जिण भांत फौज में नगारौ चाइजै उणी भांत बात में कांई जरूरी हुवै ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 राजस्थान की लोकभाषा और लोककथाओं में कई कहावतें प्रचलित हैं।
👉 इनमें नगारों का चाज फौज में आवश्यक माना गया है।
👉 उसी प्रकार बात के लिए हुंकारौ जरूरी बताया गया है।
👉 यह कहावत लोकजीवन की सीधी सोच और अनुभवजन्य ज्ञान को दर्शाती है।
✍️ सही उत्तर है – हुंकारौ
राजावटी एवं नागरचोल किस बोली की उप-बोलियाँ हैं ?
[वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक 19.06.2022]
👉 राजस्थान की एक प्रमुख बोली है ढूँढाड़ी।
👉 इस बोली की कई उप-बोलियाँ प्रचलित हैं।
👉 इनमें राजावटी और नागरचोल प्रमुख उप-बोलियाँ हैं।
👉 इनका प्रयोग ढूँढाड़ क्षेत्र में होता है।
✍️ सही उत्तर है – ढूँढाड़ी
'बातां री फुलवारी' कितने खण्डों में विभक्त है ?
[CET (स्नातक) (चरण -I) 07.01.2023]
👉 'बातां री फुलवारी' राजस्थानी साहित्य की एक प्रमुख कृति है।
👉 इसमें लोकजीवन और सांस्कृतिक प्रसंगों का सुंदर वर्णन है।
👉 यह ग्रंथ कुल 14 खण्डों में विभक्त है।
👉 इसकी संरचना इसे विशेष बनाती है।
✍️ सही उत्तर है – 14
राजस्थानी भासा रो पैलो उपन्यास कुणसो मान्यौ जावै ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 राजस्थानी भाषा का प्रथम उपन्यास माना जाने वाला ग्रंथ कनक सुन्दर है।
👉 आधुनिक राजस्थान का पहला उपन्यास साहित्य में विशेष स्थान रखता है।
👉 इस उपन्यास का नाम कनक-सुंदरी है।
👉 इसका प्रकाशन वर्ष 1903 ई. बताया जाता है।
👉 इसे प्रसिद्ध साहित्यकार शिवचंद्र भरतिया ने लिखा था।
✍️ सही उत्तर है – कनक सुन्दर
'ढोला मारु रा दूहा' कृति रै नायक ढोला रो असल नांव कोई हो ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 राजस्थानी साहित्य की प्रसिद्ध कृति ‘ढोला मारु रा दूहा’ है।
👉 इस कृति का नायक ढोला बताया गया है।
👉 ढोला का असली नाम साल्हकुमार है।
👉 यह कृति राजस्थानी लोकजीवन और संस्कृति की अमूल्य धरोहर है।
✍️ सही उत्तर है – साल्हकुमार
निम्नलिखित में से किस बोली पर गुजराती भाषा का स्पष्ट प्रभाव है ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -A) 11.12.2022]
👉 राजस्थान की विभिन्न बोलियों पर पड़ोसी राज्यों का भी प्रभाव देखा जाता है।
👉 दक्षिण राजस्थान की वागड़ी बोली पर गुजराती भाषा का असर अधिक है।
👉 इसका कारण इसका भौगोलिक समीपत्व और सांस्कृतिक सम्पर्क है।
👉 इसलिए वागड़ी बोली पर गुजराती का स्पष्ट प्रभाव मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
निम्न में से कौन-सा क्षेत्र ढूंढाड़ी बोली के लिये जाना जाता है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रोनिक्स) 23.12.2019]
👉 राजस्थान की प्रमुख बोलियों में से एक है ढूंढाड़ी।
👉 यह बोली विशेष रूप से ढूंढाड़ क्षेत्र में बोली जाती है।
👉 इस क्षेत्र में मुख्य रूप से जयपुर और टौंक जिले शामिल हैं।
👉 ढूंढाड़ी बोली इन जिलों की सांस्कृतिक पहचान है।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर–टौंक
अलवर जिले के बहरोड़ और मुण्डावर में कौनसी बोली बोली जाती है ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (विष) 14.09.2019]
👉 राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रवार बोलियाँ बोली जाती हैं।
👉 अलवर जिले के बहरोड़ और मुण्डावर क्षेत्र की अपनी विशेष बोली है।
👉 यहाँ पर प्रमुख रूप से अहीरवाटी बोली बोली जाती है।
👉 यह बोली स्थानीय सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी है।
✍️ सही उत्तर है – अहीरवाटी
रूसी कथाओं के राजस्थानी अनुवाद 'गजबण' के लिए सोवियत लैण्ड नेहरु पुरस्कार किसे दिया गया ?
[JEN (Civil Diploma) 21.08.2016]
👉 राजस्थानी साहित्य में कई कृतियों का अन्य भाषाओं से अनुवाद हुआ है।
👉 रूसी कथाओं के राजस्थानी अनुवाद 'गजबण' विशेष उल्लेखनीय है।
👉 इस अनुवाद के लिए लेखिका लक्ष्मी कुमारी चूण्डावत को सम्मानित किया गया।
👉 उन्हें इसके लिए सोवियत लैण्ड नेहरु पुरस्कार मिला।
✍️ सही उत्तर है – लक्ष्मी कुमारी चूण्डावत
लोककथा कैवणियै नै कांई कैयो जावै ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा में अनेक प्रकार की लोककथाएँ पाई जाती हैं।
👉 लोककथाओं को अलग-अलग नामों से संप्रेषित किया जाता है।
👉 जब लोककथा को कैवणियै नै कहा जाता है, तो इसे बातपोस कहा जाता है।
👉 यह लोकजीवन की संस्कृति और बोलचाल का परिचायक है।
✍️ सही उत्तर है – बातपोस
लोक काव्य सैली री रचना कुणसी है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 ढोला मारू रा दूहा राजस्थानी लोक साहित्य की एक प्रसिद्ध गाथा काव्य रचना है।
👉 इसमें राजा ढोला और राजकुमारी मारू की प्रेम कहानी का वर्णन है।
👉 यह काव्य मध्यकालीन राजस्थानी साहित्य की प्रमुख लोककथा मानी जाती है।
👉 इसकी रचना कवि कल्लोल ने की थी।
✍️ सही उत्तर है – ढोला मारू रा दूहा
राजस्थानी भाषा का शब्दकोश किसने निर्मित किया ?
[संगणक परीक्षा 03.03.2024]
👉 राजस्थानी भाषा का पहला और बृहत् शब्दकोश पद्मश्री डॉ. सीताराम लालस ने तैयार किया।
👉 यह शब्दकोश 'राजस्थानी सबदकोश' और 'राजस्थानी-हिन्दी वृहद कोश' नाम से प्रसिद्ध है।
👉 इसे बनाने में उन्होंने 40 वर्षों से अधिक का अथक प्रयास किया।
👉 यह शब्दकोश 1962 ई. में पहली बार प्रकाशित हुआ।
✍️ सही उत्तर है – डॉ. सीताराम लालस
'बांगड़ी' बोली किस क्षेत्र में बोली जाती है ? [*]
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 राजस्थान में कई क्षेत्रीय बोलियाँ प्रचलित हैं।
👉 इनमें से एक है बांगड़ी बोली।
👉 यह बोली स्थानीय जनजीवन और संस्कृति से जुड़ी है।
'कोसिया' क्या था ?
[JEN (Civil डिग्री) 16.10.2016]
👉 राजस्थान के कई क्षेत्रों की अपनी विशेष उपज और उत्पाद प्रसिद्ध रहे हैं।
👉 पचपदरा क्षेत्र अपने नमक उत्पादन के लिए जाना जाता है।
👉 यहाँ पर निकाले गए नमक को विशेष नाम दिया गया।
👉 इस नमक को ही 'कोसिया' कहा जाता था।
✍️ सही उत्तर है – पचपदरा का नमक
डूंगरपुर-बांसवाड़ा क्षेत्र में कौन-सी भाषा बोली जाती है ?
[पशुधन सहायक (LSA) 21.10.2018]
👉 राजस्थान के दक्षिणी अंचल की अपनी विशिष्ट बोली है।
👉 यह बोली मुख्यतः डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में बोली जाती है।
👉 इसे राजस्थानी भाषा की एक प्रमुख उपबोली माना जाता है।
👉 इस बोली को वागड़ी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
वागड़ी राजस्थान के किस क्षेत्र में बोली जाती है ?
[वनपाल परीक्षा 06.11.2022]
👉 राजस्थान की एक प्रमुख बोली वागड़ी है।
👉 यह बोली मुख्य रूप से दक्षिणी राजस्थान में बोली जाती है।
👉 वागड़ी का प्रमुख क्षेत्र डूंगरपुर और बांसवाड़ा है।
👉 यहाँ की संस्कृति और लोकजीवन इसी बोली से जुड़ा है।
✍️ सही उत्तर है – डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा
राजस्थानी रा चावा नाटककार है -
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 राजस्थानी साहित्य में अनेक नाटककारों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
👉 प्रसिद्ध कृति ‘राजस्थानी रा चावा’ का लेखन अर्जुनदेव चारण ने किया।
👉 यह कृति राजस्थानी भाषा के नाट्य साहित्य का उल्लेखनीय उदाहरण है।
👉 इनके लेखन में राजस्थानी की संस्कृति और परंपराएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं।
✍️ सही उत्तर है – अर्जुनदेव चारण
ग्रियर्सन ने किस बोली को 'भीली' बोली की संज्ञा दी है ?
JEN (सिविल डिग्रीधारक) 18.05.2022
👉 भाषाविद ग्रियर्सन ने राजस्थान की बोलियों का गहन अध्ययन किया।
👉 उन्होंने कुछ बोलियों को विशेष श्रेणियों में रखा।
👉 ग्रियर्सन ने वागड़ी बोली को 'भीली बोली' की संज्ञा दी।
👉 इसका कारण इसका भील जनजाति क्षेत्र में प्रचलित होना है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
कवि सूर्यमल्ल मिश्रण की रचनाएं किस भाषा में हैं ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रिशियन) 24.03.2019]
👉 सूर्यमल्ल मिश्रण राजस्थान के महान कवि और इतिहासकार थे।
👉 उनकी रचनाएँ विशेष रूप से एक ही बोली में लिखी गईं।
👉 यह बोली हाड़ौती कहलाती है।
👉 सूर्यमल्ल मिश्रण को हाड़ौती भाषा का महान कवि माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – हाड़ौती
मेवाती बोली राजस्थान के ____ क्षेत्रों में बोली जाती है ।
[कनिप्ठ अनुदेशक (वायरमैन) 24.12.2019]
👉 राजस्थान की प्रमुख बोलियों में से एक है मेवाती।
👉 यह बोली मुख्यतः मेवात अंचल में बोली जाती है।
👉 इसका प्रयोग विशेषकर अलवर और भरतपुर जिलों में होता है।
👉 यह बोली स्थानीय संस्कृति और जनजीवन से जुड़ी है।
✍️ सही उत्तर है – अलवर और भरतपुर
मारवाड़ी बोली के साहित्यिक रूप को क्या कहा जाता है
[प्रयोगशाला सहायक (गृह विज्ञान) 30.06.2022]
👉 राजस्थान की प्रमुख बोली मारवाड़ी है।
👉 इसके साहित्यिक रूप को विशेष नाम से जाना जाता है।
👉 इस साहित्यिक रूप को डिंगल कहा जाता है।
👉 डिंगल में अनेक रचनाएँ की गई हैं।
✍️ सही उत्तर है – डिंगल
पूर्वी राजस्थानी री उपबोली है
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 राजस्थानी भाषा को विद्वानों ने दो भागों में बाँटा है।
👉 इनमें एक भाग पूर्वी राजस्थानी माना गया है।
👉 इसकी प्रमुख उपबोलियों में चौरासी भी सम्मिलित है।
👉 यह बोली ढूंढाड़ी वर्ग की उपबोली के रूप में मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – चौरासी
निम्नलिखित राजस्थानी बोलियों में से किस पर गुजराती का मजबूत प्रभाव है ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (सीरम) 15.09.2019]
👉 राजस्थान की कई बोलियों पर पड़ोसी राज्यों की भाषाओं का असर है।
👉 वागड़ी बोली राजस्थान के दक्षिणी अंचल की प्रमुख बोली है।
👉 इस पर पड़ोसी राज्य गुजरात का विशेष प्रभाव दिखाई देता है।
👉 इसलिए वागड़ी बोली पर गुजराती का मज़बूत प्रभाव है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
भीलवाड़ा खेतर री बोली है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 राजस्थान में अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी-अपनी बोलियाँ प्रचलित हैं।
👉 भीलवाड़ा क्षेत्र में प्रमुख रूप से मेवाड़ी बोली बोली जाती है।
👉 यह बोली मेवाड़ अंचल की बोली मानी जाती है।
👉 इसका प्रयोग भीलवाड़ा सहित आसपास के जिलों में होता है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ी
वागड़ी बोली राजस्थान के ___ भाग में बोली जाती है।
[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 26.03.2019]
👉 राजस्थान की एक प्रमुख बोली वागड़ी है।
👉 यह बोली मुख्यतः आदिवासी क्षेत्रों में बोली जाती है।
👉 वागड़ी बोली का प्रसार डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में है।
👉 इसलिए इसे राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी भाग की बोली कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – दक्षिण-पश्चिमी
बूंदी एवं कोटा क्षेत्र में कौनसी बोली बोली जाती है ?
[CET (10+2 प्रथम चरण) 04.02.2023]
👉 राजस्थान के प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट बोली है।
👉 बूंदी और कोटा क्षेत्र में प्रमुख रूप से एक ही बोली प्रचलित है।
👉 इस अंचल की बोली को हाड़ौती कहा जाता है।
👉 यह बोली स्थानीय संस्कृति और जनजीवन से जुड़ी हुई है।
✍️ सही उत्तर है – हाड़ौती
'राजस्थानी भाषा दिवस' मनाया जाता है ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 18.09.2021]
👉 राजस्थान में भाषा और संस्कृति से जुड़े विशेष दिवस मनाए जाते हैं।
👉 इनमें से एक है राजस्थानी भाषा दिवस।
👉 यह दिवस प्रतिवर्ष 21 फरवरी को मनाया जाता है।
👉 इस दिन राजस्थानी भाषा के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष जोर दिया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – 21 फरवरी
मारवाड़ी कठै री मुख्य बोली नीं है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 25.02.2023]
👉 राजस्थान की सबसे बड़ी बोली मारवाड़ी है।
👉 यह मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान में बोली जाती है।
👉 अतः भरतपुर मारवाड़ी की मुख्य बोली नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – भरतपुर
सूर्यमल्ल मिश्रण की रचनाओं में राजस्थान की कौनसी बोली प्रयुक्त हुई है ?
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 29.06.2022]
👉 सूर्यमल्ल मिश्रण राजस्थान के महान कवि और इतिहासकार थे।
👉 उनकी रचनाओं में राजस्थान की एक प्रमुख बोली का प्रयोग हुआ।
👉 यह बोली हाड़ौती कहलाती है।
👉 सूर्यमल्ल मिश्रण को हाड़ौती भाषा का महान कवि माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – हाड़ौती
"वंश भास्कर" किस भाषा में लिखा गया है ?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिप्लोमा) 20.05.2022
👉 वंश भास्कर एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ है।
👉 इसे कवि सूर्यमल्ल मिश्रण ने रचा था।
👉 इसमें विभिन्न राजवंशों का वर्णन मिलता है।
👉 यह ग्रंथ डिंगल भाषा में लिखा गया है।
✍️ सही उत्तर है – डिंगल
कुवलयमाला में कितनी देशी भाषाओं का उल्लेख है ?
[वनरक्षक (चतुर्थ चरण) 13.11.2022]
👉 कुवलयमाला एक प्रसिद्ध कथा-संग्रह है।
👉 इसमें अनेक भाषाओं का उल्लेख किया गया है।
👉 इस ग्रंथ में कुल 18 देशी भाषाओं का जिक्र मिलता है।
👉 यह इसकी विशेष पहचान है।
✍️ सही उत्तर है – 18
"इला न देणी, आपणी, हालरिया हुलराय। पूत सिखावै पालणे, मरण बड़ाई माय॥"
उपर्युक्त पंक्तियाँ किस ग्रन्थ से ली गई हैं?
[CET (स्नातक) (चरण -III) 08.01.2023]
👉 प्रस्तुत पंक्तियाँ राजस्थानी साहित्य की एक प्रसिद्ध रचना से ली गई हैं।
👉 इन पंक्तियों में माँ के स्नेह और संस्कार का चित्रण है।
👉 यह उद्धरण वीर सतसई ग्रंथ से लिया गया है।
👉 यह ग्रंथ वीरता और जीवन मूल्यों से संबंधित है।
✍️ सही उत्तर है – वीर सतसई
कुणसी साहित्यिक कृति राजस्थानी साहित्य रै आदिकाल सूं संबंधित है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
👉 राजस्थानी साहित्य के विकास को विभिन्न कालों में विभाजित किया गया है।
👉 इसमें आदिकाल की कुछ रचनाएँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।
👉 आदिकाल से संबंधित एक प्रमुख कृति 'नेमिनाथ रास' है।
👉 यह रचना प्रारंभिक राजस्थानी साहित्य का प्रतिनिधित्व करती है।
✍️ सही उत्तर है – नेमिनाथ रास
मेवाती बोली से सम्बन्धित जिला कौनसा है ?
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड - III 19.09.2019]
👉 राजस्थान की एक प्रमुख बोली मेवाती है।
👉 यह बोली मुख्य रूप से मेवात अंचल में बोली जाती है।
👉 इसका प्रमुख जिला अलवर है।
👉 यहाँ की संस्कृति और जनजीवन पर इसका गहरा प्रभाव है।
✍️ सही उत्तर है – अलवर
रामस्वरूप किसान रो कहाणी संग्रै नीं है -
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 रामस्वरूप किसान के प्रमुख कहानी संग्रह हैं – तीखी धार, हाडाखोड़ी और बारीक बात।
👉 इनके नाम से धान कथावां कोई कहानी संग्रह नहीं है।
👉 वास्तव में धान कथावां एक राजस्थानी कहानी संग्रह है।
👉 यह संग्रह साहित्यकार सत्यनारायण सोनी का है।
✍️ सही उत्तर है – धान कथावां
कुवलयमाला नामक कथा संग्रह में कितनी देशी भाषाओं के नामों का उल्लेख हुआ है ?
[CET (10+2 षष्टम चरण) 11.02.2023]
👉 कुवलयमाला एक प्रसिद्ध कथा संग्रह है।
👉 इसमें अनेक भाषाओं का उल्लेख किया गया है।
👉 इस ग्रंथ में कुल 18 देशी भाषाओं के नाम मिलते हैं।
👉 यह इसकी विशेषता मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – 18
राजस्थान की किस बोली पर मराठी भाषा का प्रभाव है ?
[लिपिक ग्रेड -II 12.08.2018]
👉 राजस्थान की कुछ बोलियों पर पड़ोसी राज्यों की भाषाओं का प्रभाव देखा जाता है।
👉 मालवी बोली पर विशेष रूप से मराठी भाषा का असर दिखाई देता है।
👉 इसका कारण मालवा अंचल का महाराष्ट्र क्षेत्र से ऐतिहासिक संपर्क है।
👉 इसलिए मालवी पर मराठी का प्रभाव माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मालवी
निम्न में से कौन सा युग्म सही है ?
[पटवार (तृतीय चरण) 24.10.2021]
संस्थान स्थापना
👉 राजस्थान की कला व संस्कृति को प्रोत्साहन देने हेतु कई संस्थाएँ स्थापित की गईं।
👉 इन्हीं में एक है राजस्थान संगीत नाटक अकादमी।
👉 इसका गठन वर्ष 1957 ई. में किया गया।
👉 यह अकादमी राज्य की संगीत, नृत्य और नाटक विधाओं को बढ़ावा देती है।
✍️ सही उत्तर है – राजस्थान संगीत नाटक अकादमी – 1957
डूंगरपुर एवं बांसवाड़ा क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली है -
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
👉 राजस्थान के दक्षिणी अंचल की अपनी विशिष्ट बोली है।
👉 यह बोली मुख्यतः डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में बोली जाती है।
👉 इसे राजस्थानी भाषा की एक प्रमुख उपबोली माना जाता है।
👉 इस बोली को वागड़ी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
तोरावाटी, काठैडा, राजावाटी बोलियों का सम्बन्ध किस क्षेत्र से
[पशुधन सहायक (LSA) 16.10.2016]
👉 राजस्थान की प्रमुख बोलियों में से एक है ढूँढाड़ी।
👉 इसकी कई उपबोलियाँ विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाती हैं।
👉 इनमें तोरावाटी, काठैड़ा और राजावाटी बोलियाँ शामिल हैं।
👉 ये सभी बोलियाँ ढूँढाड़ क्षेत्र से संबंधित हैं।
✍️ सही उत्तर है – ढूँढाड़ी
वै कुणसा कवि है जकां री भगति अर चमत्कार री वजै सूं लोग बांनै 'परमेसर' रै समान बतावण लागा हा ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 16वीं सदी में ईसरदास बारहठ प्रसिद्ध कवि और संत थे।
👉 वे भगवान कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और चमत्कारी कार्यों के लिए जाने जाते थे।
👉 लोग उन्हें ईसर- सो-परमेश्वर कहते थे, जिसका अर्थ है परमेश्वर के समान।
👉 वे राजस्थान और गुजरात में लोकप्रिय लोककवि थे।
👉 इनका जन्म बाड़मेर जिले के भद्रेश गांव में वैष्णव चारण परिवार में हुआ था।
✍️ सही उत्तर है – ईसरदास बारहठ
'निमाड़ी एवं रागड़ी' किस बोली की उप- बोलियाँ हैं ?
VDO Pre. (चतुर्थ चरण) 28.12.2021
👉 राजस्थान की कई प्रमुख बोलियों की अपनी-अपनी उपबोलियाँ हैं।
👉 मालवी बोली की भी कई उपबोलियाँ प्रचलित हैं।
👉 इनमें निमाड़ी और रागड़ी दोनों शामिल हैं।
👉 ये उपबोलियाँ सीमावर्ती क्षेत्रों में बोली जाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – मालवी
सीताराम लालस का सम्बन्ध रहा है -
[CET (स्नातक) (चरण -II) 07.01.2023]
👉 सीताराम लालस राजस्थानी भाषा के प्रमुख विद्वान थे।
👉 उन्होंने राजस्थानी भाषा के संरक्षण हेतु विशेष कार्य किया।
👉 उनका संबंध मुख्य रूप से राजस्थानी शब्दकोश से रहा।
👉 इसी कार्य से उन्हें विशेष पहचान मिली।
✍️ सही उत्तर है – राजस्थानी शब्दकोश
दादू पंथ का अधिकांश साहित्य किस बोली में लिपिबद है ?
[पर्यवेक्षक परीक्षा 29.11.2015]
👉 राजस्थान के भक्ति आंदोलन में दादू पंथ का विशेष स्थान है।
👉 दादू पंथ से संबंधित अधिकांश साहित्य राजस्थानी भाषा में मिलता है।
👉 यह साहित्य विशेष रूप से ढूंढाड़ी बोली में लिपिबद्ध है।
👉 ढूंढाड़ी बोली जयपुर-ढूंढाड़ क्षेत्र की प्रमुख बोली है।
✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़ी बोली
"जागीर" शब्द किस भाषा से लिया गया है ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -B) 11.12.2022]
👉 राजस्थानी भाषा में कई शब्द अन्य भाषाओं से गृहीत हुए हैं।
👉 इनमें से एक शब्द है "जागीर"।
👉 यह शब्द मूलतः फारसी भाषा से लिया गया है।
👉 बाद में इसका प्रयोग राजस्थानी में होने लगा।
✍️ सही उत्तर है – फारसी
बाँसवाड़ा, डूंगरपुर और इसके आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में कौन सी भाषा बोली जाती है ?
[CET (स्नातक) 27.09.2024 द्वितीय चरण]
👉 राजस्थान के दक्षिणी पहाड़ी अंचल की अपनी विशिष्ट बोली है।
👉 यह बोली मुख्य रूप से बाँसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में बोली जाती है।
👉 आसपास के आदिवासी एवं पहाड़ी क्षेत्रों में भी यही बोली प्रचलित है।
👉 इस बोली को वागड़ी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
पश्चिमी राजस्थान की प्रधान बोली है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (मैकेनिक) 23.12.2019]
👉 राजस्थान के विभिन्न अंचलों की अलग-अलग प्रधान बोलियाँ हैं।
👉 पश्चिमी राजस्थान में सबसे अधिक बोली जाने वाली बोली मारवाड़ी है।
👉 यह बोली जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर आदि जिलों में प्रचलित है।
👉 मारवाड़ी इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी
कुवलयमाला में राजस्थान की कितनी भाषाओं का उल्लेख है ? [*]
[बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक 18.06.2022]
📌 नोट - इस प्रश्न को बोर्ड ने डिलीट (Delete) माना है।
'निमाड़ी एवं रागड़ी' किस बोली की विशेषता है ?
ग्रामसेवक & छात्रा. अधीक्षक 18.12.2016
👉 राजस्थान की प्रमुख बोलियों में से एक है मालवी।
👉 इस बोली की अपनी कई उपबोलियाँ हैं।
👉 इनमें प्रमुख हैं – निमाड़ी और रागड़ी।
👉 ये उपबोलियाँ मालवी बोली की विशेषता मानी जाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – मालवी
निम्नलिखित में किस एक जिले में 'गोड़वाड़ी बोली' बोली जाती है?
[CET (स्नातक) (चरण -IV) 08.01.2023]
👉 राजस्थान की अनेक बोलियों में से एक है गोड़वाड़ी बोली।
👉 यह बोली मुख्य रूप से सीमित क्षेत्र में प्रचलित है।
👉 इसका प्रयोग विशेषकर जालौर जिले में होता है।
👉 इसलिए यह जालौर क्षेत्र की पहचान मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – जालौर
उदयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ में कौन सी बोली ज्यादातर बोली जाती है ?
[स्टेनोग्राफर परीक्षा 21.03.2021]
👉 राजस्थान में प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट बोली है।
👉 उदयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में एक ही बोली प्रमुख है।
👉 इस अंचल में अधिकतर लोग मेवाड़ी बोली बोलते हैं।
👉 यह बोली मेवाड़ अंचल की पहचान मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ी
राजस्थानी उपन्यास और नाटक के प्रथम लेखक कौन थे? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
[CET स्नातक 28.09.2024 तृतीय चरण]
👉 राजस्थानी साहित्य में उपन्यास और नाटक दोनों विधाओं की शुरुआत आधुनिक काल में हुई।
👉 इन दोनों विधाओं के प्रथम लेखक के रूप में एक ही नाम स्वीकार किया जाता है।
👉 वह नाम है शिव चन्द्र भारतीय।
👉 उन्होंने राजस्थानी साहित्य में नयी राह दिखाई।
✍️ सही उत्तर है – शिव चन्द्र भारतीय
आं में सूं कुणसी बोली राजस्थान में नीं बोलीजै ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 राजस्थान में अनेक क्षेत्रीय बोलियाँ प्रचलित हैं।
👉 इनमें मारवाड़ी, मेवाड़ी, बागड़ी, हाड़ौती, वागड़ी, मालवी आदि प्रमुख हैं।
👉 प्रश्न में दी गई अवधी बोली राजस्थान की बोली नहीं है।
👉 अवधी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश क्षेत्र में बोली जाती है।
✍️ सही उत्तर है – अवधी
मालवी री उपबोली है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 मालवी भाषा की कई प्रमुख उपबोलियाँ प्रचलित हैं।
👉 इनमें निमाड़ी, रागड़ी, सोंडवाड़ी प्रमुख मानी जाती हैं।
👉 साथ ही उज्जयिनी, रतलामी और पाटवी का भी महत्व है।
👉 ये सभी उपबोलियाँ अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में बोली जाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – रागड़ी
सीताराम लालस का क्षेत्र रहा -
JEN (विद्युत डिग्रीधारक) 19.05.2022
👉 सीताराम लालस राजस्थानी भाषा के प्रमुख विद्वान थे।
👉 उनका योगदान विशेषकर राजस्थानी भाषा और कोश निर्माण में रहा।
👉 उन्होंने राजस्थानी भाषा का पहला और बृहत् शब्दकोश तैयार किया।
👉 इसी कारण उनका नाम राजस्थानी साहित्य में अमर है।
✍️ सही उत्तर है – राजस्थानी भाषा एवं कोश रचना
'राजस्थानी सबदकोस' त्यार करणै रो मैहताऊ काम कुण करियौ
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 राजस्थानी भाषा के संरक्षण और विकास में अनेक विद्वानों ने योगदान दिया।
👉 इनमें सीताराम लालस का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
👉 इन्होंने ‘राजस्थानी सबदकोस’ तैयार करने का बड़ा कार्य किया।
👉 इस कार्य से राजस्थानी भाषा की संपदा और महत्ता और बढ़ गई।
✍️ सही उत्तर है – सीताराम लालस
दादू और उनके शिष्यों की रचनाएँ अधिकतर किस भाषा में पाई जाती है ?
[प्रयोगशाला सहायक 03.02.2019]
👉 दादूदयाल और उनके शिष्यों की रचनाएँ मुख्यतः ढूंढाड़ी और ब्रज भाषा में मिलती हैं।
👉 इनकी कुछ रचनाएँ राजस्थानी और अन्य भाषाओं में भी पाई जाती हैं।
👉 दादूदयाल स्वयं हिंदी, गुजराती और राजस्थानी भाषाओं के ज्ञाता थे।
👉 उनकी बहुभाषी प्रतिभा से भक्ति साहित्य को नई समृद्धि मिली।
✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़ी
निम्नलिखित बोलियों में से कौन-सी ढूंढाड़ी की उप बोली नहीं है ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (रसायन) 14.09.2019]
👉 ढूंढाड़ी बोली की अपनी कई उपबोलियाँ हैं।
👉 इनमें राजावटी और नागरचोल जैसी उपबोलियाँ आती हैं।
👉 अहीरवाटी बोली का संबंध ढूंढाड़ी से नहीं है।
👉 यह मुख्यतः अलवर क्षेत्र में बोली जाती है।
✍️ सही उत्तर है – अहीरवाटी
डूंगरपुर और बांसवाड़ा क्षेत्र में बोली जाने वाली बोली ______ कहलाती है।
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (प्रलेख) 22 .09.2019]
👉 राजस्थान के दक्षिणी अंचल की अपनी विशिष्ट बोली है।
👉 यह बोली मुख्यतः डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में बोली जाती है।
👉 इसे राजस्थानी भाषा की एक उपबोली माना जाता है।
👉 इस बोली को वागड़ी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
पंजाब रे अबोहर, फाजिल्का अर भटिण्डा खेतर में राजस्थानी री कुणसी बोली रो असर है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
👉 राजस्थान की सीमावर्ती बोलियों का प्रभाव पड़ोसी राज्यों में भी देखा जाता है।
👉 पंजाब के अबोहर, फाजिल्का और भटिण्डा क्षेत्र में राजस्थानी बोली का असर है।
👉 यहाँ पर विशेष रूप से बागड़ी बोली का प्रभाव पाया जाता है।
👉 यह बोली हरियाणा और पंजाब की सीमाओं तक प्रचलित है।
✍️ सही उत्तर है – बागड़ी
राजस्थानी भाषा का स्वतंत्र रूप में विश्लेषण किसने प्रस्तुत किया
[अन्वेषक परीक्षा 21.08.2016]
👉 राजस्थानी भाषा के अध्ययन में कई विद्वानों का योगदान रहा।
👉 इनमें सबसे पहले इसका स्वतंत्र रूप में विश्लेषण किया गया।
👉 यह कार्य भाषाविद जार्ज अब्राहम गियर्सन ने किया।
👉 उन्होंने राजस्थानी को एक अलग भाषा रूप में स्थापित किया।
✍️ सही उत्तर है – जार्ज अब्राहम गियर्सन
निम्नलिखित बोलियों में से कौन सी ढूंढाड़ी की उप-बोली नहीं है ?
[JEN (यांत्रिक) (डिप्लोमाधारक) 13.12.2020]
👉 ढूंढाड़ी बोली की कई उप-बोलियाँ प्रचलित हैं।
👉 इनमें राजावटी और नागरचोल जैसी उप-बोलियाँ शामिल हैं।
👉 अहीरवाटी बोली का संबंध ढूंढाड़ी से नहीं है।
👉 अहीरवाटी मुख्यतः अलवर क्षेत्र की बोली है।
✍️ सही उत्तर है – अहीरवाटी
वागड़ी बोली राजस्थान के ____ क्षेत्र में बोली जाती है।
[CET (10+2 तृतीय चरण) 05.02.2023]
👉 राजस्थान की एक प्रमुख बोली वागड़ी है।
👉 यह बोली राज्य के विशेष अंचल में बोली जाती है।
👉 वागड़ी का प्रयोग मुख्यतः डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में होता है।
👉 यह बोली राजस्थान के दक्षिण–पश्चिमी क्षेत्र की पहचान है।
✍️ सही उत्तर है – दक्षिण–पश्चिमी
मेवाती री उपबोली है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 मेवाती बोली अलवर, भरतपुर, धौलपुर आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।
👉 इस बोली के कई रूप और उपबोलियाँ पाई जाती हैं।
👉 इनमें से एक प्रमुख उपबोली अहीरवाटी कही जाती है।
👉 यह बोली मेवाती भाषा की विशिष्ट पहचान दर्शाती है।
✍️ सही उत्तर है – अहीरवाटी
रागड़ी किस बोली की उप-बोली है?
JEN (विद्युत डिप्लोमाधारक) 19.05.2022
👉 राजस्थान की कई बोलियों की अपनी-अपनी उपबोलियाँ हैं।
👉 रागड़ी इन्हीं में से एक उपबोली है।
👉 इसका संबंध मुख्य बोली मालवी से है।
👉 यह बोली सीमावर्ती अंचलों में प्रचलित है।
✍️ सही उत्तर है – मालवी
निम्न में से किस क्षेत्र में ढूंढाड़ी भाषा प्रधानता से बोली जाती है ?
[JEN (सिविल) (डिग्रीधारक) 12.09.2021]
👉 राजस्थान की प्रमुख बोलियों में से एक है ढूंढाड़ी।
👉 यह बोली मुख्यतः जयपुर, दौसा और टोंक क्षेत्र में बोली जाती है।
👉 ढूंढाड़ अंचल की पहचान इसी बोली से होती है।
👉 इसलिए इसे ढूंढाड़ी नाम दिया गया है।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर
राजस्थानी लोक में पहेली नैं कांई कैयो जावै ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 राजस्थानी लोक-साहित्य में पहेली का एक विशेष नाम प्रचलित है।
👉 लोक बोली-बानी में पहेली को अलग परिचय से जाना जाता है।
👉 इसे बुद्धि-परख और रंजन हेतु पूछा जाता है।
👉 राजस्थानी लोक में पहेली नैं ‘आडी’ कैयो जावै।
✍️ सही उत्तर है – आडी
निमाड़ी उप-बोली है
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
👉 राजस्थान में अनेक बोलियाँ और उनकी उपबोलियाँ प्रचलित हैं।
👉 मालवी बोली की भी कई उपबोलियाँ मानी जाती हैं।
👉 इन्हीं में से एक प्रमुख उपबोली है निमाड़ी।
👉 इसका प्रयोग मालवी अंचल के समीप क्षेत्रों में होता है।
✍️ सही उत्तर है – मालवी
वागड़ी बोली रो मुख्य खेतर है
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 25.02.2023]
👉 राजस्थान में कई क्षेत्रीय बोलियाँ बोली जाती हैं।
👉 इनमें वागड़ी बोली का अपना विशेष स्थान है।
👉 यह बोली मुख्य रूप से दक्षिणी राजस्थान में प्रचलित है।
👉 इसका प्रमुख क्षेत्र डूंगरपुर और बांसवाड़ा है।
✍️ सही उत्तर है – डूंगरपुर–बांसवाड़ा
अहीरवाटी बोली मुख्य रूप से राजस्थान के _________जिले में बोली जाती है।
[CET (10+2 चतुर्थ चरण) 05.02.2023]
👉 राजस्थान में कई बोलियाँ क्षेत्रवार बोली जाती हैं।
👉 अहीरवाटी बोली इन्हीं में से एक विशिष्ट बोली है।
👉 यह बोली मुख्य रूप से अलवर जिले में प्रचलित है।
👉 यहाँ की सांस्कृतिक पहचान भी इससे जुड़ी है।
✍️ सही उत्तर है – अलवर
निम्नलिखित राजस्थानी बोलियों में से किस पर गुजराती का मज़बूत प्रभाव है ?
[JEN (यांत्रिक) (डिप्लोमाधारक) 13.12.2020]
👉 राजस्थान की कई बोलियों पर पड़ोसी राज्यों की भाषाओं का प्रभाव है।
👉 वागड़ी बोली दक्षिण राजस्थान की प्रमुख बोली है।
👉 इस पर पड़ोसी राज्य गुजरात की भाषा का गहरा असर देखा जाता है।
👉 इसलिए वागड़ी पर गुजराती का मज़बूत प्रभाव है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
पश्चिमी राजस्थानी रो चावौ नांव छै
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 राजस्थान के विभिन्न अंचलों की अपनी-अपनी बोलियाँ हैं।
👉 इनमें पश्चिमी राजस्थान की बोली का विशेष महत्त्व है।
👉 इस बोली को प्रचलित रूप में मारवाड़ी कहा जाता है।
👉 मारवाड़ी बोली का प्रयोग पश्चिमी राजस्थान में सबसे अधिक होता है।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी
डूंगरपुर अर बांसवाड़ा खेतर री मुख्य बोली है
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 डूंगरपुर और बांसवाड़ा क्षेत्र की अपनी विशिष्ट लोक बोली है।
👉 इस अंचल में प्रमुख रूप से वागड़ी बोली बोली जाती है।
👉 वागड़ी बोली जनजीवन और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति से गहराई से जुड़ी है।
👉 यह बोली राजस्थानी भाषा की एक मुख्य उपबोली है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
'राजस्थानी रामायण' का रचनाकार किसे माना जाता है ?
[JEN (विधुत) (डिप्लोमाघारक) 29.11.2020]
👉 राजस्थानी साहित्य में कई धार्मिक ग्रंथों की रचना हुई।
👉 इनमें से एक प्रमुख कृति है 'राजस्थानी रामायण'।
👉 इस ग्रंथ के रचनाकार समयसुन्दर माने जाते हैं।
👉 यह कृति धार्मिक व साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
✍️ सही उत्तर है – समयसुन्दर
'एकलिंगमहात्म्य' किस भाषा में लिखा गया है ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 03.03.2019]
👉 'एकलिंगमहात्म्य' राजस्थान का एक प्रसिद्ध ग्रंथ है।
👉 इसमें मेवाड़ के इतिहास और धार्मिक परंपराओं का वर्णन है।
👉 यह ग्रंथ प्राचीन संस्कृत भाषा में लिखा गया है।
👉 इसे ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – संस्कृत
गोडवाड़ी उपबोली किस राजस्थानी भाषा से सम्बन्धित है ?
[शारीरिक शिक्षा अध्यापक 25.09.2022]
👉 राजस्थान की कई उपबोलियाँ प्रमुख बोलियों से जुड़ी हैं।
👉 गोड़वाड़ी भी एक उपबोली है।
👉 इसका संबंध मुख्य राजस्थानी भाषा मारवाड़ी से है।
👉 यह बोली विशेषकर जालौर क्षेत्र में प्रचलित है।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी
गंगानगर - हनुमानगढ़ खेतर री लोक बोली से नांव है -
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 राजस्थान के प्रत्येक जिले की अपनी विशिष्ट लोक बोली है।
👉 गंगानगर–हनुमानगढ़ क्षेत्र में विशेष रूप से बागड़ी बोली प्रचलित है।
👉 यह बोली राजस्थानी भाषा की प्रमुख उपबोलियों में गिनी जाती है।
👉 इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी बागड़ी बोली से जुड़ी है।
✍️ सही उत्तर है – बागड़ी
डॉ. टेसीतोरी के अनुसार राजस्थानी भाषा किस सदी के लगभग अस्तित्व में आ चुकी थी ?
[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]
👉 राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति को लेकर कई विद्वानों ने अपने मत प्रकट किए।
👉 डॉ. टेसीतोरी ने इसके उद्भव का विशेष अध्ययन किया।
👉 उनके अनुसार राजस्थानी भाषा का अस्तित्व लगभग 12वीं सदी में हो चुका था।
👉 इस समय यह भाषा साहित्यिक रूप में भी विकसित होने लगी।
✍️ सही उत्तर है – 12वीं सदी
भीलों के कमरे के बाहर 'बरामदे' (गैलरी) को कहा जाता है
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
👉 राजस्थान की भील जनजाति की अपनी विशिष्ट परंपराएँ हैं।
👉 इनके घरों की संरचना भी विशेष रूप से पहचान रखती है।
👉 भीलों के घरों के बाहर बने बरामदे (गैलरी) का अलग नाम है।
👉 इसे स्थानीय भाषा में डहलिया कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – डहलिया
राजस्थानी काव्य में 'डांखळला' नांव सूं नवौ काव्य-रूप चलायहै घणा चावा हुया -
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 राजस्थानी काव्य में समय-समय पर नए काव्य-रूप विकसित हुए।
👉 इन्हीं में से एक रूप 'डांखळला' नाम से प्रसिद्ध हुआ।
👉 इस काव्य-रूप को कवि मोहन आलोक ने प्रारंभ किया।
👉 इसके कारण राजस्थानी साहित्य में नई सृजनात्मक धारा आई।
✍️ सही उत्तर है – मोहन आलोक
राजस्थान भासा री बोलियां में नीं गिणीजै
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 राजस्थानी भाषा की अनेक बोलियाँ बताई गई हैं।
👉 इनमें मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती, बागड़ी, मालवी आदि प्रमुख हैं।
👉 अतः इसे राजस्थानी भाषा की बोली नहीं माना गया है।
✍️ सही उत्तर है – बघेली
मारवाड़ी री उपबोली नीं है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 मारवाड़ी राजस्थान की सबसे बड़ी और प्रधान बोली है।
👉 इसकी कई उपबोलियाँ हैं, जैसे – शेखावाटी, बागड़ी, बीकानेरी, ढटकी, थली, खैराड़ी, नागौरी, देवड़ावाटी, गोड़वाड़ी आदि।
👉 यह दरअसल मेवाती बोली की उपबोली है।
✍️ सही उत्तर है – अहीरवाटी
राजस्थानी री कुणसी बोली मध्य प्रदेश रा कई जिलां में बोलीजै ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
👉 राजस्थान की कई बोलियाँ पड़ोसी राज्यों में भी बोली जाती हैं।
👉 इनमें से एक बोली है मालवी।
👉 यह बोली मध्य प्रदेश के कई जिलों में प्रचलित है।
👉 इसलिए इसे राजस्थान और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाली बोली माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मालवी
उदयशाही, अमरशाही, खंजरशाही क्या हैं ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
👉 राजस्थान में विभिन्न प्रकार की पगड़ियों प्रचलित रही हैं।
👉 इनमें अनेक शैलियाँ अपने-अपने नामों से जानी जाती हैं।
👉 उदयशाही, अमरशाही और खंजरशाही विशेष पगड़ी बाँधने की शैलियाँ हैं।
👉 ये शैलियाँ राजस्थानी संस्कृति की पहचान मानी जाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – राजस्थानी पगड़ियों की शैली
लीलटांस के लेखक कौन है ?
[वनपाल परीक्षा 06.11.2022]
👉 राजस्थानी साहित्य में अनेक प्रसिद्ध काव्य–ग्रंथ रचे गए।
👉 इन्हीं में एक रचना है ‘लीलटांस’।
👉 यह कृति प्रसिद्ध कवि कन्हैयालाल सेठिया द्वारा लिखी गई।
✍️ सही उत्तर है – कन्हैयालाल सेठिया
ऐतिहासिक दृष्टि से अहीरवाटी और किस नाम से भी जानी जाती है ? [*]
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 29.06.2022]
📌 नोट - इस प्रश्न को बोर्ड ने डिलीट (Delete) माना है।
कवि सूर्यमल मिश्रण ने अपनी पुस्तक 'वीर सतसई' किस भाषा
[पुस्तकालयाध्यक्ष 13.11.2016]
👉 सूर्यमल मिश्रण राजस्थान के प्रख्यात कवि और इतिहासकार थे।
👉 उन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना की, जिनमें 'वीर सतसई' प्रमुख है।
👉 इस ग्रंथ की रचना उन्होंने डिंगल भाषा में की।
👉 यह ग्रंथ वीरता और लोकजीवन का अद्भुत चित्र प्रस्तुत करता है।
✍️ सही उत्तर है – डिंगल
'हाड़ौती' बोली मुख्य रूप सूं कठीनै बोली जावै ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 राजस्थान की प्रमुख बोलियों में से एक हाड़ौती बोली है।
👉 यह बोली मुख्य रूप से हाड़ौती अंचल में बोली जाती है।
👉 इसका प्रमुख क्षेत्र कोटा और बूंदी जिले हैं।
👉 यहाँ की सांस्कृतिक पहचान भी इसी बोली से जुड़ी है।
✍️ सही उत्तर है – कोटा, बूंदी
ग्रियर्सन ने किस बोली को भीलों की बोली की संज्ञा दी हैं ?
[VDO Pre. (प्रथम चरण) 27.12.2021]
👉 भाषाविद ग्रियर्सन ने राजस्थानी बोलियों का गहन अध्ययन किया।
👉 उन्होंने प्रत्येक बोली की विशेषताओं के आधार पर उसे अलग पहचान दी।
👉 ग्रियर्सन ने वागड़ी बोली को विशेष रूप से भीलों की बोली कहा।
👉 इसका कारण यह बोली भील अंचल में बोली जाना है।
✍️ सही उत्तर है – वागड़ी
मारवाड़ी री उपबोली है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 मारवाड़ी राजस्थान की सबसे बड़ी प्रधान बोली है।
👉 इसके अंतर्गत अनेक उपबोलियाँ सम्मिलित हैं।
👉 इनमें से एक प्रमुख उपबोली शेखावाटी कहलाती है।
👉 यह बोली सीकर, झुंझुनूं व चूरू के कुछ भागों में बोली जाती है।
✍️ सही उत्तर है – शेखावाटी
अहीरवाटी और मेवाती बोलियाँ निम्न में से किस वर्गीकरण में आती हैं ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]
👉 राजस्थान की बोलियों को विभिन्न क्षेत्रीय वर्गों में रखा गया है।
👉 अहीरवाटी और मेवाती बोलियाँ राजस्थान के उत्तर-पूर्वी हिस्से में बोली जाती हैं।
👉 इसलिए ये दोनों उत्तर-पूर्वी राजस्थानी वर्ग में आती हैं।
👉 इस वर्ग की पहचान अलवर और भरतपुर क्षेत्रों से होती है।
✍️ सही उत्तर है – उत्तर-पूर्वी राजस्थानी
'पद्मणी चउपई' किस भाषा में लिखित ग्रंथ है ?
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 'पद्मणी चउपई' एक महत्वपूर्ण साहित्यिक ग्रंथ है।
👉 इसमें रानी पद्मिनी से जुड़ी कथा का वर्णन है।
👉 यह कृति राजस्थानी भाषा में लिखी गई है।
👉 इसे मध्यकालीन राजस्थानी साहित्य की प्रमुख रचनाओं में गिना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – राजस्थानी
ढोला-मारू-री-बात' किसके द्वारा लिखी गई थी ?
[पुस्तकालयाध्यक्ष 13.11.2016]
👉 राजस्थानी साहित्य में प्रेमगाथाओं का विशेष महत्त्व है।
👉 इनमें से एक प्रमुख रचना है 'ढोला-मारू-री-बात'।
👉 इस गाथा काव्य की रचना खुशाल चन्द्र ने की थी।
👉 यह कृति लोक में अत्यधिक लोकप्रिय हुई।
✍️ सही उत्तर है – खुशाल चन्द्र
झालावाड़ री मुख्य बोली है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 राजस्थान के प्रत्येक जिले की अपनी प्रमुख बोली है।
👉 झालावाड़ क्षेत्र में मुख्यतः हाड़ौती बोली बोली जाती है।
👉 यह बोली हाड़ौती अंचल की पहचान मानी जाती है।
👉 झालावाड़ जिले का सांस्कृतिक जीवन इसी बोली से जुड़ा है।
✍️ सही उत्तर है – हाड़ौती
धाती, मारवाड़ी की एक उप-बोली, राजस्थान के किस क्षेत्र में बोली जाती है ?
[वनरक्षक (चतुर्थ चरण) 13.11.2022]
👉 धाती मारवाड़ी भाषा की एक उप-बोली है।
👉 यह बोली राजस्थान के विशेष क्षेत्र में बोली जाती है।
👉 इसका प्रमुख क्षेत्र बाड़मेर जिला है।
👉 यहाँ की लोक-संस्कृति इस बोली से जुड़ी हुई है।
✍️ सही उत्तर है – बाड़मेर
रांगड़ी बोली किन बोलियों का मिश्रण है ?
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 राजस्थान में कई बोलियाँ आपस में मिलकर नई उपबोलियाँ बनाती हैं।
👉 रांगड़ी बोली भी ऐसी ही मिश्रित बोली है।
👉 इसमें मारवाड़ी और मालवी दोनों का प्रभाव स्पष्ट मिलता है।
👉 इसलिए इसे इन दोनों बोलियों का मिश्रण माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ी एवं मालवी
अहीरवाटी और मेवाती बोलियाँ किस क्षेत्र में बोली जाती हैं ?
[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रीय बोलियाँ प्रचलित हैं।
👉 अहीरवाटी और मेवाती बोलियाँ राजस्थान के एक ही हिस्से में बोली जाती हैं।
👉 इन दोनों का प्रयोग मुख्यतः अलवर और आसपास के जिलों में होता है।
👉 यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से उत्तर-पूर्वी राजस्थान कहलाता है।
✍️ सही उत्तर है – उत्तर-पूर्वी राजस्थान
राजस्थानी भासा री बोली नीं है -
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 राजस्थानी भाषा की अनेक बोलियाँ पाई जाती हैं।
👉 इनमें मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती, बागड़ी आदि प्रमुख हैं।
👉 बांगरू बोली का उल्लेख राजस्थानी की बोलियों में नहीं किया गया है।
👉 बांगरू हरियाणवी समूह की भाषिक पहचान से जुड़ी हुई है।
✍️ सही उत्तर है – बांगरू
कथेतर गद्य री पोथी 'ओळू री अखियातां' रा रचनाकार है-
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 राजस्थानी साहित्य में कथेतर गद्य की भी महत्त्वपूर्ण रचनाएँ हुई हैं।
👉 इन्हीं में एक कृति है 'ओळू री अखियातां'।
👉 इस पोथी का सृजन नेमनारायण जोशी ने किया।
👉 यह उनकी उल्लेखनीय साहित्यिक देन है।
✍️ सही उत्तर है – नेमनारायण जोशी
निम्नलिखित में से किस बोली पर मालवी का शक्तिशाली प्रभाव है
[लिपिक ग्रेड -II 16.09.2018]