राजस्थान के निम्नलिखित मुख्यमंत्रियों में से कौन अपने सम्पूर्ण राजनीतिक जीवन में किसी राज्य का राज्यपाल नहीं रहा है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक Spl Edu 03.07.2019]

  • हरिदेव जोशी 

  • भैरोंसिंह शेखावत 

  • जगन्नाथ पहाड़िया 

  • शिवचरण माथुर 

🔹 व्याख्या

👉 भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे।
👉 वे अपने पूरे राजनीतिक जीवन में किसी भी राज्य के राज्यपाल नहीं बने।
👉 वे बाद में भारत के उपराष्ट्रपति पद पर आसीन हुए।
👉 उनका राजनीतिक योगदान राजस्थान की राज्य राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

✍️ सही उत्तर है – भैरोंसिंह शेखावत 

निम्नांकित में से कौन राजस्थान के मुख्य मंत्री  कभी नहीं रहे ? 

[कनिष्ठ लेखाकार (RPSC) 04.10.2016]

  • हीरालाल देवपुरा 

  • बरकतुल्लाह खान 

  • गोकुल लाल असावा 

  • सी.एस. वेंकटाचारी 

🔹 व्याख्या

👉 गोकुललाल असावा राजस्थान के मुख्यमंत्री पद पर कभी नहीं रहे।
👉 वे राज्य के एक प्रमुख जनप्रतिनिधि और राजनीतिक नेता रहे।
👉 उनका योगदान राजस्थान की राजनीतिक एवं सामाजिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण रहा।
👉 परंतु उन्होंने मुख्यमंत्री पद का कार्यभार नहीं संभाला।

✍️ सही उत्तर है – गोकुललाल असावा 

राजस्थान में मंत्रिपरिषद् के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है ?

[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]

  • मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद् में मंत्रियों की कुल संख्या तीस से अधिक नहीं होगी।

  • मंत्री राज्यपाल के प्रसाद - पर्यन्त पद धारण करेंगे।

  • भारत के संविधान के अनुसार मंत्रिपरिषद् में जनजाति कल्याण का भार-साधक एक मंत्री होगा।

  • मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या बारह से कम नहीं होगी।

🔹 व्याख्या

👉 मंत्रिपरिषद् प्रावधान संविधान में सामान्य रूप से हैं।
👉
जनजाति कल्याण मंत्री का प्रावधान अनिवार्य नहीं है।
👉
यह प्रावधान केवल कुछ विशेष राज्यों में लागू होता है।

राजस्थान के निम्नांकित मुख्यमंत्रियों में कौन राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष पद पर भी आसीन रहे हैं ? 

[स्कूल व्याख्याता 21.10.2022]

  • टीकाराम पालीवाल 

  • जयनारायण व्यास 

  • हीरालाल देवपुरा 

  • शिवचरण माथुर 

🔹 व्याख्या

👉 हीरालाल देवपुरा राजस्थान के मुख्यमंत्री पद पर रहे।
👉 वे बाद में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष पद पर भी आसीन हुए।
👉 उन्होंने राज्य की विधान प्रक्रिया और राजनीतिक प्रशासन दोनों में योगदान दिया।
👉 उनका कार्यकाल राजस्थान की राजनीतिक परंपरा में उल्लेखनीय रहा।

✍️ सही उत्तर है – हीरालाल देवपुरा 

राजस्थान के निम्नलिखित पूर्व मुख्यमन्त्रियों को उनके कार्यकाल के कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए

(I) जय नारायण व्यास

(II) जगन्नाथ पहाड़िया

(III) हीरा लाल देवपुरा

(IV) बरकतुल्लाह खान

सही विकल्प चुनिए

[Deputy Commandant 11.01.2026]

  • (I), (III), (II), (IV)

  • (IV), (III), (II), (I)

  • (I), (II), (III), (IV)

  • (I), (IV), (II), (III)

🔹 व्याख्या

👉 जय नारायण व्यास ने 1951-1954 के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।

👉 बरकतुल्लाह खान 1971 से 1973 तक पद पर रहे और वे राज्य के प्रथम अल्पसंख्यक मुख्यमंत्री थे।

👉 जगन्नाथ पहाड़िया का कार्यकाल 1980-1981 था, जो राज्य के पहले दलित मुख्यमंत्री बने।

👉 हीरा लाल देवपुरा 1985 में मात्र 16 दिन के लिए सबसे कम अवधि के मुख्यमंत्री रहे।

✍️ सही उत्तर है – (I), (IV), (II), (III)

राजस्थान में अंत्योदय योजना किस मुख्यमंत्री के कार्यकाल में प्रारंभ की गयी ? 

[Deputy Commandant 23.08.2020]

  • हरिदेव जोशी 

  • जगन्नाथ पहाड़िया 

  • भैरों सिंह शेखावत 

  • शिवचरण माथुर

🔹 व्याख्या

👉 अंत्योदय योजना राजस्थान में भैरोंसिंह शेखावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में प्रारंभ की गई।
👉 इस योजना का उद्देश्य राज्य के सबसे गरीब वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना था।
👉 योजना के अंतर्गत गरीबी उन्मूलन और सामाजिक upliftment पर बल दिया गया।
👉 यह योजना राजस्थान की कल्याणकारी नीतियों में एक ऐतिहासिक कदम थी।

✍️ सही उत्तर है – भैरोंसिंह शेखावत 

राजस्थान की प्रथम विधानसभा के गठन के पश्चात्, निम्नांकित मुख्यमंत्रियों में से किसका कार्यकाल सबसे कम रहा है ? 

[स्कूल व्याख्याता (POLITY) 14.12.2020]

  • टीकाराम पालीवाल 

  • बरकतुल्लाह खान 

  • जगन्नाथ पहाड़िया 

  • जयनारायण व्यास 

🔹 व्याख्या

👉 टीकाराम पालीवाल राजस्थान की प्रथम निर्वाचित विधानसभा के मुख्यमंत्री रहे।
👉 उनका कार्यकाल मात्र 2 वर्ष 13 दिन का रहा।
👉 वे राजस्थान के सबसे कम अवधि तक पद पर रहने वाले प्रारंभिक मुख्यमंत्री थे।
👉 उनके बाद अन्य मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल अपेक्षाकृत अधिक रहे।

✍️ सही उत्तर है – टीकाराम पालीवाल 

निम्नांकित में से भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राज्यपाल को जानकारी के सम्बन्ध में मुख्यमन्त्री के कर्त्तव्य के बारे में है ? 

[मूल्यांकन अधिकारी 23.08.2020]

  • अनुच्छेद 166 

  • अनुच्छेद 165 

  • अनुच्छेद 167 

  • अनुच्छेद 168 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान का अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के राज्यपाल को जानकारी देने के कर्त्तव्यों से संबंधित है।
👉 इसके अंतर्गत मुख्यमंत्री को मंत्रिपरिषद् के सभी निर्णयों और विधायी प्रस्तावों की सूचना राज्यपाल को देनी होती है।
👉 राज्यपाल द्वारा मांगे जाने पर आवश्यक सूचना प्रदान करना भी मुख्यमंत्री का दायित्व है।
👉 यह अनुच्छेद राज्य की कार्यपालिका और राज्यपाल के संबंधों को स्पष्ट करता है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 167 

आपातकाल के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री कौन थे ?  [*]

[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]

  • शिवचरण माथुर 

  • मोहनलाल सुखाड़िया 

  • भैरोसिंह शेखावत 

  • हरिदेव जोशी 

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

राजस्थान के मुख्यमंत्रियों के उस समूह को पहचानिए, जिन्होंने यह पद केवल दो बार ग्रहण किया :

[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]

  • मोहनलाल सुखाड़िया, बरकतुल्लाह खान, जयनारायण व्यास

  • वसुंधरा राजे, हरिदेव जोशी, टीकाराम पालीवाल

  • जयनारायण व्यास, शिवचरण माथुर, वसुंधरा राजे

  • हरिदेव जोशी, शिवचरण माथुर, अशोक गहलोत

🔹 व्याख्या

👉 जयनारायण व्यास ने दो बार मुख्यमंत्री पद संभाला।
👉
शिवचरण माथुर ने भी दो बार कार्यकाल पूरा किया।
👉
वसुंधरा राजे ने 2003-08 व 2013-18 में पद संभाला।
👉
इसलिए यह समूह दो बार पद ग्रहण करने वाले हैं।

✍️ सही उत्तर है – जयनारायण व्यास, शिवचरण माथुर, वसुंधरा राजे

जहाँ यह प्रश्न उठता है कि राजस्थान विधानसभा का अध्यक्ष दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता से ग्रस्त हो गया है या नहीं तो वह प्रश्न अन्तिम विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा :

[स्कूल व्याख्याता (POLITY) 14.12.2020]

  • विधानसभा उपाध्यक्ष को 

  • राज्यपाल को 

  • सदन के ऐसे सदस्यों की समिति के विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा जिसे वह सदन इस निमित्त निर्वाचित करे ।

  • सदन के ऐसे सदस्य के विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा जिसे वह सदन इस निमित्त निर्वाचित करे ।  

🔹 व्याख्या

👉 यदि यह प्रश्न उठता है कि राजस्थान विधानसभा का अध्यक्ष दल परिवर्तन के आधार पर निरर्हता से ग्रस्त हुआ है या नहीं,
👉 तो यह प्रश्न सदन के ऐसे सदस्य के विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा,
👉 जिसे वह सदन इस निमित्त निर्वाचित करे।
👉 यह प्रावधान दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत अध्यक्ष की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए किया गया है।

✍️ सही उत्तर है – सदन के ऐसे सदस्य के विनिश्चय के लिए निर्देशित किया जाएगा जिसे वह सदन इस निमित्त निर्वाचित करे।  

निम्नांकित में से किस मुख्यमंत्री के त्यागपत्र देने के पश्चात् बरकतुल्लाह खान को राजस्थान का मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया ? 

[उपनिरीक्षक (SI) 13.09.2021]

  • शिवचरण माथुर

  • मोहनलाल सुखाड़िया 

  • टीका राम पालीवाल 

  • हरिदेव जोशी 

🔹 व्याख्या

👉 मोहनलाल सुखाड़िया के त्यागपत्र देने के पश्चात् बरकतुल्ला खाँ को मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।
👉 उन्होंने 9 जुलाई 1971 से 11 जून 1973 तक मुख्यमंत्री पद संभाला।
👉 बरकतुल्ला खाँ का कार्यकाल राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण रहा।
👉 वे राज्य के प्रमुख नेताओं में से एक थे।

✍️ सही उत्तर है – मोहनलाल सुखाड़िया

राजस्थान में राज्य मंत्री, जिसके पास किसी विभाग या उसकी विनिर्दिष्ट शाखाओं का स्वतन्त्र प्रभार है; किसके अनुमोदन से उस विभाग या यथास्थिति उसकी विनिर्दिष्ट शाखाओं से सम्बंधित कार्य उससे सम्बद्ध उप-मंत्री को आवंटित करेगा ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

  • राज्यपाल 

  • मुख्यमंत्री 

  • संबन्धित विभाग का कैबिनेट मंत्री 

  • मुख्य सचिव 

🔹 व्याख्या

👉 राज्य मंत्री, जिसके पास किसी विभाग का स्वतंत्र प्रभार होता है, वह कार्य केवल मुख्यमंत्री की स्वीकृति से ही उप-मंत्री को सौंप सकता है।
👉 मुख्यमंत्री राज्य की मंत्रिपरिषद् का प्रमुख होता है और विभागीय कार्यों का विभाजन निर्धारित करता है।
👉 विभागों का कार्य आवंटन और नियंत्रण मुख्यमंत्री की अनुमति से ही किया जाता है।
👉 इस प्रकार विभागीय दायित्वों का अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री द्वारा होता है।

✍️ सही उत्तर है – मुख्यमंत्री 

निम्नलिखित कथनों पर विचार करें तथा कथनों के नीचे दिए कूटों में से सही उत्तर चुनिए 

I राजस्थान के मंत्री राजस्थान के राज्यपाल के प्रसाद पर्यन्त पद पर बने रहते हैं । 

II राजस्थान के मंत्रि-परिषद में मुख्यमंत्री के बिना मंत्रियों की कुल संख्या राजस्थान विधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी । 

III भारत के संविधान के इक्यानवें (91वें) संशोधन के उपरांत राजस्थान में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या बारह से कम नहीं होगी ।

कूट :

[वरिष्ठ अध्यापक Spl Edu 03.07.2019]

  • II और III सही हैं । 

  • I और III सही हैं । 

  • I, II और III सही हैं । 

  • I और II सही हैं । 

🔹 व्याख्या

👉 कथन I सही है — राजस्थान के मंत्री, राज्यपाल के प्रसाद पर्यन्त पद पर बने रहते हैं।
👉 कथन II आंशिक रूप से गलत है क्योंकि सीमा मुख्यमंत्री सहित तय की गई है, न कि बिना मुख्यमंत्री के।
👉 कथन III सही है — 91वें संशोधन अधिनियम 2003 के अनुसार मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या 12 से कम नहीं होगी।
👉 अतः सही कूट है — I और III सही हैं।

✍️ सही उत्तर है – I और III सही हैं 

निम्नांकित में से कौन से मुख्यमंत्री राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर नहीं रहे हैं ? 

(A) हरिदेव जोशी 

(B) शिवचरण माथुर 

(C) अशोक गेहलोत 

(D) वसुंधरा राजे 

सही उत्तर का चयन नीचे दिए गए कूट से कीजिए : 

[RAS Pre. 05.08.2018]

कूट : 

  • (C) और (D)

  • (A) और (D)

  • (A), (B) और (C)

  • (B) और (C) 

🔹 व्याख्या

👉 शिवचरण माथुर और अशोक गहलोत दोनों ने राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद नहीं संभाला।
👉 हरिदेव जोशी और वसुंधरा राजे राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे।   इनके अलावा भैरों सिंह शेखावत भी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे हैं।

✍️ सही उत्तर है – (B) और (C) 

राजस्थान के निम्नलिखित मुख्यमंत्रियों में से किस ने प्रथम बार राजस्थान विधानसभा में बजट प्रस्तुत किया ?

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- C) 09.09.2025]

  • मोहनलाल सुखाड़िया

  • टीकाराम पालीवाल

  • बरकतुल्लाह खान

  • जयनारायण व्यास

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में प्रथम बार बजट प्रस्तुत करने का कार्य जयनारायण व्यास द्वारा किया गया था।
👉 वे राजस्थान के प्रारम्भिक काल के प्रमुख मुख्यमंत्रियों में सम्मिलित थे।
👉 बजट प्रस्तुति राज्य की वित्तीय नीति और प्रशासनिक दृष्टि का महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है।
👉 जयनारायण व्यास द्वारा प्रस्तुत यह बजट राजस्थान की प्रारम्भिक आर्थिक संरचना का आधार बना।
👉 इसलिए राजस्थान विधान सभा में पहला बजट प्रस्तुत करने का श्रेय जयनारायण व्यास को ही जाता है।

✍️ सही उत्तर है – जयनारायण व्यास 

संविधान के अनुसार, मुख्यमंत्री किया जाता है : 

[वरिष्ठ अध्यापक 21.02.2014]

  • निर्वाचित

  • चयनित 

  • मनोनीत 

  • नियुक्त 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति की जाती है।
👉 राज्यपाल वही व्यक्ति नियुक्त करता है जिसे विधानसभा में बहुमत प्राप्त हो।
👉 यह प्रावधान राज्य की कार्यपालिका संरचना से संबंधित है।

✍️ सही उत्तर है – नियुक्त 

मुख्यमंत्री कार्यालय में फरवरी 2021 को यथा विद्यमान, निम्नांकित में से कौन आर्थिक सलाहकार है। 

सहायक आचार्य [22.09.2021]

  • राजेश कुमार गुप्ता 

  • अरविंद मायाराम  

  • गोविंद शर्मा 

  • आरती डोगरा

🔹 व्याख्या

👉 फरवरी 2021 में मुख्यमंत्री कार्यालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में अरविंद मायाराम कार्यरत थे।
👉 वे राज्य की आर्थिक नीतियों और वित्तीय सुधारों में सहयोग प्रदान करते हैं।
👉 मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी भूमिका वित्तीय परामर्श और नीति निर्माण से जुड़ी होती है।
👉 वे राजस्थान सरकार के महत्वपूर्ण सलाहकार पदों में से एक हैं।

✍️ सही उत्तर है – अरविंद मायाराम 

मुख्यमंत्री या मंत्री के रूप में नियुक्त व्यक्ति के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए :

(i) उसमें अनुच्छेद 173 के अधीन अर्हताएँ होनी चाहिए । 

(ii) उसमें अनुच्छेद 190 के अधीन निरर्हताएँ नहीं होनी चाहिए । 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- B) 08.09.2025]

  • केवल (ii) सही है । 

  • न तो (i), न ही (ii) सही है । 

  • केवल (i) सही है । 

  • (i) व (ii) दोनों सही हैं । 

🔹 व्याख्या

👉 मुख्यमंत्री या मंत्री बनने के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति में अनुच्छेद 173 में दी गई अर्हताएँ मौजूद हों।
👉 अनुच्छेद 173 में विधान सभा/परिषद के सदस्य होने की योग्यता, जैसे आयु, मतदाता होना आदि की शर्तें निर्धारित हैं।
👉 कथन (ii) में उल्लेखित अनुच्छेद 190 निरर्हता (disqualification) से संबंधित है, पर यह मंत्री बनने की प्रत्यक्ष अनिवार्य शर्त नहीं है।
👉 मंत्री बनने के लिए संविधान में केवल अनुच्छेद 173 की योग्यता आवश्यक बताई गई है। 

✍️ सही उत्तर है – केवल (i) सही है 

राजस्थान में मंत्रियों की अधिकतम संख्या (मुख्यमंत्री सहित) कितनी होती है ?  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • 27 

  • 35 

  • 30 

  • 40 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 द्वारा राज्यों में मंत्रिपरिषद् के आकार की सीमा तय की गई।
👉 किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
👉 राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य हैं।
👉 अतः राजस्थान में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या 30 हो सकती है।

✍️ सही उत्तर है – 30 

संविधान के अनुच्छेद 164 (1) के अनुसार, राजस्थान का मुख्यमंत्री होता है 

[Protection Officer 29.05.2019]

  • निर्वाचित 

  • चयनित 

  • नियुक्त

  • मनोनीत 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अनुसार मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
👉 राज्यपाल वही व्यक्ति मुख्यमंत्री नियुक्त करता है जिसे विधानसभा में बहुमत प्राप्त हो।
👉 अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री के परामर्श से की जाती है।
👉 यह अनुच्छेद राज्य की कार्यपालिका संरचना का प्रमुख आधार है।

✍️ सही उत्तर है – नियुक्त 

राजस्थान सरकार के मंत्रियों के वेतन तथा भत्तों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

(I) राजस्थान सरकार के मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते वही होंगे जो भारत की संसद द्वारा समय-समय पर कानून द्वारा निर्धारित होंगे । 

(II) 1 नवम्बर, 1956 से पूर्व राजस्थान सरकार के मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते भारत के संविधान की दूसरी अनुसूची के उल्लेखानुसार थे । 

नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए : 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]

  • (I) तथा (II) दोनों सही हैं । 

  • (I) सही तथा (II) गलत है । 

  • (I) तथा (II) दोनों गलत हैं । 

  • (I) गलत तथा (II) सही है । 

🔹 व्याख्या

👉 पहला कथन गलत है, क्योंकि राजस्थान सरकार के मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते संसद द्वारा नहीं, बल्कि राजस्थान राज्य के अपने कानून द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
👉 संसद केवल केंद्र सरकार के मंत्रियों के वेतन-भत्तों के लिए कानून बनाती है, राज्यों पर लागू नहीं होती।
👉 दूसरा कथन सही है, क्योंकि 1 नवम्बर 1956 से पूर्व राजस्थान सरकार के मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते, संविधान की दूसरी अनुसूची के अनुसार निर्धारित होते थे।
👉 राज्य पुनर्गठन के बाद वेतन-भत्तों की व्यवस्था राज्य-कानून आधारित हो गई।
👉 दोनों कथनों की तुलना से स्पष्ट है कि पहला त्रुटिपूर्ण, जबकि दूसरा तथ्यपूर्ण है।

✍️ सही उत्तर है – (I) गलत तथा (II) सही है 

अन्तर्राज्यीय परिषद् की स्थायी समिति की 5वीं बैठक में राजस्थान के किस मुख्यमंत्री ने सुझाया था कि राज्यपाल की पुनर्नियुक्ति नहीं होनी चाहिए ? 

S.I. Telecom (Paper-II) 09.11.2025

  • हरिदेव जोशी

  • शिवचरण माथुर

  • जगन्नाथ पहाड़िया

  • भैरोंसिंह शेखावत

🔹 व्याख्या

👉 अंतर्राज्यीय परिषद् की स्थायी समिति की 5वीं बैठक में राजस्थान की ओर से एक महत्वपूर्ण संवैधानिक सुझाव प्रस्तुत किया गया था।
👉 इस बैठक में राज्यपालों की पुनर्नियुक्ति न किए जाने का प्रस्ताव राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने रखा।
👉 यह सुझाव राज्यपाल पद की तटस्थता एवं स्वतंत्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से दिया गया था।
👉 यह महत्वपूर्ण अनुशंसा राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत द्वारा प्रस्तुत की गई थी। 

✍️ सही उत्तर है – भैरोंसिंह शेखावत

निम्नलिखित में से किसने राजस्थान में सबसे अधिक बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है ?

[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]

  • अशोक गहलोत

  • वसुन्धरा राजे

  • भैरोसिंह शेखावत

  • मोहनलाल सुखाड़िया

🔹 व्याख्या

👉 मोहनलाल सुखाड़िया ने राजस्थान में सबसे अधिक बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
👉 उन्होंने कुल चार बार मुख्यमंत्री पद संभाला।
👉 उनका कार्यकाल राज्य के विकास और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
👉 वे राजस्थान के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री रहे।

✍️ सही उत्तर है – मोहनलाल सुखाड़िया 

राजस्थान की मंत्रिपरिषद् की न्यूनतम सदस्य संख्या क्या हो सकती है ? 

[RAS Pre. 01.10.2023]

  • 12 

  • 10 

  • 05 

  • 08 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान ( 91वाँ संशोधन अधिनियम 2003 ) द्वारा मंत्रिपरिषद् के आकार को निश्चित किया गया है।
👉 इस अधिनियम के अनुसार राज्यों में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
👉 साथ ही यह भी प्रावधान है कि मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की न्यूनतम संख्या 12 से कम नहीं होगी।
👉 इसलिए राजस्थान की मंत्रिपरिषद् की न्यूनतम सदस्य संख्या 12 हो सकती है।

✍️ सही उत्तर है – 12 

राज्य मंत्रिपरिषद् में कम से कम कितने सदस्य होने अनिवार्य हैं ? 

[PTI GRADE -II & III (RPSC) 2013]

  • 15

  • 12

  • 21

  • 31

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 में मंत्रिपरिषद् की न्यूनतम संख्या निर्धारित की गई।
👉 इसके अनुसार राज्यों में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या 12 से कम नहीं हो सकती।
👉 यह प्रावधान अनुच्छेद 164(1 क) के अंतर्गत किया गया है।
👉 इसका उद्देश्य राज्य में राजनीतिक स्थिरता और संतुलित शासन व्यवस्था बनाए रखना है।

✍️ सही उत्तर है – 12 

संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार राज्यपाल को जानकारी देना मुख्यमंत्री का_____ है। 

[वरिष्ठ अध्यापक Spl Edu 03.07.2019]

  • अधिकार 

  • दायित्व 

  • विशेषाधिकार 

  • कर्तव्य 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के अनुच्छेद 167 में मुख्यमंत्री के कर्तव्यों का उल्लेख है।
👉 इसके अनुसार मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि वह राज्यपाल को मंत्रिपरिषद् के सभी निर्णयों की जानकारी दे।
👉 राज्यपाल द्वारा मांगे जाने पर आवश्यक सूचना प्रदान करना भी मुख्यमंत्री का दायित्व है।
👉 मुख्यमंत्री राज्यपाल और मंत्रिपरिषद् के बीच समन्वय की कड़ी होता है।

✍️ सही उत्तर है – कर्तव्य 

राजस्थान के मंत्रियों के लिए आचार संहिता के संबंध में निम्नलिखित में से कौनसा कथन गलत है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]

  • पिछले वित्तीय वर्ष के लिए अपनी परिसंपत्तियों और देनदारियों के बारे में 31 जनवरी तक मुख्यमंत्री को वार्षिक रूप से एक घोषणा प्रस्तुत करें। 

  • सरकार से कोई भी अचल संपत्ति खरीदने या बेचने से बचें, सिवाय इसके कि ऐसी संपत्ति सरकार द्वारा सामान्य प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से अर्जित की गई हो । 

  • कोई भी व्यवसाय शुरू करने या उसमें शामिल होने से बचें। 

  • सुनिश्चित करें कि उसके परिवार के सदस्य उस सरकार को माल या सेवाओं की आपूर्ति में लगे व्यवसाय शुरू न करें या उसमें भाग न लें। 

🔹 व्याख्या

👉 यह कथन कि राजस्थान के मंत्रियों को 31 जनवरी तक पिछले वित्तीय वर्ष की परिसंपत्तियाँ व देनदारियाँ घोषित करनी होती हैं, गलत है।
👉 राजस्थान के मंत्रियों के लिए ऐसी वार्षिक घोषणा की कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
👉 आचार संहिता में मंत्रियों के आचरण संबंधी प्रावधान तो हैं, पर 31 जनवरी तक घोषणा अनिवार्यता जैसा कोई प्रावधान स्पष्ट नहीं है।
👉 अतः 31 जनवरी तक परिसंपत्तियों एवं देनदारियों की अनिवार्य वार्षिक घोषणा की बात तथ्यात्मक रूप से असत्य है।

✍️ सही उत्तर है – पिछले वित्तीय वर्ष के लिए अपनी परिसंपत्तियों और देनदारियों के बारे में 31 जनवरी तक मुख्यमंत्री को वार्षिक रूप से एक घोषणा प्रस्तुत करें।  

राजस्थान मंत्रिपरिषद की न्यूनतम संख्या हो सकती है - 

[उपनिरीक्षक (SI) 07.10.2018] 

  • 11 + 1 मुख्यमंत्री 

  • 15 + 1 मुख्यमंत्री 

  • 12 + 1 मुख्यमंत्री 

  • 29 + 1 मुख्यमंत्री 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान ( 91वाँ संशोधन अधिनियम 2003 ) द्वारा मंत्रिपरिषद् का आकार निर्धारित किया गया।
👉 राज्यों में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की न्यूनतम संख्या 12 से कम नहीं हो सकती।
👉 इसमें 11 मंत्री और 1 मुख्यमंत्री सम्मिलित होते हैं।
👉 इसका उद्देश्य दल-बदल तथा अधिक पदों के दुरुपयोग को रोकना है।

✍️ सही उत्तर है – 11 + 1 मुख्यमंत्री 

राज्यपाल को जानकारी देने के सम्बन्ध में मुख्यमंत्री के कर्तव्यों का वर्णन संविधान के किस अनुच्छेद मे वर्णित है ?

[Asst. Jailor 15.03.2016]

  • 200

  • 167

  • 160

  • 165

🔹 व्याख्या

👉 राज्यपाल को जानकारी देने से संबंधित मुख्यमंत्री के कर्तव्यों का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 167 में किया गया है।
👉 इस अनुच्छेद के अनुसार मुख्यमंत्री को मंत्रिपरिषद् के निर्णयों और विधायी प्रस्तावों की जानकारी राज्यपाल को देनी होती है।
👉 राज्यपाल द्वारा माँगी गई किसी भी सूचना को प्रदान करना मुख्यमंत्री का दायित्व है।
👉 यह अनुच्छेद राज्यपाल और मुख्यमंत्री के पारस्परिक संबंधों को स्पष्ट करता है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 167 

भारत के संविधान के निम्नांकित में से किस अनुच्छेद में राज्यपाल को जानकारी देने आदि के संबन्ध में मुख्यमंत्री के कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है ?  

[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]

  • 167 

  • 168 

  • 166 

  • 165 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के अनुच्छेद 167 में राज्यपाल को जानकारी देने के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्यों का उल्लेख है।
👉 मुख्यमंत्री का कर्तव्य है कि वह मंत्रिपरिषद् के निर्णयों और विधायी प्रस्तावों की जानकारी राज्यपाल को दे।
👉 राज्यपाल द्वारा मांगे जाने पर आवश्यक सूचना प्रदान करना भी मुख्यमंत्री का दायित्व है।
👉 यह अनुच्छेद राज्यपाल और मुख्यमंत्री के संवैधानिक संबंधों को स्पष्ट करता है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 167 

राजस्थान में मंत्री परिषद् की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है -  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (संस्कृत)

  • राज्य के मुख्यमंत्री की इच्छा पर निर्भर है ।

  • राज्य के राज्यपाल की इच्छा पर निर्भर है। 

  • राजस्थान विधानसभा की सदस्य संख्या का 15 प्रतिशत तक ।

  • सत्ता पक्ष की सदस्य संख्या का 15 प्रतिशत

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 में राज्यों में मंत्रिपरिषद् के आकार की सीमा तय की गई।
👉 किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
👉 राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य हैं।
👉 अतः राजस्थान में मंत्रिपरिषद् की अधिकतम संख्या 200 का 15 प्रतिशत, यानी 30 तक हो सकती है।

✍️ सही उत्तर है – राजस्थान विधानसभा की सदस्य संख्या का 15 प्रतिशत तक 

राजस्थान के मन्त्री परिषद में मुख्यमंत्री सहित अधिक से अधिक कितने सदस्यगण हो सकते हैं ?

[PTI Grade -III (RPSC) 2011] 

  • 12

  • 30

  • 20

  • 35

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 के अनुसार, किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
👉 राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य हैं।
👉 अतः 200 का 15 प्रतिशत = 30 होता है।
👉 इसलिए राजस्थान में मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद् के अधिकतम 30 सदस्य हो सकते हैं।

✍️ सही उत्तर है – 30

निम्नलिखित में से राज्य का वास्तविक कार्यपालिका प्रधान कौन है

[वरिष्ठ अध्यापक (Spl Edu) 07.02.2018]

  • मुख्यमंत्री  

  • मुख्य सचिव  

  • राज्यपाल  

  • मंत्रिमंडल  

🔹 व्याख्या

👉 राज्य का वास्तविक कार्यपालिका प्रधान मुख्यमंत्री होता है।
👉 राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होते हैं, परंतु कार्यपालिका शक्तियों का वास्तविक प्रयोग मुख्यमंत्री करता है।
👉 मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद् राज्य का प्रशासन चलाती है।
👉 वह राज्य की नीतियों और निर्णयों का मुख्य संचालक होता है।

✍️ सही उत्तर है – मुख्यमंत्री 

यदि मन्त्रिपरिषद् का कोई सदस्य अपनी नियुक्ति के समय विधायक नहीं है, तो उसे कितनी अवधि के भीतर सदन की सदस्यता प्राप्त करना जरूरी है ? 

[PTI Grade -II (RPSC) 2011]

  • छः महीने 

  • एक वर्ष 

  • नौ महीने 

  • तीन महीने 

🔹 व्याख्या

👉 यदि मंत्रिपरिषद् का कोई सदस्य नियुक्ति के समय विधायक नहीं है, तो उसे 6 महीने के भीतर किसी सदन की सदस्यता प्राप्त करनी होती है।
👉 यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 164 के अंतर्गत आता है।
👉 ऐसा न करने पर वह व्यक्ति मंत्री पद से त्यागपत्र देने के लिए बाध्य होता है।
👉 यह व्यवस्था लोकतांत्रिक जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु की गई है।

✍️ सही उत्तर है – छः महीने 

राजस्थान में मंत्रिपरिषद की किसी बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में कौन करता है ? 

[Deputy Commandant 23.08.2020]

  • गृह मंत्री 

  • वित्त मंत्री 

  • मुख्यमंत्री द्वारा नामनिर्दिष्ट कोई अन्य मंत्री 

  • राजस्व मंत्री 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में मंत्रिपरिषद् की बैठक की सामान्यतः अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं।
👉 यदि मुख्यमंत्री अनुपस्थित हों, तो बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री द्वारा नामनिर्दिष्ट कोई अन्य मंत्री करता है।
👉 यह व्यवस्था प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए की जाती है।
👉 नामनिर्दिष्ट मंत्री बैठक में मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है।

✍️ सही उत्तर है – मुख्यमंत्री द्वारा नामनिर्दिष्ट कोई अन्य मंत्री 

निम्नांकित में से कौन राजस्थान में मंत्रिपरिषद की बैठक का स्थान और समय निर्दिष्ट करता है ? 

[Head Master 11.10.2021]

  • मुख्यमंत्री 

  • संसदीय कार्य मंत्री 

  • राज्यपाल 

  • मुख्य सचेतक 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में मंत्रिपरिषद् की बैठक का संचालन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में होता है।
👉 मुख्यमंत्री ही बैठक का स्थान और समय निर्धारित करते हैं।
👉 वे मंत्रिपरिषद् की बैठकों की अध्यक्षता भी करते हैं।
👉 राज्यपाल इस संदर्भ में मुख्यमंत्री के परामर्श पर कार्य करते हैं।

✍️ सही उत्तर है – मुख्यमंत्री 

किसी राज्य में मुख्यमन्त्री सहित मन्त्रियों की संख्या के सम्बंध में उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या का कितना प्रतिशत संविधान द्वारा निर्धारित किया गया है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (SST) 17.02.2019]

  • 18% 

  • 12% 

  • 15% 

  • 10% 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 द्वारा राज्यों में मंत्रिपरिषद् के आकार की सीमा तय की गई।
👉 किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या, उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती।
👉 यह प्रावधान अनुच्छेद 164(1 क) के अंतर्गत किया गया है।
👉 इसका उद्देश्य राजनीतिक संतुलन और सीमित मंत्रीमंडल सुनिश्चित करना है।

✍️ सही उत्तर है – 15% 

मुख्यमंत्री के कार्य व शक्तियों का उल्लेख भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में मिलता है ? 

[स्कूल व्याख्याता (POLITY) 20.07.2016]

  • 168

  • 169

  • 162

  • 167

🔹 व्याख्या

👉 मुख्यमंत्री के कार्य व शक्तियों का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 167 में किया गया है।
👉 इस अनुच्छेद के अनुसार मुख्यमंत्री को राज्यपाल को मंत्रिपरिषद् के निर्णयों व विधायी प्रस्तावों की जानकारी देनी होती है।
👉 राज्यपाल द्वारा मांगे जाने पर आवश्यक सूचना प्रदान करना भी मुख्यमंत्री का दायित्व है।
👉 यह अनुच्छेद राज्यपाल और मुख्यमंत्री के संवैधानिक संबंधों को स्पष्ट करता है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 167 

किसी राज्य की मंत्रिपरिषद में, मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या, उस राज्य की विधानसभा के सदस्यों की कुल संख्या के अधिक नहीं होगी । 

[वरिष्ठ अध्यापक 17.02.2019]

  • सत्रह प्रतिशत

  • सोलह प्रतिशत

  • अठारह प्रतिशत

  • पन्द्रह प्रतिशत 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 के अनुसार मंत्रिपरिषद् के आकार की सीमा तय की गई।
👉 किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
👉 इस प्रावधान का उद्देश्य लोक पदों की सीमा निर्धारण और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है।
👉 राजस्थान विधानसभा में यह सीमा 200 सदस्यों पर आधारित होती है।

✍️ सही उत्तर है – पन्द्रह प्रतिशत 

निम्नांकित में से कौन सा कथन गलत है ?

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • 91वें संवैधानिक संशोधन के बाद, राजस्थान के मंत्रीपरिषद में कुल मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री सहित तीस से अधिक नहीं होगी । 

  • कमला बेनीवाल राजस्थान की पहली महिला मंत्री थी । 

  • 91वें संवैधानिक संशोधन के बाद, राजस्थान के मंत्रीपरिषद में कुल महिला मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री सहित सात से कम नहीं होगी । 

  • 91वें संवैधानिक संशोधन के बाद, राजस्थान के मंत्रीपरिषद में कुल मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री सहित बारह से कम नहीं होगी । 

🔹 व्याख्या:

👉 यह कथन गलत है, क्योंकि 91वाँ संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 2003 में महिला मंत्रियों की न्यूनतम संख्या से संबंधित कोई प्रावधान नहीं है।
👉 यह संशोधन केवल मंत्रिपरिषद के आकार को निर्धारित करता है — अधिकतम 15% विधानसभा सदस्य संख्या और न्यूनतम 12 (मुख्यमंत्री सहित)।
👉 “महिला मंत्रियों की संख्या सात से कम नहीं होगी” जैसी बात संविधान में उल्लिखित नहीं है।
👉 इसलिए यह संशोधन केवल मंत्रिपरिषद की संख्या सीमा तक सीमित है।

✍️ सही उत्तर है – 91वें संवैधानिक संशोधन के बाद, राजस्थान के मंत्रीपरिषद में कुल महिला मंत्रियों की संख्या मुख्यमंत्री सहित सात से कम नहीं होगी । 

भारत के संविधान के अनुसार, राजस्थान की मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या कितने से अधिक नहीं हो सकती ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

  • 15 से 

  • 20 से 

  • 29 से 

  • 30 से 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 में मंत्रिपरिषद् के आकार की सीमा निर्धारित की गई।
👉 इसके अनुसार किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
👉 राजस्थान विधानसभा में 200 सदस्य हैं, इसलिए यह संख्या 30 से अधिक नहीं हो सकती।
👉 इसका उद्देश्य लोक पदों की सीमा तय कर राजनीतिक संतुलन बनाए रखना है।

✍️ सही उत्तर है – 30 से  

मुख्यमंत्री राजस्थान आर्थिक सुधार सलाहकार परिषद् (CMRETAC) के स्थान पर निम्नलिखित में से किसका गठन किया गया है ?  

[RAS Pre परीक्षा 02.02.2025]

  • राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम (RSLDC) 

  • राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एण्ड इनोवेशन (RITI) 

  • राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका) 

  • राजस्थान सेंटर ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी (आर-कैट) 

🔹 व्याख्या

👉 मुख्यमंत्री राजस्थान आर्थिक सुधार सलाहकार परिषद् (CMRETAC) के स्थान पर
राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (RITI) का गठन किया गया।
👉 इसका उद्देश्य राज्य में नीतिगत सुधार, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देना है।
👉 यह संस्था राज्य सरकार की नीतियों के विश्लेषण व कार्यान्वयन में सहयोग करती है।
👉 इसका गठन शासन को अधिक प्रभावी और परिणाममुखी बनाने हेतु किया गया।

✍️ सही उत्तर है – राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (RITI) 

निम्नलिखित में से राजस्थान के कौनसे मुख्यमंत्री, राजस्थान राज्य विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे हैं ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]

  • हीरालाल देवपुरा 

  • भैरोंसिंह शेखावत 

  • हरिदेव जोशी 

  • शिवचरण माथुर 

🔹 व्याख्या

👉 हीरालाल देवपुरा राजस्थान के उन नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष का पद भी संभाला।
👉 प्रदेश की राजनीति में उनका योगदान विधान-निर्माण और प्रशासनिक नेतृत्व दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण रहा। 
👉 इसलिए सूची में दिया गया सही विकल्प हीरालाल देवपुरा ही है।

✍️ सही उत्तर है – हीरालाल देवपुरा 

राज्य की मंत्रिपरिषद के संबंध में सही कथन को पहचानिए - 

[PTI & Librarian 03.05.2025]

  • यह राज्य–विधानमंडल के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। 

  • राज्यपाल को इसकी सलाह अंततः बाध्यकारी होती है। 

  • इसकी न्यूनतम सदस्य संख्या 12 है। 

  • यह राज्यपाल को उसके सभी कृत्यों के निष्पादन में सलाह देती है। 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 द्वारा राज्यों में मंत्रिपरिषद् की न्यूनतम संख्या निर्धारित की गई।
👉 इसके अनुसार किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या 12 से कम नहीं हो सकती।
👉 यह प्रावधान अनुच्छेद 164(1 क) के अंतर्गत किया गया है।
👉 इसका उद्देश्य राज्य में राजनीतिक स्थिरता और प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना है।

✍️ सही उत्तर है – इसकी न्यूनतम सदस्य संख्या 12 है। 

निम्नांकित में से कौनसा युग्म सही सुमेलित नहीं है ? 

[स्कूल व्याख्याता 21.10.2022]

            मुख्यमंत्री           -       राज्यपाल 

  • जगन्नाथ पहाड़िया -  रघुकुल तिलक 

  • हीरालाल देवपुरा - ओ.पी. मेहरा 

  • हरिदेव जोशी - डॉ. संपूर्णानंद 

  • मोहन लाल सुखाड़िया - हुकुम सिंह  

🔹 व्याख्या

👉 हरिदेव जोशी का कार्यकाल डॉ. संपूर्णानंद के साथ सुमेलित नहीं है।
👉 डॉ. संपूर्णानंद का संबंध राजस्थान के राज्यपाल पद से रहा।
👉 जबकि हरिदेव जोशी ने मुख्यमंत्री के रूप में अलग समयावधि में कार्य किया।
👉 इसलिए यह युग्म सही सुमेलित नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – हरिदेव जोशी – डॉ. संपूर्णानंद 

राजस्थान के मुख्यमंत्रियों में, निम्नांकित में से कौन भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति (1962) के सदस्य रहे हैं ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 21.12.2022]

  • बरकतुल्लाह खान 

  • टीकाराम पालीवाल 

  • हरिदेव जोशी 

  • जगन्नाथ पहाड़िया 

🔹 व्याख्या

👉 टीकाराम पालीवाल राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री रहे।
👉 वे वर्ष 1962 में गठित भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के सदस्य भी रहे।
👉 उन्होंने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाने में योगदान दिया।
👉 उनका कार्य राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

✍️ सही उत्तर है – टीकाराम पालीवाल

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिये और नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिये - 

  सूची-I             सूची–II 

मुख्यमंत्री              राज्यपाल 

(A) भैरों सिंह शेखावत     (i) रघुकुल तिलक 

(B) बरकतुल्लाह खान      (ii) सरदार जोगिन्दर सिंह

(C) मोहन लाल सुखाड़िया(iii) डॉ. सम्पूर्णानंद 

(D) वसुन्धरा राजे            (iv) मदनलाल खुराना 

[वरिष्ठ अध्यापक 28.10.2018]

कूट:     (A)     (B)     (C)     (D)

  • (ii)     (iv)     (i)     (iii) 

  • (i)     (ii)     (iii)     (iv) 

  • (i)     (ii)     (iv)     (iii) 

  • (ii)     (i)     (iii)     (iv) 

🔹 व्याख्या

👉 भैरोंसिंह शेखावत के समय रघुकुल तिलक राजस्थान के राज्यपाल थे।
👉 बरकतुल्ला खाँ के कार्यकाल में सरदार जोगिन्दर सिंह राज्यपाल रहे।
👉 मोहनलाल सुखाड़िया के समय डॉ. सम्पूर्णानंद राज्यपाल थे।
👉 वसुंधरा राजे के कार्यकाल में मदनलाल खुराना राज्यपाल रहे।

✍️ सही उत्तर है – (i), (ii), (iii), (iv) 

राज्य में 'संसदीय सचिव' किसके समक्ष शपथ लेता है या प्रतिज्ञान करता है ?

[वरिष्ठ अध्यापक 21.02.2014]

  • उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति के 

  • मुख्यमंत्री के 

  • विधानसभा - अध्यक्ष 

  • राज्यपाल के

🔹 व्याख्या

👉 राज्य में संसदीय सचिव अपने पद की शपथ या प्रतिज्ञान मुख्यमंत्री के समक्ष करता है।
👉 संसदीय सचिव राज्य मंत्रिपरिषद् के कार्य में सहायता करते हैं।
👉 उनका पद मंत्रिपरिषद् की संरचना का हिस्सा माना जाता है।
👉 वे मुख्यमंत्री के निर्देशन और नियंत्रण में कार्य करते हैं।

✍️ सही उत्तर है – मुख्यमंत्री के  

निम्न में से राज्य मंत्रिपरिषद् का कार्य नहीं है

[स्कूल व्याख्याता (POLITY) 20.07.2016]

  • बहुमत सिद्ध करने हेतु समय सीमा निर्धारण/परामर्श 

  • उच्च पदों पर नियुक्ति के समय राज्यपाल को परामर्श 

  • बजट निर्माण 

  • शासन की नीति का निर्धारण 

🔹 व्याख्या

👉 राज्य मंत्रिपरिषद् का कार्य राज्य की नीति-निर्धारण, प्रशासनिक नियंत्रण और विधायी कार्यों से संबंधित होता है।
👉 बहुमत सिद्ध करने हेतु समय सीमा निर्धारण या परामर्श देना मंत्रिपरिषद् का कार्य नहीं है।
👉 यह कार्य सामान्यतः राज्यपाल के विवेकाधिकार में आता है।
👉 मंत्रिपरिषद् राज्यपाल की सहायता और सलाह से शासन संचालन का कार्य करती है।

✍️ सही उत्तर है – बहुमत सिद्ध करने हेतु समय सीमा निर्धारण/परामर्श 

राजस्थान के मन्त्री परिषद में मुख्य मन्त्री सहित अधिक से अधिक कितने सदस्य हो सकते है ? 

[जनसंपर्क अधिकारी 2011]

  • 12

  • 25

  • 30

  • 15

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 के अनुसार, किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
👉 राजस्थान विधानसभा में कुल 200 सदस्य हैं।
👉 अतः 200 का 15 प्रतिशत = 30 होता है।
👉 इसलिए राजस्थान की मंत्रिपरिषद् में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 30 सदस्य हो सकते हैं।

✍️ सही उत्तर है – 30 

यदि किसी राज्य में मंत्रियों की कुल संख्या संविधान (91वाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 में निर्दिष्ट अनुमेय सीमा से अधिक हो, तो भारतीय संविधान के अनुसार क्या कार्यवाही की जा सकती है?

[Asst. Prof. (Polity) 16.05.2024]

  • मुख्यमंत्री के खिलाफ कानूनी कार्यवाही 

  • छः माह के भीतर अनुरूपता लाई जाएगी 

  • अतिरिक्त मंत्रियों की तत्काल बर्खास्तगी 

  • किसी कार्यवाही की आवश्यकता नहीं 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान (91वाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 में मंत्रिपरिषद् के आकार की सीमा निर्धारित की गई है।
👉 यदि किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या अनुमेय सीमा से अधिक हो जाती है, तो छः माह के भीतर अनुरूपता लाना अनिवार्य है।
👉 यह प्रावधान अनुच्छेद 164(1 क) के अंतर्गत आता है।
👉 इसका उद्देश्य राज्य में संवैधानिक संतुलन और सुव्यवस्था बनाए रखना है।

✍️ सही उत्तर है – छः माह के भीतर अनुरूपता लाई जाएगी 

राजस्थानं का प्रथम 'जेण्डर बजट प्रस्तुत करने वालें थे - 

[वरिष्ठ अध्यापक (SST) 21.12.2022]

  • अशोक गहलोत 

  • वसुंधरा राजे 

  • भैरोंसिंह शेखावत 

  • प्रद्युम्न सिंह 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान में प्रथम जेंडर बजट प्रस्तुत करने का श्रेय अशोक गहलोत को जाता है।
👉 इस बजट का उद्देश्य महिलाओं के सशक्तिकरण और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना था।
👉 इसके माध्यम से राज्य की विभिन्न योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई।
👉 यह पहल राजस्थान के सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम थी।

✍️ सही उत्तर है – अशोक गहलोत 

राजस्थान के निम्नांकित मुख्यमंत्रियों में से कौन लोक सभा के सदस्य नहीं रहे हैं ? 

(A) हरिदेव जोशी 

(B) भैरों सिंह शेखावत 

(C) टीकाराम पालीवाल 

(D) बरकतुल्लाह खान 

सही उत्तर है -  

[RAS Pre. 27.10.2021]

  • केवल (A) और (B) 

  • केवल (A), (B) और (D)

  • केवल (B), (C) और (D) 

  • (A), (B), (C) और (D) 

🔹 व्याख्या

👉 टीका राम पालीवाल ये 1962 में तीसरी लोकसभा के लिए हिंडौन (Hindaun) संसदीय क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए थे। टीका राम पालीवाल राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री रहे और बाद में उपमुख्यमंत्री भी बने।
👉 हरिदेव जोशी तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे।
👉 भैरों सिंह शेखावत तीन बार मुख्यमंत्री रहे और बाद में उपराष्ट्रपति भी बने।
👉 बरकतुल्ला खाँ ने 9 जुलाई 1971 से 11 अक्टूबर 1973 तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की। 

✍️ सही उत्तर है – केवल (A), (B) और (D)

राजस्थान का मुख्यमंत्री नियुक्त होने के बाद निम्नलिखित में से किसे उप मुख्यमंत्री बना दिया गया ?

[Asst. Prof. (Polity) 01.07.2016]

  • टीकाराम पाल्लीवाल  

  • जयनारायण व्यास    

  • मोहनलाल सुखाड़िया  

  • हीरालाल शास्त्री  

🔹 व्याख्या

👉 टीकाराम पालीवाल राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री रहे।
👉 मुख्यमंत्री पद के पश्चात् उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया।
👉 उनका कार्यकाल लगभग 2 वर्ष 13 दिन का रहा।
👉 उन्हें राजस्थान के प्रथम उपमुख्यमंत्री होने का भी श्रेय प्राप्त है।

✍️ सही उत्तर है – टीकाराम पालीवाल 

भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत राज्य मन्त्रिमण्डल अपने कार्यों के लिये विधानसभा के प्रति सामूहिक उत्तरदायी होता है ? [*]

[PTI GRADE -II & III (RPSC) 2013]

  • अनुच्छेद 154(2)

  • अनुच्छेद 161 (2) 

  • अनुच्छेद 155 (1) 

  • अनुच्छेद 151 (1) 

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

मुख्य मंत्री की नियुक्ति कौन करते हैं ? [*]

[स्कूल व्याख्याता (POLITY) 20.07.2016]

  • गवर्नर 

  • उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश 

  • राष्ट्रपति 

  • उप-राष्ट्रपति 

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

निम्नांकित में से कौन तीन या अधिक बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे हैं। 

सहायक आचार्य [22.09.2021]

  • शिवचरण माथुर, भैरोंसिंह शेखावत, हरिदेव जोशी 

  • भैरोंसिंह शेखावत, मोहनलाल सुखाड़िया,  हरिदेव जोशी 

  • हरिदेव जोशी, शिवचरण माथुर, मोहनलाल सुखाड़िया 

  • मोहनलाल सुखाड़िया, भैरोंसिंह शेखावत, शिवचरण माथुर 

🔹 व्याख्या

👉 मोहनलाल सुखाड़िया राजस्थान के सबसे लंबे समय तक और तीन से अधिक बार मुख्यमंत्री रहे।
👉 भैरोंसिंह शेखावत भी तीन बार मुख्यमंत्री पद पर रहे।
👉 हरिदेव जोशी ने भी तीन बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया।
👉 इन तीनों ने राजस्थान की राजनीति और शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

✍️ सही उत्तर है – भैरोंसिंह शेखावत, मोहनलाल सुखाड़िया, हरिदेव जोशी 

निम्नांकित में से किसने राजस्थान के मुख्यमंत्री का पद चार बार धारित किया है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

  • शिवचरण माथुर 

  • हरिदेव जोशी 

  • मोहनलाल सुखाड़िया 

  • भैरोंसिंह शेखावत 

🔹 व्याख्या

👉 मोहनलाल सुखाड़िया ने राजस्थान के मुख्यमंत्री पद को चार बार संभाला।
👉 वे राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे।
👉 उनके नेतृत्व में राजस्थान में विकास कार्यों और प्रशासनिक सुधारों की नींव रखी गई।
👉 उन्हें राजस्थान की राजनीति का विकास पुरुष भी कहा जाता है।

✍️ सही उत्तर है – मोहनलाल सुखाड़िया 

निम्नांकित मुख्यमंत्रियों में से किस मुख्यमंत्री ने राजस्थान में राष्ट्रपति शासन के कारण सबसे ज्यादा बार अपने मंत्रीपरिषद की बर्खास्तगी देखी है ? 

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • भैरोंसिंह शेखावत 

  • हरिदेव जोशी

  • अशोक गहलोत 

  • मोहनलाल सुखाड़िया

🔹 व्याख्या

👉 भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में राजस्थान में दो बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था।
👉 पहली बार 1980 में उनकी पहली सरकार बर्खास्त की गई।
👉 दूसरी बार 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद राज्य में पुनः राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
👉 इसलिए उन्होंने अपने कार्यकाल में सबसे अधिक बार मंत्रिपरिषद् की बर्खास्तगी देखी।

✍️ सही उत्तर है – भैरोंसिंह शेखावत 

निम्नांकित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ? 

(राजस्थान के मुख्यमंत्री)   (वह राज्य जहाँ उन्होंने

                         अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल के

                पश्चात् राज्यपाल के पद पर कार्य किया) 

[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]

  • जगन्नाथ पहाड़िया  -    बिहार 

  • मोहनलाल सुखाड़िया  -    आंध्र प्रदेश 

  • हरिदेव जोशी  -     त्रिपुरा 

  • शिवचरण माथुर  -     आसाम 

🔹 व्याख्या

👉 हरिदेव जोशी राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे, परंतु उन्होंने अपने कार्यकाल के पश्चात् त्रिपुरा के राज्यपाल के रूप में कार्य नहीं किया।
👉 हरिदेव जोशी असम, मेघालय व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे हैं।

✍️ सही उत्तर है – हरिदेव जोशी – त्रिपुरा 

राजस्थान के निम्नलिखित मुख्य मंत्रियों में से पदभार ग्रहण करने के क्रम का सही विकल्प चुने - 

[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 22.12.2022]

  • बरकतुल्लाह खान, हरिदेव जोशी, भैरोंसिंह शेखावत, जगन्नाथ पहाड़िया 

  • हरिदेव जोशी, बरकतुल्लाह खान, जगन्नाथ पहाड़िया, भैरोंसिंह शेखावत 

  • बरकतुल्लाह खान, भैरोंसिंह शेखावत, हरिदेव जोशी, जगन्नाथ पहाड़िया 

  • भैरोंसिंह शेखावत, बरकतुल्लाह खान, हरिदेव जोशी, जगन्नाथ पहाड़िया

🔹 व्याख्या

👉 बरकतुल्लाह खाँ ने 9 जुलाई 1971 को राजस्थान के मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला।
👉 हरिदेव जोशी ने 11 अगस्त 1973 को पदभार ग्रहण किया।
👉 भैरोंसिंह शेखावत ने 22 जून 1977 को मुख्यमंत्री पद संभाला।
👉 जगन्नाथ पहाड़िया ने 6 जून 1980 को पदभार ग्रहण किया।

✍️ सही उत्तर है – बरकतुल्लाह खान, हरिदेव जोशी, भैरोंसिंह शेखावत, जगन्नाथ पहाड़िया  

निम्नलिखित में से किस मुख्यमंत्री ने अधिकतम बार राजस्थान में राष्ट्रपति शासन का सामना किया ? 

[RAS Pre परीक्षा 02.02.2025]

  • जयनारायण व्यास

  • हरिदेव जोशी 

  • शिवचरण माथुर

  • भैरोंसिंह शेखावत

🔹 व्याख्या

👉 भैरोंसिंह शेखावत ने राजस्थान में अपने कार्यकाल के दौरान सबसे अधिक बार राष्ट्रपति शासन का सामना किया।
👉 उनके कार्यकाल में राज्य में दो बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ — 1980 और 1992 में।
👉 1980 में उनकी पहली सरकार बर्खास्त की गई थी।
👉 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद राज्य में पुनः राष्ट्रपति शासन लगाया गया।

✍️ सही उत्तर है – भैरोंसिंह शेखावत 

निम्न में से कौनसे नेताओं के समूह तीन या तीन से अधिक बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे हैं ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (पेपर -I) 29.12.2024]

  • शिव चरण माथुर, अशोक गहलोत, मोहन लाल सुखाड़िया 

  • हरिदेव जोशी, शिव चरण माथुर, वसुन्धरा राजे 

  • वसुन्धरा राजे, अशोक गहलोत, शिव चरण माथुर 

  • भैरों सिंह शेखावतं, हरिदेव जोशी, मोहन लाल सुखाड़िया 

🔹 व्याख्या

👉 मोहनलाल सुखाड़िया राजस्थान के चार बार मुख्यमंत्री रहे।
👉 भैरोंसिंह शेखावत ने तीन बार मुख्यमंत्री पद संभाला।
👉 हरिदेव जोशी भी तीन बार मुख्यमंत्री रहे।
👉 इन तीनों नेताओं ने राजस्थान की राजनीति और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

✍️ सही उत्तर है – भैरोंसिंह शेखावत, हरिदेव जोशी, मोहनलाल सुखाड़िया 

राजस्थान के मन्त्रिपरिषद् में मुख्यमंत्री सहित विधान सभा की कुल सदस्य संख्या अधिक से अधिक कितने प्रतिशत सदस्य हो सकते हैं ? 

[PTI Grade -II (RPSC) 2011]

  • 10 प्रतिशत 

  • 25 प्रतिशत 

  • 15 प्रतिशत 

  • 20 प्रतिशत 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 द्वारा राज्यों में मंत्रिपरिषद् के आकार को सीमित किया गया।
👉 किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
👉 यह प्रावधान अनुच्छेद 164(1 क) में निहित है।
👉 इसका उद्देश्य अत्यधिक मंत्री पदों की संख्या को सीमित करना है।

✍️ सही उत्तर है – 15 प्रतिशत

व्यक्तियों के सही समूह को पहचानिए, जो अस्सी के दशक (1980 से 1989) के दौरान दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे :

[Sub Inspector Exam 06.04.2026]

  • भैरोंसिंह शेखावत एवं हरिदेव जोशी

  • हरिदेव जोशी एवं हीरालाल देवपुरा

  • शिवचरण माथुर एवं हरिदेव जोशी

  • भैरोंसिंह शेखावत एवं शिवचरण माथुर

🔹 व्याख्या

👉 शिवचरण माथुर ने 1981 से 1985 और फिर 1988 से 1989 तक दो बार मुख्यमंत्री पद संभाला।

👉 हरिदेव जोशी भी 1980 के दशक में 1985 से 1988 और 1989 से 1990 के बीच दो बार मुख्यमंत्री रहे।

👉 इस दौरान राजस्थान की राजनीति में सत्ता का केंद्र मुख्य रूप से इन दो नेताओं के इर्द-गिर्द रहा था।

👉 इन दोनों ही मुख्यमंत्रियों का संबंध भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दल से था और वे अनुभवी प्रशासक माने जाते थे।

✍️ सही उत्तर है – शिवचरण माथुर एवं हरिदेव जोशी

मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल की अवधि के आधार पर राजस्थान के अधोलिखित मुख्यमंत्रियों को अवरोही क्रय (सर्वाधिक अवधि सर्वप्रथम) में व्यवस्थित कीजिए - [*]

(i) मोहन लाल सुखाड़िया 

(ii) हरी देव जोशी 

(iii) भैरों सिंह शेखावत 

(iv) अशोक गहलोत 

सही कूट चुनिए - 

[Head Master 02.09.2018]

  • (i), (ii), (iii), (iv) 

  • (i), (iii), (ii), (iv) 

  • (i), (iii), (iv), (ii) 

  • (i), (ii), (iv), (iii) 

राजस्थान के निम्नांकित मुख्यमंत्रियों में से कौन, मुख्यमंत्री नियुक्त होते समय राजस्थान विधानसभा का सदस्य नहीं था/थी ? 

[मूल्यांकन अधिकारी 23.08.2020]

  • जगन्नाथ पहाड़िया (1980)

  • वसुन्धरा राजे (2003) 

  • टीकाराम पालीवाल (1952) 

  • बरकतुल्लाह खान (1971) 

🔹 व्याख्या

👉 जगन्नाथ पहाड़िया जब 1980 में मुख्यमंत्री नियुक्त हुए, उस समय वे राजस्थान विधानसभा के सदस्य नहीं थे।
👉 उन्हें बाद में विधानसभा की सदस्यता प्राप्त करनी पड़ी।
👉 यह नियुक्ति संविधान के उस प्रावधान के तहत हुई जिसमें 6 माह के भीतर सदस्य बनना अनिवार्य है।
👉 वे राजस्थान के प्रमुख कांग्रेसी नेताओं में से एक थे।

✍️ सही उत्तर है – जगन्नाथ पहाड़िया (1980) 

राजस्थान कार्यविधि नियम के अनुसार, ऐसे मामले जिनसे राज्य की शान्ति या परिशान्ति प्रभावित होती है या प्रभावित होना संभाव्य है, ऐसे मामले में आदेश जारी किये जाने के पूर्व, निम्नलिखित में से किसे प्रस्तुत किये जायेंगे ?

[A.En (Pre) EXAM 28.09.2025]

  • मुख्य सचिव

  • राज्यपाल

  • पुलिस महानिदेशक

  • मुख्यमंत्री

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान कार्यविधि नियमों में यह प्रावधान है कि ऐसे मामले, जिनसे राज्य की शान्ति या परिशान्ति प्रभावित होती है या होने की संभावना होती है, विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखे जाते हैं।
👉 ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का आदेश जारी करने से पूर्व इन्हें अनिवार्य रूप से मुख्यमंत्री को प्रस्तुत किया जाता है।
👉 मुख्यमंत्री द्वारा मामले की समग्र समीक्षा के बाद ही आदेश या कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है।
👉 यह प्रक्रिया राज्य में कानून-व्यवस्था से जुड़े निर्णयों को उच्च स्तर पर सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जाती है। 

✍️ सही उत्तर है – मुख्यमंत्री 

निम्न में से कौन सा कथन राजस्थान के मुख्यमंत्री के सम्बन्ध में सही नहीं है ?

[RAS Pre. 01.10.2023]

  • बरकतुल्ला खां सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहे । 

  • 1975 के आपातकाल के समय मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी थे । 

  • सी.एस. वेंकटाचारी निर्वाचित मुख्यमंत्री नहीं थे । 

  • मोहनलाल सुखाड़िया ने चार बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली । 

🔹 व्याख्या

👉 श्री हीरालाल देवपुरा राजस्थान के सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहे थे। हीरा लाल देवपुरा (23 फरवरी 1985 – 10 मार्च 1985)
👉 जबकि बरकतुल्ला खाँ ने 9 जुलाई 1971 से 11 जून 1973 तक मुख्यमंत्री पद संभाला था।
👉 इसलिए यह कथन कि बरकतुल्ला खाँ सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहे, सही नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – बरकतुल्ला खाँ सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहे। 

राजस्थान के निम्नलिखित मुख्यमंत्रियों में से किसने वित्तमंत्री के रूप में राजस्थान विधानसभा में बजट प्रस्तुत नहीं किया है ?  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • शिवचरण माथुर

  • जय नारायण व्यास 

  • मोहन लाल सुखाड़िया 

  • हरि देव जोशी 

🔹 व्याख्या

👉 मोहनलाल सुखाड़िया राजस्थान के दीर्घकालीन मुख्यमंत्री रहे।
👉 उन्होंने अपने कार्यकाल में कभी भी वित्तमंत्री के रूप में विधानसभा में बजट प्रस्तुत नहीं किया।

✍️ सही उत्तर है – मोहनलाल सुखाड़िया 

निम्नलिखित में से कौन राजस्थान विधान सभा की पहली महिला मंत्री बनीं ? 

[EO RO (Shift I) 14.05.2023]

  • मेनका गांधी 

  • कमला बेनीवाल 

  • यशोदा देवी 

  • वसुंधरा राजे 

🔹 व्याख्या

👉 श्रीमती कमला बेनीवाल राजस्थान की पहली महिला मंत्री बनीं।
👉 उन्होंने राज्य सरकार में गृह, शिक्षा और कृषि सहित कई विभागों का कार्यभार संभाला।
👉 बाद में वे राजस्थान की पहली महिला उपमुख्यमंत्री भी रहीं।
👉 उन्होंने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

✍️ सही उत्तर है – कमला बेनीवाल 

यदि यह प्रश्न उद्भूत हो कि कोई मामला उचित तौर पर किस विभाग से संबंधित है, तो वह मामला विनिश्चय " के लिए निम्नलिखित में से किसे निर्दिष्ट किया जाएगा ?  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • मुख्य सचिव 

  • सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री 

  • राज्यपाल 

  • कैबिनेट कार्य समूह 

🔹 व्याख्या

👉 यदि यह प्रश्न उत्पन्न हो कि कोई मामला किस विभाग से संबंधित है,
👉 तो ऐसे मामले का अंतिम विनिश्चय मुख्य सचिव द्वारा किया जाता है।
👉 मुख्य सचिव राज्य सरकार का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है।
👉 वह विभागों के बीच समन्वय और निर्णय सुनिश्चित करता है।

✍️ सही उत्तर है – मुख्य सचिव 

राजस्थान के मुख्यमंत्री के अपने प्रथम कार्यकाल के दौरान, श्री अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री का पद निम्न में से किस तारीख को सँभाला था ?

[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]

  • दिसम्बर 12, 1998 

  • दिसम्बर 1, 1998 

  • दिसम्बर 2, 1998 

  • दिसम्बर 3, 1998 

🔹 व्याख्या

👉 श्री अशोक गहलोत ने अपने प्रथम कार्यकाल में मुख्यमंत्री पद 1 दिसम्बर 1998 को संभाला।
👉 वे कांग्रेस पार्टी से चुने गए राजस्थान के प्रमुख नेता हैं।
👉 उनके नेतृत्व में राज्य में विकास और प्रशासनिक सुधारों की शुरुआत हुई।
👉 यह उनका पहला मुख्यमंत्री कार्यकाल था।

✍️ सही उत्तर है – 1 दिसम्बर 1998 

भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार उन बातों को छोड़कर जिनमें राज्यपाल स्वविवेक से कार्य करता है अन्य कार्यों के निर्वाह में उसे सहायता और सलाह प्रदान करने के लिए एक मंत्रिपरिषद् होगी, जिसका प्रधान मुख्य मंत्री होगा ?

[स्कूल व्याख्याता (POLITY) 20.07.2016]

  • 163

  • 162

  • 161

  • 160

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के अनुच्छेद 163 में राज्यपाल की सहायता और सलाह हेतु मंत्रिपरिषद् के गठन का प्रावधान है।
👉 इसमें कहा गया है कि जिन विषयों में राज्यपाल को स्वविवेक से कार्य करना हो, उन्हें छोड़कर अन्य सभी कार्यों में वह मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद् की सलाह पर कार्य करेगा।
👉 यह अनुच्छेद राज्य की कार्यपालिका संरचना और मुख्यमंत्री की प्रधान भूमिका को स्थापित करता है।
👉 मुख्यमंत्री ही इस मंत्रिपरिषद् का प्रधान और वास्तविक कार्यपालिका प्रमुख होता है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 163 

राजस्थान के निम्नांकित मुख्यमंत्रियों में से कौन 1957 से 1962 की अवधि के दौरान राजस्थान विधानसभा, राज्यसभा तथा लोकसभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए ?  

[Research Assistant 10.07.2025]

  • टीका राम पालीवाल 

  • हरिदेव जोशी 

  • हीरालाल शास्त्री 

  • जय नारायण व्यास 

🔹 व्याख्या

👉 टीकाराम पालीवाल राजस्थान के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी और प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री रहे।
👉 वे 1957 से 1962 की अवधि में राजस्थान विधानसभा, राज्यसभा, और लोकसभा — तीनों के सदस्य रहे।
👉 यह उपलब्धि उन्हें राजस्थान के बहुआयामी जननेता के रूप में प्रतिष्ठित करती है।
👉 उनका योगदान राज्य की राजनीतिक एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था में उल्लेखनीय रहा।

✍️ सही उत्तर है – टीकाराम पालीवाल 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 167 के अनुसार, निम्नलिखित में से सही कथन है 

[स्कूल व्याख्याता (POLITY) 17.10.2022]

  • राज्यपाल को जानकारी देना मुख्यमंत्री की शक्ति है । 

  • राज्यपाल को जानकारी देना मुख्यमंत्री का उत्तरदायित्व है

  • राज्यपाल को जानकारी देना मुख्यमंत्री की शक्ति एवं कर्तव्य दोनों है । 

  • राज्यपाल को जानकारी देना मुख्यमंत्री का कर्तव्य है 

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के अनुच्छेद 167 में मुख्यमंत्री के कर्तव्यों का उल्लेख है।
👉 इसके अनुसार राज्यपाल को जानकारी देना मुख्यमंत्री का कर्तव्य होता है।
👉 मुख्यमंत्री को मंत्रिपरिषद् के निर्णयों और विधायी प्रस्तावों की सूचना राज्यपाल को देनी होती है।
👉 यह अनुच्छेद राज्यपाल और मुख्यमंत्री के संवैधानिक संबंधों को स्पष्ट करता है।

✍️ सही उत्तर है – राज्यपाल को जानकारी देना मुख्यमंत्री का कर्तव्य है 

राजस्थान की मंत्रिपरिषद की न्यूनतम सदस्य संख्या है –  

[सहायक आचार्य परीक्षा 08.09.2024]

  • 17 

  • 15 

  • 30 

  • 12

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 द्वारा मंत्रिपरिषद् का आकार निश्चित किया गया।
👉 इसमें राज्यों में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की न्यूनतम संख्या का प्रावधान किया गया।
👉 यह संख्या 12 से कम नहीं हो सकती।
👉 इस संशोधन का उद्देश्य दल-बदल की रोकथाम और पदों की सीमा निर्धारण था।

✍️ सही उत्तर है – 12 

मुख्यमंत्री की नियुक्ति भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत होती है ?

[वरिष्ठ अध्यापक 19.02.2019]

  • अनुच्छेद 164 

  • अनुच्छेद 153

  • अनुच्छेद 163 

  • अनुच्छेद 154 

🔹 व्याख्या

👉 मुख्यमंत्री की नियुक्ति का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 164 में किया गया है।
👉 इसके अनुसार राज्यपाल, मुख्यमंत्री की नियुक्ति करता है।
👉 अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा मुख्यमंत्री के परामर्श पर की जाती है।
👉 यह अनुच्छेद राज्य की कार्यपालिका संरचना से संबंधित है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 164 

राजस्थान कार्यविधि नियम के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन से मामले आदेश जारी किये जाने के पूर्व मुख्यमंत्री को प्रस्तुत किये जायेंगे ? 

(A) व्यक्तियों को विचारण के बिना निरुद्ध रखने हेतु भारत के संविधान के अनुच्छेद 22 (4) (क) के अधीन सलाहकार बोर्ड का गठन। 

(B) ऐसे मामले, जो मृत्युदण्ड प्राप्त व्यक्तियों द्वारा या उनकी ओर से दया याचिका से सम्बन्धित हैं । 

(C) समस्त प्रक्रमों पर गैर-सरकारी विधेयकों के लिए सरकारी नीति का अवधारण। 

सही विकल्प का चयन कीजिए : 

[स्कूल व्याख्याता GK (C) 03.07.2025]

  • केवल (A) और (B)

  • केवल (A) और (C)

  • केवल (B) और (C)

  • (A), (B) और (C)

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान कार्यविधि नियम के अनुसार कुछ विशेष मामले मुख्यमंत्री को आदेश जारी करने से पूर्व प्रस्तुत किए जाते हैं।
👉 इनमें शामिल हैं —
➡ (A) अनुच्छेद 22(4)(क) के अंतर्गत विचारण के बिना निरुद्ध व्यक्तियों हेतु सलाहकार बोर्ड का गठन।
➡ (B) मृत्युदण्ड प्राप्त व्यक्तियों की दया याचिकाओं से संबंधित मामले।
➡ (C) गैर-सरकारी विधेयकों के लिए सरकारी नीति निर्धारण से जुड़े प्रक्रम।
👉 इन सभी मामलों में अंतिम निर्णय से पूर्व मुख्यमंत्री की स्वीकृति आवश्यक होती है।

✍️ सही उत्तर है – (A), (B) और (C) 

निम्नांकित में से राजस्थान के कौन से मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री बनने से पूर्व किसी भी मंत्री परिषद् में मंत्री नहीं रहे हैं ? 

(A) जयनारायण व्यास  (B) बरकतुल्लाह खान 

(C) मोहनलाल सुखाड़िया (D) भैरोंसिंह शेखावत 

सही उत्तर है

[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]

  • (A) और (B) 

  • (A) और (D) 

  • (C) और (D) 

  • (B) और (D) 

🔹 व्याख्या

👉 जयनारायण व्यास राजस्थान के मुख्यमंत्री बने, परंतु इससे पूर्व वे किसी मंत्रिपरिषद् में मंत्री नहीं रहे थे।
👉 इसी प्रकार भैरोंसिंह शेखावत भी मुख्यमंत्री बनने से पहले कभी मंत्री नहीं रहे।
👉 दोनों ने अपने राजनीतिक नेतृत्व और कार्यकुशलता से राज्य की राजनीति में स्थान बनाया।
👉 इसलिए सही युग्म (A) और (D) है।

✍️ सही उत्तर है – (A) और (D) 

वर्ष 2023 में राजस्थान के मुख्यमंत्री ने राज्य के कितने शहरों में 'ग्रीन लंग्स' विकसित करने की घोषणा की है ? [*]

  • 13

  • 4 

  • 15 

  • 2

निम्नलिखित में से कौन एक से अधिक बार राजस्थान का मुख्यमंत्री नहीं रहा है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 22.12.2022]

  • हरिदेव जोशी 

  • हीरालाल देवपुरा 

  • भैरोंसिंह शेखावत 

  • शिवचरण माथुर 

🔹 व्याख्या

👉 हीरालाल देवपुरा राजस्थान के केवल एक बार मुख्यमंत्री रहे।
👉 उनका कार्यकाल 23 फरवरी 1985 से 10 मार्च 1985 तक रहा।
👉 वे राज्य के सबसे कम अवधि के मुख्यमंत्री भी रहे।
👉 अन्य मुख्यमंत्रियों ने यह पद एक से अधिक बार संभाला है।

✍️ सही उत्तर है – हीरालाल देवपुरा 

निम्नांकित में से कौन राजस्थान के मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री के पद पर रहे हैं ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 31.10.2018]

  • हरिदेव जोशी

  • टीकाराम पालीवाल 

  • अशोक गहलोत 

  • मोहनलाल सुखाड़िया 

🔹 व्याख्या

👉 टीकाराम पालीवाल राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री रहे।
👉 बाद में उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया।
👉 उनका कार्यकाल राज्य की प्रारंभिक राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण रहा।
👉 उन्होंने राजस्थान के एकीकरण काल में अहम भूमिका निभाई।

✍️ सही उत्तर है – टीकाराम पालीवाल 

निम्नांकित में से कौन राजस्थान के मुख्यमंत्री नहीं रहे हैं ? 

[ACF परीक्षा 2011]

  • हीरालाल शास्त्री 

  • हीरालाल देवपुरा 

  • हरिशंकर भाभड़ा 

  • बरकतुल्लाह खाँ 

🔹 व्याख्या

👉 हरिशंकर भाभड़ा राजस्थान के उपमुख्यमंत्री रहे थे।
👉 वे राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष पद पर भी आसीन रहे।
👉 उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में मुख्यमंत्री पद नहीं संभाला।
👉 उनका योगदान राज्य की विधान प्रक्रिया और राजनीति में उल्लेखनीय रहा।

✍️ सही उत्तर है – हरिशंकर भाभड़ा 

निम्न में से कौन सबसे कम अवधि तक राजस्थान का मुख्यमंत्री रहा ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]

  • जगन्नाथ पहाडिया 

  • बरकतुल्ला खान 

  • हीरालाल देवपुरा 

  • टीकाराम पालीवाल 

🔹 व्याख्या

👉 हीरालाल देवपुरा राजस्थान के सबसे कम समय तक मुख्यमंत्री रहे।
👉 उनका कार्यकाल केवल 23 फरवरी 1985 से 10 मार्च 1985 का था।
👉 वे राजस्थान के अल्पकालिक मुख्यमंत्री के रूप में जाने जाते हैं।
👉 उनका कार्यकाल राज्य की राजनीतिक स्थिरता में एक संक्षिप्त अवधि रहा।

✍️ सही उत्तर है – हीरालाल देवपुरा

भारतीय संविधान के निम्नलिखित में से कौन से अनुच्छेद में यह उल्लेख है कि - "किसी राज्य की मंत्रि-परिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या उस राज्य की विधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या के पन्द्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी" ? 

[PTI Grade -II (RPSC) 30.04.2023]

  • 165(1) 

  • 164(5) 

  • 164(1 क) 

  • 165 (1 क) 

🔹 व्याख्या

👉 यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 164(1 क) में किया गया है।
👉 इसमें उल्लेख है कि किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
👉 यह प्रावधान 91वें संविधान संशोधन अधिनियम 2003 द्वारा जोड़ा गया था।
👉 इसका उद्देश्य मंत्रिपरिषद् के आकार को सीमित करना और राजनीतिक संतुलन बनाए रखना है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 164(1 क) 

निम्नांकित में से कौन राजस्थान के पहले ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं जो मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते समय विधानसभा के सदस्य नहीं थे ?

[Head Master 11.10.2021] 

  • भैरोसिंह शेखावत 

  • अशोक गहलोत 

  • जग्गनाथ पहाडिया 

  • बरकतुल्लाह ख़ान 

🔹 व्याख्या

👉 भैरोंसिंह शेखावत राजस्थान के पहले ऐसे मुख्यमंत्री रहे जो शपथ लेते समय विधानसभा के सदस्य नहीं थे।
👉 वे बाद में विधानसभा के सदस्य बने।
👉 मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के लिए विधानसभा सदस्यता आवश्यक नहीं, पर 6 माह के भीतर सदस्य बनना अनिवार्य है।
👉 शेखावत का यह कार्यकाल संवैधानिक परंपरा का उदाहरण माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – भैरोंसिंह शेखावत 

राजस्थान में 73वें एवं 74वें संविधान संशोधन अधिनियम के लागू होते समय राज्य के मुख्यमंत्री कौन थे ? 

[स्कूल व्याख्याता (POLITY) 17.10.2022]

  • हरिदेव जोशी 

  • शिवचरण माथुर 

  • राष्ट्रपति शासन 

  • भैरोंसिंह शेखावत 

🔹 व्याख्या

👉 73वाँ और 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम स्थानीय स्वशासन से संबंधित हैं।
👉 इन संशोधनों के लागू होते समय राजस्थान के मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत थे।
👉 उनके नेतृत्व में राज्य में पंचायती राज और नगरीय निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला।
👉 यह कालखंड राजस्थान के स्थानीय शासन के सशक्तीकरण का प्रतीक रहा।

✍️ सही उत्तर है – भैरोंसिंह शेखावत 

राजस्थान सरकार के मंत्रियों के वेतन तथा भत्तों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : [*]

(I) राजस्थान सरकार के मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते वही होंगे जो भारत की संसद द्वारा समय-समय पर कानून द्वारा निर्धारित होंगे । 

(II) 1 नवम्बर, 1956 से पूर्व राजस्थान सरकार के मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते भारत के संविधान की दूसरी अनुसूची के उल्लेखानुसार थे । 

नीचे दिए गए कूटों की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए : 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]

  • (I) तथा (II) दोनों सही है 

  • (I ) सही तथा (II) गलत है 

  • (I) गलत तथा (II) सही है 

  • (I) तथा (II) दोनों गलत है 


राजस्थान में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है ? 

[Head Master 2011]

  • 35

  • 40

  • 25

  • 30

🔹 व्याख्या

👉 संविधान के 91वें संशोधन अधिनियम 2003 द्वारा मंत्रिपरिषद् का आकार निर्धारित किया गया।
👉 राज्यों में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती।
👉 राजस्थान विधानसभा में 200 सदस्य हैं, अतः 200 का 15% = 30 मंत्री हो सकते हैं।
👉 इसलिए राजस्थान में मंत्रिपरिषद् की अधिकतम संख्या 30 निर्धारित है।

✍️ सही उत्तर है – 30 

राजस्थान के निम्नांकित मुख्यमन्त्रियों में से कौन भारत की संविधान सभा का सदस्य नहीं रहा ? 

[स्कूल व्याख्याता (POLITY) 14.12.2020]

  • हीरालाल शास्त्री 

  • सी. एस. वेंकटाचारी 

  • टीका राम पालीवाल  

  • जयनारायण व्यास 

🔹 व्याख्या

👉 टीकाराम पालीवाल राजस्थान के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री रहे।
👉 वे भारत की संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे थे।
👉 उनका योगदान मुख्यतः राजस्थान की राज्यीय राजनीति और एकीकरण प्रक्रिया से संबंधित था।
👉 उन्होंने राज्य में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की नींव रखी।

✍️ सही उत्तर है – टीकाराम पालीवाल