाद्य सामान्यतः साँप के खेल और लोकनाट्यों में प्रयोग किया जाता है।
👉 पुंगी, बाँसुरी और शहनाई जैसे अन्य वायु वाद्ययंत्रों की श्रेणी में आती है।
👉 यह राजस्थान की लोकसंगीत परंपरा में स्वर और ताल का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है।
✍️ सही उत्तर है – पुंगी
रामनाथ चौधरी का संबंध किस वाद्य यंत्र से है ?
[पटवार (प्रथम चरण) 23.10.2021]
👉 रामनाथ चौधरी — प्रसिद्ध अलगोजा वादक हैं।
👉 नाक से 5 मिनट 5 सेकंड तक अलगोजा बजाकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया।
👉 वे नाक से अलगोजा बजाने वाले दुनिया के एकमात्र कलाकार माने जाते हैं।
👉 राजस्थानी कला-संस्कृति को देश-विदेश में प्रचारित कर चुके हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 अलगोजा — सुषिर वाद्य, बांसुरी के समान; राजस्थान के लोक वाद्य में प्रमुख।
👉 जयपुर के पदमपुरा गांव के रामनाथ चौधरी इसके विख्यात कलाकार हैं।
निम्नलिखित में से कौनसा तत् लोक वाद्य यन्त्र नहीं है?
JEN (विद्युत डिप्लोमाधारक) 19.05.2022
👉 मांदल — अवनद्ध वाद्य है, इसलिए यह तत् वाद्य नहीं है।
👉 शेष विकल्प — रावणहत्था, रवाज, भपंग — ये सभी तत् वाद्य यंत्र हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 मांदल — मृदंग के समान, मिट्टी का वाद्य; हिरण/बकरी की खाल मढ़ी जाती है;
👉 भीलों व गरासियों का प्रमुख वाद्य; मोलेलां गाँव में विशेष रूप से बनाया जाता है।
निम्न में से कौन - सा यंत्र राजस्थान के तेरहताली नृत्य में काम नहीं आता ?
[कर सहायक 14.10.2018]
👉 डेरू — अवनद्ध वाद्य; तेरहताली नृत्य में इसका प्रयोग नहीं होता।
👉 तेरहताली नृत्य में मंजीरा, तानपुरा, चौतारा का उपयोग होता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 तेरहताली नृत्य — कामड़ जाति द्वारा रामदेवजी का यशोगान करते समय किया जाता है;
👉 नृत्य में 13 मंजीरे (पैर, हाथ में बाँधे जाते हैं);
👉 प्रमुख कलाकार — माँगीबाई, लक्ष्मणदास।
👉 डेरू — अवनद्ध वाद्य; आम की लकड़ी से निर्मित;
👉 झाड़ पीर व गोगाजी के भक्तों द्वारा बजाया जाता है।
"मोहन वीणा" संगीत वाद्य का आविष्कार किसने किया?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (3rd Phase) 02.12.2024]
👉 मोहन वीणा के आविष्कारक हैं पं. विश्व मोहन भट्ट।
👉 जन्म 27 जुलाई 1950, जयपुर; पं. रविशंकर के शिष्य।
👉 मोहन वीणा के जनक; 2002 — पद्मश्री, ग्रैमी अवार्ड, 2012 — राजस्थान रत्न, 2017 — पद्मभूषण।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 मोहन वीणा — हवाईयन गिटार को भारतीय शास्त्रीय संगीत के अनुकूल ढालकर बनाया गया तत् वाद्य है।
👉 इसके माध्यम से विश्व मोहन भट्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत को नई पहचान दिलाई।
👉 कपूर चंद कुलिश राजस्थान पत्रिका के संस्थापक, जगजीत सिंह प्रसिद्ध गजल गायक और संगीतकार, डॉ पीके सेठी जयपुर फुट के सह आविष्कारक
किस लोकवाद्य में महारथ होने से साकर खान को 2012 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया ?
[JEN (सिविल) (डिप्लोमा धारक) 06.12.2020]
👉 कामायचा एक तत् वाद्य यंत्र है, जो जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र में लोकप्रिय है। इसमें 27 तार होते हैं, जो बकरी की आँतों व घोड़े के बालों से बनाए जाते हैं।
👉 इस वाद्य में 2 मोर और 9 मोरनियाँ होती हैं। माँगणियार कलाकार इसका प्रमुख रूप से प्रयोग करते हैं। कमल साकर खाँ इसके प्रसिद्ध वादक थे।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 साकर खान (1938-2013), जैसलमेर के हमीरा गाँव के महान कामायचा वादक थे।
👉 उन्होंने ययहुदी मेनुहिन व जॉर्ज हैरिसन के साथ अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ दीं।
👉 1990 में तुलसी सम्मान, 1991 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार,
👉 2012 में "At Home: Sakar Khan" एल्बम और पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
निम्नलिखित में से कौन सा सुषिर वाद्य है?
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 अलगोजा — सुषिर वाद्य है; यह दो बांसुरियों से मिलकर बना होता है, जिन्हें एक साथ मुँह में रखकर बजाया जाता है; हवा (श्वास) के माध्यम से ध्वनि उत्पन्न होती है।
👉 अन्य विकल्प —
कामायचा, तंदूरा, रावणहत्था — सभी तत् वाद्य (तार वाले वाद्य) हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
|
अवनद्ध वाद्य |
तत् वाद्य |
घन वाद्य |
सुषिर वाद्य |
|
तबला,अंक्य, अलिंग्या,ऊर्ध्वाका,खंजरी, चंग, डफ, डैरू, धौसा, तासा, कुंडी, मांदल, ढोल, डमरू, गडगड़ाटी,ढोलक,ढ़ाक, कमर, मृदंग, पखावज, नौबत, नगाड़ा, माठ, दमामा. (टामरू), माटा |
जन्तर, इकतारा, रावणहत्था, सारंगी, चिकारा, दो तारा, भपंग, अपंग, कमठ, भीलों की कौड़ी, पावरा, कामायचा, दुकाका, केनरा, बोली, सुरमण्डल, चौतारा, सुरिन्दा, रबाज/रवाज, रबाब, तन्दूरा, निशान, गूजरी। |
मंजीरा, झांझ, थाली, रमझौल, करताल, खड़ताल, झालर, श्रीमण्डल, घंटा, ताल, घुरालियां, भरनी, घुँघरू, घड़ा, कागरच्छ. तासली, चीपिया, टाली,वीरघंआ, चीपिया, टाली,टोकरियों, लेजिम (गरासिया),डंडिया, हांकल |
अलगोजा, पूंगी, शहना सतारा, बांसुरी या बंसी, मशक, नड़, मोरचंग, सुरनई, तुरड़ी,मुरला/ मुरली, बाकिया, तरपी, कानी, करणा, सींगा, सींगो, भूगल, रणभेरी, शंख, बरगू, नागफनी, पेली, टोये. हरनाई। |
'रमझोल' किस प्रकार का लोक वाद्य यन्त्र है?
JEN (विद्युत डिग्रीधारक) 19.05.2022
👉 रमझोल — एक घन वाद्य है;
👉 चमड़े या कपड़े की पट्टी पर घुँघरू बाँधकर तैयार किया जाता है;
👉 इसे नर्तकियाँ अपने पैरों में बाँधकर नृत्य के दौरान बजाती हैं;
👉 घोड़ों के पैरों में भी रमझोल बाँधी जाती है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 रमझोल का उपयोग लोक नृत्यों में ताल देने के लिए किया जाता है।
👉 यह धातु की टकराहट से घन वाद्य की श्रेणी में आता है।
रावणहत्था क्या है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (वायरमैन) 24.12.2019]
👉 रावणहत्था एक वाद्ययंत्र है, जिसे भोपों द्वारा प्रमुख रूप से प्रयोग किया जाता है।
👉 इसे नारियल की कटोरी, बाँस की डांड और नौ तारों से तैयार कर, गज की सहायता से वादन किया जाता है।
👉 पाबूजी की फड़ वाचन के समय इसका उपयोग होता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 रावणहत्था को वायलिन की तरह बजाया जाता है।
👉 गज में बँधे घुँघरू इसकी ध्वनि को और आकर्षक बनाते हैं।
सुमेलित कीजिए
वाद्य यंत्र जाति
(1) सारंगी (i) भोपे
(2) पूंगी (ii) मांगणियार
(3) कमायचा (iii) लंगा
(4) रावणहत्था (iv) कालबेलिया
[संगणक परीक्षा 19.12. 2021]
कूट -
👉 सारंगी — लंगा जाति द्वारा प्रयोग किया जाता है।
👉 पुंगी — कालबेलिया जाति का प्रमुख सुषिर वाद्य है।
👉 कमायचा — मांगणियार जाति द्वारा बजाया जाने वाला तत् वाद्य।
👉 रावण हत्था — भोपे समुदाय द्वारा फड़ वाचन में प्रयोग किया जाता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 ये सभी राजस्थानी लोक वाद्य विभिन्न जातियों/परंपराओं से जुड़े हैं और विशेष अवसरों पर बजाए जाते हैं।
लोक-कथा 'देवनारायण जी की फड़' के गायन में कौन-सा वाद्य यन्त्र प्रयोग में लाया जाता है?
[CET (स्नातक) (चरण -II) 07.01.2023]
👉 जन्तर — गूजर भोपों में प्रचलित; देवनारायण की फड़ व बगडावतो की कथा में इसका प्रमुखता से प्रयोग होता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 जन्तर - तत् वाद्य; वीणा के समान; दो तुम्बे, बीच में बाँस की लम्बी नली; इसमें चार तार होते हैं, जिन्हें उंगलियों से आघात कर बजाते हैं; खड़े होकर गले में लटकाकर वादन करते हैं
गुलाबो, प्रसिद्ध राजस्थानी नृत्यांगना ________ नृत्य से सम्बंधित हैं।
[JEN विद्युत डिग्री 07.02.2025]
👉 गुलाबो सपेरा राजस्थान की प्रसिद्ध कालबेलिया नृत्यांगना हैं।
👉 उन्होंने सपेरा नृत्य परंपरा को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है।
👉 उनकी जीवनकथा सामाजिक दबावों के बीच दृढ़ता और आत्मसंघर्ष की प्रेरक कहानी है।
👉 उन्हें वर्ष 2016 में ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
👉 उन्होंने अपने नृत्य के माध्यम से 165 से अधिक देशों में राजस्थानी संस्कृति का प्रसार किया।
✍️ सही उत्तर है – कालबेलिया
निम्न में से कौन, तार वाला वाद्य यंत्र नहीं है ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -B) 11.12.2022]
👉 ताशा — अवनद्ध वाद्य; तार वाला वाद्य यंत्र नहीं है
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 तांबे की चपटी परात पर बकरी का चमड़ा मढ़कर तैयार किया जाता है; बाँस की खपच्चियों से बजाते हैं; ताजिये के अवसर पर मुस्लिम समाज इसका प्रयोग करता है
कौनसा तत् वाद्य नहीं है ?
[JEN (Civil डिग्री) 16.10.2016]
👉 नागफनी एक सुषिर वाद्य यंत्र है, जो कुमाऊं, गुजरात व राजस्थान में प्रमुख रूप से बजाया जाता है।
👉 यह सर्प के आकार का होता है, जिसकी धातु की जीभ रंगीन होती है।
'जंतर' वाद्य यंत्र किसके द्वारा बजाया जाता है?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कार्यशाला) 10.09.2022]
👉 जन्तर — तत् वाद्य; वीणा के समान; दो तुम्बे, बीच में बाँस की नली, चार तार; उँगलियों से आघात कर बजाते हैं;
👉 देवनारायण जी के भोपे द्वारा फड़ वाचन व बगडावतो की कथा के समय प्रमुख रूप से बजाया जाता है;
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 गूजर भोपों में यह वाद्य विशेष रूप से प्रचलित है।
निम्नलिखित में से कौन सा तत् वाद्य है ?
[VDO मुख्य परीक्षा 09.07.2022]
👉 रवाज — एक तत् वाद्य है; सारंगी की श्रेणी का वाद्य; इसमें कुल 12 तार होते हैं — 4 तांत के, 1 सन की डोरी का, 8 तरबों के।
👉 यह वाद्य मेवाड़ क्षेत्र में राव व भाट समुदाय में विशेष रूप से प्रचलित है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 अन्य विकल्प —
सतारा, मोरचंग, बांकिया — सभी सुषिर वाद्य की श्रेणी में आते हैं।
मंजीरा, तानपुरा, चौतारा वाद्य यंत्रों का प्रयोग अधोलिखित किस नृत्य में किया जाता है?
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
👉 तेरहताली नृत्य — कामड़ जाति द्वारा रामदेवजी के यशोगान हेतु प्रस्तुत किया जाता है; इसमें महिलाएँ तेरहताली का प्रदर्शन करती हैं व पुरुष साथ में मंजीरा, तानपूरा, चौतारा बजाते हैं; यह नृत्य तेरह मंजीरों के साथ किया जाता है; प्रमुख नृत्यकार — माँगीबाई व लक्ष्मणदास।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 तेरहताली नृत्य में मंजीरा, तानपुरा, चौतारा वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है।
रावण हत्था किसका मुख्य वाद्य यंत्र है ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -A) 11.12.2022]
👉 रावण हत्था — भोपा समुदाय का मुख्य वाद्य यंत्र; नारियल की कटोरी पर चमड़ा मढ़कर, बाँस की डांड में 9 तार लगाए जाते हैं; गज (घोड़े के बालों से) से वायलिन की तरह बजाया जाता है; पाबूजी की फड़ के वाचन में इसका उपयोग होता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 रावण हत्था → भोपा
👉 पुंगी → कालबेलिया
साकर खान को 2012 में किस लोक वाद्य में प्रवीणता के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (फिटर) 23.03.2019]
👉 साकर खान को 2012 में पद्मश्री सम्मान कामायचा वाद्य में प्रवीणता के लिए मिला।
👉 कामायचा एक तत् वाद्य है, जिसमें सत्ताइस तार होते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 साकर खान जैसलमेर के हमीरा गाँव के प्रसिद्ध कामायचा वादक थे।
👉 उन्होंने येहुदी मेनुहिन और जॉर्ज हैरिसन के साथ अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ दीं।
👉 1990 में तुलसी सम्मान, 1991 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, तथा 2012 में पद्मश्री प्राप्त किया।
'रावण हत्था' वाद्ययंत्र मुख्य रूप से किनके द्वारा बजाया जाता है ? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
[कनिष्ठ अनुदेशक (MNV) 07.01.2025]
👉 रावण हत्था एक तत् वाद्य है, जिसका प्रयोग मुख्यतः भोपे एवं भील करते हैं।
👉 पाबूजी की फड़ वाचन के समय रावण हत्था का वादन होता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 भोपे व भील — रावण हत्था
👉 पुजारी व गरासिया — मादल
👉 मौलवी व शेख — नाधास्वरम
👉 महन्त व कालबेलिया — पुंगी
निम्न में से कौनसा तत् वाद्य नहीं है ?
[पर्यवेक्षक परीक्षा 29.11.2015]
👉 सतारा एक सुषिर वाद्य यंत्र है, जो अलगोजा, बांसुरी व शहनाई का मिश्रित रूप है।
👉 इसमें दो लंबी बांसुरियाँ होती हैं — एक आधार स्वर देती है, दूसरी के छः छेदों को बजाया जाता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 सतारा वाद्य का प्रयोग जैसलमेर व बाड़मेर के गड़रिया व मेघवाल जाति के लोग करते हैं।
👉 रावणहत्था, सुरमण्डल, कामायचा — ये सभी तत् वाद्य हैं।
मोरचंग है -
[वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक 19.06.2022]
👉 मोरचंग — एक सुषिर वाद्य है; मोर की आकृति वाला, लोहे या पीतल से बना होता है;
👉 बीच में मजबूत पतला तार होता है; एक सिरा मुँह में रखकर श्वास दी जाती है, दूसरे सिरे पर अंगुली से आघात कर ध्वनि उत्पन्न होती है;
👉 चरवाहे इसे मनोरंजन हेतु बजाते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 इसके अन्य नाम — माउथहार्प, मोरसिंग, वरगन, खोमस, परमुपिल्ल, डोरोम्ब, ज्यूशार्प, जॉ हार्प।
सूची-I का सूची-II के साथ मिलान करें।
|
सूची-I (वाद्ययंत्र) |
सूची-II (विशेषताएँ) |
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a. एकतारा |
I. इसको दो मोटी लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है। |
|
b. अलगोजा |
II. भोपों का प्रमुख वाद्य |
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c. रावनहत्था |
III. यह वाद्ययंत्र मीरांबाई बजाया करती थीं |
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d. नगाडा |
IV. बांसुरी जैसा वाद्ययंत्र |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें :
[पशु परिचर (1st Phase) 01.12.2024]
👉 एकतारा — III — यह वाद्ययंत्र मीरा बाई बजाया करती थीं।
👉 अलगोजा — IV — यह बांसुरी जैसा वाद्ययंत्र है।
👉 रावणहत्था — II — यह भोपों का प्रमुख वाद्य है।
👉 नगाड़ा — I — इसे दो मोटी लकड़ी के डंडों से बजाया जाता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 इकतारा — तत् वाद्य; एक तार वाला वाद्य, जिसमें विभिन्न धुनें और राग उत्पन्न होते हैं; मीरा बाई, नाथ, कालबेलिया व साधु-संन्यासी प्रयोग करते हैं।
👉 अलगोजा — सुषिर वाद्य; बांसुरी जैसा वाद्य; दो अलगोजे मुँह में रखकर बजाए जाते हैं; प्रसिद्ध कलाकार — रामनाथ चौधरी (नाक से बजाते हैं)।
👉 रावण हत्था — भोपों का प्रमुख तत् वाद्य; नारियल की कटोरी व बाँस की डांड से निर्मित; गज से बजाया जाता है; पाबूजी की फड़ वाचन में प्रयोग होता है।
👉 नगाड़ा — अवनद्ध वाद्य; अर्ध अण्डाकार धातु पर भैंसे की खाल मढ़कर बनाया जाता है; दो डंडों से बजाया जाता है; शहनाई के साथ लोकनाट्य व मंदिरों/युद्धों में प्रयोग।
निम्नलिखित में से कौन सा वाद्य यंत्र बाकी तीन से अलग है?
[CET (स्नातक) (चरण -I) 07.01.2023]
👉 खड़ताल — घन वाद्य है, जबकि मशक, शहनाई, अलगोज़ा — ये सभी सुषिर वाद्य हैं; इसलिए खड़ताल बाकी तीनों से भिन्न है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
सुषिर वाद्य — हवा (श्वास) से ध्वनि उत्पन्न करने वाले वाद्य।
घन वाद्य — स्वर उत्पत्ति के लिए ठोस वस्तुओं को आपस में टकराया जाता है।
खड़ताल — कैर/बबूल की लकड़ी से निर्मित घन वाद्य।
पाबूजी की फड़ सुनाते समय इस मुख्य वाद्य यंत्र का उपयोग होता है
[स्टेनोग्राफर परीक्षा 21.03.2021]
👉 पाबूजी की फड़ सुनाते समय रावणहत्था वाद्य यंत्र का प्रमुख रूप से प्रयोग होता है।
👉 यह भोपों का प्रसिद्ध वाद्य है, जिसमें नारियल की कटोरी पर खाल मढ़ी जाती है।
👉 बाँस की डांड में नौ तार बंधे होते हैं तथा इसे गज (घोड़े की पूँछ के बालों से बना) से वायलिन की तरह बजाया जाता है।
👉 गज के सिरे पर घुंघरू बंधे होते हैं, जो ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 यह वाद्य तत् वाद्य श्रेणी में आता है।
👉 पाबूजी की फड़ के पाठ/वाचन में भोपे इस वाद्य का उपयोग करते हैं।
👉 रावणहत्था राजस्थान की लोक-संगीत परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निम्नलिखित में से किस वाद्य यंत्र को 'तत् वाद्य' के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है ?
[4th Grade (1st Phase) 19.09.2025]
👉 रावणहत्था एक प्राचीन धनुषाकार तार वाला वाद्य यंत्र है।
👉 इसे भारतीय संगीत में ‘तत् वाद्य’ (तार वाद्य) की श्रेणी में रखा गया है।
👉 इस वाद्य की संरचना धनुष के समान होती है और इसमें तारों के कंपन से स्वर उत्पन्न होते हैं।
👉 यह वाद्य भारत, श्रीलंका और आस-पास के क्षेत्रों में प्रचलित है।
👉 रावणहत्था को राजस्थान की लोकसंगीत परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है।
✍️ सही उत्तर है – रावणहत्था
साकर खान को 2012 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया क्योंकि वे ___ लोक वाद्य के सबसे बड़े प्रवक्ता थे ।
[CET (10+2 पंचम चरण) 11.02.2023]
👉 कामायचा — तत् वाद्य यंत्र; जैसलमेर-बाड़मेर का लोकप्रिय वाद्य; स्वरूप में सारंगी जैसा; 27 तार (बकरी की आँतों व घोड़े के बालों से बने); दो मोर, नौ मोरनियाँ; प्रमुख रूप से माँगणियार कलाकारों द्वारा प्रयोग; प्रसिद्ध वादक — कमल साकर खाँ।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 साकर खाँ (1938-2013) — हमीरा गाँव (जैसलमेर) निवासी; विश्वविख्यात कामायचा वादक; येहुदी मेनुहिन, जॉर्ज हैरिसन के साथ अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ दीं; अमेरिका, फ्रांस, जापान, सोवियत संघ में प्रस्तुति;
सम्मान — तुलसी सम्मान (1990), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1991), पद्म श्री (2012);
एल्बम — "At Home: Sakar Khan" (सितंबर 2012)।
राजस्थान में कामड़ जाति के लोगों द्वारा निम्न में से कौन सा संगीत वाद्य बजाया जाता है ?
[पटवार (चतुर्थ चरण) 24.10.2021]
👉 तन्दूरा (चौतारा) — कामड़ जाति द्वारा बजाया जाने वाला चार तारों वाला तत् वाद्य है। सुरिंदा और गुजरी भी तत् वाद्य यंत्र है
👉 इसकी आकृति सितार या तानपूरे के समान होती है, परंतु कुंडी लकड़ी की बनी होती है।
👉 तारों को उल्टे क्रम में मिलाया जाता है।
👉 इसके साथ खड़ताल, मंजीरा, चिमटा आदि वाद्ययंत्र भी बजाए जाते हैं।
👉 इसका प्रयोग निर्गुण भजन, रामदेवजी के भजन व नाथपंथी साधु करते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 तन्दूरा — लोक भक्ति गीतों का महत्वपूर्ण तत् वाद्य है।
👉 कामड़ जाति में यह वाद्य परंपरागत भजन गायन में विशेष भूमिका निभाता है।
एक तार वाला संगीत वाद्य यंत्र जो विभिन्न प्रकार की धुनें और राग उत्पन्न कर सकता है, कहलाता है:
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (1st Phase) 01.12.2024]
👉 इकतारा एक तत् वाद्य यंत्र है, जिसमें एक तार होता है, जिससे धुनें और राग उत्पन्न किए जाते हैं।
👉 यह गोल तुम्बे में बाँस की डंडी लगाकर तैयार किया जाता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 इकतारा का वादन अंगुलियों से किया जाता है; इसे एक हाथ से पकड़कर और दूसरे हाथ से खड़ताल बजाते हैं।
👉 इसे कालबेलिया, नाथ, मीरा बाई, साधु-संन्यासी आदि लोक कलाकार बजाते हैं।
अलवर जिले के जोगी जाति के लोग निम्न में से किस वाद्य को बजाते हैं ?
[पटवार (तृतीय चरण) 24.10.2021]
👉 भपंग — अलवर जिले की जोगी जाति द्वारा बजाया जाने वाला प्रमुख तत् वाद्य है।
👉 इसे कटे हुए तुम्बे पर चमड़ा मढ़कर तैयार किया जाता है।
👉 तार को खूंटी से बाँधकर, काँख में दबाकर तथा लकड़ी के टुकड़े से बजाया जाता है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 यह वाद्य मेवात क्षेत्र में अत्यंत लोकप्रिय है।
👉 भपंग — राजस्थान के लोक वाद्यों में एक विशिष्ट स्थान रखता है।
👉 अलवर, भरतपुर व मेवात क्षेत्र में जोगी जाति इसका विशेष उपयोग करती है।
निम्नलिखित में से कौन सा गैर नृत्य में प्रयुक्त वाद्ययंत्र नहीं है ?
[Patwar Exam (Shift I) 17.08.2025]
👉 गैर नृत्य राजस्थान का प्रसिद्ध लोकनृत्य है, जिसमें ताल और लय प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
👉 इस नृत्य में तानपुरा जैसे स्वर वाद्य का प्रयोग नहीं किया जाता।
👉 इसके स्थान पर ढोल, नगाड़ा और बांसुरी जैसे ताल वाद्ययंत्र उपयोग में लाए जाते हैं।
👉 इन वाद्यों की तालबद्ध ध्वनि नृत्य को ऊर्जावान और उत्साहपूर्ण बनाती है।
👉 यह नृत्य राजस्थान की लोकधुनों और समूह लय का जीवंत उदाहरण है।
✍️ सही उत्तर है – ग़ैरिये
'कमायचा' है ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 18.09.2021]
👉 कमायचा एक तत् वाद्य यंत्र है।
👉 यह जैसलमेर व बाड़मेर क्षेत्र में लोकप्रिय है।
👉 सारंगी के समान दिखता है, इसमें २७ तार होते हैं — बकरी की आँतों व घोड़े के बालों से निर्मित।
👉 इसमें २ मोर व ९ मोरनियाँ होती हैं।
👉 इसका अधिक उपयोग मांगणियार समुदाय द्वारा किया जाता है।
👉 कमल साकर खाँ इसके प्रसिद्ध वादक रहे हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 कमायचा की धुन राजस्थानी लोकगीतों में विशेष संगीतात्मक प्रभाव डालती है।
👉 मांगणियार कलाकार इसे देश-विदेश में सांस्कृतिक मंचों पर प्रस्तुत करते हैं।
👉 इसकी मधुर ध्वनि इसे विशिष्ट पहचान दिलाती है।
करणा भील किस वाद्य का प्रसिद्ध वादक था ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रिशियन) 24.03.2019]
👉 करणा भील प्रसिद्ध नड़ वाद्य के वादक थे।
👉 नड़ एक सुषिर वाद्य यंत्र है, जो कैर/कगौर की लकड़ी से बनाया जाता है।
👉 यह ढाई फीट लंबा होता है, जिसमें चार से छह छेद होते हैं।
👉 पश्चिमी राजस्थान के चरवाहों व भोपों में यह वाद्य लोकप्रिय है।
👉 जैसलमेर के करणा राम भील इस वाद्य के प्रसिद्ध कलाकार थे।
👉 राजस्थान सरकार ने तीस बीघा जमीन देकर उन्हें सम्मानित किया था।
👉 बाद में पाकिस्तानियों द्वारा धोखे से उनकी हत्या कर दी गई थी।
राजस्थान के किस लोक वाद्य को ज्यूज़ हार्प भी कहा जाता है ?
[संगणक परीक्षा 05.05.2018]
👉 मोरचंग एक सुषिर वाद्य है, जिसे ज्यूज हार्प भी कहा जाता है।
👉 यह लोहे या पीतल से निर्मित, मोर जैसी आकृति का होता है; एक सिरा मुँह में रखकर, दूसरे सिरे पर अंगुली से आघात कर ध्वनि उत्पन्न की जाती है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 चरवाहे इसे मनोरंजन हेतु बजाते हैं।
👉 इसके अन्य नाम — माउथहार्प, मोरचंग, मोरसिंग, वरगन, खोमस, परमुपिल्ल, डोरोम्ब, ज्यूशार्प, जॉ हार्प।
सँपेरों का कौन सा लोक वाद्य प्रसिद्ध है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 पूंगी — सुषिर वाद्य; बीन के नाम से भी प्रसिद्ध; कालबेलिया जाति द्वारा सर्प मोहित करने हेतु; थार में जोगी/सपेरों द्वारा बजाई जाती है; लोकी के तुम्बे में दो नालियाँ (एक में 3 छेद, दूसरी में 9 छेद); नकसाँसी से बजाई जाती है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 शहनाई — सुषिर वाद्य; शीशम/सागवान की लकड़ी से बनी; आकृति चिलम जैसी, 8 छेद; प्रसिद्ध वादक — बिस्मिल्ला खाँ (भारत रत्न 2001)।
👉 बांसुरी — सुषिर वाद्य; बांस/पीतल या अन्य धातु से बनी; प्राचीन लोक वाद्य; प्रसिद्ध वादक — हरिप्रसाद चौरसिया, पन्नालाल घोष।
👉 मंजीरा — घन वाद्य; पीतल/ताँबा/काँसा से निर्मित; कटोरीनुमा; रामदेवजी के भोंपे, कामड़ जाति, तेरहताली नृत्य में उपयोग।
निम्न में से कौन सा तंत्र वाद्य नहीं है ?
[पटवारी मुख्य परीक्षा 24.12.2016]
👉 सतारा एक सुषिर वाद्य है, यह अलगोजा, बांसुरी व शहनाई का मिश्रित रूप है।
👉 इसमें दो बांसुरियाँ होती हैं — एक आधार स्वर देती है, दूसरी के छह छेद उँगलियों से बजाए जाते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 सतारा में किसी छेद को बंद कर सप्तक परिवर्तन किया जाता है।
👉 प्रमुख उपयोगकर्ता — गड़रिया व मेघवाल जाति (जैसलमेर, बाड़मेर)।
मोरचंग एक प्रकार का ____ है ।
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]
👉 मोरचंग एक प्रकार का वाद्य यंत्र है।
👉 यह मोर की आकृति का होता है, लोहे या पीतल से निर्मित होता है।
👉 इसे मुख में रखकर श्वांस द्वारा और अंगुली से आघात कर बजाया जाता है।
👉 इसके अन्य नाम हैं — माउथहार्प, मोरसिंग, वरगन, खोमस, ज्यूशार्प।
👉 चरवाहे पशु चराते समय मनोरंजन हेतु इसे बजाते हैं।
👉 राजस्थान में यह लोकप्रिय सुषिर वाद्य के रूप में जाना जाता है।
👉 विशेषत: ग्रामीण व जनजातीय क्षेत्रों में इसका प्रयोग होता है।
राजस्थान मूल के प्रख्यात शास्त्रीय वादक रामनारायण तथा सुल्तान खां का सम्बन्ध किस वाद्य यन्त्र से है?
[CET (स्नातक) (चरण -IV) 08.01.2023]
👉 सारंगी — तत् वाद्य; सागवान/कैर/रोहिडे की लकड़ी से निर्मित; तार बकरी की आँतों के, गज (घोड़े की पूँछ के बाल) से बजाते हैं; बिरोजा लगाकर ध्वनि उत्पन्न होती है।
👉 राजस्थान में दो प्रकार — सिंधी सारंगी, गुजराती सारंगी; गुजराती सारंगी में 7 स्टील के तार होते हैं, शास्त्रीय संगीत में अधिक प्रयोग।
👉 लंगा, मिरास, जोगी, मांगणियार जातियाँ इसका लोकसंगीत में उपयोग करती हैं; जोगी सारंगी पर गोपीचंद्र, भर्तृहरि आदि के ख्याल गायन में प्रयोग।
👉 सिंधी सारंगी के वादक लाखा खान (रानेरी, फलौदी) को 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 सुल्तान खान — सीकर; प्रसिद्ध सारंगी वादक; 2010 में पद्म भूषण; 1992 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1998 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्टिस्ट पुरस्कार समेत कई सम्मान।
👉 रामनारायण — उदयपुर; विख्यात सारंगी वादक; 2005 में पद्म विभूषण से सम्मानित।
रबाब, चिकारा और चौतारा किस प्रकार के वाद्य यंत्र हैं?
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 रबाब, चिकारा, चौतारा — सभी तत् वाद्य यंत्र हैं; इन वाद्यों में तार लगे होते हैं, जिन्हें बजाकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 तत् वाद्य — जिन वाद्यों में तंतु (तार) होते हैं, और जिन्हें उँगलियों, गज या मिज़राब से बजाया जाता है।
👉 राजस्थान के प्रमुख तत् वाद्य — जन्तर, रावणहत्था, सारंगी, कामायचा, चिकारा, दो तारा, भपंग, सुरमंडल, चौतारा, रबाब।
👉 रबाब — अफगानी मूल का वाद्य, राजस्थान में लोक संगीत में प्रयोग।
👉 चिकारा — रावणहत्था के समान, धातु के तारों वाला वाद्य।
👉 चौतारा — चार तारों वाला वाद्य, विशेषकर रामदेवजी के भजनों में प्रयोग।
वाद्य यंत्रों के वर्गीकरण में "एकतारा" किस घराने से संबंधित है?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (6th Phase) 03.12.2024]
👉 इकतारा एक तत् वाद्य यंत्र है।
👉 इसमें एक तार होता है, जो विभिन्न धुनें व राग उत्पन्न करता है।
👉 कालबेलिया, नाथ, मीरा बाई, साधु-संन्यासी आदि इसका प्रयोग करते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 इकतारा का वर्गीकरण तत् वाद्य में होता है।
👉 परीक्षोपयोगी दृष्टि से इकतारा = तत् वाद्य याद रखें।
शहनाई वाद्ययंत्रों के किस परिवार से संबंधित है?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (5th Phase) 03.12.2024]
👉 शहनाई एक सुषिर वाद्य यंत्र है।
👉 यह शीशम या सागवान की लकड़ी से बनी होती है, आकृति चिलम जैसी; इसमें 8 छेद होते हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 बिस्मिल्ला खाँ भारत के प्रसिद्ध शहनाई वादक थे।
👉 उन्हें 2001 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
👉 शहनाई का उपयोग मांगलिक अवसरों व शास्त्रीय संगीत में प्रमुखता से होता है।
राजस्थान का निम्नलिखित में से कौन सा (प्रसिद्ध संगीतकार - विशेषज्ञता) सही सुमेलित नहीं है?
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड -II 11.09.2022]
👉 प्रश्न में सुल्तान खां - कमायचा दिया गया है, जो सही सुमेलित नहीं है।
👉 सुल्तान खां प्रसिद्ध सारंगी वादक थे, न कि कमायचा वादक।
👉 शेष मिलान —
विश्वमोहन भट्ट → मोहन वीणा,
चतुर लाल → तबला,
जिया फरीदुदीन डागर → ध्रुपद — सभी सही हैं।
📝 अतिरिक्त जानकारी
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प्रसिद्ध संगीतकार |
विशेषज्ञता |
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विश्व मोहन भट्ट |
मोहन वीणा |
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चतुर लाल |
तबला |
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सुल्तान खान |
सारंगी |
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जिया फरिद्दीन डागर |
ध्रुपद |
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अप्पा जलगांवकर,श्री पुरुषोत्तम वालावलकर, , ज्ञान प्रकाश घोष |
हरमोनियम |
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एन. रमानी, पन्नालाल घोष,टीआर महालिंगम, हरिप्रसाद चौरसिया, |
बांसुरी |
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जाकिर हुसैन, साबिर खान, अल्लाह रक्खा, पंडित किशन महाराज, संदीप दास, उस्ताद शफात अहमद खान, पंडित ज्ञान प्रकाश घोष |
तबला |
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भजन सोपोरी, पं. शिव कुमार शर्मा, पं. तरुण भट्टाचार्य |
संतूर |
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अब्दुल लतीफ खान, उस्ताद बिंदा खान, रमेश मिश्रा, सुल्तान खान, पंडित राम नारायण, शकूर खान |
सारंगी |
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आमिर खान,उस्ताद विलायत खान, पंडित रविशंकर, शुजात हुसैन खान, शाहिद परवेज खान, अनुष्का शंकर, निखिल बनर्जी, मुस्ताक अली खान, बुधादित्य मुख |
सितार |
निम्नलिखित में से किस वाद्य यंत्र को “भेरी" भी कहा जाता है ?
[CET (10+2 प्रथम चरण) 04.02.2023]
👉 भूंगल — पीतल से निर्मित वाद्य; लंबाई लगभग तीन हाथ; आकृति में बांकिया के समान; इसे भेरी भी कहते हैं; रण क्षेत्र में भी बजाया जाता है; मेवाड़ की भवाई जाति का प्रमुख वाद्य यंत्र है।
📝 अतिरिक्त जानकारी
👉 बांकिया — सुषिर वाद्य; पीतल से बना, वक्राकार स्वरूप; मांगलिक अवसरों व त्योहारों पर मंदिरों में ढोल के साथ बजाया जाता है; सरगरा जाति के लोग बजाते हैं।
👉 मशक — सुषिर वाद्य; चमड़े की सिलाई से निर्मित; मुँह से हवा भरकर, नीचे की नली से पूंगी जैसी ध्वनि उत्पन्न करता है; पूर्व में विवाह अवसरों पर, अब पुलिस/सुरक्षा बलों के बैंड में प्रमुख वाद्य।
👉 पुंगी — सुषिर वाद्य; बीन के नाम से भी प्रसिद्ध; कालबेलिया जाति द्वारा सर्प मोहित करने हेतु उपयोग होता है।