सन् 1437 में मेवाड़-मालवा युद्ध का तात्कालीन कारण क्या था ?
[ATO परीक्षा 27.07.2021]
👉 सन् 1437 ई. में मेवाड़ और मालवा के बीच युद्ध हुआ।
👉 उस समय मेवाड़ का शासक महाराणा कुम्भा था।
👉 युद्ध का तात्कालिक कारण मालवा शासक का महपा पँवार को सौंपने से इंकार था।
👉 कुम्भा ने इस कारण मालवा पर आक्रमण किया और सारंगपुर की विजय प्राप्त की।
👉 इस विजय के उपलक्ष्य में कुम्भा ने कीर्ति स्तम्भ का निर्माण करवाया।
✍️ सही उत्तर है – मालवा का महपा पँवार को मेवाड़ को सौंपने से इंकार
महाराणा प्रताप ने मुख्य प्रधान के रूप में भामाशाह की नियुक्ति किसे हटाकर की थी ?
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 27.06.2025]
👉 महाराणा प्रताप (1572–1597 ई.) मेवाड़ के सर्वाधिक गौरवशाली शासक थे।
👉 उनका जन्म 9 मई, 1540 ई. को कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ।
👉 उन्होंने अकबर की अधीनता अस्वीकार कर स्वतंत्रता संघर्ष किया।
👉 1576 ई. में उन्होंने मुगलों के विरुद्ध हल्दीघाटी युद्ध लड़ा।
👉 19 जनवरी, 1597 ई. को चावण्ड के पास बाण्डोली गाँव में उनका निधन हुआ।
👉 महाराणा प्रताप ने मेवाड़ की स्वतंत्रता रक्षा हेतु योग्य सहयोगियों को महत्व दिया।
👉 यह नियुक्ति पूर्व प्रधान रामा को हटाकर की गई थी।
✍️ सही उत्तर है – रामा
निम्नलिखित में कौनसा गुप्तोत्तर काल में गुहिल वंश का केन्द्र नहीं था ?
[सहायक आचार्य (इतिहास) 12.09.2024]
👉 गुप्तोत्तर काल में राजस्थान में कई स्थानीय राजवंश उभरे।
👉 इनमें प्रमुख गुहिल वंश था, जिसने आगे चलकर मेवाड़ पर शासन किया।
👉 शिलालेखों और प्रशस्तियों में गुहिल वंश का प्रारंभिक केन्द्र वर्णित है।
👉 गुप्तोत्तर काल में गुहिल वंश का केन्द्र आहड़ (आनंदपुर), मेदपाट, किष्किन्धा, चाटसू रहा।
👉 यहीं से वंशजों ने आगे चलकर मेवाड़ में अपनी शक्ति स्थापित की।
✍️ सही उत्तर है – अहिछत्रपुर
सुल्तान इल्तुतमिश के अभियान के दौरान मेवाड़ का शासक कौन था ?
[Asst. Testing Officer 08.07.2025]
👉 दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने 13वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में मेवाड़ पर आक्रमण किया।
👉 उस समय मेवाड़ का शासक रावल जैत्रसिंह (1213–1250 ई.) था।
👉 1227 ई. में जैत्रसिंह ने भूताला के युद्ध में इल्तुतमिश की सेना को हराया।
👉 उसकी शक्ति का वर्णन चीरवा शिलालेख और ग्रंथ हम्मीर मदमर्दन में मिलता है।
👉 जैत्रसिंह ने चित्तौड़ को अपनी राजधानी बनाकर मेवाड़ की प्रतिष्ठा बढ़ाई।
✍️ सही उत्तर है – रावल जैत्रसिंह
निम्नलिखित में से कौनसा गुहिल शासक कन्नौज के हर्षवर्धन का समकालीन था ?
[Asst. Prof. (History) 17.05.2024]
👉 गुहिल वंश का एक प्रमुख शासक शिलादित्य था।
👉 उसने भीलों को परास्त कर अपनी पैतृक भूमि पर पुनः अधिकार किया।
👉 उसका नाम आटपुर प्रशस्ति (977 ई.) में मिलता है।
👉 शिलादित्य को कन्नौज के महान शासक हर्षवर्धन का समकालीन माना गया।
✍️ सही उत्तर है – शिलादित्य
निम्नांकित विद्वानों में से किसने गुहिलों की क्षत्रिय वंश से उत्पत्ति मानी है ?
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
👉 गुहिल वंश की उत्पत्ति को लेकर अनेक मत प्रचलित हैं।
👉 अबुल फज़ल ने इन्हें ईरान के नौशेरवा से जोड़ा।
👉 डी.आर. भण्डारकर और नैणसी ने इन्हें ब्राह्मण वंशीय माना।
👉 जबकि इतिहासकार गौरीशंकर हीराचन्द ओझा ने गुहिलों की उत्पत्ति को क्षत्रिय वंश से माना।
👉 ओझा ने 566 ई. के आसपास गुहिल द्वारा शासन स्थापना का उल्लेख किया।
✍️ सही उत्तर है – गौरीशंकर हीराचन्द ओझा
किस गुहिल शासक ने इल्तुतमिश की सेना को भूताला की लड़ाई में पीछे धकेला था ?
[Deputy Commandant 11.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉
भूताला
युद्ध (1227)
में
रावल
जैत्र सिंह
विजयी रहे।
👉
उन्होंने
इल्तुतमिश
सेना को
पराजित
कर पीछे हटाया।
👉
भागते
समय सेना ने
नागदा
नगरी को
नष्ट
किया।
👉
इसके
बाद चित्तौड़गढ़
को नई राजधानी
बनाया गया।
👉
यह
काल मेवाड़
स्वर्णकाल
के रूप में
प्रसिद्ध
है।
✍️ सही उत्तर है – जैत्र सिंह
निम्न में से किस राजपूत शासक ने "सारंगपुर के युद्ध” में मालवा के सुल्तान को परास्त किया था ?
[Asst. Testing Officer 08.07.2025]
👉 1437 ई. में मेवाड़ और मालवा के बीच सारंगपुर का युद्ध हुआ।
👉 मेवाड़ की ओर से शासक महाराणा कुम्भा ने नेतृत्व किया।
👉 इस युद्ध में कुम्भा ने मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम को पराजित किया।
👉 विजय के उपलक्ष्य में कुम्भा ने चित्तौड़गढ़ में कीर्ति स्तम्भ का निर्माण करवाया।
👉 इससे कुम्भा की कीर्ति चारों ओर प्रसारित हुई।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा कुम्भा
निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तकें महाराणा कुम्भा के प्रसिद्ध शिल्पी गोविन्द द्वारा लिखी गई थीं ?
A. उद्धारधोरणी
B. कलानिधि
C. राजवल्लभ
D. द्वारदीपिका
सही कूट का चयन कीजिए :
[कृषि अधिकारी 20.04.2025]
👉 महाराणा कुम्भा के दरबार में कई विद्वान और शिल्पी सक्रिय थे।
👉 उनके प्रसिद्ध शिल्पी गोविन्द ने कई महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की।
👉 गोविन्द द्वारा लिखित प्रमुख कृतियाँ हैं – उद्धारधोरणी, कलानिधि और द्वारदीपिका।
👉 इन कृतियों से उस समय की कला, स्थापत्य और संस्कृति की जानकारी मिलती है।
👉 यह कृतियाँ कुम्भा के समय मेवाड़ की बौद्धिक उन्नति को दर्शाती हैं।
✍️ सही उत्तर है – A, B और D
मेवाड़ शासक राजसिंह ने मुगल अधिकृत मेवाड़ के सीमान्त भागों के परगनों को लेना आरम्भ किया।
उक्त कथन के सम्बन्ध में कौनसा/से कथन सत्य है/हैं?
(A) टीका दौड़ की रस्म के बहाने मुगल चौकियों पर धावा बोलने की योजना बनाई।
(B) पहली मुगल चौकी मांडल थी।
(C) इस अभियान में 58000₹ प्राप्त हुये।
सही कूट का चयन कीजिए -
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]
👉 मेवाड़ के शासक महाराणा राजसिंह (1652–1680 ई.) ने मुगलों से संघर्ष किया।
👉 उन्होंने टीका दौड़ की रस्म को एक रणनीति के रूप में प्रयोग किया।
👉 इस रस्म के बहाने मुगलों की सीमा चौकियों पर धावा बोलने की योजना बनाई गई।
✍️ सही उत्तर है – केवल (A)
अबुल फजल ने निम्नलिखित में से किस वंश को ईरान के शासक नौशे खां से सम्बन्धित माना है ?
[सहायक आचार्य (इतिहास) 12.09.2024]
👉 राजस्थान में शासक रहे गुहिल वंश की उत्पत्ति को लेकर कई मत प्रचलित हैं।
👉 अबुल फज़ल ने गुहिलों को ईरान के शासक नौशे खाँ से संबंधित बताया।
👉 अन्य विद्वानों ने इन्हें वल्लभी या ब्राह्मण वंशीय भी माना है।
👉 परंतु अबुल फज़ल का स्पष्ट मत था कि गुहिल वंश की जड़ें ईरान से जुड़ी हैं।
✍️ सही उत्तर है – गुहिल वंश
उदयपुर का एकलिंग महादेव मंदिर किसने बनवाया ?
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 18.10.2022]
👉 बप्पा रावल (734–753 ई.) गुहिल वंश का प्रतापी शासक था।
👉 उसे ‘हिन्दुआ सूरज’ की उपाधि धारण करने का गौरव प्राप्त हुआ।
👉 उसकी राजधानी नागदा थी, जहाँ उसकी समाधि और मंदिर बने।
👉 उसने कैलाशपुरी में एकलिंगजी (लकुलीश) मंदिर का निर्माण कराया।
👉 उसका वास्तविक नाम कालभोज था, ‘बप्पा’ केवल उसकी उपाधि थी।
✍️ सही उत्तर है – बप्पा रावल
"गुहिल, एक स्वतंत्र एवं विस्तृत राज्य का स्वामी था", यह तथ्य किस मुद्रा संग्रह से प्रमाणित होता है ?
[Asst. Prof. (History-II) 10.12.2025]
🔹 व्याख्या
👉
गुहिल
के स्वतंत्र
राज्य का प्रमाण
मुद्रा
संग्रह
से मिलता है।
👉
यह
प्रमाण विशेष
रूप से सांभर
संग्रह
में उपलब्ध
है।
👉
यहाँ
प्राप्त मुद्राएँ
शासकीय
अधिकार
दर्शाती हैं।
👉
इसलिए
इससे उसका स्वतंत्र
राज्य
सिद्ध होता
है।
✍️ सही उत्तर है – सांभर संग्रह
महाराणा प्रताप के पास अकबर द्वारा विभिन्न मुगल अधिकारियों के नेतृत्व में भेजे गए शिष्टमण्डलों को कालक्रमानुसार व्यवस्थित करिए तथा नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए ।
A. भगवन्तदास
B. मानसिंह
C. टोडरमल
D. जलाल खाँ
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
कूट :
👉 अकबर ने महाराणा प्रताप को अधीन कराने हेतु चार शिष्टमण्डल भेजे।
👉 सबसे पहले दूत के रूप में जलाल खाँ भेजा गया।
👉 इसके बाद दूसरा शिष्टमण्डल मानसिंह के नेतृत्व में आया।
👉 तीसरे शिष्टमण्डल का नेतृत्व भगवन्तदास ने किया।
👉 अंत में चौथे शिष्टमण्डल का नेतृत्व टोडरमल ने किया।
✍️ सही उत्तर है – D → B → A → C
शासक, जो विद्वान योगेश्वर एवं भट्टविष्णु का संरक्षक था
[Deputy Commandant 23.08.2020]
👉 मेवाड़ का शासक राणा मोकल (1421–1433 ई.) कला और साहित्य का संरक्षक था।
👉 उसने चित्तौड़ में समिद्धेश्वर (समाधिश्वर) मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।
👉 उसके दरबार में कई विद्वान एवं आचार्य आश्रय पाते थे।
👉 मोकल विशेष रूप से विद्वान योगेश्वर और भट्टविष्णु का संरक्षक था।
👉 इससे उसके दरबार की बौद्धिक गरिमा बढ़ी।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ का राणा मोकल
निम्नलिखित में से किस मुगल सेनानायक को दिवेर के युद्ध में महाराणा प्रताप ने परास्त किया था ?
[EO RO (Re Exam) 23 मार्च 2025]
👉 1582 ई. में महाराणा प्रताप ने मुगलों पर निर्णायक आक्रमण किया।
👉 यह संघर्ष मेवाड़ के दिवेर क्षेत्र में हुआ।
👉 यहाँ मुगलों की चौकी का नेतृत्व अकबर के चाचा सुल्तान खाँ कर रहे थे।
👉 प्रताप के पुत्र अमरसिंह ने भाले के प्रहार से सुल्तान खाँ को मार गिराया।
👉 इस विजय के बाद सम्पूर्ण पर्वतीय भाग पर प्रताप का प्रभुत्व स्थापित हुआ।
✍️ सही उत्तर है – सुल्तान खाँ
1948 में किसे मत्स्य संघ का राजप्रमुख बनाया गया था ?
[Asst. Prof. (History) 30.06.2016]
👉 स्वतंत्रता के बाद राजस्थान में कई संघों का गठन हुआ।
👉 यह संघ 18 मार्च, 1948 ई. को अस्तित्व में आया।
👉 मत्स्य संघ का प्रथम राजप्रमुख भरतपुर के शासक महाराजा उदयभानु सिंह बने।
✍️ सही उत्तर है – महाराजा उदयभानु सिंह
मेवाड़ के राज चिन्ह में एक ओर भील एवं दूसरी ओर राजपूत के अंकन की प्रथा किस मेवाड़ शासक के काल में प्रारंभ हुई?
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]
👉 मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप ने कठिन समय में भीलों को साथ जोड़ा।
👉 प्रताप ने अपनी सैन्य-व्यवस्था में भीलों को उच्च स्थान दिए।
👉 उन्होंने मेवाड़ के राजचिन्ह में भीलों और राजपूतों दोनों का अंकन करवाया।
👉 यह प्रथा प्रताप की समानता और संगठन नीति को दर्शाती है।
👉 इससे भील और राजपूत एकजुट होकर मुगलों के विरुद्ध संघर्षरत रहे।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा प्रताप
निम्नलिखित में से किस शासक के द्वारा नव-मुसलमानों को आश्रय देना दिल्ली सुल्तान से युद्ध का कारण बना ?
[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]
🔹 व्याख्या
👉
नव-मुसलमानों
को आश्रय
देने से संघर्ष
उत्पन्न
हुआ।
👉
यह
कारण दिल्ली
सुल्तान से
युद्ध
बना।
👉
यह
कार्य हम्मीर
द्वारा किया
गया।
✍️ सही उत्तर है – हम्मीर
गुहिल वंश में किसने कैलाशपुरी में एकलिंगजी (लकुलीश) का मंदिर बनवाया था ?
[EO RO (Shift I) 14.05.2023]
👉 गुहिल वंश के प्रतापी शासक बप्पा रावल (734–753 ई.) का शासन नागदा से था।
👉 उसने अपने समय में अनेक धार्मिक निर्माण करवाए।
👉 बप्पा रावल ने कैलाशपुरी में एकलिंगजी (लकुलीश) मंदिर का निर्माण कराया।
👉 एकलिंगजी को गुहिल वंश का इष्टदेवता माना गया।
👉 इस कारण मेवाड़ के सभी शासक स्वयं को एकलिंगजी का दीवान कहते थे।
✍️ सही उत्तर है – बप्पा रावल
निम्नांकित में से कौन से युद्ध में तांत्या टोपे ने झालावाड़ के राज राणा पृथ्वीसिंह को पराजित किया ?
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
👉 रेलायता के युद्ध में तांत्या टोपे ने भाग लिया।
👉 इसमें उसने झालावाड़ के राजराणा पृथ्वीसिंह को पराजित किया।
✍️ सही उत्तर है – रेलायता का युद्ध
कुम्भाकालीन मंदिरों के शिखर में किस शैली का प्रयोग हुआ है ?
[सहायक आचार्य (इतिहास) 12.09.2024]
👉 मेवाड़ के शासक महाराणा कुम्भा (1433–1468 ई.) कला और स्थापत्य के महान संरक्षक थे।
👉 उनके काल में अनेक मंदिर और दुर्ग का निर्माण हुआ।
👉 कुम्भाकालीन मंदिरों के शिखरों में विशिष्ट स्थापत्य दिखाई देता है।
👉 इन मंदिरों में प्रमुख रूप से नागर शैली का प्रयोग किया गया।
👉 रणकपुर, कुम्भलगढ़ और चित्तौड़गढ़ में इसके उदाहरण मिलते हैं।
✍️ सही उत्तर है – नागर शैली
निम्नलिखित में से कौनसा सेनानायक हल्दीघाटी के युद्ध के दौरान महाराणा प्रताप के सैन्य संरचना के किसी भाग का नेतृत्व नहीं कर रहा था ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]
👉 जगन्नाथ कछवाहा हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना का हिस्सा नहीं थे।
👉 वे मुगल सेना में शामिल थे और अकबर के सेनापति मान सिंह के अधीन युद्ध में भाग लेते थे।
👉 इसलिए जगन्नाथ कछवाहा को महाराणा प्रताप की सेना का सेनानायक मानना गलत है।
👉 हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना का मुख्य नेतृत्व स्वयं महाराणा प्रताप ने संभाला था।
✍️ सही उत्तर है – जगन्नाथ कछवाहा
निम्नलिखित में से कौन सा गुहिल शासक 'शिलादित्य' के नाम से जाना जाता है ?
[Deputy Jailor Exam 13.07.2025]
👉 बप्पा रावल (734–753 ई.) गुहिल वंश का प्रतापी शासक था।
👉 उसने ‘हिन्दुआ सूरज’ की उपाधि धारण कर मेवाड़ की प्रतिष्ठा बढ़ाई।
👉 उसकी राजधानी नागदा थी, जहाँ उसकी समाधि और मंदिर स्थित हैं।
👉 बप्पा रावल ने कैलाशपुरी में एकलिंगजी (लकुलीश) मंदिर का निर्माण करवाया।
👉 उसका वास्तविक नाम कालभोज था, ‘बप्पा’ व शिलादित्य केवल उसकी उपाधि थी।
👉 बप्पा रावल की उपाधि चकवै,राजगुरु व हिंदूजा सूरज थी|
✍️ सही उत्तर है – बप्पा रावल
हल्दीघाटी के युद्ध के बाद निम्नलिखित में से किन सेनानायकों के नेतृत्व में अकबर ने महाराणा प्रताप के विरुद्ध सैनिक अभियान भेजे ?
(a) अब्दुरहीम खान-ए-खाना
(b) शाहबाज खान
(c) जगन्नाथ कछावा
(d) अब्दुल्ला खान
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए:
[Asst. Prof. (History) 30.06.2016]
👉 1576 ई. के हल्दीघाटी युद्ध के बाद अकबर ने प्रताप को अधीन करने हेतु कई अभियान चलाए।
👉 इनमें मुगल सेनापति शाहबाज खाँ को तीन बार मेवाड़ भेजा गया।
👉 बाद में अब्दुर्रहीम खान-ए-खाना को भी प्रताप के विरुद्ध अभियान का नेतृत्व सौंपा गया।
👉 अकबर ने प्रताप को पकड़ने के लिए जगन्नाथ कछवाहा को भी बड़ी सेना के साथ भेजा।
✍️ सही उत्तर है – a, b और c
निम्न में से राणा सांगा के बारे में कौन सा/से कथन सही है/हैं ?
A.
राणा
सांगा ने मेहँदी
ख्वाजा से बयाना
का दुर्ग छीन
लिया था।
B.
राजपूत
सेना ने भुसावर
में पड़ाव डालकर
बाबर को काबुल
एवं दिल्ली
से मिलने वाली
सहायता से रोक
दिया था।
कूट :
[Asst. Prof. (History-II) 10.12.2025]
🔹 व्याख्या
👉
राणा
सांगा
ने मेहँदी
ख्वाजा
से बयाना दुर्ग
छीना।
👉
राजपूत
सेना ने भुसावर
पड़ाव
डालकर मार्ग
रोका।
👉
इससे
बाबर को सहायता
आपूर्ति
में बाधा हुई।
👉
इसलिए
A
और
B
दोनों
सही हैं।
✍️ सही उत्तर है – A एवं B दोनों सही हैं।
हल्दीघाटी युद्ध के पश्चात्, महाराणा प्रताप ने मेवाड़ के मुगलों द्वारा जीते गए प्रदेशों में निम्न में से किनकों छोड़कर सभी पर अधिकार करने में सफलता प्राप्त कर ली थी?
(A) माण्डलगढ़
(B) कुंभलगढ़
(C) चावण्ड
(D) चित्तौड़
सही उत्तर का चयन कीजिए
[Deputy Commandant 11.01.2026]
🔹 व्याख्या
👉 प्रताप ने छापामार युद्ध द्वारा मेवाड़ के अधिकांश क्षेत्रों को पुनः जीत लिया था।
👉 महाराणा ने चित्तौड़गढ़ और माण्डलगढ़ के किलों पर पुनः अधिकार नहीं कर पाए थे।
👉 चावण्ड को महाराणा प्रताप ने अपनी नई आपातकालीन राजधानी के रूप में विकसित किया।
✍️ सही उत्तर है – (A) एवं (D)
महाराणा सांगा ने बयाना का दुर्ग बाबर के निम्न में से किस गवर्नर से जीता था ?
[स्कूल व्याख्याता GK (C) 03.07.2025]
👉 1527 ई. में खानवा युद्ध से पहले राणा सांगा और बाबर की सेनाएँ आमने-सामने हुईं।
👉 इस संघर्ष में राणा सांगा ने बयाना दुर्ग पर आक्रमण किया।
👉 उस समय बयाना दुर्ग का मुगल गवर्नर मेहँदी ख्वाज़ा था।
👉 राणा सांगा ने उसे हराकर दुर्ग पर अधिकार कर लिया।
👉 इस विजय से बाबर के विरुद्ध राणा सांगा की स्थिति और भी मजबूत हुई।
✍️ सही उत्तर है – मेहँदी ख्वाज़ा
निम्नलिखित में से कौन हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना में शामिल था ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- B) 08.09.2025]
👉 शालिवान हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना के साथ लड़े थे, वे मुगल पक्ष में नहीं थे।
👉 वे प्रताप की ओर से युद्ध करने वाले निष्ठावान योद्धा माने जाते हैं।
👉 दूसरी ओर मान सिंह मुगल सम्राट अकबर की सेना के मुख्य सेनापति थे।
👉 इसलिए मान सिंह का महाराणा प्रताप की सेना में होना सही नहीं है।
✍️ सही उत्तर है – शालिवान
जयपुर के महाराजा राम सिंह के दरबारी संगीतज्ञ कौन थे ?
[सहायक आचार्य (इतिहास) 12.09.2024]
👉 जयपुर के महाराजा रामसिंह कला और संगीत प्रेमी शासक थे।
👉 उनके दरबार में कई विद्वान और संगीतज्ञ उपस्थित रहते थे।
👉 इनमें प्रमुख दरबारी संगीतज्ञ मुहम्मद अली ख़ाँ थे।
👉 उन्होंने दरबार में संगीत की परंपरा और प्रतिष्ठा को ऊँचा किया।
✍️ सही उत्तर है – मुहम्मद अली ख़ाँ
मेवाड़ के किस महाराजा के अनुरोध पर श्यामलदास ने 'वीर विनोद' का लेखन कार्य प्रारम्भ किया ?
[भूवैज्ञानिक परीक्षा 07.05.2025]
👉 मेवाड़ के प्रसिद्ध इतिहासकार श्यामलदास ने वीर विनोद नामक ग्रंथ की रचना की।
👉 यह ग्रंथ मेवाड़ का एक प्रामाणिक इतिहास माना जाता है।
👉 श्यामलदास ने इसे मेवाड़ के महाराणा के आग्रह पर लिखना प्रारम्भ किया।
👉 यह आग्रह मेवाड़ के शासक महाराणा शंभूसिंह (1861–1874 ई.) का था।
👉 इसी कारण ‘वीर विनोद’ का लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा शंभूसिंह
राणा हम्मीर ने चित्तौड़गढ़ पर निम्न में से किस सुल्तान के शासनकाल में अधिकार किया था ?
[स्कूल व्याख्याता GK (C) 03.07.2025]
👉 राणा हम्मीर (1326–1364 ई.) ने मेवाड़ में गुहिल वंश की पुनः पुनर्स्थापना की।
👉 उसने चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर पुनः अधिकार किया।
👉 यह घटना दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में हुई।
👉 कुम्भलगढ़ शिलालेख में हम्मीर को विषमघाटी पंचानन कहा गया है।
👉 उसे मेवाड़ का उद्धारक माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – मोहम्मद बिन तुगलक
राणा प्रताप और अकबर के मध्य संघर्ष से सम्बंधित निम्नलिखित कथनों में से कौनसे सत्य हैं ?
i. अकबर के राणा प्रताप के सौतेले भाई जगमाल को प्रलोभित करके जहाजपुर की जागीर प्रदान की
ii, मानसिंह के चले जाने के पश्चात् राणा प्रताप ने गोगुन्दा को पुन हस्तगत कर लिया
iii, राणा प्रताप ने ईडर के नारायणदास को अकबर के विरुद्ध विद्रोह करने को उकसाया
iv. राणा प्रताप को पकड़ने का अंतिम असफल प्रयास 1584-85 में छेड़ा गया, जब जगन्नाथ कच्छावा को एक बड़ी सैन्य टुकड़ी के साथ भेजा गया
सही उत्तर चुनिए :
[Asst. Prof. (History) 30.06.2016]
👉 अकबर ने प्रताप के सौतेले भाई जगमाल को प्रलोभित कर जहाजपुर की जागीर दी।
👉 हल्दीघाटी युद्ध (1576 ई.) के बाद मानसिंह लौट गया, तब प्रताप ने गोगुन्दा पुनः हस्तगत कर लिया।
👉 प्रताप ने ईडर के नारायणदास को भी अकबर के विरुद्ध विद्रोह हेतु उकसाया।
👉 1584–85 ई. में प्रताप को पकड़ने हेतु अकबर ने जगन्नाथ कछवाहा को बड़ी सेना के साथ भेजा, लेकिन वह असफल रहा।
✍️ सही उत्तर है – i, ii, iii और iv
निम्नलिखित में से किस शासक से किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमति सम्बन्धित थीं ?
[वरिष्ठ अध्यापक (पेपर -I) 29.12.2024]
👉 किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमति का विवाह मेवाड़ में हुआ था।
👉 उनका संबंध मेवाड़ के शासक महाराणा राजसिंह (1652–1680 ई.) से था।
👉 इस विवाह के कारण मुगल सम्राट औरंगज़ेब राजसिंह से अप्रसन्न हो गया।
👉 विवाह के पश्चात मेवाड़ और मुगलों के बीच संघर्ष और गहरा गया।
👉 राजसिंह ने मुगलों की कठोर नीतियों का डटकर विरोध किया।
✍️ सही उत्तर है – मेवाड़ के राजसिंह
निम्नलिखित में से किस राजपूत शासक ने 'विजय कटकातु' की उपाधि धारण की ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]
👉 महाराणा राज सिंह मेवाड़ के शक्तिशाली शासक थे और उन्होंने ‘विजय कटकातु’ की उपाधि धारण की थी।
👉 उनका शासनकाल 1652–1680 तक रहा, जिसमें उन्होंने मेवाड़ की स्वतंत्रता और गौरव को दृढ़ता से सुरक्षित रखा।
👉 उन्होंने मुगल सम्राट औरंगज़ेब के विरुद्ध अनेक युद्धों में विजय प्राप्त की और निरंतर प्रतिरोध की नीति अपनाई।
👉 मुगलों के विस्तारवादी प्रयासों को रोकने में महाराणा राज सिंह की सैन्य नीति और नेतृत्व अति प्रभावशाली सिद्ध हुआ।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा राज सिंह
निम्नांकित शासकों में से 1734 ई. के हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की थी ?
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
👉 1734 ई. में राजपूतों ने मराठों के आक्रमणों का सामना करने हेतु एक सम्मेलन बुलाया।
👉 यह सम्मेलन हुरड़ा (भीलवाड़ा) में आयोजित हुआ।
👉 इसकी अध्यक्षता मेवाड़ के शासक महाराणा जगतसिंह ने की।
👉 सम्मेलन में विभिन्न राजपूत रियासतों ने मिलकर मराठों के विरुद्ध रणनीति बनाने का प्रयास किया।
👉 यह सम्मेलन राजस्थान के राजनीतिक इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना था।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा जगतसिंह
औरंगज़ेब ने महाराणा राजसिंह को कौनसे परगने प्रदान किए थे?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- C) 09.09.2025]
👉 चारुमति रूपनगढ़ (किशनगढ़) की राजकुमारी थीं और वे राजा रूपसिंह की पुत्री थीं।
👉 उनकी शादी औरंगज़ेब के साथ तय की गई थी, पर यह विवाह पूर्ण नहीं हुआ।
👉 राजा राज सिंह ने 1660 में औरंगज़ेब की इच्छा के विरोध में चारुमति का विवाह निस्तार से कर धर्म की रक्षा की थी।
👉 महाराणा राज सिंह ने औरंगज़ेब द्वारा लगाए गए जिजिया कर का कड़ा विरोध किया था।
👉 उन्होंने हिंदू मूर्तियों की संरक्षा, और धार्मिक मंदिरों — श्री नाथजी मन्दिर, अजया माता मन्दिर आदि का निर्माण व संरक्षण किया।
👉 महाराणा राज सिंह ने औरंगज़ेब के हिंदुओं पर जिजिया, मूर्तियों के विध्वंस तथा अन्य अत्याचारों का दृढ़ विरोध किया।
✍️ सही उत्तर है – डूंगरपुर, बांसवाड़ा, गयासपुर
किस मेवाड़ शासक ने 'विजय कटकातु' की उपाधि धारण की थी ?
[स्कूल व्याख्याता GK (D) 04.07.2025]
👉 मेवाड़ के शासक महाराणा राजसिंह (1652–1680 ई.) ने औरंगज़ेब की नीतियों का विरोध किया।
👉 उन्होंने अकाल निवारण हेतु राजसमंद झील और राजप्रशस्ति शिलालेख का निर्माण करवाया।
👉 राजसिंह ने मारवाड़ के साथ मिलकर मुगलों के विरुद्ध संघर्ष किया।
👉 अपनी प्रजा में सैनिक और नैतिक प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने हेतु उन्होंने ‘विजय कटकातु’ की उपाधि धारण की।
👉 यह उपाधि उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा राजसिंह
1903 एवं 1911 में आयोजित दिल्ली दरबार में राजस्थान के किस शासक ने भाग नहीं लिया था ?
[खाध्य सुरक्षा अधिकारी 25.11.2019]
👉 ब्रिटिश सरकार ने 1903 और 1911 ई. में दिल्ली दरबार आयोजित किए।
👉 इन दरबारों में देशी रियासतों के शासकों को आमंत्रित किया गया।
👉 अधिकांश शासक शामिल हुए, लेकिन उदयपुर के महाराणा फतेहसिंह अनुपस्थित रहे।
👉 1903 ई. में वे पहुँचे जरूर, पर केसरी सिंह बारहठ की “चेतावनी रा चूंगट्या” पढ़कर दरबार में शामिल नहीं हुए।
👉 1911 ई. के दरबार में भी महाराणा फतेहसिंह ने भाग नहीं लिया।
✍️ सही उत्तर है – उदयपुर के महाराणा फतेहसिंह
महाराणा अमर सिंह द्वितीय द्वारा मेवाड़ में प्रथम श्रेणी के सामन्तों की कितनी संख्या निर्धारित की गई थी ?
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
👉 मेवाड़ के शासक महाराणा अमरसिंह द्वितीय (1698–1710 ई.) ने प्रशासनिक सुधार किए।
👉 उन्होंने सामंतों को श्रेणियों में बाँटकर उनकी संख्या निर्धारित की।
👉 प्रथम श्रेणी के सामंतों की संख्या उन्होंने 16 तय की।
👉 द्वितीय श्रेणी के सामंतों की संख्या 32 रखी गई।
👉 इससे मेवाड़ की सामंती व्यवस्था में अधिक सुव्यवस्था आई।
✍️ सही उत्तर है – 16
निम्न में से किस युद्ध में महाराणा सांगा ने बाबर की सेना को 16 फरवरी, 1527 को परास्त किया था?
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 18.10.2022]
👉 राणा सांगा ने बाबर से निर्णायक युद्ध से पहले कई संघर्ष किए।
👉 16 फरवरी, 1527 ई. को उसने बाबर की सेना से बयाना में युद्ध लड़ा।
👉 इस युद्ध में राणा सांगा ने बाबर की सेना को पराजित किया।
👉 इसके बाद 17 मार्च, 1527 ई. को खानवा का युद्ध हुआ।
✍️ सही उत्तर है – बयाना
निम्नांकित में से किस युद्ध में मेवाड़ के शासक जैत्र सिंह ने इल्तुतमिश की सेना को पराजित किया ?
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
👉 गुहिल वंश के शासक रावल जैत्रसिंह (1213–1250 ई.) पराक्रमी शासक थे।
👉 1227 ई. में उनका संघर्ष दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश की सेना से हुआ।
👉 यह युद्ध भूताला के युद्ध के नाम से प्रसिद्ध है।
👉 इस युद्ध में जैत्रसिंह ने इल्तुतमिश की सेना को पराजित किया।
👉 इस विजय का उल्लेख ग्रंथ ‘हम्मीर मदमर्दन’ और चीरवा शिलालेख में मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – भूताला का युद्ध
खानवा युद्ध से पूर्व बाबर ने किस हिंदू राजा के माध्यम से राणा सांगा को शांति समझौते का प्रस्ताव भेजा ?
[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]
👉 1527 ई. में खानवा युद्ध से पूर्व बाबर ने राणा सांगा से समझौते का प्रयास किया।
👉 इसके लिए बाबर ने एक हिंदू राजा को मध्यस्थ बनाया।
👉 यह राजा था रायसेन का शासक सिलहदी तंवर।
✍️ सही उत्तर है – रायसेन के सिलहदी तंवर
चित्तौड़गढ़ के विजय स्तम्भ के बारे में अधोलिखित कथनों को पढ़िए-
(i) इसका निर्माण मण्डन की देखरेख में राणा कुम्भा ने करवाया ।
(ii) यह एक आठ मंजिला ढाँचा है ।
(iii) विजय स्तम्भ भगवान विष्णु को समर्पित है और इसमें हिन्दु देवमंडल की प्रचुर प्रतिमाएँ हैं ।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सत्य हैं ? [*]
[Deputy Commandant 23.08.2020]
📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है।
महाराणा प्रताप के गठबंधन में शामिल ताज खाँ, निम्न में से कहाँ का शासक था ?
[वरिष्ठ अध्यापक (पेपर -I) 29.12.2024]
👉 महाराणा प्रताप ने मुगलों के विरुद्ध संघर्ष में कई राजाओं और सरदारों से गठबंधन किया।
👉 इस गठबंधन में कुछ मुस्लिम सरदार भी प्रताप के साथ जुड़े।
👉 इनमें प्रमुख ताज खाँ था, जो जालौर का शासक था।
👉 इससे प्रताप की शक्ति और संगठन और मजबूत हुआ।
✍️ सही उत्तर है – जालौर
1615 ई. की मुगल - मेवाड़ सन्धि की मुख्य धारा थी
[RESEARCH OFFICER]
👉 1615 ई. में मुगल सम्राट जहाँगीर और मेवाड़ के शासक महाराणा अमरसिंह के बीच संधि हुई।
👉 इस संधि के अनुसार राणा को शाही दरबार में उपस्थित होने से छूट दी गई।
👉 लेकिन राणा को अपना उत्तराधिकारी (युवराज) मुगल दरबार में भेजना अनिवार्य था।
👉 चित्तौड़ दुर्ग मेवाड़ को लौटा दिया गया, पर उसकी मरम्मत करने की अनुमति नहीं थी।
👉 इस प्रकार 90 वर्षों से चला आ रहा मेवाड़–मुगल संघर्ष समाप्त हुआ।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा मुगल दरबार में उपस्थित नहीं होंगे
बाबर के खिलाफ राणा सांगा के पक्ष में खानवा का युद्ध लड़ने के लिए बिजोलिया और देवलिया से किन राजाओं ने भाग लिया था ?
[Asst. Prof. (History-I) 10.12.2025]
🔹 व्याख्या
👉 खानवा का युद्ध (1527 ई.) में राणा सांगा ने बाबर के विरुद्ध राजपूत संघ का नेतृत्व किया।
👉 बिजोलिया से गोकुलदास परमार और देवलिया से रावत बाघ सिंह ने इस युद्ध में भाग लिया।
👉 ये दोनों राजा राणा सांगा के पक्ष में बाबर के विरुद्ध लड़े।
✍️ सही उत्तर है – गोकुलदास परमार, रावत बाघ सिंह।
निम्न कथनों पर विचार कीजिए एवं सही विकल्प चुनिए :
कथन
:
A.
1580 ई.
के
उत्तरार्द्ध
में अकबर ने
राणा प्रताप
के विरुद्ध
अब्दुर्रहीम
खानखाना के
नेतृत्व में
सेना भेजी थी।
B.
दिवेर
के युद्ध में
राणा प्रताप
का साथ कुँवर
अमरसिंह व भामाशाह
ने दिया था।
[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]
🔹 व्याख्या
👉 अकबर ने 1580 ई. में राणा प्रताप के विरुद्ध अब्दुर्रहीम खानखाना को भेजा था।
👉 खानखाना के परिवार को कुँवर अमरसिंह ने शेरपुर के पास बंदी बना लिया था।
👉 दिवेर के युद्ध (1582 ई.) में अमरसिंह और भामाशाह ने प्रताप का साथ दिया।
👉 कर्नल टॉड ने इस युद्ध को 'मेवाड़ का मैराथन' कहकर संबोधित किया है।
✍️ सही उत्तर है – कथन A व B दोनों सही हैं।
उस व्यक्ति का नाम बताइए जिसने घायल महाराणा सांगा को खानवा के युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित बसवा पहुँचा दिया था।
[स्कूल व्याख्याता GK (E) 06.07.2025]
👉 1527 ई. में खानवा का युद्ध राणा सांगा और बाबर के बीच लड़ा गया।
👉 युद्ध के दौरान राणा सांगा गंभीर रूप से घायल हो गए।
👉 उन्हें युद्धभूमि से निकालकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
👉 वहाँ पहुँचने के बाद कुछ समय बाद राणा सांगा का निधन हो गया।
✍️ सही उत्तर है – पृथ्वीराज
निम्नलिखित में से किस अभिलेख से बप्पा रावल से महाराणा कुम्भा तक की वंशावली की जानकारी मिलती है ? [*]
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है।
नागौर के उत्तराधिकार के प्रश्न पर महाराणा कुंभा ने किसका पक्ष लिया था ?
[Development Officer 29.07.2025]
👉 नागौर के उत्तराधिकार संघर्ष में महाराणा कुंभा ने स्पष्ट रूप से शम्स खां का पक्ष लिया था।
👉 फ़िरोज़ खान की मृत्यु के बाद उसके पुत्र मुजाहिद खां और शम्स खां के बीच शक्ति संघर्ष उत्पन्न हुआ।
👉 पराजित होने पर शम्स खां ने महाराणा कुंभा से सहायता माँगी, जिससे स्थिति पूरी तरह बदल गई।
👉 कुंभा ने नागौर पर सैन्य अभियान चलाकर शम्स खां को विजय दिलाई।
👉 युद्ध के परिणामस्वरूप शम्स खां ने नागौर पर पुनः कब्ज़ा स्थापित किया और वह नागौर का सुल्तान बन गया।
✍️ सही उत्तर है – शम्स खां
1565 ई. में मुगलों से “राणीसर की लड़ाई" निम्न में से किस शासक ने लड़ी थी ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]
👉 1565 ई. में मुगलों के विरुद्ध लड़ी गई लड़ाई को “राणीसर की लड़ाई” कहा जाता है।
👉 यह युद्ध मारवाड़ के वीर शासक राव चन्द्रसेन द्वारा मुगल शक्ति का डटकर सामना करते हुए लड़ा गया था।
👉 राव चन्द्रसेन ने इस संघर्ष में अपने स्वराज और स्वतंत्र सत्ता की रक्षा के लिए मुगलों को चुनौती दी थी।
✍️ सही उत्तर है – राव चन्द्रसेन
जैन विद्वान जो महाराणा कुंभा के दरबार में थे -
[Supt. Garden 28.07.2021]
👉 मेवाड़ के शासक महाराणा कुम्भा (1433–1468 ई.) विद्वानों के संरक्षक थे।
👉 उनके दरबार में अनेक जैन आचार्य और विद्वान उपस्थित रहते थे।
👉 इनमें प्रमुख सोमसुंदर, मुनिसुंदर, जयचंद सूरि, सोमदेव और भुवनचंद सूरि थे।
👉 साथ ही सुंदरसूरि, सुंदरगणि और टिल्ला भट्ट जैसे जैन विद्वान भी सम्मिलित थे।
👉 इन विद्वानों ने कुम्भा के दरबार की बौद्धिक गरिमा बढ़ाई।
✍️ सही उत्तर है – मुनि जिनसेन सूरी
ईशान भट्ट राजस्थान के गुहिलों की किस शाखा सेसम्बन्ध रखते हैं ?
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 27.06.2025]
👉 गुहिल वंश की कुल 24 शाखाएँ मानी गई हैं।
👉 इनमें कल्याणपुर, वागड़, धोड़, काठियावाड़ और चाटसू प्रमुख थीं।
👉 विद्वान ईशान भट्ट का संबंध गुहिलों की चाटसू शाखा से था।
👉 यह शाखा अपने विद्वानों और सांस्कृतिक योगदान के लिए प्रसिद्ध रही।
👉 इस प्रकार ईशान भट्ट का सीधा संबंध गुहिलों की चाटसू शाखा से था।
✍️ सही उत्तर है – चाटसू
महाराणा राजसिंह के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए व सही विकल्प चुनिए :
A. औरंगज़ेब की ताजपोशी पर राजसिंह ने उपहार भेजे ।
B. औरंगज़ेब ने डूंगरपुर राजसिंह को लौटा दिया ।
कूट :
[स्कूल व्याख्याता GK (C) 03.07.2025]
👉 मेवाड़ के शासक महाराणा राजसिंह (1652–1680 ई.) एक पराक्रमी और कूटनीतिज्ञ शासक थे।
👉 औरंगज़ेब की ताजपोशी पर राजसिंह ने उपहार भेजे थे।
👉 औरंगज़ेब ने मेवाड़ के पक्ष में कदम उठाते हुए डूंगरपुर को राजसिंह को लौटा दिया।
👉 इस प्रकार दोनों कथन मेवाड़–मुगल संबंधों की स्थिति को स्पष्ट करते हैं।
✍️ सही उत्तर है – A व B दोनों सत्य हैं
'संगीत मीमांसा' और 'रसिक प्रिया' ग्रंथों की रचना किस शासक के काल में हुई?
[Junior Chemist PHED 01.02.2026]
🔹 व्याख्या
👉
संगीत
मीमांसा
ग्रंथ कुम्भा
काल में
रचित है।
👉
रसिक
प्रिया
भी उसी काल से
संबंधित है।
👉
यह
काल साहित्यिक
उन्नति
के लिए प्रसिद्ध
है।
✍️ सही उत्तर है – कुम्भा
महाराणा कुंभा ने निम्नांकित में से कौनसे ग्राम एकलिंगजी के मंदिर की पूजा एवं व्यवस्था हेतु प्रदान किये थे ?
[स्कूल व्याख्याता GK (A) 23.06.2025]
👉 मेवाड़ के शासक महाराणा कुम्भा धार्मिक और कला-प्रेमी शासक थे।
👉 उन्होंने अपने ईष्टदेव एकलिंगजी मंदिर की पूजा और व्यवस्था के लिए कई गाँव दान में दिए।
👉 ये गाँव थे – नागदा, कालोडा, मालाखेड़ा और भीमाना।
👉 इस व्यवस्था से एकलिंगजी मंदिर की समृद्धि और वैभव बढ़ा।
👉 कुम्भा का यह दान कार्य उनकी धार्मिक आस्था को दर्शाता है।
✍️ सही उत्तर है – नागदा, कालोडा, मालाखेड़ा और भीमाना
आटपुर अभिलेख के अनुसार मेवाड़ के गुहिल किस स्थान से आए ?
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
👉 गुहिल वंश की उत्पत्ति को लेकर कई मत प्रचलित हैं।
👉 कुछ विद्वान इन्हें वल्लभी से जोड़ते हैं, तो कुछ ने इन्हें ब्राह्मण वंशी माना।
👉 आटपुर अभिलेख (977 ई.) में गुहिल वंश के वंशज भोज, महेन्द्र और नाग का उल्लेख है।
👉 इसमें गुहिलों के आनंदपुर से आने की बात कही गई है।
👉 इस आधार पर गुहिलों को आनंदपुर से उत्पन्न माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – आनंदपुर
महाराणा कुम्भा के शासनकाल में मंडन द्वारा रचित ग्रंथ निम्नलिखित में से कौन सा नहीं है ?
[Deputy Jailor Exam 13.07.2025]
👉 मेवाड़ के शासक महाराणा कुम्भा कला और स्थापत्य के बड़े संरक्षक थे।
👉 उनके दरबारी प्रसिद्ध शिल्पी और वास्तुकार मंडन थे।
👉 लेकिन ‘एकलिंगाश्रय’ मंडन की कृति नहीं है, यह किसी अन्य विद्वान की रचना है।
✍️ सही उत्तर है – एकलिंगाश्रय
'विजय-स्तम्भ' के सम्बंध में कौन सा कथन सत्य है? दिये गये कूट की सहायता से उत्तर दें।
(a) यह चित्तौड़ में स्थित है।
(b) महाराणा कुम्भा ने इसका निर्माण मालवा-गुजरात के सुल्तान को हराने के उपलक्ष में करवाया था।
(c) यह नौ मंजिला है।
(d) इस स्तम्भ के निर्माण में सूत्रधार जैता का विशेष योगदान था।
[Research Assistant 24.08.2017]
👉 विजय स्तम्भ चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है।
👉 इसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने 1437 ई. में सारंगपुर युद्ध में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम को हराने की स्मृति में करवाया।
👉 यह विशाल स्तम्भ कुल नौ मंजिला है।
👉 इसके निर्माण में सूत्रधार जैता और उसके पुत्रों का विशेष योगदान रहा।
👉 इसे मूर्तिकला का विश्वकोश भी कहा जाता है।
✍️ सही उत्तर है – सभी सही है।
निम्नलिखित में से किन क्षेत्रों को राणा सांगा ने करमचंद पंवार की वफादारी प्राप्त करने के लिए उसे दिया था?
(i) अजमेर
(ii) मांडल
(iii) परबतसर
(iv) बनेड़ा
सही उत्तर विकल्प चुनें -
[Asst. Prof. (History) 17.05.2024]
👉 मेवाड़ के शासक राणा सांगा ने अपनी शक्ति बढ़ाने हेतु सामंतों को साथ रखा।
👉 उन्होंने परमार वंशीय करमचंद पंवार की वफादारी प्राप्त की।
👉 इसके लिए सांगा ने उसे अजमेर, मांडल, बनेड़ा और परबतसर क्षेत्र प्रदान किए।
👉 इन क्षेत्रों के अधिकार मिलने से करमचंद पंवार मेवाड़ का विश्वस्त सामंत बन गया।
✍️ सही उत्तर है – (i), (ii), (iii) और (iv)
निम्न में से किसने मेवाड़ में सर्वप्रथम गुरिल्ला युद्ध पद्धति आरम्भ की ?
[Research Assistant 10.07.2025]
👉 मेवाड़ के शासकों ने अपने समय में विभिन्न युद्ध पद्धतियाँ अपनाईं।
👉 पर्वतीय और वनांचल क्षेत्रों में छापामार या गुरिल्ला युद्ध विशेष रूप से प्रभावी रहा।
👉 मेवाड़ में इस पद्धति का सबसे पहले प्रयोग महाराणा प्रताप ने किया।
👉 प्रताप ने मुगलों की विशाल सेना के विरुद्ध अरावली की घाटियों से गुरिल्ला युद्ध आरम्भ किया।
👉 इसी रणनीति से उन्होंने लंबे समय तक मेवाड़ की स्वतंत्रता बनाए रखी।
✍️ सही उत्तर है – महाराणा प्रताप