संत चरणदास राजस्थान के किस जिले से संबंधित हैं ?
[CET (10+2 पंचम चरण) 11.02.2023]
👉 संत चरणदास जी ने सगुण और निर्गुण भक्ति का मिश्रित रूप प्रस्तुत किया।
👉 इनका जन्म 1703 ई. में डेहरा गाँव में हुआ था।
👉 यह गाँव वर्तमान में अलवर जिले में स्थित है।
👉 संत चरणदास जी ने अनेक ग्रन्थों की रचना की और चरणदासी सम्प्रदाय की स्थापना की।
✍️ सही उत्तर है – अलवर
सहजो बाई के गुरु कौन थे ?
[लवण निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 सहजोबाई 18वीं शताब्दी की प्रसिद्ध भक्त कवयित्री थीं।
👉 वे संत चरणदास जी की प्रमुख शिष्या थीं।
👉 सहजोबाई ने सहजप्रकाश, सात वार निर्णय, 16 तिथि निर्णय जैसी रचनाएँ कीं।
👉 इन्होंने भक्ति मार्ग में गुरु चरणदास को ही सर्वोपरि माना।
✍️ सही उत्तर है – चरणदास
निम्नलिखित संतों में से कौन जन्म से मुसलमान था ?
[JEN (यांत्रिक) (डिग्रीधारक) 13.12.2020]
👉 संत लालदास जी का जन्म मेव जाति के एक मुसलमान परिवार में हुआ था।
👉 इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना कर हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
👉 इनका जन्म 1540 ई. में अलवर जिले के धोलीदूब गाँव में हुआ था।
👉 लालदास जी ने अपनी वाणियों में नैतिक शुद्धता और सामाजिक सुधार पर बल दिया।
✍️ सही उत्तर है – लालदास
लोकनृत्य 'अग्नि' सम्बन्धित है ?
[शारीरिक शिक्षा अध्यापक 25.09.2022]
👉 राजस्थान का प्रसिद्ध लोकनृत्य अग्नि नृत्य माना जाता है।
👉 यह नृत्य जसनाथी सम्प्रदाय के अनुयायी करते हैं।
👉 इसमें भक्तजन जलते अंगारों पर नंगे पैर चलकर नृत्य करते हैं।
👉 यह नृत्य उनकी आस्था और साहस का प्रतीक है तथा सर्वाधिक बीकानेर क्षेत्र में किया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी सम्प्रदाय
दादूपंथ में सत्संग स्थल कहलाता है ?
JEN (सिविल डिग्रीधारक) 18.05.2022
👉 संत दादूदयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इस पंथ में साधुओं और अनुयायियों के मिलने-जुलने के लिए विशेष सत्संग स्थल रहे।
👉 दादूपंथ में यह सत्संग स्थल ‘अलख दरीबा’ कहलाता है।
👉 यहाँ भक्तजन एकत्र होकर भक्ति, उपदेश और साधना करते हैं।
👉 मुक्ति धाम यह बिश्नोई विश्नोई संप्रदाय का प्रमुख स्थल है जहाँ संत जांभोजी ने समाधि ली थी यह बीकानेर में स्थित है चोपड़ा -संत मावजी निष्कलंक संप्रदाय द्वारा रचित ग्रन्थ को चोपड़ा कहा जाता है
✍️ सही उत्तर है – अलख दरीबा
निरंजनी संप्रदाय के संस्थापक कौन थे ?
[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 निरंजनी सम्प्रदाय का सम्बन्ध निर्गुण भक्ति धारा से है।
👉 इसके प्रवर्तक संत हरिदास जी थे, जिनका जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ।
👉 संत बनने से पहले उन्होंने डकैत जीवन अपनाया, बाद में साधना कर निर्गुण भक्ति का प्रचार किया।
👉 इस सम्प्रदाय में परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – संत हरिदास
'धौलीधूप' राजस्थान के किस संत से सम्बन्धित है ?
[वनपाल परीक्षा 06.11.2022]
👉 संत लालदास जी का जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर) में हुआ था।
👉 इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की और हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
👉 प्रश्न में दिया गया स्थान ‘धौलीधूप’ इन्हीं के जन्म से सम्बद्ध है।
👉 लालदास जी की वाणियाँ ‘चेतावणियाँ’ नाम से प्रसिद्ध हैं।
✍️ सही उत्तर है – संत लालदास
संत मावजी किस संप्रदाय के प्रवर्तक थे ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
👉 संत मावजी का जन्म 1714 ई. में साबला (डूंगरपुर) में हुआ था।
👉 इन्हें उनके अनुयायी ‘वागड़ का धणी’ और ‘कल्कि अवतार’ मानते हैं।
👉 मावजी ने माही और सोम नदी के संगम पर बेणेश्वर धाम की स्थापना की।
👉 इन्होंने आगे चलकर निष्कलंकी सम्प्रदाय (पाप रहित) की स्थापना की।
✍️ सही उत्तर है – निष्कलंकी संप्रदाय
हरे वृक्षों की रक्षा के लिए किस सम्प्रदाय को जाना जाता है ?
JEN (सिविल डिप्लोमाधारक) 18.05.2022
👉 गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 जाम्भोजी ने समाज के लिए 29 नियम निर्धारित किए, जिनमें हरे वृक्षों की रक्षा और वन्य जीव संरक्षण प्रमुख था।
👉 इस कारण विश्नोई समाज ने प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण को अपना धर्म माना।
👉 यही कारण है कि यह सम्प्रदाय विशेषकर हरे वृक्षों की रक्षा के लिए प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – विश्नोई सम्प्रदाय
संत पीपा की गुफा कहाँ है ? [*]
[पटवार (तृतीय चरण) 24.10.2021]
📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' घोषित किया गया है।
राजस्थान के संत पीपा के गुरु कौन थे ?
[संगणक परीक्षा 19.12. 2021]
👉 संत पीपा जी का जन्म 1425 ई. में गागरोन (झालावाड़) के खींची राजपरिवार में हुआ था।
👉 ये गागरोन के राजपूत शासक भी रहे।
👉 संत पीपा ने भक्ति मार्ग अपनाकर संत रामानन्द से दीक्षा ली।
👉 इनके प्रेरणा स्रोत पर इन्होंने निर्गुण भक्ति का प्रचार किया।
✍️ सही उत्तर है – रामानन्द
संत बखनाजी, संतदासजी, संत रज्जबजी किस सम्प्रदाय से संबंधित थे ?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिग्री) 20.05.2022
👉 संत दादूदयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इनके कुल 152 शिष्य थे, जिनमें से 52 को बावन स्तम्भ कहा जाता है।
👉 प्रमुख शिष्यों में संत बखनाजी, संतदासजी और संत रज्जबजी सम्मिलित हैं।
👉 ये सभी संत निर्गुण भक्ति के प्रचारक रहे।
✍️ सही उत्तर है – दादूपंथ
बिश्नोई सम्प्रदाय के प्रवर्तक कौन थे ?
[सुपरवाईजर परीक्षा 06.01.2019]
👉 बिश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में की गई थी।
👉 इसके प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी (जाम्भेश्वर जी) थे।
👉 इन्होंने समाज के लिए 29 नियम निर्धारित किए।
👉 बिश्नोई सम्प्रदाय विशेष रूप से प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – जांभोजी
निम्नलिखित में से कौन सा एक युग्म गलत सुमेलित है ?
[CET (10+2 द्वितीय चरण) 04.02.2023]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की चार प्रमुख शाखाएँ मानी गई हैं – शाहपुरा (रामचरण जी), रैण (दरियाव जी), सिंथल (हरिरामदास जी) और खेड़ापा (रामदास जी)।
👉 इन शाखाओं के संस्थापकों ने अपने-अपने क्षेत्र में रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रचार-प्रसार किया।
✍️ सही उत्तर है – सिंहथल – हरिवंश जी
रामस्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक संत रामचरण के गुरु कौन थे ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (वायरमैन) 24.12.2019]
👉 संत रामचरण जी ने 18वीं शताब्दी में रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 भक्ति मार्ग अपनाने से पूर्व इन्होंने संत कृपाराम जी (गुदड़ सम्प्रदाय, दांतड़ा, भीलवाड़ा) से दीक्षा ली थी।
👉 इसके बाद उन्होंने 1760 ई. में रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
✍️ सही उत्तर है – कृपाराम
निम्न में से किसने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली थी ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 गुरु जाम्भोजी विश्नोई सम्प्रदाय के प्रवर्तक थे, जिनका जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ।
👉 इन्होंने विष्णु की निर्गुण निराकार उपासना को महत्व दिया और समाज सुधार के लिए 29 नियम निर्धारित किए।
👉 जाम्भोजी ने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा प्राप्त की थी।
👉 आगे चलकर 1485 ई. में इन्होंने समराथल धोरा (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
जाम्भोजी जहाँ प्रवचन करते थे, वह क्या कहलाता था ?
[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 वे अपने अनुयायियों को धार्मिक और सामाजिक जीवन के उपदेश देते थे।
👉 जिस स्थान पर जाम्भोजी प्रवचन करते थे उसे ‘सथारी’ कहा जाता था।
👉 यहाँ बैठकर उन्होंने अपने उपदेशों को वाणियों के रूप में प्रस्तुत किया।
✍️ सही उत्तर है – सथारी
मीराबाई का जन्म कहाँ हुआ था ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 मीरां बाई 16वीं शताब्दी की महान कृष्ण भक्त संत कवयित्री थीं।
👉 इनका जन्म 1498 ई. में वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था।
👉 जन्मस्थान कुड़की गाँव (वर्तमान ब्यावर जिला) बताया गया है।
👉 बचपन का नाम पेमल था और लालन-पालन इनके दादा राव दूदा (मेड़ता) ने किया।
✍️ सही उत्तर है – कुड़की
बमलू, लिखमादेसर, पांचला सिद्धा किस संप्रदाय से संबंधित हैं ?
[VDO मुख्य परीक्षा 09.07.2022]
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय की कई उप-पीठें बाद में स्थापित हुईं।
👉 इनमें प्रमुख हैं – बम्बलू, लिखमादेसर, पांचला सिद्धा, मालासर और पुनरासर।
👉 ये सभी स्थल जसनाथी सम्प्रदाय की प्रसिद्ध बाड़ियाँ (आसन/आश्रम) माने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी सम्प्रदाय
दादु दयाल के निधन के पश्चात् दादुपंथ का उत्तराधिकारी किसे नियुक्त किया गया था ?
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 संत दादू दयाल जी ने 1603 ई. में नरैना (जयपुर) में देह त्याग किया।
👉 इनके कुल 152 शिष्य थे, जिनमें 52 प्रमुख शिष्यों को बावन स्तम्भ कहा गया।
👉 दादू जी के निधन के बाद उनके पुत्र गरीबदास जी को गद्दी पर बैठाया गया।
👉 हालांकि बाद में गरीबदास जी ने स्वयं को अक्षम मानकर यह गद्दी त्याग दी थी।
✍️ सही उत्तर है – गरीब दास
निम्न में से कौन गागरोण के राजपूत शासक थे ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 संत पीपा जी का जन्म 1425 ई. में गागरोन के खींची राजपरिवार में हुआ था।
👉 बचपन का नाम प्रतापसिंह खींची था और ये गागरोन के राजपूत शासक भी रहे।
👉 बाद में इन्होंने रामानन्द से दीक्षा लेकर भक्ति मार्ग अपनाया।
👉 संत पीपा ने निर्गुण भक्ति का प्रचार किया और उनकी रचना ‘चिन्तावणी’ प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – पीपाजी
'संत गुण सागर' व 'नाम-माला' किस सन्त द्वारा रचित है ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 03.03.2019]
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के प्रवर्तक थे।
👉 इनके उपदेशों और जीवन से संबंधित अनेक रचनाएँ संकलित की गईं।
👉 इनमें ‘संत गुणसागर’ की रचना माधोदास ने की थी।
👉 वहीं ‘नाममाला’ ग्रन्थ की रचना लालदास जी ने की थी, जो दादू जी के शिष्य थे।
✍️ सही उत्तर है – दादू पंथ
किण संप्रदाय रा अनुयायी उभाणै पगां अंगारां माथै निरत कर्या करें
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 25.02.2023]
👉 जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय में ब्रह्मा की निर्गुण उपासना पर बल दिया गया।
👉 इनके अनुयायी विशेष अवसरों पर अग्नि नृत्य करते हैं।
👉 इस नृत्य में वे उभाणै पगां अंगारां माथै निरत कर श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी सम्प्रदाय
दादूजी के पार्थिव शरीर को किस स्थान पर समाधि दी गई ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 संत दादूदयाल निर्गुण भक्ति धारा के प्रवर्तक थे और उनका अधिकांश समय नरायणा (जयपुर) में बीता।
👉 1603 ई. में ज्येष्ठ कृष्ण अष्टमी को उनका निधन हुआ।
👉 दादू जी का पार्थिव शरीर नरायणा के निकट भेराणा पहाड़ी की गुफा में रखा गया।
👉 यह स्थान दादूखोल के नाम से प्रसिद्ध है, जहाँ उनकी समाधि मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – दादूखोल भेराणा
बीकानेर के निकट सम्भराथल को किस लोकदेवता ने अपना कर्म-स्थल बनाया ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था।
👉 इन्होंने 1485 ई. में सम्भराथल धोरा (बीकानेर) को अपनी कर्मस्थली बनाया।
👉 यहीं रहकर इन्होंने विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की और 29 नियम दिए।
👉 इस स्थान को धोक धोरा भी कहा जाता है और यह विश्नोई समाज का प्रमुख तीर्थ है।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
कुणसा संत राजस्थान रा नीं है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
👉 राजस्थान के प्रमुख संतों में जाम्भोजी, जसनाथ जी, दादूदयाल, रज्जब जी, सुन्दरदास, लालदास, रामचरण जी, चरणदास जी, पीपा, धन्ना, मीरांबाई आदि आते हैं।
👉 इसलिए अखाजी राजस्थान के संत नहीं माने जाते। संत अखाजी गुजरात के प्रसिद्ध संत और कवि थे
✍️ सही उत्तर है – अखाजी
निम्नलिखित में से कौन दादू दयाल जी का शिष्य नहीं है ?
[वनरक्षक (चतुर्थ चरण) 13.11.2022]
👉 लाल दास जी मुस्लिम संत गद्द्धन चिश्ती के शिष्य थे दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के संत थे, जिन्होंने दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इनके प्रमुख शिष्यों में सुन्दरदास, रज्जब जी, गरीबदास, मिस्किनदास, संतदास, माधोदास आदि शामिल हैं।
👉 प्रश्न में दिया गया नाम लालदास जी वास्तव में लालदासी सम्प्रदाय के प्रवर्तक थे।
👉 इसलिए लालदास जी, दादू दयाल जी के शिष्यों में सम्मिलित नहीं हैं।
✍️ सही उत्तर है – लालदास जी
सुमेलित कीजिए
सम्पदाय मुख्य पीठ
a. निरंजनी i. पन्ना
b. परनामी ii. गाढ़ा
c गूदड़ iii. शाहपुरा
d. रामस्नेही iv. दाँतड़ा
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
सही कूट का चयन कीजिए
a b c d
👉 निरंजनी सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ गाढ़ा (डीडवाना) में है।
👉 परनामी सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ पन्ना (मध्यप्रदेश) में स्थित है।
👉 गूदड़ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ दांतड़ा (भीलवाड़ा) है।
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में है।
✍️ सही उत्तर है – a-ii, b-i, c-iv, d-iii
'अणुव्रत आन्दोलन' के प्रणेता कौन थे ?
[लिपिक ग्रेड -II (LDC) 11.08.2024]
👉 आचार्य तुलसी तेरापंथ सम्प्रदाय के 9वें आचार्य थे।
👉 इनका जन्म लाडनूं (डीडवाना-कुचामन) में 1914 ई. में हुआ था।
👉 इन्होंने 1949 ई. में ‘अणुव्रत सिद्धान्त’ का प्रतिपादन कर अणुव्रत आन्दोलन प्रारम्भ किया।
👉 इनका संदेश था – “इन्सान पहले इन्सान, फिर धार्मिक, फिर जैन धर्माचार्य।”
✍️ सही उत्तर है – आचार्य तुलसी
सलेमाबाद में निम्बार्काचार्य पीठ की स्थापना किसने की ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (जैविक) 15.09.2019]
👉 निम्बार्क सम्प्रदाय की प्रधान पीठ सलेमाबाद (अजमेर) में स्थित है।
👉 इस पीठ की स्थापना आचार्य परशुराम देव ने की थी।
👉 परशुराम देव का जन्म ठीकरिया (सीकर) में हुआ था और वे 36वें निम्बार्काचार्य माने जाते हैं।
👉 इस पीठ में राधा-कृष्ण की युगल उपासना की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – परशुराम देव
राजस्थान के किस संप्रदाय के लोक पुरुषों द्वारा अग्नि नृत्य किया जाता है ?
[CET (10+2 प्रथम चरण) 04.02.2023]
👉 जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय के अनुयायी अपने धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष अग्नि नृत्य करते हैं।
👉 अग्नि नृत्य में वे जलते अंगारों पर नंगे पैर चलकर भक्ति व्यक्त करते हैं।
👉 इस नृत्य को सर्वाधिक संरक्षण बीकानेर महाराजा गंगासिंह ने दिया था।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी सिद्ध संप्रदाय
निम्नलिखित संतों में से कौन मेवात क्षेत्र से सम्बंधित है ?
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 29.06.2022]
👉 संत लालदास जी का जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर, मेवात क्षेत्र) में हुआ था।
👉 इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की और हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
👉 इनके अनुयायी विशेषकर मेव जाति के मुसलमान रहे।
👉 प्रमुख पीठ नगला जहाज (भरतपुर) में स्थित है।
✍️ सही उत्तर है – लालदास
18वीं शताब्दी में राजस्थान में रेण, शाहपुरा, सिंथल, खेडापा किस संप्रदाय के चार प्रमुख केन्द्र थे ?
[JEN (विधुत) (डिग्रीधारक) 29.11.2020]
👉 18वीं शताब्दी में राजस्थान में रामस्नेही सम्प्रदाय का विस्तार व्यापक रूप से हुआ।
👉 इस सम्प्रदाय की स्थापना संत रामचरण जी ने की थी।
👉 इसके चार प्रमुख केन्द्र माने जाते हैं – शाहपुरा (भीलवाड़ा), रेण (नागौर), सिंथल (बीकानेर) और खेड़ापा (जोधपुर)।
👉 इन पीठों से सम्प्रदाय का प्रचार-प्रसार पूरे राजस्थान में हुआ।
✍️ सही उत्तर है – रामस्नेही सम्प्रदाय
'वागड़ की मीरा' किसे कहा जाता है ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -B) 11.12.2022]
👉 गवरी बाई डूंगरपुर की प्रसिद्ध कृष्ण भक्त संत थीं।
👉 इन्हें अपनी गहन कृष्ण भक्ति और कीर्तनमाला जैसी रचनाओं के लिए जाना जाता है।
👉 डूंगरपुर महारावल शिवसिंह ने इनके लिए 1829 ई. में बालमुकुन्द मंदिर का निर्माण करवाया।
👉 अपनी भक्ति और जीवन शैली के कारण इन्हें ‘वागड़ की मीरा’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – गवरी बाई
जीवन भर दूल्हे के वेश में रहते हुए दादू के उपदेशों का बखान करने वाले संत कौन थे ?
JEN (विद्युत डिग्रीधारक) 19.05.2022
👉 संत रज्जब जी दादूदयाल के प्रमुख शिष्य थे।
👉 विवाह के समय दादू जी के उपदेशों से प्रभावित होकर इन्होंने संत मार्ग अपना लिया।
👉 इसके बाद ये आजीवन दूल्हे के वेश में रहे।
👉 इन्होंने अपने उपदेशों को ‘रज्जब वाणी’ के नाम से संकलित किया।
✍️ सही उत्तर है – रज्जब जी
निम्नलिखित में से कौन बिश्नोई सम्प्रदाय के प्रवर्तक हैं ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 04.02.2024]
👉 बिश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में समराथल (बीकानेर) में हुई।
👉 इसके प्रवर्तक गुरु जाम्भेश्वरजी (जाम्भोजी) थे, जिन्हें विष्णु का अवतार भी माना गया।
👉 इन्होंने समाज के लिए 29 नियम बनाए और प्रकृति-संरक्षण व अहिंसा पर विशेष बल दिया।
👉 इनके प्रमुख ग्रंथ हैं – 120 शब्द वाणियाँ, जाम्भसागर, जाम्भसंहिता और विश्नोई धर्म प्रकाश।
✍️ सही उत्तर है – जम्भेश्वरजी
'रज्जब वाणी' पुस्तक किस पंथ/संप्रदाय से संबंधित है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कार्यशाला) 10.09.2022]
👉 संत रज्जब जी दादूदयाल के प्रमुख शिष्यों में से थे।
👉 रज्जब जी ने आजीवन दुल्हे के वेश में रहकर भक्ति की और अपनी वाणी लिखी।
👉 उनकी रचनाएँ ‘रज्जब वाणी’ नाम से प्रसिद्ध हैं।
👉 यह ग्रन्थ दादूपंथ की भक्ति परम्परा से सम्बन्धित है।
✍️ सही उत्तर है – दादू पंथ
सही युग्म सुम्मेलित कीजिए :
(a) जसनाथ जी (1) रेवासा (सीकर)
(b) शीतला जी (2) चाकसू (जयपुर)
(c) जाम्भो जी (3) मुकाम (नोखा )
(d) जीण माता (4) कतरियासर(बीकानेर)
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]
कूट : -
(a) (b) (c) (d)
👉 जसनाथ जी की प्रधान गद्दी कतरियासर (बीकानेर) में है।
👉 शीतला जी का प्रसिद्ध मंदिर चाकसू (जयपुर) में स्थित है।
👉 जाम्भोजी का समाधि स्थल मुकाम (नोखा, बीकानेर) में है।
👉 जीण माता का मंदिर रेवासा (सीकर) में प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – (a)-(4), (b)-(2), (c)-(3), (d)-(1)
संत लालदास _____ के लिए अच्छी तरह से जाने जाते हैं।
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]
👉 संत लालदास जी का जन्म 1540 ई. में अलवर जिले के धोलीदूब गाँव में हुआ था।
👉 इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इनके अनुयायी विशेषकर मेव मुसलमान रहे।
👉 संत लालदास जी साम्प्रदायिक सद्भाव और हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – साम्प्रदायिक सद्भाव
सहजो बाई का संबंध किस संप्रदाय से है ?
[CET (स्नातक) (चरण -IV) 08.01.2023]
👉 सहजोबाई संत चरणदास जी की प्रमुख शिष्याओं में से थीं।
👉 इन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति भाव और गुरु महिमा का वर्णन किया।
👉 सहजोबाई की प्रसिद्ध रचनाएँ हैं – सहजप्रकाश, सात वार निर्णय, 16 तिथि निर्णय।
👉 इनका संबंध चरणदासी सम्प्रदाय से माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – चरणदासी सम्प्रदाय
निम्न को सुमेलित कीजिए -
सूची - I (रामस्नेही सम्प्रदाय की शाखा)
(1) शाहपुरा
(2) सिंहथल
(3) खेड़ापा
(4) रेण
सूची - II (स्थापनाकर्त्ता)
(1) संत हरिराम दास जी
(ii) संत रामदास जी
(iii) संत दरियाव जी
(iv) संत रामचरण जी
VDO Pre. (चतुर्थ चरण) 28.12.2021
कूट -
👉 शाहपुरा शाखा की स्थापना संत रामचरण जी ने की थी।
👉 सिंहथल शाखा के प्रवर्तक संत हरिरामदास जी थे।
👉 खेड़ापा शाखा की स्थापना संत रामदास जी ने की।
👉 रेण शाखा के प्रवर्तक संत दरियाव जी थे।
✍️ सही उत्तर है – (1)-(iv), (2)-(i), (3)-(ii), (4)-(iii)
18 वीं शताब्दी में राजस्थान में रैण, शाहपुरा, सिंहस्थल, खेडापा किस सम्प्रदाय के प्रमुख केन्द्र थे ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना संत रामचरण जी ने 18वीं शताब्दी में की थी।
👉 इस सम्प्रदाय के राजस्थान में चार प्रमुख पीठ बने – शाहपुरा (भीलवाड़ा), रैण (नागौर), सिंथल (बीकानेर) और खेड़ापा (जोधपुर)।
👉 इनमें से शाहपुरा प्रमुख पीठ है, जहाँ संत रामचरण जी ने अंतिम समय बिताया।
👉 इन केन्द्रों से ही रामधुन और गुरु भक्ति पर आधारित रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रचार हुआ।
✍️ सही उत्तर है – रामस्नेही सम्प्रदाय
'कामड़िया पंथ' की स्थापना किसने की थी ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रिशियन) 24.03.2019]
👉 कामड़िया पंथ राजस्थान का एक प्रमुख लोकधर्मी पंथ है।
👉 इसकी स्थापना लोकदेवता संत रामदेव जी ने की थी।
👉 इस पंथ के अनुयायी संत रामदेव जी को ईश्वर स्वरूप मानकर पूजा करते हैं।
👉 कामड़िया पंथ समाज में समानता, भक्ति और समरसता के संदेश के लिए प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – रामदेवजी
रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक थे
[बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक 18.06.2022]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की चार प्रमुख शाखाएँ मानी जाती हैं – शाहपुरा, रैण, सिंथल और खेड़ापा।
👉 इनमें से रैण शाखा के प्रवर्तक संत दरियाव जी थे।
👉 दरियाव जी का जन्म जैतारण (ब्यावर) में हुआ और उन्होंने रैण (नागौर) में साधना की।
👉 इन्होंने राम नाम में ‘रा’ को राम और ‘म’ को मुहम्मद का प्रतीक बताकर हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
✍️ सही उत्तर है – संत दरियाव जी
राजस्थान की दूसरी मीरा संत रानाबाई का जन्म कहाँ हुआ था ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -A) 11.12.2022]
👉 संत राना बाई का जन्म 1504 ई. में हुआ था।
👉 इनका जन्मस्थान हरनावा गाँव (डीडवाना-कुचामन) बताया गया है।
👉 राना बाई भगवान कृष्ण की महान उपासिका थीं।
👉 इन्हें उनकी भक्ति के कारण ‘राजस्थान की दूसरी मीरां’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – हरनावा
'जोधपुर का महामन्दिर' उपासना स्थल है
[CET (स्नातक) (चरण -I) 07.01.2023]
👉 नाथ सम्प्रदाय शैव मत का एक प्रमुख रूप है, जिसके प्रवर्तक मत्स्येन्द्रनाथ माने जाते हैं।
👉 राजस्थान में इस सम्प्रदाय का प्रमुख केन्द्र महामंदिर (जोधपुर) है।
👉 इसका निर्माण 1805 ई. में जोधपुर महाराजा मानसिंह ने कराया था।
👉 यहाँ नाथ सम्प्रदाय की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार होता है।
✍️ सही उत्तर है – नाथ संप्रदाय
संत हरिदास ____ सम्प्रदाय के संस्थापक थे।
[CET (स्नातक) (चरण -III) 08.01.2023]
👉 संत हरिदास जी का जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था।
👉 पहले इन्होंने डकैत जीवन जिया, पर बाद में साधना कर संत बने।
👉 इन्होंने निर्गुण भक्ति को अपनाकर कुरीतियों का विरोध किया।
👉 संत हरिदास जी ने निरंजनी सम्प्रदाय की स्थापना की, जिसमें परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – निरंजनी सम्प्रदाय
सिंभूदड़ा एवं कोंडा ग्रंथों में किस संप्रदाय के उपदेश हैं ?
[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय के अनुयायी निर्गुण भक्ति पर बल देते हैं और सामाजिक सुधार के नियम मानते हैं।
👉 इनके उपदेश ‘सिंभूदड़ा’ और ‘कोंडा’ ग्रंथों में संकलित हैं।
👉 इन ग्रंथों को जसनाथी सम्प्रदाय के अनुयायियों के लिए आचार संहिता माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी संप्रदाय
राजस्थान का तेरापंथी सम्प्रदाय निम्नलिखित में से किससे सम्बंधित है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 तेरापंथी सम्प्रदाय की स्थापना आचार्य भीखण जी ने 18वीं शताब्दी में की थी।
👉 यह सम्प्रदाय जैन धर्म की एक प्रमुख शाखा है।
👉 इसके अनुयायी अहिंसा, सत्य और त्याग के मार्ग पर चलते हैं।
👉 तेरापंथ में आचार्यों की परम्परा रही है, जिसमें आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ विशेष रूप से प्रसिद्ध हुए।
✍️ सही उत्तर है – जैन धर्म
निम्नलिखित संतों में से कौन जन्म से मुसलमान था ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]
👉 संत लालदास जी का जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर) में हुआ था।
👉 ये जाति से मेव मुसलमान थे और आगे चलकर निर्गुण भक्ति मार्ग पर अग्रसर हुए।
👉 इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 संत लालदास जी हिन्दू-मुस्लिम एकता और साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए प्रसिद्ध हुए।
✍️ सही उत्तर है – लालदास
संत चरणदास जी की समाधि कहाँ स्थित है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 संत चरणदास जी का जन्म 1703 ई. में डेहरा (अलवर) में हुआ था।
👉 इन्होंने चरणदासी सम्प्रदाय की स्थापना कर सगुण और निर्गुण का मिश्रित रूप प्रस्तुत किया।
👉 इनके 42 नियम और 52 प्रमुख शिष्य बताए जाते हैं।
👉 1782 ई. में इनका निधन हुआ और इनकी समाधि दिल्ली में स्थित है, जहाँ प्रतिवर्ष बसन्त पंचमी को मेला लगता है।
✍️ सही उत्तर है – दिल्ली
'धोलीदूब' राजस्थान के किस संत से सम्बन्धित है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 संत लालदास जी निर्गुण भक्ति धारा के प्रवर्तक थे।
👉 इनका जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर) में हुआ था।
👉 आगे चलकर इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की और हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
👉 इनकी समाधि शेरपुर (कोटपूतली-बहरोड़) में स्थित है।
✍️ सही उत्तर है – संत लालदास
निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य जसनाथी संप्रदाय के अनुयायीयों द्वारा किया जाता है ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 03.03.2019]
👉 जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में की।
👉 इस सम्प्रदाय के अनुयायी धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष अग्नि नृत्य करते हैं।
👉 इसमें भक्तजन जलते अंगारों पर नंगे पैर चलकर नृत्य करते हैं।
👉 यह नृत्य उनकी गहन आस्था और साहस का प्रतीक है।
✍️ सही उत्तर है – अग्नि नृत्य
'कामड़िया पंथ की स्थापना किसने की थी ?
[वनरक्षक (चतुर्थ चरण) 13.11.2022]
👉 संत रामदेव जी राजस्थान के विख्यात लोकदेवता माने जाते हैं।
👉 उन्होंने समाज में समानता, भक्ति और समरसता का संदेश दिया।
👉 इनके अनुयायियों ने मिलकर कामड़िया पंथ की स्थापना की।
👉 इस पंथ के लोग रामदेव जी को ईश्वर स्वरूप मानकर पूजा करते हैं।
✍️ सही उत्तर है – रामदेवजी
निम्नलिखित संतों में से किसने अपने लेखन में मेवाती बोलियों का प्रयोग नहीं किया ?
[फायरमैन परीक्षा 29.01.2022]
👉 संत सुन्दरदास जी दादूदयाल के परम शिष्य थे और इन्हें उनकी विद्वता के कारण ‘राजस्थान का शंकराचार्य’ कहा गया।
👉 इन्होंने कुल 42 ग्रन्थ लिखे, जिनमें ज्ञानसमुद्र, सुन्दरविलास, सुन्दर सार प्रमुख हैं।
👉 इनके लेखन की भाषा मुख्यतः पिंगल, सधुक्कड़ी और हिंदी मिश्रित शैली रही।
👉 प्रश्न में दिए अन्य संतों – दयाबाई और सहजोबाई ने अपने लेखन में मेवाती बोली का प्रयोग किया, परन्तु सुन्दरदास जी ने नहीं किया।
✍️ सही उत्तर है – सुन्दरदास
निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे ?
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 निरंजनी सम्प्रदाय का सम्बन्ध निर्गुण भक्ति धारा से है।
👉 इसके प्रवर्तक संत हरिदास जी थे, जिनका जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ।
👉 संत बनने से पहले इन्होंने डकैत जीवन व्यतीत किया, बाद में साधना मार्ग अपनाया।
👉 इन्होंने समाज की कुरीतियों का विरोध किया और परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहा।
✍️ सही उत्तर है – संत हरिदास
राजस्थान में नरसिंह के नाम से प्रसिद्ध हैं
[CET (स्नातक) (चरण -III) 08.01.2023]
👉 भक्त कवि दुर्लभजी का जन्म 1696 ई. में वागड़ क्षेत्र में हुआ था।
👉 इनका प्रमुख कार्यक्षेत्र डूंगरपुर-बाँसवाड़ा क्षेत्र रहा।
👉 इन्होंने लोगों को कृष्ण भक्ति और सगुण उपासना का उपदेश दिया।
👉 अपनी वीरता और भक्ति के कारण इन्हें ‘राजस्थान का नरसिंह’ कहा जाता है।
👉 संत रामचरण जी यह रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्तक जिनकी प्रधान पीठ शाहपुरा भीलवाड़ा में स्थित है संत चरण दास जी चरण दासी संप्रदाय की स्थापना की इनका जन्म डेहरा अलवर में हुआ था इनकी प्रधान पीठ दिल्ली में है
✍️ सही उत्तर है – कवि दुर्लभजी
कामडिया पंथ के संस्थापक कौन थे ?
[JEN (यांत्रिक) (डिग्रीधारक) 13.12.2020]
👉 संत रामदेव जी राजस्थान के विख्यात लोकदेवता थे।
👉 इन्होंने समाज में समानता, भक्ति और समरसता का संदेश दिया।
👉 इनके अनुयायियों द्वारा चलाया गया सम्प्रदाय कामड़िया पंथ कहलाता है।
👉 इस पंथ के अनुयायी संत रामदेव जी को ईश्वर स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं।
✍️ सही उत्तर है – संत रामदेव
निम्नलिखित में से कौन सा (सम्प्रदाय- प्रमुख मंदिर/पीठ) असंगत युग्म है?
[वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक 19.06.2022]
👉 अलखिया सम्प्रदाय के प्रवर्तक लालगिरी जी थे।
👉 इसकी प्रमुख पीठ बीकानेर में स्थित है।
👉 प्रश्न में दिया युग्म “अलखिया सम्प्रदाय – बिलाड़ा (जोधपुर)” सही नहीं है।
👉 अतः यह एक असंगत युग्म है।
✍️ सही उत्तर है – अलखिया सम्प्रदाय – बिलाड़ा (जोधपुर)
लालनाथ जी निम्नलिखित में से किस संप्रदाय के संत थे ?
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
👉 लालनाथ जी संत जसनाथ जी के प्रमुख शिष्यों में से एक थे।
👉 ये जसनाथी सम्प्रदाय से सम्बद्ध माने जाते हैं।
👉 जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में हुई थी।
👉 इस सम्प्रदाय के संत निर्गुण भक्ति और अग्नि नृत्य पर विशेष बल देते हैं।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी सम्प्रदाय
सम्राट अकबर ने किस संत को फतेहपुर सीकरी में आमंत्रित किया था ?
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के प्रवर्तक थे।
👉 इन्होंने 1574 ई. में दादूपंथ (परब्रह्म सम्प्रदाय) की स्थापना की।
👉 1585 ई. में सम्राट अकबर ने इन्हें धार्मिक चर्चा हेतु फतेहपुर सीकरी के इबादतखाने में आमंत्रित किया।
👉 वहाँ दादूजी ने लगभग 40 दिन तक अपने विचार प्रस्तुत किए।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल जी
निम्नलिखित में से किसे 'राजस्थान के कबीर' के नाम से जाना जाता है ?
[आर्थिक अन्वेषक परीक्षा 25.03.2019]
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के प्रवर्तक थे।
👉 इनका जन्म 1544 ई. में अहमदाबाद में हुआ और बाद में ये नरैना (जयपुर) आकर बस गए।
👉 इन्होंने 1574 ई. में दादूपंथ (परब्रह्म सम्प्रदाय) की स्थापना की।
👉 निर्गुण भक्ति, समानता और सामाजिक सुधार के उपदेशों के कारण इन्हें ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
निम्नलिखित में से किस संत को पर्यावरण के प्रति लगाव के कारण पर्यावरणविद् भी कहा जाता है ?
[स्टेनोग्राफर परीक्षा 05.10.2024]
👉 गुरु जाम्भोजी ने विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना कर प्रकृति-संरक्षण को धर्म का हिस्सा बनाया और 29 नियमों में आचरण निर्धारित किए।
👉 इन्होंने खेजड़ी वृक्ष व वन्य जीवों की रक्षा पर विशेष बल दिया, अनुयायियों ने खेजड़ी को पवित्र मानकर पर्यावरण के प्रति समर्पण दिखाया।
👉 इनके प्रभाव से सिकन्दर लोदी ने गौहत्या तथा हरे वृक्षों की कटाई पर प्रतिबंध लगाया, जिससे प्रकृति-संरक्षण को शासन-समर्थन मिला।
👉 गुरु जाम्भोजी को विश्व में पर्यावरण आन्दोलन का प्रथम प्रणेता माना गया, इसलिए उन्हें पर्यावरणविद् स्वरूप सम्मानित किया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जम्भोजी
सुमेलित कीजिए -
[फायरमैन परीक्षा 29.01.2022]
सम्प्रदाय प्रमुख गद्दी (स्थान)
(1) विश्नोई सम्प्रदाय (i) कतरियासर
(2) जसनाथी सम्प्रदाय (ii) नरैना
(3) दादूपंथी सम्प्रदाय (iii) सिंहथल
(4) रामस्नेही सम्प्रदाय (iv) मुकाम
सही सुमेलित है -
👉 विश्नोई सम्प्रदाय की प्रमुख गद्दी मुकाम (बीकानेर) में है।
👉 जसनाथी सम्प्रदाय की प्रधान पीठ कतरियासर (बीकानेर) है।
👉 दादूपंथी सम्प्रदाय का प्रमुख पीठ स्थल नरैना (जयपुर) है।
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख शाखाओं में से एक सिंथल (बीकानेर) है।
✍️ सही उत्तर है – (1)-iv, (2)-i, (3)-ii, (4)-iii
गोविंद देव मन्दिर, जयपुर एवं मदन मोहन मन्दिर, करौली का सम्बन्ध किस सम्प्रदाय से है ?
[CET (स्नातक) (चरण -I) 07.01.2023]
👉 गौड़ीय सम्प्रदाय के प्रवर्तक चैतन्य महाप्रभु थे, जिन्होंने कृष्ण भक्ति को आंदोलन का रूप दिया।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ वृंदावन में है, पर इसका विस्तार जयपुर व अन्य क्षेत्रों में भी हुआ।
👉 राजस्थान में इस सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर हैं – गोविन्द देव मंदिर (जयपुर) और मदन मोहन मंदिर (करौली)।
👉 इन मंदिरों में राधा-कृष्ण की युगल मूर्तियों की भक्ति की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – गौड़ीय सम्प्रदाय
संत जाम्भोजी को समाधिस्थ किया गया था -
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था।
👉 1485 ई. में उन्होंने समराथल (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 1536 ई. में लालासर (बीकानेर) में एक कंकेड़ी वृक्ष के नीचे उन्होंने शरीर त्याग दिया।
👉 इसके बाद उन्हें मुकाम (बीकानेर) में समाधिस्थ किया गया, जो विश्नोई समाज का प्रमुख तीर्थ स्थल है।
✍️ सही उत्तर है – मुकाम
रामस्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक संत रामचरण कहाँ पैदा हुए ?
[JEN (सिविल) (डिप्लोमा धारक) 06.12.2020]
👉 संत रामचरण जी रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक थे।
👉 इनका जन्म 1719 ई. में हुआ था।
👉 जन्मस्थान सोड़ा ग्राम (डिग्गी, टोंक जिला) बताया गया है।
👉 आगे चलकर इन्होंने 1760 ई. में रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की और शाहपुरा (भीलवाड़ा) को इसकी प्रधान पीठ बनाया।
✍️ सही उत्तर है – सोड़ा (डिग्गी)
नवल संप्रदाय की मुख्य पीठ स्थित है
[वनरक्षक (चतुर्थ चरण) 13.11.2022]
👉 नवल संप्रदाय के प्रवर्तक नवलदास जी थे, जिनका जन्म हस्सोलाव (नागौर) में हुआ।
👉 इन्होंने समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता, आडम्बर और कुरीतियों का विरोध किया।
👉 इस संप्रदाय की मुख्य पीठ जोधपुर में स्थित है।
👉 नवलदास जी की रचना ‘नवलेश्वर अनुभव वाणी’ प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – जोधपुर
निरंजनी संप्रदाय के संस्थापक थे।
[JEN (विधुत) (डिप्लोमाघारक) 29.11.2020]
👉 संत हरिदास जी का जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था।
👉 प्रारंभ में उन्होंने डकैत जीवन व्यतीत किया, पर बाद में साधना कर संत बने।
👉 इन्होंने निर्गुण भक्ति पर बल देते हुए समाज की कुरीतियों का विरोध किया।
👉 संत हरिदास जी ने निरंजनी संप्रदाय की स्थापना की।
✍️ सही उत्तर है – संत हरिदास
'अलखिया सम्प्रदाय' की स्थापना किसने की ?
[पटवार (तृतीय चरण) 24.10.2021]
👉 अलखिया सम्प्रदाय का सम्बन्ध निर्गुण भक्ति धारा से है।
👉 इसके प्रवर्तक स्वामी लालगिरी जी थे, जिनका जन्म सुलखनिया गाँव (चुरू) में हुआ।
👉 इस सम्प्रदाय की मुख्य पीठ बीकानेर में मानी जाती है।
👉 इनके ग्रन्थों में ‘अलख स्तुति प्रकाश’ और ‘कुण्डलियां’ प्रमुख हैं।
✍️ सही उत्तर है – स्वामी लालगिरी
रामस्नेही सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ (गद्दी) स्थित हैं ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 18.09.2021]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत रामचरण जी थे।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
👉 यहीं संत रामचरण जी ने 1798 ई. में समाधि ली थी।
👉 शाहपुरा में बने रामद्वारे से सम्प्रदाय का संचालन होता है और यहीं से इसका प्रचार-प्रसार किया गया।
✍️ सही उत्तर है – शाहपुरा (भीलवाड़ा)
'कामडिया पंथ' के संस्थापक कौन थे ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -B) 11.12.2022]
👉 संत रामदेव जी राजस्थान के लोकदेवता माने जाते हैं।
👉 इन्होंने समाज में समानता और भक्ति मार्ग का संदेश दिया।
👉 इनके अनुयायियों द्वारा चलाया गया सम्प्रदाय कामड़िया पंथ कहलाता है।
👉 इस पंथ के अनुयायी संत रामदेव जी को ईश्वर स्वरूप मानकर पूजा करते हैं।
✍️ सही उत्तर है – संत रामदेव
राजस्थान के किस संत और रामानंद के शिष्य ने अपने राज्य को त्याग कर गुरु मंडली में सम्मिलित हुए ?
[प्रयोगशाला सहायक 03.02.2019]
👉 संत पीपा जी का जन्म गागरोन (झालावाड़) के खींची राजपरिवार में हुआ था।
👉 वे गागरोन के राजपूत शासक भी रहे।
👉 संत पीपा जी ने संत रामानन्द से दीक्षा ली और उनके शिष्य बने।
👉 इन्होंने अपना राज्य त्यागकर गुरु रामानन्द की मंडली में सम्मिलित होकर भक्ति मार्ग अपनाया।
✍️ सही उत्तर है – पीपा जी
सुमेलित कीजिए
VDO Pre. (तृतीय चरण) 28.12.2021
सम्प्रदाय प्रमुख पीठ (गद्दी)
(a) चरणदासी (i) जोधपुर
(b) अलखिया (ii) बीकानेर
(c) गूदड़ (iii) दिल्ली
(d) नवल (iv) दाँतड़ा, भीलवाड़ा
कूट -
👉 चरणदासी सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ दिल्ली में स्थित है।
👉 अलखिया सम्प्रदाय की प्रधान पीठ बीकानेर मानी जाती है।
👉 गूदड़ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ दांतड़ा (भीलवाड़ा) में है।
👉 नवल सम्प्रदाय की मुख्य पीठ जोधपुर में स्थित है।
✍️ सही उत्तर है – a-(iii), b-(ii), c-(iv), d-(i)
भक्ति संत रानाबाई का जन्म कहाँ हुआ था ?
[CET (10+2 तृतीय चरण) 05.02.2023]
👉 संत राना बाई का जन्म 1504 ई. में हुआ था।
👉 इनका जन्मस्थान हरनावा गाँव (डीडवाना-कुचामन) बताया गया है।
👉 राना बाई जाट परिवार से थीं और भगवान कृष्ण की महान भक्त थीं।
👉 इन्हें उनकी गहन भक्ति के कारण ‘राजस्थान की दूसरी मीरां’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – हरनांवा
मुगल सम्राट अकबर द्वारा जिस सन्त को फतेहपुर सीकरी आमंत्रित किया गया था, वह था -
[पटवार (चतुर्थ चरण) 24.10.2021]
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के प्रवर्तक थे।
👉 इन्होंने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ (परब्रह्म सम्प्रदाय) की स्थापना की।
👉 1585 ई. में मुगल सम्राट अकबर ने उन्हें फतेहपुर सीकरी के इबादतखाने में आमंत्रित किया।
👉 यहाँ दादू जी ने लगभग 40 दिन तक धार्मिक चर्चा की थी।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
'कामडिया पंथ' के संस्थापक कौन थे ?
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 29.06.2022]
👉 संत रामदेव जी राजस्थान के विख्यात लोकदेवता माने जाते हैं।
👉 उन्होंने समाज में समानता, भक्ति और समरसता का संदेश दिया।
👉 इनके अनुयायियों द्वारा चलाया गया सम्प्रदाय कामड़िया पंथ कहलाता है।
👉 इस पंथ के अनुयायी रामदेव जी को ईश्वर स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं।
✍️ सही उत्तर है – संत रामदेव जी
मीराबाई का जन्म कहाँ हुआ था ?
[संगणक परीक्षा 03.03.2024]
👉 मीरां बाई कृष्ण भक्त कवयित्री व गायिका थीं, जिन्हें ‘राजस्थान की राधा’ कहा जाता है।
👉 इनका जन्म 1498 ई. में वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ।
👉 जन्म स्थान कुड़की गाँव (वर्तमान ब्यावर जिला) बताया गया है।
👉 बचपन का नाम पेमल था और पालन-पोषण इनके दादा राव दूदा (मेड़ता) ने किया।
✍️ सही उत्तर है – कुड़की
कतरियासर प्रमुख गद्दी है
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 यही स्थान उनकी कर्मस्थली रहा और यहीं उन्होंने जीवित समाधि ली।
👉 कतरियासर को इस सम्प्रदाय की प्रधान गद्दी माना जाता है।
👉 यहाँ प्रति वर्ष तीन बार विशाल मेले आयोजित होते हैं।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी सम्प्रदाय
जसनाथी सम्प्रदाय की प्रमुख गद्दी कहाँ पर है ?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिग्री) 20.05.2022
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 यही स्थान उनकी कर्मस्थली रहा और यहीं उन्होंने जीवित समाधि ली।
👉 कतरियासर को इस सम्प्रदाय की प्रधान गद्दी माना जाता है।
👉 यहाँ प्रतिवर्ष तीन बार विशाल धार्मिक मेले आयोजित होते हैं।
👉 शाहपुरा रामस्नेही संप्रदाय की मुख्य पीठ है यहां का फूल डाल महोत्सव काफी प्रसिद्ध है जोधपुर जिले में स्थित है यह भी रामस्नेही संप्रदाय की प्रमुख पीठ है
✍️ सही उत्तर है – कतरियासर
जसनाथी सम्प्रदाय री प्रधान पीठ कठीनै है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 जसनाथ जी ने 1504 ई. में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ राजस्थान के कतरियासर (बीकानेर) में स्थित है।
👉 यही जसनाथ जी की कर्मस्थली रही, जहाँ उन्होंने जीवित समाधि ली।
👉 कतरियासर में प्रतिवर्ष तीन बार (आश्विन शुक्ल सप्तमी, माघ शुक्ल सप्तमी, चैत्र शुक्ल सप्तमी) विशाल मेले लगते हैं।
✍️ सही उत्तर है – कतरियासर
किसे 'वागड़ की मीरा' भी कहा जाता है ?
[वनपाल परीक्षा 06.11.2022]
👉 गवरी बाई डूंगरपुर की एक प्रसिद्ध कृष्ण भक्त संत महिला थीं।
👉 इन्होंने अपनी भक्ति को व्यक्त करने के लिए कीर्तनमाला जैसी रचना की।
👉 इनके लिए डूंगरपुर महारावल शिवसिंह ने 1829 ई. में बालमुकुन्द मंदिर का निर्माण करवाया।
👉 अपनी गहन भक्ति और जीवन शैली के कारण इन्हें ‘वागड़ की मीरा’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – गवरी बाई
संत दरियावजी रामस्नेही संप्रदाय की किस शाखा के प्रवर्तक थे ?
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड - III 19.09.2019]
👉 संत दरियाव जी का जन्म जैतारण (ब्यावर) में हुआ था।
👉 इन्होंने संत प्रेमनाथ जी से दीक्षा ली और बाद में रामस्नेही सम्प्रदाय में सक्रिय हुए।
👉 दरियाव जी ने रैण (नागौर) को अपनी कर्मस्थली बनाया।
👉 इन्हें रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण शाखा का प्रवर्तक माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – रैण
निम्नलिखित में से कौन-सा ग्रंथ विश्नोई संप्रदाय के संस्थापक जम्भोजी द्वारा रचित नहीं है ? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
[Supervisor (महिला) 07.09.2024]
👉 जाम्भोजी ने विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की और उनके प्रमुख ग्रन्थ माने जाते हैं – 120 शब्द वाणियाँ, जम्भसागर, जम्भसंहिता और विश्नोई धर्म प्रकाश।
👉 इन ग्रन्थों में जम्भसंहिता को विश्नोई समाज का पाँचवाँ वेद कहा जाता है, जिसमें उनके उपदेश संकलित हैं।
👉 इसलिए इसे जाम्भोजी द्वारा रचित ग्रन्थ नहीं माना जाएगा।
✍️ सही उत्तर है – जंभ संखियान
मध्यकालीन मेवात के प्रसिद्ध संत थे ?
[पटवार (प्रथम चरण) 23.10.2021]
👉 मध्यकाल में मेवात क्षेत्र में संत लालदास जी का विशेष प्रभाव रहा।
👉 इनका जन्म 1540 ई. में अलवर जिले के धोलीदूब गाँव में हुआ था।
👉 इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना कर हिन्दू-मुस्लिम एकता और नैतिक शुद्धता पर बल दिया।
👉 इनके अनुयायी विशेषकर मेव मुसलमान थे।
✍️ सही उत्तर है – लालदास
किण संत री वाणियां रो संग्रै 'अणभै वाणी' रे नांव सूं जाण्यो जावै ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 संत रामचरण जी ने 18वीं शताब्दी में रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इन्होंने भक्ति के लिए रामधुन और गुरु भक्ति को आधार बनाया।
👉 इनकी वाणियों का संकलन ‘अणभै वाणी’ नाम से प्रसिद्ध है।
👉 यह ग्रन्थ इनके अनुयायियों द्वारा भक्ति मार्गदर्शन हेतु प्रमुख माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – श्री रामचरण जी
धन्ना भगत के गुरु कौन थे ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -B) 11.12.2022]
👉 संत धन्ना जी का जन्म 1415 ई. में टोंक जिले के धुवन ग्राम में हुआ था।
👉 प्रारंभ में वे मूर्तिपूजक थे, बाद में भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर हुए।
👉 धन्ना जी ने संत रामानन्द से दीक्षा ली और निर्गुण भक्ति को अपनाया।
👉 इनके 3 पद गुरु ग्रन्थ साहिब में संकलित हैं।
✍️ सही उत्तर है – रामानंद
हरनावा गांव किस संत से जुड़ा महत्त्वपूर्ण स्थल है ?
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 संत राना बाई का जन्म 1504 ई. में हरनावा गाँव (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था।
👉 वे भगवान कृष्ण की महान उपासिका थीं।
👉 अपनी भक्ति के कारण उन्हें ‘राजस्थान की दूसरी मीरा’ कहा जाता है।
👉 हरनावा गाँव इनके जीवन से जुड़ा महत्त्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – रानाबाई
नारायणा ____ का जाना-माना केन्द्र है।
[कनिप्ठ अनुदेशक (वायरमैन) 24.12.2019]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 दादू जी का अधिकांश जीवन नारायणा (जयपुर) में व्यतीत हुआ।
👉 यहाँ विशाल दादूद्वारा है, जिसे इस पंथ का प्रमुख पीठ स्थल माना जाता है।
👉 इसलिए नारायणा को दादूपंथ का जाना-माना केन्द्र कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दादू पंथ
कुणसै पंथ रा अनुयायी मेव मुसलमान घणा है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 लालदासी सम्प्रदाय के प्रवर्तक लालदास जी थे, जिनका जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर) में हुआ।
👉 यह सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति पर आधारित था और इसमें हिन्दू-मुस्लिम एकता पर विशेष बल दिया गया।
👉 इस सम्प्रदाय के अनुयायियों में विशेषकर मेव जाति के मुसलमान अधिक पाए जाते हैं।
👉 प्रमुख पीठ नगला जहाज (भरतपुर) में है, जहाँ आश्विन एकादशी व माघ पूर्णिमा को मेला भरता है।
✍️ सही उत्तर है – लालदासी पंथ
निम्न में से किसने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली थी ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (विष) 14.09.2019]
👉 गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था।
👉 उन्होंने समाज सुधार और पर्यावरण संरक्षण को आधार बनाकर विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 जाम्भोजी ने संत गुरु गोरखनाथ से दीक्षा प्राप्त की थी।
👉 इसके बाद उन्होंने 1485 ई. में समराथल धोरा (बीकानेर) को अपनी कर्मस्थली बनाया।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भो जी
खालसा, खाकी, नागा राजस्थान के किस संप्रदाय के भाग हैं ?
[प्रयोगशाला सहायक (भूगोल) 30.06.2022]
👉 संत दादूदयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इनके शिष्यों को पाँच भागों में बाँटा गया, जिन्हें अलग-अलग वर्ग कहा गया।
👉 ये पाँच वर्ग हैं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे/स्थानधारी और विरक्त।
👉 इनमें से खालसा, खाकी और नागा दादूपंथ के प्रमुख अंग माने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – दादूपंथ
निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे ?
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 28.06.2022]
👉 संत हरिदास जी का जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था।
👉 प्रारंभ में उन्होंने डकैती का जीवन बिताया, बाद में साधना मार्ग अपनाकर संत बने।
👉 इन्होंने निर्गुण भक्ति पर बल दिया और समाज में फैली कुरीतियों का विरोध किया।
👉 संत हरिदास जी ने निरंजनी सम्प्रदाय की स्थापना की।
✍️ सही उत्तर है – संत हरिदास
निम्नलिखित में से कौन दादूपंथी उप-संप्रदाय नहीं है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 26.03.2019]
👉 दादूपंथ की स्थापना संत दादूदयाल ने की थी।
👉 दादूपंथियों को पाँच उप-सम्प्रदायों में बाँटा गया है – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे/स्थानधारी और विरक्त।
👉 चंडाल कोई धार्मिक संप्रदाय नहीं है
✍️ सही उत्तर है – चंडाल
राजस्थान के कौन से प्रसिद्ध सन्त बीकानेर के कातरियासर से संबंधित हैं ?
[प्रयोगशाला सहायक (गृह विज्ञान) 30.06.2022]
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 यह स्थान उनकी कर्मस्थली रहा और यहीं उन्होंने जीवित समाधि ली।
👉 कतरियासर को जसनाथी सम्प्रदाय की प्रधान गद्दी माना जाता है।
👉 यहाँ प्रतिवर्ष तीन बार विशाल धार्मिक मेले आयोजित होते हैं।
✍️ सही उत्तर है – सिद्ध जसनाथ
राजस्थान रा प्रसिद्ध संत धन्ना भगत कठै रा हा ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 संत धन्ना जी का जन्म 1415 ई. में हुआ था।
👉 ये जाट समुदाय से थे और संत रामानन्द के शिष्य बने।
👉 धन्ना जी ने भक्ति को कृषि कार्य करते हुए ही अपनाया और मूर्ति पूजा का विरोध किया।
👉 इनका जन्मस्थान धुवन ग्राम (टोंक) बताया गया है, जहाँ आज भी इनकी स्मृति में मेला भरता है।
✍️ सही उत्तर है – धुवन (टोंक)
मेवात क्षेत्र के अलवर जिले में जन्म लेने वाले प्रसिद्ध संत थे
[CET (स्नातक) (चरण -II) 07.01.2023]
👉 संत लालदास जी का जन्म 1540 ई. में धोलीदूब (अलवर) में हुआ था।
👉 इन्होंने लालदासी सम्प्रदाय की स्थापना की और हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
👉 इनकी प्रमुख पीठ नगला जहाज (भरतपुर) में स्थित है।
👉 संत लालदास जी की वाणियाँ ‘चेतावणियाँ’ नाम से प्रसिद्ध हैं।
✍️ सही उत्तर है – लालदास
विश्नोई सम्प्रदाय का संस्थापक कौन था ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रोनिक्स) 23.12.2019]
👉 विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में की गई थी।
👉 इसके संस्थापक गुरु जाम्भोजी (जाम्भेश्वर जी) थे।
👉 इन्होंने समाज सुधार हेतु 29 नियम निर्धारित किए।
👉 इस सम्प्रदाय ने प्रकृति व वन्य जीव संरक्षण को अपना धर्म बनाया।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
निम्नलिखित में से कौन निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक थे ?
[सुपरवाईजर परीक्षा 06.01.2019]
👉 निरंजनी सम्प्रदाय का सम्बन्ध निर्गुण भक्ति धारा से है।
👉 इसके संस्थापक संत हरिदास जी थे।
👉 इनका जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था।
👉 इन्होंने परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहकर निर्गुण उपासना पर बल दिया।
✍️ सही उत्तर है – संत हरिदास
रामस्नेही सम्प्रदाय री प्रधान पीठ कठीनै है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत रामचरण जी थे, जिन्होंने 1760 ई. में इस सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ राजस्थान के शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
👉 यहाँ रामद्वारा नामक प्रार्थना स्थल है, जहाँ गुरु का चित्र सामने रखकर भक्ति की जाती है।
👉 शाहपुरा में संत रामचरण जी की समाधि बनी हुई है और यहीं इनका निधन 1798 ई. में हुआ था।
✍️ सही उत्तर है – शाहपुरा (भीलवाड़ा)