निम्नांकित में से कौनसी मिट्टी राजस्थान के सर्वाधिक क्षेत्रफल पर विस्तृत है ? 

[JEN (Civil Degree) 21.08.2016]

  • एरिडीसोल्स एवं एण्टिसोल्स

  • एरिडीसोल्स एवं वर्टीसोल्स 

  • इन्सेप्टीसोल्स

  • वर्टीसोल्स एवं अल्फीसोल्स

🔹 व्याख्या:

👉 एरिडीसोल्स एवं एण्टिसोल्स मृदाएँ राजस्थान के पश्चिमी भाग में विस्तारित हैं।
👉 इन मृदाओं का विकास शुष्क जलवायु की स्थिति में हुआ है।
👉 यही मृदाएँ राजस्थान के सर्वाधिक क्षेत्रफल पर पाई जाती हैं। 

राजस्थान में किस जिले में कैल्सी ओरथिड पायी जाती है ? 

[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 26.03.2019]

  • जयपुर 

  • सीकर 

  • सिरोही 

  • उदयपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 कैल्सी ऑरथिड्स, एरिडी सोइल्स के अंतर्गत आते हैं।
👉 यह मृदा पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है।
👉 इसमें जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर जैसे जिले सम्मिलित हैं। 

एरिडीसोल्स मिट्टी राजस्थान के किस जलवायु प्रदेश में सर्वाधिक विस्तृत हैं ? [*]

[पशुधन सहायक (LSA) 21.08.2016]

  • आर्द्र 

  • उप-आर्द्र

  • अर्द्ध-शुष्क

  • शुष्क

🔹 व्याख्या:

👉 एरिडीसोल्स मृदा राजस्थान के शुष्क जलवायु प्रदेश में पाई जाती है।
👉 इसका विस्तार विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान में है।
👉 यह मृदा शुष्कता की स्थिति में विकसित होती है।

📌 इस प्रश्न को बोर्ड ने डिलीट माना गया है। 

राजस्थान में जलोढ़ मिट्टी मुख्यतः किन जिलों में मिलती है

[JEN (Civil डिग्री) 16.10.2016]

  • भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा

  • कोटा, बारां, झालावाड़ 

  • भरतपुर, सवाई माधोपुर, धौलपुर 

  • सिरोही, उदयपुर, राजसमन्द

🔹 व्याख्या:

👉 जलोढ़ अथवा कच्छारी मृदा पूर्वी राजस्थान के नदियों के मैदान एवं घाटियों में मिलती है।
👉 इसका विस्तार भरतपुर, सवाई माधोपुर एवं धौलपुर जिलों में है।
👉 यह मृदा उत्पादकता की दृष्टि से उत्तम होती है। 

राजस्थान के किस भाग में 'एण्टीसोल्स' मृदा पायी जाती है? 

[CET (स्नातक) (चरण -III) 08.01.2023]

  • दक्षिण पूर्वी 

  • पूर्वी

  • पश्चिमी

  • दक्षिणी

🔹 व्याख्या:

👉 एण्टीसोल्स मृदा राजस्थान के पश्चिमी भाग में पाई जाती है।
👉 इसका रंग सामान्यतः हल्का पीला एवं भूरा होता है।
👉 इसमें टोरी सामेन्ट्स और डस्ट फ्लूबेन्ट्स उपवर्ग शामिल हैं।

लाल दोमट मिट्टी राजस्थान के निम्नांकित में से किन जिलों में पाई जाती है ? 

[JEN (यांत्रिकी डिग्री) 21.08.2016]

  • सिरोही एवं दौसा 

  • उदयपुर एवं कोटा 

  • बाँसवाड़ा एवं डूंगरपुर 

  • अजमेर एवं भीलवाड़ा

🔹 व्याख्या:

👉 लाल-लोमी (दोमट) मृदा राजस्थान के डूंगरपुर जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा उदयपुर के मध्य एवं दक्षिणी भाग में भी मिलती है।
👉 इसमें लौह अंश के कारण इसका रंग लाल होता है। 

वर्टीसोल्स मिट्टी राजस्थान के निम्नलिखित में से किन जिलों में नहीं पाई जाती [*]

[JEN (Civil Diploma) 21.08.2016]

  • बूँदी, बाँसवाड़ा 

  • कोटा, भरतपुर 

  • झालावाड़, बारां 

  • धौलपुर, करौली

अल्फीसोल्स मृदा पायी जाती है - 

[CET (स्नातक) (चरण -II) 07.01.2023]

  • जैसलमेर, बाड़मेर में  

  • सिरोही, पाली में

  • जयपुर, दौसा, अलवर में

  • कोटा, बारां, बूंदी में

🔹 व्याख्या:

👉 अल्फीसोल्स मृदा राजस्थान के जयपुर, दौसा और अलवर जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा राजस्थान के मृदा वैज्ञानिक वर्गीकरण का हिस्सा है।
👉 इसका विस्तार पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी जिलों तक है।
👉 यह मृदा कृषि योग्य उपजाऊ भूमि के रूप में जानी जाती है। 

वह जिला युग्म जहाँ लाल व पीली मृदा पायी जाती है

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (सीरम) 15.09.2019]

  • अलवर        - भरतपुर 

  • बारां            - कोटा 

  • अजमेर       - सिरोही 

  • पाली           - जोधपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल व पीली मृदा राजस्थान के अजमेर और सिरोही जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा लौह अंश की प्रधानता के कारण लाल व पीले रंग की होती है।
👉 इसमें नमी को रोकने की अधिक क्षमता होती है।
👉 यह मृदा जलवायु और स्थानीय दशाओं पर निर्भर करती है। 

वह ज़िला युग्म जहाँ लाल व पीली मृदा पाई जाती है 

[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 25.02.2023]

  • कोटा - बूंदी

  • अजमेर - सिरोही 

  • पाली - जोधपुर 

  • अलवर - भरतपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल व पीली मृदा का विस्तार अजमेर और सिरोही जिलों में होता है।
👉 यह मृदा लौह अंश की प्रधानता के कारण लाल व पीली रंग की होती है।
👉 इसमें नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है।
👉 यह मृदा चीका और दोमट प्रकार की होती है। 

सीरोज़म मृदा जिस जिले में मिलती है, वह है 

[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]

  • झालावाड़ 

  • बारां 

  • जयपुर 

  • बाड़मेर

🔹 व्याख्या:

👉 सीरोज़म मृदा राजस्थान के जयपुर जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा राज्य के मृदा वर्गीकरण में शामिल है।
👉 यह मृदा उपजाऊता के अनुसार विशेष महत्व रखती है।
👉 इसका प्रयोग कृषि विकास में सहायक भूमि के रूप में होता है। 

मरुस्थलीय क्षेत्र में मिट्टी के अपरदन को रोकने के लिये क्या किया जाना चाहिये ?

[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 29.06.2022]

  • चरागाहों को विकसित करना

  • फसलों के हेर-फेर को अपनाना

  • खेतों में मेड़बन्दी करना

  • वृक्षों की पट्टी लगाना

🔹 व्याख्या:

👉 मरुस्थलीय क्षेत्रों में मृदा अपरदन को रोकने के लिए वृक्षों की पट्टी लगाना एक प्रभावी उपाय है।
👉 वृक्षों की जड़ें मिट्टी को बाँधकर उड़ने से रोकती हैं।
👉 यह विधि वायु अपरदन को नियंत्रित करने में सहायक होती है।
👉 इससे मरुस्थल का विस्तार भी धीमा होता है।

निम्नलिखित युग्मों में से कौन सा एक सुमेलित नहीं है

[JEN (सिविल) (डिप्लोमा धारक) 06.12.2020]

मृदा प्रकार        -       क्षेत्र 

  • इन्सेप्टीसोल्स       -       अर्द्ध आर्द्र/उप आर्द्र

  • एरिडीसोल्स         -       अर्द्ध शुष्क आर्द्र 

  • वर्टीसोल्स            -       शुष्क   

  • अल्फीसोल्स        -       आर्द्र 

🔹 व्याख्या:

👉 एरिडीसोल्स मृदा का विकास अर्द्ध शुष्क से आर्द्र जलवायु में होता है।
👉 अल्फीसोल्स मृदा मुख्यतः आर्द्र क्षेत्रों में पाई जाती है।
👉 इन्सेप्टीसोल्स मृदा का विस्तार अर्द्ध आर्द्र या उप आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में होता है।
👉 यह वर्गीकरण वैज्ञानिक मृदा समूहों पर आधारित है। 

लाल व पीली मिट्टी वाला जिलों का युग्म है ?

[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 29.06.2022]

  • श्रीगंगानगर - हनुमानगढ

  • झालावाड़ - बारां 

  • सवाई माधोपुर - राजसमन्द

  • भरतपुर – धौलपुर 

🔹 व्याख्या:

👉  यूएसडीए (USDA) के अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा 1991 में किए गए आधुनिक वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार, राजस्थान की मृदा को प्रमुख रूप से 5 भागों में विभाजित किया गया है :मृदा का प्रकार, मुख्य क्षेत्र ,विशेषता(1.) एंटीसोल्स (Entisols)जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू ,यह सबसे बड़े भू-भाग पर पाई जाने वाली रेतीली मिट्टी है।(2.) एरिडसोल्स (Aridisols)जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, पाली, सीकर, झुंझुनू ,यह शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में मिलने वाली लाल-पीली व खारी मिट्टी है।(3). इनसेप्टिसोल्स (Inceptisols)सिरोही, पाली, राजसमंद, उदयपुर, भीलवाड़ा अरावली पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली अपरिपक्व और पहाड़ी मिट्टी है।(4 )अल्फिसोल्स (Alfisols)जयपुर, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, कोटा ,पूर्वी मैदानी भागों में पाई जाने वाली सर्वाधिक उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी(5.) वर्टिसोल्स (Vertisols)झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी (हाड़ौती क्षेत्र)गहरी मध्यम-काली मिट्टी जो कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त है।

पहाड़ी मृदा राजस्थान में पायी जाती है : 

[JEN (यांत्रिक) (डिग्रीधारक) 13.12.2020]

  • उदयपुर व कोटा में   

  • सिरोही व अजमेर में

  • कोटा व सिरोही में

  • उदयपुर व सिरोही में

🔹 व्याख्या:

👉 पहाड़ी मृदा राजस्थान के उदयपुर और कोटा जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा पर्वतीय क्षेत्रों की ढालों पर विकसित होती है।
👉 यह कृषि के लिए सीमित उपयोगी होती है।
👉 यह मृदा अशोधित व पत्थरीली प्रकृति की होती है। 

मृदा जो पश्चिमी राजस्थान में सर्वाधिक क्षेत्र में मिलती है, वह है ?

[कनिप्ठ अनुदेशक (वायरमैन) 24.12.2019]

  • लाल-पीली

  • रेतीली 

  • काली 

  • जलोढ़ 

🔹 व्याख्या:

👉 रेतीली मृदा सम्पूर्ण पश्चिमी राजस्थान में विस्तृत क्षेत्र में पाई जाती है।
👉 यह मृदा थार के मरुस्थल में स्थित है और वायु प्रवाह द्वारा जमा होती है।
👉 इसमें पीली-भूरी एवं बलुई चीका मृदा भी उपस्थित रहती है। 

राजस्थान के किस प्रदेश में अल्फीसोल्स समूह की मृदा मिलती है

[JEN (विधुत) (डिप्लोमाघारक) 29.11.2020]

  • उदयपुर, सिरोही, पाली

  • जयपुर, अलवर, दौसा

  • जैसलमेर, बाड़मेर, पाली 

  • कोटा, बूंदी, भरतपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 अल्फीसोल्स मृदा राजस्थान के जयपुर, अलवर और दौसा जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा वैज्ञानिक वर्गीकरण के अंतर्गत आती है।
👉 इसका विस्तार पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी जिलों तक होता है।
👉 यह मृदा उपजाऊ एवं कृषि योग्य मानी जाती है। 

कृषि विभाग, राजस्थान के मृदा वर्गीकरण के अनुसार 'जिप्सीफेरस' मृदा ____ में पाई जाती है। 

[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 26.02.2023]

  • कोटा 

  • अजमेर 

  • बीकानेर 

  • जोधपुर

🔹 व्याख्या:

👉 जिप्सीफेरस मृदा राजस्थान के बीकानेर जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा कृषि विभाग द्वारा निर्धारित मृदा वर्गीकरण में शामिल है।
👉 यह मृदा मरुस्थलीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली विशिष्ट मृदा है।
👉 इसका उपयोग मरुस्थली कृषि सुधार में किया जाता है। 

राजस्थान में लाल लोम मृदा पायी जाती है

[प्रयोगशाला सहायक (भूगोल) 30.06.2022]

  • सिरोही में

  • जालौर में

  • उदयपुर में

  • पाली में

🔹 व्याख्या:

👉 लाल लोम मृदा राजस्थान के डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में पाई जाती है।
👉 आपकी जानकारी में उदयपुर जिले का उल्लेख नहीं है।
👉 यह मृदा लाल रंग की दोमट मिट्टी होती है।
👉 इसमें लौह अंश की उपस्थिति मुख्य कारण होता है। 

नये मूल की जलोढ़ मृदा नहीं पायी जाती है 

[JEN (यांत्रिक) (डिप्लोमाधारक) 13.12.2020]

  • भरतपुर में

  • जयपुर में 

  • कोटा में

  • अलवर में

🔹 व्याख्या:

👉 नये मूल की जलोढ़ मृदा राजस्थान के भरतपुर, जयपुर और अलवर जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा नदी घाटियों में हाल ही में जमा हुई उपजाऊ मिट्टी होती है।
👉 इसका विस्तार डीग और सवाई माधोपुर तक भी होता है।
👉 यह मृदा कृषि की दृष्टि से उपयोगी मानी जाती है। 

निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ? 

[प्रयोगशाला सहायक 13.11.2016]

  • उदयपुर - चित्तौड़गढ़       - लाल-काली मिट्टी

  • श्रीगंगानगर - हनुमानगढ़ - भूरी बलुई मिट्टी 

  • कोटा - झालावाड़           - काली मिट्टी  

  • अलवर - जयुपर             - दोमट मिट्टी

🔹 व्याख्या:

👉 भूरी कच्छारी मृदा का विस्तार अलवर, भरतपुर और गंगानगर के घग्घर क्षेत्र में होता है।
👉 हनुमानगढ़ का उल्लेख भूरी बलुई मृदा के संदर्भ में नहीं किया गया है।
👉 यह मृदा कृषि की दृष्टि से उत्तम मानी जाती है। 

निम्नलिखित में से कौन-सा (मिट्टी - जिले) सुमेलित नहीं है? 

JEN (विद्युत डिप्लोमाधारक) 19.05.2022

  • लाल लोमी - डूंगरपुर, उदयपुर 

  • भूरी रेतीली कछारी - भरतपुर, अलवर 

  • मध्यम काली - बूंदी, बारां

  • लाल और पीली - झालावाड़, कोटा

🔹 व्याख्या:

👉 मध्यम काली मृदा राजस्थान के बूंदी और बारां जिलों में पाई जाती है।
👉 लाल लोमी मृदा का विस्तार डूंगरपुर और उदयपुर में होता है।
👉 भूरी कच्छारी मृदा अलवर और भरतपुर में पाई जाती है।

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम किस वर्ष पारित हुआ ?

JEN (सिविल डिप्लोमाधारक) 18.05.2022

  • 1955 

  • 1950 

  • 1952 

  • 1956 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान भू राजस्व अधिनियम वर्ष 1956 में पारित किया गया।
👉 यह अधिनियम राज्य में भूमि व्यवस्था और राजस्व प्रशासन से संबंधित है।
👉 इसके माध्यम से भू-स्वामित्व, किरायेदारी और लगान व्यवस्था को नियंत्रित किया गया।
👉 यह अधिनियम राजस्व न्यायालयों और अधिकारियों को कानूनी आधार प्रदान करता है। 

राजस्थान के नागौर, पाली, मुख्य रूप से कौनसी मिट्टी जोधपुर और बाड़मेर जिलों में पायी जाती है ?

[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड - III 19.09.2019]

  • काली मृदा

  •  लाल मृदा

  •  वलुई मृदा / मरुस्थली मृदा

  • लाल-पीली मृदा

🔹 व्याख्या:

👉 नागौर, पाली, जोधपुर और बाड़मेर जिलों में मुख्यतः वलुई मृदा / मरुस्थली मृदा पाई जाती है।
👉 यह मृदा रेतीली, शुष्क व कम उपजाऊ होती है।
👉 इसका निर्माण वायु द्वारा जमा की गई रेत से होता है।
👉 यह मृदा थार मरुस्थल क्षेत्र में विस्तारित है। 

राजस्थान के किस प्रदेश में 'एन्टिसोल' समूह की मृदा मिलती है ? 

[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]

  • पश्चिमी 

  • दक्षिण-पूर्वी  

  • दक्षिणी 

  • पूर्वी 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के पश्चिमी प्रदेश में एन्टिसोल मृदा पाई जाती है।
👉 इसमें टोरी सामेन्ट्स और डस्ट फ्लूबेन्ट्स उपवर्ग शामिल हैं।
👉 इसका रंग सामान्यतः हल्का पीला और भूरा होता है।
👉 यह मृदा शुष्क क्षेत्रीय विशेषताओं के अनुसार विकसित होती है। 

राजस्थान के नागौर, पाली, अजमेर और जयपुर जिलों में मुख्य रूप से कौनसी मिट्टी पाई जाती है ? 

[लिपिक ग्रेड -II 16.09.2018]

  • रेतीली मिट्टी 

  • सिरोजेम्स 

  • भूरी मिट्टी 

  • लाल लोम 

🔹 व्याख्या:

👉 सिरोजेम्स मृदा राजस्थान के नागौर, पाली, अजमेर और जयपुर जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा सूखी जलवायु में विकसित होती है और भूरी रंग की होती है।

इन्दिरा गाँधी नहर कमाण्ड क्षेत्र में भू-प्रदूषण का मूल कारण क्या है ? 

[पशुधन सहायक (LSA) 16.10.2016]

  • प्रदूषित भू-जल 

  • मिट्टी की लवणीयता व क्षारीयता

  • मिट्टी अपरदन 

  • विगठित जलप्रवाह 

🔹 व्याख्या:

👉 इन्दिरा गाँधी नहर कमाण्ड क्षेत्र में भू-प्रदूषण की समस्या पाई जाती है।
👉 इसका मूल कारण मृदा की लवणीयता एवं क्षारीयता है।
👉 यह स्थिति भूमि की उपजाऊ क्षमता को प्रभावित करती है। 

कौनसा मृदा का मुख्य घटक नहीं है ? 

[CET (10+2 षष्टम चरण) 11.02.2023]

  • ह्यूमस 

  • खनिज 

  • लवण 

  • जल 

🔹 व्याख्या:

👉 मृदा के मुख्य घटकों में खनिज कण, जैविक पदार्थ, जल और वायु शामिल होते हैं।
👉 लवण मृदा का मुख्य घटक नहीं होता है।
👉 लवण सामान्यतः समस्या कारक तत्व के रूप में मृदा में पाया जाता है।
👉 यह मृदा की उर्वरता को प्रभावित कर सकता है। 

राजस्थान के सर्वाधिक क्षेत्र पर निम्नलिखित में से कौनसी मिट्टी पाई जाती है ? 

[पुस्तकालयाध्यक्ष 13.11.2016]

  • एरिडीसोल्स एवं एण्टिसोल्स

  • एरिडीसोल्स एवं अल्फीसोल्स

  • वर्टीसोल्स एवं अल्फीसोल्स

  • इनसेप्टीसोल्स

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के सर्वाधिक क्षेत्र में एरिडीसोल्स एवं एण्टिसोल्स मृदाएँ पाई जाती हैं।
👉 ये मृदाएँ मुख्यतः पश्चिमी राजस्थान में विस्तारित हैं।
👉 इन मृदाओं का विकास शुष्क जलवायु की स्थिति में हुआ है।
👉 इनमें रेतीली व पीली-भूरी मृदा के रूप मिलते हैं। 

राजस्थान की मरुस्थलीय बालू का प्रमुख स्रोत निम्न में से क्या है

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (अस्त्रक्षेप) 21.09.2019]

  • सतपुड़ा पर्वत के कण 

  • चम्बल नदी द्वारा लाई गई मिट्टी 

  • बनास नदी द्वारा लाई गई मिट्टी

  • प्राचीन नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान की मरुस्थलीय बालू का प्रमुख स्रोत प्राचीन नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी है।
👉 टरशयरी काल में जल प्रवाह के प्रभाव से जमाव की प्रक्रिया हुई।
👉 बाद में जलवायु परिवर्तन से ये क्षेत्र वातीय मैदानों में बदल गए।
👉 यही बालू आज थार मरुस्थल का प्रमुख भाग बन चुकी है। 

लाल दोमट मिट्टी राजस्थान में पाई जाती है

[JEN (कृषि) 10.09.2022]

  • बूंदी. - भीलवाड़ा

  •  बारां - झालावाड़

  • डूंगरपुर - बांसवाड़ा

  • सीकर - कोटा

🔹 व्याख्या:

👉 लाल दोमट मिट्टी राजस्थान के डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा लाल-लोम (Red Loam) मृदा वर्ग में आती है।
👉 इसमें लौह अंश की उपस्थिति के कारण लाल रंग होता है।
👉 यह मृदा मक्का, चावल, गन्ना आदि फसलों के लिए उपयुक्त है। 

निम्नलिखित में से राजस्थान के किन जिलों के समूह में मुख्यतः कच्छारी मृदा पाई जाती है? 

[CET (स्नातक) (चरण -I) 07.01.2023]

  • भरतपुर – धौलपुर 

  • कोटा - बूंदी

  • बांसवाड़ा - डूंगरपुर 

  • बीकानेर जैसलमेर

🔹 व्याख्या:

👉 कच्छारी (जलोढ़) मृदा राजस्थान के भरतपुर और धौलपुर जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा पूर्वी राजस्थान की नदी घाटियों में विस्तारित होती है।
👉 इसमें चूना, फास्फोरिक अम्ल और ह्यूमस की कमी होती है।
👉 यह मृदा उत्पादकता की दृष्टि से उत्तम मानी जाती है।

एरिडीसोल्स राजस्थान के _____जलवायु क्षेत्रों में मिलती है। 

[प्रयोगशाला सहायक (भूगोल) 30.06.2022]

  •  उप-आर्द्र

  • आर्द्र 

  • शुष्क 

  • अर्ध 

🔹 व्याख्या:

👉 एरिडीसोल्स मृदा राजस्थान के शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में मिलती है।
👉 यह मृदा मुख्यतः पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है।
👉 इसमें केम्बो ऑरथिड्स, केल्सी ऑरथिड्स जैसे उपवर्ग होते हैं।
👉 यह मृदा मरुस्थली परिस्थितियों के अनुरूप विकसित होती है। 

राजस्थान के निम्नलिखित में से किन जिलों में 'इन्सेप्टीसोल्स मृदा' पायी जाती है?

[CET (स्नातक) (चरण -I) 07.01.2023]

  • जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर

  • जयपुर, दौसा और अलवर 

  • पाली, भीलवाड़ा और सिरोही

  • कोटा, बूंदी और बारां 

🔹 व्याख्या:

👉 इन्सेप्टीसोल्स मृदा राजस्थान के पाली, भीलवाड़ा और सिरोही जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा अर्द्ध शुष्क से आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में विकसित होती है।
👉 इसका विस्तार राजसमंद, उदयपुर, सलुम्बर जैसे जिलों तक भी है।
👉 यह मृदा अरावली क्षेत्र की विशिष्ट मृदा मानी जाती है। 

राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और नागौर जिलों में मुख्य रूप से कौन-सी मृदा पायी जाती है ? 

[कनिप्ठ अनुदेशक (वायरमैन) 24.12.2019]

  • लाल मृदा

  • मरुस्थलीय मृदा 

  • काली मृदा 

  • पीली मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 मरुस्थलीय मृदा राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और नागौर जिलों में प्रमुखता से पाई जाती है।
👉 यह मृदा रेत एवं बालूका स्तूपों से युक्त होती है और वायुवीय निक्षेपण से बनी होती है।
👉 यह क्षेत्र थार मरुस्थल का भाग है जहाँ मृदा निरंतर स्थानांतरित होती रहती है। 

राजस्थान में निम्न में से किस स्थान पर इनसेप्टीमोल्स मृदा नहीं पायी जाती है ? 

[कनिप्ठ अनुदेशक (मैकेनिक) 23.12.2019]

  • सिरोही 

  • भीलवाड़ा 

  • राजसमन्द 

  • बूँदी

🔹 व्याख्या:

👉 इनसेप्टीमोल्स मृदा राजस्थान में सिरोही, पाली, राजसमंद, उदयपुर, सलुम्बर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ में पाई जाती है।
👉 यह मृदा कुछ मात्रा में जयपुर, सवाई माधोपुर, झालावाड़ में भी मिलती है।
👉 बूँदी इस मृदा के विस्तार वाले क्षेत्रों में शामिल नहीं है। 

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए - 

         सूची-I                         सूची -II

(मिट्टी के प्रकार)                (जलवायु प्रदेश) 

A) एरिडीसोल्स          i)      शुष्क एवं अर्द्ध - शुष्क 

B) इन्सेप्टीसोल्स        ii)     अर्द्ध शुष्क एवं आर्द्र 

C) अल्फीसोल्स          iii)    उप - आर्द्र एवं आर्द्र

D) वर्टीसोल्स             iv)    आर्द्र एवं अति आर्द्र 

ग्रामसेवक & छात्रा. अधीक्षक 18.12.2016

कूट : 

       A     B     C     D 

  • i       iii     iv     ii

  • i       ii      iii     iv

  • i       iii     ii      iv

  • iv     i       ii      iii

🔹 व्याख्या:

👉 एरिडीसोल्स मृदा का संबंध शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क जलवायु से है।
👉 इन्सेप्टीसोल्स मृदा अर्द्ध-शुष्क एवं आर्द्र जलवायु में पाई जाती है।
👉 अल्फीसोल्स मृदा उप-आर्द्र एवं आर्द्र क्षेत्रों में मिलती है।
👉 वर्टीसोल्स मृदा आर्द्र एवं अति आर्द्र जलवायु से संबंधित होती है। 

हाड़ौती प्रदेश की मृदा का प्रधान प्रकार है ? 

[संगणक परीक्षा 19.12. 2021]

  • इनसेप्टीसॉल 

  • एण्टीसॉल 

  • इनसेप्टीसॉल 

  • वर्टीसॉल 

🔹 व्याख्या:

👉 हाड़ौती प्रदेश की मृदा का प्रधान प्रकार वर्टीसोल्स है।
👉 यह मृदा मुख्यतः कोटा, बारां, बूंदी, झालावाड़ जिलों में पाई जाती है।
👉 इसकी विशेषता है कि यह काली, गहरी और दरारदार होती है।
👉 यह मृदा उपजाऊ एवं कृषि योग्य मानी जाती है। 

पंकक (स्लरी) राजस्थान के किन जिलों में पारिस्थितिकी तथा भूमि की उर्वरा शक्ति दोनों को अपूरणीय क्षति पहुँचा रही है ?

[पशुधन सहायक (LSA) 16.10.2016]

  • जालौर एवं बाड़मेर 

  • अजमेर एवं चूरु

  • राजसमंद एवं उदयपुर 

  • नागौर एवं बीकानेर

🔹 व्याख्या:

👉 पंकक (स्लरी) राजस्थान के राजसमंद एवं उदयपुर जिलों में पाई जाती है।
👉 यह इन जिलों की पारिस्थितिकी और भूमि की उर्वरा शक्ति को प्रभावित कर रही है।
👉 इसका प्रभाव इन क्षेत्रों में अपूरणीय क्षति के रूप में देखा गया है। 

काली मृदा पाई जाती है 

[JEN (विधुत) (डिग्रीधारक) 29.11.2020]

  • बीकानेर, उदयपुर, सिरोही में      

  • टोंक, धौलपुर, अलवर में 

  • जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर में 

  • बारां, झालावाड़, कोटा में 

🔹 व्याख्या:

👉 काली मृदा राजस्थान के बारां, झालावाड़ और कोटा जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा गहरे भूरे से काले रंग की होती है।
👉 इसमें कैल्शियम और पोटाश की मात्रा अधिक होती है।
👉 यह मृदा कपास, मूँगफली व दालों के लिए उपयुक्त होती है। 

काली मृदा जानी जाती है -

[REET मुख्य परीक्षा (L -1) 25.02.2023]

  • लैटराइट मिट्टी से 

  • रेगुर मिट्टी से 

  • बांगर एवम् खादर मिट्टी से      

  • कांप मिट्टी से 

🔹 व्याख्या:

👉 काली मृदा को ही रेगुर मिट्टी कहा जाता है।
👉 यह मृदा हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) में पाई जाती है।
👉 इसमें कैल्शियम और पोटाश की मात्रा अधिक होती है।
👉 यह मृदा व्यवसायिक फसलों के लिए उपयुक्त होती है। 

राजस्थान बंजर भूमि विकास बोर्ड का पुनर्गठन कब बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड के रूप में किया गया था ? 

[Supervisor (महिला) 07.09.2024]

  • 2019 

  • 2015 

  • 2020 

  • 2016 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान बंजर भूमि विकास बोर्ड का पुनर्गठन वर्ष 2016 में किया गया।
👉 इसका नया नाम बंजर भूमि एवं चारागाह विकास बोर्ड रखा गया।
👉 यह राज्य की अउपजाऊ भूमि और चारागाहों के विकास हेतु कार्य करता है।
👉 इसका उद्देश्य मृदा संरक्षण और मरुस्थलीकरण को रोकना है।

राजस्थान में अल्फीसोल मृदा निम्न में से कहाँ पायी जाती है ? 

[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]

  • चूरू 

  • जयपुर 

  • करौली 

  • हनुमानगढ़ 

🔹 व्याख्या:

👉 अल्फीसोल मृदा राजस्थान के जयपुर जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा वैज्ञानिक मृदा वर्गीकरण का हिस्सा है।
👉 इसका विस्तार पूर्वी राजस्थान के अन्य जिलों तक भी होता है।
👉 यह मृदा कृषि योग्य व उपजाऊ मानी जाती है। 

राजस्थान के किस जिले में, जिप्सीफेरस मृदा मिलती है ? 

[CET (स्नातक) (चरण -IV) 08.01.2023]

  • अलवर 

  • बीकानेर 

  • जोधपुर 

  • पाली

🔹 व्याख्या:

👉 जिप्सीफेरस मृदा राजस्थान के बीकानेर जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा कृषि विभागीय वर्गीकरण में उल्लिखित है।
👉 यह मृदा मरुस्थली क्षेत्रों में विशेष रूप से विकसित होती है।
👉 इसका उपयोग मरुस्थली कृषि सुधार में किया जाता है। 

कौन सी मृदा को ऊसर, रेह, अल्कलाईन आदि के रूप में भी जाना जाता है ?

[संगणक परीक्षा 05.05.2018]

  • जलोढ़ मिट्टी

  • भूरी मिट्टी

  • लाल मिट्टी

  • लवणीय मिट्टी 

🔹 व्याख्या:

👉 लवणीय मिट्टी को ही ऊसर, रेह तथा अल्कलाईन मृदा के रूप में जाना जाता है।
👉 यह मृदा लवण व क्षार से युक्त होती है, जिससे इसकी उपजाऊ क्षमता घट जाती है।
👉 यह मृदा भूमि की उर्वरता को प्रभावित करती है और कृषि के लिए अनुपयुक्त हो जाती है। 

निम्नलिखित में से कौनसा सही सुमेलित हैं ? 

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (विष) 14.09.2019]

            मृदा के प्रकार          -   जिले 

  • इनसेप्टीसोल्स      -       भीलवाड़ा, पाली

  • एरिडीसोल्स         -       अजमेर, उदयपुर

  • अल्फीसोल्स        -       बीकानेर, गंगानगर

  • वर्टीसोल्स            -       जोधपुर, बाड़मेर

🔹 व्याख्या:

👉 यूएसडीए (USDA) के अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा 1991 में किए गए आधुनिक वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार, राजस्थान की मृदा को प्रमुख रूप से 5 भागों में विभाजित किया गया है :

मृदा का प्रकार, मुख्य क्षेत्र ,विशेषता

(1.) एंटीसोल्स (Entisols)जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू ,यह सबसे बड़े भू-भाग पर पाई जाने वाली रेतीली मिट्टी है।

(2.) एरिडसोल्स (Aridisols)जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, पाली, सीकर, झुंझुनू ,यह शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में मिलने वाली लाल-पीली व खारी मिट्टी है।

(3). इनसेप्टिसोल्स (Inceptisols)सिरोही, पाली, राजसमंद, उदयपुर, भीलवाड़ा अरावली पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली अपरिपक्व और पहाड़ी मिट्टी है।

(4 )अल्फिसोल्स (Alfisols)जयपुर, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, कोटा ,पूर्वी मैदानी भागों में पाई जाने वाली सर्वाधिक उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी

(5.) वर्टिसोल्स (Vertisols)झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी (हाड़ौती क्षेत्र)गहरी मध्यम-काली मिट्टी जो कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त है।

वर्टीसोल्स मृदा किन जिलों में पाई जाती है? 

[कृषि पर्यवेक्षक परीक्षा 18.09.2021]

  • अलवर, जयपुर और दौसा 

  • जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर

  • उदयपुर, राजसमन्द और अजमेर

  • झालावाड़, कोटा और बूंदी

🔹 व्याख्या:

👉 वर्टीसोल्स मृदा राजस्थान के झालावाड़, कोटा और बूंदी जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा गहरी, दरारदार व काली रंग की होती है।
👉 इसमें कैल्शियम और पोटाश पर्याप्त मात्रा में होता है।
👉 यह मृदा दलहनी व कपास की फसलों के लिए उपयुक्त होती है। 

राजस्थान के किस प्रदेश में 'एंटीसोल्स' समूह की मृदा पाई जाती है ? 

[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]

  • पश्चिमी 

  • दक्षिण-पूर्वी 

  • पूर्वी 

  • दक्षिणी 

🔹 व्याख्या:

👉 एंटीसोल्स मृदा राजस्थान के पश्चिमी प्रदेश में पाई जाती है।
👉 इसमें टोरी सामेन्ट्स और डस्ट फ्लूबेन्ट्स उपवर्ग शामिल होते हैं।
👉 इसका रंग सामान्यतः हल्का पीला व भूरा होता है।
👉 यह मृदा शुष्क क्षेत्रों में विस्तारित है। 

राजस्थान में भूरी मृदा कहाँ नहीं पाई जाती ? 

[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]

  • टोंक 

  • पाली

  • बूंदी 

  • उदयपुर

  • राजस्थान की भूरी मिट्टी (Brown Soil) बनास बेसिन और अरावली के क्षेत्रों में पाई जाती है। यह मध्यम उपजाऊ होती है और इसमें फास्फोरस व कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होते हैं, लेकिन नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों की कमी पाई जाती है।
  • मुख्य वितरण क्षेत्र यह मिट्टी मुख्यतः राजस्थान के निम्नलिखित जिलों में विस्तृत है:टोंक, बूंदी, और सवाई माधोपुर (बनास बेसिन का मुख्य क्षेत्र) भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, और उदयपुर

राजस्थान में निम्नलिखित कौन से जिलों में लाल लोमी मिट्टी पायी जाती है ? 

[पशुधन सहायक (LSA) 21.10.2018]

  • सिरोही एवं पाली 

  • सवाई माधोपुर एवं करौली

  • कोटा एवं बूंदी 

  • डूंगरपुर एवं उदयपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल-लोमी मृदा राजस्थान में उदयपुर (मध्य एवं दक्षिणी भाग) और डूंगरपुर जिले में पाई जाती है।
👉 इसमें चूना, पोटाश, लौह-ऑक्साइड व फास्फोरस की मात्रा कम होती है।
👉 इसका रंग लौह अंश के कारण लाल होता है।
👉 इस मृदा में सामान्यतः मक्का, चावल, गन्ना आदि की खेती होती है। 

लाल दोमट प्रकार की मिट्टी राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में पाई जाती है ?

पशुधन सहायक (LSA) 04.06.2022

  • बांसवाड़ा 

  • जोधपुर 

  • जालौर 

  • नागौर 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल दोमट मिट्टी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में पाई जाती है।
👉 यह लाल-लोम (Red Loam) मृदा श्रेणी में आती है।
👉 इसमें लौह अंश की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है।
👉 यह मृदा मक्का, चावल, गन्ना जैसी फसलों के लिए उपयुक्त होती है। 

राजस्थान में मिट्टी अपरदन का सर्वाधिक क्षेत्र पाया जाता है 

[लिपिक ग्रेड-II 19.08.2018]

  • डूंगरपुर में 

  • श्रीगंगानगर में 

  • हाड़ौती पठार में

  • सिरोही में

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में जल द्वारा मृदा अपरदन की समस्या अनेक क्षेत्रों में पाई जाती है।
👉 हाड़ौती पठार भी जल अपरदन से प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।
👉 यहाँ वर्षा के दौरान तेज प्रवाह वाले जल से मृदा का कटाव होता है। 

वह जिला युग्म जहाँ लाल व पीली मिट्टी पायी जाती है, वह है ?

[हाथकरघा निरीक्षक (उद्योग) 22.12.2019]

  • जोधपुर - पाली 

  • कोटा- बारां 

  • सवाई माधोपुर - सिरोही 

  • भरतपुर - अलवर  

🔹 व्याख्या:

👉 लाल व पीली मृदा राजस्थान के सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा (पश्चिमी भाग), अजमेर और सिरोही जिलों में पाई जाती है।
👉 इसमें चीका व दोमट मृदा पाई जाती है तथा इसका रंग लौह अंश की प्रधानता दर्शाता है।
👉 इस मृदा में नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है।

अतिरिक्त सूचना:
सवाई माधोपुर और सिरोही दोनों जिले लाल व पीली मृदा क्षेत्र में शामिल हैं

ग्रेनाइट, नाइस व शिष्ट चट्टानों के विखंडन से कौन सी मृदा का निर्माण होता है ? 

[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 01.03.2023]

  • रेतीली

  • लाल-पीली

  • काली

  • दोमट 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल-पीली मृदा का निर्माण ग्रेनाइट, नाइस और शिष्ट चट्टानों के विखंडन से होता है।
👉 इस मृदा का रंग लौह अंश की अधिकता के कारण लाल एवं पीला होता है।
👉 यह मृदा सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, सिरोही जिलों में पाई जाती है।
👉 इसमें नाइट्रोजन और कार्बनिक यौगिकों की मात्रा कम होती है। 

 राजस्थान के किन जिलों में मध्यम काली मिट्टी पाई जाती है ?

[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड -II 11.09.2022]

  • चूरू-झुंझुनू-सीकर 

  • उदयपुर - डूंगरपुर-बांसवाड़ा

  • टोंक - अजमेर - पाली

  • कोटा-बूंदी - झालावाड़

🔹 व्याख्या:

👉 मध्यम काली मृदा राजस्थान के कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा गहरे भूरे से काले रंग तक होती है।
👉 इसमें कैल्शियम और पोटाश अधिक, जबकि फास्फेट और नाइट्रोजन कम होता है।
👉 यह मृदा कपास, मूँगफली व दालों के लिए उपयुक्त होती है।

राजस्थान के नागौर, पाली, बाड़मेर एवं जैसलमेर जिलों में मुख्यतः कौनसी मृदा पाई जाती हैं ? 

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (रसायन) 14.09.2019]

  • बलुई मृदा 

  • काली मृदा 

  • पीली मृदा 

  • लाल मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 बलुई मृदा राजस्थान के नागौर, पाली, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में प्रमुख रूप से पाई जाती है।
👉 यह मृदा रेत की प्रधानता वाली, हल्की और कम जलधारण क्षमता युक्त होती है।
👉 इसका निर्माण वायु द्वारा जमा की गई कणिकाओं से होता है।
👉 यह मृदा मरुस्थली क्षेत्रों की विशिष्ट मृदा मानी जाती है। 

वर्टिसोल मिट्टी राजस्थान के किस भाग में मिलती है? 

[VDO मुख्य परीक्षा 09.07.2022]

  • पूर्वी भाग 

  • दक्षिण - पूर्वी भाग 

  • दक्षिणी-पश्चिमी भाग 

  • उत्तर-पश्चिमी भाग 

🔹 व्याख्या:

👉 वर्टिसोल मिट्टी राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में पाई जाती है।
👉 इसका विस्तार झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी जिलों तक है।
👉 यह मृदा गहरी, काली व दरारदार होती है।
👉 यह मृदा कपास व दलहनी फसलों के लिए उपयुक्त होती है।

राजस्थान में, निम्न में से कौन सा मृदा का सर्वाधिक उपजाऊ प्रकार माना जाता है ?

[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]

  • बालू मृदा 

  • पीली मृदा 

  • जलोढ़ मृदा 

  • पीली मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में जलोढ़ मृदा को सबसे अधिक उपजाऊ मृदा माना जाता है।
👉 यह मृदा नदी घाटियों में जमा हुई मिट्टी से बनी होती है।
👉 इसका विस्तार पूर्वी राजस्थान के जिलों में होता है।
👉 यह मृदा कृषि के लिए अत्यंत उपयुक्त होती है। 

राजस्थान के कौन तीन जिले गहरी भूरी काली मृदा रखते हैं ? 

[अन्वेषक परीक्षा 21.08.2016]

  • उदयपुर, डूंगरपुर और बांसवाड़ा

  • कोटा, बूंदी और झालवाड़ 

  • पाली, सिरोही और जालोर

  • भीलवाड़ा, अजमेर और टोंक 

🔹 व्याख्या:

👉 गहरी भूरी काली मृदा का विस्तार कोटा, बूंदी एवं झालावाड़ जिलों में है।
👉 यह मृदा हाड़ौती पठार क्षेत्र में पाई जाती है।
👉 इसमें कैल्शियम व पोटाश पर्याप्त मात्रा में होते हैं। 

कौन सी मृदा 'स्वजोत' के लिए जानी जाती है ? 

[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 27.02.2023]

  • काली 

  • लाल रेतीली 

  • भूरी- रेतीली

  • कछारी

🔹 व्याख्या:

👉 काली मृदा को 'स्वजोत' मृदा के रूप में जाना जाता है।
👉 यह मृदा मुख्यतः हाड़ौती क्षेत्र (कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़) में पाई जाती है।
👉 इसमें कैल्शियम और पोटाश पर्याप्त, परन्तु फास्फेट व नाइट्रोजन कम होता है।
👉 यह मृदा कपास, मूँगफली, दालों आदि की खेती के लिए उपयुक्त होती है।

निम्नांकित में से कौनसी कृषि पद्धति मृदा अपरदन के लिए जिम्मेदार नहीं है ? 

[कनिष्ठ अनुदेशक (वेल्डर) 26.03.2019]

  • गहन कृषि 

  • बागाती कृषि 

  • सीढ़ीदार कृषि

  • झूमिंग कृषि 

🔹 व्याख्या:

👉 मृदा अपरदन के प्रमुख कारणों में अवैज्ञानिक कृषि पद्धतियाँ शामिल हैं।
👉 बागाती कृषि मृदा को सुरक्षित रखने में सहायक होती है।
👉 यह पद्धति वृक्षों की जड़ों के कारण मृदा को बाँधे रखती है।
👉 अतः बागाती कृषि मृदा अपरदन के लिए जिम्मेदार नहीं होती। 

राजस्थान में निम्नांकित में से जिलों का कौन-सा समूह अवनालिका (gully) मृदा अपरदन से गम्भीर रूप से ग्रसित है ? 

[JEN (यांत्रिकी डिग्री) 21.08.2016]

  • कोटा, बूँदी, बारां एवं बाँसवाड़ा

  • सवाईमाधोपुर, भरतपुर, धौलपुर एवं अलवर 

  • धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर एवं कोटा

  • कोटा, बूँदी, झालावाड़ एवं टोंक 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में अवनालिका (गली) अपरदन से प्रभावित क्षेत्र चम्बल प्रदेश में स्थित हैं।
👉 इसमें विशेष रूप से धौलपुर और सवाई माधोपुर शामिल हैं।
👉 हाड़ौती का पठार भी जल अपरदन से प्रभावित क्षेत्र है, जिसमें कोटा शामिल है।
👉 यह समूह गंभीर मृदा अपरदन से ग्रसित है। 

राजस्थान के किन जिलों में 'वर्टीसोल्स' मृदा नहीं पाई जाती है ? 

[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]

  • बारां - कोटा 

  • बीकानेर - चूरू 

  • कोटा - बूंदी 

  • बांसवाड़ा - झालावाड़ 

🔹 व्याख्या:

👉 वर्टीसोल्स मृदा राजस्थान में झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी में प्रमुख रूप से पाई जाती है।
👉 यह मृदा सवाई माधोपुर, भरतपुर, गंगापुर सिटी, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा में सीमित रूप में मिलती है।
👉 आपकी जानकारी में बीकानेर और चूरू जिलों का कोई उल्लेख नहीं है।
👉 अतः यह मृदा बीकानेर और चूरू जिलों में नहीं पाई जाती है। 

राजस्थान के कौन से प्रदेश में एंटीसोल' समूह की मृदा पाई जाती है ?

[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 29.06.2022]

  • पूर्वी 

  • दक्षिणी 

  •  दक्षिण-पूर्वी 

  • पश्चिमी 

🔹 व्याख्या:

👉 एण्टीसोल्स मृदा राजस्थान के पश्चिमी प्रदेश में पाई जाती है।
👉 इसमें टोरी सामेन्ट्स और डस्ट फ्लूबेन्ट्स उपवर्ग शामिल हैं।
👉 इसका रंग हल्का पीला एवं भूरा होता है।
👉 यह मृदा रेतीले और शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती है। 

वर्टिसोल प्रकार की मृदा राजस्थान के किन जिलों में पाई जाती है ?

[सहायक अग्निशमन (AFO) 29.01.2022]

  • अलवर - जयपुर

  •  पाली - जालौर

  • कोटा-बूंदी

  • चूरू-झुंझुनू

🔹 व्याख्या:

👉 वर्टिसोल मृदा राजस्थान के कोटा और बूंदी जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा गहरे रंग की, दरारदार और काली होती है।
👉 यह मृदा दलहनी और कपास जैसी फसलों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
👉 यह मृदा वर्टी सोइल्स वर्ग में शामिल है। 

ऊसर मृदा किसे कहते है ? 

[कनिप्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रोनिक्स) 23.12.2019]

  • सागर के किनारे की मृदा 

  • नदियों के किनारे पर स्थित मृदा 

  • खारी एवं लवणीय मृदा को

  • पर्वतपदीय प्रदेशों पर स्थित मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 ऊसर मृदा उस मृदा को कहते हैं जो खारी एवं लवणीय तत्वों से प्रभावित होती है।
👉 यह मृदा कम उपजाऊ होती है और कृषि के लिए अनुपयुक्त मानी जाती है।
👉 इसे रेह, कल्लर जैसे नामों से भी जाना जाता है। 

नीचे दो कथन दिए गए हैं : 

कथन (I) : जलोढ़ (एलुवियल) मृदा राजस्थान के उत्तरी और पूर्वी जिले जैसे हनुमानगढ़, अलवर, धौलपुर और दौसा में पायी जाती है।

कथन (II) : इस मृदा में पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन होता है परन्तु चूने (लाइम), फॉस्फोरस और आयरन (लौह) की कमी होती है। 

उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें :  

[स्टेनोग्राफर परीक्षा 05.10.2024]

  • कथन (I) और कथन (II) दोनों सत्य हैं। 

  • कथन (I) सत्य है, किन्तु कथन (II) असत्य है। 

  • कथन (I) असत्य है, किन्तु कथन (II) सत्य है। 

  • कथन (I) और कथन (II) दोनों असत्य हैं 

🔹 व्याख्या:

👉 जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) राजस्थान के पूर्वी और कुछ उत्तरी भागों में पाई जाती है। यह अत्यधिक उपजाऊ होती है और इसमें पोटाश की मात्रा अधिक होती है। राजस्थान में इसका स्थानीय नाम 'कछारी मिट्टी' भी है राजस्थान में मुख्य वितरण राजस्थान के जिन जिलों में जलोढ़ (कछारी) मिट्टी पाई जाती है, उनके नाम हैं:पूर्वी राजस्थान: अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, और दौसा।मध्य व अन्य क्षेत्र: टोंक, जयपुर और कोटा।उत्तरी राजस्थान: गंगानगर के मध्यवर्ती भाग। विशेषताएं और उपयोग निर्माण: यह मिट्टी नदियों द्वारा बहाकर लाई गई गाद (अवसाद) से बनती है। प्रकृति: यह हल्की भूरी या राख के रंग की, रेतीली-दोमट और चिकनी (लोम) होती है।पोषण: इसमें पोटाश और चूना पर्याप्त मात्रा में होता है, लेकिन नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी होती है।फसलें: यह कपास, मक्का, गेहूं, दलहन, और गन्ना जैसी फसलों के लिए बेहद उपयुक्त है।

कोटा, बूंदी, झालावाड़ में कौनसी मृदा पायी जाती है? 

[वनरक्षक (प्रथम चरण) 12.11.2022]

  • लाल एवं पीली मृदा

  • लाल एवं काली मिश्रित मृदा 

  • मरुस्थली मृदा

  • मध्यम काली मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 मध्यम काली मृदा राजस्थान के कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा गहरे भूरे से काले रंग की होती है।
👉 इसमें कैल्शियम और पोटाश पर्याप्त, परंतु फास्फेट और नाइट्रोजन कम होता है।
👉 यह मृदा कपास, मूँगफली और दालों के लिए उपयुक्त है। 

प्राकृतिक रूप से मिट्टीयों का नवीनीकरण होता है, वह क्षेत्र है - 

[सूचना सहायक 12.05.2018]

  • तराई प्रदेश 

  • बांगर प्रदेश 

  • भाबर प्रदेश 

  • खादर प्रदेश 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में जलोढ़ अथवा कच्छारी मृदा नदियों के मैदान व घाटियों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा नवीन जलोढ़ के रूप में विकसित होती है।
👉 इसका विस्तार भरतपुर, धौलपुर, दौसा, जयपुर, टोंक, सवाई माधोपुर जिलों में है। 

राजस्थान के निम्नलिखित में से किस जिले में अवनतिका अपरदन की समस्या मुख्यतः होती है ? 

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (भौतिक) 21.09.2019]

  • उदयपुर 

  • अलवर 

  • कोटा

  • सिरोही

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के कोटा जिले में अवनतिका अपरदन की समस्या मुख्य रूप से पाई जाती है।
👉 यह समस्या जल प्रवाह द्वारा भूमि के कटाव से उत्पन्न होती है।
👉 कोटा क्षेत्र हाड़ौती पठार का हिस्सा है, जहाँ वर्षा जल के कारण मृदा का क्षरण होता है।
👉 इससे भूमि की उर्वरता में कमी आती है। 

राजस्थान के किस जिले में जलोढ़ मृदा पायी जाती है ? 

[स्टेनोग्राफर परीक्षा 21.03.2021]

  • बाड़मेर 

  • नागौर 

  • भरतपुर 

  • जैसलमेर   

🔹 व्याख्या:

👉 जलोढ़ मृदा राजस्थान के भरतपुर जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा पूर्वी राजस्थान की नदी घाटियों में विस्तारित होती है।
👉 इसमें चूना, फास्फोरिक अम्ल और ह्यूमस की कमी होती है।
👉 यह मृदा उत्पादकता की दृष्टि से उत्तम मानी जाती है। 

मिट्टी की लवणता एवं क्षारीयता का ठोस उपचार क्या है ? 

[पशुधन सहायक (LSA) 16.10.2016]

  • यूरिया शोधन 

  • रॉक फॉस्फेट शोधन

  • बेन्टोनाइट शोधन 

  • जिप्सम शोधन

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मृदा की लवणता एवं क्षारीयता एक प्रमुख समस्या है।
👉 यह समस्या विशेष रूप से खारी मृदा वाले क्षेत्रों में देखी जाती है।
👉 इस समस्या के समाधान के लिए जिप्सम शोधन एक प्रभावी उपाय है। 

मृदा संरक्षण की प्रमुख विधि कौन सी नहीं है ? 

[वनपाल परीक्षा 06.11.2022]

  • फसल चक्रीकरण 

  • पशुचारण पर नियंत्रण

  • रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग 

  • पट्टीदार कृषि 

🔹 व्याख्या:

👉 रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग मृदा संरक्षण की प्रमुख विधि नहीं है।
👉 मृदा संरक्षण की प्रमुख विधियाँ हैं – वृक्षारोपण, ढलान अनुसार जुताई, फसल चक्र परिवर्तन आदि।
👉 रासायनिक उर्वरक मृदा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं।
👉 अतः यह संरक्षण नहीं, अपक्षय का कारक हो सकता है। 

मृदा के नवी वर्गीकरण के अनुसार राजस्थान में 'अल्फीसोल्स' मृदा पायी जाती है

[VDO मुख्य परीक्षा 09.07.2022]

  • प्रतापगढ़ और सिरोही में 

  • जैसलमेर और बाड़मेर में 

  • जयपुर, अलवर और कोटा में 

  • चूरू, झुंझुनू और सीकर में 

🔹 व्याख्या:

👉 अल्फीसोल्स मृदा राजस्थान के जयपुर, अलवर और कोटा जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा वैज्ञानिक मृदा वर्गीकरण के अंतर्गत आती है।
👉 इसका विस्तार पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों तक होता है।
👉 यह मृदा उपजाऊ व कृषि योग्य मानी जाती है। 

निम्नलिखित युग्मों में से वह कौन सा जिला युग्म है जहाँ लाल एवं पीली मृदा पायी जाती है ? 

[JEN (विद्युत/यांत्रिक) (डिप्लोमा) 26.12.2020]

  • अलवर        -       भरतपुर 

  • बाराँ            -       टोंक 

  • अजमेर        -       भीलवाड़ा 

  • जोधपुर       -       पाली 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल एवं पीली मृदा राजस्थान के अजमेर और भीलवाड़ा जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा लौह अंश की अधिकता के कारण लाल और पीले रंग की होती है।
👉 इसमें नमी को लंबे समय तक संचित करने की क्षमता होती है।
👉 यह मृदा चीका और दोमट प्रकृति की होती है।

हाडोती पठार में कौन-से प्रकार की मृदा पाई जाती है ? 

[कनिप्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रोनिक्स) 23.12.2019]

  • काली 

  • लैटेराइट 

  • रेतीली 

  • जलोढ़

🔹 व्याख्या:

👉 हाड़ौती पठार में मुख्य रूप से मध्यम प्रकार की काली मृदा पाई जाती है।
👉 इसका विस्तार कोटा, बूंदी, बारां एवं झालावाड़ जिलों में है।
👉 इसमें कैल्शियम व पोटाश पर्याप्त होते हैं तथा यह कपास व दलहनों की खेती के लिए उपयुक्त है। 

राजस्थान में मिट्टी के ऊपर सफेद लवणीय बालू जम जाती है, उसे क्या कहते हैं ? [*]

[कनिप्ठ अनुदेशक (रेफ्रीजरेशन) 24.12.2019]

  • बजरी

  • कल्लर

  • रेह 

  • सफेद मिट्टी

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मिट्टी के ऊपर जमने वाली सफेद लवणीय बालू को खारी मृदा कहा जाता है।
👉 यह मृदा निम्न भूमि या गर्तों में मिलती है और इसका विस्तार बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर व डीडवाना-कुचामन क्षेत्रों में है।
👉 इसमें लवणीयता अधिक होती है, जिससे यह कृषि के लिए कम उपयुक्त होती है।
📌 इस प्रश्न को बोर्ड ने डिलीट माना है। 

निम्न में से कौनसी पर्यावरणीय समस्या 'रेंगती मृत्यु' कहलाती है ?

[प्रयोगशाला सहायक (विज्ञान) 28.06.2022]

  • निर्वनीकरण 

  • जनसंख्या वृद्धि

  • मृदा अपरदन 

  • जल प्रदूषण

🔹 व्याख्या:

👉 मृदा अपरदन को ही पर्यावरणीय समस्या के रूप में 'रेंगती मृत्यु' कहा जाता है।
👉 यह प्रक्रिया धीरे-धीरे मृदा की उर्वरता को समाप्त करती है।
👉 इससे भूमि की उत्पादकता में गिरावट आती है।
👉 यह समस्या राजस्थान में विशेष रूप से गंभीर रूप में देखी जाती है। 

राजस्थान में 'अल्फीसोल' कहाँ नहीं पायी जाती ? [*]

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (अस्त्रक्षेप) 21.09.2019]

  • झालावाड़ 

  • बूंदी  

  • कोटा 

  • बाराँ 

🔹 व्याख्या:

👉 अल्फीसोल्स मृदा राजस्थान के जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, डीग, सवाई माधोपुर, टोंक, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर, डूंगरपुर, बूंदी, कोटा, बारां और झालावाड़ जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा वैज्ञानिक वर्गीकरण के अंतर्गत आती है।
👉 इसका विस्तार पूर्वी व दक्षिणी राजस्थान तक है।
👉 यह मृदा कृषि योग्य व उपजाऊ मानी जाती है। 

📌 इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा विलोपित (Delete) माना गया है। 

'रेंगती हुई मृत्यु' क्या है ? 

[CET (10+2 पंचम चरण) 11.02.2023]

  • वनों का ह्रास 

  • सूक्ष्म जीवों की मृत्यु 

  • वन्य जीवों की मृत्यु 

  • मृदा उर्वरता का हास

🔹 व्याख्या:

👉 'रेंगती हुई मृत्यु' का अर्थ है मृदा उर्वरता का हास।
👉 यह प्रक्रिया धीरे-धीरे भूमि की उत्पादकता घटने को दर्शाती है।
👉 इसके कारण फसल उत्पादन में कमी आने लगती है।
👉 यह समस्या मृदा अपरदन व मरुस्थलीकरण से जुड़ी होती है। 

निम्न में से कौन-सा एक कारण राजस्थान में मृदा अपरदन से सम्बन्धित नहीं है ? 

[उद्योग प्रचार अधिकारी 22.07.2018]

  • जलीय अपरदन 

  • हिमानी क्रिया 

  • जंगल कटना

  • वायु अपरदन 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मृदा अपरदन के प्रमुख कारणों में जलीय अपरदन और वायु अपरदन दोनों शामिल हैं।
👉 जंगलों का कटाव भी मृदा को असंगठित कर देता है, जिससे अपरदन बढ़ता है।
👉 ये सभी कारण राज्य में मृदा ह्रास के लिए उत्तरदायी हैं। 

राजस्थान में राजस्व बोर्ड की स्थापना कब हुई ?

[वनरक्षक (द्वितीय चरण -B) 11.12.2022]

  • 1950 

  • 1948 

  • 1949 

  • 1951

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में राजस्व बोर्ड की स्थापना वर्ष 1949 में हुई।
👉 यह राज्य का महत्वपूर्ण राजस्व अपीलीय प्राधिकरण है।
👉 इसका मुख्यालय अजमेर में स्थित है।
👉 यह भूमि संबंधी विवादों और अपीलों का निपटारा करता है। 

निम्नलिखित को मिलाएं 

सूची-I (मृदा राजस्थान) 

(a) लाल रेतीली मिट्टी 

(b) पीली, भूरी रेतीली मिट्टी 

(c) लवणीय मिट्टी 

(d) भूरी रेतीली मिट्टी 

सूची-II (जिले) 

  1. पाली, सिरोही, सीकर, झुंझुनू 

  2. नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर 

  3. नागौर, पाली 

  4. नागौर, जोधपुर, पाली, जालौर, चूरू और झुंझुनू 

[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड -II 11.09.2022]

कूट 

  • a-4, b-3, c-2, d-1 

  • a-4, b-3, c-1, d-2 

  • a-1, b-2, c-3, d-4 

  • a-3, b-4, c-1, d-2 

🔹 व्याख्या:

👉 (a) लाल रेतीली मिट्टी — पाई जाती है नागौर, जोधपुर, पाली, जालौर, चूरू और झुंझुनू में।
👉 (b) पीली, भूरी रेतीली मिट्टी — मिलती है नागौर, पाली जिलों में।
👉 (c) लवणीय मिट्टी — पाई जाती है नागौर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर में।
👉 (d) भूरी रेतीली मिट्टी — मिलती है पाली, सिरोही, सीकर, झुंझुनू जिलों में।

सही मिलान है: a-4, b-3, c-2, d-1 

राजस्थान में भूरी मृदा पाई जाती है [*]

[JEN (सिविल) (डिग्रीधारक) 12.09.2021]

  • भरतपुर में

  • जैसलमेर में

  • बाड़मेर में

  • बूँदी में 

🔹 व्याख्या:

👉 भूरी मृदा राजस्थान के भीलवाड़ा, अजमेर और ब्यावर जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा नवीन भूरी मृदा (Brown Soils of Recent Origin) के रूप में जानी जाती है।
👉 यह वर्गीकरण राज्य के कृषि विभाग द्वारा प्रस्तुत तालिका में उल्लेखित है।
👉 यह मृदा कृषि के लिए उपयोगी मानी जाती है। 

📌 "यह प्रश्न बोर्ड द्वारा विलोपित (या रद्द) किया गया है।"

निम्नलिखित में से किस जिले में भूरी मृदाएँ मिलती हैं ? 

[कनिष्ठ अनुदेशक (कोपा) 24.03.2019]

  • नागौर 

  • जालौर 

  • बाडमेर 

  • सवाई माधोपुर

🔹 व्याख्या:

👉 भूरी मृदाएँ राजस्थान में भीलवाड़ा, अजमेर एवं ब्यावर जिलों में मिलती हैं।
👉 यह मृदा नवीन उत्पत्ति की होती है और कृषि के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
👉 इसमें उपजाऊपन सामान्य होता है और सिंचित क्षेत्रों में उपयोगी होती है।

उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में मृदा उर्वरता में अवनयन का प्रमुख क्या कारण है ? 

[वनपाल परीक्षा 06.11.2022]

  • पवन अपरदन 

  • गहन कृषि 

  • जल भराव 

  • नाली अपरदन

🔹 व्याख्या:

👉 उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में मृदा उर्वरता के अवनयन का प्रमुख कारण जल भराव है।
👉 यह समस्या अत्यधिक सिंचाई और जल निकासी के अभाव से उत्पन्न होती है।
👉 इसके कारण मृदा में लवणता और क्षारीयता बढ़ने लगती है।
👉 यह स्थिति फसल उत्पादन को प्रभावित करती है। 

निम्नलिखित में से कौन-सा मृदाओं के द्वितीयक पोषण तत्त्वों का उदाहरण नहीं है ?

[कनिष्ठ अनुदेशक (फिटर) 23.03.2019]

  • बोरोन 

  • पोटाश 

  • मैंगनीज 

  • कॉपर

🔹 व्याख्या:

👉 पोटाश मृदा का एक प्राथमिक पोषक तत्त्व होता है।
👉 द्वितीयक पोषक तत्त्वों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फर शामिल होते हैं।
👉 ये तत्त्व पौधों की वृद्धि में सहायक होते हैं परंतु पोटाश इनमें नहीं आता। 

निम्नलिखित में से किस प्रकार की मृदाएँ लिथोसोल्स भी कहलाती हैं ? 

[आर्थिक अन्वेषक परीक्षा 25.03.2019]

  • लाल मृदाएँ   

  • पर्वतीय मृदाएँ 

  • मरुस्थलीय मृदाएँ 

  • दोमट मृदाएँ 

🔹 व्याख्या:

👉 पर्वतीय मृदाएँ असमान, पथरीले और ढाल वाले क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
👉 इन्हें ही लिथोसोल्स मृदाएँ कहा जाता है।
👉 राजस्थान में यह मृदा उदयपुर, सलुम्बर और कोटा जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में मिलती है।

राजस्थान की मिट्टी के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है ? 

[पुस्तकालयाध्यक्ष 13.11.2016]

  • दक्षिणी भाग में फास्फेटिक शैलों के क्षरण से मिश्रित लाल मिट्टी का निर्माण हुआ है

  • दक्षिणी भाग में ग्रेनाइट, नीस और क्वार्ट्जाइट शैलों से लाल नोमी मिट्टी का निर्माण हुआ है 

  • दक्षिण-पूर्वी भाग में बेसाल्ट लावा के क्षरण से काली मिट्टी का निर्माण हुआ है 

  • थार मरुस्थल में ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर शौलों से बलुई मिट्टी का निर्माण हुआ है 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान की मृदाएँ क्षेत्रीय विविधता के कारण विभिन्न प्रकार की होती हैं।
👉 यहाँ प्रमुख मृदाएँ हैं – जलोढ़, लाल-पीली, काली, रेतीली एवं भूरी मृदा।
👉 मृदा की संरचना पर जलवायु, वनस्पति और स्थलाकृति का गहरा प्रभाव पड़ता है। 

राजस्थान के सर्वाधिक क्षेत्र पर निम्नलिखित में से कौन सी मृदा पायी जाती है ? 

[प्रयोगशाला सहायक 03.02.2019]

  • इनसेप्टिसोल्स 

  • एरिडोसोल्स एवं अल्फीसोल्स 

  • वर्टीसोल्स एवं अल्फीसोल्स

  • एरिडोसोल्स एवं एण्टिसोल्स

🔹 व्याख्या:

👉 एरिडोसोल्स एवं एण्टिसोल्स मृदाएँ राजस्थान के पश्चिमी भाग में विस्तारित हैं।
👉 ये मृदाएँ शुष्क जलवायु के प्रभाव से विकसित हुई हैं।
👉 इनमें रेतीली, पीली-भूरी व लवणीय मृदा के रूप मिलते हैं।
👉 राजस्थान के सर्वाधिक क्षेत्र पर यही मृदाएँ पाई जाती हैं।

रेह, कल्लर एवं ऊसर किस मृदा के अन्य नाम हैं ? 

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (जैविक) 15.09.2019]

  • काली मृदा 

  • लवणीय मृदा 

  • जलोढ़ मृदा

  • लाल मृदा 

🔹 व्याख्या:

👉 रेह, कल्लर एवं ऊसर शब्द लवणीय मृदा के अन्य नाम हैं।
👉 यह मृदा अधिक लवणता और क्षारीयता के कारण कम उपजाऊ होती है।
👉 यह समस्या जल भराव और अनियंत्रित सिंचाई से उत्पन्न होती है।
👉 यह मृदा राजस्थान के कुछ मैदानी भागों में पाई जाती है। 

लाल दोमट मिट्टी पाया जाने वाला जिला है : 

[लिपिक ग्रेड-II 09.09.2018]

  • बीकानेर

  • डूंगरपुर 

  • कोटा 

  • सिरोही 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल-लोमी (दोमट) मृदा राजस्थान के डूंगरपुर जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा उदयपुर के मध्य व दक्षिणी भाग में भी मिलती है।
👉 इसमें लौह अंश के कारण लाल रंग होता है और उपजाऊपन सामान्य होता है। 

निम्न को सुमेलित कीजिए एवं नीचे दिये गये कूट की सहायता से सही उत्तर चुनिये - 

[कनिप्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रोनिक्स) 23.12.2019]

सूची - I  सूची - II 
(1) बलुई मृदा  (i) उदयपुर, डूंगरपुर 
(2) लाल मृदा (ii) बीकानेर, जोधपुर, बाडमेर
(3) काली मृदा (iii) टोंक, अलवर, धौलपुर 
(4) कछारी मृदा (iv) कोटा, बारां, झालावाड 

Code / कूट : 

         (1)   (2)   (3)   (4) 

  • (i)    (ii)   (iii)   (iv)

  • (iii)   (iv)   (i)    (ii) 

  • (ii)   (i)    (iv)   (iii) 

  • (iv)   (iii)   (ii)   (i)

🔹 व्याख्या:

👉 बलुई मृदा का विस्तार बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर जिलों में है।
👉 लाल मृदा प्रमुख रूप से उदयपुर, डूंगरपुर क्षेत्रों में पाई जाती है।
👉 काली मृदा कोटा, बारां, झालावाड़ में मिलती है।
👉 कछारी (जलोढ़) मृदा टोंक, अलवर, धौलपुर जिलों में विस्तृत है। 

राजस्थान के किन जिलों में लाल व पीली मृदा पाई जाती है? 

[बेसिक कम्प्यूटर अनुदेशक 18.06.2022]

  • अजमेर-सिरोही-डूंगरपुर-बांसवाड़ा 

  • सवाई माधोपुर सिरोही-भीलवाड़ा-अजमेर 

  • सवाई माधोपुर-कोटा-बूंदी-भीलवाड़ा 

  • सिरोही-अजमेर-टॉक-जयपुर 

🔹 व्याख्या:

👉 लाल व पीली मृदा राजस्थान के सवाई माधोपुर, सिरोही, भीलवाड़ा और अजमेर जिलों में पाई जाती है।
👉 यह मृदा लौह अंश की प्रधानता के कारण लाल व पीले रंग की होती है।
👉 इसमें नमी धारण करने की क्षमता अधिक होती है।
👉 यह मृदा चीका और दोमट प्रकार की होती है। 

जिप्सीफेरस मिट्टी राजस्थान के किस जिले में मिलती है?

[वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक 19.06.2022]

  • डूंगरपुर 

  • करौली 

  • बीकानेर 

  • कोटा 

🔹 व्याख्या:

👉 जिप्सीफेरस मिट्टी राजस्थान के बीकानेर जिले में पाई जाती है।
👉 यह मृदा कृषि विभागीय वर्गीकरण के अनुसार वर्णित है।
👉 यह मिट्टी मरुस्थलीय मृदाओं में विशेष प्रकार की होती है।
👉 इसका उपयोग मरुस्थली कृषि सुधार में किया जाता है। 

राजस्थान में नाइट्रेट की उपस्थिति के कारण कौन सी मृदा उर्वरक है ? 

[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 25.02.2023]

  • भूरी- रेतीली 

  • लाल रेतीली 

  • लाल-लोमी  

  • लाल-पीली 

🔹 व्याख्या:

👉 भूरी-रेतीली मृदा राजस्थान के पाली, नागौर, सिरोही, सीकर, झुंझुनूं आदि जिलों में पाई जाती है।
👉 इसमें रेत की प्रधानता होती है और नाइट्रेट की उपस्थिति के कारण यह उर्वरक मानी जाती है।
👉 इसमें फास्फेट की मात्रा पर्याप्त होती है।
👉 जल उपलब्धता पर यह अच्छी फसल देती है। 

राजस्थान के मैदानों के उपजाऊ क्षेत्र को निम्नलिखित में से किस नाम से जाना जाता है ?

[SI मोटर वाहन 12.02.2022]

  • रोहि 

  • चार्स 

  • धया 

  • घग्गर 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान के मैदानों के उपजाऊ क्षेत्र को 'रोहि' के नाम से जाना जाता है।
👉 यह नाम विशेषतः जलोढ़ मृदा वाले क्षेत्रों के लिए प्रयुक्त होता है।
👉 यह मृदा पूर्वी राजस्थान के जिलों में पाई जाती है।
👉 'रोहि' क्षेत्र की मृदा उत्पादकता की दृष्टि से श्रेष्ठ मानी जाती है। 

निम्न मृदाओं में से कौन सा प्रकार पश्चिमी राजस्थान में विशिष्टतः पाया जाता है ? 

[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]

  • वर्टीसॉल्स

  • एरिडीसॉल्स 

  • अल्फीसॉल्स 

  • एन्टीसॉल्स 

🔹 व्याख्या:

👉 यूएसडीए (USDA) के अमेरिकी वैज्ञानिकों द्वारा 1991 में किए गए आधुनिक वैज्ञानिक वर्गीकरण के अनुसार, राजस्थान की मृदा को प्रमुख रूप से 5 भागों में विभाजित किया गया है :मृदा का प्रकार मुख्य क्षेत्र,विशेषता

(1). एंटीसोल्स (Entisols)जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू यह सबसे बड़े भू-भाग पर पाई जाने वाली रेतीली मिट्टी है।

(2.) एरिडसोल्स (Aridisols)जोधपुर, बाड़मेर, नागौर, पाली, सीकर, झुंझुनू यह शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में मिलने वाली लाल-पीली व खारी मिट्टी है।

(3.) इनसेप्टिसोल्स (Inceptisols)सिरोही, पाली, राजसमंद, उदयपुर, भीलवाड़ा अरावली पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली अपरिपक्व और पहाड़ी मिट्टी है।

(4). अल्फिसोल्स (Alfisols)जयपुर, अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर, कोटापूर्वी मैदानी भागों में पाई जाने वाली सर्वाधिक उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी

(5.) वर्टिसोल्स (Vertisols)झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी (हाड़ौती क्षेत्र)गहरी मध्यम-काली मिट्टी जो कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त है।

राजस्थान में मृदा में लवणीयता व क्षारीयता की समस्या कहाँ पायी जाती है ? 

[कनिष्ठ वैज्ञानिक सहायक (भौतिक) 21.09.2019]

  • उदयपुर 

  • डूंगरपुर 

  • पाली 

  • राजसमंद 

🔹 व्याख्या:

👉 राजस्थान में मृदा की लवणीयता व क्षारीयता की समस्या पाली जिले में पाई जाती है।
👉 यह समस्या अधिक सिंचाई व जल निकासी के अभाव से उत्पन्न होती है।
👉 इससे मृदा की उर्वरता में गिरावट आती है।
👉 यह स्थिति फसल उत्पादन को प्रभावित करती है।  

पश्चिमी राजस्थान की मिट्टी अम्लीय और क्षारीय तत्वों से संसिक्त कैसे हो जाती है ? 

[प्रयोगशाला सहायक 13.11.2016]

  • मिट्टी की ऊपरी सतह से नीचे की ओर जल रिसाव (water percolation) से 

  • मिट्टी के अपक्षालन (leaching ) से

  • जल के प्रवाह (flow of water) से 

  • मिट्टी की निचली सतह से ऊपर की ओर कोशिकाओं द्वारा जल रिसाव (capillary action of water through cells) से 

🔹 व्याख्या:

👉 पश्चिमी राजस्थान की मृदा में अम्लीय व क्षारीय तत्वों की अधिकता देखी जाती है।
👉 इसका कारण है मृदा की निचली सतह से ऊपर की ओर जल का रिसाव।
👉 यह प्रक्रिया कोशिकाओं द्वारा जल के केशिकाओं में उठने (Capillary Action) के रूप में होती है।