सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम कब प्रारंभ हुआ था ? 

[लिपिक ग्रेड -II 12.08.2018]

  • 2001-2002  

  • 1973-74 

  • 1996-97 

  • 1984-85

🔹 व्याख्या:

👉 सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP) केंद्र सरकार का पहला क्षेत्र विकास कार्यक्रम था।
👉 इसे वर्ष 1973-74 में एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया गया।
👉 इसका उद्देश्य भूमि, जल, पशुधन और मानव संसाधनों का संरक्षण व विकास करना था।
👉 कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारना और रोजगार सृजन करना था।

✍️ सही उत्तर है – 1973-74 

निम्न में से कौन-सा 'डेजर्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम' (डी.डी.पी.) का लक्ष्य नहीं है ?  

कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रिशियन) 19.11.2024

  • खनिजों का अति विदोहन 

  • वृक्षारोपण को प्रोत्साहन 

  • संसाधनों का विकास 

  • मरुस्थलीकरण पर नियंत्रण 

🔹 व्याख्या:

👉 डेजर्ट डेवलपमेंट प्रोग्राम (DDP) का उद्देश्य मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया को रोकना है।
👉 इसके अंतर्गत वृक्षारोपण, जल व मृदा संरक्षण और संसाधनों का सतत विकास शामिल है।
👉 खनिजों का अति-विदोहन इसका लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह कार्यक्रम उसके विपरीत प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर देता है। 

सूखा सम्भावित क्षेत्र कार्यक्रम कब लागू किया गया ? 

[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]

  • 1974-75 

  • 1977-78 

  • 1985-86 

  • 1966-67

🔹 व्याख्या:

👉 सूखा सम्भावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP) सूखे से प्रभावित क्षेत्रों के लिए शुरू किया गया।
👉 इसका मुख्य उद्देश्य सूखे और मरुस्थलीकरण के प्रभावों को कम करना है।
👉 यह कार्यक्रम वर्ष 1974-75 में लागू किया गया।

✍️ सही उत्तर है – 1974-75

कौन-से कार्यक्रमों का अकाल - राहत से सीधा संबंध है ? 

[CET (10+2 चतुर्थ चरण) 05.02.2023]

  • मरुस्थलीय विकास कार्यक्रम 

  • सूखा संभाव्य क्षेत्रीय कार्यक्रम 

  • नरेगा 

  • मरुस्थलीय विकास कार्यक्रम और सूखा संभाव्य क्षेत्रीय कार्यक्रम दोनों 

🔹 व्याख्या:

👉 मरुस्थलीय विकास कार्यक्रम (DDP) – रेगिस्तानी क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण रोकने, जल व मृदा संरक्षण और वनीकरण पर केंद्रित है।
👉 इसका उद्देश्य सूखे के प्रभावों को कम करके स्थायी विकास को बढ़ावा देना है।
👉 सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP) – सूखा प्रभावित क्षेत्रों में फसल, पशुधन और जल संसाधनों की उत्पादकता सुधारने पर केंद्रित है।
👉 दोनों कार्यक्रमों का सीधा संबंध अकाल राहत और प्रभावित क्षेत्रों के विकास से है। 

वर्ष 2002 - 2003 में राजस्थान में कितने जिले सूखे से प्रभावित थे ?

JEN (विद्युत डिप्लोमाधारक) 19.05.2022 

  • 33

  • 31

  • 32

  • 30

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान वर्ष 2002-2003 में सूखे से अत्यधिक प्रभावित हुआ।
👉 इस अवधि में राज्य के 32 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया।
👉 सूखे से कृषि पर गंभीर असर पड़ा – फसल विफल हुई और पानी की कमी हो गई।
👉 राज्य सरकार ने राहत उपाय किए, परंतु यह सूखा भारत के सबसे भीषण सूखों में से एक था। 

राजस्थान में बंजर भूमि विकास के सम्बन्ध में निम्न कथनों का परीक्षण कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए- 

  1. राज्य में वर्तमान (2013-14) में भू-उपयोग हेतु कुल प्रतिवेदित क्षेत्र में लगभग 19 प्रतिशत भूमि बंजर भूमि है ।
  2. राज्य में गत 30 वर्षों में पुरानी पड़त भूमि में लगभग 18 प्रतिशत की कमी आई हैं । 
  3. राज्य में बंजर भूमि विकास कार्यक्रम को क्रियान्वित करने का उत्तरदायित्व राष्ट्रीय बंजर भूमि विकास बोर्ड का हैं
  4. राज्य में एकीकृत बंजर भूमि विकास योजना स्वीडिश अन्तर्राष्ट्रीय विकास एजन्सी (SIDA) के सहयोग से वर्तमान में 10 जिलों में चल रही है । 

ग्रामसेवक & छात्रा. अधीक्षक 18.12.2016

कूट : 

  •  i, ii और iv

  • i और iii

  • i और ii 

  • ii और iv

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का लगभग आधा क्षेत्र कृषि के अंतर्गत है, औसत फसल संसाधनता 125% है।
👉 राज्य में कुल प्रतिवेदित क्षेत्र का लगभग 19% भाग बंजर भूमि है।
👉 पिछले 30 वर्षों में पुरानी पड़त भूमि में लगभग 18% की कमी हुई है।
👉 राष्ट्रीय बंजर भूमि विकास बोर्ड (1985, MEF) का गठन बंजर भूमि विकास हेतु किया गया।
👉 एकीकृत बंजर भूमि विकास योजना केंद्र प्रायोजित है और गैर-कृषि योग्य भूमि को उत्पादक बनाने पर केंद्रित है। 

गत तीन दशकों में राजस्थान में 90 प्रतिशत से अधिक गाँव किस कृषिगत वर्ष में अप्रत्याशित अकाल एवं सूखे पीड़ित हुए ? 

ग्रामसेवक & छात्रा. अधीक्षक 18.12.2016

  • 2009-10

  • 2000-01 

  • 2002-03

  • 1987-88 

🔹 व्याख्या:

👉 2002-03 कृषि वर्ष में राजस्थान भीषण सूखे की चपेट में आया।
👉 इस दौरान राज्य के 90% से अधिक गाँव अकाल और सूखे से प्रभावित हुए।
👉 सभी 32 जिले इस आपदा से प्रभावित हुए थे।
👉 इसे सदी का सबसे भीषण सूखा माना गया।

✍️ सही उत्तर है – 2002-03  

निम्नलिखित में से किन कारणों से राजस्थान में मरुस्थलीकरण हो रहा है ? 

1. जलवायु 

2. कम वनस्पति 

3. जनसंख्या वृद्धि 

4. अनियंत्रित पशुचारण 

5. सूखा 

(निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)  

[कनिष्ठ अनुदेशक (कार्यशाला) 19.11.2024]

  • केवल 1, 2, 3 व 5 

  • सभी 1, 2, 3, 4 व 5 

  • केवल 1, 2, 4 व 5 

  • केवल 2, 3, 4 व 5 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मरुस्थलीकरण कई कारणों से हो रहा है।
👉 जलवायु – शुष्क/अर्ध-शुष्क क्षेत्र, कम वर्षा और अधिक तापमान।
👉 कम वनस्पति – वनों की कटाई व अत्यधिक चराई से मिट्टी का कटाव।
👉 जनसंख्या वृद्धि – भूमि व संसाधनों पर दबाव बढ़ना।
👉 अनियंत्रित पशुचारण – अत्यधिक चराई से मिट्टी का आवरण हटना।
👉 सूखा – बार-बार सूखे से भूमि बंजर होना। 

राजस्थान में 'बंजर भूमि विकास कार्यक्रम' क्रियान्वित होता है 

[JEN (सिविल) (डिप्लोमा धारक) 06.12.2020]

  • सिंचाई विभाग द्वारा 

  • ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग द्वारा

  • कृषि विभाग द्वारा 

  • वन विभाग द्वारा 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में बंजर भूमि विकास कार्यक्रम लागू किया गया है।
👉 इस कार्यक्रम का संचालन ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग द्वारा किया जाता है।
👉 इसका उद्देश्य बंजर भूमि को उत्पादक बनाना और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।

✍️ सही उत्तर है – ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग

राजस्थान में संचालित सूखा संभाव्य क्षेत्र कार्यक्रम (डी.पी.ए.पी.) की वित्तीय व्यवस्था के लिए केन्द्र एवं राज्य का हिस्सा कितना रखा गया है? 

[CET (स्नातक) (चरण -I) 07.01.2023]

  • 75:25

  • 90:10

  • 50:50 

  • 60:40 

🔹 व्याख्या:

👉 सूखा संभावित क्षेत्र विकास कार्यक्रम (Drought Prone Areas Programme - DPAP) की शुरुआत 1974-75 में चौथी पंचवर्षीय योजना के दौरान की गई। इसका प्रमुख उद्देश्य राज्य में स्थायी जल संरक्षण, कृषि विकास और ग्रामीणों के लिए रोजगार सृजन के माध्यम से बार-बार पड़ने वाले सूखे के दुष्प्रभावों को कम करना है।राजस्थान में इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं:प्रारंभ और वित्त पोषण: इसे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 75:25 के अनुपात में वित्त पोषित किया जाता है।भौगोलिक विस्तार: यह कार्यक्रम वर्तमान में राजस्थान के 11 जिलों के 32 खंडों (Blocks) में संचालित है।प्रमुख जिले: इनमें मुख्य रूप से उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, अजमेर और कोटा संभाग के जिले (कोटा, बारां, झालावाड़) शामिल हैं।मुख्य गतिविधियां:जल संरक्षण और प्रबंधनबंजर भूमि का विकासवनीकरण (वृक्षारोपण) और चरागाहों का विकासमृदा एवं नमी संरक्षण (Soil and Moisture Conservation)पशुपालन एवं कृषि वानिकी को बढ़ावा देना

✍️ सही उत्तर है – 75:25

राजस्थान के स्टेट एनवायरनमेन्टल प्लान 2022 के अनुसार राज्य में भूमिगत जल की "ओवर एक्स्प्लोइटेड" (अतिशोषित) श्रेणी में स्थित खण्डों की संख्या_____________है।  

[कनिष्ठ अनुदेशक (रोजगार) 18.11.2024]

  • 50 

  • 82 

  • 172 

  • 71

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन गंभीर समस्या है।
👉 स्टेट एनवायरनमेंटल प्लान 2022 के अनुसार, राज्य में अनेक खण्ड "ओवर एक्स्प्लोइटेड" श्रेणी में हैं।
👉 इनकी कुल संख्या 172 दर्ज की गई है।

✍️ सही उत्तर है – 172

'सूखा सम्भावित क्षेत्र कार्यक्रम' किस वर्ष में प्रारंभ हुआ ? 

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (प्रलेख) 22 .09.2019]

  • 1977-78 

  • 1988-89  

  • 1984-85 

  • 1974-75 

🔹 व्याख्या:

👉 सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम 1973 में एकीकृत क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया।
👉 इसका उद्देश्य भूमि, जल, पशुधन व मानव संसाधनों का संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करना है।
👉 यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
👉 वित्तीय व्यवस्था – केंद्र और राज्य का हिस्सा 75:25 है।
👉 व्यय का 80% (हरियाली के तहत 85%) जलसंचय विकास पर और 20% (हरियाली के तहत 15%) सामुदायिक संगठन व प्रशिक्षण पर होता है।

✍️ सही उत्तर है – 1974-75 

निम्नलिखित में से कौन-सा मृदा अपरदन का प्रत्यक्ष कारण नहीं है ? 

[कनिष्ठ अनुदेशक (रोजगार) 18.11.2024]

  • वैश्विक तापमान वृद्धि 

  • स्थानान्तरित कृषि 

  • अत्याधिक पशुचारण 

  • वन विनाश 

🔹 व्याख्या:

👉 मृदा अपरदन के प्रत्यक्ष कारण हैं – अत्याधिक पशुचारण, स्थानान्तरित कृषि और वन विनाश।
👉 वैश्विक तापमान वृद्धि सीधे मृदा को नहीं काटती, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन लाती है।
👉 इसके परिणामस्वरूप बाढ़, सूखा और असामान्य वर्षा होती है, जो अप्रत्यक्ष रूप से मृदा अपरदन बढ़ाती हैं।

✍️ सही उत्तर है – वैश्विक तापमान वृद्धि

राजस्थान में 2020-21 में कितने जिले अकाल से प्रभावित हुए ?

[VDO मुख्य परीक्षा 09.07.2022]

  • 6 

  • 21 

  • 10 

  • 9 

🔹 व्याख्या:

👉 2020-21 में सूखे से प्रभावित जिले 6, गाँव 2062, और जनसंख्या 21.62 लाख रही।
👉 2021-22 में प्रभावित जिले बढ़कर 10, गाँव 6122, और जनसंख्या 74.28 लाख हो गई।
👉 कृषि सूखा – नमी की कमी से फसल प्रभावित होना।
👉 मौसम विज्ञान संबंधी सूखा – वर्षा में 25% से अधिक कमी होना।
👉 जलविज्ञान संबंधी सूखा – सतही व भूजल स्तर में कमी आना। 

राजस्थान का निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्र तीन साल में एक बार सूखे के लिए जाना जाता है ? 

[JEN (Civil Diploma) 11.02.2025]

  • भरतपुर 

  • भोलपुर 

  • जोधपुर

  • कोटा 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के कई जिले बार-बार सूखे की चपेट में आते हैं।
👉 बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर और सिरोही ऐसे जिले हैं जहाँ सूखे की स्थिति सामान्य है।
👉 इन क्षेत्रों में औसतन हर 3 साल में एक बार सूखा पड़ता है। 

मरुस्थलीकरण से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र____________राजस्थान है। (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)  

[कनिष्ठ अनुदेशक (रोजगार) 18.11.2024]

  • पूर्वी 

  • उत्तरी 

  • पश्चिमी 

  • दक्षिणी 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान का पश्चिमी भाग थार मरुस्थल के अंतर्गत आता है।
👉 यह क्षेत्र लम्बे समय तक सूखे और शुष्क जलवायु के कारण प्रभावित रहता है।
👉 यहाँ मरुस्थलीकरण की समस्या सबसे अधिक पाई जाती है।

✍️ सही उत्तर है – पश्चिमी  

मौसम विज्ञान के अनुसार सामान्य वर्षा से 51% व अधिक वर्षा में कमी होने पर _______ सूखा कहते हैं।

[वनपाल परीक्षा 06.11.2022]

  • मध्यम 

  • सामान्य 

  • नहीं                                                                           

  • भयंकर 

🔹 व्याख्या:

👉 मौसम विज्ञान में वर्षा की कमी के आधार पर सूखे की परिभाषा दी गई है।
👉 सामान्य वर्षा से 51% या अधिक कमी होने पर इसे गंभीर सूखा कहा जाता है।
👉 इस स्थिति में जल संसाधन, कृषि और पर्यावरण पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

✍️ सही उत्तर है – भयंकर 

अकाल की सर्वाधिक तीव्रता ____ ज़िले में होती है 

[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]

  • पाली 

  • बाड़मेर 

  • जैसलमेर

  • जालौर

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के कई जिले अकाल प्रवण क्षेत्र में आते हैं।
👉 इनमें पाली जिला अकाल की सर्वाधिक तीव्रता वाला माना गया है।
👉 यहाँ वर्षा की अनिश्चितता और बार-बार सूखा पड़ना प्रमुख कारण हैं।

✍️ सही उत्तर है – पाली

राजस्थान के संकट प्रबंधन योजना 2014 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा क्षेत्र "5 वर्ष में एक बार" सूखा पुनरावर्ती अवधि में शामिल नहीं है?

[VDO (ग्राम विकास अधिकारी) 02.11.2025]

  • अलवर

  • सिरोही

  • पाली

  • जयपुर

🔹 व्याख्या

👉 संकट प्रबंधन योजना 2014 में अलवर जिला “5 वर्ष में एक बार” सूखे की श्रेणी में शामिल नहीं है।
👉 अलवर को उन क्षेत्रों में रखा गया है जहाँ “3 वर्ष में एक बार” सूखा पड़ने की संभावना रहती है।
👉 इसी श्रेणी में जोधपुर, कोटा, भरतपुर और धौलपुर जिले भी शामिल हैं। 

✍️ सही उत्तर है – अलवर 

राजस्थान में 'बीड़’ __________स्थानीय नाम है

[प्रयोगशाला सहायक (गृह विज्ञान) 30.06.2022]

  • तिलहन का 

  •  खाद्यान्न का 

  • कंटीले वन का

  • चारागाह का

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में चारागाह भूमि के लिए स्थानीय शब्द प्रयोग होते हैं।
👉 ‘बीड़’ शब्द विशेष रूप से चारागाह/घास के मैदानों के लिए प्रयुक्त है।
👉 यह शब्द खासकर शेखावाटी क्षेत्र में प्रचलित है, जहाँ पशु चराई होती है। 

निम्नलिखित में से कौन-सा उपाय मरुस्थलीकरण रोकने में सहायक नहीं है ?  

[कनिष्ठ अनुदेशक (रोजगार) 18.11.2024]

  • नए चरागाह क्षेत्रों का विकास किया जाए 

  • रेतीली व क्षारीय बंजर भूमि का उपयोग ना किया जाए 

  • वन संरक्षण 

  • अरावली क्षेत्र में हरी सुरक्षा पट्टियाँ विकसित की जाएँ 

🔹 व्याख्या:

👉 रेतीली और क्षारीय बंजर भूमि का अति-उपयोग मिट्टी को और अधिक क्षतिग्रस्त करता है।
👉 इन भूमि का उपयोग न करने से वे प्राकृतिक रूप से पुनर्प्राप्त (recovery) हो सकती हैं।
👉 यह उपाय मरुस्थलीकरण रोकने में सहायक है।

✍️ सही उत्तर है – रेतीली व क्षारीय भूमि का उपयोग न करना

'सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम' किस वित्तीय वर्ष में प्रारंभ हुआ था ? 

[लवण निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]

  • 1974-75 

  • 1990-91

  • 1985-86 

  • 1980-81

🔹 व्याख्या:

👉 सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम 1973 में एकीकृत क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया।
👉 इसका उद्देश्य भूमि, जल, पशुधन व मानव संसाधनों का संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करना है।
👉 यह कार्यक्रम ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
👉 वित्तीय व्यवस्था – केंद्र और राज्य का हिस्सा 75:25 है।
👉 व्यय का 80% (हरियाली के तहत 85%) जलसंचय विकास पर और 20% (हरियाली के तहत 15%) सामुदायिक संगठन व प्रशिक्षण पर होता है।

✍️ सही उत्तर है – 1974-75 

अकाल के लिए प्रसिद्ध दोहे में 'पग पूंगल' के नाम से राजस्थान के कौनसे जिले की ओर संकेत किया गया है ? 

[CET (10+2 षष्टम चरण) 11.02.2023]

  • बीकानेर 

  • जोधपुर 

  • गंगानगर 

  • नागौर 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में अकाल से संबंधित अनेक दोहे प्रचलित हैं।
👉 इनमें प्रयुक्त ‘पग पूंगल’ शब्द का संकेत बीकानेर जिले की ओर है।
👉 यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही अकाल प्रभावित माना जाता रहा है।

✍️ सही उत्तर है – बीकानेर

निम्नलिखित में से कौनसे जिले में सर्वाधिक परती भूमि हैं ? 

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (विष) 14.09.2019]

  • जोधपुर 

  • चुरू 

  • जैसलमेर 

  • उदयपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में परती भूमि का प्रतिशत अधिक पाया जाता है।
👉 जोधपुर जिला सर्वाधिक परती भूमि वाला जिला है।
👉 यहाँ वर्षा आधारित खेती और शुष्क जलवायु के कारण खेती योग्य भूमि बड़ी मात्रा में खाली रहती है।

✍️ सही उत्तर है – जोधपुर

राजस्थान में सूखा मुख्य रूप से _________ वर्षा की विफलता के कारण होता है। 

[JEN (Agriculture) 22.02.2025]

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून

  • उत्तर-दक्षिण मानसून 

  • उत्तर-पश्चिम मानसून

  • दक्षिण-पूर्व मानसून

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में सूखे का मुख्य कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून की विफलता है।
👉 यह मानसून राज्य में वर्षा का प्रमुख स्रोत है।
👉 जब वर्षा कम या अनियमित होती है तो सूखे की स्थिति उत्पन्न होती है।
👉 अरावली पर्वतमाला मानसून की हवाओं के समानांतर होने से भी वर्षा कम हो जाती है।

✍️ सही उत्तर है – दक्षिण-पश्चिम मानसून 

राजस्थान में सूखा संभाव्य क्षेत्र कार्यक्रम का सम्बन्ध किस गतिविधि से नहीं है ? 

[CET (10+2 प्रथम चरण) 04.02.2023]

  • मिट्टी व नमी का संरक्षण करना 

  • वृक्षारोपण 

  • जल-संसाधनों का विकास 

  • गरीबी निवारण 

🔹 व्याख्या:

👉 सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP) की शुरुआत 1974-75 में की गई थी।
👉 इसका उद्देश्य सूखे और मरुस्थलीकरण के प्रतिकूल प्रभावों को कम करना है।
👉 इसमें मिट्टी व नमी संरक्षण, जल संसाधनों का विकास और वृक्षारोपण प्रमुख कार्य हैं।
👉 यह सीधे गरीबी निवारण से संबंधित नहीं है बल्कि प्राकृतिक संसाधन संरक्षण व विकास से जुड़ा है। 

राजस्थान में 'त्रिकाल' का संबंध है 

[JEN (विधुत) (डिप्लोमाघारक) 29.11.2020]

  • चारा, बेरोजगारी एवं अनाज

  • जल, घास एवं आवास       

  • अनाज, जल एवं चारा 

  • बेरोजगारी, जल एवं घास 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में त्रिकाल का अर्थ है – अनाज, पानी और चारे की कमी।
👉 इसे “छपनिया अकाल” (1899-1900) से भी जोड़ा जाता है।
👉 इस काल में लोगों को खाद्यान्न, पानी और पशुओं के लिए चारे की गंभीर कमी झेलनी पड़ी।
👉 ये तीनों समस्याएँ मिलकर भीषण संकट उत्पन्न करती हैं।

✍️ सही उत्तर है – अनाज, जल एवं चारा 

निम्नलिखित में से कौन सी भारत में जलविभाजक विकास परियोजना नहीं है ? 

[JEN (Agriculture) 22.02.2025]

  • वर्षा सिंचित क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय जलविभाजक विकास परियोजना 

  • राष्ट्रीय बाढ़ नियंत्रण परियोजना 

  • सूखा प्रवण क्षेत्र कार्यक्रम 

  • रेगिस्तान विकास कार्यक्रम 

🔹 व्याख्या:

👉 राष्ट्रीय बाढ़ नियंत्रण परियोजना का मुख्य उद्देश्य बाढ़ के खतरे को कम करना है।
👉 इसमें तटबंध, जलाशय और अन्य संरचनात्मक उपाय शामिल हैं।
👉 यह जलविभाजक विकास परियोजना नहीं है।
👉 जलविभाजक विकास परियोजनाएँ जल संरक्षण, प्रबंधन और संसाधनों के सतत उपयोग पर केंद्रित होती हैं। 

राजस्थान में सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (डी. पी. ए. पी.) जिलों में चल रहा है ।

[कनिप्ठ अनुदेशक (रेफ्रीजरेशन) 24.12.2019]

  • 10

  • 13

  • 12

  • 15

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में सूखे से निपटने के लिए सूखा संभावित क्षेत्र कार्यक्रम (DPAP) लागू है।
👉 यह कार्यक्रम राज्य के चुनिंदा सूखा प्रभावित जिलों में संचालित किया जाता है।
👉 वर्तमान में यह कार्यक्रम कुल 13 जिलों में चल रहा है।

✍️ सही उत्तर है – 13 जिले