ओसियां के मन्दिर समूह किस वंश की देन है ?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिप्लोमा) 20.05.2022
👉 ओसियां (जोधपुर ग्रामीण) में सातवीं से दसवीं शताब्दी के मध्य अनेक मंदिर बने।
👉 यहाँ श्वेताम्बर जैन मंदिर, सच्चियाय माता मंदिर और सूर्य मंदिर प्रमुख हैं।
👉 इनका निर्माण गुर्जर-प्रतिहार शासकों द्वारा कराया गया।
👉 यह सभी मंदिर प्रतिहार कालीन महामारु शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
👉 इसलिए ओसियां के मंदिर समूह को प्रतिहार वंश की महत्वपूर्ण देन माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – प्रतिहार वंश
गुर्जर प्रतिहार वंश के किस शासक ने अपने पराक्रम से गुर्जरों की प्रतिष्ठा को पुनःस्थापित किया ?
[REET मुख्य परीक्षा (L -2) 28.02.2023]
👉 नागभट्ट द्वितीय (800-833 ई.) ने पाल व राष्ट्रकूट शासकों को हराकर कन्नौज पर अधिकार स्थापित किया।
👉 816 ई. में उसने चक्रायुध को पराजित कर कन्नौज को राजधानी बनाया और साम्राज्य को शक्तिशाली बनाया।
👉 ग्वालियर अभिलेख में इसे परमभट्टारक महाराजाधिराज की उपाधि धारण करने वाला बताया गया है।
👉 इसने पुष्कर घाट और बुचकला विष्णु मंदिर का निर्माण कराया तथा प्रतिहार साम्राज्य को गौरव दिलाया।
👉 उसके पराक्रम से गुर्जर-प्रतिहारों की प्रतिष्ठा पुनःस्थापित हुई और उत्तर भारत में उनकी शक्ति बढ़ी।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट द्वितीय
किस प्रतिहार शासक ने "आदिवराह" की उपाधि धारण की ?
[वरिष्ठ कम्प्यूटर अनुदेशक 19.06.2022]
👉 प्रतिहार शासक मिहिरभोज (836-885 ई.) अपने समय का सबसे शक्तिशाली शासक था।
👉 यह भगवान विष्णु का उपासक था और उसने वैष्णव धर्म को संरक्षण दिया।
👉 मिहिरभोज को ग्वालियर अभिलेख में आदिवराह की उपाधि प्राप्त थी|
👉 मिहिर भोज को दौलतपुर अभिलेख में प्रभास पाटन की उपाधि प्राप्त थी|
👉 इसके समय प्रतिहार साम्राज्य उत्तर भारत में अपनी चरम सीमा पर पहुँचा।
👉 मिहिरभोज के चाँदी व ताँबे के सिक्कों पर भी श्रीमदादिवराह अंकित मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – मिहिरभोज
किराडू का सोमेश्वर मंदिर किस स्थापत्य कला से संबंधित है ?
[वनरक्षक (द्वितीय चरण -B) 11.12.2022]
👉 किराडू (बाड़मेर) का प्रसिद्ध सोमेश्वर मंदिर गुर्जर-प्रतिहार कालीन है।
👉 यह मंदिर महामारु स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
👉 गुर्जर-प्रतिहार शासकों ने 8वीं-10वीं शताब्दी में इस शैली को विकसित किया।
👉 इसी शैली में ओसियां, आभानेरी व आहड़ के मंदिर भी निर्मित हुए।
👉 इस काल की कला में भव्य शिल्प और सूक्ष्म नक्काशी देखने को मिलती है।
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर-प्रतिहार
निम्नलिखित में से कौन दक्षिण भारत का प्रमुख राजवंश नहीं था ?
[Supervisor (महिला) 07.09.2024]
👉 गुर्जर-प्रतिहार का उद्भव राजस्थान में हुआ
👉 प्रारम्भिक केन्द्र मण्डोर और भीनमाल थे
👉 शक्ति का विस्तार उज्जैन व कन्नौज तक हुआ
✍️ सही उत्तर है – प्रतिहार
_____ को पराजित कर प्रतिहारों ने भीनमाल के राज्य पर अधिकार प्राप्त किया।
[CET (10+2 षष्टम चरण) 11.02.2023]
👉 नागभट्ट प्रथम (730 ई.) ने चावड़ाओं को पराजित कर भीनमाल (श्रीमाल) पर अधिकार किया।
👉 इसके बाद इसने जालौर, आबू व उज्जैन को भी जीतकर साम्राज्य का विस्तार किया।
👉 भीनमाल को इसने अपनी राजधानी बनाया और प्रतिहार शक्ति को दक्षिण-पश्चिम में स्थापित किया।
👉 अरब आक्रमणकारियों को हराकर इसने साम्राज्य को और अधिक सुदृढ़ किया।
👉 इसी कारण इसे प्रतिहार साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक कहा गया।
✍️ सही उत्तर है – चावड़ाओं
निम्नलिखित में से कौन से कथन सत्य हैं?
a. कन्नौज के शासक प्रतिहारों को गुर्जर प्रतिहार भी कहा जाता है।
b. प्रख्यात नालंदा विश्वविद्यालय को धर्मपाल द्वारा पुनर्जीवित किया गया था।
c. पाल साम्राज्य की स्थापना धर्मपाल द्वारा की गई थी।
d. प्रथम अपभ्रंश कवि स्वयंभू, पाल दरबार में विद्यमान थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
[REET Mains (L-2) SST 18.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉
प्रतिहार
वंश के
शासकों को गुर्जर
प्रतिहार
भी कहा जाता
है।
👉
नालंदा
विश्वविद्यालय
को धर्मपाल
ने पुनः संरक्षण
और विकास दिया।
👉
जबकि
पाल साम्राज्य
की स्थापना
गोपाल
ने की थी।
👉
इसलिए
कथन (c)
सही
नहीं माना जाता।
✍️ सही उत्तर है – a, b केवल
प्रतिहार वंश का अन्तिम शासक था ?
[पर्यवेक्षक परीक्षा 29.11.2015]
👉 प्रतिहार वंश का अन्तिम शासक यशपाल (1036 ई.) था।
👉 इलाहाबाद (प्रयागराज) के कड़ा नामक स्थान से इसका शिलालेख मिला है।
👉 इस लेख में यशपाल के दान का उल्लेख मिलता है।
👉 इसके बाद किसी अन्य प्रतिहार नरेश का नाम ज्ञात नहीं होता।
👉 1093 ई. में कन्नौज पर गहड़वाल वंश के चन्द्रदेव ने अधिकार कर लिया।
✍️ सही उत्तर है – यशपाल
गुर्जर प्रतिहार राजवंश की स्थापना किसके द्वारा की गई थी ?
[Patwar Exam (Shift II) 17.08.2025]
👉 नागभट्ट प्रथम गुर्जर-प्रतिहार वंश का संस्थापक था, जिसकी राजधानी कन्नौज थी।
👉 वल्लभराज और नागभट्ट द्वितीय ने साम्राज्य की सुदृढ़ता और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
👉 मिहिर भोज इस वंश का सबसे शक्तिशाली शासक माना जाता है, जिसके शासन में साम्राज्य काबुलवाड़ी से बिहार और कश्मीर से नर्मदा तक फैला।
👉 महेंद्रपाल ने अपने राज्य को बंगाल और मगध तक बढ़ाया, जिससे प्रतिहारों की शक्ति और प्रतिष्ठा और भी बढ़ी।
👉 प्रतिहार वंश ने 8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच उत्तरी और पश्चिमी भारत पर शासन किया तथा विदेशी आक्रमणों से भारत की रक्षा की।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट I
महामारु मंदिर निर्माण वास्तुशैली के संरक्षक थे :
[अन्वेषक परीक्षा 27.12.2020]
👉 राजस्थान में गुर्जर-प्रतिहार काल में मंदिर निर्माण की विशेष शैली विकसित हुई।
👉 इस शैली को महामारु वास्तुशैली कहा जाता है।
👉 प्रतिहार शासकों ने 8वीं से 10वीं शताब्दी में अनेक मंदिरों का निर्माण कराया।
👉 प्रमुख उदाहरण केकीन्द, किराडू, आभानेरी, आहड़, ओसियां, राजौरगढ़ और बरोली हैं।
👉 इसलिए महामारु मंदिर निर्माण शैली के प्रमुख संरक्षक प्रतिहार शासक थे।
✍️ सही उत्तर है – प्रतिहार
गुर्जर प्रतिहार वंश के किस शासक ने अपनी राजधानी मण्डोर से मेड़ता स्थानान्तरित की थी
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड - III 19.09.2019]
👉 प्रतिहार वंश का शासक नागभट्ट प्रथम हरिश्चन्द्र की शाखा से संबंधित था।
👉 इसने मण्डोर को छोड़कर अपनी राजधानी मेड़ता (मेड़न्तकपुर/मेान्तक) बनाई।
👉 शिलालेखों में इसे राम का प्रतिहार कहा गया है।
👉 इसकी रानी जज्जिका देवी थी, जिससे दो पुत्र तात और भोज हुए।
👉 नागभट्ट प्रथम महत्वाकांक्षी शासक था और उसने अपने साम्राज्य का विस्तार किया।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट
राजस्थान में प्रतिहार वंश के संस्थापक हरिश्चन्द्र की राजधानी कौन सी थी ?
[वनरक्षक (चतुर्थ चरण) 13.11.2022]
👉 प्रतिहार वंश के आदि पुरुष हरिश्चन्द्र का उल्लेख घटियाला शिलालेख में मिलता है।
👉 हरिश्चन्द्र के चारों पुत्रों ने मिलकर मण्डोर (मांडव्यपुर) को जीता।
👉 यहाँ प्राचीर का निर्माण कर उन्होंने गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य की नींव रखी।
👉 इसलिए हरिश्चन्द्र की राजधानी मण्डोर थी।
👉 मण्डोर से ही प्रतिहारों का राजनीतिक उदय प्रारम्भ हुआ।
✍️ सही उत्तर है – मण्डोर
राजस्थान में 33 करोड़ देवी / देवताओं की साल' कहाँ स्थित है ?
[पुस्तकालयाध्यक्ष ग्रेड -II 11.09.2022]
👉 राजस्थान में मण्डोर प्रसिद्ध साल के लिए जाना जाता है।
👉 इसे 33 करोड़ देवी-देवताओं की साल कहा जाता है।
👉 यहाँ प्रतिहार कालीन मन्दिर, मूर्तियाँ और शिल्पकला देखने को मिलती है।
👉 मण्डोर प्रतिहारों का प्रारम्भिक राजनीतिक केन्द्र भी रहा था।
👉 यह स्थल धार्मिक व सांस्कृतिक महत्त्व का प्रमुख प्रमाण है।
✍️ सही उत्तर है – मण्डोर
प्रतिहार शासक ____ के शासन काल में जैन ग्रन्थ हरिवंशपुराण एवं कुवलयमाला की रचना हुयी।
[CET (10+2 द्वितीय चरण) 04.02.2023]
👉 प्रतिहार शासक वत्सराज (775-800 ई.) के समय में अनेक साहित्यिक कृतियाँ रची गईं।
👉 778 ई. में उद्योतनसूरि ने प्रसिद्ध ग्रन्थ कुवलयमाला की रचना की।
👉 781 ई. में जिनसेन सूरि ने हरिवंशपुराण की रचना भीनमाल में की।
👉 वत्सराज ने भीनमाल में राजसूय यज्ञ कर 1000 ब्राह्मणों को चाँदी की मुद्राएँ दान दीं।
👉 इसी काल में प्रतिहार साम्राज्य का सांस्कृतिक व धार्मिक उत्थान हुआ।
✍️ सही उत्तर है – वत्सराज
निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तक गुर्जर प्रतिहार वंश के मिहिर भोज द्वारा रचित नहीं है ?
JEN (विद्युत/यांत्रिक, डिग्री) 20.05.2022
👉 प्रतिहार शासक मिहिरभोज (836-885 ई.) को वैष्णव धर्म का महान संरक्षक माना गया।
👉 इसके साथ ही इसे “आदिवराह” की उपाधि भी मिली थी।
✍️ सही उत्तर है – धर्म संग्रह
चावडों का सबसे प्राचीन राज्य कौनसा था ?
[पशुधन सहायक (LSA) 21.08.2016]
👉 राजस्थान में अधिवास करने वाले चावड़ा राजपूत एक प्राचीन राजवंश थे।
👉 चावड़ों का राज्य भीनमाल, वडवाण (काठियावाड़) और अन्हिलवाड़ा में प्रमाणित होता है।
👉 इनमें से सबसे प्राचीन राज्य भीनमाल था।
👉 914 ई. के धरणीवराह दानपत्र में चावड़ों को भगवान शंकर की चाप से उत्पन्न बताया गया।
👉 इसलिए चावड़ों को चापवंशी भी कहा गया है।
✍️ सही उत्तर है – भीनमाल
निम्नलिखित प्रतिहार शासकों में से किसने मण्डोर को बदलकर मेड़ता को राजधानी बनाया ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (इलेक्ट्रिशियन) 24.03.2019]
👉 प्रतिहार वंश के नागभट्ट प्रथम ने अपनी महत्वाकांक्षा के कारण राजधानी बदली।
👉 इसने मण्डोर से राजधानी को मेड़ता (मेड़न्तकपुर/मेान्तक) स्थानान्तरित किया।
👉 शिलालेखों में इसे राम का प्रतिहार कहा गया है।
👉 इसकी रानी जज्जिका देवी थी, जिससे दो पुत्र तात और भोज हुए।
👉 नागभट्ट प्रथम ने साम्राज्य का विस्तार कर अपनी शक्ति को और अधिक मजबूत किया।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट प्रथम
राजौरगढ़ के कलात्मक वैभव किस काल से संबंधित हैं ?
[कनिष्ठ अनुदेशक (कार्यशाला) 10.09.2022]
👉 राजस्थान में गुर्जर-प्रतिहार शैली का विकास 8वीं शताब्दी में हुआ।
👉 इस शैली को महामारु शैली भी कहा जाता है।
👉 इस शैली के मंदिर केकीन्द (मेड़ता), किराडू, आहड़ और आभानेरी में बने।
👉 प्रमुख उदाहरण राजौरगढ़, ओसियां और बरोली मंदिर परिसर भी हैं।
👉 ये सभी स्थल गुर्जर-प्रतिहार कालीन स्थापत्य वैभव को दर्शाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर-प्रतिहार
आभानेरी तथा राजौरगढ के कलात्मक वैभव किस काल से सम्बन्धित हैं ?
[CET (स्नातक) (चरण -III) 08.01.2023]
👉 आभानेरी (दौसा) के भव्य मन्दिर व प्रतिमाएँ गुर्जर-प्रतिहार काल की हैं।
👉 यहाँ का प्रसिद्ध आदिवराह मन्दिर उसी समय निर्मित हुआ।
👉 राजौरगढ़ (अलवर) में भी प्रतिहार कालीन नीलकण्ठ मन्दिर व शिलालेख प्राप्त हुए।
👉 प्रतिहार काल (8वीं-10वीं शताब्दी) में महामारु शैली का विकास हुआ।
👉 यह काल गुर्जर-प्रतिहारों के सांस्कृतिक और स्थापत्य वैभव को दर्शाता है।
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर-प्रतिहार
किस गुर्जर प्रतिहार शासक ने अपनी राजधानी मेड़ता बनाई ?
[PTI ग्रेड -III 30.09.2018]
👉 गुर्जर-प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) महत्वाकांक्षी राजा था।
👉 इसने मण्डोर को छोड़कर अपनी राजधानी मेड़ता (मेड़न्तकपुर/मेान्तक) बनाई।
👉 शिलालेखों में नागभट्ट प्रथम को राम का प्रतिहार कहा गया है।
👉 इसकी रानी जज्जिका देवी थी, जिससे पुत्र तात और भोज उत्पन्न हुए।
👉 नागभट्ट प्रथम ने साम्राज्य का विस्तार कर प्रतिहार शक्ति को सुदृढ़ किया।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट प्रथम