मण्डोर के प्रतिहार देश से सम्बंधित प्रारम्भिक शासक का नाम था -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (विज्ञान)
👉 मण्डोर प्रतिहार वंश का आदि पुरुष हरिश्चन्द्र था, जिससे वंशावली प्रारम्भ हुई।
👉 नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) गुर्जर-प्रतिहार वंश का महत्वपूर्ण शासक था।
👉 इसने मण्डोर को छोड़कर मेड़ता (मेड़न्तकपुर/मेान्तक) को राजधानी बनाया।
👉 शिलालेखों में इसे राम का प्रतिहार कहा गया है।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट प्रथम
राव मालदेव के संबंध में कौन सा कथन सही नहीं है ? [*]
सहायक आचार्य [30.05.2019]
📌 महत्वपूर्ण सूचना: इस प्रश्न को बोर्ड द्वारा 'डिलीट' या अमान्य घोषित किया गया है।
जोधपुर के निकट ओसियां में मंदिरों का निर्माण कराया गया
[वरिष्ठ अध्यापक 2011]
👉 ओसियां (जोधपुर ग्रामीण) में सातवीं से दसवीं शताब्दी के बीच मंदिरों का निर्माण हुआ।
👉 यहाँ श्वेताम्बर जैन मंदिर, सच्चियाय माता मंदिर और सूर्य मंदिर प्रमुख हैं।
👉 इनका निर्माण गुर्जर-प्रतिहार शासकों द्वारा कराया गया।
👉 यह मंदिर प्रतिहार कालीन महामारु शैली के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
✍️ सही उत्तर है – प्रतिहारों द्वारा
उस गुर्जर-प्रतिहार - शासक का नाम बताएँ जो अपनी राजधानी भीनमाल से कन्नौज ले गया ।
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 18.11.2024]
👉 गुर्जर-प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय (800-833 ई.) ने अपनी राजधानी बदली।
👉 इसने 816 ई. में चक्रायुध को पराजित कर कन्नौज को राजधानी बनाया।
👉 ग्वालियर अभिलेख में इसे परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर कहा गया।
👉 इसने पाल नरेश धर्मपाल को भी युद्ध में पराजित किया।
👉 नागभट्ट द्वितीय के समय प्रतिहार साम्राज्य उत्तरी भारत में एक शक्तिशाली राज्य बन गया।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट द्वितीय
राजस्थान में प्रतिहार वंश के संस्थापक हरिश्चन्द्र की राजधानी थी
[वरिष्ठ अध्यापक 21.02.2014]
👉 राजस्थान में प्रतिहार वंश का संस्थापक हरिश्चन्द्र माना जाता है।
👉 इसका उल्लेख 837 ई. और 861 ई. के घटियाला शिलालेखों में मिलता है।
👉 इसे योग-कौशल के कारण “रोहिलद्धि” कहा गया और प्रतिहारों का आदि पुरुष माना गया।
👉 इसके चार पुत्रों ने मिलकर मण्डोर जीता और साम्राज्य की नींव रखी।
✍️ सही उत्तर है – मण्डोर
प्रतिहार शासक जिसने जालौर में अपनी राजधानी स्थापित की
[वरिष्ठ अध्यापक (Spl Edu) 07.02.2018]
👉 गुर्जर-प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) को जालौर शाखा का संस्थापक माना गया।
👉 इसने भीनमाल (श्रीमाल) को चावड़ों से जीतकर राजधानी बनाई।
👉 इसके बाद इसने जालौर व आबू को भी अपने अधिकार में लिया।
👉 साथ ही उज्जैन को अपनी दूसरी राजधानी बनाया।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट प्रथम
किस राजा के वंशज गुर्जर प्रतिहार कहे जाने लगे ?
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (ENG)
👉 नागभट्ट द्वितीय (800-833 ई.) वत्सराज का पुत्र और प्रतिहार वंश का शक्तिशाली शासक था।
👉 इसने 816 ई. में चक्रायुध को हराकर कन्नौज को राजधानी बनाया।
👉 ग्वालियर अभिलेख में इसे परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर की उपाधि मिली।
👉 इसने पुष्कर घाटों और बुचकला विष्णु मंदिर का निर्माण कराया।
👉 इसके पराक्रम से प्रतिहारों की प्रतिष्ठा पुनः स्थापित हुई।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट द्वितीय
इतिहासकार आर. सी. मजूमदार के अनुसार गुर्जर प्रतिहारों ने कितनी शताब्दी तक अरब आक्रमणकारियों के लिए बाधक का काम किया -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (संस्कृत)
👉 इतिहासकार आर. सी. मजूमदार के अनुसार गुर्जर-प्रतिहारों ने अरबों को आगे बढ़ने से रोका।
👉 उन्होंने लगातार छठी शताब्दी से 11वीं शताब्दी तक अरब आक्रमणकारियों के लिए बाधक का कार्य किया।
👉 इस अवधि में प्रतिहार शासकों ने अनेक युद्ध कर अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया।
👉 इसी कारण अरब यात्रियों ने प्रतिहारों को “अल-गुर्जर” कहकर संबोधित किया।
✍️ सही उत्तर है – छठी शताब्दी से 11वीं शताब्दी
गुर्जर प्रतिहारों की राजधानी कौन सी थी ?
[वरिष्ठ अध्यापक 19.02.2019]
👉 चीनी यात्री ह्वेनसांग ने गुर्जर प्रदेश को कू-ची-लो कहा।
👉 उसने इसकी राजधानी को पी-लो-मो-लो (भीनमाल) बताया।
👉 भीनमाल का प्राचीन नाम श्रीमाल था।
👉 यहाँ से गुर्जर-प्रतिहारों का प्रारम्भिक राजनीतिक केन्द्र विकसित हुआ।
👉 भीनमाल को प्रतिहार शक्ति का प्रमुख आधार माना गया।
✍️ सही उत्तर है – पी-लो-मो-लो (भीनमाल)
किस प्रतिहार शासक के शासनकाल में प्रसिद्ध ग्रन्थ “कुवलयमाला” की रचना की गई ?
[Asst. Prof. (History) 24.09.2021]
👉 प्रसिद्ध जैन आचार्य उद्योतनसूरि ने 778 ई. में कुवलयमाला ग्रंथ की रचना की।
👉 यह रचना प्रतिहार शासक वत्सराज (775-800 ई.) के शासनकाल में हुई।
👉 इसी काल में जिनसेन सूरि ने 781 ई. में हरिवंशपुराण की रचना भी की।
👉 वत्सराज ने भीनमाल में राजसूय यज्ञ कर 1000 ब्राह्मणों को चाँदी की मुद्राएँ दीं।
👉 इस समय प्रतिहार साम्राज्य का सांस्कृतिक उत्कर्ष चरम पर था।
✍️ सही उत्तर है – वत्सराज
प्रतिहारों के शासन काल में किस स्थापत्य शैली का विकास हुआ ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- C) 09.09.2025]
👉 प्रतिहार काल में विकसित महामारू शैली को गुर्जर-प्रतिहार शैली के रूप में भी विशेष पहचान मिली।
👉 यह शैली नागर स्थापत्य परंपरा के अंतर्गत विकसित हुई और राजस्थान–गुजरात क्षेत्र में इसकी क्षेत्रीय शाखा उभरकर सामने आई।
👉 इस शैली के उत्कृष्ट उदाहरण ओसियां, किराडू तथा बटेश्वर के प्राचीन मंदिर माने जाते हैं।
👉 महामारू शैली के मंदिरों में मुखमंडप, अंतराल, गर्भगृह के साथ अत्यधिक अलंकृत अधिष्ठान, जंघा और शिखर स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
👉 इस स्थापत्य में वास्तुकला और मूर्तिकला का अत्यंत सामंजस्यपूर्ण समन्वय मिलता है, जो इसे विशिष्ट बनाता है।
✍️ सही उत्तर है – महामारू
नागभट्ट प्रथम निम्नलिखित में से किस राजवंश से संबंधित है-
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
👉 नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) गुर्जर-प्रतिहार वंश का शासक था।
👉 इसे भीनमाल शाखा का संस्थापक माना गया।
👉 इसने भीनमाल, आबू, जालौर और उज्जैन पर अधिकार किया।
👉 अरबों को हराकर उसने प्रतिहार साम्राज्य को मजबूत किया।
👉 इसलिए नागभट्ट प्रथम गुर्जर-प्रतिहार राजवंश से संबंधित है।
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर-प्रतिहार
सुल्तान इल्तुतमिश के जालौर अभियान के दौरान वहाँ का शासक कौन था ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]
👉 उदय सिंह (उदयसिम्हा) जावलीपुरा (वर्तमान जालौर) के शक्तिशाली चाहमान शासक थे।
👉 उन्होंने लगभग 1204–1257 ईस्वी तक शासन किया और अपना स्वतंत्र साम्राज्य सुदृढ़ रखा।
👉 वर्ष 1228 ईस्वी में सुल्तान इल्तुतमिश ने जालौर पर आक्रमण किया, परन्तु यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
👉 उदय सिंह ने इल्तुतमिश के सभी सैन्य अभियानों को विफल कर दिया और जालौर की सुरक्षा बनाए रखी।
✍️ सही उत्तर है – उदय सिंह
निम्नलिखित में से किस ग्रन्थ में प्रतिहारों को गुर्जर शब्द से सम्बोधित नहीं किया गया है ?
[स्कूल व्याख्याता GK (D) 04.07.2025]
👉 प्रतिहारों को अनेक ग्रंथों और अभिलेखों में गुर्जर-प्रतिहार कहा गया है।
👉 इन्हें नीलगुण्ड, देवली, राधनपुर और करहाड़ अभिलेखों में गुर्जर प्रतिहार कहा गया।
👉 अरब यात्रियों ने भी इन्हें अल-गुर्जर नाम से संबोधित किया।
👉 लेकिन ग्रंथ वंशभास्कर में प्रतिहारों को गुर्जर शब्द से संबोधित नहीं किया गया है।
✍️ सही उत्तर है – वंशभास्कर
किस प्रतिहार राजा के काल में प्रसिद्ध ग्वालियर प्रशस्ति की रचना की गई -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (हिन्दी)
👉 प्रतिहार वंश की प्रसिद्ध ग्वालियर प्रशस्ति एक महत्त्वपूर्ण अभिलेख है।
👉 इसका लेखन प्रतिहार शासक मिहिरभोज (836-885 ई.) के समय हुआ।
👉 इसमें मिहिरभोज को आदिवराह कहा गया और उसकी सैन्य उपलब्धियों का वर्णन है।
👉 ग्वालियर प्रशस्ति से प्रतिहार साम्राज्य की सीमा, शक्ति और धार्मिक नीति का ज्ञान मिलता है।
✍️ सही उत्तर है – भोज प्रथम
निम्न में से किन शिलालेख में प्रतिहारों को गुर्जर के नाम से सम्बोधित किया गया है ?
i. नीलकुण्ड
ii. राघनपुर
iii. करहाड़
iv. देवली
सही कूट का चयन कीजिए :
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 27.06.2025]
👉 प्रतिहारों को कई शिलालेखों में गुर्जर-प्रतिहार कहा गया है।
👉 इनमें नीलकुण्ड अभिलेख में प्रतिहारों का उल्लेख गुर्जर के रूप में है।
👉 देवली अभिलेख में भी इन्हें गुर्जर कहा गया है।
👉 राधनपुर और करहाड़ अभिलेख में भी यही संबोधन मिलता है।
👉 अतः चारों शिलालेख प्रतिहारों को गुर्जर कहते हैं।
✍️ सही उत्तर है – i, ii, iii, iv
प्रतिहार शासक जिसने मेदान्तक (मेड़ता) को अपनी राजधानी बनाया, वह था ?
[स्कूल व्याख्याता (इतिहास) 2013]
👉 मण्डोर शाखा का प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) महत्वाकांक्षी राजा था।
👉 इसने मण्डोर को छोड़कर मेदान्तक (मेड़ता) को अपनी राजधानी बनाया।
👉 शिलालेखों में इसे राम का प्रतिहार कहा गया है।
👉 इसकी रानी जज्जिका देवी थी, जिससे दो पुत्र तात और भोज हुए।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट प्रथम
प्रतिहार के संस्थापक हरिशचंद्र की कौन सी राजधानी थी ?
[स्कूल व्याख्याता 15.10.2022]
👉 गुर्जर-प्रतिहार वंश के संस्थापक हरिश्चन्द्र का उल्लेख घटियाला शिलालेख में मिलता है।
👉 हरिश्चन्द्र के चार पुत्रों ने मिलकर मण्डोर (मांडव्यपुर) को जीता।
👉 इसे योग-कौशल के कारण “रोहिलद्धि” कहा गया और इसे गुरु/संस्थापक माना गया।
👉 इसकी क्षत्राणी पत्नी से चार पुत्र भोगभट्ट, कद्दक, रज्जिल, दह हुए।
👉 चारों ने मिलकर मण्डोर जीता और प्रतिहार साम्राज्य की नींव रखी।
👉 यहाँ चारों ओर प्राचीर बनवाकर साम्राज्य की नींव रखी गई।
👉 इसलिए हरिश्चन्द्र की राजधानी मण्डोर थी।
👉 मण्डोर से ही प्रतिहार वंश का राजनीतिक उदय प्रारम्भ हुआ।
✍️ सही उत्तर है – मण्डोर
कन्नौज पर अधिकार हेतु चले त्रिपक्षीय युद्ध में राजपूताना के किस वंश के शासकों ने भाग लिया ?
[वरिष्ठ अध्यापक 28.10.2018]
👉 कन्नौज पर अधिकार के लिए त्रिदलीय संघर्ष लगभग 150 वर्षों तक चला।
👉 इसमें तीन शक्तियाँ थीं – पाल वंश, राष्ट्रकूट वंश और गुर्जर-प्रतिहार वंश।
👉 इस संघर्ष की शुरुआत प्रतिहार शासक वत्सराज (775-800 ई.) ने की।
👉 प्रतिहारों ने कन्नौज पर अधिकार कर उत्तर भारत में अपनी सर्वोच्चता स्थापित की।
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर प्रतिहार
मण्डोर के निम्नलिखित प्रतिहार शासकों का सही कालानुक्रम चुनिए -
(i) कक्कुक
(ii) राजिल
(iii) नागभट्ट - I
(iv) शिलुक
कूट :
[Asst. Prof. (History) 17.05.2024]
👉 मण्डोर शाखा का प्रथम शासक रज्जिल (560 ई.) था, जिसने राजधानी मण्डोर बनाई।
👉 इसके बाद उसका उत्तराधिकारी नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) बना और राजधानी मेड़ता स्थानान्तरित की।
👉 आगे चलकर वंश में शीलूक आया, जिसने अपने साम्राज्य का विस्तार कर अनेक विजय प्राप्त की।
👉 अंत में कक्कुक (861 ई.) प्रतिहार शासक रहा, जिसे अभिलेखों में दानवीर और प्रतिहार वंश का कर्ण कहा गया।
✍️ सही उत्तर है – (ii) रज्जिल → (iii) नागभट्ट I → (iv) शिलुक → (i) कक्कुक
आभानेरी तथा राजौरगढ़ के कलात्मक वैभव किस काल के हैं ?
[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]
👉 राजस्थान में गुर्जर-प्रतिहार काल में स्थापत्य कला का उत्कर्ष हुआ।
👉 इस समय महामारु शैली का विकास हुआ।
👉 आभानेरी (दौसा) का आदिवराह मंदिर और राजौरगढ़ (अलवर) का नीलकण्ठ मंदिर इसके उदाहरण हैं।
👉 ये स्थल प्रतिहार काल की कलात्मक उपलब्धि को दर्शाते हैं।
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर-प्रतिहार
निम्न में से किस प्रतिहार शासक ने अपनी राजधानी मण्डोर से मेड़ता बदली ?
[रसायनज्ञ पुरालेख विभाग 05.08.2024]
👉 गुर्जर-प्रतिहार वंश का शासक नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) महत्वाकांक्षी और पराक्रमी था।
👉 इसने अपनी राजधानी मण्डोर से बदलकर मेड़ता (मेड़न्तकपुर/मेान्तक) बनाई।
👉 शिलालेखों में इसे राम का प्रतिहार कहा गया है।
👉 इसकी रानी जज्जिका देवी थी, जिससे पुत्र तात और भोज उत्पन्न हुए।
👉 नागभट्ट प्रथम की इस नीति से प्रतिहार साम्राज्य और अधिक सुदृढ़ हुआ।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट प्रथम
मण्डोर शाखा के निम्नलिखित प्रतिहार, शासकों पर विचार कीजिए
(i) नागभट्ट I (ii) रज्जिला
(iii) बाउका (iv) टाटा
इन शासकों का सही कालानुक्रम है -
[स्कूल व्याख्याता 21.10.2022]
👉 मण्डोर शाखा का प्रथम शासक रज्जिल (560 ई.) था जिसने मण्डोर को राजधानी बनाया।
👉 इसके बाद उसका उत्तराधिकारी नागभट्ट प्रथम बना जिसने राजधानी को मेड़ता स्थानान्तरित किया।
👉 बाद में शासक तात (600 ई.) ने शिव आराधना करते हुए जल समाधि ली।
👉 इसके पश्चात् उसका भाई भोज और फिर आगे चलकर बाउक (837 ई.) शासक बना।
✍️ सही उत्तर है – (ii) रज्जिल → (i) नागभट्ट I → (iv) टाटा → (iii) बाउका
गुर्जर प्रतिहार शैली का अंतिम एवं सबसे भव्य मंदिर कौनसा है?
[Asst. Prof. (History) 17.05.2024]
👉 राजस्थान में गुर्जर-प्रतिहार काल में महामारु शैली का उत्कर्ष हुआ।
👉 इस शैली का अंतिम और सबसे भव्य मंदिर किराडू (बाड़मेर), सोमेश्वर मंदिर है।
👉 प्रतिहार शासकों ने 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच इस शैली में अनेक मंदिर बनवाए।
👉 अन्य प्रमुख उदाहरण आभानेरी, आहड़, ओसियां, राजौरगढ़ और बरोली के मंदिर हैं।
✍️ सही उत्तर है – सोमेश्वर मंदिर, किराडू
निम्नांकित में से किस विदेशी यात्री ने गुर्जर - प्रतिहार राजवंश की सैन्य शक्ति एवं समृद्धि का उल्लेख किया है ?
[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]
👉 अरब यात्री सुलेमान ने 9वीं शताब्दी में भारत की यात्रा की।
👉 यह यात्रा प्रतिहार शासक मिहिरभोज (836-885 ई.) के शासनकाल में हुई।
👉 सुलेमान ने मिहिरभोज को “अरबों का अमित्र” और “इस्लाम की दीवार” कहा।
👉 उसने लिखा कि उसके राज्य में सोना-चाँदी की खानें थीं और प्रजा चोरी-डकैती से मुक्त थी।
✍️ सही उत्तर है – सुलेमान
प्रतिहार शासक महेन्द्रपाल प्रथम एवं महिपाल का दरबारी कवि था :-
[Asst. Prof. (History) 30.06.2016]
👉 प्रतिहार शासक महेन्द्रपाल प्रथम (885-910 ई.) का दरबारी कवि राजशेखर था।
👉 राजशेखर ने कर्पूरमंजरी, काव्यमीमांसा, विद्धशाल भंजिका, बालभारत, भुवनकोश जैसे ग्रंथ लिखे।
👉 उसने अपनी रचनाओं में महेन्द्रपाल को निर्भयराज, रघुकुल तिलक, महाराष्ट्र चूड़ामणि कहा।
👉 बाद में राजशेखर ने महिपाल प्रथम (914-943 ई.) की भी प्रशंसा की।
👉 इसलिए राजशेखर को दोनों शासकों का दरबारी कवि माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – राजशेखर
गुर्जर प्रतिहार शैली का अन्तिम व सबसे भव्य मन्दिर है
[Technical Assistant 07.07.2025]
👉 राजस्थान में गुर्जर-प्रतिहार काल में मंदिर निर्माण की महामारु शैली विकसित हुई।
👉 इस शैली का अंतिम और सबसे भव्य उदाहरण किराडू (बाड़मेर) का सोमेश्वर मंदिर है।
👉 यह मंदिर प्रतिहार कालीन शिल्पकला और स्थापत्य की ऊँचाई को दर्शाता है।
👉 इसी शैली में ओसियां, आभानेरी, आहड़, राजौरगढ़ और बरोली के मंदिर भी बने।
✍️ सही उत्तर है – किराडू का सोमेश्वर मंदिर
प्रतिहार वंश की मण्डोर शाखा के किस शासक ने अपनी राजधानी मण्डोर से मेड़ता स्थानान्तरित की थी ?
[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]
👉 मण्डोर शाखा के शासक नागभट्ट प्रथम ने अपनी महत्वाकांक्षा के कारण राजधानी बदली।
👉 इसने मण्डोर को छोड़कर मेड़ता (मेड़न्तकपुर/मेान्तक) को राजधानी बनाया।
👉 शिलालेखों में इसे राम का प्रतिहार कहा गया है।
👉 इसकी रानी जज्जिका देवी थी, जिससे दो पुत्र तात और भोज उत्पन्न हुए।
👉 नागभट्ट प्रथम ने साम्राज्य का विस्तार कर प्रतिहार शक्ति को अधिक सुदृढ़ किया।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट प्रथम
गुर्जर प्रतिहार शासक मथन देव कहाँ शासन करता था ?
[PTI Grade -II (RPSC) 30.04.2023]
👉 मथन देव शासक राजोरगढ़ (अलवर) से प्रशासन करता था।
👉 यहाँ से प्राप्त 960 ई. का शिलालेख इसके शासन का प्रमाण है।
👉 इसी काल में गुर्जर-प्रतिहार शैली का नीलकण्ठ मंदिर भी निर्मित हुआ।
✍️ सही उत्तर है – राजोरगढ़
प्रतिहारों की 26 शाखाओं में से, सबसे प्राचीन शाखा है :
[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]
👉 मुहणोत नैणसी ने प्रतिहारों की कुल 26 शाखाओं का उल्लेख किया है।
👉 इन शाखाओं में सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण शाखा मण्डोर की मानी जाती है।
👉 मण्डोर प्रतिहारों का राजनीतिक केन्द्र था और यहीं से साम्राज्य की नींव रखी गई।
👉 प्रतिहार शासक अपनी कुलदेवी चामुण्डा माता की पूजा मण्डोर में करते थे।
👉 इसलिए प्रतिहारों की 26 शाखाओं में से मण्डोर की शाखा सबसे प्राचीन है।
✍️ सही उत्तर है – मण्डोर
राजोरगढ़ का शानदार कलात्मक वैभव किस युग से सम्बन्धित है ?
[स. सांख्यिकी अधिकारी 27.05.2019]
👉 राजोरगढ़ (अलवर) से 960 ई. का मंथनदेव बड़गुर्जर का शिलालेख मिला है।
👉 यहाँ का प्रसिद्ध नीलकण्ठ मंदिर गुर्जर-प्रतिहार कालीन स्थापत्य का उदाहरण है।
👉 प्रतिहार काल में महामारु शैली का उत्कर्ष हुआ था।
👉 इसलिए राजोरगढ़ का शानदार कलात्मक वैभव गुर्जर-प्रतिहार युग से संबंधित है।
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर-प्रतिहार
प्रतिहारों की कौनसी शाखा सर्वाधिक पुरातन मानी जाती है ?
[Head Master 11.10.2021]
👉 गुर्जर-प्रतिहारों की कई शाखाएँ थीं, जिनमें मण्डोर शाखा सर्वाधिक प्राचीन मानी जाती है।
👉 मुहणोत नैणसी ने प्रतिहारों की 26 शाखाओं का वर्णन किया है।
👉 इनमें सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण शाखा मण्डोर के प्रतिहार थे।
👉 इनका कुलदेवी मंदिर चामुण्डा माता का मंदिर जोधपुर में स्थित था।
👉 मण्डोर शाखा से ही प्रतिहारों का वास्तविक राजनीतिक उदय हुआ।
✍️ सही उत्तर है – मण्डोर
निम्नलिखित में से किन अभिलेखों में प्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है ?
A. नीलगुण्ड B. देवली
C. राधनपुर D. कराड़
[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]
कूट :
👉 प्रतिहारों को अनेक शिलालेखों में गुर्जर-प्रतिहार कहा गया है।
👉 नीलगुण्ड अभिलेख में इनका उल्लेख गुर्जर प्रतिहार रूप में मिलता है।
👉 देवली अभिलेख में भी प्रतिहारों को गुर्जर कहा गया है।
👉 राधनपुर और करहाड़ अभिलेख में भी यही संबोधन मिलता है।
👉 इस प्रकार चारों अभिलेख प्रतिहारों को गुर्जर बताते हैं।
✍️ सही उत्तर है – A, B, C, D
मंडोर के प्रतिहार माने जाते है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (गणित)
👉 इतिहासकार डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने मण्डोर के प्रतिहारों को क्षत्रिय माना है।
👉 ओझा जी के अनुसार प्रतिहार कोई जाति नहीं बल्कि एक पद था, जिसका अर्थ होता है – राजा का द्वारपाल/रक्षक।
👉 बाद में इस पद से जुड़ा वंश ही गुर्जर-प्रतिहार कहलाया।
👉 प्रतिहारों ने छठी शताब्दी से उत्तर भारत में अपनी सत्ता स्थापित की।
✍️ सही उत्तर है – क्षत्रिय
मण्डोर के प्रतिहारों के सम्बन्ध में निम्न में से कौन सा कथन सही नहीं है ?
[स्कूल व्याख्याता GK (C) 03.07.2025]
👉 मण्डोर शाखा का प्रतिहार शासक शीलूक था, भोगभट्ट नहीं।
👉 शीलूक ने वल्लमण्डल (जैसलमेर के आसपास का क्षेत्र) के शासक देवराज भाटी को परास्त किया।
👉 इसके साथ ही उसने त्रावणी क्षेत्र (उत्तर-पश्चिमी राजस्थान) पर भी अधिकार किया।
👉 शीलूक ने जोधपुर में सिद्धेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण भी कराया।
✍️ सही उत्तर है – भोगभट्ट ने वल्लदेश के शासक देवराज भाटी को परास्त किया था।
प्रतिहार शासक जिसने सर्वप्रथम जालौर को अपनी राजधानी बनाया, वह था
[PTI GRADE -II & III (RPSC) 2013]
👉 गुर्जर-प्रतिहार वंश का शासक नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) महत्वाकांक्षी और पराक्रमी था।
👉 इसने भीनमाल (श्रीमाल) को चावड़ों से जीतकर अधिकार किया।
👉 इसके बाद इसने जालौर को अपनी राजधानी बनाया।
👉 नागभट्ट प्रथम ने अरबों को हराकर साम्राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ाई।
👉 इसे प्रतिहार साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट प्रथम
निम्नलिखित में से कौन सा शासक गुर्जर-प्रतिहार राजवंश से संबंधित नहीं है ?
[RAS Pre. 05.08.2018]
👉 गुर्जर-प्रतिहार वंश की वंशावली में हरिश्चन्द्र, रज्जिल, नागभट्ट, वत्सराज, मिहिरभोज, महेन्द्रपाल आदि शासक आते हैं।
👉 इनके अतिरिक्त नागभट्ट द्वितीय, रामभद्र, महिपाल और यशपाल भी इस वंश से जुड़े रहे।
👉 नागभट्ट द्वितीय (800-833 ई.) ने पाल व राष्ट्रकूटों से युद्ध कर कन्नौज पर अधिकार किया।
👉 महेन्द्रपाल प्रथम (885-910 ई.) मिहिरभोज का पुत्र था और उसने पाल व राष्ट्रकूटों की संयुक्त सेना को हराया।
👉 लेकिन भरत्रभट्ट प्रथम का उल्लेख गुर्जर-प्रतिहार वंश के शासकों में नहीं है।
👉 अतः यह शासक प्रतिहार वंश से संबंधित नहीं माना जाता।
✍️ सही उत्तर है – भरत्रभट्ट - I
भोज (मिहिरभोज) किस वंश का शासक था ?
[PTI Grade -II (RPSC) 2011]
👉 मिहिरभोज (836-885 ई.) प्रतिहार वंश का सबसे शक्तिशाली शासक था।
👉 इसे “आदिवराह” की उपाधि मिली और इसके सिक्कों पर श्रीमदादिवराह अंकित था।
👉 अरब यात्री सुलेमान ने इसे “इस्लाम की दीवार” और “अरबों का अमित्र” कहा।
👉 इसने पाल शासक देवपाल और राष्ट्रकूट कृष्ण द्वितीय को युद्ध में पराजित किया।
👉 मिहिरभोज के समय प्रतिहार साम्राज्य उत्तर भारत में अपनी चरम सीमा पर पहुँचा।
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर प्रतिहार
अरब यात्री सुलेमान ने किस प्रतिहार राजा के शासनकाल में भारत की यात्रा की ?
[RAS Pre. 01.10.2023]
👉 अरब यात्री सुलेमान ने 9वीं शताब्दी में भारत की यात्रा की।
👉 यह यात्रा प्रतिहार शासक भोज प्रथम के शासनकाल में हुई।
✍️ सही उत्तर है – भोज प्रथम
मण्डोर के गुर्जर प्रतिहार वंश के विषय में निम्न कथनों पर विचार कीजिए एवं नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए —
(अ) घटियाला का शिलालेख मण्डोर के गुर्जर प्रतिहार वंश की जानकारी का प्रमुख स्रोत है ।
(ब) यह शिलालेख प्रसिद्ध प्रतिहार शासक कक्कुक ने उत्कीर्ण करवाया था ।
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]
👉 घटियाला का शिलालेख मण्डोर के गुर्जर प्रतिहार वंश के इतिहास का महत्त्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
👉 यह शिलालेख मण्डोर प्रतिहारों की वंशपरंपरा, राजनीतिक स्थिति और प्रारंभिक विकास की जानकारी प्रदान करता है।
👉 इस शिलालेख को प्रसिद्ध प्रतिहार शासक कक्कुक द्वारा उत्कीर्ण करवाया गया था।
👉 कक्कुक ने घटियाला क्षेत्र में दो शिलालेखों का निर्माण करवाया था, जो प्रतिहार इतिहास की प्रमुख प्रमाण सामग्री हैं।
✍️ सही उत्तर है – (अ) एवं (ब) दोनों सही हैं।
वह गुर्जर प्रतिहार शासक जिसने "रत्नहस्तिन" का विरुद धारण किया था
[स्कूल व्याख्याता 15.11.2022]
👉 गुर्जर-प्रतिहार शासक वत्सराज (775-800 ई.) एक प्रतापी राजा था।
👉 इसे ग्वालियर व बुचकला अभिलेख में “रणहस्तिन” (रत्नहस्तिन/युद्ध का हाथी) की उपाधि दी गई।
👉 वत्सराज ने इन्द्रायुध को हराकर कन्नौज पर अधिकार किया।
👉 इसके समय से ही त्रिदलीय संघर्ष (प्रतिहार-पाल-राष्ट्रकूट) प्रारम्भ हुआ।
👉 वत्सराज ने गौंड प्रदेश को भी अपने साम्राज्य में मिला लिया।
✍️ सही उत्तर है – वत्सराज
मण्डोर-प्रतिहार वंश के किस शासक से वंशावली प्रारम्भ होती है
[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]
👉 मण्डोर प्रतिहार वंश का आदि पुरुष हरिश्चन्द्र माना जाता है।
👉 हरिश्चन्द्र के बाद वंशावली का प्रारम्भ उसके पुत्र रज्जिल से होता है।
👉 560 ई. में रज्जिल ने प्रतिहार राजवंश की स्थापना की।
👉 उसने मण्डोर को राजधानी बनाकर वहाँ सबसे पहले राजसूय यज्ञ सम्पन्न कराया।
👉 इसलिए मण्डोर प्रतिहार वंश की वंशावली रज्जिल से प्रारम्भ होती है।
✍️ सही उत्तर है – रज्जिल
प्रतिहारों के अभिलेखों में, राज्याधिकारियों को कहा जाता था
[स्कूल व्याख्याता GK (A) 23.06.2025]
👉 गुर्जर-प्रतिहारों के शासन में प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत थी।
👉 इनके अभिलेखों में राज्य को सुविधा हेतु प्रान्तों में बाँटा गया।
👉 इन प्रान्तों के अधिकारियों को अभिलेखों में “राजपुरुष” कहा गया।
👉 अरब यात्री अलमसूदी और सुलेमान ने भी इस व्यवस्था का उल्लेख किया।
👉 यह प्रतिहार शासन की केन्द्रीय राजसत्तात्मक प्रणाली को दर्शाता है।
✍️ सही उत्तर है – राजपुरुष
संस्कृत कवी, राजशेखर किस के दरबार में था?
[Asst. Prof. (History) 30.06.2016]
👉 संस्कृत कवि राजशेखर गुर्जर-प्रतिहार शासक महेन्द्रपाल प्रथम (885-910 ई.) के दरबार में था।
👉 उसने कर्पूरमंजरी, काव्यमीमांसा, विद्धशाल भंजिका, बालभारत, भुवनकोश आदि ग्रंथों की रचना की।
👉 राजशेखर ने अपनी पत्नी अवन्ति सुंदरी के कहने पर कर्पूरमंजरी लिखी।
👉 अभिलेखों में उसने महेन्द्रपाल को निर्भयराज, महेन्द्रायुद्ध, रघुकुल तिलक कहा है।
👉 इसे महेन्द्रपाल प्रथम का दरबारी साहित्यकार और गुरु माना गया।
✍️ सही उत्तर है – महेन्द्रपाल प्रथम
मंडोर के किस प्रतिहार शासक ने मेड़ता को अपनी राजधानी बनाया ?
[AEN परीक्षा 30.06.2024]
👉 मण्डोर शाखा का शासक नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) महत्वाकांक्षी राजा था।
👉 इसने मण्डोर को छोड़कर मेड़ता (मेड़न्तकपुर/मेान्तक) को राजधानी बनाया।
👉 शिलालेखों में इसे राम का प्रतिहार कहा गया है।
👉 इसकी रानी जज्जिका देवी थी, जिससे दो पुत्र तात और भोज हुए।
👉 नागभट्ट प्रथम ने साम्राज्य का विस्तार कर प्रतिहार शक्ति को और अधिक सुदृढ़ किया।
✍️ सही उत्तर है – नागभट्ट प्रथम
रज्जिल किस प्रतिहार शाखा से सम्बन्धित था ?
[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]
👉 रज्जिल प्रतिहार वंश की मंडोर शाखा से संबंधित माना जाता है और उन्हें इसका मुख्य संस्थापक समझा जाता है।
👉 मंडोर क्षेत्र में प्रतिहारों के प्रारंभिक प्रभुत्व की नींव रज्जिल ने ही सुदृढ़ रूप से स्थापित की थी।
👉 उनके शासनकाल से प्रतिहार वंश के शक्तिशाली विस्तार, राजकीय उभार और राजनैतिक प्रतिष्ठा की शुरुआत हुई।
👉 आगे चलकर उनके उत्तराधिकारियों ने इस मजबूत आधार को और अधिक विकसित व सुदृढ़ किया।
✍️ सही उत्तर है – मण्डोर
राजा नागभट्ट प्रथम का राजवंश है -
वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (गणित)
👉 नागभट्ट प्रथम (730-756 ई.) गुर्जर-प्रतिहार वंश का शासक था।
👉 इसे प्रतिहार साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है।
👉 इसने अरबों को हराकर साम्राज्य को भीनमाल, जालौर और उज्जैन तक फैलाया।
👉 शिलालेखों में इसे राम का प्रतिहार कहा गया है।
👉 इसकी रानी जज्जिका देवी थी, जिससे दो पुत्र तात और भोज हुए।
✍️ सही उत्तर है – गुर्जर प्रतिहार