राजस्थान के लिए 'राजपूताना' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया था ?
[JEN (विधुत) (डिग्रीधारक) 29.11.2020]
👉 ‘राजपूताना’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम जार्ज थॉमस ने किया था।
👉 उन्होंने इस शब्द का उपयोग अपने भौगोलिक वर्णन में राजस्थान क्षेत्र के लिए किया।
✍️ सही उत्तर है – जार्ज थॉमस
कौनसा ग्रंथ पं. विश्वेश्वर नाथ रेउ द्वारा नहीं लिखा गया है ?
[JEN (यांत्रिकी डिग्री) 21.08.2016]
👉 पं. विश्वेश्वरनाथ रेऊ राजस्थान के प्रसिद्ध इतिहासकार और साहित्यकार थे।
👉 उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘विश्वेश्वर स्मृति’, ‘हिस्ट्री ऑफ राष्ट्रकूट्स’, ‘भारत में मानव संस्कृति का विकास’ आदि।
👉 जबकि ‘इतिहास नींबाज’ ग्रंथ रामकरण आसोपा द्वारा लिखा गया था।
👉 अतः युग्म ‘इतिहास नींबाज – पं. विश्वेश्वरनाथ रेऊ’ असुमेलित है।
✍️ सही उत्तर है – इतिहास नींबाज
'बेलि क्रिसन रुकमणी री' ____ के द्वारा लिखी गई।
[कनिप्ठ अनुदेशक (मैकेनिक) 23.12.2019]
👉 ‘वेलि क्रिसन रूकमणी री’ राजस्थानी भाषा की प्रसिद्ध डिंगल काव्य रचना है।
👉 इसके रचयिता पृथ्वीराज राठौड़ थे, जो बीकानेर नरेश राव कल्याणमल के पुत्र थे।
👉 इस रचना में कृष्ण और रूकमणी की प्रेम कथा का सुंदर वर्णन है।
👉 इसमें भक्ति, शृंगार और वीर रस का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।
👉 दूरसा आढ़ा ने इसे डिंगल की सर्वश्रेष्ठ रचना बताया है।
✍️ सही उत्तर है – पृथ्वीराज राठौड़
‘बातां री फुलवारी' (राजस्थान लोककथाओं का संग्रह) किसके द्वारा लिखी गई है?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (2nd Phase) 01.12.2024]
👉 ‘बातां री फुलवारी’ राजस्थानी भाषा का प्रसिद्ध लोककथा संग्रह है।
👉 इस अमूल्य कृति के रचयिता सुप्रसिद्ध साहित्यकार विजयदान देथा (बिज्जी) हैं।
👉 इसमें राजस्थान की लोककथाओं, लोकजीवन और संस्कृति का सुंदर चित्रण है।
👉 यह ग्रंथ 14 खंडों में प्रकाशित हुआ और साहित्य अकादमी पुरस्कार (1974) से सम्मानित है।
✍️ सही उत्तर है – विजयदान देथा
रणछोड़ भट्ट ने राजप्रशस्ति किस भाषा में लिखी ?
कनिष्ठ अनुदेशक (रेफ्रिजरेशन) 18.11.2024
👉 रणछोड़ भट्ट मेवाड़ के प्रसिद्ध संस्कृत कवि थे।
👉 उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘राजप्रशस्ति महाकाव्य’ संस्कृत भाषा में लिखी।
👉 यह काव्य राजसमंद झील की पाल पर 25 शिलालेखों में अंकित है।
👉 इसमें महाराणा राजसिंह और मेवाड़ के इतिहास का विस्तृत वर्णन मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – संस्कृत
'म्यूटिनीज इन राजपूताना' नामक पुस्तक के लेखक कौन हैं ?
[JEN (विधुत) (डिग्रीधारक) 29.11.2020]
👉 ‘Mutinies in Rajputana’ एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ है।
👉 इसके लेखक I. T. Pritchard (आई. टी. प्रिचार्ड) हैं।
👉 इस पुस्तक में 1857 की क्रांति के दौरान राजपूताना (राजस्थान) में हुई घटनाओं का विस्तृत विवरण है।
👉 इसमें उस समय के राज्य-राजाओं, सैनिक विद्रोहों और ब्रिटिश नीतियों का भी उल्लेख किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – आई. टी. प्रिचार्ड
'वंशभास्कर' का लेखक कौन था ?
[JEN (कृषि) 12.07.2015]
👉 ‘वंशभास्कर’ राजस्थानी भाषा का एक महाकाव्यात्मक ग्रन्थ है।
👉 इसके लेखक प्रसिद्ध कवि सूर्यमल्ल मिश्रण थे।
👉 यह ग्रन्थ हाड़ा चौहानों के इतिहास तथा बूँदी रियासत का पद्यात्मक वर्णन करता है।
👉 इसमें राजस्थान की रियासतों, मराठों की गतिविधियों और कृष्णा कुमारी प्रसंग का भी उल्लेख है।
✍️ सही उत्तर है – सूर्यमल्ल मिश्रण
'राजविलास' की रचना किसने लिखी थी ?
[सुपरवाईजर परीक्षा 06.01.2019]
👉 ‘राजविलास’ एक प्रसिद्ध वीर रसप्रधान पिंगल काव्य रचना है।
👉 इसके रचयिता कवि मानसिंह थे।
👉 इस कृति में महाराणा राजसिंह और औरंगज़ेब के युद्धों का वर्णन किया गया है।
👉 इसमें मेवाड़ के शौर्य, स्वाभिमान और देशभक्ति की भावना प्रभावशाली रूप में झलकती है।
✍️ सही उत्तर है – कवि मानसिंह
निम्न में से कौनसी रचना ईसरदास की नहीं है ?
[JEN Mechenical डिग्री 16.10.2016]
👉 ईसरदास बारहठ राजस्थानी साहित्य के प्रसिद्ध भक्त कवि और वीर रस कवि थे।
👉 उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – हरिरस, देवियाण, हालां झालां री कुण्डलियाँ, गुण भागवत हंस, राव कैलाश, और सभा पर्व।
👉 जबकि ‘चन्द्र प्रबोध’ रचना ईसरदास की नहीं है।
👉 अतः यह युग्म असुमेलित है।
✍️ सही उत्तर है – चन्द्र प्रबोध
संतों का जीवन वृतांत जो कि राजस्थानी भाषा में काव्य रूप में उपलब्ध है, कहा जाता है:
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (3rd Phase) 02.12.2024]
👉 राजस्थान में संत कवियों के जीवन और उपदेशों को काव्य रूप में प्रस्तुत किया गया है।
👉 इन रचनाओं में संतों के जीवन वृतांत, भक्ति मार्ग और उपदेशात्मक विचार मिलते हैं।
👉 ये काव्यात्मक रचनाएँ संत साहित्य की प्रमुख विधा हैं।
👉 ऐसी रचनाओं को ‘पारची’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – पारची
कौनसा कूट सुमेलित नहीं हैं?
रचनाकार - रचना
A) मतिराम - ललित ललाम
B) नरहरिदास - अवतार चरित्र
C) दयाबाई - दया बोध
D) सोमनाथ - सुजान चरित्र
[JEN (Civil Diploma) 21.08.2016]
👉 मतिराम की प्रसिद्ध रचना ‘ललित ललाम’ है — यह युग्म सही है।
👉 नरहरिदास ने ‘अवतार चरित्र’ की रचना की — यह युग्म भी सही है।
👉 दयाबाई की रचना ‘दयाबोध’ है — यह भी सही युग्म है।
👉 जबकि ‘सुजान चरित्र’ के रचयिता चन्द्रशेखर थे, न कि सोमनाथ।
👉 अतः युग्म (D) सोमनाथ – सुजान चरित्र असुमेलित है।
✍️ सही उत्तर है – D
हम्मीर रासो का लेखक कौन है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (फिटर) 23.03.2019]
👉 ‘हम्मीर रासो’ राजस्थान का प्रसिद्ध वीर रसात्मक काव्य ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता जोधराज थे।
👉 इस रचना में रणथम्भौर के शासक हम्मीरदेव चौहान और अलाउद्दीन खिलजी के बीच हुए युद्ध का वर्णन है।
👉 यह कृति राजपूती वीरता, स्वाभिमान और त्याग भावना से परिपूर्ण है।
✍️ सही उत्तर है – जोधराज
सोरठा छंद में गद्य और पद्य किस राजस्थानी शैली में लिखे गए थे?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (3rd Phase) 02.12.2024]
👉 राजस्थानी साहित्य में संत कवियों ने अपने अनुभव और उपदेश को विशेष शैली में व्यक्त किया।
👉 इन रचनाओं में सोरठा छंद का प्रयोग प्रमुख रूप से किया गया।
👉 सोरठा छंद में लिखी गद्य-पद्य मिश्रित रचनाएँ ज्ञान और भक्ति से ओतप्रोत होती हैं।
👉 ऐसी रचनाओं को ‘साखी’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – साखी
"राजविनोद" का रचयिता कौन था ?
[आर्थिक अन्वेषक परीक्षा 25.03.2019]
👉 ‘राजविनोद’ एक प्रसिद्ध संस्कृत ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता सदाशिव भट्ट थे।
👉 यह ग्रंथ बीकानेर राज्य के इतिहास, समाज और प्रशासन से संबंधित है।
👉 इसमें राजा कल्याणमल के शासनकाल की राजनीतिक व सांस्कृतिक परिस्थितियों का वर्णन है।
✍️ सही उत्तर है – सदाशिव भट्ट
पुस्तक 'वीर विनोद किसके द्वारा लिखी गई थी ?
[प्रयोगशाला सहायक 13.11.2016]
👉 ‘वीर विनोद’ राजस्थान का प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता कविराज श्यामलदास थे।
👉 यह ग्रंथ मेवाड़ राज्य का विस्तृत पद्यात्मक इतिहास प्रस्तुत करता है।
👉 इसमें बप्पा रावल से लेकर महाराणा सज्जनसिंह तक के शासन का वर्णन मिलता है।
👉 इसे राजस्थान के इतिहास का प्रामाणिक स्रोत ग्रंथ माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – श्यामल दास
कौनसा कूट सुमेलित नहीं है ?
[पशुधन सहायक (LSA) 16.10.2016]
लेखक - रचना
👉 ‘अमरकाव्य वंशावली’ के रचयिता रणछोड़ भट्ट थे।
👉 इस ग्रंथ में मेवाड़ के शासकों की वंशावली और उनके कार्यों का उल्लेख है।
👉 जबकि सदाशिव ने ‘राजरत्नाकर’ और ‘राजविनोद’ जैसी रचनाएँ की थीं।
👉 अतः युग्म ‘सदाशिव – अमरकाव्य वंशावली’ असुमेलित है।
✍️ सही उत्तर है – सदाशिव – अमरकाव्य वंशावली
'बातां री फुलवारी' नामक ग्रंथ के लेखक कौन थे ?
[लवण निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 ‘बातां री फूलवारी’ राजस्थानी साहित्य का प्रसिद्ध लोककथा-संग्रह ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता विजयदान देथा (बिज्जी) थे।
👉 यह कृति 14 खंडों में प्रकाशित हुई और इसके 10वें खंड के लिए उन्हें केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार (1974) प्राप्त हुआ।
👉 इसमें राजस्थान की लोककथाएँ, लोकसंस्कृति और जनजीवन का सुंदर चित्रण है।
✍️ सही उत्तर है – विजयदान देथा
ललित विग्रहराज का लेखक कौन था ?
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 ‘ललित विग्रहराज’ एक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक है।
👉 इसके रचयिता कवि सोमदेव थे।
👉 यह नाटक अजमेर के चौहान शासक विग्रहराज चतुर्थ पर आधारित है।
👉 इसमें उनके वीरत्व, नीति और प्रेम प्रसंगों का सुंदर चित्रण किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – सोमदेव
राजस्थान के निर्गुण संत कवियों द्वारा रचा हुआ संत साहित्य___________साहित्य का एक बहुत बड़ा भाग है।
कनिष्ठ अनुदेशक (कंप्यूटर प्रयो.) 16.11.2024
👉 राजस्थान के निर्गुण संत कवियों ने अपने उपदेशों को लोकभाषा में व्यक्त किया।
👉 इनकी रचनाएँ भक्ति, ज्ञान और उपदेशात्मक भावों से परिपूर्ण हैं।
👉 इस प्रकार का संत साहित्य राजस्थान के संत काव्य परम्परा का प्रमुख अंग है।
👉 यह संत साहित्य ‘पिंगल साहित्य’ का एक बहुत बड़ा भाग माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – पिंगल
निम्न लिखित युग्मों में से कौन सा युग्म सही नहीं है ?
A. हिस्ट्री ऑफ फेमीन्स इन राजस्थान - ओ. पी कच्वाद्य
B. द लास्ट महाराणा ए बयोग्रफी ऑफ सवाई मानसिंह सेकण्ड ऑफ जयपुर - क्रिवी क्वेटीन
C. ऑरिजन ऑफ राजपूत्स - जे. ए. असोपा
D.हिस्ट्री ऑफ चाहमान्स - आर. बी सिंह
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 ‘हिस्ट्री ऑफ फेमिन्स इन राजस्थान’ ग्रंथ के लेखक ओ. पी. कच्छवाहा हैं।
👉 ‘द लास्ट महाराणा : अ बायोग्राफी ऑफ सवाई मानसिंह सेकण्ड ऑफ जयपुर’ के रचयिता केरी क्वेटीन हैं।
👉 ‘ऑरिजिन ऑफ राजपूट्स’ की रचना जे. ए. असोपा ने की है।
👉 ‘हिस्ट्री ऑफ चाहमान्स’ ग्रंथ के लेखक आर. बी. सिंह हैं।
👉 ये सभी युग्म सही सुमेलित हैं।
✍️ सही उत्तर है – उपर्युक्त चारों सही हैं।
'हरिमेखला' के रचयिता कौन थे ?
[JEN (यांत्रिक) (डिग्रीधारक) 13.12.2020]
👉 ‘हरिमेखला’ एक प्रसिद्ध संस्कृत काव्य रचना है।
👉 इसके रचयिता माहुक कवि थे।
👉 यह ग्रंथ धार्मिक और दार्शनिक विषयों पर आधारित है।
👉 इसमें भक्ति, नीति और जीवन मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – माहुक
बलवद् विलास की रचना किसने की है ?
[JEN (यांत्रिक) (डिप्लोमाधारक) 13.12.2020]
👉 ‘बलवद् विलास’ आधुनिक काल के महान कवि सूर्यमल्ल मिश्रण (मीसण) की रचना है।
👉 यह ग्रंथ भिनाय (अजमेर) के शासक बलवंत सिंह के चरित्र पर आधारित है।
👉 इसमें उनके शौर्य, नीति और पराक्रम का प्रभावी वर्णन किया गया है।
👉 सूर्यमल्ल मिश्रण को ‘राजस्थान भूषण’ की उपाधि भी प्राप्त थी।
✍️ सही उत्तर है – सूर्यमल्ल मिश्रण
वह काव्यकृति जो किसी राजवंश या व्यक्ति की महान उपलब्धियों का वर्णन करती है, कहलाती है:
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें: [*]
[पशु परिचर (1st Phase) 01.12.2024]
📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है।
निम्नलिखित में से किस विद्वान के अनुसार राजपूतों की उत्पत्ति अग्निकुण्ड से हुई थी ?
[पशुधन सहायक (LSA) 21.10.2018]
👉 राजपूतों की उत्पत्ति अग्निकुंड से हुई — यह उल्लेख सबसे पहले कवि चन्दबरदाई ने किया था।
👉 उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘पृथ्वीराज रासो’ में आबू पर्वत के अग्निकुंड से चार प्रमुख राजपूत वंशों — चालुक्य, परमार, प्रतिहार और चौहान — की उत्पत्ति बताई।
👉 यह अवधारणा बाद में राजपूत वंशों की गौरव गाथा के रूप में प्रसिद्ध हुई।
✍️ सही उत्तर है – कवि चन्दबरदाई
प्रताप रासो का लेखक कौन था ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (फिटर) 20.11.2024]
👉 ‘प्रताप रासो’ राजस्थानी भाषा का एक वीर रस प्रधान ग्रन्थ है।
👉 इसके रचयिता कवि जाचक जीवण थे।
👉 इस काव्य में अलवर के राव राजा प्रताप सिंह के जीवन और कार्यों का वर्णन है।
👉 यह रचना राजपूती शौर्य और पराक्रम की उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – जाचक जीवण
'पृथ्वीराज विजय' के लेखक थे ?
[पशुधन सहायक (LSA) 21.10.2018]
👉 ‘पृथ्वीराज विजय’ संस्कृत भाषा में रचित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता जयानक थे, जो पृथ्वीराज तृतीय (चौहान) के समकालीन कवि थे।
👉 इस कृति में सपादलक्ष के चौहानों की वंशावली और पृथ्वीराज की वीरता का विस्तृत वर्णन है।
👉 इसमें अजमेर नगर की तुलना इन्द्रपुरी से की गई है।
✍️ सही उत्तर है – जयानक
'राजस्थान कबीर यात्रा' का सम्बन्ध निम्नलिखित में से किस क्षेत्र से है ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 03.03.2019]
👉 ‘राजस्थान कबीर यात्रा’ का संबंध गायन और लोकसंगीत से है।
👉 यह यात्रा लोकगायक और संत कवि कबीर के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का एक संगीतमय अभियान है।
✍️ सही उत्तर है – गायन
प्रबंध कोश' नामक पुस्तक का लेखक कौन है ?
[पुस्तकालयाध्यक्ष 13.11.2016]
👉 ‘प्रबंध कोष’ जैन साहित्य की एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्राकृत-ग्रंथ कृति है।
👉 इसके रचयिता राजशेखर सूरी थे।
👉 इस ग्रंथ में अनेक जैन आचार्यों, विद्वानों और ऐतिहासिक व्यक्तियों के जीवन प्रसंगों का वर्णन है।
👉 यह कृति जैन प्रबंध साहित्य का एक प्रमुख और विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – राजशेखर सूरी
निम्नलिखित में से कौन सी कृति की रचना सूर्यमल मिश्रण द्वारा की गयी थी ?
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 सूर्यमल्ल मिश्रण (मीसण) आधुनिक काल के प्रसिद्ध राजस्थानी कवि थे।
👉 उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘वीर सतसई’, ‘वंश भास्कर’ और ‘बलवद् विलास’ शामिल हैं।
👉 ‘वीर सतसई’ डिंगल भाषा में रचित वीर रसात्मक दोहों का संग्रह है।
👉 इस कृति ने राजस्थानी जनमानस में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया।
✍️ सही उत्तर है – वीर सतसई
"नहीं जानते कि इतना बड़ा मुद्रित ग्रंथ भारत की ही क्या जगत की किसी भाषा में है या नहीं।" उपर्युक्त कथन किस ग्रंथ के बारे में कहा गया है ?
[JEN (Civil Degree) 21.08.2016]
👉 यह प्रसिद्ध कथन ‘राग कल्पद्रुम’ ग्रंथ के संबंध में कहा गया है।
👉 ‘राग कल्पद्रुम’ भारतीय संगीत पर आधारित एक विशाल संगीत शास्त्रीय ग्रंथ है।
✍️ सही उत्तर है – राग कल्पद्रुम
'मारवाड़ रा परगना री विगत' का लेखक है :-
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]
👉 ‘मारवाड़ रा परगना री विगत’ राजस्थान का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक गद्य ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता मुहणोत नैणसी थे, जो जोधपुर राज्य के दीवान रहे।
👉 इस ग्रंथ में मारवाड़ राज्य के सात परगनों की जनसंख्या, भूगोल, राजस्व और ग्रामीण जीवन का विस्तृत विवरण है।
👉 इसे जोधपुर राज्य का गजेटियर भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मुहणोत नैणसी
'धरती धोरां रि' गाने के गीतकार (लेखक) कौन हैं ?
[CET (स्नातक) 28.09.2024 चतुर्थ चरण]
👉 प्रसिद्ध गीत ‘धरती धोरां री’ को राजस्थान का लोकगौरव गीत माना जाता है।
👉 इसके रचयिता सुप्रसिद्ध कवि कन्हैयालाल सेठिया हैं।
👉 इस गीत में राजस्थान की धरती, मरुभूमि और वीरता का अद्भुत चित्रण है।
👉 यह रचना देशप्रेम और राजस्थान की पहचान का प्रतीक बन चुकी है।
✍️ सही उत्तर है – कन्हैयालाल सेठिया
राजस्थान के प्रसिद्ध लेखक दयालदास को संरक्षण देने वाले शासक थे ?
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 दयालदास सिंढायच बीकानेर राज्य के प्रसिद्ध इतिहासकार और कवि थे।
👉 उन्हें संरक्षण बीकानेर के महाराजा रतनसिंह ने प्रदान किया था।
👉 दयालदास ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘दयालदास री ख्यात’ (बीकानेर रा राठौड़ां री ख्यात) की रचना की।
👉 इसमें राव बीका से लेकर महाराजा सरदारसिंह (1851 ई.) तक का इतिहास वर्णित है।
✍️ सही उत्तर है – महाराजा रतनसिंह
चारण साहित्य का प्रसिद्ध ग्रंथ सूरज प्रकाश किसके द्वारा लिखा गया ?
[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 ‘सूरज प्रकाश’ राजस्थानी भाषा का प्रसिद्ध चारण काव्य ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता करणीदान कविया थे।
👉 यह कृति राठौड़ों की 13 शाखाओं और उनके वीरत्व, युद्धों व गौरव गाथाओं का वर्णन करती है।
👉 इसमें सुमेल का युद्ध (1544 ई.), धरमत का युद्ध (1658 ई.) तथा मुगल दरबार की घटनाओं का उल्लेख है।
✍️ सही उत्तर है – करणीदान कविया
“बादशाह ने मेवाड़ के राणा को आपस के समझौते से अधीन किया था, न कि बल से "ये कथन कहा है ?
[पटवारी मुख्य परीक्षा 24.12.2016]
👉 यह कथन सर टॉमस रो (Sir Thomas Roe) का है।
👉 उन्होंने कहा कि —
“बादशाह ने मेवाड़ के राणा को बलपूर्वक नहीं, बल्कि आपसी समझौते से अधीन किया था।”
👉 सर टॉमस रो इंग्लैंड के सम्राट जेम्स प्रथम के दूत थे, जिन्हें जहाँगीर के दरबार में भेजा गया था।
👉 उनके विवरणों से उस समय के राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों की जानकारी मिलती है।
✍️ सही उत्तर है – सर टॉमस रो
रणछोड़ भट्ट ने संस्कृत में किस महाकाव्य की रचना की ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]
👉 रणछोड़ भट्ट मेवाड़ के प्रसिद्ध संस्कृत कवि और इतिहासकार थे।
👉 उन्होंने संस्कृत में ‘राजप्रशस्ति महाकाव्य’ की रचना की।
👉 यह ग्रंथ राजसमंद झील की पाल पर 25 शिलालेखों के रूप में अंकित है।
👉 इसमें मेवाड़ के शासकों की वंशावली, उनके युद्ध, विजय और शासन कार्यों का विस्तृत वर्णन है।
✍️ सही उत्तर है – राजप्रशस्ति
पुस्तक “अनुभव वाणी” में निम्नलिखित में से किसके आध्यात्मिक शिक्षण निहित हैं?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (3rd Phase) 02.12.2024]
👉 ‘अनुभव वाणी’ एक प्रसिद्ध भक्तिपरक ग्रन्थ है।
👉 इसमें रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रवर्तक संत रामचरण जी महाराज के उपदेश संकलित हैं।
👉 यह कृति निर्गुण भक्ति और आध्यात्मिक साधना का गहन संदेश देती है।
👉 इसमें ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का सुंदर समन्वय मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – रामचरण जी महाराज
एकलिंग प्रशस्ति का रचनाकार कौन था ?
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 ‘एकलिंग प्रशस्ति’ एक महत्वपूर्ण संस्कृत अभिलेखीय काव्य रचना है।
👉 इसके रचयिता महेश्वर थे।
👉 यह प्रशस्ति मेवाड़ के शासक राजसिंह के शासनकाल में लिखी गई थी।
👉 इसमें मेवाड़ के शासकों की वंशावली, एकलिंग जी मंदिर की महिमा और राजा की वीरता का वर्णन है।
✍️ सही उत्तर है – महेश्वर
निम्न लिखित में से किस पुस्तक के लेखक के. डी. अर्सकिन नहीं
[अन्वेषक परीक्षा 21.08.2016]
📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट मा ना गया है।
मोतीलाल मेनारिया के अनुसार वह काव्य ग्रन्थ जिसमें हमें एक राजा की महानता, उनके विजय, युद्ध और वीरता का वर्णन मिलता है कहलाता है :
[CET (10+2) 24.10.2024 षष्टम चरण]
👉 मोतीलाल मेनारिया के अनुसार वह काव्य ग्रन्थ जिसमें किसी राजा की महानता, विजय, युद्ध और वीरता का वर्णन मिलता है, विशेष प्रकार का होता है।
👉 इस प्रकार की रचनाएँ वीर रस प्रधान होती हैं और इतिहास व गौरवगाथा को दर्शाती हैं।
👉 ऐसे ग्रन्थों को राजस्थानी साहित्य में ‘रासो’ कहा जाता है।
👉 रासो ग्रन्थों में पृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो जैसी रचनाएँ प्रसिद्ध हैं।
✍️ सही उत्तर है – रासो
निम्नलिखित में से किसे राजस्थानी साहित्य का प्रथम गद्य लेखक कहा जा सकता है ?
[पशु परिचर (1st Phase) 01.12.2024]
👉 राजस्थानी साहित्य में आधुनिक गद्य लेखन की शुरुआत 20वीं सदी में हुई।
👉 इस परंपरा के प्रथम गद्य लेखक माने जाते हैं शिवचन्द्र भारतीय।
👉 इन्होंने नाटक, उपन्यास, कहानी जैसी विधाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
👉 इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ ‘केसर विलास’, ‘कनक सुन्दर’ और ‘विश्रांत प्रवास’ हैं।
✍️ सही उत्तर है – शिवचन्द्र भारतीय
'वंश भास्कर' के रचयिता कौन हैं ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (जैविक) 15.09.2019]
👉 ‘वंश भास्कर’ आधुनिक काल का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक महाकाव्य है।
👉 इसके रचयिता सूर्यमल्ल मिश्रण (मीसण) हैं।
👉 यह ग्रंथ बूँदी रियासत (हाड़ा चौहानों) का पद्यात्मक इतिहास प्रस्तुत करता है।
👉 इसमें राजस्थान की कई रियासतों और घटनाओं का भी विस्तृत वर्णन मिलता है।
👉 इसे डिंगल भाषा में आठ खंडों में लिखा गया है।
✍️ सही उत्तर है – सूर्यमल्ल मिश्रण
कौनसा कूट सुमेलित नहीं है ?
[JEN (Civil डिग्री) 16.10.2016]
👉 ‘राजस्थान का भीष्म’ कहा गया है कर्नल जेम्स टॉड को,
👉 जिन्होंने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘Annals and Antiquities of Rajasthan’ में राजस्थान का इतिहास लिखा।
👉 जबकि द्विजेन्द्र लाल राय एक बंगाली कवि, नाटककार और गीतकार थे,
👉 जिनका राजस्थान के इतिहास या साहित्य से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
👉 अतः युग्म ‘द्विजेन्द्र लाल राय – राजस्थान का भीष्म’ असुमेलित है।
✍️ सही उत्तर है – द्विजेन्द्र लाल राय – राजस्थान का भीष्म
'हम्मीर हठ' के लेखक थे ?
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 ‘हम्मीर हठ’ एक प्रसिद्ध संस्कृत काव्य रचना है।
👉 इसके रचयिता कवि चन्द्रशेखर थे।
👉 इस कृति में रणथम्भौर के शासक हम्मीरदेव चौहान की वीरता का वर्णन है।
👉 इसमें उनके अलाउद्दीन खिलजी से संघर्ष और स्वाभिमान का प्रभावी चित्रण किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – चन्द्रशेखर
'प्रबंधकोष' का लेखक निम्न लिखित में से कौन था ?
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 ‘प्रबंधकोष’ जैन साहित्य की एक प्रसिद्ध प्राकृत रचना है।
👉 इसके रचयिता राजशेखर सूरी थे।
👉 इस ग्रंथ में अनेक जैन आचार्यों, विद्वानों और ऐतिहासिक व्यक्तियों के जीवन प्रसंगों का वर्णन किया गया है।
👉 यह कृति जैन प्रबंध साहित्य का एक प्रमुख और विश्वसनीय स्रोत मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – राजशेखर सूरी
निम्नलिखित में से कौन सा ग्रंथ जयपुर की स्थापना एवं शहर की नगर निर्माण योजना की जानकारी देता है ?
[JEN (सिविल) (डिप्लोमा धारक) 06.12.2020]
👉 ‘बुद्धि विलास’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता बख्तराम शाह थे।
👉 इस ग्रंथ में जयपुर नगर की स्थापना (1727 ई.) और उसकी नगर निर्माण योजना का विस्तृत वर्णन है।
👉 यह ग्रंथ जयपुर राज्य के सामाजिक, स्थापत्य और राजनीतिक इतिहास का विश्वसनीय स्रोत है।
✍️ सही उत्तर है – बुद्धि विलास
कौनसा कूट सुमेलित है - [*]
[JEN (यांत्रिक डिप्लोमा) 21.08.2016]
📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है।
पद्मावत नामक महाकाव्य की रचना किसके द्वारा एवं कब की गई ?
कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रिशियन) 19.11.2024
👉 ‘पद्मावत’ एक प्रसिद्ध प्रेमगाथात्मक महाकाव्य है।
👉 इसकी रचना सूफी कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने की थी।
👉 यह काव्य 1540 ई. में पूरा हुआ।
👉 इसमें चित्तौड़ की रानी पद्मावती और राजा रतनसिंह के प्रेम प्रसंग का वर्णन है।
✍️ सही उत्तर है – मलिक मुहम्मद जायसी, 1540 ई.
संतों का जीवन इतिहास जो कविता रूप में राजस्थान में उपलब्ध है, ________के नाम से जाना जाता है।
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (1st Phase) 01.12.2024]
👉 राजस्थान के संत कवियों के जीवन और उपदेशों का वर्णन काव्य रूप में किया गया है।
👉 इन रचनाओं में संतों का जीवन परिचय, भक्ति भावना और आध्यात्मिक अनुभव मिलता है।
👉 ऐसी काव्यात्मक रचनाएँ राजस्थानी संत साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं।
👉 इन्हें राजस्थान में ‘पारची’ के नाम से जाना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – पारची
कर्नल जेम्स टॉड ने 'हिन्दू ओलम्पस' किसे कहा है ?
[सूचना सहायक 12.05.2018]
👉 कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Annals and Antiquities of Rajasthan’ में
👉 माउंट आबू को ‘Hindu Olympus’ (हिन्दू ओलम्पस) कहा है।
✍️ सही उत्तर है – माउंट आबू
'नृत्य रत्न कोष' की रचना किसने की ?
[JEN (Civil डिप्लोमा) 16.10.2016]
👉 ‘नृत्य रत्नकोष’ प्रसिद्ध ग्रंथ ‘संगीत राज’ का एक भाग है।
👉 इसकी रचना महाराणा कुम्भा ने की थी।
👉 इस ग्रंथ में गीत, वाद्य और नृत्य — तीनों कलाओं का विस्तृत विवेचन किया गया है।
👉 कुम्भा न केवल मेवाड़ के शासक, बल्कि एक महान संगीतज्ञ और कला-प्रेमी भी थे।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा कुम्भा
रियासतों के शासकों ने अपनी वीरता, विजयों आदि के वृत्तांतों को इतिहासकारों द्वारा लिखे गए अभिलेखों में संजोकर रखा है। इन वृत्तांतों को क्या कहा जाता है?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (2nd Phase) 01.12.2024]
👉 राजस्थान की रियासतों के शासकों ने अपनी वीरता, विजय और कार्यों का लेखा-जोखा संचित कराया।
👉 इन ऐतिहासिक विवरणों को इतिहासकारों द्वारा अभिलेखों में लिपिबद्ध किया गया।
👉 ऐसे वृत्तांत राजवंशों के राजनीतिक और सामाजिक जीवन का साक्ष्य देते हैं।
👉 इन्हें राजस्थानी साहित्य में ‘ख्यात’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – ख्यात
वीर सत्सई, बलवद्विलास और रामरंजाट के लेखक हैं :
[प्रयोगशाला सहायक 03.02.2019]
👉 ‘वीर सतसई’, ‘बलवद् विलास’ और ‘राम रंजाट’ — ये तीनों कृतियाँ सूर्यमल्ल मिश्रण (मीसण) द्वारा रचित हैं।
👉 सूर्यमल्ल मिश्रण बूँदी राज्य के महान कवि थे और उन्हें ‘राजस्थान भूषण’ की उपाधि प्राप्त थी।
👉 उनकी रचनाओं में वीरता, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना का अद्भुत समन्वय है।
👉 वे आधुनिक राजस्थानी काव्य नवजागरण के पुरोधा माने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – सूर्यमल्ल मिश्रण
वह काव्य ग्रंथ, जो किसी राजा की महानता, उसकी विजय, युद्ध और वीरता का वर्णन करता है, कहलाता है:-
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (6th Phase) 03.12.2024]
👉 वह काव्य ग्रन्थ जिसमें किसी राजा की महानता, विजय, युद्ध और वीरता का वर्णन होता है, वीर रस प्रधान माना गया है।
👉 ऐसे ग्रन्थों में राजपूती पराक्रम और इतिहास की गौरव गाथाएँ चित्रित की जाती हैं।
👉 यह साहित्य राजस्थान की वीर परम्परा का प्रतीक है।
👉 इस प्रकार की रचनाएँ ‘रासो’ कहलाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – रासो
'खुमाण रासो' का रचनाकार कौन था ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (अस्त्रक्षेप) 21.09.2019]
👉 ‘खुमाण रासो’ राजस्थानी भाषा की एक प्रसिद्ध वीर रसात्मक रचना है।
👉 इसके रचयिता दलपत विजय (या दौलत विजय) थे।
👉 इस ग्रंथ में बप्पा रावल से लेकर महाराणा राजसिंह तक के मेवाड़ शासकों का वर्णन है।
👉 इसमें विशेष रूप से हल्दीघाटी के युद्ध और प्रताप–शक्तिसिंह मिलन का उल्लेख मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – दलपत
"एक बीनणी दो बीन" उपन्यास के लेखक कौन हैं ?
कनिष्ठ अनुदेशक (मैके. डीजल) 16.11.2024
👉 ‘एक बीनणी दो बीन’ राजस्थानी भाषा का एक प्रसिद्ध उपन्यास है।
👉 इसके लेखक सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीलाल नथमल जोशी हैं।
👉 यह उपन्यास सामाजिक जीवन और पारिवारिक संबंधों का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है।
👉 नथमल जोशी आधुनिक राजस्थानी गद्य साहित्य के प्रमुख उपन्यासकारों में गिने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – श्रीलाल नथमल जोशी
मेवाड़ चित्र शैली का सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ है :
[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 मेवाड़ चित्र शैली राजस्थान की सबसे प्राचीन और प्रमुख लघु चित्रकला परंपरा है।
👉 इस शैली का सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ ‘सावग पदिक्कमनासूत्त चून्नी’ माना जाता है।
👉 यह ग्रंथ जैन परंपरा से संबंधित है और इसमें अत्यंत सुंदर लघु चित्रांकन किए गए हैं।
✍️ सही उत्तर है – सावग पदिक्कमनासूत्त चून्नी
राजपूत जीवन सन्ध्या' उपन्यास लिखा है :-
[JEN (Civil डिप्लोमा) 16.10.2016]
👉 ‘राजपूत जीवन संध्या’ एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यास है।
👉 इसके रचयिता रमेशचन्द्र दत्त थे, जो एक प्रतिष्ठित इतिहासकार, साहित्यकार और प्रशासक भी थे।
👉 इस उपन्यास में हल्दीघाटी युद्ध और महाराणा प्रताप के जीवन के संघर्षपूर्ण अंतिम काल का वर्णन है।
👉 कृति में राजपूती शौर्य, त्याग और स्वाभिमान का प्रभावी चित्रण किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – रमेशचन्द्र दत्त
साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता, राजस्थानी कविता 'मुगती' के लेखक हैं:
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (1st Phase) 01.12.2024]
👉 ‘मुगती’ राजस्थानी भाषा का एक प्रसिद्ध कविता संग्रह है।
👉 यह रचना अपने भाव, भाषा और शैली के कारण अत्यंत सराही गई।
👉 इस कृति को केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार (2021) से सम्मानित किया गया।
👉 इसके रचयिता आधुनिक राजस्थानी कवि मीठेश निर्मोही हैं।
✍️ सही उत्तर है – मीठेश निर्मोही
ढोला-मारू-रा-दोहा का रचनाकार कौन था ?
[JEN (यांत्रिक) (डिप्लोमाधारक) 13.12.2020]
👉 ‘ढोला-मारू-रा-दोहा’ राजस्थान का अत्यंत प्रसिद्ध लोकप्रसिद्ध प्रेमाख्यान काव्य है।
👉 इसके रचयिता कवि कल्लोल माने जाते हैं।
👉 इस रचना में ढोला और मारवणी की प्रेम कथा का भावपूर्ण वर्णन है।
👉 यह कृति डिंगल भाषा में रचित और श्रृंगार रस प्रधान है।
✍️ सही उत्तर है – कल्लोल
राजपूतों को हूणों की सन्तान बताया हैं -
[पर्यवेक्षक परीक्षा 29.11.2015]
👉 इतिहासकार वी. ए. स्मिथ ने राजपूतों की उत्पत्ति को हूणों की सन्तान के रूप में बताया।
👉 उन्होंने माना कि राजपूतों का गठन विदेशी जातियों और स्थानीय क्षत्रियों के मिश्रण से हुआ।
✍️ सही उत्तर है – वी. ए. स्मिथ
राजस्थान की भाषा के लिए 'राजस्थानी' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किसने किया था ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 03.03.2019]
👉 ‘राजस्थानी’ शब्द का प्रयोग राजस्थान की भाषा के लिए सर्वप्रथम जार्ज अब्राहम ग्रीरसन (George Abraham Grierson) ने किया था।
✍️ सही उत्तर है – जार्ज अब्राहम ग्रीरसन
“राने जगपत रा मरस्या” किसके मृत्यु का शोक प्रकट करने के लिए लिखा गया?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (5th Phase) 03.12.2024]
👉 ‘राणे जगपत रा मरस्या’ राजस्थानी भाषा की एक शोकात्मक रचना है।
👉 यह काव्य किसी महान शासक की मृत्यु पर रचा गया था।
👉 इस रचना में महाराणा जगत सिंह की मृत्यु पर गहरा शोक और श्रद्धा भाव व्यक्त किया गया है।
👉 यह रचना मरस्या शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा जगत सिंह
मुँहणोत नैणसी की किस रचना की तुलना 'आइन-ए-अकबरी' से की जाती है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (ICT) 04.01.2025]
👉 मुहणोत नैणसी जोधपुर राज्य के प्रसिद्ध इतिहासकार और दीवान थे।
👉 उनकी प्रमुख रचना ‘मारवाड़ रा परगनां री विगत’ जोधपुर राज्य का एक गजेटियर स्वरूप ग्रन्थ है।
👉 इसमें सात परगनों की जनसंख्या, भूगोल, राजस्व और ग्रामीण जीवन का विस्तृत वर्णन मिलता है।
👉 इस रचना की तुलना ‘आइन-ए-अकबरी’ से की जाती है।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़ रा परगनां री विगत
कवि चन्द्रवरदायी ने राजपूत राजवंशों की सूची दी है -
[JEN (यांत्रिक डिप्लोमा) 21.08.2016]
👉 कवि चन्दबरदाई ने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘पृथ्वीराज रासो’ में
👉 कुल 36 राजपूत राजवंशों की सूची दी है।
👉 उन्होंने इन वंशों की उत्पत्ति आबू पर्वत के अग्निकुण्ड से बताई।
👉 यह उल्लेख राजपूत वंशों की गौरवगाथा के रूप में अत्यंत प्रसिद्ध हुआ।
✍️ सही उत्तर है – 36
हल्दीघाटी युध्द को बदांयूनी ने किस युद्ध की संज्ञा दी ?
[JEN Mechenical डिग्री 16.10.2016]
👉 प्रसिद्ध इतिहासकार अब्दुल कादिर बदायूनी ने हल्दीघाटी युद्ध (1576 ई.) का प्रत्यक्ष वर्णन किया है।
👉 उन्होंने अपनी कृति ‘मुन्तखब-उत-तवारीख’ में इस युद्ध को ‘गोगुन्दा का युद्ध’ कहा है।
👉 यह युद्ध महाराणा प्रताप और अकबर की सेना (मानसिंह के नेतृत्व में) के बीच लड़ा गया था।
👉 बदायूनी ने इसमें युद्ध की भीषणता और वीरता का सजीव वर्णन किया है।
✍️ सही उत्तर है – गोगुन्दा युद्ध
कौन सा रासो राजपूतों की उत्पत्ति को 'अग्निकुंड' से सम्बन्धित करता है ?
[JEN (सिविल) (डिप्लोमा धारक) 06.12.2020]
👉 ‘पृथ्वीराज रासो’ राजस्थान का प्रसिद्ध वीरगाथा कालीन महाकाव्य है।
👉 इसके रचयिता चन्दबरदाई थे।
👉 इस ग्रंथ में सर्वप्रथम राजपूतों की उत्पत्ति ‘अग्निकुंड’ से बताई गई है।
👉 इसमें पृथ्वीराज चौहान के जीवन, युद्धों और वीरता का विस्तृत वर्णन है।
✍️ सही उत्तर है – पृथ्वीराज रासो
'राग चंद्रिका' किसके द्वारा रचित है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]
👉 ‘राग चंद्रिका’ भारतीय संगीत पर आधारित एक प्रसिद्ध संगीत ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता द्वारकानाथ भट्ट थे।
✍️ सही उत्तर है – द्वारकानाथ भट्ट
"राव जैतसी रो छन्द" के रचयिता है :-
[पशुधन सहायक (LSA) 16.10.2016]
👉 ‘राव जैतसी रो छन्द’ (या ‘राव जैतसी रो पाघड़ी छन्द’) एक प्रसिद्ध डिंगल काव्य रचना है।
👉 इसके रचयिता बीठू सूजा थे, जो राव बीका और राव लूणकरण के समकालीन कवि थे।
👉 इस रचना में राव जैतसी और बाबर के पुत्र कामरान के युद्ध का सजीव वर्णन है।
👉 इसमें राठौड़ वीरों की वीरता और शौर्य गाथा का प्रभावी चित्रण किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – बीठू सूजा
निम्न में से कौन राजतरंगिणी का लेखक है ?
[कर सहायक 14.10.2018]
👉 ‘राजतरंगिणी’ संस्कृत भाषा में रचित एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक महाकाव्य है।
👉 इसके रचयिता कल्हण थे।
✍️ सही उत्तर है – कल्हण
'वीर 'विनोद' के अनुसार हल्दीघाटी युद्ध में मुगल सेना की संख्या कितनी थी ?
[उद्योग निरीक्षक परीक्षा 24.06.2018]
👉 ‘वीर विनोद’ मेवाड़ के इतिहास पर आधारित प्रसिद्ध इतिहास ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता कविराज श्यामलदास थे।
👉 इस ग्रंथ के अनुसार हल्दीघाटी के युद्ध (1576 ई.) में मुगल सेना की संख्या लगभग 80,000 बताई गई है।
👉 इस युद्ध में महाराणा प्रताप ने वीरता और स्वाभिमान का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
✍️ सही उत्तर है – 80,000
वह साहित्य जो अभिलेखों, सिक्कों तथा मुहरों पर उत्कीर्ण होता है, ______ साहित्य कहलाता है।
निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें
[CET (10+2) 23.10.2024 तृतीय चरण]
👉 वह साहित्य जो अभिलेखों, सिक्कों तथा मुहरों पर उत्कीर्ण किया जाता है, उसे विशेष श्रेणी में रखा गया है।
👉 इस प्रकार का साहित्य इतिहास और संस्कृति की महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान करता है।
👉 ऐसे अभिलेखों पर अंकित लेखन को पुरालेखीय साहित्य कहा जाता है।
👉 यह साहित्य राजकीय आदेशों, दानपत्रों और शिलालेखों में मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – पुरालेखीय
कौनसा कूट सुमेलित नहीं है ?
[JEN (Civil डिग्री) 16.10.2016]
लेखक - रचना
👉 ‘माधवानल कामकंदला’ एक प्रसिद्ध प्रेमाख्यान काव्य है।
👉 इसके रचयिता गणपति कवि थे, न कि जिनेश्वर सूरी।
👉 इस काव्य में माधवानल और कामकंदला की प्रेम कथा का सुन्दर वर्णन है।
👉 अतः युग्म ‘जिनेश्वर सूरी – माधवानल कामकंदला’ असुमेलित है।
✍️ सही उत्तर है – जिनेश्वर सूरी – माधवानल कामकंदला
'शोक शतक' के लेखक कौन थे ?
[JEN (विधुत) (डिग्रीधारक) 29.11.2020]
👉 ‘शोक शतक’ आधुनिक काल की एक प्रसिद्ध राजस्थानी काव्य रचना है।
👉 इसके रचयिता बालाबक्श पालावत थे।
👉 इस कृति में कवि ने जीवन के दुःख, संवेदना और मानवीय करुणा का गहन चित्रण किया है।
👉 यह रचना भावनात्मक और दार्शनिक गहराई के लिए प्रसिद्ध है।
✍️ सही उत्तर है – बालाबक्श पालावत
"वंश भास्कर" को किस प्रसिद्ध लेखक द्वारा लिखा गया ? [*]
[उद्योग निरीक्षक परीक्षा 24.06.2018]
📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है।
राजस्थानी साहित्य के किस विधा में कहानी कही और सुनी जाती है ?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (5th Phase) 03.12.2024]
👉 राजस्थानी साहित्य में ऐसी विधा भी विकसित हुई जिसमें कहानी कहने और सुनने की परंपरा रही।
👉 इस विधा में जीवन के धार्मिक, वीर, दार्शनिक और मनोरंजक प्रसंगों का वर्णन होता है।
👉 इसमें कहानी कहने वाला बोलता है और सुनने वाला हुंकारा देता रहता है।
👉 इस शैली की रचनाएँ ‘वात’ कहलाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – वात
खुमाण रासो का रचनाकार कौन था ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (STE) 05.01.2025]
👉 ‘खुमाण रासो’ राजस्थानी भाषा का एक वीर रसप्रधान महाकाव्य है।
👉 इसके रचयिता कवि दलपत विजय (दलपत) थे।
👉 इस ग्रन्थ में बप्पा रावल से महाराणा राजसिंह तक के मेवाड़ राजाओं का वर्णन है।
👉 इसमें हल्दीघाटी युद्ध और मुगल–मेवाड़ संबंधों का विस्तृत चित्रण मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – दलपत
निम्न में से कविराज श्यामलदास द्वारा रचित महत्त्वपूर्ण कृति कौनसी है ?
[सुपरवाईजर परीक्षा 06.01.2019]
👉 कविराज श्यामलदास मेवाड़ के प्रसिद्ध इतिहासकार और साहित्यकार थे।
👉 उनकी सर्वाधिक प्रसिद्ध कृति ‘वीर विनोद’ है।
👉 यह ग्रंथ मेवाड़ राज्य का विस्तृत पद्यात्मक इतिहास प्रस्तुत करता है।
👉 इसमें महाराणा बप्पा रावल से लेकर महाराणा सज्जनसिंह तक का इतिहास वर्णित है।
👉 यह कृति राजस्थान के इतिहास की प्रामाणिक स्रोत ग्रंथों में से एक है।
✍️ सही उत्तर है – वीर विनोद
'हम्मीर महाकाव्य' का लेखक कौन था ?
[JEN (कृषि) 12.07.2015]
👉 ‘हम्मीर महाकाव्य’ संस्कृत भाषा में रचित एक महत्त्वपूर्ण काव्य है।
👉 इसके रचयिता प्रसिद्ध जैन आचार्य नयनचन्द्र सूरि थे।
👉 इस ग्रन्थ में चौहानों की वंशावली, अजमेर का वर्णन और रणथम्भौर अभियान का विवरण है।
👉 इसमें अलाउद्दीन खिलजी व हम्मीरदेव चौहान के युद्ध का भी उल्लेख मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – नयनचन्द्र सूरि
'रणमल छंद' किसकी रचना है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कार्यशाला) 19.11.2024]
👉 ‘रणमल छंद’ राजस्थानी भाषा का एक वीर रसात्मक खण्डकाव्य है।
👉 इसके रचयिता प्रसिद्ध कवि श्रीधर व्यास हैं।
👉 इस काव्य में ईडर के राजा रणमल्ल और पाटन के सुबेदार जफरखाँ के युद्ध का वर्णन है।
👉 इसमें कुल 70 छंद हैं और यह चारण साहित्य की प्रमुख रचना मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – श्रीधर व्यास
राजस्थानी गद्य और पद्य की विधाओ में वे रचनाएँ जो किसी व्यक्ति एवं राजवंश की उपलब्धियों एवं घटनाओं पर प्रकाश डालती हैं, ________ कहलाती हैं| (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनेः)
[CET (10+2) 24.10.2024 पंचम चरण]
👉 राजस्थानी गद्य और पद्य साहित्य में अनेक विशिष्ट विधाएँ विकसित हुईं।
👉 इनमें वे रचनाएँ जो किसी व्यक्ति या राजवंश की उपलब्धियों और महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रकाश डालती हैं, विशेष मानी जाती हैं।
👉 इन रचनाओं को राजस्थानी साहित्य में ‘प्रकास’ कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – प्रकास
'मायड़ रो हेलो' रचना किसने लिखी ?
[JEN (यांत्रिक डिप्लोमा) 21.08.2016]
👉 ‘मायड़ रो हेलो’ प्रसिद्ध राजस्थानी कवि कन्हैयालाल सेठिया की रचना है।
👉 यह कविता राजस्थानी भाषा को मान्यता दिलाने के उद्देश्य से लिखी गई थी।
👉 इसमें कवि ने अपनी मां-भाषा राजस्थानी के प्रति गहरी भावनात्मक पीड़ा और प्रेम व्यक्त किया है।
👉 यह कविता राजस्थानी अस्मिता और गौरव का प्रतीक मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – कन्हैयालाल सेठिया
लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इण्डिया' के लेखक हैं :-
[JEN (Civil डिप्लोमा) 16.10.2016]
👉 ‘Linguistic Survey of India’ भारत की भाषाओं पर किया गया एक महत्वपूर्ण भाषावैज्ञानिक अध्ययन है।
👉 इसके रचयिता जार्ज अब्राहम ग्रियर्सन (George Abraham Grierson) थे।
✍️ सही उत्तर है – जार्ज ग्रियर्सन
वह काव्य ग्रंथ जिसमें राजा के गौरवशाली वैभव, युद्ध और वीरता का वर्णन मिलता है, वह है:
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (4th Phase) 02.12.2024]
👉 वह काव्य ग्रन्थ जिसमें किसी राजा के गौरव, वैभव और युद्धों का वर्णन होता है, वीर रस की प्रधानता रखता है।
👉 ऐसे ग्रन्थों में शासकों की वीरता, विजय और पराक्रम का प्रभावी चित्रण मिलता है।
👉 यह साहित्य राजपूती शौर्य और इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत है।
👉 इस प्रकार की रचनाएँ ‘रासो’ कहलाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – रासो
'जुलगमैन चरित्र' की रचना किसने की ?
[पशुधन सहायक (LSA) 16.10.2016]
👉 ‘जुगलमैन चरित्र’ (या ‘जुगलमैन चरित’) एक प्रसिद्ध भक्तिपरक रचना है।
👉 इसके रचयिता कृष्णदास पयहारी थे।
👉 यह कृति भक्ति, ज्ञान और वैराग्य भावना से ओतप्रोत है।
👉 कृष्णदास पयहारी रामभक्ति परंपरा के प्रमुख संतों में से एक माने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – कृष्णदास पयहारी
निम्न लिखित में से कौन सी रचना जिनराजसूरि की नहीं हैं ?
[संकलनकर्ता परीक्षा 21.08.2016]
👉 जिनराजसूरि प्रसिद्ध जैन आचार्य और ग्रंथकार थे।
👉 उनकी प्रमुख रचनाओं में निबंध कोश, संवेग लहरी, और श्रावकाचार संग्रह शामिल हैं।
👉 जबकि ‘रास कैलास’ रचना जिनराजसूरि की नहीं है।
👉 अतः यह युग्म असुमेलित माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – रास कैलास
राजस्थान इतिहास का जनक किसे कहा जाता है ?
[संगणक परीक्षा 05.05.2018]
👉 राजस्थान इतिहास का जनक कहलाने का श्रेय कर्नल जेम्स टॉड को जाता है।
👉 उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘Annals and Antiquities of Rajasthan’ (1829–1832) में राजस्थान के इतिहास, संस्कृति और समाज का विस्तृत वर्णन किया।
👉 टॉड ने सर्वप्रथम ‘राजस्थान’, ‘रायथान’ और ‘रजवाड़ा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया।
👉 उनके कार्य ने राजस्थान के इतिहास लेखन की नींव रखी।
✍️ सही उत्तर है – कर्नल टॉड
जयानक ने कौन सी कृति की रचना की ?
[JEN (सिविल) (डिप्लोमा धारक) 06.12.2020]
👉 जयानक संस्कृत भाषा के प्रसिद्ध कवि और इतिहासकार थे।
👉 उन्होंने ‘पृथ्वीराज विजय’ नामक कृति की रचना की।
👉 इस ग्रंथ में सपादलक्ष के चौहानों और पृथ्वीराज तृतीय की वीरता का वर्णन है।
👉 इसमें अजमेर नगर की तुलना इन्द्रपुरी से की गई है।
✍️ सही उत्तर है – पृथ्वीराज विजय
मारवाड रा परगना री विगत" ग्रंथ लिखा है
[पर्यवेक्षक परीक्षा 29.11.2015]
👉 ‘मारवाड़ रा परगना री विगत’ राजस्थान का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक गद्य ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता मुहणोत नैणसी थे, जो जोधपुर राज्य के दीवान रहे।
👉 इस ग्रंथ में मारवाड़ राज्य के सात परगनों की जनसंख्या, भूगोल, राजस्व और ग्रामीण जीवन का विस्तृत वर्णन है।
👉 इसे जोधपुर राज्य का गजेटियर कहा जाता है और यह अत्यंत विश्वसनीय ऐतिहासिक स्रोत है।
✍️ सही उत्तर है – मुहणोत नैणसी
"पश्चिमी भारत की यात्रा" नामक ग्रंथ के लेखक कौन थे ?
कनिष्ठ अनुदेशक (मैके. डीजल) 16.11.2024
👉 ‘पश्चिमी भारत की यात्रा’ नामक ग्रन्थ का संबंध राजस्थान के इतिहास और संस्कृति से है।
👉 इसके लेखक प्रसिद्ध अंग्रेज़ इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड थे।
👉 यह पुस्तक 1839 ई. में उनकी पत्नी जूलिया क्लटरबक द्वारा प्रकाशित करवाई गई।
👉 इसमें टॉड ने अपने राजस्थान प्रवास, ऐतिहासिक स्थलों और जनजीवन का वर्णन किया है।
✍️ सही उत्तर है – कर्नल जेम्स टॉड
'समता दर्शन और व्यवहार' पुस्तक किसने लिखी ?
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (4th Phase) 02.12.2024]
👉 ‘समता दर्शन और व्यवहार’ एक महत्वपूर्ण दार्शनिक ग्रन्थ है।
👉 इस पुस्तक के लेखक प्रसिद्ध जैन आचार्य नानेश मुनि हैं।
👉 इसमें समता, अहिंसा और सदाचार के जीवनमूल्यों का विस्तार से वर्णन है।
👉 यह ग्रन्थ जैन दर्शन के सिद्धांतों को सरल रूप में प्रस्तुत करता है।
✍️ सही उत्तर है – आचार्य नानेश मुनि
बीठू सूजा ने अपने ग्रंथ 'राव जैतसी रो छन्द' में किसे 'कलियुग का कर्ण' कहा ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (MNV) 07.01.2025]
👉 बीठू सूजा डिंगल भाषा के प्रसिद्ध चारण कवि थे।
👉 उन्होंने अपने ग्रंथ ‘राव जैतसी रो छन्द’ में बीकानेर के शासकों के पराक्रम और दानशीलता का वर्णन किया।
👉 इस काव्य में उन्होंने राव लूणकर्ण की प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘कलियुग का कर्ण’ कहा है।
✍️ सही उत्तर है – राव लूणकर्ण
कुवलयमाला किसके द्वारा लिखी है ?
[संगणक परीक्षा 05.05.2018]
👉 ‘कुवलयमाला’ प्राकृत भाषा में रचित एक प्रसिद्ध जैन ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता आचार्य उद्योतन सूरी थे।
👉 यह ग्रंथ जैन धर्म, समाज और समकालीन जीवन का महत्वपूर्ण चित्र प्रस्तुत करता है।
👉 इसे प्राकृत साहित्य की सर्वोत्तम कृतियों में गिना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – उद्योतन सूरी
किस फारसी साहित्य से रणथम्भोर पर मुस्लिम आक्रमण की जानकारी मिलती है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (ड्राइंग) 20.11.2024]
👉 ‘तारीख-ए-फीरोजशाही’ एक प्रसिद्ध फारसी ग्रन्थ है।
👉 इसके लेखक जियाउद्दीन बरनी थे, जिन्होंने दिल्ली सल्तनत के काल का वर्णन किया।
👉 इस ग्रन्थ से रणथम्भौर पर हुए मुस्लिम आक्रमणों की जानकारी प्राप्त होती है।
👉 इसमें खिलजी और तुगलक वंश के शासनकाल की घटनाएँ वर्णित हैं।
✍️ सही उत्तर है – तारीख-ए-फीरोजशाही
महाराणा कुम्भा की 'कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति' में किस बोली का प्रयोग किया गया है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (MNV) 07.01.2025]
👉 महाराणा कुम्भा के समय में रचित ‘कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति’ ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
👉 यह प्रशस्ति चित्तौड़ के कीर्ति स्तम्भ पर अंकित है।
👉 इसमें महाराणा कुम्भा की विजयों और पराक्रम का उल्लेख मिलता है।
👉 इस प्रशस्ति में प्रयुक्त भाषा मेवाड़ी बोली है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ी
भक्ति काल का राजस्थानी साहित्य मुख्यतः ________के मध्य लिखा गया।
निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें:
[पशु परिचर (3rd Phase) 02.12.2024]
👉 राजस्थानी साहित्य का भक्ति काल मध्ययुगीन साहित्य का प्रमुख चरण है।
👉 इस काल में संतों और भक्त कवियों ने भक्ति व उपदेशात्मक रचनाएँ प्रस्तुत कीं।
👉 यह काल राजस्थान में संत परम्परा और भक्तिधारा के विकास का युग था।
👉 भक्ति काल का यह साहित्य मुख्यतः 1450 से 1650 ईस्वी के मध्य रचा गया।
✍️ सही उत्तर है – 1450-1650 ई.
राजस्थानी साहित्य के 'सूरज प्रकाश' के लेखक कौन हैं ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (वायरमेन) 05.01.2025]
👉 ‘सूरज प्रकाश’ राजस्थानी भाषा का एक प्रसिद्ध डिंगल काव्य है।
👉 इसके रचयिता कवि करणीदान कविया थे, जो महाराजा अभयसिंह के आश्रित कवि थे।
👉 इस ग्रन्थ में राठौड़ों की 13 शाखाओं का उल्लेख किया गया है।
👉 इसमें सुमेल व धरमत के युद्धों तथा मुगल दरबार की घटनाओं का भी वर्णन है।
✍️ सही उत्तर है – करणीदान कविया
"अर्ली चौहान डायनेस्टिज" लिखी है -
[पशुधन सहायक (LSA) 21.08.2016]
👉 ‘The Early Chauhan Dynasties’ एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक शोध ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता डॉ. दशरथ शर्मा थे।
👉 इस ग्रंथ में राजस्थान के चौहान वंशों की उत्पत्ति, विस्तार और राजनीतिक इतिहास का विस्तृत अध्ययन किया गया है।
👉 यह कृति राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास के अध्ययन के लिए एक प्रामाणिक स्रोत मानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – डॉ. दशरथ शर्मा
रानी लक्ष्मी कुमारी चूण्डावत को पद्मश्री, उनके किस क्षेत्र में योगदान के लिए दिया गया ?
[उद्योग प्रचार अधिकारी 22.07.2018]
👉 रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत राजस्थान की प्रसिद्ध साहित्यकारा, इतिहासकार और समाजसेविका थीं।
👉 इन्हें राजस्थानी साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान (1984) प्रदान किया गया।
👉 उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – टाबरां री बातां, मांझळ रात, मूमळ, बाघो भारमली, और मेवाड़ी फागण।
👉 उन्होंने राजस्थान की लोकसंस्कृति और नारी चेतना को अपनी रचनाओं में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
✍️ सही उत्तर है – साहित्यिक क्षेत्र
निम्नलिखित में से कौन जयपुर एवं जोधपुर की स्थापना तिथि बताता है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रिशियन) 24.03.2019]
👉 ‘बांकीदास री ख्यात’ राजस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण गद्य ग्रंथ है।
👉 इसके रचयिता आसिया बांकीदास थे, जो जोधपुर के दरबारी कवि थे।
👉 इस ख्यात में मारवाड़, मेवाड़ और अन्य राठौड़ राज्यों के इतिहास का वर्णन है।
👉 इसमें जयपुर और जोधपुर नगरों की स्थापना तिथियों का भी उल्लेख मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – बांकीदास की ख्यात