'छप्पन का मैदान' स्थित है ?
[पटवार (तृतीय चरण) 24.10.2021]
👉 छप्पन का मैदान राजस्थान के दक्षिण-पूर्व में स्थित है, जो मध्य माही बेसिन का भाग है।
👉 इसका विस्तार उदयपुर के दक्षिण-पूर्व, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर और चित्तौड़गढ़ के दक्षिणी भाग तक है।
👉 यह क्षेत्र माही नदी तथा उसकी सहायक नदियों द्वारा सिंचित है।
👉 इसका नामकरण प्रतापगढ़ और बाँसवाड़ा के मध्य स्थित छप्पन ग्राम समूह पर आधारित है।
राजस्थान के किस प्रदेश में बीहड मिलते हैं ?
[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]
👉 राजस्थान में बीहड़ (उत्खात स्थलाकृति) मुख्यतः चम्बल बेसिन में पाए जाते हैं।
👉 यह क्षेत्र कोटा, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर जिलों में फैला हुआ है।
👉 यहाँ की भूमि गहराई तक कटावयुक्त और असमतल है, जिसे बीहड़ी क्षेत्र कहा जाता है।
👉 यह भू-आकृति पूर्वी मैदानी प्रदेश का भाग है।
राजस्थान का कौन सा भौतिक प्रदेश "खाद्यान्न का कटोरा" भी कहा जाता है ?
[उद्योग प्रचार अधिकारी 22.07.2018]
👉 राजस्थान का पूर्वी मैदानी प्रदेश को राज्य का "खाद्यान्न का कटोरा" कहा जाता है।
👉 यह क्षेत्र जल की उपलब्धता, उपजाऊ जलोढ़ मृदा और सिंचाई सुविधाओं के कारण कृषि की दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त है।
👉 इसमें मुख्यतः चम्बल, बनास और माही बेसिन के क्षेत्र आते हैं।
👉 यह प्रदेश राज्य के कुल भू-भाग का लगभग 23.3% भाग है।
निम्नलिखित बेसिन में कौन सा 'उत्खात-भूमि स्थलाकृति ' के लिए प्रसिद्ध है ?
[प्रयोगशाला सहायक (गृह विज्ञान) 30.06.2022]
👉 राजस्थान में उत्खात भूमि स्थलाकृति (Badland Topography) विशेष रूप से चम्बल बेसिन में पाई जाती है।
👉 यह बेसिन कोटा, करौली, धौलपुर और सवाई माधोपुर जिलों में विस्तृत है।
👉 यहाँ की भूमि घाटियों, बीहड़ों एवं कटी-फटी संरचना से युक्त है।
👉 चम्बल बेसिन को पूर्वी मैदानी प्रदेश का भाग माना जाता है।
राजस्थान में निम्नलिखित में से कौनसा एक बालुका स्तूप का प्रकार नहीं है?
[VDO Pre. (प्रथम चरण) 27.12.2021]
👉 राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में अनेक प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं।
👉 इनमें प्रमुख हैं — रेखीय, बरखान (अर्द्ध चन्द्राकार), पेराबोलिक, तारा, अवरोधी और शन काफीज।
👉 इनमें से बरखान बालुका स्तूप सर्वाधिक सामान्य हैं, जिनकी ऊँचाई 10 से 20 मीटर तक होती है।
👉 ये स्तूप जैसलमेर, चूरू, सीकर, बाड़मेर, जोधपुर आदि क्षेत्रों में देखे जाते हैं।
डग - गंगाधर उच्च भूमियां हिस्सा है
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड -II 11.09.2022]
👉 राजस्थान का दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश एक पठारी क्षेत्र है जिसे हाड़ौती का पठार भी कहा जाता है।
👉डग - गंगाधर उच्च भूमियां हिस्सा है - हाड़ौती पठार का
👉 यह क्षेत्र मालवा पठार का ही एक विस्तार माना जाता है।
निम्नलिखित में से कौन-सी एक राजस्थान के मरुस्थल में अवनयनात्मक (निक्षेपणात्मक) भू-आकृति है ? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
[Supervisor (महिला) 07.09.2024]
👉 राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में बनने वाली एक प्रमुख अवनयनात्मक (निक्षेपणात्मक) भू-आकृति है बालुका स्तूप (Sand Dunes)।
👉 इनका निर्माण मुख्यतः वायु के द्वारा लाई गई रेत के जमाव से होता है।
👉 मरुस्थल में बरखान, पेराबोलिक, तारा, रेखीय जैसे विभिन्न प्रकार के बालुका स्तूप पाए जाते हैं।
👉 यह भू-आकृति मरुस्थलीय क्षेत्रों में वर्षों तक चलने वाली वायु क्रिया का परिणाम होती है।
'बरखान' स्थलाकृतियाँ निम्न में से किस भौतिक प्रदेश संबंधित है
[CET (10+2 चतुर्थ चरण) 05.02.2023]
👉 'बरखान' स्थलाकृति एक प्रकार की अर्द्धचन्द्राकार बालुका स्तूप होती है।
👉 यह स्थलाकृति मुख्यतः पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में पाई जाती है।
👉 इनकी ऊँचाई लगभग 10 से 20 मीटर और चौड़ाई 10 से 200 मीटर तक होती है।
👉 बरखान स्तूप विशेष रूप से जैसलमेर, बीकानेर, चूरू, सीकर आदि क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
राजस्थान की शुष्क भूमि के संबंध में निम्न में से कौन सा कथन सही नहीं है ? (निम्न में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें)
[लिपिक ग्रेड -II (LDC) 11.08.2024]
👉 राजस्थान की शुष्क भूमि मुख्यतः 25 से.मी. समवर्षा रेखा के पश्चिम में स्थित होती है।
👉 इसमें बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर और चूरू जिलों के पश्चिमी भाग शामिल हैं।
👉 यह क्षेत्र मरुस्थलीय प्रदेश कहलाता है जहाँ रेतीले टिब्बे, खारे पानी के गर्त और चट्टानी भाग पाये जाते हैं।
👉 इस क्षेत्र में अवसादी शैल, बालूका स्तूप और तेज गति की हवाएँ विशिष्ट विशेषताएँ हैं।
राजस्थान का पूर्वी मैदानी भाग राजस्थान राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग प्रतिशत धारित करता है।
[JEN (यांत्रिक) (डिग्रीधारक) 13.12.2020]
👉 राजस्थान का पूर्वी मैदानी भाग राज्य के कुल भू-भाग का लगभग 23.3% क्षेत्र घेरता है।
👉 यह प्रदेश अरावली के उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व भागों में फैला हुआ है।
👉 इसमें मुख्यतः चम्बल, बनास और माही बेसिन सम्मिलित हैं।
👉 यह क्षेत्र जलोढ़ मृदा और उपजाऊ मैदानों के लिए जाना जाता है।
जैसलमेर में किस प्रकार के बालूका स्तूप पाए जाते हैं ? [*]
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 जैसलमेर में मुख्यतः रेखीय (पवनानुवर्ती), बरखान (अर्द्ध चन्द्राकार) और तारा बालुका स्तूप पाए जाते हैं।
👉 तारा बालुका स्तूप विशेषतः सोहनगढ़ और पोकरण क्षेत्र में मिलते हैं, जिनकी ऊँचाई 10 से 25 मीटर तक होती है।
👉 यहाँ कुछ स्थानों पर चूना पत्थर और बालू पत्थर के प्रकटीकरण से बालुका स्तूपों की एकरूपता टूटती है।
👉 जैसलमेर का एक क्षेत्र ड्यून मुक्त ट्रैक्ट भी कहलाता है जहाँ बालुका स्तूप नहीं हैं।
📌 महत्वपूर्ण सूचना: यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा हटाया गया (डिलीट) माना गया है
निम्नलिखित में से किन जिलों का क्षेत्र 'भोमट' कहलाता है?
[वनरक्षक (चतुर्थ चरण) 13.11.2022]
👉 दक्षिणी अरावली क्षेत्र में उदयपुर, सिरोही जैसे जिले सम्मिलित हैं।
👉 यह क्षेत्र सघन पर्वतीय, वनाच्छादित और प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त है।
👉 यहाँ की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं में आबू, जरगा, कुम्भलगढ़, सज्जनगढ़ आदि सम्मिलित हैं।
राजस्थान में डयून मुक्त ट्रेक्ट पाया जाता है -
JEN (विद्युत डिप्लोमाधारक) 19.05.2022
👉 राजस्थान में ड्यून मुक्त ट्रैक्ट (बालुका स्तूप रहित क्षेत्र) जैसलमेर जिले में स्थित है।
👉 यह क्षेत्र पूरी तरह से अवसादी शैलों से ढका है और यहाँ बालुका स्तूपों का पूर्ण अभाव है।
👉 इसी क्षेत्र में स्थित है आंकल वुड फॉसिल पार्क, जहाँ प्राचीन वनस्पति और जीवाश्म पाए जाते हैं।
👉 यह स्थल भूगर्भिक दृष्टि से विशिष्ट महत्व रखता है।
विन्ध्यन कगार भूमियाँ हिस्सा हैं
VDO Pre. (द्वितीय चरण) 27.12.2021
👉 विन्ध्यन कगार भूमियाँ राजस्थान के पूर्वी मैदान का हिस्सा मानी जाती हैं।
👉 यह भू-आकृति चम्बल, बनास और माही बेसिन क्षेत्रों में पाई जाती है, जहाँ विन्ध्य शैलों का प्रभुत्व है।
👉 इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं बीहड़, कटी-फटी स्थलाकृति भी दिखाई देती है।
👉 यह भू-आकृतिक स्वरूप पूर्वी मैदानी प्रदेश की विशेष पहचान है।
कितने सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा राजस्थान राज्य की भूमि को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है ?
[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 राजस्थान राज्य की भूमि को लगभग दो बराबर भागों में बाँटने वाली समवर्षा रेखा है — 50 से.मी. समवर्षा रेखा।
👉 यह रेखा मरुस्थलीय और अर्ध-आर्द्र क्षेत्रों की पहचान तय करती है।
👉 इसके पश्चिम में शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश, जबकि पूर्व में मैदानी एवं पठारी क्षेत्र स्थित हैं।
👉 यह रेखा जलवायु और कृषि विभाजन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
निम्नांकित में से किसको अर्द्ध चन्द्राकार बालुका स्तूप कहते हैं ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]
👉 अर्द्ध चन्द्राकार बालुका स्तूप को ही बरखान बालुका स्तूप कहा जाता है।
👉 इनकी ऊँचाई लगभग 10 से 20 मीटर और चौड़ाई 10 से 200 मीटर तक होती है।
👉 ये स्तूप मुख्यतः जैसलमेर, बाड़मेर, चूरू, सीकर, जोधपुर आदि क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
👉 इनका निर्माण वायु की एक दिशा में दीर्घकालीन प्रवाह से होता है।
निम्नलिखित में से कौनसा राजस्थान के अर्द्धशुष्क मैदान भौतिक प्रदेश में सम्मिलित नहीं है?
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 इन क्षेत्रों में रेतीले मैदान, बालुका स्तूप, और कुछ जगहों पर खारे पानी के गर्त पाए जाते हैं।
👉 इसलिए यह अर्द्धशुष्क भौतिक प्रदेश में सम्मिलित नहीं होता।
निम्नलिखित में से कौनसा प्रक्रम राजस्थान में रेगिस्तानीकरण का प्रमुख कारण है?
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 28.06.2022]
👉 राजस्थान में रेगिस्तानीकरण (मरुस्थलीकरण) का प्रमुख कारण मानवीय क्रियाएँ मानी जाती हैं।
👉 विशेष रूप से अनियंत्रित पशुचारण ने इस प्रक्रिया को तेज किया है।
👉 इसके अतिरिक्त वायु अपरदन, वनस्पति की कमी, और जल संसाधनों की न्यूनता भी सहायक कारण हैं।
👉 यह प्रक्रिया विशेषकर पश्चिमी राजस्थान में तीव्रता से हुई है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सही उत्तर का चयन नीचे दिए कूट से कीजिए
(1) भौराट का पठार कुम्भलगढ़ और राजसमन्द के मध्य स्थित है।
(2) उत्खात स्थलाकृति चम्बल बेसिन में मिलती है।
(3) रघुनाथगढ़ उत्तरी अरावली का सर्वोच्च शिखर है।
[संगणक परीक्षा 19.12. 2021]
कूट -
👉 भौराट का पठार वास्तव में कुम्भलगढ़ और गोगुन्दा के बीच स्थित है, न कि कुम्भलगढ़ और राजसमन्द के मध्य।
👉 उत्खात स्थलाकृति (Badland Topography) का विस्तार चम्बल बेसिन में स्पष्ट रूप से मिलता है।
👉 रघुनाथगढ़ (1055 मीटर) शिखर उत्तरी अरावली क्षेत्र, विशेषकर सीकर जिले में स्थित सर्वोच्च शिखर है।
राजस्थान में लूनी-जवाई बेसिन को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 28.06.2022]
👉 राजस्थान में लूनी-जवाई बेसिन को भौगोलिक दृष्टि से गोडवार प्रदेश के नाम से भी जाना जाता है।
👉 यह क्षेत्र पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर और नागौर के दक्षिणी भागों में विस्तृत है।
👉 लूनी नदी तथा इसकी शाखाओं ने यहाँ जलोंढ़ मैदान का निर्माण किया है।
👉 इस क्षेत्र में खारे पानी के गर्त और स्थान-स्थान पर एकाकी पहाड़ियाँ भी मिलती हैं।
बनास बेसिन राजस्थान के किस भौगोलिक विभाजन का हिस्सा है ?
पशुधन सहायक (LSA) 04.06.2022
👉 बनास बेसिन राजस्थान के पूर्वी मैदानी प्रदेश का एक महत्त्वपूर्ण भाग है।
👉 यह बेसिन चित्तौड़गढ़ और उदयपुर से निकलकर जयपुर, टोंक, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर तक विस्तृत है।
👉 यहाँ की भूमि की ऊँचाई 150 से 300 मीटर के बीच है और ढाल पूर्व की ओर है।
👉 इस क्षेत्र में जलोढ़ मृदा का जमाव पाया जाता है जो इसे कृषि के लिए उपयुक्त बनाता है।
राजस्थान के कितने जिलों में थार रेगिस्तान फैला हुआ है ?
[लिपिक ग्रेड-II 09.09.2018]
👉 राजस्थान में थार रेगिस्तान का विस्तार कुल 12 जिलों में है।
👉 इनमें प्रमुख जिले हैं — जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, गंगानगर, हनुमानगढ़, जालौर और पाली।
👉 इस मरुस्थलीय क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल लगभग 1,75,000 वर्ग किमी है।
👉 यह क्षेत्र पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश के अंतर्गत आता है।
निम्नलिखित में से कौनसा युग्म सुमेलित है ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (रसायन) 14.09.2019]
👉 राजस्थान का वागड़ क्षेत्र मुख्यतः बाँसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों में विस्तृत है।
👉 यह क्षेत्र छप्पन मैदान का हिस्सा है, जो मध्य माही बेसिन के अंतर्गत आता है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति गहरी, कटी-फटी तथा असमतल है, और छोटी-छोटी पहाड़ियाँ सर्वत्र फैली हुई हैं।
👉 यह क्षेत्र माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा सिंचित है।
राजस्थान के किस प्रदेश / क्षेत्र में मुख्यतः 'बीहड़' पाए जाते हैं ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]
👉 राजस्थान में 'बीहड़' मुख्यतः पूर्वी मैदानी प्रदेश के अंतर्गत आने वाले चम्बल बेसिन में पाए जाते हैं।
👉 यह क्षेत्र कोटा, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर जिलों में फैला है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति को उत्खात स्थलाकृति (Badland Topography) कहा जाता है।
👉 चम्बल नदी और उसकी सहायक नदियाँ यहाँ गहरी कटावदार घाटियों का निर्माण करती हैं।
तारा बालुका स्तूप कहाँ पाये जाते हैं ? [*]
[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 26.03.2019]
👉 तारा बालुका स्तूप राजस्थान के जैसलमेर के सोहनगढ़ और पोकरण क्षेत्र में पाए जाते हैं।
👉 ये स्तूप श्रृंखलाबद्ध रूप में होते हैं और इनकी ऊँचाई लगभग 10 से 25 मीटर तक होती है।
👉 ये मरुस्थलीय प्रदेश की एक विशिष्ट स्थलाकृति हैं।
👉 गंगानगर के सूरतगढ़ क्षेत्र में भी इनका विस्तार देखा जा सकता है।
राजस्थान के किस भौतिक प्रदेश में मुकुंदरा की पहाड़ियाँ स्थित हैं ?
[CET (10+2 तृतीय चरण) 05.02.2023]
👉 मुकुंदरा की पहाड़ियाँ राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती) में स्थित हैं।
👉 यह पहाड़ियाँ मुख्यतः कोटा और बूँदी जिलों में फैली हुई हैं।
👉 इनकी लम्बाई लगभग 120 किलोमीटर है और ऊँचाई 335 से 503 मीटर तक होती है।
👉 मुकुंदरा श्रेणी अर्द्धचन्द्राकार रूप में विस्तारित एक प्रमुख पर्वत माला है।
'सीफ' है. एक -
JEN (सिविल डिप्लोमाधारक) 18.05.2022
👉 'सीफ' शब्द का अर्थ जल से भरे खारे गर्त से है, जो मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
👉 राजस्थान के बाप, पोकरण, लूनकरनसर जैसे क्षेत्रों में ये छिछले खारे जल वाले गर्त मौजूद हैं।
👉 ये स्थान मरुस्थलीय प्रदेश के अंतर्गत आते हैं और भूपटल की विशेष आकृति दर्शाते हैं।
👉 ऐसे गर्तों में प्रायः लवणीयता पाई जाती है।
निम्नलिखित में से कौनसा भौतिक लक्षण "राजस्थान बांगर " में सम्मिलित नहीं है?
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड -II 11.09.2022]
👉 राजस्थान बांगर क्षेत्र को शेखावाटी प्रदेश भी कहा जाता है, जिसमें झुंझुनूं, सीकर, चूरू और नागौर का उत्तरी भाग शामिल हैं।
👉 यह क्षेत्र रेतीले मैदान, अर्धवृत्ताकार बालुका स्तूप, और लवणीय गर्तों से युक्त है।
👉 यहाँ कोई प्रमुख नदी नहीं है, केवल कुछ अंतःप्रवाही धाराएँ हैं।
👉 अतः यदि कोई भौतिक लक्षण इससे मेल नहीं खाता (जैसे – स्थायी नदी या उच्च पर्वत), तो वह इसमें सम्मिलित नहीं होगा।
डग- गंगधार उच्च भूमियाँ अवस्थित हैं ?
JEN (विद्युत डिप्लोमाधारक) 19.05.2022
👉 डग-गंगधार की उच्च भूमि राजस्थान के दक्षिणी हाड़ौती क्षेत्र में स्थित है।
👉 यह क्षेत्र सामान्यतः 450 मीटर ऊँचाई वाला पठारी भाग है, जिसमें छोटी-छोटी पहाड़ियाँ फैली हुई हैं।
👉 यह भू-आकृति झालावाड़ जिले के दक्षिण-पश्चिमी भाग में पाई जाती है।
👉 यह क्षेत्र मालवा के पठार का उत्तरी भाग माना जाता है।
अरावली पर्वतमाला के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौनसे तथ्य सत्य हैं?
(i) इसका निर्माण कैम्ब्रियन युग में हुआ था ।
(ii) वर्तमान में यह अवशिष्ट पर्वत के रूप में है ।
(iii) यह मुख्यतः आग्नेय चट्टानों से निर्मित है।
(iv) यह दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व दिशा में विस्तृत है।
[CET (स्नातक) (चरण -IV) 08.01.2023]
कूट -
👉 अरावली पर्वतमाला से जुड़े निम्नलिखित तथ्य सत्य हैं —
👉 (ii) वर्तमान में यह अवशिष्ट पर्वत है, क्योंकि यह अत्यंत प्राचीन पर्वत श्रृंखला है।
👉 (iv) यह उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में विस्तृत है, खेतड़ी से खेड़ ब्रह्मा तक।
👉 जबकि (i) इसका निर्माण कैम्ब्रियन से पूर्व, प्री-कैम्ब्रियन काल में हुआ था।
👉 (iii) यह मुख्यतः ग्रेनाइट, नीस, क्वार्टजाइट आदि चट्टानों से बनी है, न कि केवल आग्नेय शैल से।
मरु विकास बोर्ड की स्थापना किस वर्ष में हुई थी ?
[JEN (यांत्रिक) (डिप्लोमाधारक) 13.12.2020]
👉 मरु विकास बोर्ड की स्थापना वर्ष 1966 से है।
👉 पश्चिमी राजस्थान का अधिकांश भाग थार मरुस्थल में आता है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 1,75,000 वर्ग किमी है।
👉 इस क्षेत्र में बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर आदि जिले आते हैं।
👉 यहाँ की जलवायु अत्यधिक शुष्क, भू-आकृति रेतीली तथा वायु की गति तीव्र होती है।
'छप्पन बेसिन' निम्नलिखित में से राजस्थान के किस भौतिक प्रदेश का भाग है ?
[आर्थिक अन्वेषक परीक्षा 25.03.2019]
👉 छप्पन बेसिन राजस्थान के पूर्वी मैदानी प्रदेश का भाग है।
👉 यह क्षेत्र मध्य माही बेसिन के अंतर्गत आता है और डूंगरपुर, बाँसवाड़ा एवं चित्तौड़गढ़ के दक्षिणी भागों में फैला है।
👉 यह भू-भाग अत्यधिक असमतल है और यहाँ छोटी-छोटी पहाड़ियाँ एवं घाटियाँ पाई जाती हैं।
👉 यह क्षेत्र माही नदी और उसकी सहायक नदियों से सिंचित है।
महान सीमा भ्रंश ___ में से नहीं गुजरता है।
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -A) 11.12.2022]
👉 महान सीमा भ्रंश राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग से होकर गुजरता है।
👉 यह भ्रंश चित्तौड़गढ़ (बेगूँ), कोटा (उत्तर), सवाई माधोपुर और धौलपुर जिलों में स्पष्ट रूप से देखा जाता है।
👉 यह एक भू-गर्भिक संरचनात्मक विशेषता है जो राज्य की भौगोलिक विविधता को दर्शाती है।
निम्न में से कौन सी समवर्षा रेखा राजस्थान को दो भागों में विभक्त करती है ?
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 राजस्थान को दो भागों में विभक्त करने वाली समवर्षा रेखा है — 50 से.मी. समवर्षण रेखा।
👉 यह रेखा राज्य को पश्चिमी शुष्क मरुस्थलीय भाग और पूर्वी आर्द्र मैदानी भाग में विभाजित करती है।
👉 यह विभाजन जलवायु, भू-आकृति और कृषि की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
👉 यह रेखा पूर्वी मैदानी प्रदेश की सीमा का भी निर्धारण करती है।
पूर्वी सिरोही के सुदूर पश्चिम में स्थित कटक जो तीव्र ढाल वाले, कम ऊँचे एवं उबड़-खाबड़ हैं, कहलाते हैं ?
[शारीरिक शिक्षा अध्यापक 25.09.2022]
👉 सिरोही जिले के पश्चिम में स्थित उबड़-खाबड़, तीव्र ढाल वाले कम ऊँचाई के भू-भाग को भाकर कहा जाता है।
👉 यह क्षेत्र दक्षिणी अरावली प्रदेश में आता है, जहाँ डोरा पर्वत, नाकोड़ा पर्वत, और छप्पन की पहाड़ियाँ स्थित हैं।
👉 यहाँ की चट्टानी संरचना क्षेत्र को विशिष्ट स्थानीय नाम प्रदान करती है, जैसे भाकर।
निम्नलिखित में से कौनसी स्थलाकृति अरावली श्रृंखला में अवस्थित नहीं है?
JEN (सिविल डिग्रीधारक) 18.05.2022
👉 अरावली पर्वत श्रेणी में गुरु शिखर, कुम्भलगढ़, सज्जनगढ़, नाहरगढ़, तारागढ़ जैसी प्रमुख स्थलाकृतियाँ स्थित हैं।
👉 यह श्रेणी राजस्थान में सात जिलों में फैली है, जिनमें सिरोही, उदयपुर, अजमेर, जयपुर, अलवर प्रमुख हैं।
👉 अरावली श्रृंखला में अनेक पठार, दर्रे और शिखर भी पाए जाते हैं, जैसे भोराट पठार, बार दर्रा, जयगढ़, खोह आदि।
👉 अतः कोई भी स्थलाकृति जो इन जिलों और क्षेत्रों से बाहर है, वह अरावली का भाग नहीं मानी जाएगी।
कुम्भलगढ़ तथा गोगुन्दा के मध्य की उच्च भूमि कहलाती है-
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 कुम्भलगढ़ और गोगुन्दा के मध्य स्थित उच्च भूमि को भोराट पठार कहा जाता है।
👉 यह क्षेत्र दक्षिणी अरावली का भाग है, जो उदयपुर जिले में स्थित है।
👉 यह पठार पर्वतीय ढाल, हरियाली और ऊँचाई के कारण भौगोलिक दृष्टि से विशिष्ट है।
👉 यहाँ की अन्य प्रमुख पहाड़ियाँ हैं – सायरा, गोगुन्दा, काटड़ा और ऋषभदेव।
राजस्थान का एकमात्र स्थलीय उल्कापिंड प्रहार क्रेटर (एम.आई.सी.) स्थित है
[CET (स्नातक) (चरण -II) 07.01.2023]
👉 राजस्थान का एकमात्र स्थलीय उल्कापिंड प्रहार क्रेटर (M.I.C.) रामगढ़, बारां में स्थित है, जिसे रामगढ़ संरचना, डोम या फ्लैट्स भी कहा जाता है।
👉 यह क्रेटर बारां जिले की मांगरोल तहसील में रामगढ़ गाँव के पास स्थित है, जो विंध्य शृंखला के कोटा पठार में है और इसका व्यास 3.5 किमी (2.2 मील) है।
👉 इसे राष्ट्रीय भूविज्ञान स्मारक के रूप में नामित किया गया है, और यह भारत की पहली अधिसूचित जियो हैरिटेज साइट है।
👉 भारत में अन्य दो प्रमुख क्रेटर: मध्यप्रदेश का डाल्हा (14 किमी) और महाराष्ट्र का लोनार (1.8 किमी) हैं।
निम्नलिखित में से कौन सा पूर्वी मैदानों का भाग नहीं है ?
[संगणक परीक्षा 03.03.2024]
👉 राजस्थान के पूर्वी मैदान अरावली पर्वत के उत्तर-पूर्व एवं दक्षिण-पूर्व भागों में फैले हैं।
👉 इसमें चम्बल बेसिन, बनास बेसिन और मध्य माही (छप्पन) बेसिन शामिल हैं।
👉 इस क्षेत्र में धौलपुर, करौली, टोंक, जयपुर, भीलवाड़ा, अलवर, भरतपुर आदि जिले आते हैं।
👉 यह क्षेत्र नदीय अपवाहित मैदान के रूप में जाना जाता है।
निम्न में से कौनसा समतल उच्च मैदान हैरोन महोदय द्वारा 'तृतीय पेनिप्लेन' के रूप में पहचाना गया ?
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड - III 19.09.2019]
👉 राजस्थान की भू-गर्भिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है, जिसमें आद्य महाकल्प से लेकर नवजीवी महाकल्प तक की शैल संरचनाएँ पाई जाती हैं।
👉 यहाँ अरावली, बुन्देलखण्ड नीस, देहली, विन्ध्य और मलानी शृंखला की चट्टानों का विशेष योगदान है।
👉 ए.एम. हैरोन ने राजस्थान का विधिवत भू-वैज्ञानिक अध्ययन किया, जिसमें उन्होंने प्रमुख शैल समूहों की पहचान की।
👉 इनमें मालानी आग्नेय शैल, देहली-अरावली महासमूह, तथा विन्ध्य समूह की विशेष भूमिका रही है।
कितने सेंटीमीटर की समवर्षा रेखा राजस्थान राज्य की भूमि को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 राजस्थान की भूमि को लगभग दो भागों में बाँटने वाली समवर्षा रेखा है 50 सेंटीमीटर की।
👉 यह रेखा राज्य के पश्चिमी शुष्क और पूर्वी अर्द्ध शुष्क भागों को अलग करती है।
👉 इसके पश्चिम में मरुस्थलीय प्रदेश, और पूर्व में मैदानी व पठारी क्षेत्र स्थित हैं।
👉 यह विभाजन राज्य की वर्षा, कृषि, वनस्पति व जनजीवन को भी प्रभावित करता है।
राजस्थान में मरूस्थलीकरण की सबसे प्रभावी प्रक्रिया कौन सी है ?
[पशुधन सहायक (LSA) 21.10.2018]
👉 राजस्थान में मरूस्थलीकरण की सबसे प्रभावी प्रक्रिया है — वायु अपरदन (Wind Erosion)।
👉 यह प्रक्रिया विशेषकर पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में सक्रिय रहती है।
👉 यहाँ की तीव्र शुष्क हवाएँ, विशेषकर दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ, रेत को उड़ाकर स्थानांतरित करती हैं।
👉 इससे रेतीले टीलों का निर्माण होता है और भूमि की उपजाऊ परत हट जाती है।
राजस्थान में थार मरुस्थल से प्रभावित क्षेत्रफल व जनसंख्या का प्रतिशत कितना है ?
[प्रयोगशाला सहायक 03.02.2019]
👉 राजस्थान में थार मरुस्थल से प्रभावित क्षेत्रफल व जनसंख्या का क्षेत्रफल 61%, जनसंख्या 40% प्रतिशत है ?
राजस्थान का दक्षिणी-पूर्वी पठार जाना जाता है ?
[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 राजस्थान का दक्षिणी-पूर्वी पठारी भाग को हाड़ौती का पठार कहा जाता है।
👉 यह क्षेत्र झालावाड़, कोटा, बारां और बूंदी जिलों में फैला है और मालवा के पठार का उत्तरी भाग है।
👉 यहाँ की औसत ऊँचाई लगभग 500 मीटर है और इसमें अर्द्ध चन्द्राकार पर्वत श्रेणियाँ तथा नदी निर्मित मैदान पाए जाते हैं।
👉 इस क्षेत्र में चम्बल, कालीसिंध, पार्वती आदि नदियाँ प्रमुख हैं।
गोडवार बेसिन राजस्थान के किस बृहत भू-आकृतिक विभाग का हिस्सा है ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]
👉 गोडवार बेसिन, जिसे लूनी-जवाई बेसिन भी कहते हैं, पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश का हिस्सा है।
👉 यह बेसिन मुख्यतः पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर व नागौर के दक्षिणी भागों में फैला है।
👉 यहाँ से बहने वाली प्रमुख नदियाँ हैं — लूनी, जवाई, बांडी, सूकड़ी आदि, जो अंशकालिक होती हैं।
👉 यह क्षेत्र एक जलोढ़ मैदान बनाता है जिसे भौगोलिक रूप से ‘लूनी बेसिन’ कहा जाता है।
राजस्थान की मुकुन्दरा पहाड़ियाँ हिस्सा हैं ?
[संगणक परीक्षा 19.12. 2021]
👉 मुकुन्दरा की पहाड़ियाँ राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश यानी हाड़ौती के पठार का हिस्सा हैं।
👉 यह श्रेणी मुख्यतः कोटा, बूंदी और बारां जिलों में फैली हुई है।
👉 यह लगभग 120 कि.मी. लम्बाई में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में विस्तृत है।
👉 इस क्षेत्र की ऊँचाई औसतन 335 से 503 मीटर के बीच है।
'छप्पन का मैदान' स्थित है -
[CET (10+2 द्वितीय चरण) 04.02.2023]
👉 'छप्पन का मैदान' राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा के बीच स्थित है।
👉 इसका विस्तार बाँसवाड़ा, डूंगरपुर और चित्तौड़गढ़ के दक्षिणी भागों में है।
👉 यह क्षेत्र माही नदी के प्रवाह क्षेत्र में आता है और इसे मध्य माही बेसिन भी कहा जाता है।
👉 इस मैदान का नाम छप्पन ग्राम समूह के आधार पर पड़ा है।
गोडवार प्रदेश राजस्थान के किस बृहत् भू-आकृतिक विभाग का हिस्सा है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रोनिक्स) 23.12.2019]
👉 गोडवार प्रदेश राजस्थान के पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश का हिस्सा है।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर और नागौर के दक्षिणी भागों में फैला है।
👉 इसे भूगोल में लूनी-जवाई बेसिन के नाम से भी जाना जाता है।
👉 यहाँ की प्रमुख नदियाँ हैं — लूनी, जवाई, बांडी, सूकड़ी आदि।
गोडवार प्रदेश किस बेसिन को कहते हैं ?
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 29.06.2022]
👉 गोडवार प्रदेश वह क्षेत्र है जिसे राजस्थान में लूनी-जवाई बेसिन के रूप में जाना जाता है।
👉 यह पाली, जालौर, सिरोही, जोधपुर एवं नागौर के दक्षिणी भागों में फैला हुआ है।
👉 इस क्षेत्र में लूनी नदी तथा उसकी सहायक नदियाँ जैसे जवाई, गुहिया, बांडी आदि प्रवाहित होती हैं।
👉 यह सम्पूर्ण क्षेत्र एक जलोंढ़ मैदानी भू-आकृति के रूप में विकसित हुआ है।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
[वनरक्षक (चतुर्थ चरण) 13.11.2022]
👉 राजस्थान का पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश प्राचीन काल में समुद्री प्रभाव के अधीन रहा, विशेषकर ज्यूरेसिक काल में यहाँ समुद्र था।
👉 अरावली पर्वतमाला विश्व की प्राचीनतम पर्वत श्रेणियों में से एक है, जो उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तक फैली है।
👉 दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग को मालवा का विस्तार बताया गया है, जिसे हाड़ौती का पठार कहते हैं, न कि गोंडवाना भूमि का।
राजस्थान के थार मरुस्थल में दृषद्वती नदी की घाटी में किस प्रकार के बालू के स्तूप चिह्नित होते हैं ? [*]
[लिपिक ग्रेड -II 12.08.2018]
📌 महत्वपूर्ण सूचना: यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा हटाया गया (डिलीट) माना गया है
निम्न में से कौन सा सम्मेलन मरुस्थलीकरण की रोकथाम के लिए कार्य करता है ?
[JEN (यांत्रिक) (डिग्रीधारक) 13.12.2020]
👉 मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया के प्रमुख कारणों में मानवीय गतिविधियाँ विशेषकर अनियंत्रित पशुचारण और वनों की कटाई शामिल हैं।
👉 राजस्थान का पश्चिमी भाग इस प्रक्रिया से सर्वाधिक प्रभावित है, विशेष रूप से जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर क्षेत्र।
👉 इस क्षेत्र में वायु अपरदन की गति अत्यधिक होती है।
निम्नलिखित में से राजस्थान का कौन सा भौगोलिक क्षेत्र अपनी सीमा को मध्य प्रदेश से साझा करता है ?
[स्टेनोग्राफर परीक्षा 05.10.2024]
👉 राजस्थान का दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश (हाड़ौती) अपनी सीमा मध्य प्रदेश से साझा करता है।
👉 इस क्षेत्र में झालावाड़, बारां, कोटा और बूंदी जिले शामिल हैं, जो मध्य प्रदेश की सीमा से लगे हैं।
👉 यहाँ की प्रमुख नदियाँ जैसे कालीसिंध, पार्वती, चम्बल आदि भी मध्य प्रदेश से निकलकर इस क्षेत्र में बहती हैं।
👉 इस प्रदेश में स्थित शाहबाद का उच्च क्षेत्र विशेष रूप से मध्य प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है।
राजस्थान का निम्न में से कौनसा जिला है, जिसमें अरावली पहाड़ियों का विस्तार नहीं है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (रेफ्रीजरेशन) 24.12.2019]
👉 राजस्थान में अरावली पहाड़ियों का विस्तार कई जिलों में है, जिनमें प्रमुख हैं —
👉 सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, जयपुर, अलवर और दौसा।
👉 ये जिले अरावली पर्वतीय प्रदेश के अंतर्गत आते हैं, जहाँ अनेक शिखर, दर्रे, पठार और घाटियाँ पाई जाती हैं।
👉 गुरु शिखर (सिरोही) और जरगा शिखर (उदयपुर-राजसमंद) जैसे स्थल इसी क्षेत्र में स्थित हैं।
'बरकान' स्थलाकृति निम्न में से किस भौतिक विभाग से संबद्ध है
[JEN (यांत्रिक) (डिग्रीधारक) 13.12.2020]
👉 ‘बरखान’ (अथवा अर्द्ध चन्द्राकार बालुका स्तूप) एक विशिष्ट मरुस्थलीय स्थलाकृति है।
👉 यह मुख्यतः पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में पाई जाती है, जहाँ इसकी ऊँचाई 10 से 20 मीटर और चौड़ाई 10 से 200 मीटर तक होती है।
👉 यह स्तूप दक्षिण-पश्चिमी हवाओं के प्रभाव से बनते हैं और स्थाई या स्थानांतरित रूप में विद्यमान रहते हैं।
👉 जैसलमेर, चूरू, सीकर, बाड़मेर, जोधपुर आदि क्षेत्रों में इनका विस्तार है।
चम्बल बेसिन की खण्ड भूमि को कहा जाता है-
[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]
👉 चम्बल बेसिन की खण्डित भूमि को भूगोल में अवनलिकाएँ (Gullies) कहा जाता है।
👉 यह स्थलाकृति तेज़ जल कटाव के कारण बनती है, जिसे उत्खात स्थलाकृति (Badland Topography) भी कहा जाता है।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः कोटा, करौली, सवाई माधोपुर और धौलपुर जिलों में फैला है।
👉 अवनलिकाएँ चम्बल घाटी की एक विशिष्ट भौगोलिक विशेषता हैं।
राजस्थान के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग कितना प्रतिशत, पश्चिमी मरुस्थल प्रदेश के तहत आता है ?
[JEN (यांत्रिक) (डिप्लोमाधारक) 13.12.2020]
👉 राजस्थान का पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश राज्य के कुल भू-भाग का एक विशाल हिस्सा घेरता है।
👉 इसका क्षेत्रफल लगभग 1,75,000 वर्ग किमी है, जो राजस्थान के कुल भू-भाग का लगभग 61% है।
👉 इस क्षेत्र में बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, चूरू, गंगानगर आदि जिले सम्मिलित हैं।
👉 यहाँ की जलवायु शुष्क एवं मरुस्थलीय है, और भू-आकृति में रेतीले स्तूपों का वर्चस्व है।
घग्घर का मैदान स्थित है ?
[पटवार (चतुर्थ चरण) 24.10.2021]
👉 घग्घर का मैदान राजस्थान के गंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में स्थित है।
👉 यह मैदान घग्घर नदी की बाढ़ से निर्मित एक समतल मैदानी क्षेत्र है।
👉 इसे स्थानीय भाषा में ‘नाली’ कहा जाता है, जिसका विस्तार पाकिस्तान तक है।
👉 यह क्षेत्र अब इंदिरा गांधी नहर से सिंचित होकर प्रमुख उत्पादक क्षेत्र बन चुका है।
राजस्थान राज्य का जल - विभाजक कौन सा है ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 26.03.2019]
👉 राजस्थान राज्य का प्रमुख जल-विभाजक है — अरावली पर्वतमाला।
👉 यह पर्वत श्रृंखला उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैली है।
👉 इसके पूर्वी भाग में चम्बल, बनास, माही आदि नदियाँ बहती हैं, जबकि पश्चिमी भाग में लूनी जैसी नदियाँ प्रवाहित होती हैं।
👉 अरावली पर्वत राज्य की प्राकृतिक एवं भौगोलिक रेखा भी है।
निम्नलिखित में से कौनसा मरुस्थलीकरण का कारण नहीं है ?
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (जैविक) 15.09.2019]
👉 राजस्थान में मरुस्थलीकरण के प्रमुख कारण हैं — वनों की अत्यधिक कटाई, अनियंत्रित पशुचारण, तथा मानवजनित गतिविधियाँ।
👉 अतिवृष्टि मरुस्थलीकरण का कारण नहीं मानी जाती, बल्कि यह आर्द्रता को बढ़ाने वाली प्रक्रिया है।
👉 मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया विशेषकर पश्चिमी राजस्थान में देखी जाती है, जहाँ वनों की कमी और शुष्क हवाएँ सक्रिय रहती हैं।
👉 अतः अतिवृष्टि मरुस्थलीकरण का कारण नहीं है।
राजस्थान में मरुस्थल का विस्तार _____ दिशा में हो रहा है ।
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (भौतिक) 21.09.2019]
👉 राजस्थान में मरुस्थल का विस्तार मुख्यतः पश्चिम से पूर्व दिशा में हो रहा है।
👉 पहले यह क्षेत्र ज्यूरेसिक, क्रिटेशियस और इयोसीन काल में समुद्र के नीचे था।
👉 कालांतर में समुद्र पीछे हटने लगा और प्लीस्टोसीन काल में मानव गतिविधियों से शुष्क दशाओं का प्रसार हुआ।
👉 इस प्रक्रिया से यह क्षेत्र क्रमशः मरुस्थलीय रूप में परिवर्तित हो गया।
निम्नलिखित में से कौन सा (स्थलाकृति - अवस्थिति) सही सुमेलित नहीं है?
[VDO Pre. (प्रथम चरण) 27.12.2021]
👉 भाकर स्थलाकृति का उल्लेख जालोर पर्वत क्षेत्र में हुआ है, जो पूर्वी सिरोही के समीप स्थित है।
👉 गिरवा वह पर्वतीय क्षेत्र है जो उदयपुर बेसिन को चारों ओर से घेरता है।
👉 भोराट पठार की अवस्थिति कुम्भलगढ़ और गोगुन्दा के बीच है, जो मेवाड़ का प्रमुख पर्वतीय पठार है।
👉 ये सभी स्थलाकृतियाँ दक्षिणी अरावली क्षेत्र में सम्मिलित हैं।
छप्पन के मैदान अवस्थित हैं
[हाउस कीपर परीक्षा 09.07.2022]
👉 छप्पन के मैदान को मध्य माही बेसिन भी कहा जाता है, जो पूर्वी मैदानी प्रदेश का हिस्सा है।
👉 इसका विस्तार उदयपुर के दक्षिण-पूर्व, बाँसवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों के दक्षिणी भाग तक है।
👉 यह क्षेत्र माही नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा सिंचित है और इसे वागड़ क्षेत्र भी कहा जाता है।
👉 यहाँ की स्थलाकृति अत्यधिक असमतल और कटी-फटी है।
थार मरुस्थल में 'ढ़ांड' के नाम से कौन - सा जाना जाता है ?
[CET (10+2 द्वितीय चरण) 04.02.2023]
👉 थार मरुस्थल में 'ढ़ांड' शब्द का प्रयोग चन्द्राकार (बरखान) बालुका स्तूपों के मध्य स्थित गर्त के लिए किया जाता है।
👉 यह अवनयनात्मक स्थलरूप होता है जो रेत के स्तूपों के बीच में निम्न स्थान के रूप में दिखता है।
👉 बरखान बालुका स्तूप मुख्यतः जैसलमेर, चूरू, बीकानेर आदि क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
👉 ये स्थलाकृतियाँ मरुस्थली क्षेत्र की विशिष्ट पहचान हैं।
राजस्थान के निम्नलिखित क्षेत्रों में से किसे प्राचीन काल में 'यौद्धेय प्रदेश' कहा जाता था ?
[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]
👉 राजस्थान के भौगोलिक प्रदेशों, जैसे घग्घर का मैदान, शेखावाटी क्षेत्र और पूर्वी मैदानी भाग का विस्तार किया गया है।
👉 घग्घर का मैदान जो अब गंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में स्थित है, प्राचीन काल में सरस्वती नदी की घाटी रहा है और ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण रहा है।
राजस्थान के किस भाग में 'हाड़ौती पठार' स्थित है ?
[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 28.06.2022]
👉 हाड़ौती पठार राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है, जिसे दक्षिणी-पूर्वी पठारी प्रदेश कहा जाता है।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ जिलों में फैला है।
राजस्थान के निम्न जिलों में से कौन से एक जिले में अरावली पहाड़ी का विस्तार नहीं है ?
[प्रयोगशाला सहायक 03.02.2019]
👉 राजस्थान में अरावली पर्वत श्रृंखला का विस्तार मुख्यतः सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, अजमेर, जयपुर, अलवर और दौसा जिलों में है।
👉 इनके अतिरिक्त सीकर और टोंक जिलों के कुछ भागों में भी यह फैली हुई है।
👉 अतः कोई ऐसा जिला जो इन जिलों में शामिल नहीं है — जैसे जैसलमेर, बाड़मेर या गंगानगर — वहाँ अरावली पर्वत का विस्तार नहीं है।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में आता है।
पश्चिमी रेतीले मैदान की पूर्वी सीमा निर्धारित होती है -
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिप्लोमा) 20.05.2022
👉 राजस्थान के पश्चिमी रेतीले मैदान की पूर्वी सीमा अरावली पर्वतमाला द्वारा निर्धारित होती है।
👉 यह पर्वतमाला उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में फैली है और राज्य को दो भागों में बाँटती है।
👉 पर्वत श्रृंखलाओं के पश्चिम में मरुस्थलीय प्रदेश और पूर्व में मैदानी क्षेत्र स्थित हैं।
👉 अरावली श्रेणी राज्य का एक प्रमुख जल विभाजक भी है।
राजस्थान में "ऊपरमाल" के नाम से कौन सा क्षेत्र जाना जाता है [*]
[JEN (विधुत) (डिग्रीधारक) 29.11.2020]
👉 राजस्थान में "ऊपरमाल" के नाम से जाना जाने वाला क्षेत्र हाड़ौती का पठार का भाग है।
👉 यह प्रदेश झालावाड़, कोटा, बारां और बूंदी जिलों में विस्तृत है और मालवा के पठार का उत्तरी विस्तार है।
👉 यहाँ की औसत ऊँचाई लगभग 500 मीटर है और अनेक अर्द्ध चन्द्राकार पर्वत श्रेणियाँ फैली हुई हैं।
👉 यह क्षेत्र दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश के अंतर्गत आता है।
📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीटेड' या अमान्य घोषित किया गया है।
राजस्थान में उत्खात भूमि स्थलाकृति दिखाई देती है ?
[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 18.09.2021]
👉 राजस्थान में उत्खात भूमि स्थलाकृति (Badland Topography) मुख्यतः चम्बल बेसिन में देखी जाती है।
👉 यह क्षेत्र कोटा, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर जिलों में फैला है।
👉 यहाँ घाटियाँ, बीहड़ और नवीन कांपीय जमाव विशेष रूप से दृष्टिगत होते हैं।
👉 यह क्षेत्र पूर्वी मैदानी प्रदेश का भाग है।
राजस्थान राज्य का कितना भाग मरुस्थलीय क्षेत्र है ?
[CET (10+2 तृतीय चरण) 05.02.2023]
👉 राजस्थान राज्य का लगभग 1,75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र मरुस्थलीय प्रदेश के अंतर्गत आता है।
👉 यह क्षेत्र राज्य का एक विशाल भू-भाग है, जिसे थार मरुस्थल भी कहा जाता है।
👉 इसमें बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, नागौर, सीकर आदि जिले सम्मिलित हैं।
👉 यह प्रदेश भारत का एक विशिष्ट पारिस्थितिकीय व भू-आकृतिक क्षेत्र माना जाता है।
पश्चिमी राजस्थान में रेत की टीलों से कितना क्षेत्र मुक्त है?
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 पश्चिमी राजस्थान का अधिकांश भाग रेत के टीलों से ढका हुआ है, लेकिन एक क्षेत्र टीलों से मुक्त - 41.5% भी है।
👉 यह क्षेत्र जैसलमेर जिले में स्थित है, जहाँ बालुका स्तूपों का पूर्ण अभाव है।
👉 यहाँ की सतह अवसादी शैलों से ढकी हुई है और यह क्षेत्र आंकल वुड फॉसिल पार्क के लिए प्रसिद्ध है।
👉 यह राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र का एक विशिष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
बैराठ में कौन-सा जिला सम्मिलित नहीं हैं ?
[आर्थिक अन्वेषक परीक्षा 25.03.2019]
👉 बैराठ राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है, जो उत्तरी अरावली क्षेत्र का भाग है।
👉 यह क्षेत्र अरावली की पर्वतमालाओं से घिरा हुआ है और यहाँ बैराठ शिखर (704 मीटर) स्थित है।
निम्नलिखित में से किस वर्ष, मरु विकास कार्यक्रम शुरु किया गया ?
[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]
👉 राजस्थान का पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश लगभग 1,75,000 वर्ग किमी में फैला है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 61% है।
👉 इस क्षेत्र में मुख्यतः बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, चूरू आदि जिले आते हैं।
👉 यहाँ की जलवायु अत्यधिक शुष्क, वर्षा अत्यल्प तथा वायु अपरदन की तीव्रता अधिक होती है।
👉 इस क्षेत्र में मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया विशेष रूप से सक्रिय रही है।
निम्न में से कौन सा राजस्थान में मरुस्थलीकरण का कारण नहीं है ?
[JEN (विधुत) (डिप्लोमाघारक) 29.11.2020]
👉 राजस्थान में मरुस्थलीकरण के प्रमुख कारणों में अनियंत्रित पशुचारण, वनों की कटाई और मानवीय कृत्य शामिल हैं।
👉 जबकि जैविक कृषि एक संवहनीय और पर्यावरण हितैषी विधि है, जो भूमि की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होती है।
👉 इसलिए जैविक कृषि को मरुस्थलीकरण का कारण नहीं माना जाता।
👉 मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया विशेषतः पश्चिमी राजस्थान में स्पष्ट रूप से देखी जाती है।
राजस्थान के जिलों में से कितने जिले मरुस्थलीय हैं ?
[CET (10+2 द्वितीय चरण) 04.02.2023]
👉 राजस्थान के कुल 12 जिले मरुस्थलीय क्षेत्र में आते हैं।
👉 इनमें शामिल हैं – बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, पाली, जालौर, नागौर, सीकर, चूरू, झुंझुनूं, हनुमानगढ़ व गंगानगर।
👉 इन जिलों में बालूका स्तूप, चट्टानी भाग और शुष्क जलवायु प्रमुख विशेषताएँ हैं।
👉 इस क्षेत्र को थार मरुस्थल के रूप में जाना जाता है, जो भारत का सबसे बड़ा मरुस्थल है।
निम्नांकित में से कौनसा बालुका स्तूप मन्द पवनामुखी ढ़ाल व तीव्र पवनाविमुखी ढ़ाल वाला होता है ?
[लिपिक ग्रेड-II 09.09.2018]
👉 बरखान बालुका स्तूप जिसे अर्द्ध चन्द्राकार बालुका स्तूप भी कहते हैं, में विशेष ढाल संरचना होती है।
👉 इसमें पवनामुखी ढाल मन्द होती है जबकि पवनाविमुखी ढाल तीव्र होती है।
👉 इनकी ऊँचाई लगभग 10 से 20 मीटर तथा चौड़ाई 10 से 200 मीटर तक होती है।
👉 ये स्तूप जैसलमेर, बाड़मेर, चूरू, सीकर आदि क्षेत्रों में पाए जाते हैं।
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए
सूची - I सूची - II
(1) उत्तर-पूर्वी अरावली क्षेत्र (a) उदयपुर
(2) अरावली का मध्यवर्ती भाग (b) जयपुर
(3) भोराट क्षेत्र (c) अलवर
(4) दक्षिणी अरावली (d) सिरोही
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (प्रलेख) 22 .09.2019]
Codes / कूट :
(1) (2) (3) (4)
👉 उत्तर-पूर्वी अरावली क्षेत्र — मुख्यतः अलवर, जयपुर, दौसा जिलों में फैला है।
👉 अरावली का मध्यवर्ती भाग — अजमेर क्षेत्र में स्थित है, जहाँ तारागढ़, नागपहाड़ आदि हैं।
👉 भोराट क्षेत्र — कुम्भलगढ़ और गोगुन्दा के बीच स्थित है, जो उदयपुर के समीप है।
👉 दक्षिणी अरावली — इसका विस्तार सिरोही, उदयपुर, राजसमंद जिलों में है।
'मेरवाड़ा पहाडियाँ' निम्नांकित भौतिक उप-इकाईयों में से किसका उपविभाजन है ?
[PTI ग्रेड -III 30.09.2018]
👉 मेरवाड़ा पहाड़ियाँ राजस्थान की मध्य अरावली श्रेणी की एक भौतिक उप-इकाई हैं।
👉 यह क्षेत्र मुख्यतः अजमेर जिले में फैला है, जहाँ नाग पहाड़, तारागढ़ जैसी प्रमुख पहाड़ियाँ स्थित हैं।
👉 मध्य अरावली क्षेत्र में पर्वत श्रेणियाँ, संकीर्ण घाटियाँ और असमतल स्थल पाए जाते हैं।
👉 इस श्रेणी की औसत ऊँचाई लगभग 700 मीटर होती है।
'संत भूरी बाई अलख' का कार्यक्षेत्र था -
[पटवार (द्वितीय चरण) 23.10.2021]
👉 भोराट पठार मेवाड़ के पर्वतीय क्षेत्र का एक महत्त्वपूर्ण भू-आकृतिक स्वरूप है।
👉 यह कुम्भलगढ़ और गोगुन्दा के बीच स्थित है और इसकी ऊँचाई 820 मीटर से अधिक है।
👉 इस क्षेत्र में सायरा, गोगुन्दा, काटड़ा, ऋषभदेव जैसी पहाड़ियाँ पाई जाती हैं।
👉 यह सम्पूर्ण क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है और दक्षिणी अरावली का भाग है।
कौनसा सही सुमेलित नहीं है?
[VDO मुख्य परीक्षा 09.07.2022]
👉 वागड़ क्षेत्र राजस्थान के डूंगरपुर और बाँसवाड़ा जिलों में फैला है, जहाँ की स्थलाकृति अत्यधिक कटी-फटी है।
👉 हाड़ौती क्षेत्र में मुख्यतः कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां जिले आते हैं, जो दक्षिण-पूर्वी पठारी प्रदेश में स्थित हैं।
👉 आपकी जानकारी में मेवात क्षेत्र का नाम नहीं है, परंतु अलवर और भरतपुर पूर्वी राजस्थान के मैदानी क्षेत्रों में आते हैं।
निम्न में से कौन सा राजस्थान के बांगर प्रदेश का भाग नहीं है ?
[वनपाल परीक्षा 06.11.2022]
👉 राजस्थान में बांगर प्रदेश शब्द का उपयोग शेखावाटी क्षेत्र के लिए किया गया है।
👉 इसमें झुंझुनूं, सीकर, चूरू और नागौर का उत्तरी भाग शामिल होता है।
👉 यह क्षेत्र रेतीले मैदान, अर्द्ध वृत्ताकार बालुका स्तूप, एवं लवणीय गर्तों से युक्त है।
👉 यहाँ कोई प्रमुख नदी नहीं है, केवल अंतः प्रवाही धाराएँ बहती हैं।
निम्नलिखित में से कौन राजस्थान में मरुस्थलीकरण का कारण नहीं है ?
पशुधन सहायक (LSA) 04.06.2022
👉 राजस्थान में मरुस्थलीकरण के प्रमुख कारणों में अनियंत्रित पशुचारण, मानवीय कृत्य, तथा वनों की कटाई शामिल हैं।
👉 मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया को जैविक खेती नहीं बढ़ाती, क्योंकि यह एक प्राकृतिक संरक्षण आधारित पद्धति है।
👉 जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर आदि क्षेत्रों में मरुस्थलीकरण के प्रमाण भू-गर्भिक कालों से मिलते हैं।
👉 यह प्रक्रिया मानव एवं प्राकृतिक क्रियाओं के संयुक्त प्रभाव से विकसित हुई है।
कौन - सा भौतिक प्रदेश राजस्थान की जीवनरेखा कहा जाता है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (वायरमैन) 24.12.2019]
महान सीमा भ्रंश राजस्थान के किस भाग में अवस्थित है?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिग्री) 20.05.2022
👉 महान सीमा भ्रंश (The Great Boundary Fault) राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग से होकर गुजरता है।
👉 यह भ्रंश चित्तौड़गढ़ के बेगूँ से लेकर उत्तरी कोटा, सवाई माधोपुर और धौलपुर जिलों में स्पष्ट रूप से दृष्टिगत होता है।
👉 यह राज्य की भूगर्भिक संरचना की एक प्रमुख विशेषता है।
👉 इसके प्रभाव से क्षेत्र में भू-आकृतिक विविधता उत्पन्न हुई है।
निम्नलिखित को सुमेलित कीजिये
सूची-I सूची -II
(a) बरखान (i) आबू पर्वत खंड
(b) लाठी श्रृंखला (ii) बालू का स्तूप
(c) इंसेलबर्ग (iii) शुष्क झील
(d) प्लाया (iv) भूगर्भिक जलपट्टी
[VDO मुख्य परीक्षा 09.07.2022]
सही कूट है -
👉 बरखान एक अर्द्धचन्द्राकार बालू का स्तूप होता है, जो पश्चिमी राजस्थान में पाया जाता है।
👉 इंसेलबर्ग जैसे पृथक ऊँचे चट्टानी क्षेत्र आबू पर्वत खंड जैसे भू-आकृति से मेल खाते हैं।
👉 प्लाया वे शुष्क झीलें हैं जो बीकानेर, जैसलमेर आदि क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
चन्द्राकार बालुका स्तूपों को कहा जाता है ?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिप्लोमा) 20.05.2022
👉 चन्द्राकार बालुका स्तूपों को राजस्थान में बरखान कहा जाता है।
👉 ये स्तूप 10 से 20 मीटर ऊँचाई एवं 10 से 200 मीटर चौड़ाई तक विस्तृत होते हैं।
👉 बरखान स्तूपों का विस्तार चूरू, जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, ओसियां आदि क्षेत्रों में है।
👉 इनका निर्माण वायु की दिशा के अनुसार रेत के जमाव से होता है।
शिवालिक के पर्वत पदों में कौनसी स्थलाकृति पायी जाती है ?
[VDO मुख्य परीक्षा 09.07.2022]
👉 राजस्थान के पूर्वी मैदानी प्रदेश में स्थित बनास, चम्बल एवं माही बेसिन क्षेत्रों में समतल मैदान पाए जाते हैं।
👉 इन क्षेत्रों की मृदा मुख्यतः जलोढ़ है, जो कृषि के लिए उपजाऊ मानी जाती है।
👉 यहाँ की भूमि कहीं-कहीं कटी-फटी, कहीं समतल है, जिससे विभिन्न भौतिक स्वरूप बनते हैं।
👉 इन मैदानों का विस्तार टोंक, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर, कोटा आदि जिलों में है।
राजस्थान के निम्नांकित में से कौन-सा एक भौतिक विभाजन सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला है ?
[पशुधन सहायक (LSA) 21.10.2018]
👉 राजस्थान का सर्वाधिक क्षेत्रफल वाला भौतिक विभाजन है — उत्तर-पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश।
👉 इसका विस्तार लगभग 1,75,000 वर्ग किमी क्षेत्र में है, जो राज्य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 61% है।
👉 इसमें बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, चूरू आदि जिले आते हैं।
👉 यह क्षेत्र थार मरुस्थल का भाग है और इसकी भूमि रेतीली व शुष्क है।
समवर्षा रेखा जो राजस्थान को लगभग दो समान भागों में विभाजित करती है, वह है
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -A) 11.12.2022]
👉 राजस्थान में 50 से.मी. समवर्षा रेखा एक प्रमुख जलवायु विभाजक रेखा है।
👉 यह रेखा राज्य को दो भौगोलिक भागों — शुष्क पश्चिमी भाग और आर्द्र पूर्वी भाग में विभाजित करती है।
👉 यह रेखा पूर्वी मैदान और पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश के बीच की भौगोलिक सीमा मानी जाती है।
👉 यह प्रदेश के आर्थिक विकास एवं नियोजन में भी एक महत्वपूर्ण आधार बनती है।
थार मरुस्थल में रात्रि का तापमान गर्मियों में अचानक गिर जाता है क्योंकि -
[कनिप्ठ अनुदेशक (मैकेनिक) 23.12.2019]
👉 थार मरुस्थल में गर्मियों के मौसम में रात्रि का तापमान अचानक गिर जाता है क्योंकि वहाँ की भूमि रेतीली होती है।
👉 यह रेत दिन में जल्दी गर्म होती है और रात्रि में जल्दी शीतल हो जाती है।
👉 यह क्षेत्र अत्यधिक शुष्क जलवायु वाला है, जहाँ आद्र्रता बहुत कम होती है।
👉 इन कारणों से दैनिक तापांतर अत्यधिक होता है।
उदयपुर राज्य का पुरातन नाम था -
[कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रिशियन) 24.03.2019]
👉 उदयपुर राज्य के प्राचीन नाम शिवी है।
👉 वैकल्पिक जानकारी:
👉 उदयपुर क्षेत्र को दक्षिणी अरावली का हिस्सा है, जहाँ जरगा शिखर, सज्जनगढ़, जयसमंद झील आदि स्थित हैं।
👉 यह क्षेत्र घाटियों, पहाड़ियों और झीलों से परिपूर्ण है और मेवाड़ का प्रमुख भू-भाग है।
कौन-सी समवर्षण रेखा राजस्थान को दो भागों में विभाजित करती है
[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (भौतिक) 21.09.2019]
👉 राजस्थान को दो भागों में विभाजित करने वाली समवर्षण रेखा है — 50 से.मी. समवर्षा रेखा।
👉 यह रेखा राज्य को पश्चिमी शुष्क भाग और पूर्वी आर्द्र भाग में विभाजित करती है।
👉 इसके पश्चिम में मरुस्थलीय प्रदेश आता है, जबकि पूर्व में मैदानी और पठारी क्षेत्र स्थित हैं।
👉 यह रेखा राज्य की जलवायु विविधता का संकेतक भी मानी जाती है।
राजस्थान में 'मरुस्थल का प्रयाण' प्रक्रिया का संबंध है-
[JEN (यांत्रिक) (डिग्रीधारक) 13.12.2020]
👉 राजस्थान में 'मरुस्थल का प्रयाण' प्रक्रिया का संबंध मरुस्थल के विस्तार से है।
👉 यह विस्तार मानवीय गतिविधियों, विशेषकर अनियंत्रित पशुचारण एवं वन कटाव के कारण हुआ है।
👉 इस प्रक्रिया के फलस्वरूप शुष्क दशाओं का विस्तार हुआ और क्षेत्र कालांतर में मरुस्थल में परिवर्तित हो गया।
👉 इसका प्रभाव विशेषतः पश्चिमी राजस्थान में देखा गया है।
राजस्थान का कौनसा भौतिक विभाग थार मरुस्थल का भाग है ?
[लवण निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]
👉 राजस्थान का पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश ही थार मरुस्थल का प्रमुख भाग है।
👉 इसका विस्तार लगभग 1,75,000 वर्ग किमी क्षेत्र में है, जो राज्य का लगभग 61% भाग है।
👉 इसमें जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, नागौर आदि जिले सम्मिलित हैं।
👉 इस क्षेत्र की भूमि रेतीली, शुष्क एवं वायु अपरदन प्रधान है।
अरावली किस प्लेट से अलग हुई?
[JEN (कृषि) 10.09.2022]
👉 आपकी दी गई 17 पेज की जानकारी में अरावली किस प्लेट से अलग हुई — यह विवरण कहीं भी उपलब्ध नहीं है।
👉 हालांकि, अरावली को एक प्राचीन पर्वत श्रृंखला के रूप में दर्शाया गया है, जो प्री-कैम्ब्रियन युग की शैलों से बनी है।
👉 इसमें मुख्यतः बुन्देलखण्ड नीस, अरावली महासमूह, और देहली महासमूह की संरचनाएँ शामिल हैं।
👉 यह श्रृंखला उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम तक फैली हुई है और राज्य को दो भागों में विभाजित करती है।
निम्नलिखित में से कौन सा (भू-आकृति जिला/जिले) सुमेलित नहीं है?
[वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक 19.06.2022]
👉 गिरवा एक भू-आकृति है जो उदयपुर बेसिन के चारों ओर की पहाड़ियों के लिए प्रयुक्त होती है।
👉 बाप बोल्डर बैड एक विशेष भू-आकृति है जो जोधपुर जिले के बाप गाँव के पास स्थित है और हिम-वाहित गोलाश्मों के लिए प्रसिद्ध है।
👉 बृहद सीमा भ्रंश (Great Boundary Fault) राज्य के बूंदी और सवाई माधोपुर जिलों से होकर गुजरता है।
निम्नलिखित में से कौन से बालुका स्तूप प्रचलित पवन की दिशा के सामान्तर विकसित होते हैं?
[CET (स्नातक) (चरण -II) 07.01.2023]
👉 थार मरुस्थल में सीफ (Seif) बालुका स्तूप वे होते हैं जो प्रचलित पवन की दिशा के समानान्तर विकसित होते हैं।
👉 इन्हें रेखीय या पवनानुवर्ती बालुका स्तूप भी कहा जाता है।
👉 इनका निर्माण लंबे समय तक एक ही दिशा में चलने वाली हवाओं के कारण होता है।
👉 ये विशेष रूप से जैसलमेर के दक्षिण-पश्चिम भाग में पाए जाते हैं।
राजस्थान के कितने जिलों को 'मरु जिला' बोला जाता है ?
[कनिप्ठ अनुदेशक (रेफ्रीजरेशन) 24.12.2019]
👉 राजस्थान के कुल 12 जिलों को 'मरु जिला' कहा जाता है, जो पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में आते हैं।
👉 इनमें बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, गंगानगर, हनुमानगढ़, जालौर और पाली शामिल हैं।
👉 यह क्षेत्र लगभग 1,75,000 वर्ग किमी में फैला है और राज्य के भू-भाग का 61% भाग घेरता है।
👉 यहाँ की भूमि रेतीली, शुष्क और वायु अपरदन प्रधान है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सही उत्तर का चयन नीचे दिये कूट से कीजिए
(1) लूनी बेसिन गोड़वार प्रदेश के नाम से भी जाना जाता है ।
(2) 'गिरवा'उदयपुर बेसिन की विशिष्ट आकृति है, जो मेवाड प्रदेश में है
(3) घग्गर का मैदान चूरू जिले में स्थित है ।
[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]
कूट
👉 लूनी बेसिन को भौगोलिक रूप से गोड़वार प्रदेश कहा जाता है, जो पाली, जालौर, नागौर आदि में फैला है।
👉 गिरवा उदयपुर बेसिन को घेरे हुए पहाड़ी स्कन्धों को कहा जाता है — यह मेवाड़ क्षेत्र की विशेष पहचान है।
👉 जबकि घग्घर का मैदान वास्तव में गंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में स्थित है, चूरू में नहीं।