"उस्ता कला" पद का प्रयोग किस चित्रकला शैली के संदर्भ में किया जाता है ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -A) 11.12.2022]
👉 राजस्थान की बीकानेर शैली मुगल व राजस्थानी शैलियों के मिश्रण से विकसित हुई।
👉 इस शैली की एक अनोखी विशेषता ऊँट की खाल पर बनाई जाने वाली चित्रकारी रही।
👉 ऊँट की खाल पर इस विशेष कला को उस्ता कला कहा जाता है।
👉 बीकानेर में उस्ता परिवार के कलाकारों ने इस कला को विशेष पहचान दिलाई।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर
निम्नलिखित में से कौन सी मेवाड़ चित्रकला शैली की उपशैली है ?
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन व मौलिक शैली है।
👉 इसके प्रभाव से कई उपशैलियाँ विकसित हुईं।
👉 इनमें देवगढ़ शैली विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
👉 देवगढ़ में चित्रकारों ने प्राकृतिक परिवेश, शृंगार व राजसी ठाठ-बाट को दर्शाया।
✍️ सही उत्तर है – देवगढ़
चित्रकार निसारदीन और साहिबदीन किस चित्रकला शैली से संबंधित थे ?
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन और मौलिक शैली है।
👉 इस शैली के विकास में अनेक प्रतिभाशाली चित्रकारों का योगदान रहा।
👉 इनमें प्रमुख नाम निसारदीन और साहिबदीन के हैं, जिन्होंने लघु चित्रों की अद्भुत परम्परा विकसित की।
👉 इन दोनों ने मेवाड़ शैली को उसकी विशिष्ट पहचान दिलाई।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
राजस्थानी चित्र शैली विशुद्ध रुप से भारतीय है ऐसा किसने कहा
[पर्यवेक्षक परीक्षा 29.11.2015]
📌 नोट - इस प्रश्न को बोर्ड ने डिलीट (Delete) माना है।
चाँद, तैय्यब, रामसिंह भाटी, साहिबा एवं उस्ना चित्रकार निम्न में से किस चित्र शैली से सम्बन्धित हैं ?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिग्री) 20.05.2022
👉 अजमेर शैली मारवाड़ स्कूल की एक उपशाखा है।
👉 इसमें दरबारी जीवन, सामंती संस्कृति और लोक तत्त्वों का चित्रण प्रमुख है।
👉 इस शैली में कई प्रसिद्ध चित्रकारों ने अपनी कृतियाँ बनाईं।
👉 इनमें चाँद, तैय्यब, रामसिंह भाटी, साहिबा और उस्ना प्रमुख रूप से शामिल हैं।
✍️ सही उत्तर है – अजमेर
उनियारा चित्रकला शैली, चित्रकला की किन शैलियों का मिश्रण है?
[वनरक्षक (चतुर्थ चरण) 13.11.2022]
👉 उनियारा शैली ढूंढाड़ स्कूल की एक महत्त्वपूर्ण उपशैली है।
👉 इस शैली में चित्रण की तकनीक पर जयपुर शैली का प्रभाव देखा जाता है।
👉 साथ ही इसमें रंगों और भावाभिव्यक्ति में बूँदी शैली की छाप स्पष्ट मिलती है।
👉 इसलिए इसे जयपुर और बूँदी शैली के मिश्रण से विकसित शैली माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर और बूंदी शैली
पिछवाई चित्रांकन किस चित्रकला शैली से सम्बंधित है ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (भौतिक) 21.09.2019]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका आरम्भ श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना (1670 ई.) के साथ हुआ।
👉 इस शैली की मौलिक देन पिछवाई चित्रण है।
👉 पिछवाई चित्रों में श्रीकृष्ण की लीलाओं का अंकन किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा
किस क्षेत्र को राजस्थानी चित्रकला का जन्म स्थान माना जाता है
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -A) 11.12.2022]
👉 राजस्थानी चित्रकला का उद्भव 15वीं सदी के आसपास माना जाता है।
👉 इसका विकास प्रारम्भ में जैन, अपभ्रंश व अजन्ता परम्परा से प्रभावित रहा।
👉 विशुद्ध राजस्थानी चित्रकला की जन्मभूमि मेदपाट/ मेवाड़ क्षेत्र था।
👉 इसी कारण मेवाड़ को राजस्थानी चित्रकला का जन्म स्थान कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
किशनगढ़ चित्रकला का स्वर्ण युग किसके शासनकाल को माना जाता है ?
कनिष्ठ अनुदेशक (मैके. डीजल) 16.11.2024
👉 किशनगढ़ शैली की नींव राजा रूपसिंह ने रखी थी, पर इसका उत्कर्ष बाद में हुआ।
👉 इसका स्वर्ण युग राजा सावंतसिंह (1748–1765 ई.) के शासनकाल में माना जाता है।
👉 सावंतसिंह कवि भी थे, जिन्होंने ‘नागरीदास’ उपनाम से काव्य रचनाएँ कीं।
👉 इन्हीं के समय चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने बनी-ठनी जैसे अमर चित्र बनाए।
✍️ सही उत्तर है – सावंतसिंह शासनकाल
'दयालदास की ख्यात' में राजस्थान के किस राज्य का इतिहास संकलित है ?
[उद्योग प्रचार अधिकारी 22.07.2018]
👉 दयालदास की ख्यात राजस्थान की एक महत्त्वपूर्ण रचना है।
👉 इसमें बीकानेर राज्य के शासकों और उनकी राजनीतिक घटनाओं का विवरण मिलता है।
👉 यह ग्रंथ बीकानेर राज्य के इतिहास को संग्रहित करता है।
👉 इसलिए इसे बीकानेर राज्य का महत्त्वपूर्ण इतिहास स्रोत माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर
पशु, पक्षियों एवं प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण किस चित्र शैली की प्रमुख विशेषता रही है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
👉 बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल की सर्वाधिक विकसित चित्रशैली है।
👉 इसमें आकाश, बादल, वर्षा व पहाड़ों के साथ अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य दिखाया गया है।
👉 चित्रों में शेर, हिरण, बत्तख, कबूतर और पक्षियों का अत्यधिक चित्रण मिलता है।
👉 इस कारण बूँदी शैली को पशु-पक्षियों व प्रकृति चित्रण के लिए प्रसिद्ध माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – बूँदी चित्र शैली
किसने पाली के नायक विट्ठलदास चंपावत के लिए रागमाला चित्रावली बनाई ?
[स्टेनोग्राफर परीक्षा 05.10.2024]
👉 जोधपुर शैली का विकास 16वीं–17वीं शताब्दी में हुआ।
👉 इस शैली में रागमाला चित्रों का विशेष स्थान रहा।
👉 पाली के नायक विट्ठलदास चंपावत के लिए रचित रागमाला चित्रावली का निर्माण कलाकार वीरजी ने किया।
👉 वीरजी जोधपुर शैली के प्रमुख चित्रकारों में गिने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – कलाकार वीरजी
नाथद्वारा चित्रकला शैली प्रसिद्ध है ?
[शारीरिक शिक्षा अध्यापक 25.09.2022]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका आरम्भ श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना (1670 ई.) से हुआ।
👉 इस शैली की सबसे अनूठी व मौलिक देन पिछवाई चित्र माने जाते हैं।
👉 पिछवाई में श्रीनाथजी और कृष्ण की लीलाओं का विस्तृत चित्रण होता है।
✍️ सही उत्तर है – पिछवाई के लिए
देवी 'सांझी' किसकी अवतार हैं ?
छात्रावास अधी. Minority 30.08.2024
👉 राजस्थान की चित्र परम्परा में देवी सांझी का विशेष स्थान है।
👉 सांझी को देवी पार्वती का अवतार माना गया है।
👉 ग्रामीण जीवन में सांझी की पूजा उत्सव और लोकश्रद्धा से जुड़ी होती है।
👉 यह परम्परा धार्मिक भावना और लोककला दोनों को व्यक्त करती है।
✍️ सही उत्तर है – पार्वती
राजस्थान का कौन-सा जिला 'फड चित्रांकन' के लिए प्रसिद्ध है ?
[आर्थिक अन्वेषक परीक्षा 25.03.2019]
👉 राजस्थान की लोक चित्रकलाओं में फड़ चित्रण का विशेष स्थान है।
👉 यह परम्परा धार्मिक कथाओं और लोक विश्वासों से जुड़ी है।
👉 फड़ चित्रांकन का प्रमुख केन्द्र भीलवाड़ा जिला माना जाता है।
👉 यहाँ के शाहपुरा क्षेत्र और जोशी परिवार ने इसे विशेष पहचान दिलाई।
✍️ सही उत्तर है – भीलवाड़ा
पंचतन्त्र चित्रांकन किस चित्रशैली की प्रमुख विशेषता है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (मैकेनिक) 23.12.2019]
👉 मारवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की एक महत्त्वपूर्ण शाखा है।
👉 इसमें राजसी जीवन, प्रेमाख्यान और धार्मिक ग्रंथों पर आधारित चित्र बने।
👉 इस शैली की प्रमुख विशेषता पंचतंत्र कथाओं का चित्रांकन भी रहा।
👉 इन चित्रों में शिक्षाप्रद कथाओं को जीवंत रूप में दर्शाया गया।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़
निम्नलिखित में से कौन सा पेंटर अलवर कला विद्यालय से संबद्ध नहीं है ?
[स्टेनोग्राफर परीक्षा 05.10.2024]
👉 अलवर शैली का आरम्भ राजा प्रतापसिंह के समय हुआ था।
👉 इस शैली के विकास में जयपुर से आए चित्रकार शिवकुमार व दालूराम का योगदान रहा।
👉 अलवर शैली के प्रमुख चित्रकारों में बलदेव, जमुनादास, छोटेलाल, नंदराम आदि शामिल हैं।
✍️ सही उत्तर है – दालूराम, जमनादास, बलदेव
राजस्थान की किस चित्र शैली में नारियों को शिकार करते हुए दर्शाया गया है?
[CET (स्नातक) (चरण -IV) 08.01.2023]
👉 कोटा शैली हाड़ौती स्कूल की प्रमुख चित्रकला शैली है।
👉 इसका विकास बूँदी शैली व मुगल शैली के मिश्रण से हुआ।
👉 महाराव उम्मेदसिंह के काल में यह शैली अपने स्वर्णकाल पर पहुँची।
👉 इसी समय 1768 ई. में चित्रकार डालू ने रागमाला सेट बनाया, जिसमें नारियों को शिकार करते हुए दर्शाया गया।
✍️ सही उत्तर है – कोटा
मारवाड शैली में निर्मित "रागमाला चित्रावली” 1623ई. का
[पशुधन सहायक (LSA) 21.08.2016]
👉 मारवाड़ शैली का विकास जोधपुर में राठौड़ शासकों के संरक्षण में हुआ।
👉 इस शैली में धार्मिक, राग-रागिनी तथा प्रेमाख्यानों का चित्रण प्रमुख रहा।
👉 1623 ई. में इसी शैली में रागमाला चित्रावली का निर्माण हुआ।
👉 इसका उत्कृष्ट चित्रांकन प्रसिद्ध चित्रकार वीरजी ने किया।
✍️ सही उत्तर है – वीर जी
कोटा चित्रकारी शैली की विषयवस्तु मुख्यतः है
[प्रयोगशाला सहायक 13.11.2016]
👉 कोटा शैली हाड़ौती स्कूल की एक स्वतंत्र और विशिष्ट चित्रशैली है।
👉 महाराव उम्मेदसिंह के काल में यह शैली अपने स्वर्णकाल पर पहुँची।
👉 इस समय घने जंगलों और वन्य जीवन के अद्भुत शिकार दृश्यों का चित्रण हुआ।
👉 कोटा शैली में शिकार का बहुरंगी व वैविध्यपूर्ण अंकन इसकी मुख्य विषयवस्तु रही।
✍️ सही उत्तर है – शिकार के दृश्य
किस राजपूत चित्रकला शैली में नारियों और रानियों को शिकार करते चित्रित किया गया है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (फिटर) 23.03.2019]
👉 कोटा शैली हाड़ौती स्कूल की एक प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इस शैली का स्वर्णकाल महाराव उम्मेदसिंह के शासनकाल में रहा।
👉 इसमें शिकार के बहुरंगी और वैविध्यपूर्ण दृश्यों का चित्रण विशेष रूप से मिलता है।
👉 यहीं पर नारियों और रानियों को भी शिकार करते हुए दर्शाया गया है।
✍️ सही उत्तर है – कोटा शैली
'महणसर' प्रसिद्ध है -
[CET (स्नातक) (चरण -I) 07.01.2023]
👉 राजस्थान की चित्रकला में अनेक क्षेत्र अपनी विशिष्ट शैलियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
👉 झुंझुनूं जिले का कस्बा महणसर विशेष रूप से सोने की चित्रकारी के लिए जाना जाता है।
👉 यहाँ के कलाकार दीवारों व हवेलियों पर सुनहरी कारीगरी का प्रयोग करते थे।
👉 इस कारण महणसर की पहचान सोने की चित्रकारी से जुड़ी हुई है।
✍️ सही उत्तर है – सोने की चित्रकारी के लिए
राजस्थानी चित्रकला का सबसे पहला वैज्ञानिक वर्गीकरण किसने प्रस्तुत किया?
VDO Pre. (तृतीय चरण) 28.12.2021
👉 राजस्थानी चित्रकला का वैज्ञानिक अध्ययन 20वीं शताब्दी में प्रारम्भ हुआ।
👉 इसका सबसे पहला वैज्ञानिक वर्गीकरण विद्वान आनंद कुमार स्वामी ने प्रस्तुत किया।
👉 उन्होंने अपनी पुस्तक 'राजपूत पेंटिंग' (1916 ई.) में इसका विस्तार से वर्णन किया।
👉 इसी आधार पर राजस्थानी चित्रकला को अलग पहचान और स्वतंत्र स्थान मिला।
✍️ सही उत्तर है – आनंद कुमार स्वामी
किशनगढ़ शैली का स्वर्णिम युग कौन सा था ?
[JEN (सिविल) (डिग्रीधारक) 12.09.2021]
👉 किशनगढ़ शैली राजस्थानी चित्रकला की एक प्रमुख शाखा है।
👉 इस शैली में राधा-कृष्ण विषयक लीलाओं और नारी सौन्दर्य का अद्भुत चित्रण मिलता है।
👉 इसका स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के शासनकाल में रहा।
👉 इसी समय चित्रकार निहालचंद ने बणी-ठनी जैसी प्रसिद्ध पेंटिंग बनाई।
✍️ सही उत्तर है – राजा सावंतसिंह का शासनकाल
'दुगारी चित्रशैली' का सम्बन्ध है :-
[पशुधन सहायक (LSA) 16.10.2016]
👉 हाड़ौती स्कूल में बूँदी, कोटा, झालावाड़ तथा दुगारी की चित्रकला सम्मिलित है।
👉 दुगारी शैली को हाड़ौती क्षेत्र की बूँदी चित्रकला की उपशाखा माना गया है।
👉 बूँदी शैली का विकास राव सुर्जनसिंह से हुआ और यह आगे कई ठिकानों में फैली।
👉 इन्हीं ठिकानों में दुगारी भी प्रमुख रहा, जो बूँदी से सम्बद्ध शैली थी।
✍️ सही उत्तर है – बूँदी
'बेवाण' कला सम्बन्धित है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 राजस्थान की परम्परागत कलाओं में काष्ठ कला का महत्वपूर्ण स्थान है।
👉 इसमें लकड़ी पर सुंदर नक़्क़ाशी व सजावटी काम किया जाता है।
👉 इसी काष्ठ कला से जुड़ी एक विशिष्ट शाखा को 'बेवाण कला' कहा जाता है।
👉 यह कला धार्मिक व सांस्कृतिक उपयोग से विशेष रूप से सम्बन्धित है।
✍️ सही उत्तर है – काष्ठ कला
निम्नलिखित में से कौन राजपुताना चित्रकला के स्कूलों और उनकी शैलियों के अनुसार सही सुमेलित नहीं है ?
[VDO मुख्य परीक्षा 09.07.2022]
👉 राजस्थानी चित्रकला को चार प्रमुख स्कूलों में बाँटा गया है – मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़ और हाड़ौती।
👉 मेवाड़ स्कूल से उदयपुर, चावंड, देवगढ़, नाथद्वारा जैसी शैलियाँ जुड़ी हैं।
👉 ढूंढाड़ स्कूल से आमेर, जयपुर, अलवर, शेखावाटी, उनियारा आदि शैलियाँ संबंधित हैं।
👉 अतः "ढूंढाड़ स्कूल – चावंड और उदयपुर शैलियाँ" का सुमेलन गलत है।
✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़ स्कूल – चावंड और उदयपुर शैलियाँ
'वर्षा में नाचते हुए मोर' राजस्थान की किस चित्रकला शैली की विशेषता है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (मैकेनिक) 23.12.2019]
👉 बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल की एक प्रसिद्ध चित्रशैली है।
👉 इसमें प्राकृतिक दृश्यों का अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है।
👉 वर्षा ऋतु में उमड़ते बादल, बिजली की चमक और नाचते हुए मोर इसके खास विषय हैं।
👉 इसलिए इसे प्रकृति व पशु-पक्षियों की अद्भुत शैली कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – बूँदी
'नाथद्वारा चित्रकला शैली' में चित्रण मिलता है।
[JEN (कृषि) 12.07.2015]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका उद्भव महाराणा राजसिंह के समय 1670 ई. में हुआ।
👉 इस शैली का मुख्य विषय श्रीनाथजी और उनकी कृष्ण लीलाएँ रही।
👉 इसमें कृष्ण-यशोदा, गोपियाँ, नंद-बाल, गिरिराज पर्वत व रासलीला का विशिष्ट चित्रण हुआ।
✍️ सही उत्तर है – कृष्ण
नारियों द्वारा शिकार करते हुए चित्रण किस चित्रकला शैली की विशेषता है ?
VDO Pre. (द्वितीय चरण) 27.12.2021
👉 कोटा शैली हाड़ौती स्कूल की एक प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इस शैली पर बूँदी व मुगल शैली का प्रभाव दिखाई देता है।
👉 महाराव उम्मेदसिंह के काल में यह शैली अपने स्वर्णकाल पर पहुँची।
👉 इसी समय की रागमाला चित्रावली में नारियों द्वारा शिकार करते हुए दृश्य मिलते हैं।
✍️ सही उत्तर है – कोटा शैली
चित्रकला की किस शैली में पक्षी एवं जानवरों का महत्वपूर्ण स्थान है ?
[JEN (विधुत) (डिग्रीधारक) 29.11.2020]
👉 बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल की एक प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इसमें आकाश, बादल, वर्षा व पहाड़ों के साथ सुंदर प्राकृतिक दृश्य अंकित किए गए हैं।
👉 इस शैली में पक्षी व जानवर जैसे शेर, हिरण, बत्तख, कबूतर, चिड़ियाँ का विशेष चित्रण हुआ।
👉 इसलिए बूँदी शैली को पशु-पक्षियों की चित्रण शैली के रूप में भी जाना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – बूँदी शैली
निम्नलिखित में से कौन-सी चित्रशैली गीत गोविन्द पर आधारित चित्रों के लिये जानी जाती है ?
[CET (10+2 चतुर्थ चरण) 05.02.2023]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन व मौलिक शैली है।
👉 इस शैली में भक्ति प्रधान विषयों का विशेष चित्रण किया गया।
👉 महाराणा जगतसिंह प्रथम के काल में गीत गोविन्द पर आधारित अनेक चित्र बने।
👉 इन चित्रों में कृष्ण व राधा की लीलाओं को अत्यधिक प्रमुखता दी गई।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
चित्रकला के संदर्भ में निम्न में से कौन सा विकल्प सही नहीं है ?
[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]
👉 चोखेलाव महल का संबंध जोधपुर शैली से है।
👉 यहाँ के भित्ति चित्रों में राम-रावण युद्ध और सप्तशती के दृश्य अंकित हैं।
👉 जोधपुर शैली का विकास राव मालदेव और अन्य शासकों के समय विशेष रूप से हुआ।
👉 अतः "चोखेलाव महल का संबंध बीकानेर शैली से है" कथन सही नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – 'चोखेलाव महल' का संबंध बीकानेर शैली से है
किशनगढ़ चित्रकला शैली को चरमोत्कर्ष पर पहुँचाने का श्रेय किस चित्रकार को जाता है ?
कनिष्ठ अनुदेशक (मैके. डीजल) 16.11.2024
👉 किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय रहा।
👉 इस काल में चित्रकला ने अपनी चरम लोकप्रियता प्राप्त की।
👉 राजा की प्रेरणा से चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने अद्वितीय कृतियाँ बनाईं।
👉 निहालचंद की बनाई हुई बनी-ठनी इस शैली की अमर पहचान बनी।
✍️ सही उत्तर है – निहालचंद
मुहम्मद शाह और साहिबराम किस राजस्थानी चित्रकला शैली के प्रसिद्ध चित्रकार थे ?
[प्रयोगशाला सहायक 03.02.2019]
👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की एक प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इस शैली को सवाई जयसिंह द्वितीय और सवाई प्रतापसिंह का संरक्षण मिला।
👉 इस समय अनेक प्रतिभाशाली चित्रकारों ने कार्य किया।
👉 इनमें मुहम्मद शाह और साहिबराम विशेष रूप से प्रसिद्ध थे।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर
'अजारा की ओवरी' किस शैली का भित्ति चित्र है ?
[शारीरिक शिक्षा अध्यापक 25.09.2022]
👉 देवगढ़ शैली मेवाड़ स्कूल की एक महत्त्वपूर्ण शाखा है।
👉 इस शैली का विकास रावत द्वारिका दास चूंडावत के संरक्षण में हुआ।
👉 यहाँ के चित्रकारों ने प्राकृतिक परिवेश, शृंगार दृश्य और राजसी ठाठ-बाट का चित्रण किया।
👉 इस शैली के भित्ति चित्र अजारा की ओवरी और मोती महल में विशेष रूप से मिलते हैं।
✍️ सही उत्तर है – देवगढ़
पिछवाई चित्रशैली का मुख्य विषय है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रोनिक्स) 23.12.2019]
👉 पिछवाई चित्रशैली नाथद्वारा शैली की मौलिक देन है।
👉 इसमें प्रमुख विषय भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंग होते हैं।
👉 विशेष रूप से श्रीकृष्ण लीला, बाल लीलाएँ, रासलीला और गोचारण अंकित किए जाते हैं।
👉 इस शैली का सम्पूर्ण चित्रण कृष्ण भक्ति पर आधारित है।
✍️ सही उत्तर है – श्री कृष्ण लीला
आसीर खाँ, रुक्नुद्दीन, चन्दूलाल चित्रकला की किस शैली से संबंधित हैं ?
[वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक 19.06.2022]
👉 बीकानेर शैली मारवाड़ स्कूल की एक महत्त्वपूर्ण चित्रशैली है।
👉 इस शैली पर मुगल कला का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।
👉 यहाँ उस्ता परिवार व अन्य कलाकारों ने अद्वितीय कृतियाँ बनाई।
👉 इसी शैली के प्रसिद्ध चित्रकार आसीर खाँ, रुक्नुद्दीन और चन्दूलाल माने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर शैली
निम्नलिखित में से कौन सी चित्रशैली पंचतन्त्र चित्रांकन के लिये भी जानी जाती है ?
[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]
👉 मारवाड़ स्कूल राजस्थानी चित्रकला की एक प्रमुख शाखा है।
👉 इस शैली में दरबारी ठाठ-बाट, प्रेमाख्यान और धार्मिक ग्रंथों का चित्रण हुआ।
👉 विशेष रूप से इसमें पंचतंत्र कथाओं का चित्रांकन किया गया।
👉 इन चित्रों में शिक्षाप्रद कथाओं को लोक जीवन से जोड़कर दृश्य रूप दिया गया।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़
कमला और इलाइची किस चित्रकला शैली की अग्रगण्य महिला चित्रकार हैं?
[VDO Pre. (प्रथम चरण) 27.12.2021]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली का आरम्भ श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना (1670 ई.) से हुआ।
👉 यहाँ अनेक प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ महिला चित्रकार कमला और इलायची के नाम विशेष रूप से मिलते हैं।
👉 इन्होंने कृष्ण लीलाओं और पिछवाई चित्रों में अद्भुत योगदान दिया।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा
प्रसिद्ध चित्रकार 'साहिबराम ' किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित हैं ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 जयपुर शैली का विशेष उत्थान सवाई प्रतापसिंह के काल में हुआ।
👉 इस काल में अनेक प्रतिभाशाली चित्रकारों ने कार्य किया।
👉 इन्हीं में से एक प्रमुख चित्रकार साहिबराम थे।
👉 साहिबराम ने राधा-कृष्ण, राग-रागिनी व दरबारी जीवन पर चित्रांकन किया।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर शैली
गुलाम अली, बलदेव, सालिगराम, रामगोपाल चित्रकारों का सम्बंध
[JEN (Civil डिप्लोमा) 16.10.2016]
👉 अलवर शैली का विकास राजा प्रतापसिंह के समय हुआ और यह ढूंढाड़ स्कूल की उपशाखा है।
👉 इस शैली का स्वर्णकाल महाराजा विनयसिंह के शासन में आया।
👉 इसी काल में दरबार में अनेक प्रसिद्ध चित्रकारों ने कार्य किया।
👉 इनमें गुलाम अली, बलदेव, सालिगराम और रामगोपाल प्रमुख चित्रकार रहे।
✍️ सही उत्तर है – अलवर
श्रीलाल जोशी का सम्बन्ध था
[CET (स्नातक) (चरण -IV) 08.01.2023]
👉 राजस्थान की लोककला में फड़ चित्रण का विशेष महत्व है।
👉 भीलवाड़ा के शाहपुरा उपशैली में फड़ चित्रण की परम्परा विकसित हुई।
👉 इस परम्परा को आगे बढ़ाने में जोशी परिवार का बड़ा योगदान रहा।
👉 प्रसिद्ध चित्रकार श्रीलाल जोशी फड़ चित्रण के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – फड़ चित्रण से
'पिछवाई' किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका आरम्भ श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना (1670 ई.) से माना जाता है।
👉 इस शैली की मौलिक और अनूठी देन पिछवाई चित्र माने जाते हैं।
👉 पिछवाई में श्रीनाथजी व कृष्ण की लीलाओं का सजीव अंकन होता है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा शैली
नाथू, मुराद, रामलाल, अलीराजा चित्रकारों का सम्बंध किस चित्र
[JEN (Civil डिग्री) 16.10.2016]
👉 बीकानेर चित्रशैली का प्रारम्भ महाराजा रायसिंह के समय हुआ।
👉 इस शैली का स्वर्णकाल महाराजा अनूपसिंह के शासनकाल में रहा।
👉 बीकानेर शैली के विकास में कई उस्ता कलाकारों व अन्य चित्रकारों ने योगदान दिया।
👉 इनमें नाथू, मुराद, रामलाल और अलीराजा प्रमुख चित्रकार थे।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर चित्रशैली
मन्दिर स्थापत्य की “भूमिज शैली" किस स्थापत्य शैली की
[पटवारी मुख्य परीक्षा 24.12.2016]
👉 भारतीय मन्दिर स्थापत्य में तीन प्रमुख शैलियाँ मानी जाती हैं – नागर, द्रविड़ और वेसर।
👉 नागर शैली की कई उपशैलियाँ विकसित हुईं।
👉 इन्हीं उपशैलियों में से एक महत्त्वपूर्ण उपशैली है भूमिज शैली।
👉 इसमें मन्दिरों के शिखरों पर छोटे-छोटे ऊर्ध्व स्तरीय शिखर बनाए जाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – नागर शैली
'पिछवाई' चित्रण किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित है ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -A) 11.12.2022]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका आरम्भ श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना (1670 ई.) से हुआ।
👉 इस शैली की मौलिक देन पिछवाई चित्रण है, जिसमें श्रीनाथजी की लीलाओं का अंकन होता है।
👉 पिछवाई को इस शैली की सबसे विशिष्ट पहचान माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा शैली
राजस्थान में ब्लू पॉटरी कला कहाँ की प्रसिद्ध है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 राजस्थान की पारम्परिक कलाओं में ब्लू पॉटरी का विशेष स्थान है।
👉 इस कला में नीले व हरे रंगों से सुंदर मिट्टी के बर्तन तैयार किए जाते हैं।
👉 ब्लू पॉटरी का प्रमुख केन्द्र राजस्थान की राजधानी जयपुर है।
👉 जयपुर में यह कला शाही संरक्षण में विकसित होकर विश्व प्रसिद्ध हुई।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर
पिछवाई चित्रांकन किस चित्र शैली से सम्बंधित है ?
[PTI ग्रेड -III 30.09.2018]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली का विकास 1670 ई. में श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना से हुआ।
👉 इसकी सबसे अनूठी देन पिछवाई चित्रण है।
👉 पिछवाई चित्रों में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का सजीव चित्रण किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा शैली
प्रसिद्ध 'बनी-ठनी' चित्र का चित्रकार कौन था ?
[JEN (विधुत) (डिग्रीधारक) 29.11.2020]
👉 किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के शासनकाल में रहा।
👉 इसी समय उनकी प्रेयसी बणी-ठनी का चित्र बनाया गया।
👉 इस चित्र को किशनगढ़ के प्रसिद्ध चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने अंकित किया।
👉 बणी-ठनी की अद्वितीय छवि ने इसे भारत की मोनालिसा बना दिया।
✍️ सही उत्तर है – निहालचन्द
'महिला चित्रकारों कमला एवं इलायची के नाम किस चित्रकला शैली से सम्बंधित हैं ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इस शैली का उद्भव श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना (1670 ई.) के साथ हुआ।
👉 यहाँ अनेक चित्रकारों के साथ महिला चित्रकार कमला व इलायची का नाम भी प्रमुखता से मिलता है।
👉 इन्होंने श्रीनाथजी व कृष्ण की लीलाओं को पिछवाई और अन्य चित्रों में अंकित किया।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा
प्रसिद्ध पेंटिंग " गीत गोविंद" किस शैली से संबंधित है ? [*]
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड -II 11.09.2022]
📌 नोट - इस प्रश्न को बोर्ड ने डिलीट (Delete) माना है।
निम्नलिखित में से कौन सा (शासक - चित्रकला शैली) सही सुमेलित नहीं है?
[VDO Pre. (प्रथम चरण) 27.12.2021]
👉 देवगढ़ शैली का विकास रावत द्वारिका दास चूंडावत के संरक्षण में हुआ।
👉 इस शैली में प्राकृतिक परिवेश, शृंगार और राजसी ठाठ-बाट का चित्रण मिलता है।
👉 इसका स्वर्णकाल रावत द्वारिका दास का काल माना जाता है, न कि विजयसिंह का।
👉 अतः "विजयसिंह – देवगढ़ शैली" का सुमेलन सही नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – विजयसिंह – देवगढ़
निम्न सभी शैलियाँ ढूंढाड़ चित्रकला स्कूल के अंतर्गत आती हैं, सिवाय :
[स्टेनोग्राफर परीक्षा 21.03.2021]
👉 ढूंढाड़ स्कूल में आमेर, जयपुर, अलवर, शेखावाटी और उनियारा जैसी शैलियाँ शामिल हैं।
👉 इन शैलियों पर कछवाहा राजाओं और मुगल प्रभाव का गहरा असर रहा।
👉 दूसरी ओर बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल के अंतर्गत आती है।
👉 अतः बूँदी शैली को ढूंढाड़ स्कूल में शामिल करना गलत है।
✍️ सही उत्तर है – बूंदी शैली
चित्रांकन की उणियारा शैली को किस चित्रशैली की उप-शैली के रूप में माना जाता है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रोनिक्स) 23.12.2019]
👉 उणियारा शैली राजस्थानी चित्रकला की एक महत्त्वपूर्ण उपशैली है।
👉 इसमें चित्रण की विशेषताओं पर जयपुर और बूंदी शैली का प्रभाव देखा जाता है।
👉 यह शैली दरअसल ढूंढाड़ क्षेत्र की कलात्मक परम्पराओं से विकसित हुई।
👉 इसलिए उणियारा शैली को ढूंढाड़ चित्रकला की उपशैली माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – ढूंढाड़
निम्नलिखित में से कौन सी राजस्थानी चित्रकला शैली, चौरापंचसिका शैली से मिलती जुलती है ?
[SI मोटर वाहन 12.02.2022]
👉 चौरापंचसिका शैली कश्मीर के कवि विल्हण की कृति से सम्बद्ध है।
👉 इसका प्रभाव प्रारम्भिक मेवाड़ शैली की चित्रकला पर दिखाई देता है।
👉 मेवाड़ के प्रतापगढ़ क्षेत्र में 1540 ई. के आसपास बने चित्रों में इसका समान स्वरूप झलकता है।
👉 इसलिए चौरापंचसिका शैली से मिलती-जुलती शैली मेवाड़ चित्रकला है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ शैली
श्रीधर अंधारे को किस चित्रशैली को प्रकाश में लाने का श्रेय दिया जाता है?
[CET (स्नातक) (चरण -I) 07.01.2023]
👉 देवगढ़ शैली मेवाड़ स्कूल की एक प्रमुख चित्रशैली मानी जाती है।
👉 इसका विकास रावत द्वारिका दास चूंडावत के संरक्षण में हुआ।
👉 यहाँ के चित्रकारों ने प्राकृतिक परिवेश, शृंगार व राजसी ठाठ-बाट का सुंदर चित्रण किया।
👉 इस शैली को दुनिया के सामने लाने का श्रेय डॉ. श्रीधर अंधारे को जाता है।
✍️ सही उत्तर है – देवगढ़
"गीत गोविंदसार" का संबंध निम्न में से किस चित्रशैली से है ?
[कर सहायक 14.10.2018]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन और मौलिक शैली है।
👉 इसमें धार्मिक ग्रंथों और विशेषकर भक्ति काव्य का चित्रण प्रमुख रहा।
👉 महाराणा जगतसिंह प्रथम के काल में गीत गोविंदसार पर आधारित अनेक चित्र बने।
👉 इन चित्रों में राधा-कृष्ण की लीलाओं का सुंदर अंकन हुआ।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
रामा, नाथा, छज्जू और सेफू चित्रकला की किस शैली से सम्बंधित
[पटवार प्री. परीक्षा 2015]
👉 जोधपुर शैली मारवाड़ स्कूल की प्रमुख उपशैली है, जिसका विकास राठौड़ शासकों के संरक्षण में हुआ।
👉 इस शैली में रागमाला, बारहमासा, कृष्ण चरित्र और प्रेमाख्यानों का सजीव चित्रण हुआ।
👉 महाराजा जसवंतसिंह व अजीतसिंह के समय यह शैली अपने मौलिक स्वरूप में आई।
👉 इसी परम्परा में रामा, नाथा, छज्जू और सेफू प्रसिद्ध चित्रकार रहे।
✍️ सही उत्तर है – जोधपुर शैली
पिछवाई चित्रांकन किस चित्रकला शैली से सम्बंधित है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 26.03.2019]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका आरम्भ 1670 ई. में श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना से हुआ।
👉 इस शैली की मौलिक पहचान पिछवाई चित्रण है।
👉 पिछवाई में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का सजीव अंकन किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा शैली
कोटा के किस शासक के काल में शिकार का चित्रण कोटा शैली का प्रतीक बना ?
[सुपरवाईजर परीक्षा 06.01.2019]
👉 कोटा शैली हाड़ौती स्कूल की एक प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इसका विशेष उत्थान महाराव उम्मेदसिंह के शासनकाल में हुआ।
👉 उनके समय गहन जंगलों में विविध शिकार दृश्यों का चित्रण किया गया।
👉 इन्हीं आखेट चित्रों ने कोटा शैली की विशिष्ट पहचान बनाई।
✍️ सही उत्तर है – राजा उम्मेद सिंह
'पिछवाई' किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित है ?
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 29.06.2022]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका विकास 1670 ई. में श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना के साथ हुआ।
👉 इस शैली की मौलिक व अनूठी देन पिछवाई चित्र मानी जाती है।
👉 पिछवाई में भगवान कृष्ण की लीलाओं का विस्तृत चित्रण मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा शैली
“भागवत पुराण का पारिजात अवतरण” किस मेवाड़ चित्रकार की कृति है ? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
[Supervisor (महिला) 07.09.2024]
👉 मेवाड़ शैली का विकास महाराणा उदयसिंह के समय उदयपुर में हुआ।
👉 उनके काल में बने चित्रों में भागवत पुराण का पारिजात अवतरण विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
👉 यह कृति मेवाड़ के प्रमुख चित्रकार नानाराम द्वारा बनाई गई थी।
👉 इस कृति से मेवाड़ शैली की मौलिकता और भक्ति भावना प्रकट होती है।
✍️ सही उत्तर है – नाना राम
चाँद तैय्यब, रामसिंह भाटी, साहिबा एवं उस्ना चित्रकार निम्न में से किस चित्रशैली से संबंधित हैं?
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 अजमेर शैली मारवाड़ स्कूल की एक उपशैली है।
👉 इसमें दरबारी जीवन, सामंती संस्कृति और लोक तत्वों का चित्रण प्रमुखता से हुआ।
👉 इस शैली के विकास में कई प्रसिद्ध चित्रकारों ने योगदान दिया।
👉 इनमें चाँद, तैय्यब, रामसिंह भाटी, साहिबा और उस्ना के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं।
✍️ सही उत्तर है – अजमेर
निम्नलिखित में से कौनसी चित्रशैली पंचतन्त्र चित्रांकन के लिये जानी जाती है ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (सीरम) 15.09.2019]
👉 मारवाड़ स्कूल राजस्थानी चित्रकला की एक प्रमुख शाखा है।
👉 इस शैली में धार्मिक ग्रंथों, प्रेमाख्यानों और लोककथाओं का चित्रण हुआ।
👉 यहाँ पर पंचतंत्र कथाओं के भी अनेक चित्र बनाए गए।
👉 इन चित्रों में शिक्षाप्रद कथाओं को जीवंत और दृश्यात्मक रूप दिया गया।
✍️ सही उत्तर है – मारवाड़
कौन-सी शैली अपनी बनी ठनी पेंटिंग के लिए सबसे उत्तम जाना जाता है ?
[Supervisor (महिला) 07.09.2024]
👉 किशनगढ़ शैली राजस्थानी चित्रकला की प्रमुख शाखा है।
👉 इस शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय माना जाता है।
👉 इसी काल में चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने बणी-ठनी का प्रसिद्ध चित्र बनाया।
👉 बणी-ठनी को भारत की मोनालिसा भी कहा जाता है और यह चित्र किशनगढ़ शैली की विशिष्ट पहचान बन गया।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़ शैली
राजस्थान में लच्छीराम द्वारा किस ख्याल का प्रवर्तन किया गया ?
[संगणक परीक्षा 05.05.2018]
👉 राजस्थान की लोकनाट्य परम्परा में ख्याल विशेष स्थान रखता है।
👉 यह परम्परा लोकभाषा में गाए और बोले जाने वाले नाट्य रूप पर आधारित है।
👉 राजस्थान में ख्याल परम्परा का प्रवर्तन लच्छीराम ने किया।
👉 उन्होंने विशेष रूप से कुचामनी ख्याल की परम्परा शुरू की।
✍️ सही उत्तर है – कुचामनी ख्याल
ऊँट की खाल पर स्वर्ण मीनाकारी कला क्या कहलाती है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]
👉 बीकानेर शैली की एक अनूठी विशेषता ऊँट की खाल पर की जाने वाली स्वर्ण मीनाकारी है।
👉 इस विशेष कला को ऊस्ता कला के नाम से जाना जाता है।
👉 बीकानेर के उस्ता परिवार के कलाकार इस कला के प्रमुख साधक रहे।
👉 ऊस्ता कला ने बीकानेर की चित्रकला को विशेष पहचान दिलाई।
✍️ सही उत्तर है – ऊस्ता कला
चित्रकार अली रजा, हामिद रूकनुद्दीन, रामलाल किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित हैं ?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिप्लोमा) 20.05.2022
👉 बीकानेर शैली का विकास 16वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में हुआ।
👉 इस शैली पर मुगल शैली का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।
👉 महाराजा रायसिंह व अनूपसिंह के काल में अनेक प्रसिद्ध चित्रकार उभरे।
👉 इनमें अली रजा, हामिद रूकनुद्दीन और रामलाल प्रमुख चित्रकार रहे।
✍️ सही उत्तर है – बीकानेर
राजस्थान में “थेवाकला" का सम्बंध रहा है :-
[JEN Mechenical डिग्री 16.10.2016]
👉 राजस्थान में थेवाकला एक विशिष्ट हस्तकला रही।
👉 इसका उद्भव प्रतापगढ़ रियासत में हुआ था।
👉 इस कला में स्वर्ण पत्रों से ग्लास पेंटिंग का अद्भुत कार्य किया जाता था।
👉 इसलिए इसे प्रतापगढ़ की निजी पहचान माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – प्रतापगढ़
दुगारी किले की चित्रकला सम्बन्धित हैं -
JEN (सिविल डिग्रीधारक) 18.05.2022
👉 राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में बूँदी शैली का विशेष विकास हुआ।
👉 इस शैली पर मेवाड़ और मुगल शैली का गहरा प्रभाव रहा।
👉 बूँदी शैली के अंतर्गत दुगारी किले की चित्रकला को भी शामिल किया जाता है।
👉 इन चित्रों में प्रकृति, शिकार और नारी सौंदर्य का अद्भुत चित्रण मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – बूंदी शैली
राजस्थान की बहुरूपिया कला को प्रसिद्धि दिलाने का श्रेय किसे जाता है?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिप्लोमा) 20.05.2022
👉 राजस्थान की लोकपरम्पराओं में बहुरूपिया कला का विशेष स्थान है।
👉 इस कला में कलाकार विभिन्न रूपों और वेशभूषाओं में अभिनय प्रस्तुत करते हैं।
👉 बहुरूपिया कला को व्यापक प्रसिद्धि दिलाने का श्रेय जानकीलाल भांड को जाता है।
👉 उन्होंने इस लोककला को जनजीवन से जोड़कर उसकी पहचान बनाई।
✍️ सही उत्तर है – जानकीलाल भांड
'बणी-ठणी' पेटिंग किस चित्र शैली से संबंधित है ?
[लवण निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 किशनगढ़ शैली राजस्थानी चित्रकला की एक प्रसिद्ध मारवाड़ शाखा है।
👉 इसका स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के शासनकाल में रहा।
👉 चित्रकार निहालचंद ने इसी काल में अद्वितीय बणी-ठनी पेंटिंग बनाई।
👉 इस चित्र को किशनगढ़ शैली की सबसे विशिष्ट पहचान माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़ शैली
निम्नलिखित में से कौनसा एक लोक चित्रकला का अंग नहीं है ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (जैविक) 15.09.2019]
👉 राजस्थान की लोक चित्रकला में फड़ चित्रण, मंडाणे और भित्ति चित्रण प्रमुख हैं।
👉 ये चित्रण सीधे लोकजीवन और धार्मिक आस्था से जुड़े होते हैं।
👉 बणी-ठणी किशनगढ़ दरबार में बनी एक शास्त्रीय लघु चित्रकला है।
👉 इसलिए इसे लोक चित्रकला का अंग नहीं माना जाता।
✍️ सही उत्तर है – बणी-ठणी
प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन चित्रकला की किस शैली से सम्बंधित हैं ?
[CET (10+2 द्वितीय चरण) 04.02.2023]
👉 साहिबदीन राजस्थानी चित्रकला के महान चित्रकार थे।
👉 उन्होंने महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–1652 ई.) के काल में कार्य किया।
👉 इस काल में मेवाड़ शैली का स्वर्णिम दौर माना जाता है।
👉 साहिबदीन ने भागवत पुराण, रामायण व गीतगोविन्द पर आधारित चित्र बनाए।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
राजस्थानी चित्रकला की प्रारम्भिक एवं स्वदेशी शैली किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित है ?
छात्रावास अधी. Minority 30.08.2024
👉 राजस्थानी चित्रकला का प्रारम्भिक और मौलिक स्वरूप मेवाड़ शैली में दृष्टव्य है।
👉 यह शैली जैन, अपभ्रंश और मालवा जैसी कलाओं के सामंजस्य से विकसित हुई।
👉 ऐतिहासिक परम्परा की दृष्टि से मेवाड़ स्कूल को ही राजस्थान की मूल शैली माना गया है।
👉 इसी कारण इसे राजस्थानी चित्रकला की प्रारम्भिक एवं स्वदेशी शैली कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ चित्रकला शैली
पिछवाई चित्रांकन की विषयवस्तु क्या है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (वायरमैन) 24.12.2019]
👉 पिछवाई चित्रण नाथद्वारा शैली की अनूठी पहचान है।
👉 इसमें मुख्य विषय भगवान कृष्ण और उनकी लीलाएँ रहती हैं।
👉 विशेष रूप से इसमें रासलीला, गोचारण, गिरिराज धारण जैसे दृश्य अंकित होते हैं।
👉 पिछवाई चित्रण पूर्णतः कृष्ण भक्ति पर आधारित होता है।
✍️ सही उत्तर है – रासलीला
भीलवाड़ा निवासी श्रीलाल जोशी किस लोक चित्रकला से सम्बन्धित हैं ?
[शारीरिक शिक्षा अध्यापक 25.09.2022]
👉 राजस्थान की लोककला में फड़ चित्रण का विशेष महत्व है।
👉 इसका प्रमुख केन्द्र भीलवाड़ा का शाहपुरा क्षेत्र रहा है।
👉 यहाँ के जोशी परिवार ने इस परम्परा को संरक्षित और विकसित किया।
👉 भीलवाड़ा निवासी प्रसिद्ध चित्रकार श्रीलाल जोशी इसी फड़ चित्रण से जुड़े रहे।
✍️ सही उत्तर है – फड़ चित्रण
प्रसिद्ध चित्र 'बणी-ठणी' का चित्रांकन किसने किया ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रिशियन) 24.03.2019]
👉 किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के शासनकाल में रहा।
👉 इसी समय उनकी प्रेयसी बणी-ठनी का प्रसिद्ध चित्र बनाया गया।
👉 इस चित्र का निर्माण किशनगढ़ के महान चित्रकार मोरध्वज निहालचन्द ने किया।
👉 बणी-ठनी को इसकी सुंदरता के कारण भारत की मोनालिसा भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – निहालचन्द
'बनी-ठनी' पेंटिंग का चित्रकार (पेंटर) कौन है ?
[Junior Accountant 11.02.2024]
👉 किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय माना जाता है।
👉 इसी काल में उनकी प्रेमिका बणी-ठनी का चित्र बनाया गया।
👉 इस चित्र को किशनगढ़ के प्रसिद्ध चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने अंकित किया।
👉 बणी-ठनी की सुंदरता के कारण इसे भारत की मोनालिसा भी कहा गया है।
✍️ सही उत्तर है – निहाल चंद
निम्नलिखित में से कौन सा एक लोक चित्रकला का अंग नहीं है ?
[JEN (यांत्रिक) (डिप्लोमाधारक) 13.12.2020]
👉 राजस्थान की लोक चित्रकला में फड़ चित्रण, मंडाणे और भित्ति चित्रण प्रमुख हैं।
👉 ये चित्रण लोकजीवन, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परम्पराओं से जुड़े हैं।
👉 दूसरी ओर बणी-ठणी किशनगढ़ शैली की दरबारी और शास्त्रीय लघुचित्र है।
👉 इसलिए इसे लोक चित्रकला का अंग नहीं माना जाता।
✍️ सही उत्तर है – बणी-ठणी
मेवाड चित्रकला शैली का सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ है।
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 मेवाड़ शैली को राजस्थानी चित्रकला की प्रारम्भिक शैली माना जाता है।
👉 इसका सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि है।
👉 यह ग्रंथ 1260 ई. में गुहिल शासक तेजसिंह के समय आहड़ में चित्रित हुआ।
👉 इसकी सजावट नागदा व चित्तौड़ के मंदिरों की तक्षण कला से मेल खाती है।
✍️ सही उत्तर है – श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि
जयपुर चित्रकला शैली का स्वर्णकाल किस शासक के काल को माना जाता है ?
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड - III 19.09.2019]
👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इसका विशेष उत्थान सवाई प्रतापसिंह के शासनकाल में हुआ।
👉 उनके समय चित्रकला को शाही संरक्षण और सूरतखाने का विस्तार मिला।
👉 राधा-कृष्ण, राग-रागिनी और दरबारी जीवन के अनेक लघुचित्र बने।
✍️ सही उत्तर है – सवाई प्रतापसिंह
हवेली चित्रकला किस शताब्दी की देन है ?
[बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक 18.06.2022]
👉 राजस्थान की हवेली चित्रकला भित्ति चित्रण की अद्भुत परम्परा से जुड़ी है।
👉 यह परम्परा मुख्यतः शेखावाटी क्षेत्र में विकसित हुई।
👉 समृद्ध सेठ-व्यापारियों ने अपनी हवेलियों की दीवारों पर चित्रांकन करवाया।
👉 इसका सर्वाधिक विकास 19वीं शताब्दी में हुआ।
✍️ सही उत्तर है – 19वीं शताब्दी
श्रीलाल जोशी एक प्रमुख चित्रकार हैं
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 18.09.2021]
👉 राजस्थान की लोककला में फड़ चित्रण अत्यंत प्रसिद्ध है।
👉 इस कला का प्रमुख केन्द्र भीलवाड़ा का शाहपुरा क्षेत्र रहा है।
👉 यहाँ के जोशी परिवार ने फड़ चित्रण को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया।
👉 इन्हीं में से एक महान कलाकार श्रीलाल जोशी पट / फड़ चित्रण के लिए प्रसिद्ध हैं।
✍️ सही उत्तर है – पट चित्रण / फड़ के
"श्रावक प्रतिक्रमण चूर्णि" नामक चित्रित ग्रंथ राजस्थान की
[JEN (Civil Diploma) 21.08.2016]
👉 श्रावक प्रतिक्रमण चूर्णि राजस्थान का सबसे प्राचीन चित्रित ग्रंथ माना जाता है।
👉 यह ग्रंथ 1260 ई. में गुहिल शासक तेजसिंह के समय चित्रित हुआ।
👉 इसका चित्रण राजस्थान की मौलिक और प्राचीन मेवाड़ शैली में हुआ।
👉 इसमें चित्रांकन की सजावट नागदा और चित्तौड़ के मंदिरों की तक्षण कला जैसी है।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
प्रसिद्ध चित्रकार साहिबराम किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित है
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -B) 11.12.2022]
👉 जयपुर शैली ढूंढाड़ स्कूल की एक प्रमुख चित्रशैली है।
👉 सवाई प्रतापसिंह के काल में इस शैली को विशेष संरक्षण मिला।
👉 इसी समय अनेक प्रतिभाशाली चित्रकारों ने कार्य किया।
👉 इनमें सबसे प्रसिद्ध चित्रकार साहिबराम थे, जिन्होंने राधा-कृष्ण व दरबारी जीवन के चित्र बनाए।
✍️ सही उत्तर है – जयपुर शैली
सावग पडिकमण सुत्त चुन्नी (श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी) ग्रंथ
[JEN (Civil डिग्री) 16.10.2016]
👉 मेवाड़ शैली का प्राचीनतम उपलब्ध चित्रित ग्रंथ श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी है।
👉 यह ग्रंथ 1260 ई. में गुहिल शासक तेजसिंह के शासनकाल में चित्रित हुआ।
👉 इसका चित्रांकन स्थल आहड़ (उदयपुर) रहा।
👉 इस ग्रंथ की सजावट नागदा और चित्तौड़ के मन्दिरों की तक्षण कला से मेल खाती है।
✍️ सही उत्तर है – तेजसिंह
'बनी ठनी' किस स्थान की चित्रकला शैली है ?
[अन्वेषक परीक्षा 21.08.2016]
👉 किशनगढ़ शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय रहा।
👉 इन्हीं के दरबार में चित्रकार मोरध्वज निहालचंद ने अद्वितीय चित्र बनाए।
👉 सावंतसिंह की प्रिय बनी-ठनी को राधा के रूप में चित्रित किया गया।
👉 यह चित्रकला किशनगढ़ शैली की सबसे प्रसिद्ध पहचान बन गई।
✍️ सही उत्तर है – किशनगढ़
'पिछवाई' कलाकृतियों में बने चित्र उद्धृत किए गए हैं
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
👉 पिछवाई नाथद्वारा शैली की मौलिक और अनूठी कला देन है।
👉 इसमें बनाए गए चित्रों में मुख्य विषय भगवान कृष्ण रहते हैं।
👉 इन चित्रों में कृष्ण की बाल लीलाएँ, रासलीला, गोचारण और गिरिराज धारण आदि अंकित होते हैं।
👉 पिछवाई कलाकृतियाँ पूर्णतः कृष्ण भक्ति पर आधारित होती हैं।
✍️ सही उत्तर है – भगवान कृष्ण के जीवन से
पड़ कुण बांचै ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 राजस्थान की फड़ चित्रकला धार्मिक व लोक परम्परा से जुड़ी होती है।
👉 इन फड़ों को लोक में गाकर सुनाने की परम्परा भोपाओं द्वारा निभाई जाती है।
👉 इस प्रकार पड़ (फड़) कुण बांचै का उत्तर है – भोपा।
✍️ सही उत्तर है – भोपा
_______ फड़ चित्रण के लिए जाना जाता है।
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -B) 11.12.2022]
👉 राजस्थान की लोककला में फड़ चित्रण की विशेष पहचान है।
👉 यह परम्परा भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा क्षेत्र में विकसित हुई।
👉 यहाँ के जोशी परिवार ने फड़ चित्रण को नई ऊँचाइयाँ दीं।
👉 शाहपुरा में फड़ चित्रण की परम्परा आज भी लोकविश्वास और संस्कृति से जुड़ी है।
✍️ सही उत्तर है – शाहपुरा
किस चित्रशैली में पशु-पक्षियों की बहुतायत रहती है ?
[फायरमैन परीक्षा 29.01.2022]
👉 बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल की सबसे प्रमुख चित्रशैली है।
👉 इसमें प्राकृतिक दृश्यों के साथ पशु-पक्षियों का अद्भुत चित्रण मिलता है।
👉 यहाँ के चित्रों में शेर, हिरण, बत्तख, कबूतर, चिड़ियाँ और मोर अधिक अंकित किए गए हैं।
👉 इस कारण बूँदी शैली को 'पक्षी शैली' भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – बूँदी चित्रशैली
'पिछवाई' किस चित्रकला शैली से सम्बन्धित है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (मैकेनिक) 23.12.2019]
👉 नाथद्वारा शैली मेवाड़ स्कूल की एक प्रमुख उपशैली है।
👉 इसका विकास श्रीनाथजी की मूर्ति स्थापना (1670 ई.) के साथ हुआ।
👉 इस शैली की सबसे अनूठी और मौलिक देन पिछवाई चित्रण है।
👉 पिछवाई में श्रीकृष्ण की लीलाओं का विस्तृत चित्रांकन किया जाता है।
✍️ सही उत्तर है – नाथद्वारा शैली
बूंदी के गढ़ पैलेस में चित्रशाला का निर्माण किसने करवाया ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (अस्त्रक्षेप) 21.09.2019]
👉 बूँदी शैली हाड़ौती स्कूल की सबसे प्रमुख और विशिष्ट चित्रशैली है।
👉 इस शैली का स्वर्णकाल महाराव उम्मेदसिंह प्रथम के शासनकाल में माना जाता है।
👉 इन्हीं के समय बूँदी के गढ़ पैलेस में भव्य चित्रशाला का निर्माण हुआ।
👉 इस चित्रशाला को "भित्ति चित्रों का स्वर्ग" भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – महाराव उम्मेदसिंह
'रागमाला' किस शैली का प्रसिद्ध चित्र है ?
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
👉 चावण्ड शैली मेवाड़ स्कूल की एक महत्त्वपूर्ण उपशैली है।
👉 इसका विकास महाराणा प्रताप और अमरसिंह के काल में हुआ।
👉 1605 ई. में चित्रकार निसारदीन ने यहाँ प्रसिद्ध रागमाला का चित्रण किया।
👉 इस कृति से चावण्ड शैली की विशिष्ट पहचान बनी।
✍️ सही उत्तर है – चावण्ड शैली
किशनगढ़ शैली ____ के लिए प्रसिद्ध है।
[CET (10+2 षष्टम चरण) 11.02.2023]
👉 किशनगढ़ शैली राजस्थानी चित्रकला की एक अत्यंत लोकप्रिय शाखा है।
👉 इस शैली का स्वर्णकाल राजा सावंतसिंह (नागरीदास) के समय रहा।
👉 इसमें चित्रकार निहालचंद द्वारा बनाई गई बणी-ठनी पेंटिंग विशेष प्रसिद्ध है।
👉 इसलिए किशनगढ़ शैली विशेष रूप से अपनी चित्रकला के लिए जानी जाती है।
✍️ सही उत्तर है – चित्रकला
निम्नलिखित में से कौन सा चित्रकार बीकानेर चित्रकला शैली से सम्बन्धित नहीं है ?
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 बीकानेर शैली के प्रमुख चित्रकार अली रजा, रूकनुद्दीन, साहिबद्दीन, रामलाल आदि रहे।
👉 इस शैली पर मुगल कला का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।
👉 दूसरी ओर मनोहर चित्रकार मेवाड़ शैली से सम्बन्धित थे।
👉 अतः मनोहर का नाम बीकानेर शैली से जोड़ना सही नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – मनोहर
प्रसिद्ध चित्रकार साहिबदीन चित्रकला की किस शैली से सम्बंधित है ?
[PTI ग्रेड -III 30.09.2018]
👉 साहिबदीन राजस्थानी चित्रकला के सर्वश्रेष्ठ चित्रकारों में गिने जाते हैं।
👉 उन्होंने महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628–1652 ई.) के काल में कार्य किया।
👉 इस समय मेवाड़ शैली का स्वर्णकाल माना जाता है।
👉 साहिबदीन ने रामायण, भागवत पुराण और गीत गोविन्द पर आधारित चित्र बनाए।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़
'मालती माधव' के चित्र है :
[JEN (कृषि) 12.07.2015]
👉 मेवाड़ शैली राजस्थानी चित्रकला की सबसे प्राचीन और मौलिक शैली मानी जाती है।
👉 महाराणा राजसिंह के काल में यहाँ अनेक ग्रंथों का चित्रांकन हुआ।
👉 इन्हीं में संस्कृत नाट्यकृति 'मालती-माधव' का भी चित्रण किया गया।
👉 इस शैली में ग्रंथों के साथ कृष्ण भक्ति, रागमाला व काव्य चित्रण प्रमुख रहा।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ शैली