निम्न में से बिश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक कौन हैं?
[L.S.A. Exam 13.06.2025]
👉 श्री गुरु जम्भेश्वर (जाम्बोजी) बिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक थे।
👉 उनका जन्म 1451 ई. में नागौर जिले के पिपासर गाँव में हुआ था।
👉 उन्होंने वर्ष 1485 ई. में बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना की थी।
👉 बिश्नोई संप्रदाय के 29 नियम हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवन की रक्षा पर बल देते हैं।
👉 इसी सिद्धांत के तहत अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोईयों ने खेजड़ी के वृक्षों की रक्षा हेतु बलिदान दिया था।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
लालनाथजी, चोखनाथजी, और सवाईदास जी सन्त किस सम्प्रदाय से सम्बन्धित है ?
[पर्यवेक्षक परीक्षा 29.11.2015]
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इस सम्प्रदाय में निर्गुण भक्ति और अग्नि नृत्य विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
👉 संत लालनाथ जी, चोखनाथ जी और सवाईदास जी इसी सम्प्रदाय के प्रमुख संत रहे।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी सम्प्रदाय
'निष्कलंक' (पवित्र और पाप रहित) नामक संप्रदाय की स्थापना किसने की ?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (4th Phase) 02.12.2024]
👉 संत मावजी का जन्म 1714 ई. में साबला (डूंगरपुर) में हुआ था।
👉 इन्हें उनके अनुयायी ‘वागड़ का धणी’ और ‘कल्कि अवतार’ मानते हैं।
👉 इन्होंने माही और सोम नदी के संगम पर बेणेश्वर धाम की स्थापना की।
👉 संत मावजी ने ही ‘निष्कलंक सम्प्रदाय’ (पवित्र और पाप रहित) की स्थापना की।
✍️ सही उत्तर है – संत माव जी
बालिन्दजी के गुरु कौन थे ?
ग्रामसेवक & छात्रा. अधीक्षक 18.12.2016
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इनके कुल 152 शिष्य थे, जिनमें 52 को बावन स्तम्भ कहा गया।
👉 इन्हीं शिष्यों में से एक प्रमुख शिष्य बालिन्द जी भी थे।
👉 अतः बालिन्द जी के गुरु संत दादू दयाल जी थे।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल जी
नीचे दो कथन दिए गए हैं :
कथन (I) : दादूदयाल (राजस्थान के कबीर) का जन्म अलवर के धोलीदुब/दोलीदुब गाँव में 1542 AD में फाल्गुन शुक्ल नवमी को हुआ था।
कथन (II) : दादू ने सामान्य भाषा ( साधुक्कडी) में ब्रह्म, जीव, जगत और मोक्ष पर अपने उपदेश दिए।
उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें।
[CET (स्नातक) 28.09.2024 चतुर्थ चरण]
👉 कथन (I) – दादू दयाल जी का जन्म अहमदाबाद में 1544 ई. (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी) को हुआ था, न कि अलवर के धोलीदूब गाँव में 1542 ई. को। अतः यह कथन गलत है।
👉 कथन (II) – दादू जी ने अपने उपदेश साधुक्कड़ी मिश्रित भाषा में दिए, जिनमें ब्रह्म, जीव, जगत और मोक्ष पर विचार व्यक्त किए। यह कथन सही है।
✍️ सही उत्तर है – कथन (I) गलत है, लेकिन कथन (II) सही है।
फूलडोल महोत्सव किस सम्प्रदाय का महत्वपूर्ण उत्सव है ?
कनिष्ठ अनुदेशक (मैके. डीजल) 16.11.2024
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत रामचरण जी थे।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
👉 यहाँ प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण 1 से चैत्र कृष्ण 5 तक फूलडोल महोत्सव आयोजित होता है।
👉 यह महोत्सव इस सम्प्रदाय का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक उत्सव माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – रामस्नेही सम्प्रदाय
‘राजस्थान के कबीर' के रूप में किसे जाना जाता है ?
[Driver Exam 23 Nov 2025]
🔹 व्याख्या
👉
दादूदयाल
निर्गुण भक्ति
धारा के प्रमुख
संत थे।
👉
उनके
उपदेश और विचार
कबीर
की भक्ति परंपरा
से मिलते-जुलते
हैं।
👉
इसलिए
उन्हें ‘राजस्थान
के कबीर’
के रूप में जाना
जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दादूदयाल
'जसनाथी सम्प्रदाय' की स्थापना किसने की :- [*]
[JEN (Civil डिप्लोमा) 16.10.2016]
📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' घोषित किया गया है।
"मंत्र राजप्रकाश" किस संत के आध्यात्मिक विचारों का संकलन है
[JEN (यांत्रिकी डिग्री) 21.08.2016]
👉 संत हरिदास जी ने 16वीं शताब्दी में निरंजनी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 इन्होंने निर्गुण भक्ति पर बल दिया और समाज की कुरीतियों का विरोध किया।
👉 इनके उपदेशों और आध्यात्मिक विचारों का संकलन “मंत्र राजप्रकाश” नामक ग्रंथ में किया गया।
👉 इसमें परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहकर स्मरण करने की बात कही गई है।
✍️ सही उत्तर है – संत हरिदास
संत धन्ना का जन्म राजस्थान के किस जिले में हुआ था ?
[Jamadar Grade II 27.12.2025]
🔹 व्याख्या
👉
संत
धन्ना
भक्ति आंदोलन
के प्रमुख निर्गुण
संत माने
जाते हैं।
👉
उनका
जन्म राजस्थान
के टोंक
जिले के
धुआँ (धुवां)
गाँव
में हुआ था।
👉
वे
सरल भक्ति और
निष्कपट श्रद्धा
के लिए प्रसिद्ध
थे।
✍️ सही उत्तर है – टोंक
________ बिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक हैं।
[कनिष्ठ अनुदेशक (Drafts) 04.01.2025]
👉 बिश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में की गई थी।
👉 इसके संस्थापक गुरु जाम्भोजी (जाम्भेश्वर जी) थे।
👉 उन्होंने समाज को 29 नियम दिए और प्रकृति संरक्षण को धर्म का हिस्सा बनाया।
👉 इनके अनुयायी आज भी वन्य जीवों और वृक्षों की रक्षा को सर्वोच्च मानते हैं।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
सुप्रसिद्ध 'कायाबेलि" ग्रंथ की रचना किसने की ?
[JEN (यांत्रिकी डिग्री) 21.08.2016]
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के महान संत थे।
👉 इन्होंने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 दादू जी की रचनाओं में “दादू वाणी, दादूदयाल रा दुहा” और “कायाबेलि” प्रमुख हैं।
👉 कायाबेलि ग्रंथ में आत्मशुद्धि और भक्ति मार्ग का विस्तृत वर्णन है।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
निरंजनी सम्प्रदाय के संस्थापक कौन हैं ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (टर्नर) 09.01.2025]
👉 निरंजनी सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति धारा से सम्बद्ध है।
👉 इसके प्रवर्तक संत हरिदास जी थे।
👉 इनका जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था।
👉 संत हरिदास जी ने परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहकर निर्गुण उपासना का प्रचार किया।
✍️ सही उत्तर है – हरिदास
राजस्थान के किस सन्त द्वारा 'सत्यभामाज़ी नुं रूसण' की रचना की गयी ?
[उद्योग प्रचार अधिकारी 22.07.2018]
👉 मीरा बाई 16वीं शताब्दी की महान कृष्ण भक्त कवयित्री थीं।
👉 उनका जन्म कुड़की (ब्यावर, अजमेर) में हुआ और विवाह चित्तौड़ के भोजराज से हुआ।
👉 मीराबाई ने अनेक भक्ति पदों व ग्रंथों की रचना की।
👉 इनमें ‘सत्यभामाजी नुं रूसण’ भी उनकी रचना मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – मीराबाई
जाम्भोजी ने अपने शरीर का त्याग किस स्थान पर किया था ?
कनिष्ठ अनुदेशक (मैके. डीजल) 16.11.2024
👉 गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 उन्होंने समाज को 29 नियम दिए और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।
👉 1536 ई. में उन्होंने अपना शरीर त्याग किया।
👉 यह घटना बीकानेर जिले के लालासर गाँव में हुई थी।
✍️ सही उत्तर है – लालासर
वर्ष 1911 में राजस्थान में श्री गोगा जी के मंदिर का पुनर्निर्माण निम्नलिखित में से किसने कराया था?
[4th Grade 5th Phase) 21.09.2025]
👉 श्री गोगा जी का मंदिर राजस्थान का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। गोगा जी का मंदिर गोगामेडी में है जहां गोगा जी का समाधि स्थल है बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने 1911 में इस मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण करवाया था इस मंदिर का मुख्य द्वार मकबरानुमा बना हुआ है जिस पर "बिस्मिल्लाह "लिखा है इसका निर्माण पूर्व में फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था
👉 पुनर्निर्माण कार्य 26 जून 1911 को सम्पन्न हुआ था।
👉 इस अवसर पर मंदिर को सफेद संगमरमर से भव्य रूप में पुनः निर्मित किया गया।
👉 यह कार्य गोगा जी की लोकभक्ति और आस्था के प्रतीक स्वरूप किया गया था।
✍️ सही उत्तर है – महाराजा गंगा सिंह
दादू दयाल का जन्म हुआ था:
[CET (10+2) 23.10.2024 चतुर्थ चरण]
👉 संत दादू दयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के महान संत थे।
👉 इनका जन्म 1544 ई. में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी को हुआ था।
👉 दादू जी का जन्मस्थान अहमदाबाद (गुजरात) बताया गया है।
👉 बाद में वे राजस्थान आए और नरैना (जयपुर) को अपनी कर्मस्थली बनाया।
✍️ सही उत्तर है – अहमदाबाद
निम्नलिखित में से कौन निरंजनी संप्रदाय के संस्थापक हैं ?
[JEN CIVIL कृषि 07.02.2025]
👉 निरंजनी सम्प्रदाय निर्गुण भक्ति धारा से सम्बद्ध है।
👉 इसके संस्थापक संत हरिदास जी थे।
👉 इनका जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था।
👉 संत हरिदास जी ने परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहकर निर्गुण उपासना का प्रचार किया और समाज की कुरीतियों का विरोध किया।
✍️ सही उत्तर है – संत हरिदास
जसनाथजी को कतरियासर बीकानेर के पास किस शासक ने भूमि दान में दी ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कंप्यूटर) 10.01.2025]
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 वे गोरखनाथ जी के शिष्य थे और जीवन भर ब्रह्मचारी रहे।
👉 दिल्ली के सुल्तान सिकन्दर लोदी ने इन्हें कतरियासर में 500 बीघा भूमि दान में दी।
✍️ सही उत्तर है – सिकन्दर लोदी
रसिक संप्रदाय का प्रवर्तक कौन था ?
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 रसिक सम्प्रदाय में भगवान राम और सीता की माधुर्य भाव भक्ति की जाती है। इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत अग्रदास जी थे।
👉 अग्रदास जी, संत कृष्णदास पयहारी के शिष्य थे।
👉 इनके प्रिय शिष्य नाभादास ने प्रसिद्ध ग्रंथ ‘भक्तमाल’ की रचना की।
👉 ईसरदास - यह राजस्थान के महाकवि या भक्त ईश्वर दास जी के रूप में जाने जाते है बाड़मेर जिले के भादरेश गांव में एक संत थे जिन्होंने हरि रस और हाला झाला की कुंडलियां नामक ग्रंथों की रचना की
✍️ सही उत्तर है – अग्रदास
उस कवयित्री का नाम जो कृष्ण को समर्पित थी और जिसे 'वागड़ की मीरा' के नाम से भी जाना जाता था।
[Patwar Exam (Shift II) 17.08.2025]
👉 गवरी बाई राजस्थान की प्रसिद्ध भक्ति कवयित्री थीं।
👉 उन्हें उनके कृष्ण भक्ति और समर्पण के कारण ‘वागड़ की मीरा’ कहा जाता है।
👉 वे भगवान कृष्ण की अनन्य भक्त थीं और अपनी रचनाओं में प्रेम, भक्ति और विरह के भाव प्रकट करती थीं।
👉 कई लोग उन्हें मीराबाई का पुनर्जन्म भी मानते थे।
👉 उनकी कविताएँ वागड़ क्षेत्र की भक्ति परंपरा और लोकसंस्कृति को जीवंत बनाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – गवरी बाई
निम्न में से वल्लभ सम्प्रदाय की “पुष्टिमार्ग शाखा" का प्रमुख केन्द्र कौन-सा रहा है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कंप्यूटर) 10.01.2025]
👉 वल्लभ सम्प्रदाय को ही पुष्टिमार्ग सम्प्रदाय कहा जाता है।
👉 इसके प्रवर्तक वल्लभाचार्य जी थे, जिन्होंने कृष्ण के बालरूप की भक्ति पर बल दिया।
👉 वल्लभ सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र नाथद्वारा (राजसमंद) है।
👉 यहाँ स्थित श्रीनाथजी मंदिर इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा
जसनाथी पंथ के प्रसिद्ध अग्नि नृत्य की उत्पत्ति राजस्थान के किस स्थान से हुई ?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (4th Phase) 02.12.2024]
👉 जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में की।
👉 इस सम्प्रदाय का प्रमुख और प्रसिद्ध धार्मिक अनुष्ठान अग्नि नृत्य है।
👉 इसमें अनुयायी जलते अंगारों पर नंगे पैर नृत्य करते हैं।
👉 इस नृत्य की उत्पत्ति राजस्थान के बीकानेर क्षेत्र से हुई।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर
धन्ना किसका शिष्य था ?
[CET (10+2) 23.10.2024 तृतीय चरण]
👉 संत धन्ना जी का जन्म 1415 ई. में धुवन ग्राम (टोंक) में हुआ था।
👉 वे प्रारम्भ में मूर्तिपूजक थे, परन्तु बाद में भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर हुए।
👉 धन्ना जी ने संत रामानन्द से दीक्षा प्राप्त की।
👉 गुरु रामानन्द के प्रभाव से इन्होंने निर्गुण भक्ति को अपनाया।
✍️ सही उत्तर है – रामानन्द
'अलखिया सम्प्रदाय' की स्थापना किसने की ?
ग्रामसेवक & छात्रा. अधीक्षक 18.12.2016
👉 अलखिया सम्प्रदाय का सम्बन्ध निर्गुण भक्ति धारा से है।
👉 इस सम्प्रदाय के प्रवर्तक स्वामी लालगिरी जी थे।
👉 इनका जन्म सुलखनिया गाँव (चुरू) में हुआ था।
👉 अलखिया सम्प्रदाय की प्रधान पीठ बीकानेर में स्थित है।
✍️ सही उत्तर है – लाल गिरी
महिला संत दयाबाई _______ की शिष्या थी ।
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेः
[पशु परिचर (6th Phase) 03.12.2024]
👉 दयाबाई 18वीं शताब्दी की प्रसिद्ध महिला संत कवयित्री थीं।
👉 वे संत चरणदास जी की प्रमुख शिष्या थीं।
👉 उनकी रचनाओं में दया बोध और विनय मालिका प्रमुख हैं।
👉 दयाबाई ने भी सहजोबाई की तरह अपने लेखन में मेवाती बोली का प्रयोग किया।
✍️ सही उत्तर है – संत चरणदास
निम्न में से राजस्थान के कौन-से संत गागरोण के खीची राजपूत शासक थे ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (ड्राइंग) 20.11.2024]
👉 संत पीपा जी का जन्म 1425 ई. में गागरोन (झालावाड़) के खींची राजपरिवार में हुआ था।
👉 वे गागरोन के राजपूत शासक भी रहे।
👉 बाद में इन्होंने संत रामानन्द से दीक्षा ली और निर्गुण भक्ति का प्रचार किया।
👉 संत पीपा की प्रमुख रचना ‘चिन्तावणी’ मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – पीपा
'निम्बार्क' सम्प्रदाय की मुख्य पीठ कहाँ है ?
[लिपिक ग्रेड -II 12.08.2018]
👉 निम्बार्क सम्प्रदाय के प्रवर्तक निम्बार्काचार्य जी माने जाते हैं।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ सलेमाबाद (अजमेर) में स्थित है।
👉 यहाँ की पीठ की स्थापना आचार्य परशुराम देव ने की थी।
👉 इस सम्प्रदाय में राधा-कृष्ण की युगल उपासना की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – सलेमाबाद
"दयाबाई" एवं " सहजोबाई " का सम्बंध किस सम्प्रदाय से रहा है ?
[JEN Mechenical डिग्री 16.10.2016]
👉 दयाबाई और सहजोबाई दोनों ही संत चरणदास जी की प्रमुख शिष्याएँ थीं।
👉 इन्होंने अपने लेखन में मेवाती भाषा का प्रयोग किया।
👉 दयाबाई की रचनाएँ – दया बोध व विनय मालिका, जबकि सहजोबाई की रचनाएँ – सहजप्रकाश, सात वार निर्णय, 16 तिथि निर्णय प्रसिद्ध हैं।
✍️ सही उत्तर है – चरणदासी सम्प्रदाय
नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन ( Assertion) A के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason) R के रूप में:
अभिकथन A: कृष्ण भक्त, कवयित्री और गायिका मीराबाई राजस्थान के महानतम संतों में से एक थीं।
कारण R: उनकी भक्ति की मुख्य विशेषता यह थी कि उन्होंने ज्ञान से अधिक भावना और श्रद्धा को महत्व दिया था।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :
[REET Mains (L-1) 20.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉
मीराबाई
प्रसिद्ध कृष्ण
भक्त
कवयित्री और
संत
थीं।
👉
इसलिए
अभिकथन
A
तथ्यात्मक
रूप से सही
है।
👉
उनकी
भक्ति में भावना
और श्रद्धा
को विशेष महत्व
दिया गया।
👉
यह
विशेषता मीराबाई
की भक्ति
को स्पष्ट करती
है।
✍️ सही उत्तर है – A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
निम्नलिखित में से कौन पंच पीर में शामिल नहीं है ?
[Patwar Exam (Shift I) 17.08.2025]
👉 वीर तेजाजी महाराज का जन्म खरनाल नागौर में धोलिया गोत्र जाट परिवार में हुआ था इन्हें गायों के मुक्तिदाता और" काला और बाला" के देवता के रूप में पूजा जाता है
👉 राजस्थान के पंच पीर पाँच ऐसे लोकदेवता हैं, जिन्हें जनमानस में एकता और आस्था का प्रतीक माना जाता है। इनमें पाबूजी, गोगाजी, रामदेवजी, मेहाजी और हड़बूजी शामिल हैं।
👉 ये पाँचों लोकदेवता धार्मिक सद्भाव, लोकविश्वास और वीरता के प्रतीक हैं।
👉 तेजाजी को राजस्थान में अत्यधिक सम्मान प्राप्त है, परंतु वे पंच पीरों में शामिल नहीं हैं।
👉 तेजाजी को प्रायः सर्पदंश से रक्षा करने वाले लोकदेवता के रूप में पूजा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – तेजाजी
अपने जीवन के अंतिम वर्षों में, संत मीराबाई _________ चली गई।
[JEN (Diploma) 06.02.2025]
👉 संत मीराबाई 16वीं शताब्दी की महान कृष्ण भक्त कवयित्री थीं।
👉 पति भोजराज की मृत्यु के बाद वे पूरी तरह कृष्ण भक्ति में लीन हो गईं।
👉 चित्तौड़ में प्रताड़ना मिलने के बाद उन्होंने मेड़ता और फिर वृंदावन का रुख किया।
👉 अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वे द्वारका (गुजरात) चली गईं और वहीं उनका अंत हुआ।
✍️ सही उत्तर है – द्वारका, गुजरात
वह राजस्थानी संत जिनकी रचनाएँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं:
[4th Grade 5th Phase) 21.09.2025]
👉 धन्ना भगत जी राजस्थान के प्रसिद्ध भक्ति संत थे, जिन्होंने निर्गुण भक्ति मार्ग का प्रचार किया।
👉 वे कृषक परिवार से थे और अपनी सरलता, ईमानदारी व परमात्मा के प्रति निष्कपट भक्ति के लिए प्रसिद्ध थे।
👉 उनकी रचनाएँ ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब’ में भी संकलित हैं, जिससे उनकी आध्यात्मिक महत्ता सिद्ध होती है।
👉 उन्होंने समाज में भेदभाव, पाखंड और अंधविश्वास का विरोध किया।
✍️ सही उत्तर है – धन्ना भगत जी
निम्न में से कौन-सा मीरा बाई का जन्म स्थान है ?
[कर सहायक 14.10.2018]
👉 मीरा बाई का जन्म 1498 ई. में वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था।
👉 वे भगवान कृष्ण की महान भक्त और संत कवयित्री थीं।
👉 मीरा बाई का जन्मस्थान कुड़की गाँव (वर्तमान अजमेर-ब्यावर क्षेत्र) माना जाता है।
👉 उनका बचपन का नाम पेमल था और पालन-पोषण उनके दादा राव दूदा (मेड़ता) ने किया।
✍️ सही उत्तर है – कुड़की
बिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक का नाम बताएं।
[4th Grade (2nd Phase) 19.09.2025]
👉 श्री गुरु जम्भेश्वर (जाम्बोजी) बिश्नोई संप्रदाय के संस्थापक थे।
👉 उनका जन्म 1451 ई. में नागौर जिले के पिपासर गाँव में हुआ था।
👉 उन्होंने वर्ष 1485 ई. में बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना की थी।
👉 बिश्नोई संप्रदाय के 29 नियम हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और वन्य जीवन की रक्षा पर बल देते हैं।
👉 इसी सिद्धांत के तहत अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 बिश्नोईयों ने खेजड़ी के वृक्षों की रक्षा हेतु बलिदान दिया था।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
कौनसा कूट सुमेलित नहीं हैं ?
लोक सन्त - जन्म वर्ष
A) मीरा - 1498 ई
B) दादू दयाल - 1544 ई
C) सन्त जसनाथ जी - 1482 ई
D) सन्त चरणदास - 1503 ई
[पशुधन सहायक (LSA) 21.08.2016]
👉 मीरा बाई का जन्म 1498 ई. में कुड़की (ब्यावर-अजमेर) में हुआ था।
👉 संत दादू दयाल जी का जन्म 1544 ई. में अहमदाबाद में हुआ।
👉 संत जसनाथ जी का जन्म 1482 ई. में हुआ और उन्होंने जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 जबकि संत चरणदास जी का वास्तविक जन्म वर्ष 1703 ई. है, न कि 1503 ई.।
✍️ सही उत्तर है – D
सहजोबाई का गुरु कौन था ?
[PTI ग्रेड -III 30.09.2018]
👉 सहजोबाई 18वीं शताब्दी की प्रसिद्ध भक्त कवयित्री थीं।
👉 वे संत चरणदास जी की प्रमुख शिष्या थीं।
👉 इन्होंने सहजप्रकाश, सात वार निर्णय, 16 तिथि निर्णय जैसे ग्रन्थों की रचना की।
👉 सहजोबाई ने अपने जीवन में गुरु चरणदास जी को ही सर्वोपरि माना।
✍️ सही उत्तर है – चरणदास
राजस्थान के निम्नलिखित लोक देवताओं में से किसकी पूजा मुसलमान “रामशाह-पीर” के रूप में करते हैं?
[4th Grade 6th Phase) 21.09.2025]
👉 संत रामदेवजी राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता हैं, जिन्हें मुसलमान “रामसा-पीर” के रूप में पूजते हैं।
👉 उन्हें यह उपाधि मक्का से आए पाँच पीरों ने उनकी चमत्कारी शक्तियों से प्रभावित होकर दी थी।
👉 कथा के अनुसार, जब पीरों ने उनकी परीक्षा लेनी चाही, तो रामदेवजी ने मक्का में रखे बर्तनों को रूणीचा में प्रकट कर दिया।
👉 इस चमत्कार से प्रभावित होकर पीरों ने उन्हें “रामसा-पीर” (पीरों के पीर) की उपाधि दी।
👉 वे हिंदू-मुस्लिम एकता, भाईचारे और सामाजिक समरसता के प्रतीक माने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – रामदेवजी
निम्न में से कौन सी रचना (Text) जम्भोजी द्वारा रचित है ?
[CET (10+2) 23.10.2024 तृतीय चरण]
👉 गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 उन्होंने समाज सुधार और भक्ति प्रचार हेतु अपनी शिक्षाओं को वाणी के रूप में प्रस्तुत किया।
👉 उनकी रचनाओं में प्रमुख हैं – 120 शब्द वाणियाँ, जाम्भसागर, जाम्भसंहिता और विश्नोई धर्मप्रकाश।
👉 इसलिए ‘विश्नोई धर्मप्रकाश’ जाम्भोजी की रचना है।
✍️ सही उत्तर है – विश्नोई धर्मप्रकाश
'फूलडोल महोत्सव' किस सम्प्रदाय की विशिष्टता है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 07.01.2025]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना संत रामचरण जी ने 18वीं शताब्दी में की थी।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में स्थित है।
👉 यहाँ प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण 1 से चैत्र कृष्ण 5 तक फूलडोल महोत्सव आयोजित होता है।
👉 यह महोत्सव रामस्नेही सम्प्रदाय का सबसे विशिष्ट धार्मिक उत्सव माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – रामस्नेही सम्प्रदाय
राजस्थान के महत्वपूर्ण संत, पीपा, मूल रूप से निम्न स्थान के शासक थे:
[4th Grade (4th Phase) 20.09.2025]
👉 संत पीपा राजस्थान के गागरोन (झालावाड़) के खींची चौहान वंशीय शासक थे।
👉 उनका बाल्यकालीन नाम प्रतापराव खींची था।
👉 सांसारिक जीवन से विरक्त होकर उन्होंने संत रामानंद से दीक्षा ग्रहण की और भक्ति आंदोलन से जुड़े।
👉 उन्होंने समाज में समानता, भक्ति और निर्गुण ब्रह्म की उपासना का प्रचार किया।
👉 संत पीपा ने क्षत्रिय समाज में धार्मिक सुधार और सद्भाव के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।
✍️ सही उत्तर है – गागरोन
चरणदासी सम्प्रदाय की प्रधान पीठ कहाँ है ?
[JEN (Civil Degree) 21.08.2016]
👉 चरणदासी सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत चरणदास जी थे।
👉 इनका जन्म 1703 ई. में डेहरा (अलवर) में हुआ था।
👉 1782 ई. में दिल्ली में इनका निधन हुआ और यहीं पर इनकी समाधि बनाई गई।
✍️ सही उत्तर है – दिल्ली
अग्नि नृत्य राजस्थान के किस सम्प्रदाय का प्रसिद्ध नृत्य है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कार्यशाला) 19.11.2024]
������ जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना 1504 ई. में संत जसनाथ जी ने कतरियासर (बीकानेर) में की।
👉 इस सम्प्रदाय के अनुयायियों का प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान अग्नि नृत्य है।
👉 इसमें साधु अनुयायी जलते हुए अंगारों पर नंगे पैर नृत्य करते हैं।
👉 यह नृत्य उनकी गहन आस्था और साहस का प्रतीक माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जसनाथी सम्प्रदाय
एक शासक एवं सन्त पीपा किस स्थान से संबंधित थे
[प्रयोगशाला सहायक 13.11.2016]
👉 संत पीपा जी का जन्म 1425 ई. में हुआ था।
👉 वे गागरोन (झालावाड़) के खींची राजपरिवार से सम्बन्धित थे।
👉 पीपा जी गागरोन के राजपूत शासक भी रहे।
👉 बाद में उन्होंने संत रामानन्द से दीक्षा लेकर भक्ति मार्ग अपनाया।
✍️ सही उत्तर है – गागरोन
निम्नलिखित में से किस संत को “राजस्थान का कबीर” कहा जाता है ?
[REET Mains L-2 Hindi 19.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉 दादू दयाल जी को उनकी सामाजिक सुधार की विचारधारा के कारण राजस्थान का कबीर कहते हैं।
👉 उन्होंने दादू पंथ की स्थापना की और उनके उपदेश सधुक्कड़ी भाषा में रचित हैं।
👉 संत दादू ने निर्गुण भक्ति का संदेश दिया और आपसी भाईचारे पर बल दिया।
👉 उनकी मुख्य पीठ नारायणा (जयपुर) में स्थित है जहाँ उनकी शिक्षाएं आज भी सुरक्षित हैं।
✍️ सही उत्तर है – दादूदयाल
निम्नलिखित में से कौन-से सूफी संत नहीं है ?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (1st Phase) 01.12.2024]
👉 संत दादू दयाल जी 16वीं शताब्दी के महान निर्गुण भक्ति संत थे।
👉 इन्होंने 1574 ई. में दादूपंथ (परब्रह्म सम्प्रदाय) की स्थापना की।
👉 दादू जी को उनकी शिक्षाओं के कारण ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
'राजस्थान के कबीर' के नाम से कौन विख्यात है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (सुईंग) 09.01.2025]
👉 संत दादू दयाल जी 16वीं शताब्दी के महान निर्गुण भक्ति संत थे।
👉 इन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध कर निर्गुण निराकार ईश्वर की उपासना पर बल दिया।
👉 1574 ई. में इन्होंने दादूपंथ (परब्रह्म सम्प्रदाय) की स्थापना की।
👉 इनके विचारों और शिक्षाओं के कारण इन्हें ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
निम्नलिखित में से कौन निर्गुण उपासना का अनुयायी था ? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनेः)
[CET (10+2) 24.10.2024 पंचम चरण]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध कर निर्गुण निराकार ईश्वर की उपासना पर बल दिया।
👉 इनके उपदेश साधुक्कड़ी मिश्रित भाषा में मिलते हैं।
👉 दादू जी को उनकी भक्ति धारा के कारण ‘राजस्थान का कबीर’ भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
जोधपुर में महामन्दिर राजस्थान के किस संप्रदाय की प्रमुख गद्दी है ?
[लिपिक ग्रेड -II 16.09.2018]
👉 नाथ पंथ शैव मत की एक प्रमुख शाखा है, जिसके प्रवर्तक मत्स्येन्द्रनाथ माने जाते हैं।
👉 राजस्थान में नाथ पंथ का सबसे बड़ा केन्द्र महामंदिर (जोधपुर) है।
👉 इस मंदिर का निर्माण महाराजा मानसिंह ने 1805 ई. में कराया था।
👉 यह स्थल नाथ सम्प्रदाय की प्रधान गद्दी के रूप में प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – नाथ पंथ
राजस्थान में धार्मिक आन्दोलन को प्रारम्भ करने का श्रेय किस संत को दिया जाता है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (रोजगार) 18.11.2024]
👉 संत धन्ना जी का जन्म 1415 ई. में टोंक जिले के धुवन ग्राम में हुआ था।
👉 वे संत रामानन्द के शिष्य बने और निर्गुण भक्ति का प्रचार किया।
👉 इन्होंने कृषि कार्य करते हुए ही भक्ति मार्ग को अपनाया।
👉 राजस्थान में धार्मिक एवं भक्ति आन्दोलन का प्रारम्भ करने का श्रेय इन्हें दिया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – धन्ना
बिश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक कौन हैं ?
[लिपिक ग्रेड-II 19.08.2018]
👉 बिश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में की गई थी।
👉 इसके प्रवर्तक गुरु जाम्भोजी (जाम्भेश्वर जी) थे।
👉 जाम्भोजी ने समाज के लिए 29 नियम निर्धारित किए।
👉 इस सम्प्रदाय ने प्रकृति व वन्य जीव संरक्षण को धर्म का हिस्सा बनाया।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
विश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक कौन थे ?
[JEN (Agriculture) 22.02.2025]
👉 विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना 1485 ई. में की गई थी।
👉 इसके संस्थापक गुरु जाम्भोजी (जाम्भेश्वर जी) थे।
👉 उन्होंने समाज को 29 नियम दिए, जिनमें प्रकृति और जीव संरक्षण पर विशेष बल था।
👉 इस सम्प्रदाय के अनुयायी हरे वृक्षों और वन्य जीवों की रक्षा को धर्म मानते हैं।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
दादूपंथ की कितनी शाखाएँ थीं ?
[अन्वेषक परीक्षा 21.08.2016]
👉 संत दादूदयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 इनके शिष्यों ने आगे चलकर इस पंथ को कई भागों में विभाजित किया।
👉 दादूपंथ की कुल 5 शाखाएँ मानी जाती हैं।
👉 ये हैं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे (स्थानधारी) और विरक्त।
✍️ सही उत्तर है – 05
मलूकनाथ किस पंथ के साधु थे ?
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 मलूकनाथ जी निर्गुण भक्ति परंपरा के संत माने जाते हैं।
👉 ये दादूदयाल जी के पुत्र गरीबदास जी द्वारा स्थापित गरीबदासी पंथ के साधु थे।
👉 गरीबदासी पंथ में सत्य, साधुता और भक्ति पर विशेष बल दिया जाता है।
👉 मलूकनाथ जी ने भी इसी पंथ की उपासना और साधना पद्धति को आगे बढ़ाया।
✍️ सही उत्तर है – गरीबदासी पंथ
बिश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक कौन थे ?
कनिष्ठ अनुदेशक (कंप्यूटर प्रयो.) 16.11.2024
👉 बिश्नोई संप्रदाय की स्थापना 1485 ई. में हुई थी।
👉 इसके प्रवर्तक गुरु जांभोजी (जाम्भेश्वर जी) थे।
👉 इन्होंने समाज के लिए 29 नियम निर्धारित किए।
👉 यह संप्रदाय विशेषकर प्रकृति और वन्य जीव संरक्षण के लिए प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – जांभोजी
राजस्थान में धार्मिक आंदोलन शुरू करने का श्रेय किसे दिया जाता है ?
[REET Mains L-2 Sci Math 18.01.26]
🔹 व्याख्या
👉
राजस्थान
में धार्मिक
आंदोलन
की शुरुआत का
श्रेय संत
धन्ना
को दिया जाता
है।
👉
संत
धन्ना भक्ति
आंदोलन
के प्रमुख संत
माने जाते हैं।
👉
उन्होंने
समाज में भक्ति
और समता
का संदेश दिया।
👉
उनकी
शिक्षाओं से
धार्मिक
जागृति
को बढ़ावा मिला।
✍️ सही उत्तर है – संत धन्ना
निरंजनी संप्रदाय के संस्थापक कौन थे ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कार्यशाला) 19.11.2024]
👉 निरंजनी संप्रदाय का सम्बन्ध निर्गुण भक्ति धारा से है।
👉 इसके प्रवर्तक संत हरिदास जी थे।
👉 इनका जन्म 1455 ई. में कापड़ोद (डीडवाना-कुचामन) में हुआ था।
👉 इन्होंने परमात्मा को ‘अलख निरंजन’ कहकर निर्गुण उपासना पर बल दिया और समाज की कुरीतियों का विरोध किया।
✍️ सही उत्तर है – संत हरिदास
राजस्थान में 'तेरह पंथ के प्रवर्तक रहे हैं
[पर्यवेक्षक परीक्षा 29.11.2015]
👉 तेरापंथ सम्प्रदाय जैन धर्म की एक प्रमुख शाखा है।
👉 इसके प्रवर्तक आचार्य भीखण जी (आचार्य भीक्षु) रहे हैं।
👉 इनका जन्म 1726 ई. में कान्टालिया (पाली) में हुआ था।
👉 तेरापंथ सम्प्रदाय की प्रमुख गद्दी सिरियारी (पाली) में स्थित है।
✍️ सही उत्तर है – भीखण जी
ये रामस्नेही सम्प्रदाय के संस्थापक माने जाते हैं
[कनिष्ठ अनुदेशक (पलम्बर) 08.01.2025]
👉 रामस्नेही सम्प्रदाय की स्थापना 18वीं शताब्दी में की गई।
👉 इसके प्रवर्तक संत रामचरण जी थे, जिनका जन्म 1719 ई. सोड़ा (डिग्गी, टोंक) में हुआ।
👉 इन्होंने 1760 ई. में इस सम्प्रदाय की नींव रखी।
👉 इस सम्प्रदाय की प्रधान पीठ शाहपुरा (भीलवाड़ा) में है।
✍️ सही उत्तर है – रामचरण जी
'बागड़ की मीरा' के नाम से निम्न में से कौन प्रसिद्ध है ?
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 गवरी बाई डूंगरपुर की प्रसिद्ध कृष्ण भक्त संत थीं।
👉 इन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भक्ति और प्रेमभाव का प्रचार किया।
👉 डूंगरपुर महारावल शिवसिंह ने इनके लिए 1829 ई. में बालमुकुन्द मंदिर का निर्माण करवाया।
👉 अपनी गहन भक्ति के कारण इन्हें ‘वागड़ की मीरा’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – गवरी बाई
भक्तिकाल की मुख्य विशेषताएँ हैं :
(a) भक्ति आंदोलन का प्रवर्तन भक्ति संतों द्वारा किया गया था।
(b) उन्होंने अपने उपदेशों से सभी प्रकार का भेदभाव समाप्त करने की कोशिश की थी।
(c) कुछ भक्ति संत राजाओं के चरित्र, गुणों और अन्य सराहनीय कार्यों का गुण वर्णन करते थे।
(d) निर्गुण संतों ने गुरू की महिमा एवं महत्व के बिना समस्त समय भगवान का स्मरण करने की महत्ता पर बल दिया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें :
[REET Mains ( L-1) 17.01.2026]
'राजस्थान के कबीर' के नाम से कौन प्रसिद्ध है ?
[JEN विद्युत डिग्री 07.02.2025]
👉 संत दादूदयाल जी निर्गुण भक्ति धारा के महान संत थे।
👉 इनका जन्म 1544 ई. में अहमदाबाद में हुआ था और बाद में ये नरैना (जयपुर) आकर बसे।
👉 इन्होंने दादूपंथ (परब्रह्म सम्प्रदाय) की स्थापना की।
👉 मूर्ति पूजा का विरोध, निर्गुण निराकार ईश्वर की उपासना और सामाजिक समानता के संदेश के कारण इन्हें ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दादूदयाल
"रामस्नेही पंथ” के संस्थापक कौन है ?
[Platoon Commander 22.11.2025]
🔹 व्याख्या
👉
“रामस्नेही
पंथ” एक भक्तिमार्गी
संप्रदाय है।
👉
इसकी
स्थापना राम
चरणजी
ने की थी।
👉
यह
पंथ भक्ति एवं
सरल जीवन पर
आधारित है।
✍️ सही उत्तर है – राम चरणजी
भक्ति आंदोलन के संतों में से एक मीरा बाई का जन्म ___________ में हुआ था और उनका विवाह ___________ में हुआ था।
a. मेवाड़
b. मारवाड़
c. मेडता
d. मौरवी
[JEN विद्युत डिप्लोमा 08.02.2025]
👉 मीरा बाई का जन्म 1498 ई. में कुड़की (मेड़ता, नागौर) में हुआ था।
👉 बचपन से ही वे भगवान कृष्ण की अनन्य उपासिका रहीं।
👉 इनका विवाह महाराणा सांगा के पुत्र भोजराज के साथ मेवाड़ (चित्तौड़) में हुआ था।
👉 पति की मृत्यु के बाद मीरा पूरी तरह कृष्ण भक्ति में लीन हो गईं।
✍️ सही उत्तर है – क्रमश: c और a
राजस्थान के कौन से प्रसिद्ध संत बीकानेर में कातरियासर से संबंधित हैं ?
[संगणक परीक्षा 05.05.2018]
👉 संत जसनाथ जी ने 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 यह स्थान उनकी कर्मस्थली रहा और यहीं उन्होंने जीवित समाधि ली।
👉 कतरियासर को जसनाथी सम्प्रदाय की प्रधान गद्दी माना जाता है।
👉 यहाँ प्रतिवर्ष तीन बार विशाल धार्मिक मेले आयोजित होते हैं।
✍️ सही उत्तर है – सिद्ध जसनाथ
'सबदवाणी' किसके वचनों का सामूहिक नाम है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (MNV) 07.01.2025]
👉 गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 उन्होंने समाज को धार्मिक और सामाजिक जीवन के लिए 29 नियम दिए।
👉 उनके मुख से निकली वाणियों को सबदवाणी, जाम्भवाणी या गुरु वाणी कहा जाता है।
👉 इन वचनों में प्रकृति संरक्षण, अहिंसा और सत्य आचरण का संदेश निहित है।
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
राजस्थान में 'निरंजनी संप्रदाय' के संस्थापक कौन थे ?
[4th Grade (1st Phase) 19.09.2025]
👉 निरंजनी संप्रदाय राजस्थान का प्रसिद्ध भक्ति धार्मिक समुदाय है।
👉 इसके संस्थापक संत हरिदास थे, जिन्होंने 16वीं से 17वीं शताब्दी के बीच इसकी स्थापना की।
👉 उनका जन्म कापड़ोद (डिडवाना के पास, नागौर) में हुआ था।
👉 संत हरिदास के बारे में मान्यता है कि वे पहले डकैत थे, परंतु एक महात्मा के उपदेशों से प्रभावित होकर संत बन गए।
👉 यह संप्रदाय मध्य राजस्थान में विशेष रूप से प्रचलित है और भक्ति, नैतिकता व साधना पर आधारित है।
✍️ सही उत्तर है – संत हरिदास
राजस्थान के किस लोकदेवता के माता-पिता का नाम हंसादेवी और लोहटजी था ?
[उद्योग निरीक्षक परीक्षा 24.06.2018]
👉 गुरु जाम्भोजी का जन्म 1451 ई. में पीपासर (नागौर) में हुआ था।
👉 इनके पिता का नाम लोहट जी पंवार और माता का नाम हंसा देवी था।
👉 1485 ई. में इन्होंने समराथल (बीकानेर) में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 प्रकृति और जीव संरक्षण को धर्म का हिस्सा बनाने के कारण ये लोकदेवता के रूप में पूजे जाते हैं।
👉 संत पीपा जी -इनके पिता का नाम राव कढावा जी खींची और माता का नाम लक्ष्मीबती था यह गागरोन के शासक थे , संत धन्ना जी -यह टोंक के धूवन गांव के एक जाट परिवार में पैदा हुए थे उनके पिता रामेश्वर जी/पन्ना जी थे
✍️ सही उत्तर है – जाम्भोजी
निम्नलिखित में से किस संत को, 'राजस्थान का कबीर' कहा जाता है?
[4th Grade (1st Phase) 19.09.2025]
👉 संत दादू दयाल को उनके सामाजिक और धार्मिक विचारों के कारण ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है।
👉 उन्होंने मूर्तिपूजा, जातिभेद और आडंबरों का विरोध किया तथा प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश दिया।
👉 दादू दयाल ने भी कबीर की तरह निर्गुण ब्रह्म की उपासना और ज्ञान मार्ग का अनुसरण करने की प्रेरणा दी।
👉 उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता और मानवता के मूल्य पर विशेष बल दिया।
👉 उनकी शिक्षाएँ ‘दादूवाणी’ नामक ग्रंथ में संकलित हैं, जो भक्ति और सामाजिक समरसता का आधार है।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
निम्नलिखित में से किस स्थान पर स्वामी केशवानंद (एक शिक्षाविद् एवं संत) का जन्म राजस्थान में हुआ था?
[4th Grade 5th Phase) 21.09.2025]
👉 स्वामी केशवानंद राजस्थान के प्रसिद्ध शिक्षाविद्, समाज सुधारक और संत थे।
👉 उनका जन्म दिसंबर 1883 में सीकर जिले के मगलूना गाँव में एक साधारण जाट परिवार में हुआ था।
👉 वे ठाकरसी और सारण के पुत्र थे।
👉 स्वामी केशवानंद ने शिक्षा के प्रसार, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और किसानों के उत्थान के लिए कार्य किया।
👉 उनके प्रयासों से राजस्थान में शैक्षणिक जागृति और सामाजिक सुधार की लहर फैली।
✍️ सही उत्तर है – मगलूना
'राजस्थान का कबीर' किसे कहा जाता है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (ICT) 04.01.2025]
👉 संत दादू दयाल जी 16वीं शताब्दी के निर्गुण भक्ति संत थे।
👉 इन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध कर निर्गुण निराकार ईश्वर की उपासना पर बल दिया।
👉 1574 ई. में इन्होंने दादूपंथ की स्थापना की।
👉 समानता, भक्ति और सामाजिक सुधार के कारण इन्हें ‘राजस्थान का कबीर’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दादू दयाल
खालसा, विरक्त, उत्तरादे, खाकी, नागा आदि किस पंथ की शाखाएँ हैं ? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
[कनिष्ठ अनुदेशक (STE) 05.01.2025]
👉 संत दादू दयाल जी ने 16वीं शताब्दी में दादूपंथ की स्थापना की।
👉 उनके शिष्यों ने इस पंथ को आगे बढ़ाते हुए कई शाखाओं में विभाजित किया।
👉 दादूपंथ की पाँच प्रमुख शाखाएँ हैं – खालसा, खाकी, नागा, उत्तरादे (स्थानधारी) और विरक्त।
👉 इन शाखाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में दादू जी की निर्गुण भक्ति धारा का प्रचार किया।
✍️ सही उत्तर है – दादू पंथ
निम्नलिखित रचनाओं में से कौन-सी जाम्भोजी द्वारा रचित नहीं है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 07.01.2025]
👉 गुरु जाम्भोजी ने 1485 ई. में विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की।
👉 उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – 120 शब्द वाणियाँ, जाम्भसागर, जाम्भसंहिता और विश्नोई धर्मप्रकाश।
✍️ सही उत्तर है – जम्भ पुराण
'आचिंत्य भेदाभेदवाद' का सम्बंध किस सम्प्रदाय से है ?
[JEN (Civil डिग्री) 16.10.2016]
👉 गौड़ीय सम्प्रदाय के प्रवर्तक चैतन्य महाप्रभु (1485–1533 ई.) थे।
👉 उन्होंने बंगाल में कृष्ण भक्ति को आंदोलन का रूप दिया।
👉 इनके द्वारा प्रतिपादित दर्शन ‘आचिन्त्य भेदाभेदवाद’ कहलाता है।
👉 यह सम्प्रदाय राजस्थान में मुख्यतः जयपुर के गोविन्द देव मंदिर से सम्बद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – जैतन्य सम्प्रदाय
निम्नलिखित में से कौन, राजस्थान में, कामड़िया पंथ के संस्थापक हैं ?
[4th Grade (4th Phase) 20.09.2025]
👉 कामड़िया पंथ राजस्थान का प्रसिद्ध भक्ति संप्रदाय है, जिसके संस्थापक रामदेवजी माने जाते हैं।
👉 रामदेवजी, जिन्हें रामदेव पीर भी कहा जाता है, ने इस पंथ की स्थापना सामाजिक एकता और समानता के उद्देश्य से की।
👉 उन्होंने समाज की ऊँची जातियों और दलित कही जाने वाली जातियों को एक साथ लाने का कार्य किया।
👉 संत रामदेवजी केवल लोकदेवता ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे।
👉 उनके अनुयायी हर वर्ष रामदेवजी के मेले में तेरहताली नृत्य प्रस्तुत कर अपनी भक्ति व्यक्त करते हैं।
✍️ सही उत्तर है – रामदेव
राजस्थान के किस प्रसिद्ध लोक देवता को लक्ष्मणजी का अवतार माना जाता है ?
[Patwar Exam (Shift II) 17.08.2025]
👉 पाबूजी राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता हैं, जिन्हें भगवान लक्ष्मण का अवतार माना जाता है।
👉 पारंपरिक मान्यता के अनुसार, वे भगवान राम के भाई लक्ष्मण के रूप में पूजे जाते हैं।
👉 उन्हें ‘ऊँटों के देवता’ कहा जाता है क्योंकि मारवाड़ में ऊँट लाने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है।
👉 इसके अतिरिक्त, उन्हें ‘प्लेग रक्षक देवता’ के रूप में भी पूजा जाता है।
👉 पाबूजी की कथाएँ और गाथाएँ राजस्थान की भक्ति, शौर्य और लोकविश्वास की प्रतीक हैं।
✍️ सही उत्तर है – पाबूजी
'राजस्थान की राधा' के नाम से किसे जाना जाता है?
[Patwar Exam (Shift II) 17.08.2025]
👉 मीराबाई 16वीं सदी की प्रसिद्ध कृष्ण भक्त कवयित्री थीं।
👉 उन्हें ‘राजस्थान की राधा’ कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने राधा की तरह ही श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति व्यक्त की।
👉 उनका जन्म 1498 ई. में पाली जिले के कुड़की गाँव में हुआ था।
👉 उनके गुरु संत रैदास थे, जिन्होंने उन्हें भक्ति मार्ग की प्रेरणा दी।
👉 उनकी प्रमुख कृति ‘मीरा पदावली’ है, जिसमें उनके भक्ति और समर्पण के भाव झलकते हैं।
✍️ सही उत्तर है – मीराबाई
सुमेलित कीजिए।
सम्प्रदाय प्रमुख पीठ (गद्दी)
A गूदड सम्प्रदाय (i) जोधपूर
B नवल सम्प्रदाय (ii) दाँतडा, भीलवाड़ा
C चरणदासी सम्प्रदाय (iii) दिल्ली
D अलखिया सम्प्रदाय (iv) बीकानेर
[पटवार प्री. परीक्षा 2015]
कूट
A B C D
👉 गूदड़ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ दांतड़ा (भीलवाड़ा) में है।
👉 नवल सम्प्रदाय की मुख्य पीठ जोधपुर में स्थित है।
👉 चरणदासी सम्प्रदाय की प्रधान गद्दी दिल्ली में है।
👉 अलखिया सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ बीकानेर में है।
✍️ सही उत्तर है – A-(ii), B-(i), C-(iii), D-(iv)
कॉलम A में दिए गए पंथ/सम्प्रदाय का मिलान कॉलम B में दिए गए संस्थापक/प्रवर्तक के साथ कीजिए।
|
कॉलम A (पंथ/सम्प्रदाय) |
कॉलम B (संस्थापक/प्रवर्तक) |
|
a. बिश्नोई पंथ |
I. गुरु जम्भेश्वर (जंभोजी) |
|
b. निरंजनी पंथ |
II. कृष्णदास पायहारी |
|
c. चरणदास पंथ |
III. चरणदास जी |
|
d. राजस्थान में रामानुज वैष्णव पंथ (गलता जी केन्द्र) |
IV. संत हरिदास (हरिसिंह सांखला) |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
[VDO (ग्राम विकास अधिकारी) 02.11.2025]
👉 बिश्नोई पंथ के संस्थापक गुरु जम्भेश्वर (जंभोजी) थे, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण और 29 नियमों पर आधारित यह पंथ स्थापित किया।
👉 निरंजनी पंथ की स्थापना संत हरिदास (हरिसिंह सांखला) ने की थी, जिन्होंने भक्ति और वैराग्य का संदेश दिया।
👉 चरणदास पंथ के प्रवर्तक चरणदास जी थे, जिन्होंने नैतिक जीवन और ईश्वर भक्ति का प्रचार किया।
👉 राजस्थान में रामानुज वैष्णव पंथ (गलता जी केन्द्र) के प्रवर्तक कृष्णदास पायहारी माने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – a – I, b – IV, c – III, d – II
संत जसनाथ जी के बारे में कौनसा कथन सही नहीं है ?
[JEN (Civil Diploma) 21.08.2016]
👉 संत जसनाथ जी का जन्म 1482 ई. में हुआ और ये गोरखनाथ जी के शिष्य थे।
👉 इन्होंने गोरख मालिया (बीकानेर) नामक स्थान पर 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की।
👉 बाद में 1504 ई. में कतरियासर (बीकानेर) में जसनाथी सम्प्रदाय की स्थापना की।
✍️ सही उत्तर है – “कतरियासर में इन्होंने 12 वर्ष तक साधना की”