मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष के अतिरिक्त कितने सदस्य होते हैं ?  

[Deputy Jailor Exam 13.07.2025]

  • 3 

  • 2 

  • 1 

  • 4 

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के अनुसार राज्य मानवाधिकार आयोग की संरचना (Composition) में संशोधन किया गया।
👉 संशोधित प्रावधान के तहत आयोग में एक अध्यक्ष और दो सदस्य रखे गए हैं।
👉 अध्यक्ष वह व्यक्ति होता है जो किसी उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो।
👉 दो सदस्य ऐसे व्यक्तियों में से चुने जाते हैं जिन्हें मानवाधिकारों से संबंधित विषयों का ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो।
👉 अतः संशोधन अधिनियम, 2006 के अनुसार अध्यक्ष के अतिरिक्त दो सदस्य होते हैं।

✍️ सही उत्तर है – 2 

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग निम्नलिखित में से किन विषयों पर स्व-संज्ञान कार्यवाही कर सकता है ?

I. बलात् श्रम
II.
जोखिमपूर्ण रोज़गार
III.
पारिस्थितिकीय असंतुलन
IV.
प्रदूषण से आसपास का वातावरण प्रभावित होना

सही उत्तर का चयन कीजिए :

[Asst. Prof. (Paper -III) 07.12.2025]

  • केवल II, III एवं IV

  • केवल I, II एवं III

  • केवल I, II एवं IV

  • I, II, III एवं IV

🔹 व्याख्या

👉 RSHRC बलात् श्रम, जोखिमपूर्ण रोजगार पर स्व-संज्ञान ले सकता है।
👉
यह पारिस्थितिकीय असंतुलन व प्रदूषण मामलों में भी कार्यवाही करता है।
👉
ये सभी विषय जीवन व स्वास्थ्य अधिकार से जुड़े हैं।
👉
जोझरी नदी प्रकरण से पर्यावरण अधिकार की पुष्टि होती है।

✍️ सही उत्तर है – I, II, III और IV

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए : [*]

(i) मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के प्रावधानानुसार आयोग में एक अध्यक्ष एवं चार सदस्य हैं।

(ii) वर्तमान में न्यायमूर्ति गोपाल कृष्ण व्यास इसके अध्यक्ष हैं।

[RAS Pre. 01.10.2023]

  • न तो (i) न ही (ii) सही है । 

  • केवल (i) सही है । 

  • (i) व (ii) दोनों सही हैं । 

  • केवल (ii) सही है । 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के किसी सदस्य द्वारा अधिकतम किस उम्र तक पद धारित किया जा सकता है ?

सहायक आचार्य [30.05.2019]

  • 67 वर्ष

  • 65 वर्ष 

  • 62 वर्ष

  • 70 वर्ष 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के कार्यकाल का उल्लेख धारा 24 में किया गया है।
👉 इसके अनुसार, आयोग के सदस्य अपने पद पर 3 वर्ष की अवधि तक रह सकते हैं या 70 वर्ष की आयु पूरी होने तक — इनमें से जो भी पहले हो।
👉 सदस्य को कार्यकाल समाप्ति के बाद पुनः नियुक्त किया जा सकता है, परंतु 70 वर्ष की आयु के बाद वह पद पर नहीं रह सकता।
👉 यह प्रावधान आयोग में अनुभव और दक्षता को बनाए रखने के साथ-साथ उम्र सीमा द्वारा संतुलन स्थापित करता है।
👉 अतः किसी सदस्य द्वारा अधिकतम 70 वर्ष की आयु तक ही पद धारण किया जा सकता है।

✍️ सही उत्तर है – 70 वर्ष 

राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष का पद रिक्त होने की स्थिति में अध्यक्ष के रूप में कौन कार्य करता है ?

[वरिष्ठ अध्यापक 17.02.2019]

  • राज्यपाल सदस्यों में से किसी एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में प्राधिकृत कर सकते हैं।

  • गृह विभाग के मंत्री किसी भी सदस्य को अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के लिए प्राधिकृत कर सकते हैं। 

  • राष्ट्रपति एक नए अध्यक्ष की नियुक्ति करेंगे।

  • मुख्यमंत्री सदस्यों में से किसी एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में प्राधिकृत कर सकते हैं। 

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 25(1) के अनुसार यदि राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष का पद रिक्त हो जाता है, तो राज्यपाल इस स्थिति में कार्यवाही करते हैं।
👉 राज्यपाल आयोग के सदस्यों में से किसी एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में प्राधिकृत कर सकते हैं।
👉 वह सदस्य तब तक अध्यक्ष का कार्यभार संभालता है जब तक कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो जाती।
👉 यह व्यवस्था आयोग के कार्यों की निरंतरता और प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने के लिए की गई है।
👉 अतः अध्यक्ष के पद रिक्त होने पर राज्यपाल किसी एक सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकते हैं।

✍️ सही उत्तर है – राज्यपाल सदस्यों में से किसी एक सदस्य को अध्यक्ष के रूप में प्राधिकृत कर सकते हैं। 

राजस्थान मानव अधिकार आयोग अस्तित्व में आया -

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • 2 अक्टूबर, 1990 को 

  • 26 जनवरी, 1995 को 

  • 10 दिसम्बर, 1998 को

  • 18 जनवरी, 1999 को 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन राजस्थान सरकार द्वारा 18 जनवरी 1999 को एक अधिसूचना जारी कर किया गया।
👉 यह गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत किया गया था।
👉 आयोग का उद्देश्य राज्य में मानवाधिकारों की रक्षा, उन्नयन और संवर्धन सुनिश्चित करना है।
👉 आयोग को मार्च 2000 से क्रियाशील किया गया और इसी वर्ष से इसने कार्य आरंभ किया।
👉 अतः राजस्थान मानवाधिकार आयोग 18 जनवरी 1999 को अस्तित्व में आया।

✍️ सही उत्तर है – 18 जनवरी, 1999 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन कब हुआ ?

[वरिष्ठ अध्यापक 19.02.2019]

  • 2000

  • 1998 

  • 1999 

  • 2001 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन राजस्थान सरकार द्वारा 18 जनवरी 1999 को एक अधिसूचना जारी कर किया गया था।
👉 यह आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत स्थापित किया गया।
👉 आयोग का उद्देश्य राज्य में मानवाधिकारों की रक्षा, उन्नयन और संवर्धन सुनिश्चित करना है।
👉 यह आयोग मार्च 2000 से क्रियाशील हुआ और राज्य में मानवाधिकारों से संबंधित शिकायतों की जांच करने लगा।
👉 अतः राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन वर्ष 1999 में किया गया था।

✍️ सही उत्तर है – 1999 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के निम्नांकित सदस्यों में से कौन सबसे कम कार्यकाल अवधि के लिए पद पर रहे हैं - 

[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 21.12.2022]

  • जस्टिस अमरसिंह गोदारा 

  • आर. के. आकोदिया 

  • बी. एल. जोशी 

  • नमोनारायण मीणा 

🔹 व्याख्या

👉 श्री नमो नारायण मीणा राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य रहे हैं।
👉 उनका कार्यकाल 11 सितम्बर 2003 से 23 मार्च 2004 तक रहा।
👉 यह अवधि मात्र 6 माह से कुछ अधिक रही, जो आयोग के इतिहास में सबसे कम कार्यकाल माना गया।
👉 उन्होंने अपने संक्षिप्त कार्यकाल में मानवाधिकारों की जागरूकता और संरक्षण कार्यों में योगदान दिया।
👉 अतः वे राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के सबसे कम कार्यकाल वाले सदस्य रहे हैं।

✍️ सही उत्तर है – नमो नारायण मीणा 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष किसे नियुक्त किया जा सकता है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक Spl Edu 03.07.2019]

  • उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश को 

  • अवकाश प्राप्त ज़िला एवं एवं सेशन न्यायाधीश को 

  • उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को 

  • उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर केवल वही व्यक्ति नियुक्त किया जा सकता है जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो या उच्च न्यायालय का पूर्व न्यायाधीश हो।
👉 यह प्रावधान मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 21(2) में स्पष्ट रूप से वर्णित है।
👉 इसका उद्देश्य आयोग की न्यायिक विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
👉 उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का अनुभव आयोग को कानूनी दृष्टि से सक्षम और प्रभावशाली निर्णय लेने में सहायता करता है।
👉 अतः आयोग का अध्यक्ष उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को ही नियुक्त किया जा सकता है।

✍️ सही उत्तर है – उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को 

निम्नांकित में से कौन राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष नहीं रहे हैं ? 

[उपनिरीक्षक (SI) 13.09.2021]

  • जस्टिस जगत सिंह 

  • जस्टिस एन. के. जैन 

  • जस्टिस प्रकाश टाटिया 

  • जस्टिस एस. सगीर अहमद 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर अब तक कई न्यायमूर्तियों ने कार्य किया है, जिनमें जस्टिस कान्ता भटनागर, जस्टिस सैय्यद सगीर अहमद, जस्टिस एन. के. जैन, और जस्टिस प्रकाश टाटिया प्रमुख हैं।
👉 जस्टिस जगत सिंह ने आयोग में सदस्य के रूप में कार्य किया, परंतु वे अध्यक्ष नहीं रहे।
👉 उनका कार्यकाल 10 अक्टूबर 2005 से 9 अक्टूबर 2010 तक सदस्य के रूप में रहा।
👉 अतः जस्टिस जगत सिंह का नाम आयोग के अध्यक्षों की सूची में शामिल नहीं है। 

✍️ सही उत्तर है – जस्टिस जगत सिंह 

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के निम्नलिखित अध्यक्षों में से किन्होंने पाँच वर्ष की पदावधि पूरी की ?  

[RAS Pre परीक्षा 02.02.2025]

  • न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद

  • न्यायमूर्ति श्रीमती कांता भटनागर 

  • न्यायमूर्ति प्रकाश टांटिया 

  • न्यायमूर्ति एन. के. जैन 

🔹 व्याख्या

👉 न्यायमूर्ति एन. के. जैन राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष रहे हैं।
👉 उनका कार्यकाल 16 जुलाई 2005 से 15 जुलाई 2010 तक रहा।
👉 उन्होंने आयोग में अपनी पूरी पाँच वर्ष की पदावधि सफलतापूर्वक पूरी की।
👉 उनके कार्यकाल में आयोग ने मानवाधिकारों की सुरक्षा, जागरूकता और संस्थागत सुधारों पर विशेष ध्यान दिया।
👉 अतः पाँच वर्ष की पूर्ण पदावधि पूरी करने वाले अध्यक्ष न्यायमूर्ति एन. के. जैन रहे।

✍️ सही उत्तर है – न्यायमूर्ति एन. के. जैन 

मानवाधिकार संरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2006 के अनुरूप राजस्थान मानवाधिकार आयोग में कितने सदस्य होते हैं ?

[वरिष्ठ अध्यापक Spl Edu 03.07.2019]

  • एक अध्यक्ष, 2 सदस्य 

  • एक अध्यक्ष, 3 सदस्य 

  • एक अध्यक्ष, 4 सदस्य 

  • एक अध्यक्ष, 1 सदस्य 

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संरक्षण (संशोधित) अधिनियम, 2006 के अनुसार राज्य मानवाधिकार आयोग की संरचना (Composition) में परिवर्तन किया गया।
👉 इस संशोधित प्रावधान के तहत आयोग में अब एक अध्यक्ष और दो सदस्य रखे गए हैं।
👉 अध्यक्ष पद पर वही व्यक्ति नियुक्त किया जा सकता है जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो।
👉 दो सदस्य ऐसे व्यक्तियों में से चुने जाते हैं जिन्हें मानवाधिकारों के क्षेत्र में ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो।
👉 इस संशोधन का उद्देश्य आयोग को अधिक प्रभावी, संतुलित और विशेषज्ञतापूर्ण स्वरूप प्रदान करना था।

✍️ सही उत्तर है – एक अध्यक्ष, 2 सदस्य 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के विषय में दिए गए कथनों में से कौनसा /से कथन गलत है/हैं ?

(I) मानवाधिकार आयोग एक स्वायत्त उच्च शक्ति प्राप्त मानवाधिकार निगरानी निकाय है। 

(II) यह आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1999 से अपने अधिकार प्राप्त करता है। 

(III) आयोग में 'मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 2006' के प्रावधानों के अनुसार एक अध्यक्ष और 2 सदस्य होते हैं। 

कूट  

[Assistant Director 09.07.2025]

  • कथन (I) व (III) 

  • केवल कथन (I) 

  • केवल कथन (II) 

  • केवल कथन (III) 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग वास्तव में एक स्वायत्त (Autonomous) एवं उच्चाधिकार प्राप्त मानवाधिकार निगरानी निकाय है, अतः कथन (I) सही है।
👉 यह आयोग अपने अधिकार मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 से प्राप्त करता है, न कि 1999 से — इसलिए कथन (II) गलत है।
👉 मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के अनुसार आयोग की संरचना में एक अध्यक्ष और दो सदस्य होते हैं, अतः कथन (III) सही है। 

✍️ सही उत्तर है – केवल कथन (II) 

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के संबंध में त्रुटिपूर्ण कथन को पहचानिए : 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- B) 08.09.2025]

  • इसके पास सिविल कोर्ट की सभी शक्तियाँ हैं । 

  • इसका अपना अन्वेषण दल है । 

  • यह एक स्वायत्तशासी निकाय है । 

  • यह राजस्थानी भाषा में भी परिवेदनाएँ ग्रहण करता है । 

🔹 व्याख्या

👉 यह कथन कि आयोग “राजस्थानी भाषा में भी परिवेदनाएँ” ग्रहण करता है, त्रुटिपूर्ण एवं गलत है।
👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग में परिवेदनाएँ केवल आधिकारिक भाषाओं अर्थात हिन्दी एवं अंग्रेजी में स्वीकार की जाती हैं।
👉 आयोग मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के अंतर्गत गठित एक वैधानिक निकाय है, जिसका उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा करना है।
👉 आयोग की प्रक्रियाएँ एवं शिकायतें राज्य की निर्धारित आधिकारिक भाषाओं में ही प्रस्तुत की जानी आवश्यक हैं।

✍️ सही उत्तर है – यह राजस्थानी भाषा में भी परिवेदनाएँ ग्रहण करता है 

राजस्थान राज्य के मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक समिति की सिफारिश पर की जाएगी जो मिलकर बनेगी

सहायक आचार्य [30.05.2019]

  • मुख्यमंत्री, विधान सभा के अध्यक्ष, गृहमंत्री और वित्त मंत्री

  • राज्यपाल, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और वित्त मंत्री

  • मुख्यमंत्री, विधान सभा के अध्यक्ष, गृहमंत्री और विपक्ष के नेता

  • मुख्य न्यायमूर्ति, मुख्यमंत्री, विधान सभा के अध्यक्ष और गृह मंत्री

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
👉 यह नियुक्ति एक समिति की सिफारिश पर की जाती है जो चार प्रमुख सदस्यों से मिलकर बनती है।
👉 इस समिति में मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा के अध्यक्ष, गृह विभाग के मंत्री, और विधानसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।
👉 यह समिति आयोग के लिए योग्य उम्मीदवारों की अनुशंसा राज्यपाल को करती है।
👉 इस व्यवस्था का उद्देश्य आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया को सुनिश्चित करना है।

✍️ सही उत्तर है – मुख्यमंत्री, विधानसभा के अध्यक्ष, गृहमंत्री और विपक्ष के नेता 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का संघटन है -

[वरिष्ठ अध्यापक (स्थगित) 22.12.2022]

  • 1 अध्यक्ष एवं 3 सदस्य 

  • 1 अध्यक्ष एवं 4 सदस्य 

  • 1 अध्यक्ष एवं 6 सदस्य 

  • 1 अध्यक्ष एवं 2 सदस्य 

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के अनुसार राज्य मानवाधिकार आयोग की संरचना (संघटन) में संशोधन किया गया।
👉 इस संशोधित प्रावधान के अंतर्गत आयोग में अब एक अध्यक्ष और दो सदस्य रखने का प्रावधान है।
👉 अध्यक्ष पद पर 2019 के संशोधन के बाद मानव अधिकार आयोग अध्यक्ष वही व्यक्ति बन सकता है जो उच्च न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो (मुख्य न्यायाधीश अनिवार्य नहीं है)
👉 दो सदस्य ऐसे व्यक्तियों में से चुने जाते हैं जिन्हें मानवाधिकारों के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या अनुभव हो।
👉 यह संरचना आयोग की प्रभावशीलता, निष्पक्षता और स्वायत्तता को बनाए रखने के लिए निर्धारित की गई है।

✍️ सही उत्तर है – 1 अध्यक्ष एवं 2 सदस्य 

राज्य के मानव अधिकार आयोग में अध्यक्ष के अलावा अन्य कितने सदस्यगण हो सकती है [*]

[PTI Grade -II (RPSC) 2011]

  • 4

  • 5

  • 3

  • 2

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की चयन समिति में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं होता है ? 

[Asst. Jailor 15.03.2016]

  • मुख्यमंत्री

  • मुख्य न्यायाधीश 

  • विधान सभा में विपक्ष का नेता  

  • विधान सभा अध्यक्ष  

🔹 व्याख्या

👉 राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति एक समिति की अनुशंसा पर की जाती है।
👉 इस समिति में मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा के अध्यक्ष, गृह विभाग के मंत्री, तथा विधानसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।
👉 जिन राज्यों में विधान परिषद होती है, वहाँ सभापति और परिषद में विपक्ष के नेता भी सदस्य रहते हैं।
👉 मुख्य न्यायाधीश इस समिति के सदस्य नहीं होते, उनसे केवल परामर्श उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति के समय लिया जाता है। 

✍️ सही उत्तर है – मुख्य न्यायाधीश 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष किसे नियुक्त किया जा सकता है ? [*]

[उपनिरीक्षक (SI) 15.09.2021]

  • किसी उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश

  • सेवानिवृत्त जिला व सत्र न्याय 

  • उच्चतम न्यायालय का सेवानिवृत्त न्यायाधीश

  • किसी उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश 

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

निम्न में से कौन राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के एक अध्यक्ष नहीं थे ?

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- C) 09.09.2025]

  • न्यायमूर्ति एन. के. जैन 

  • न्यायमूर्ति प्रेमचंद जैन 

  • न्यायमूर्ति कांता भटनागर 

  • न्यायमूर्ति एस. सगीर अहमद 

🔹 व्याख्या

👉 न्यायमूर्ति प्रेमचंद जैन ने राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के रूप में कभी कार्य नहीं किया।
👉 आयोग के अध्यक्ष पद पर कार्य करने वाले न्यायाधीशों में उनका नाम शामिल नहीं है।
👉 इसके विपरीत न्यायमूर्ति एन. के. जैन ने वर्ष 2015 से 2020 तक आयोग के अध्यक्ष के रूप में सेवा दी।
👉 इसलिए अध्यक्ष पद से जुड़ी जानकारी में प्रेमचंद जैन का उल्लेख गलत है।
👉 सही तथ्य यह है कि आयोग का नेतृत्व न्यायमूर्ति एन. के. जैन द्वारा किया गया था।

✍️ सही उत्तर है – न्यायमूर्ति प्रेमचंद जैन  

निम्नलिखित में से किसने सबसे कम कार्यकाल के लिए राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष का पद सँभाला ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 30.07.2023]

  • जस्टिस अमर सिंह गोदारा 

  • जस्टिस सुश्री कांता भटनागर

  • जस्टिस प्रकाश टाटिया 

  • जस्टिस एस. सगीरअहमद

🔹 व्याख्या

👉 जस्टिस सुश्री कान्ता भटनागर राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की प्रथम अध्यक्ष रही हैं।
👉 उनका कार्यकाल 23 मार्च 2000 से 11 अगस्त 2000 तक रहा।
👉 उन्होंने आयोग की स्थापना के प्रारंभिक चरण में कार्य किया और राज्य में मानवाधिकार संरक्षण की नींव रखी।
👉 उनका कार्यकाल केवल कुछ महीनों (लगभग पाँच माह) का था, जो अब तक का सबसे कम कार्यकाल रहा है।
👉 अतः आयोग की सबसे अल्पकालीन अध्यक्ष जस्टिस सुश्री कान्ता भटनागर थीं।

✍️ सही उत्तर है – जस्टिस सुश्री कान्ता भटनागर 

निम्नलिखित सूची-A को सूची-B से सुमेलित कीजिये : 

सूची-A  सूची-B 
A. मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम   i. 2000 
B. राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन ii. 1993 
C. मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम iii. 2006 
D.राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के बारे में अधिसूचना iv.1999

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

सही विकल्प चुनिए :

            A     B     C     D

  • i     iii    iv     ii     

  • ii     i     iii     iv 

  • ii     iii     i     iv 

  • iii    i     iv     ii 

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम भारत सरकार द्वारा सन् 1993 में पारित किया गया था।
👉 राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन सन् 2000 में किया गया जब यह आयोग मार्च 2000 से क्रियाशील हुआ।
👉 मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम सन् 2006 में पारित किया गया, जिसके तहत आयोग की संरचना में संशोधन किया गया।
👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन से संबंधित अधिसूचना 18 जनवरी 1999 को जारी की गई थी।
👉 इस प्रकार दोनों सूचियों का सही सुमेलन निम्न है - 

सूची-A सूची-B
A. मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम ii. 1993
B. राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन i. 2000
C. मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम iii. 2006
D. राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के बारे में अधिसूचना iv. 1999

✍️ सही उत्तर है – A–ii, B–i, C–iii, D–iv 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के सम्बन्ध में असत्य कथन की पहचान कीजिए -

[PTI & Librarian 03.05.2025] 

  • राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन 18 जनवरी, 1999 को किया गया। 

  • जून 2023 में गंगाराम मूलचन्दानी राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष नियुक्त किये गये।

  • कांता भटनागर राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की प्रथम महिला अध्यक्ष थी। 

  • मानव अधिकार संरक्षण (संशोधित) अधिनियम, 2006 के अनुसार, राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग में एक अध्यक्ष और दो सदस्यों का प्रावधान किया गया। 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान मानवाधिकार आयोग के वर्तमान अध्यक्ष न्यायमूर्ति जी. आर. मूलचंदानी हैं।
👉 इन्हें राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा 27 जून 2024 को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया।
👉 इनका कार्यकाल पद ग्रहण की तिथि से तीन वर्ष या 70 वर्ष की आयु, इनमें से जो पहले हो, तक रहेगा।
👉 आयोग के अन्य सदस्य के रूप में अशोक गुप्ता (सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी) कार्यरत हैं।
👉 आयोग राज्य में मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए कार्य करता है।

✍️ सही उत्तर है – जून 2023 में गंगाराम मूलचन्दानी राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष नियुक्त किये गये।

मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के कौन से अध्याय में राज्य मानवाधिकार आयोग संबंधी प्रावधान किए गये हैं ? 

[Protection Officer 28.01.2023]

  • अध्याय – V 

  • अध्याय - VII 

  • अध्याय - VIII

  • अध्याय - IV 

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में राज्य मानवाधिकार आयोग से संबंधित प्रावधानों को अध्याय – V में सम्मिलित किया गया है।
👉 इस अध्याय में धारा 21 से 29 तक राज्य मानवाधिकार आयोग की संरचना, नियुक्ति, शक्तियाँ और कार्य वर्णित हैं।
👉 इसमें आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल, पद से हटाने की प्रक्रिया, तथा कार्य प्रणाली का विस्तृत उल्लेख है।
👉 इस अध्याय के प्रावधान राज्य स्तर पर मानवाधिकारों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए बनाए गए हैं।
👉 अतः राज्य मानवाधिकार आयोग संबंधी प्रावधान अध्याय – V में किए गए हैं।

✍️ सही उत्तर है – अध्याय – V 

राजस्थान के मानव अधिकार आयोग में अध्यक्ष के अलावा कितने सदस्य हो सकते हैं ? [*]

[PTI Grade -III (RPSC) 2011]

  • 3

  • 4

  • 2

  • 5

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के अधिनियम किस दिनांक उपरांत लागू हुए ? 

सहायक आचार्य [ 07.01.2024] 

  • 19 जून, 2001 से 

  • 19 मार्च, 2000 से 

  • 19 अगस्त, 2001 से 

  • 19 जनवरी, 2001 से 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन 18 जनवरी 1999 को राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर किया गया था।
👉 आयोग का कार्यान्वयन और अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन 19 जनवरी 2001 से किया गया।
👉 इसी तिथि से आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के अनुसार कार्य करना प्रारंभ किया।
👉 इस अधिनियम के तहत आयोग को राज्य में मानवाधिकारों की रक्षा, जांच और सिफारिश करने की शक्तियाँ प्रदान की गईं।
👉 अतः राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का अधिनियम 19 जनवरी 2001 से लागू हुआ।

✍️ सही उत्तर है – 19 जनवरी, 2001 से 

निम्नांकित में से कौन से कथन राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के सम्बन्ध में सही हैं ?

(A) इसका गठन राजस्थान सरकार की 18 जनवरी, 1999 की एक अधिसूचना द्वारा हुआ ।

(B) यह आयोग मार्च, 2000 से क्रियाशील हुआ।

(C) मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के अनुसार आयोग में एक अध्यक्ष एवं 3 सदस्यों का प्रावधान किया गया है । 

(D) इसके भूतपूर्व अध्यक्षों में से एक उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रहे हैं। 

सही उत्तर का चयन नीचे दिए गए कूट से कीजिए :

कूट : 

[RAS Pre. 05.08.2018]

  • (A), (B) और (C)

  • (A), (B) और (D) 

  • (B) और (C)

  • (B), (C) और (D)

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन राजस्थान सरकार द्वारा 18 जनवरी 1999 को एक अधिसूचना के माध्यम से किया गया था।
👉 यह आयोग मार्च 2000 से क्रियाशील हुआ और राज्य में मानवाधिकार संरक्षण का कार्य प्रारंभ किया।
👉 मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के अनुसार आयोग में एक अध्यक्ष और दो सदस्य का प्रावधान है, अतः तीन सदस्य वाला कथन गलत है।
👉 आयोग के भूतपूर्व अध्यक्षों में से एक न्यायमूर्ति सैय्यद सगीर अहमद उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रहे हैं।

✍️ सही उत्तर है – (A), (B) और (D) 

राजस्थान मानवाधिकार आयोग मानवाधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जाँच कर सकता है : 

(i) स्वप्रेरणा से 

(ii) किसी पीड़ित द्वारा उसे अर्जी प्रस्तुत किये जाने पर 

(iii) किसी पीड़ित की ओर से किसी व्यक्ति द्वारा उसे अर्जी प्रस्तुत किये जाने पर । 

सही विकल्प का चयन कीजिए :

[व्याख्याता (तकनीकी) 12.03.2021]

  • केवल (i) और (iii)

  •  (i), (ii) और (iii) 

  • केवल (i) और (ii)

  • केवल (ii) और (iii)

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत जाँच की व्यापक शक्तियाँ प्रदान की गई हैं।
👉 आयोग स्वप्रेरणा (Suo Moto) से किसी मामले की जाँच प्रारंभ कर सकता है।
👉 यह किसी पीड़ित व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत अर्जी पर भी कार्यवाही कर सकता है।
👉 इसके अतिरिक्त, किसी पीड़ित की ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा प्रस्तुत अर्जी पर भी आयोग जाँच प्रारंभ कर सकता है।
👉 अतः आयोग मानवाधिकार उल्लंघन की जाँच इन तीनों आधारों पर कर सकता है — (i), (ii) और (iii)।

✍️ सही उत्तर है – (i), (ii) और (iii) 

राजस्थान की राज्य सरकार ने राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन की अधिसूचना कब जारी की ?

[वरिष्ठ अध्यापक 17.02.2019]

  • 18 जनवरी, 1999 

  • 17 जनवरी, 1998

  • 16 मार्च, 2001

  • 19 फरवरी, 1997

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन राजस्थान सरकार द्वारा 18 जनवरी 1999 को एक अधिसूचना जारी कर किया गया था।
👉 यह गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया।
👉 आयोग का उद्देश्य राज्य में मानवाधिकारों की रक्षा, संवर्धन और जागरूकता सुनिश्चित करना है।
👉 इसके बाद आयोग मार्च 2000 से क्रियाशील हुआ और अपने कार्यों का संचालन प्रारंभ किया।
👉 अतः आयोग की अधिसूचना 18 जनवरी 1999 को जारी की गई थी।

✍️ सही उत्तर है – 18 जनवरी, 1999 

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग से सम्बन्धित निम्न कथनों पर विचार कीजिए 

(I) आयोग की कार्यप्रणाली का निर्धारण राजस्थान सरकार द्वारा किया जाता है। 

(II) कार्य संचालन हेतु आयोग में राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग (प्रक्रिया) विनियम, 2001 लागू हैं। 

सही उत्तर का चयन कीजिए -  

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- D) 11.09.2025]

  • (I) एवं (II) दोनों सही हैं।

  • केवल (II) सही हैं। 

  • न तो (I) और ना ही (II) सही हैं।

  • केवल (I) सही हैं। 

🔹 व्याख्या

👉 आयोग की कार्यप्रणाली का निर्धारण राजस्थान सरकार द्वारा नहीं किया जाता, इसलिए कथन (I) गलत है।
👉 आयोग अपने कार्य संचालन के लिए राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग (प्रक्रिया) विनियम, 2001 के अंतर्गत कार्य करता है।
👉 ये विनियम आयोग की जाँच, सुनवाई, शिकायत निस्तारण और प्रशासनिक प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से नियंत्रित करते हैं। 

✍️ सही उत्तर है – केवल (II) सही है 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें : 

(i) मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 33 में आयोग को वैधानिक गारंटी प्रदान की गई है । 

(ii) आयोग की अपनी एक जाँच एजेंसी है जिसका प्रमुख महानिरीक्षक के पद से नीचे का पुलिस अधिकारी नहीं होता है ।

ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं ?

[स्कूल व्याख्याता GK (C) 03.07.2025]

  • न तो (i) और न ही (ii)

  • केवल (i)

  • (i) और (ii) दोनों

  • केवल (ii)

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग वास्तव में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत गठित एक स्वशासी (Autonomous) एवं उच्चाधिकार प्राप्त संस्था है।
👉 आयोग की स्वायत्तता इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की विधि, निश्चित कार्यकाल, और वित्तीय स्वतंत्रता (धारा 33) में निहित है।
👉 आयोग के पास अपना स्वतंत्र अन्वेषण दल (Investigation Agency) भी होता है।
👉 इस दल का नेतृत्व ऐसा पुलिस अधिकारी करता है जो महानिरीक्षक (IG) स्तर से नीचे का नहीं होता।
👉 अतः दिए गए कथनों में से केवल (ii) कथन सही है।

✍️ सही उत्तर है – केवल (ii) 

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग का विन्यास है - 

[उपनिरीक्षक (SI) 07.10.2018]

  • एक अध्यक्ष एवं तीन सदस्य 

  • एक अध्यक्ष एवं चार सदस्य 

  • एक अध्यक्ष एवं दो सदस्य 

  • एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष एवं एक सचिव

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के अनुसार राज्य मानवाधिकार आयोग की संरचना (विन्यास) में परिवर्तन किया गया। मानवाधिकार संशोधन अधिनियम 2019 के अनुसार मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष अध्यक्ष उच्च न्यायालय का कोई भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश बन सकते हैं। (मुख्य न्यायाधीश अनिवार्य नहीं)
👉 संशोधित प्रावधान के अनुसार आयोग में एक अध्यक्ष और दो सदस्य होते हैं।
👉 अध्यक्ष वह व्यक्ति होता है जो किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो।
👉 दो सदस्य ऐसे व्यक्तियों में से नियुक्त किए जाते हैं जिन्हें मानवाधिकारों के क्षेत्र में ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव हो।
👉 इस विन्यास का उद्देश्य आयोग को प्रभावी, संतुलित और विशेषज्ञतापूर्ण स्वरूप प्रदान करना है।

✍️ सही उत्तर है – एक अध्यक्ष एवं दो सदस्य 

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग से संबंधित निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए  

(I) यह एक स्वायत्तशासी निकाय है । 

(II) इसके पास अपना अन्वेषण दल है । 

नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए - 

[लाइब्रेरियन ग्रेड -II 16.02.2025]

  • केवल II सही है 

  • I व II दोनों सही हैं 

  • केवल I सही है 

  • न तो I ना ही II सही है 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग एक स्वायत्तशासी (Autonomous) और उच्चाधिकार प्राप्त निकाय है, जो राज्य में मानवाधिकारों की रक्षा एवं संवर्धन के लिए कार्य करता है।
👉 आयोग के पास अपना अन्वेषण दल (Investigation Agency) भी होता है।
👉 इस दल का नेतृत्व ऐसा पुलिस अधिकारी करता है जो महानिरीक्षक स्तर (IG Rank) से कम न हो।
👉 यह दल आयोग द्वारा प्राप्त शिकायतों की जाँच, साक्ष्य संकलन और सत्यापन का कार्य करता है।
👉 अतः दोनों कथन — (I) और (II) सही हैं।

✍️ सही उत्तर है – I व II दोनों सही हैं 

राजस्थान मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल एक समिति की अनुशंसा पर करते हैं, जिसका अध्यक्ष होता है 

[वरिष्ठ अध्यापक 01.05.2017]

  • विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष 

  • विधानसभा अध्यक्ष 

  • प्रभारी मंत्री, गृह विभाग 

  • मुख्यमंत्री 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
👉 यह नियुक्ति एक समिति की अनुशंसा पर की जाती है।
👉 इस समिति का अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री होता है।
👉 समिति में अन्य सदस्य के रूप में विधानसभा के अध्यक्ष, गृह विभाग के मंत्री, और विधानसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।
👉 इस प्रक्रिया का उद्देश्य आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और निष्पक्ष चयन व्यवस्था बनाए रखना है।

✍️ सही उत्तर है – मुख्यमंत्री 

राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्यों की चयन समिति की अध्यक्षता करता है - 

[वरिष्ठ अध्यापक 28.10.2018]

  • राज्य उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायमूर्ति 

  • राज्यपाल 

  • मुख्यमंत्री 

  • राज्य का मुख्य सचिव 

🔹 व्याख्या

👉 राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति एक चयन समिति की अनुशंसा पर की जाती है।
👉 इस समिति की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं।
👉 समिति में अन्य सदस्य के रूप में विधानसभा के अध्यक्ष, गृह विभाग के मंत्री, तथा विधानसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।
👉 यह समिति आयोग के पदों के लिए योग्य व्यक्तियों के नामों की संस्तुति राज्यपाल को भेजती है।
👉 इस प्रक्रिया से आयोग की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।

✍️ सही उत्तर है – मुख्यमंत्री 

निम्न में से कौन सा कथन राजस्थान मानवाधिकार आयोग के सम्बन्ध में गलत है ? 

  • यह आयोग राज्य में मार्च 2000 से क्रियाशील है । 

  • वर्तमान में इसमें अध्यक्ष सहित कुल तीन सदस्य हैं। 

  • राज्य सरकार द्वारा आयोग के गठन की अधिसूचना 1999 में जारी की गई। 

  • आयोग स्वायत्त संस्था नहीं है। 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग एक स्वायत्त (Autonomous) संस्था है, जो राज्य में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य करती है।
👉 इसे मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत गठित किया गया, जिससे इसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।
👉 आयोग का अध्यक्ष और सदस्य अपने निश्चित कार्यकाल तक स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं।
👉 अतः यह कथन कि “आयोग स्वायत्त संस्था नहीं है” गलत है, क्योंकि आयोग वास्तव में एक स्वायत्त निकाय है।
👉 यह निकाय सरकार से स्वतंत्र रहकर मानवाधिकारों की रक्षा और जांच कार्यों का संचालन करता है।

✍️ सही उत्तर है – आयोग स्वायत्त संस्था नहीं है। 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग की स्थापना किस वर्ष हुई [*]

[वरिष्ठ अध्यापक 21.02.2014]

  • 2000 में 

  • 2000 में 

  • 1995 में

  • 2001में 

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

निम्नांकित कथनों को पढ़िए और सही कथन / कथनों को नीचे दिए गए कूट में से चिंन्हित कीजिए

(a) राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग अगस्त, 2000 से क्रियाशील हुआ। 

(b) वर्तमान में, श्री अशोक कुमार गुप्ता राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के एकमात्र सदस्य हैं। 

(c) राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के 'विनियम' 2001 वर्ष से प्रभावी हुए। 

[वरिष्ठ अध्यापक (पेपर -I) 29.12.2024]

कूट –

  • केवल (a) सही है 

  • केवल (b) सही है 

  • केवल (c) सही है 

  • केवल (b) और (c) सही हैं 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन 18 जनवरी 1999 को किया गया था और यह मार्च 2000 से क्रियाशील हुआ, न कि अगस्त 2000 से।
👉 वर्तमान में आयोग में अध्यक्ष और सदस्य दोनों पद विद्यमान हैं, अतः केवल एक सदस्य वाला कथन गलत है।
👉 आयोग की कार्यप्रणाली और प्रक्रियाओं के लिए बनाए गए “राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग (प्रक्रिया) विनियम, 2001” वर्ष 2001 से ही प्रभावी हुए। 

✍️ सही उत्तर है – केवल (c) सही है 

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की निम्नलिखित में से कौन सी धारा राज्य आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित है ? 

[PTI Grade -II (RPSC) 30.04.2023]

  • 20

  • 22

  • 23

  • 21

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत राज्य मानवाधिकार आयोग से संबंधित प्रावधान अध्याय-V में दिए गए हैं।
👉 इस अध्याय की धारा 22 में राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
👉 इस धारा के अनुसार, अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा की जाती है।
👉 समिति में मुख्यमंत्री, विधानसभा के अध्यक्ष, गृह मंत्री, तथा विधानसभा में विपक्ष के नेता सदस्य होते हैं।
👉 अतः राज्य आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान धारा 22 में किया गया है।

✍️ सही उत्तर है – 22 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के संबंध में निम्नांकित में से कौन सा कथन सही नहीं है ? [*]

[वरिष्ठ अध्यापक 29.01.2023]

  • आयोग की अपनी एक निरीक्षण एजेन्सी है जिसकी अध्यक्षता एक पुलिस अधिकारी द्वारा की जाती है जो कि पुलिस अधीक्षक से नीचे के रैंक का नहीं होना चाहिए । 

  • मानवाधिकार आयोग उच्च शक्ति प्राप्त एक स्वायत्तशासी निगरानी निकाय है जो अपनी सत्ता सत्ता मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 से प्राप्त करता है । 

  • केवल किसी उच्च न्यायालय का पूर्व मुख्य न्यायाधीश ही राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है । 

  • किसी लोक सेवक द्वारा मानवाधिकार का उल्लंघन करने पर आयोग उसके जाँच की शक्ति रखता है । 

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

राजस्थान में राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया था -  

वरिष्ठ अध्यापक 2010 पेपर -I GK (उर्दू)

  • 1950 ई. में 

  • 2000 ई. में

  • 1993 ई. में 

  • 1995 ई. में 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन राजस्थान सरकार द्वारा 18 जनवरी 1999 को अधिसूचना जारी कर किया गया था।
👉 आयोग का कार्य प्रारंभ मार्च 2000 से हुआ, जब यह विधिवत क्रियाशील (Functional) बना।
👉 इसका गठन मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत किया गया था।
👉 आयोग का उद्देश्य राज्य में मानवाधिकारों की रक्षा, उन्नयन और संवर्धन सुनिश्चित करना है।
👉 अतः राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन सन् 2000 ई. में क्रियान्वित हुआ।

✍️ सही उत्तर है – 2000 ई. में 

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष की पदावधि का उल्लेख मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की निम्नलिखित में से किस धारा में किया गया है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

  • 24

  • 22 

  • 25

  • 21 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के कार्यकाल (पदावधि) का उल्लेख मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 24 में किया गया है।
👉 इस धारा के अनुसार, अध्यक्ष अपने पद ग्रहण करने की तारीख से 3 वर्ष की अवधि तक या सत्तर वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पहले हो, पद पर बना रहता है।
👉 वहीं सदस्य भी 3 वर्ष की अवधि तक पद पर रह सकते हैं, परंतु 70 वर्ष की आयु के बाद पद पर नहीं रह सकते।
👉 यह प्रावधान आयोग के कार्य में निरंतरता, दक्षता और अनुभव को बनाए रखने के लिए किया गया है। 

✍️ सही उत्तर है – 24 

राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के बारे में निम्नलिखित वाक्यों को ध्यान से पढ़िये तथा सही वाक्य चुनिए : 

[वरिष्ठ अध्यापक (ग्रुप- A) 07.09.2025]

  • आयोग की अपनी जाँच एजेन्सी है जिसका नेतृत्व न्यूनतम पुलिस महानिरीक्षक पद का अधिकारी करता है। 

  • राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग जनवरी 1995 से क्रियाशील है 

  • प्रारम्भ में इसमें एक अध्यक्ष तथा छः सदस्यों का प्रावधान रखा गया था। 

  • इसके गठन की अधिसूचना अक्टूबर 1994 में राज्य सरकार द्वारा जारी की गयी । 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के पास अपनी स्वतंत्र जाँच एजेंसी उपलब्ध है।
👉 इस जाँच एजेंसी का नेतृत्व कम से कम पुलिस महानिरीक्षक (IG) स्तर का अधिकारी करता है।
👉 एजेंसी का मुख्य कार्य राज्य में होने वाले मानवाधिकार उल्लंघनों की जाँच करना है।
👉 उच्च स्तर के अधिकारी द्वारा नेतृत्व का उद्देश्य जाँच को प्रभावी, निष्पक्ष और सक्षम बनाए रखना है।
👉 यह व्यवस्था आयोग की जाँच प्रक्रिया को विश्वसनीयता और अधिकारिक बल प्रदान करती है।

✍️ सही उत्तर है – आयोग की अपनी जाँच एजेन्सी है जिसका नेतृत्व न्यूनतम पुलिस महानिरीक्षक पद का अधिकारी करता है। 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के संदर्भ निम्नलिखित में से कौनसा कथन सही है ? 

[स्कूल व्याख्याता 21.10.2022]

  • इसे अधिनियम की धारा 35 के अनुसार वित्तीय स्वायत्तता भी प्राप्त है। 

  • राज्य सरकार ने 1 जनवरी, 1999 को मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के साथ राज्य मानवाधिकार आयोग के गठन के लिए एक अधिसूचना जारी की। 

  • इसकी कोई जांच एजेंसी नहीं है, यह सरकारी जांच पर बहुत अधिक निर्भर है। 

  • यह एक स्वायत्त निकाय है। इसके अध्यक्ष और सदस्यों का एक निश्चित कार्यकाल होता है । 

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग एक स्वायत्त (Autonomous) निकाय है, जो राज्य में मानवाधिकारों की रक्षा और संवर्धन के लिए कार्य करता है।
👉 इसकी स्थापना मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत की गई थी।
👉 आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल निश्चित होता है — 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो।
👉 इस निश्चित कार्यकाल और स्वतंत्र कार्यप्रणाली से आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है। 

✍️ सही उत्तर है – यह एक स्वायत्त निकाय है। इसके अध्यक्ष और सदस्यों का एक निश्चित कार्यकाल होता है। 

राजस्थान मानवाधिकार आयोग के कार्यक्षेत्र में सभी प्रकार के वे मानव अधिकार आते हैं जो शामिल (सम्मिलित) हैं:

A. नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार

B. आर्थिक अधिकार

C. सामाजिक एवं सांस्कृतिक अधिकार

सही उत्तर का चयन कीजिए:

सहायक आचार्य [22.09.2021]

  • केवल A एवं B

  • केवल A एवं C

  • केवल B एवं c

  •  A, B एवं C

🔹 व्याख्या

👉 राजस्थान मानवाधिकार आयोग के कार्यक्षेत्र में सभी प्रकार के मानवाधिकार सम्मिलित हैं।
👉 इसमें नागरिक और राजनीतिक अधिकार, आर्थिक अधिकार, तथा सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार शामिल हैं।
👉 आयोग इन सभी अधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और उल्लंघन की जाँच के लिए कार्य करता है।
👉 इसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को समानता, न्याय और गरिमा का अधिकार सुनिश्चित करना है।
👉 अतः आयोग के कार्यक्षेत्र में A, B एवं C — सभी अधिकार आते हैं।

✍️ सही उत्तर है – A, B एवं C 

राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ें :

कथन (I) : राज्य मानव अधिकार आयोग, मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अन्तर्गत एक स्वशासी उच्चाधिकार प्राप्त मानव अधिकारों की निगरानी संस्था है । 

कथन (II) : इसकी स्वायत्तता इसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की पद्धति, उनके निश्चित कार्यकाल और वित्तीय स्वायत्तता में निहित है । 

कथन (III) : एक पारंगत विधिवेत्ता को अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जा सकता है । 

निम्नलिखित में से सही विकल्प का चयन करें :

[Protection Officer 28.01.2023]

  • कथन (I), (II) और (III) सत्य हैं।        

  • कथन (II) और (III) सत्य हैं।

  • कथन (I) और (II) सत्य हैं।

  • कथन (I) और (III) सत्य हैं। 

🔹 व्याख्या

👉 राज्य मानवाधिकार आयोग वास्तव में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के अंतर्गत गठित एक स्वशासी (Autonomous) एवं उच्चाधिकार प्राप्त संस्था है।
👉 इसका उद्देश्य राज्य में मानवाधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और उल्लंघन की जाँच करना है।
👉 आयोग की स्वायत्तता इसके अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया, उनके निश्चित कार्यकाल, और वित्तीय स्वतंत्रता में निहित है।
👉 अध्यक्ष केवल उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहा व्यक्ति हो सकता है, न कि सामान्य विधिवेत्ता। 

✍️ सही उत्तर है – कथन (I) और (II) सत्य हैं। 

मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की निम्नलिखित में से किस धारा में राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति के प्रावधान का उल्लेख है ? 

[वरिष्ठ अध्यापक 12.02.2023]

  • 21 

  • 23 

  • 22 

  • 24

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में राज्य मानवाधिकार आयोग से संबंधित प्रावधान अध्याय-V में दिए गए हैं।
👉 धारा 22 में राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।
👉 इस धारा के अनुसार, अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा की जाती है।
👉 समिति में मुख्यमंत्री, विधानसभा के अध्यक्ष, गृह विभाग के मंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता सदस्य होते हैं।
👉 अतः राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति का प्रावधान धारा 22 में किया गया है।

✍️ सही उत्तर है – 22 

राजस्थान मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष है [*]

[वरिष्ठ अध्यापक 2011]

  • न्यायाधीश दिलीपसिंह 

  • गिरिजा व्यास 

  • आर. एन. माथुर 

  • न्यायाधीश राजेश बालिया 

📌 नोट : यह प्रश्न परीक्षा बोर्ड द्वारा डिलीट माना गया है। 

निम्नांकित में से कौन राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति हेतु अधिकृत है ? 

[RAS Pre. 27.10.2021]

  • मुख्य सचिव स्तर का अधिकारी 

  • प्रमुख समाज सेवी व्यक्ति

  • उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश 

  • पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी 

🔹 व्याख्या

👉 मानवाधिकार संशोधन अधिनियम 2019 के बाद, राज्य मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष केवल सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश ही नहीं, बल्कि उच्च न्यायालय का कोई भी सेवानिवृत्त न्यायाधीश बन सकता है। कार्यकाल: 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष, पुनर्नियुक्ति का प्रावधान।
👉 यह प्रावधान मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 21(2) में किया गया है।
👉 इस धारा के अनुसार आयोग की संरचना में एक अध्यक्ष और दो सदस्य होते हैं।
👉 अध्यक्ष का उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहना आयोग की न्यायिक निष्पक्षता और गरिमा सुनिश्चित करता है।
👉 अतः अध्यक्ष पद के लिए उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश ही नियुक्ति हेतु अधिकृत होता है।

✍️ सही उत्तर है – उच्च न्यायालय का न्यायाधीश