राजस्थान लोक सेवा आयोग के गठन से पूर्व निम्न में से कौन सी तीन देशी रियासतों में लोक सेवा आयोग कार्य कर रहे थे ? 

S.I. Telecom (Paper-II) 09.11.2025

  • अलवर, भरतपुर एवं धौलपुर

  • कोटा, उदयपुर एवं जैसलमेर

  • झालावाड़, बाँसवाड़ा एवं डूंगरपुर

  • जोधपुर, जयपुर एवं बीकानेर

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य के गठन से पहले प्रांतीय सरकारें अपनी आवश्यकता के अनुसार नियुक्तियाँ करने व राज्य सेवा नियम बनाने में पूरी तरह स्वतंत्र थीं।
👉 उस समय कुल 22 प्रांत अस्तित्व में थे, जिनकी प्रशासनिक संरचना अलग-अलग थी।
👉 इन 22 प्रांतों में से केवल 3 प्रांत — जयपुर, जोधपुर और बीकानेर — में ही लोक सेवा आयोग कार्यरत थे।
👉 अन्य प्रांतों में नियुक्तियों एवं सेवा नियमों का कार्य सरकारें स्वयं अपने स्तर पर प्रत्यक्ष रूप से संचालित करती थीं। 

✍️ सही उत्तर है – जोधपुर, जयपुर एवं बीकानेर 

राजस्थान लोक सेवा आयोग अपने किए गए कार्य के बारे में वार्षिक प्रतिवेदन ________ को प्रस्तुत करता है । 

[वरिष्ठ अध्यापक Spl Edu 03.07.2019]

  • राज्य विधान सभा 

  • राज्यपाल 

  • राष्ट्रपति 

  • संसद 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) अपने किए गए कार्यों का वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report) तैयार करता है।
👉 यह प्रतिवेदन राजस्थान के राज्यपाल को प्रस्तुत किया जाता है।
👉 इसके बाद राज्यपाल इस प्रतिवेदन को राज्य विधानसभा में विचारार्थ प्रस्तुत करवाते हैं।
👉 यह प्रक्रिया आयोग की उत्तरदायित्व और पारदर्शिता की भावना को सुदृढ़ करती है।

✍️ सही उत्तर है – राज्यपाल 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या कौन निश्चित करता है ? 

[PTI Grade -III (RPSC) 2011]

  • विधानसभा 

  • मुख्यमन्त्री 

  • राष्ट्रपति 

  • राज्यपाल 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्यों की संख्या निर्धारित करने का अधिकार राज्यपाल को प्राप्त है।
👉 यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 318 के अंतर्गत किया गया है।
👉 राज्यपाल आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तें, वेतन एवं अन्य नियमों को भी निर्धारित करता है।
👉 यह अधिकार आयोग की संरचना और कार्यप्रणाली को सुचारू बनाए रखने हेतु प्रदान किया गया है।

✍️ सही उत्तर है – राज्यपाल 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ? 

सहायक आचार्य [24.04.2016]

  • एस.के. घोष

  • एम.एम. वर्मा 

  • बी.एस. तिवारी

  • एस.सी. त्रिपाठी 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की स्थापना 16 अगस्त 1949 को 28वें अध्यादेश के माध्यम से की गई थी।
👉 आयोग के प्रथम अध्यक्ष सर डॉ. एस. के. घोष थे।
👉 उन्होंने 1 अप्रैल 1949 से 27 जुलाई 1950 तक इस पद पर कार्य किया।
👉 उनके नेतृत्व में आयोग ने राज्य सेवाओं की भर्ती प्रणाली की नींव रखी।

✍️ सही उत्तर है – एस. के. घोष

राजस्थान लोक सेवा आयोग के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं ? नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए: 

A.राजस्थान लोक सेवा आयोग अध्यादेश 20 अगस्त, 1949 को प्रभाव में आया । 

B.राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्थापना 22 दिसम्बर, 1949 को हुई थी । 

C.जयपुर, जोधपुर और बीकानेर में लोक सेवा आयोग 16 अगस्त, 1949 को समाप्त कर दिये गये । 

कूट : 

  • केवल A सही है । 

  • A, B और C सही हैं । 

  • केवल A और B सही हैं। 

  • केवल B और C सही हैं ।

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग अध्यादेश 20 अगस्त 1949 को प्रभाव में आया था।
👉 आयोग की विधिवत स्थापना 22 दिसम्बर 1949 को हुई, जब अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की गई।
👉 इससे पूर्व जयपुर, जोधपुर और बीकानेर के लोक सेवा आयोगों को 16 अगस्त 1949 को समाप्त कर दिया गया।
👉 इन सभी घटनाओं ने मिलकर राजस्थान लोक सेवा आयोग की औपचारिक स्थापना सुनिश्चित की।

✍️ सही उत्तर है – A, B और C सही हैं। 

भारत के संविधान के निम्नांकित में से किस अनुच्छेद के अन्तर्गत राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन राजस्थान के राज्यपाल के सम्मुख प्रस्तुत किया जाता है ?  

[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]

  • 323 

  • 321 

  • 322 

  • 318 

🔹 व्याख्या

👉 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 323 के अंतर्गत राज्य लोक सेवा आयोग (RPSC) को यह दायित्व सौंपा गया है कि वह अपने कार्य एवं उपलब्धियों का वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report) प्रस्तुत करे।
👉 यह प्रतिवेदन राज्यपाल के सम्मुख प्रस्तुत किया जाता है।
👉 तत्पश्चात राज्यपाल इस प्रतिवेदन को राज्य विधानसभा में विचारार्थ प्रस्तुत करवाते हैं।
👉 इस प्रावधान से आयोग की उत्तरदायित्व और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 323 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिये : 

(a) आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य तब तक अपने पद पर बने रहते हैं जब तक कि वे 6 वर्ष का कार्यकाल अथवा 60 वर्ष की आयु पूर्ण नहीं कर लेते । 

(b) इसका गठन 1 अगस्त, 1949 को हुआ था ।

(c) आयोग का सदस्य बनने के लिये कोई योग्यता निर्धारित नहीं है, सिवाय इसके कि आधे सदस्य केन्द्र या राज्य सरकार के अधीन 10 वर्ष तक पदासीन रहे हों । 

(d) डॉ. एस.सी. त्रिपाठी आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे । 

उपर्युक्त में से कौन सा कौन से कथन सही है/हैं?

[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]

  • केवल c

  • a, c और d  

  • b और c दोनों 

  • b और d दोनों 

🔹 व्याख्या

👉 राज्य स्तरीय राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) राज्य के प्रशासन, वित्त, कृषि, ऊर्जा और सांख्यिकी मंत्रालयों में रिक्त पदों की भर्ती के लिए उत्तरदायी है।
👉 इसका उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 316 में किया गया है।
👉 RPSC के अध्यक्ष और अन्य सदस्य की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
👉 नियम है कि आयोग के आधे सदस्य ऐसे हों, जिन्होंने भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन कम से कम 10 वर्ष तक पद संभाला हो।
👉 सदस्य का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक रहता है।
👉 आयोग की शर्तें और निष्कासन की प्रक्रिया अनुच्छेद 317 से संबंधित है।
👉 सदस्य या अध्यक्ष को केवल राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, न कि राज्यपाल द्वारा।
👉 एस. के. घोष राजस्थान लोक सेवा आयोग के प्रथम अध्यक्ष थे।
👉 आयोग का गठन 16 अगस्त 1949 को हुआ था।

✍️ सही उत्तर है – केवल c 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों के सम्बन्ध में निम्नांकित में से कौन सा कथन सही नहीं है ? 

सहायक आचार्य [30.05.2019]

  • सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाएगी ।

  • सदस्य अपने पद से राजस्थान के राज्यपाल द्वारा निलम्बित किया जा सकता है ।

  • सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तारीख से 6 वर्ष की अवधि अथवा 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो अपना पद धारण करेगा ।

  • सदस्य अपनी पदावधि की समाप्ति पर उस पद पर पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा ।

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों के कार्यकाल से संबंधित प्रावधान अनुच्छेद 316 में वर्णित हैं।
👉 सदस्य 6 वर्ष की अवधि अथवा 62 वर्ष की आयु, इनमें से जो पहले पूर्ण हो, तक अपने पद पर बने रहते हैं।
👉 प्रश्न में उल्लिखित 65 वर्ष की आयु का उल्लेख गलत है।
👉 अतः यह कथन सही नहीं है, क्योंकि सही आयु सीमा 62 वर्ष है।

✍️ सही उत्तर है – सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तारीख से 6 वर्ष की अवधि अथवा 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो अपना पद धारण करेगा। 

विधि द्वारा गठित किसी निगमित निकाय की सेवाओं के संबंध में, राजस्थान लोक सेवा आयोग के कृत्यों का विस्तार करने की शक्ति किसके पास है ?

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]

  • राष्ट्रपति 

  • राजस्थान के मुख्य सचिव 

  • राजस्थान राज्य विधानसभा 

  • संसद 

🔹 व्याख्या

👉 अनुच्छेद 321 के अनुसार संसद या राज्य का विधानमंडल किसी अधिनियम द्वारा लोक सेवा आयोग के अतिरिक्त कृत्यों का विस्तार कर सकता है।
👉 इसी प्रावधान से राज्य विधानमंडल को यह शक्ति मिलती है कि वह कानून बनाकर आयोग के कार्यक्षेत्र को निगमित निकायों की सेवाओं तक बढ़ा सके।
👉 राजस्थान में यह शक्ति राजस्थान राज्य विधानसभा के पास है, जो अधिनियम द्वारा RPSC के कृत्यों का विस्तार कर सकती है।
👉 इस प्रावधान का उद्देश्य यह है कि आयोग की निष्पक्ष चयन प्रक्रिया का लाभ अन्य वैधानिक निकायों को भी मिल सके।
👉 इसलिए निगमित निकायों की सेवाओं तक आयोग की भूमिका बढ़ाने का अधिकार राज्य की विधानसभा को प्राप्त है।

✍️ सही उत्तर है – राजस्थान राज्य विधानसभा 

निम्नांकित में से कौन राजस्थान लोक सेवा आयोग के सचिव एवं अध्यक्ष दोनों रहे हैं ? 

[उपनिरीक्षक (SI) 13.09.2021]

  • देवेन्द्र सिंह 

  • एन. के. बैरवा 

  • डी.डी. चौहान 

  • यतीन्द्र सिंह 

🔹 व्याख्या

👉 श्री एन. के. बैरवा राजस्थान लोक सेवा आयोग में सचिव और अध्यक्ष दोनों पदों पर कार्य कर चुके हैं।
👉 उन्होंने 31 दिसम्बर 2000 से 22 मार्च 2004 तक आयोग के अध्यक्ष के रूप में सेवा दी।
👉 इससे पूर्व वे आयोग में सचिव पद पर भी कार्यरत रहे थे।
👉 उनके कार्यकाल में आयोग की भर्ती और चयन प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाया गया।

✍️ सही उत्तर है – एन. के. बैरवा 

राजस्थान लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है : 

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

  • राजस्थान की राज्य विधानसभा को 

  • संघ लोक सेवा आयोग को 

  • भारत के राष्ट्रपति को 

  • राजस्थान के राज्यपाल को 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) अपने कार्यों का वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report) तैयार करता है।
👉 यह प्रतिवेदन राजस्थान के राज्यपाल को प्रस्तुत किया जाता है।
👉 राज्यपाल इस प्रतिवेदन को राज्य विधानसभा में प्रस्तुत करवाते हैं ताकि उस पर विचार किया जा सके।
👉 यह प्रक्रिया आयोग की पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करती है।

✍️ सही उत्तर है – राजस्थान के राज्यपाल को 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को पद से हटाने के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए : 

(i) उच्चतम न्यायालय द्वारा मामले की जाँच कर सकारात्मक रिपोर्ट करने के पश्चात् किसी सदस्य को केवल कदाचार के आधार पर राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है।

(ii) राष्ट्रपति किसी सदस्य को आदेश द्वारा सीधे हटा सकता है, यदि राष्ट्रपति की राय में मानसिक या शारीरिक शैथिल्य के कारण वह अपने पद पर बने रहने के अयोग्य है।

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- B) 08.09.2025]

  • केवल (i) सही है । 

  • न तो (i), न ही (ii) सही है ।

  • (i) व (ii) दोनों सही हैं। 

  • केवल (ii) सही है । 

🔹 व्याख्या

👉 कथन (i) सही है क्योंकि अनुच्छेद 317(1) के अनुसार किसी सदस्य को कदाचार के आधार पर तभी हटाया जा सकता है जब राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से प्राप्त जाँच-प्रतिवेदन सकारात्मक हो।
👉 कदाचार के मामलों में राष्ट्रपति केवल न्यायालयीय जाँच के उपरांत ही हटाने का निर्णय ले सकते हैं।
👉 कथन (ii) भी सही है क्योंकि यदि राष्ट्रपति अपनी राय में किसी सदस्य को मानसिक या शारीरिक शैथिल्य के कारण अयोग्य मानते हैं, तो वे प्रत्यक्ष आदेश द्वारा सदस्य को पद से हटा सकते हैं। 

✍️ सही उत्तर है – (i) तथा (ii) दोनों सही हैं 

राजस्थान लोकसेवा आयोग के सदस्य के कार्यकाल के सम्बन्ध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है ?

[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]

  • राज्य सरकार किसी भी सदस्य को, राजस्थान उच्च न्यायालय की अनुशंसा पर उसके पद से बर्खास्त कर सकती है।

  • सदस्य अपने पद से हस्तलिखित त्यागपत्र, राजस्थान लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष को संबोधित कर, दे सकता है।

  • राजस्थान लोकसेवा आयोग का सदस्य पाँच वर्ष की अवधि के लिए या पैंसठ वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक पद धारण करता है।

  • राजस्थान लोकसेवा आयोग का सदस्य छः वर्ष की अवधि के लिए या बासठ वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक पद धारण करता है।

🔹 व्याख्या

👉 कार्यकाल प्रावधान 6 वर्ष या 62 वर्ष आयु है।
👉
यह प्रावधान अनुच्छेद 316(2) के अंतर्गत है।
👉
सदस्य की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होती है।
👉
सदस्य त्यागपत्र राज्यपाल को देता है।
👉
हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है।

2022 तक राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्वीकृत संख्या (अध्यक्ष सहित) कितनी है ? 

[EO RO (Shift II) 14.05.2023]

  • आठ 

  • इनमें से कोई नहीं 

  • छह 

  • सात 

🔹 व्याख्या

👉 2022 तक राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की स्वीकृत संख्या (अध्यक्ष सहित) कुल आठ है।
👉 इसमें एक अध्यक्ष और सात सदस्य सम्मिलित हैं।
👉 सभी की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
👉 आयोग राज्य की भर्ती, परीक्षा और चयन प्रक्रिया से संबंधित प्रमुख निकाय है।

✍️ सही उत्तर है – आठ 

पी. सत्यनारायण राव समिति की सिफारिशों के आधार पर राजस्थान लोक सेवा आयोग का कार्यालय जयपुर से अजमेर कब स्थानांतरित किया गया ? 

[स्कूल व्याख्याता GK (C) 03.07.2025]

  • 1970

  • 1965

  • 1972

  • 1958

🔹 व्याख्या

👉 पी. सत्यनारायण राव समिति की सिफारिशों के आधार पर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) का कार्यालय जयपुर से अजमेर स्थानांतरित किया गया।
👉 यह स्थानांतरण वर्ष 1958 में किया गया था।
👉 समिति ने अजमेर को भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से उपयुक्त स्थान माना।
👉 तब से आयोग का मुख्यालय स्थायी रूप से अजमेर में स्थित है।

✍️ सही उत्तर है – 1958 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को निलम्बित किया जा सकता है 

[वरिष्ठ अध्यापक 26.04.2017]

  • राजस्थान के राज्यपाल द्वारा 

  • राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा 

  • राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा 

  • राजस्थान के मुख्य सचिव द्वारा 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष को निलम्बित करने का अधिकार राजस्थान के राज्यपाल को प्राप्त है।
👉 यह तब किया जा सकता है जब अध्यक्ष या सदस्य के विरुद्ध दुराचार (misbehaviour) का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हो।
👉 यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 317 के अंतर्गत लागू होती है।
👉 निलम्बन की अवधि में अध्यक्ष अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर सकता।

✍️ सही उत्तर है – राजस्थान के राज्यपाल द्वारा 

निम्नांकित वाक्यों पर विचार कीजिए : 

I. राजस्थान लोक सेवा के प्रदान की गारण्टी अधिनियम, 2011 उपबंधित करता है कि प्रथम अपील अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध, निर्णय के तीस दिनों के भीतर द्वितीय अपील अधिकारी के पास दूसरी अपील की जा सकती है । 

II. राजस्थान लोक सेवा के प्रदान की गारण्टी अधिनियम, 2011 उपबंधित करता है कि द्वितीय अपील अधिकारी तीस दिन के बाद भी अपील ले सकता है यदि वह संतुष्ट हो जाता है कि आवेदक के समय पर अपील नहीं कर पाने के पर्याप्त कारण हैं । 

सही उत्तर का चयन कीजिए :

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • I तथा II दोनों सही हैं । 

  • I तथा II दोनों सही नहीं हैं । 

  • I सही है, किन्तु II सही नहीं है । 

  • I सही नहीं है, किन्तु II सही है । 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011 के अंतर्गत द्वितीय अपील की अवधि 60 दिन निर्धारित की गई है, न कि 30 दिन।
👉 प्रथम अपील अधिकारी के निर्णय के विरुद्ध अपील निर्णय की तिथि से 60 दिनों के भीतर की जा सकती है।
👉 अधिनियम में यह भी प्रावधान है कि यदि आवेदक पर्याप्त कारण दर्शाता है, तो द्वितीय अपील अधिकारी विलम्ब से दायर अपील को स्वीकार कर सकता है।
👉 इस प्रकार दिए गए दोनों कथन I और II सही नहीं हैं।

✍️ सही उत्तर है – I तथा II दोनों सही नहीं हैं 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्नांकित में से कौनसा सत्य नहीं है ?

[वरिष्ठ अध्यापक 17.02.2019]

  • आयोग के सदस्यों का कार्यकाल अपने पद ग्रहण करने से 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु जो भी पहले हो, होगा । 

  • आयोग के सदस्य, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति हेतु पात्र होंगे ।

  • आयोग के सदस्य भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाएँगे

  • आयोग के सदस्य अपने पद से भारत के राष्ट्रपति द्वारा हटाए जाएँगे । 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्ष और सदस्य की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है, न कि भारत के राष्ट्रपति द्वारा।
👉 यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के अंतर्गत किया गया है।
👉 राष्ट्रपति को केवल आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने का अधिकार प्राप्त है।
👉 अतः यह कथन कि “आयोग के सदस्य भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाएँगे” सत्य नहीं है।

✍️ सही उत्तर है – आयोग के सदस्य भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाएँगे 

राजस्थान लोक सेवा आयोग में सदस्यों की संख्या (अध्यक्ष को छोड़कर) कितनी है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 22.12.2022]

  • 5

  • 3

  • 7

  • 4

🔹 व्याख्या

👉 जुलाई 2025 में राजस्थान सरकार ने RPSC में सदस्यों की संख्या अध्यक्ष सहित 11 (1 अध्यक्ष + 10 सदस्य) अधिसूचना जारी कर दी है।

राजस्थान लोकसेवा आयोग से संबंधित निम्न कथनों पर विचार कीजिए - 

(i) राजस्थान लोकसेवा आयोग का सदस्य अपने पद ग्रहण की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक या बासठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो अपना पद धारण करेगा। 

(ii) कोई व्यक्ति जो राजस्थान लोकसेवा आयोग के सदस्य के रूप में पद धारण करता है, अपनी पदावधि की समाप्ति पर उस पद पर पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा । 

[स्कूल व्याख्याता 21.10.2022]

  • (i) व (ii) दोनों सही हैं 

  • केवल (ii) सही है 

  • न तो (i) और ना ही (ii) सही है 

  • केवल (i) सही है 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य अपने पद ग्रहण की तिथि से छह वर्ष की अवधि या 62 वर्ष की आयु, इनमें से जो पहले पूरी हो, तक पद पर बने रहते हैं।
👉 यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 में वर्णित है।
👉 सदस्य अपनी पदावधि समाप्त होने पर उसी पद पर पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते।
👉 इन प्रावधानों से आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

✍️ सही उत्तर है – (i) व (ii) दोनों सही हैं 

राजस्थान लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष सहित कितने सदस्य होते हैं ?  

[Asst. Jailor 15.03.2016]

  • 10

  • 5

  • 7

  • 8

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में कुल एक अध्यक्ष और सात सदस्य होते हैं।
👉 इस प्रकार आयोग में अध्यक्ष सहित कुल 8 सदस्य होते हैं।
👉 इनकी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो पहले हो, तक निर्धारित है।
👉 सभी सदस्य आयोग के भर्ती, परीक्षा, साक्षात्कार और परामर्श संबंधी कार्यों में भाग लेते हैं।

✍️ सही उत्तर है – 8 

निम्नांकित में से किसका कार्यकाल राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में सबसे लंबा रहा है ?

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • सी. आर. चौधरी 

  • डी. एस. तिवारी 

  • एल. एल. जोशी 

  • जे. एम. खान 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्षों में श्री डी. एम. तिवारी का कार्यकाल सबसे लंबा रहा।
👉 उन्होंने 8 अगस्त 1951 से 20 जनवरी 1958 तक इस पद पर कार्य किया।
👉 उनके नेतृत्व में आयोग की संरचना और चयन प्रक्रिया को सुदृढ़ रूप मिला।
👉 वे आयोग के तीसरे अध्यक्ष थे और उनका कार्यकाल लगभग साढ़े छह वर्ष तक रहा।

✍️ सही उत्तर है – डी. एम. तिवारी 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए : 

(i) आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य राजस्थान के राज्यपाल द्वारा नियुक्त होते हैं । 

(ii) आयोग के अध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य केवल राष्ट्रपति की आज्ञा से अपने पद से हटाए जा सकते हैं ।

[RAS Pre. 01.10.2023]

  • न तो (i) न ही (ii) सही है । 

  • (i) व (ii) दोनों सही हैं । 

  • केवल (i) सही है ।

  • केवल (ii) सही है । 

🔹 व्याख्या

👉 कथन (i) सही है — राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य की नियुक्ति राजस्थान के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
👉 कथन (ii) भी सही है — आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को केवल राष्ट्रपति की आज्ञा से ही पद से हटाया जा सकता है।
👉 यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 और 317 में वर्णित है।
👉 इन प्रावधानों से आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।

✍️ सही उत्तर है – (i) व (ii) दोनों सही हैं । 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल है - 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

  • 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो । 

  • 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो । 

  • 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो

  • 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो । 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, इनमें से जो पहले पूर्ण हो, तक निर्धारित है।
👉 यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के अंतर्गत किया गया है।
👉 कार्यकाल के दौरान अध्यक्ष अपनी सेवाएँ निष्पक्षता और स्वतंत्रता के साथ निभाते हैं।
👉 कार्यकाल समाप्त होने पर वे पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते।

✍️ सही उत्तर है – 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो। 

राजस्थान लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है

सहायक आचार्य [30.05.2019]

  • भारत के राष्ट्रपति को 

  • राजस्थान के मुख्यमंत्री को

  • राजस्थान के राज्यपाल को

  • राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति को

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) अपने कार्यों का वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report) तैयार करता है।
👉 यह प्रतिवेदन राजस्थान के राज्यपाल को प्रस्तुत किया जाता है।
👉 राज्यपाल इस प्रतिवेदन को राज्य विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करवाते हैं।
👉 इससे आयोग के कार्यों में उत्तरदायित्व और पारदर्शिता बनी रहती है।

✍️ सही उत्तर है – राजस्थान के राज्यपाल को 

राजस्थान लोक सेवा आयोग का गठन हुआ ?  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (गणित)

  • 30 मार्च, 1948

  • 1 नवम्बर, 1956

  • 26 जनवरी, 1950

  • 20 अगस्त, 1949

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) का गठन 20 अगस्त 1949 को किया गया।
👉 यह गठन राजस्थान के तत्कालीन राजप्रमुख द्वारा जारी 28वें अध्यादेश के अंतर्गत हुआ।
👉 अध्यादेश के प्रकाशन के बाद 22 दिसम्बर 1949 को अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी हुई।
👉 इस प्रकार आयोग का गठन राज्य सेवाओं में भर्ती और चयन प्रक्रिया के संचालन हेतु किया गया था।

✍️ सही उत्तर है – 20 अगस्त, 1949 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्नांकित में से कौन सा कथन सही है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

  • अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है । 

  • राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्योंमें से यथाशक्य निकटतम एक-तिहाई ऐसे व्यक्ति होंगे जो अपनी-अपनी नियुक्ति की तारीख पर भारत सरकार अथवा राजस्थान सरकार के अधीन कम से कम दस वर्ष तक पद धारण कर चुके हैं । 

  • राजस्थान लोक सेवा आयोग का सदस्य छह वर्ष की अवधि तक या बासठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, अपना पद धारण करेगा । 

  • राजस्थान लोक सेवा आयोग का सदस्य आयोग के अध्यक्ष को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकता है । 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्य का कार्यकाल छह वर्ष या बासठ वर्ष की आयु, इनमें से जो भी पहले पूर्ण हो, तक निर्धारित है।
👉 यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के अंतर्गत किया गया है।
👉 इस अवधि के पश्चात सदस्य अपने पद पर पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते।
👉 यह व्यवस्था आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने हेतु की गई है।

✍️ सही उत्तर है – राजस्थान लोक सेवा आयोग का सदस्य छह वर्ष की अवधि तक या बासठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो भी पहले हो, अपना पद धारण करेगा। 

निम्न में से कौन सा कथन राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबद्ध में गलत है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

  • इसकी स्थापना दिसंबर 1949 को हुई । 

  • प्रारंभ में इसमें अध्यक्ष सहित चार सदस्य थे । 

  • 1951 में राजप्रमुख द्वारा आयोग के कार्यों को नियमित करने के उद्देश्य से विनियम पारित किये गए। 

  • मुख्य न्यायाधीश एस.के.घोष को इसका अध्यक्ष बनाया गया

  • स्थापना के समय (22 दिसंबर, 1949), राजस्थान लोक सेवा आयोग में 1 अध्यक्ष और 2 सदस्य थे। इस प्रकार कुल सदस्यों की संख्या 3 थी। इसके प्रथम अध्यक्ष सर एस. के. घोष थे।

राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में, निम्नांकित में से किसका कार्यकाल सबसे लंबा रहा है ? 

[RAS Pre. 28.08.2016]

  • डी. एस. तिवाड़ी 

  • यतींद्र सिंह 

  • मोहम्मद याकूब

  • सी. आर. चौधरी

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्षों में श्री डी. एम. तिवारी का कार्यकाल सबसे लंबा रहा।
👉 उन्होंने 8 अगस्त 1951 से 20 जनवरी 1958 तक इस पद पर कार्य किया।
👉 उनके कार्यकाल के दौरान आयोग ने राज्य की भर्ती प्रणाली और चयन प्रक्रियाओं को व्यवस्थित रूप दिया।
👉 वे आयोग के तीसरे अध्यक्ष थे और उनकी सेवाएँ प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण योगदान मानी जाती हैं।

✍️ सही उत्तर है – डी. एम. तिवारी 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों का एकल कार्यकाल कितना होता है ? 

[EO RO (Shift I) 14.05.2023]

  • 6 साल या 62 साल की उम्र 

  • 5 साल या 62 साल की उम्र 

  • 5 साल या 65 साल की उम्र 

  • 6 साल या 65 साल की उम्र 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, इनमें से जो पहले पूर्ण हो, तक निर्धारित है।
👉 यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 में वर्णित है।
👉 कार्यकाल समाप्त होने के बाद सदस्य अपने पद पर पुनर्नियुक्त नहीं किए जा सकते।
👉 यह व्यवस्था आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

✍️ सही उत्तर है – 6 साल या 62 साल की उम्र 

भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में लोक सेवकों की पदोन्नति के लिए राज्य सरकार को राजस्थान लोक सेवा आयोग का परामर्श लेना आवश्यक है ?  

[सहायक आचार्य परीक्षा 08.09.2024]

  • अनुच्छेद 320 (3)

  • अनुच्छेद 245 (2) 

  • अनुच्छेद 300 (A) 

  • अनुच्छेद 145 (g) 

🔹 व्याख्या

👉 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 320 (3) में यह प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकार को लोक सेवकों की पदोन्नति से संबंधित मामलों में राज्य लोक सेवा आयोग का परामर्श लेना आवश्यक है।
👉 इस अनुच्छेद में आयोग के कर्त्तव्यों एवं परामर्श संबंधी अधिकारों का उल्लेख है।
👉 आयोग पदोन्नति, स्थानांतरण एवं अनुशासनिक मामलों पर निष्पक्ष सलाह प्रदान करता है।
👉 इसका उद्देश्य सेवा नियमों में समानता और पारदर्शिता बनाए रखना है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 320 (3) 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए - 

(i) इसके सदस्य को उसके पद से राष्ट्रपति के आदेश द्वारा केवल कदाचार के आधार पर, उच्चतम न्यायालय से ऐसा प्रतिवेदन मिलने पर हटाया जा सकता है। 

(ii) राष्ट्रपति आदेश द्वारा किसी सदस्य को हटा सकेगा, यदि उसकी राय में वह सदस्य मानसिक या शारीरिक शैथिल्य के कारण अपने पद पर बने रहने के अयोग्य है। 

ऊपर दिए गए कथन/कथनों में से कौनसा/से सही है/हैं ?

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]

  • (i) व (ii) दोनों सही हैं । 

  • केवल (ii) सही है । 

  • केवल (i) सही है । 

  • न तो (i) और ना ही (ii) सही है। 

🔹 व्याख्या

👉 कथन (i) सही है, क्योंकि RPSC के किसी सदस्य को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया केवल कदाचार के आधार पर ही लागू होती है। इसके लिए राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से प्राप्त सकारात्मक प्रतिवेदन अनिवार्य होता है।
👉 कथन (ii) भी सही है, क्योंकि यदि राष्ट्रपति अपनी राय में यह मान लें कि कोई सदस्य मानसिक या शारीरिक शैथिल्य के कारण अपने पद पर बने रहने के अयोग्य है, तो वे प्रत्यक्ष आदेश द्वारा उसे हटा सकते हैं।
👉 दोनों ही स्थितियाँ संविधान में लोक सेवा आयोग के सदस्यों संबंधी हटाने के प्रावधानों के अंतर्गत आती हैं। 

✍️ सही उत्तर है – (i) व (ii) दोनों सही हैं

तहसीलदार की नियुक्ति होती है -

[RAS Pre. 01.10.2023]

  • कर्मचारी चयन आयोग द्वारा

  • संघ लोक सेवा आयोग द्वारा

  • राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा

  • राजस्व मंडल द्वारा

🔹 व्याख्या

👉 तहसीलदार की नियुक्ति राजस्थान राजस्व मंडल द्वारा की जाती है।
👉 राजस्व मंडल राज्य की राजस्व व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण से संबंधित प्रमुख संस्था है।
👉 तहसीलदार को राजस्व वसूली, भूमि अभिलेख रखरखाव और न्यायिक कार्यों की जिम्मेदारी दी जाती है।
👉 यह पद राज्य के राजस्व प्रशासन का मुख्य आधार माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – राजस्व मंडल द्वारा 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की, अध्यक्ष सहित कुल अनुमत संख्या है : 

[वरिष्ठ अध्यापक 21.02.2014]

  • 6

  • 8

  • 7

  • 5

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में कुल एक अध्यक्ष और सात सदस्य होते हैं।
👉 इस प्रकार आयोग की कुल अनुमत संख्या (अध्यक्ष सहित) आठ (8) है।
👉 इनकी नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो पहले हो, तक निर्धारित है।
👉 आयोग राज्य की भर्ती, परीक्षा और परामर्श संबंधी कार्यों का संचालन करता है।

✍️ सही उत्तर है – 8 

राजस्थान लोक सेवा आयोग से संबंधित निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

  • प्रारंभ में, आयोग में एक अध्यक्ष और 3 सदस्य थे । 

  • राजस्थान के गठन के समय कुल 22 प्रांतों में से केवल तीन प्रांत - जयपुर, जोधपुर और बीकानेर में ही लोक सेवा आयोग कार्यरत थे । 

  • राजस्थान लोक सेवा आयोग 22 दिसम्बर, 1949 से प्रभाव में आया ।

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 234, 315, 323 तक लोक सेवा आयोगों के विभिन्न कार्यों और शक्तियों से संबंधित हैं ।" 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग की स्थापना के समय इसमें एक अध्यक्ष और सात सदस्य निर्धारित किए गए थे।
👉 प्रश्न में उल्लिखित कथन कि प्रारंभ में आयोग में एक अध्यक्ष और 3 सदस्य थे, गलत है।
👉 आयोग की संरचना राज्य प्रशासन की आवश्यकता के अनुसार निर्धारित की गई थी।
👉 वर्तमान में भी आयोग में एक अध्यक्ष और सात सदस्य कार्यरत हैं।

✍️ सही उत्तर है – प्रारंभ में, आयोग में एक अध्यक्ष और 3 सदस्य थे। 

राजस्थान लोक सेवा आयोग की निम्नांकित में से कौन सी पूर्व महिला सदस्य संघ लोक सेवा आयोग की सदस्य भी रही है? 

(i) श्रीमती कान्ता कथुरिया 

(ii) श्रीमती कमला भील 

(iii) डॉ. (श्रीमती) प्रकाशवती शर्मा

(iv) श्रीमती दिव्या सिंह 

सही उत्तर का चयन कीजिये : -

सहायक आचार्य [22.09.2021]

  • (i), (ii) एवं (iii) 

  • केवल (ii) एवं (ii) 

  • केवल (i) एवं (ii) 

  • केवल (i) एवं (iii) 

🔹 व्याख्या 

👉 RPSC के नवीनतम सदस्य -लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह राठौर (कार्यवाहक अध्यक्ष व सदस्य), बाबू लाल कटारा (निलंबित), कैलाश चंद मीना ,प्रो. अयूब खान, डॉ. सुशील कुमार बिस्सु , हेमंत प्रियदर्शी (पूर्व आईपीएस), डॉ. अशोक कुमार कलवार , प्रो. दीपक कुमार शर्मा (नवीनतम नियुक्त), प्रो. संतोष आनंद (नवीनतम नियुक्त)

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों का एक पारी कार्यकाल कितना है -  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (संस्कृत)

  • 6 वर्ष 

  • 6 वर्ष अथवा 65 वर्ष की आयु, दोनों में से जो भी पहले समाप्त हो जाय

  • 6 वर्ष अथवा 62 वर्ष की आयु, दोनों में जो भी पहले समाप्त हो जाय 

  • 62 वर्ष की आयु तक 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, इनमें से जो पहले पूर्ण हो, तक निर्धारित है।
👉 यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 में वर्णित है।
👉 कार्यकाल समाप्त होने के बाद सदस्य अपने पद पर पुनर्नियुक्ति के पात्र नहीं होते।
👉 यह व्यवस्था आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है।

✍️ सही उत्तर है – 6 वर्ष अथवा 62 वर्ष की आयु, दोनों में जो भी पहले समाप्त हो जाय 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और सेवा शर्तों का अवधारण कौन करता है ?

[वरिष्ठ अध्यापक 19.02.2019]

  • राज्यपाल

  • मुख्यमंत्री

  • राज्य विधानसभा 

  • राष्ट्रपति

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा शर्तों को निर्धारित करने का अधिकार राज्यपाल के पास होता है।
👉 यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 318 में वर्णित है।
👉 राज्यपाल आयोग के कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन, भत्ते एवं सेवा नियमों का निर्धारण करते हैं।
👉 यह अधिकार आयोग की प्रशासनिक संरचना और सुचारू कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक है।

✍️ सही उत्तर है – राज्यपाल 

आरपीएससी (RPSC) के निम्नलिखित अध्यक्षों को कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें: 

A. डॉ. बी. एल. रावत

B. डॉ. दीन दयाल 

C. राम सिंह चौहान

D. डॉ. एस. एस. टाक 

सही विकल्प का चयन करें : 

[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]

  • A  C  B  D 

  • D  B  A  C 

  • B  D  C  A 

  • C  A  D  B 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अध्यक्षों को उनके कार्यकाल के आधार पर कालानुक्रमिक क्रम में इस प्रकार व्यवस्थित किया जाता है —
👉 डॉ. बी. एल. रावत ने सबसे पहले कार्य किया।
👉 उनके बाद राम सिंह चौहान, फिर डॉ. दीन दयाल, और अंत में डॉ. एस. एस. टाक ने अध्यक्ष पद संभाला।
👉 इस क्रम में आयोग के कार्यों की निरंतरता और प्रशासनिक विकास बनाए रखा गया।

✍️ सही उत्तर है – A C B D 

निम्नांकित में से कौन राजस्थान लोक सेवा आयोग  के कार्यवाहक अध्यक्ष के पद पर नहीं रहे हैं ?

[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 21.12.2022]

  • एस. एस. टाक 

  • एल. एल. जोशी 

  • एच. एन. मीणा  

  • जी.पी. पिलानिया 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में समय-समय पर कई अधिकारी कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में पदस्थ रहे हैं।
👉 इनमें एल. एल. जोशी, एस. सी. सिंजारिया, एच. एन. मीना और डॉ. आर. डी. सैनी जैसे अधिकारी शामिल रहे हैं।
👉 जबकि जी. पी. पिलानिया कभी भी आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष के पद पर नहीं रहे। 

✍️ सही उत्तर है – जी. पी. पिलानिया 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति तथा पदावधि के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]

  • अध्यक्ष की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है तथा आयोग के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राजस्थान के राज्यपाल द्वारा की जाती है । 

  • आयोग का सदस्य अपना पद संभालने से छः वर्ष की अवधि तक अथवा पैंसठ वर्ष की आयु पूर्ण करने तक, जो भी पहले हो, अपने पद पर बना रह सकता है ।

  • राजस्थान का राज्यपाल कदाचार के आधार पर अध्यक्ष अथवा आयोग के किसी सदस्य को उसके पद से हटा सकता है ।

  • राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति राजस्थान के राज्यपाल द्वारा की जाती है । 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार राजस्थान के राज्यपाल को प्राप्त है।
👉 आयोग एक संवैधानिक निकाय है, इसलिए इसकी नियुक्ति प्रक्रिया राज्यपाल की संवैधानिक शक्ति के माध्यम से संचालित होती है।
👉 आयोग के अध्यक्ष और सदस्य अपने पदों पर निर्धारित कार्यावधि तक कार्य करते हैं।
👉 नियुक्ति प्रक्रिया राज्य में लोक सेवाओं की भर्ती और चयन की पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। 

✍️ सही उत्तर है – राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों की नियुक्ति राजस्थान के राज्यपाल द्वारा की जाती है ।  

राजस्थान लोक सेवा आयोग अपने कार्यों का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है -

[RAS Pre. 27.10.2021]

  • राष्ट्रपति के समक्ष 

  • मुख्य सचिव के समक्ष 

  • राज्यपाल के समक्ष 

  • विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष 

🔹 व्याख्या

👉 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 323 के अंतर्गत राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को अपना वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का प्रावधान है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) अपने कार्यों का वार्षिक प्रतिवेदन (Annual Report) तैयार करता है।
👉 यह प्रतिवेदन राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
👉 राज्यपाल इस प्रतिवेदन को राज्य विधानसभा में विचारार्थ प्रस्तुत करवाते हैं।
👉 यह प्रक्रिया आयोग की पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करती है।

✍️ सही उत्तर है – राज्यपाल के समक्ष 

भारत के संविधान के किस प्रावधान के तहत, राजस्थान सरकार के अधीन सेवारत किसी व्यक्ति को प्रभावित करने वाले अनुशासनात्मक मामलों से संबंधित राजस्थान लोक सेवा आयोग से परामर्श करना अनिवार्य है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- C) 09.09.2025]

  • अनुच्छेद 310 (1) 

  • अनुच्छेद 320 (3) 

  • अनुच्छेद 311 (4)

  • अनुच्छेद 325 (2) 

🔹 व्याख्या

👉 अनुच्छेद 320(3) यह अनिवार्य करता है कि RPSC को ऐसे सभी मामलों में परामर्श दिया जाए जो किसी व्यक्ति की अनुशासनात्मक कार्यवाही या उसकी सेवा-स्थितियों को प्रभावित करते हों।
👉 यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि राजस्थान में लोक सेवकों से जुड़े अनुशासनात्मक मामलों या सेवा-संबंधी मुद्दों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में RPSC की भूमिका शामिल हो।
👉 अनुच्छेद 320 आयोग के कार्य एवं दायित्वों को निर्धारित करता है, जिनमें भर्ती, पदोन्नति तथा अनुशासनात्मक मामलों पर परामर्श देना सम्मिलित है। 

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 320(3) 

राजस्थान में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का चयन करता है -  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)

  • संघ लोक सेवा आयोग 

  • राजस्थान लोक सेवा आयोग 

  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग 

  • गृह मंत्रालय 

🔹 व्याख्या

👉 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) एक अखिल भारतीय सेवा (All India Service) है।
👉 राजस्थान सहित सभी राज्यों में कार्यरत इन अधिकारियों का चयन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा किया जाता है।
👉 चयन प्रक्रिया संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से होती है।
👉 इसके पश्चात् अधिकारियों का राज्यों में कैडर आवंटन किया जाता है।

✍️ सही उत्तर है – संघ लोक सेवा आयोग 

राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाओं में चयन हेतु संवीक्षा परीक्षा का प्रारम्भ राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा किस वर्ष से किया गया था ?  

[सहायक आचार्य परीक्षा 08.09.2024]

  • 1982 

  • 1988 

  • 1986 

  • 1984  

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाओं में चयन हेतु संवीक्षा परीक्षा (Screening Test) का प्रारम्भ राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा वर्ष 1984 से किया गया।
👉 इस परीक्षा का उद्देश्य उम्मीदवारों की प्रारंभिक छँटनी कर योग्य अभ्यर्थियों का चयन करना था।
👉 इसके माध्यम से आयोग ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया।
👉 यह परीक्षा राज्य सेवा संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली का प्रारंभिक चरण बनी।

✍️ सही उत्तर है – 1984 

राज्य लोक सेवा आयोग के कर्मचारियों और सदस्यों की सेवा शर्तों को विनियमित करने की शक्ति संविधान के किस अनुच्छेद में वर्णित है ?

[EO RO (Shift I) 14.05.2023]

  • अनुच्छेद 400

  • अनुच्छेद 318 

  • अनुच्छेद 523 सी 

  • अनुच्छेद 240

🔹 व्याख्या

👉 राज्य लोक सेवा आयोग के कर्मचारियों और सदस्यों की सेवा शर्तों को विनियमित करने की शक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 318 में वर्णित है।
👉 इस अनुच्छेद के अंतर्गत यह अधिकार राज्यपाल को प्राप्त है।
👉 राज्यपाल आयोग के सदस्यों की संख्या, सेवा शर्तें और कर्मचारियों के नियमों को निर्धारित करता है।
👉 यह प्रावधान आयोग की प्रशासनिक व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए किया गया है।

✍️ सही उत्तर है – अनुच्छेद 318

निम्नलिखित में से किन वर्षों में राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या को क्रमशः 3 से 4 और 4 से 5 बढ़ाया गया था ?

[A.En (Pre) EXAM 28.09.2025]

  • 1973 और 1981

  • 1972 और 1980

  • 1974 और 1982

  • 1975 और 1982

🔹 व्याख्या

👉 1973 में राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या को बढ़ाते हुए 3 से 4 किया गया।
👉 इसके बाद 1981 में आयोग की संरचना में पुनः वृद्धि करते हुए सदस्यों की संख्या 4 से 5 कर दी गई।
👉 यह वृद्धि आयोग के कार्यभार, परीक्षाओं तथा चयन प्रक्रियाओं में बढ़ती प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए की गई।
👉 सदस्यों की संख्या में यह क्रमिक विस्तार आयोग की कार्यकुशलता और क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से हुआ।
👉 इस प्रकार 1973 और 1981 दोनों में आयोग की सदस्य संख्या में वृद्धि की गई थी।

✍️ सही उत्तर है – 1973 और 1981 

राजस्थान लोक सेवा आयोग के संदर्भ में  निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 

I. संघ लोक सेवा आयोग के पूर्व सदस्य श्री एस. सी. त्रिपाठी की नियुक्ति, 1952 में अध्यक्ष के रूप में की गई । 

II. आयोग के कार्यों को नियमित करने के उद्देश्य से राष्ट्रपति द्वारा राजस्थान लोक सेवा आयोग (सेवा की शर्तें) नियम, 1951 एवं राजस्थान लोक सेवा आयोग (कार्यों की सीमा) नियम, 1951 पारित किए गये ।

निम्नलिखित में से कौन सा विकल्प सही है ?

[PTI Grade -II (RPSC) 30.04.2023]

  • केवल कथन I सत्य है ।

  • केवल कथन II सत्य है ।

  • केवल कथन II सत्य है । 


  • कथन I एवं II दोनों असत्य हैं । 

🔹 व्याख्या

👉 कथन (I) असत्य है क्योंकि श्री एस. सी. त्रिपाठी की नियुक्ति 1950 में राजस्थान लोक सेवा आयोग के द्वितीय अध्यक्ष के रूप में हुई थी, न कि 1952 में।
👉 कथन (II) भी असत्य है क्योंकि राजस्थान लोक सेवा आयोग (सेवा की शर्तें) एवं (कार्यों की सीमा) नियम, 1951 का निर्माण राज्यपाल द्वारा किया गया था, न कि राष्ट्रपति द्वारा। 

✍️ सही उत्तर है – कथन I एवं II दोनों असत्य हैं। 

निम्नलिखित में से राजस्थान के कौन से मुख्य सचिव राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य रह चुके है ? 

[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]

  • सुन्दरलाल खुराना

  • आनन्द मोहन लाल 

  • सांवलदान उज्जवल

  • मोहन मुखर्जी

🔹 व्याख्या

👉 सांवलदान उज्जवल (जिन्हें एस. डी. उज्जवल के नाम से भी जाना जाता है) राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्य रह चुके हैं।
👉 बाद में उन्होंने राजस्थान के मुख्य सचिव के रूप में भी कार्य किया।
👉 वे प्रशासनिक सेवाओं में अपने अनुभव, कुशल नेतृत्व और संगठनात्मक क्षमता के लिए प्रसिद्ध रहे।
👉 उन्होंने राज्य प्रशासन में नीतिगत सुधार और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
👉 उनका कार्यकाल राजस्थान प्रशासनिक सेवा के इतिहास में योग्यता और अनुशासन का उदाहरण माना जाता है।

✍️ सही उत्तर है – सांवलदान उज्जवल  

राजस्थान प्रशासनिक सेवा अधिकारियों को पहली बार जिला कलेक्टर के रूप में पदस्थापना निम्नांकित में से किस वर्ष की गई थी ? 

[RAS Pre. 27.10.2021]

  • 2009

  • 2013

  • 2021

  • 2018

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारियों को पहली बार जिला कलेक्टर के रूप में पदस्थापना वर्ष 2009 में की गई।
👉 इससे पूर्व यह दायित्व सामान्यतः भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों को सौंपा जाता था।
👉 इस नियुक्ति से राज्य सेवाओं में प्रशासनिक उत्तरदायित्व और नेतृत्व क्षमता को मान्यता मिली।
👉 वर्ष 2009 राज्य प्रशासनिक सेवा के इतिहास में महत्वपूर्ण परिवर्तन का वर्ष रहा।

✍️ सही उत्तर है – 2009